सोनू से ननदोई तक-3
दो दिन बाद की बात है, मेरी चाची के पिता जी परलोक चले गए।
मेरे सभी घर वाले वहीं चले गए, सबका जाना बनता ही बनता था इसलिए। उस दिन तो भाभी को भी जाना पड़ा।
उधर खेतों में सीरी(नौकर) काम कर रहे थे, मुझे दिन में दो बार उनको खाना, चाय आदि बना कर भेजनी थी।
दोपहर का वक़्त था, मैं घर मेंअकेली थी, किस्मत माड़ी(बुरी) थी कि सोनू गाँव में नहीं था, उसके साथ फ़ोन पर लगी पड़ी थी।
दरवाज़ा खुला था, सोनू से फ़ोन पर सेक्सी बातें करते हुए मेरा एक हाथ सलवार में था।
तभी हमारा एक सीरी खाना लेने आया, उसका नाम था काला !
उसने मुझे इस तरह अपनी चूत में उंगली करते देख अपना औज़ार निकाल कर पकड़ लिया।
जैसे ही मेरी नजर उस पर पड़ी, मैं घबरा सी गई, उसके सामने ही सलवार से हाथ निकाला।
वो हल्की-हल्की हँसी हंसने लगा।
मैं शर्म से लाल हो रही थी।
वो बोला- वो खाना ?
मैंने उत्तर दिया- बाहर बैठो ! देती हूँ !
वो बोला- क्या देती हो? जो फ़ोन पर दे रही थी या उस दिन नहर वाले गन्ने के खेत में दे रही थी?
क्या भौंक रहे हो कुत्ते जैसे?
भौंक नहीं रहा, आँखों देखा हाल सुना रहा हूँ ! लगता है जवानी सम्भल नहीं रही ! बिल्कुल अपनी माँ-चाची पर गई है।
हरामजादे चुप कर !
बताता हूँ तेरे बाप को कि यह सोनू के साथ खेतों में जाती है।
मैं थोड़ा घबरा गई- ऐसा मत करना !
हमें क्या मिलेगा?
मैंने सोचा- नंदिनी तेरी फुद्दी में इस वक़्त सोनू ने चिंगारी लगा दी है, उस पर क्यूँ न काले का घी डलवा लूँ !
मैं होंठ चबाती हुई काले को देखती हुई बोली- क्या लोगे? आओ ! बताओ !
वो खुश हो गया- तेरी फुद्दी मारूंगा और क्या !
तू बहुत कमीना है !
कुण्डी लगा और कमरे में आ जा !
जब तक वो आता, मेरी कमीज़ उतर चुकी थी, उस दिन मैं लाल रंग की ब्रा पहने थी, उसमें कैद कबूतर देख काले के पजामे का तंबू बन चुका था।
उसने मुझे दबोच लिया, कभी सोचा नहीं होगा उसने कि कभी मेरी गोरी-गोरी फुद्दी मारेगा वो !
उसने मेरी सलवार खोल दी, नीचे कुछ नहीं था, वो अपना हाथ मेरी पहले से ही गीली फुद्दी पर फेरने लगा, मैं और गर्म हो गई।
वो मेरी ब्रा उतार पागलों जैसे मेरे मम्मे दबाने लगा, मेरे चुचूक अपने मुँह में लेकर चूसने लगा था।
मैं भी उसकी दीवानी होने लगी।
मैंने उसका पजामा खोल दिया- हाय ! यह क्या है ?
काले का लौड़ा इतना लंबा था, मोटा था कि जैसे नाग उसके पजामे में कैद हो ! और उसकी पटारी खोलते वो फन फ़ैलाने लगे !
मेरे मुँह से निकला- मेरी बहुत नाज़ुक सी फुद्दी है काले ! यह मेरी फाड़ देगा।
बहन की लौड़ी ! मेरी बीवी इसको पूरा ले जाती है, तेरी चाची इसकी दीवानी है, मर्द का औज़ार जितना बड़ा हो औरत को उतना सुख मिलता है ! ले चूस के पूरा मजा ले ले !
चूसते चूसते वो इतना आकार ले गया कि चूसना मुश्किल होने लगा।