मेरा गुप्त जीवन- 14
फुलवा को गर्भ ठहर गया
अब ढलती उम्र में कभी कभी सोचता हूँ कि यह कैसे संभव हुआ कि मेरी हरकतों को बारे में मेरे माँ और पिता को कभी कोई खबर नहीं लगी.
यह सब शायद पहले कम्मो और बाद में चम्पा की होशियारी के कारण संभव हुआ। दोनों बहुत ही सतर्क रहती थी कि कभी भी हवेली में काम करने वाला नौकर या नौकरानी के मन में उठ रहे संशय को फ़ौरन दबा दिया जाये।
चम्पा का कहना था कि वो समय समय पर सब को यही कहती थी कि छोटे मालिक रात को बहुत डर जाते हैं तो किसी का उनके साथ सोना बहुत ज़रूरी था। यह कहानी इतनी प्रचलित कर दी गई कि कम्मो और फिर चम्पा का मेरे कमरे में सोना एक साधारण बात बन गई और छोटे मालिक की भलाई के लिए ही मालकिन ने यह उचित समझा है।
और फिर छोटे मालिक एक सीधे साधे लड़के हैं और उनको दुनिया दारी का कुछ भी ज्ञान नहीं।
इस बात को मेरे कमरे में रहने वाली सारी नौकरानियों के दिल में बिठा दी जाती थी और अपने शारीरिक सुख को जारी रखने के लिए ये बातें वो बार बार दोहराती थीं।
उधर मैं भी कम्मो चम्पा और अब फुलवा को बिना मांगे थोड़ा बहुत धन दे दिया करता था। जैसे कम्मो को हर महीने 100 रुपया देता था जो उसकी पगार के अलावा होता था। इसी तरह चम्पा और अब फुलवा को भी इतने ही पैसे हर महीने दे दिया करता था।
मेरी मम्मी हर महीने मुझको हज़ार रुपया जेब खर्चे के लिए देती थी और मैं जहाँ तक हो सके इन लोगों की मदद कर दिया करता था। यही हाल स्कूल में भी था, मैं हर एक दोस्त की मदद कर दिया करता था, वो सब मेरे अहसानों तले दबे रहते थे और मेरा बड़ा आदर करते थे।
शायद यही आदत मुझ को कष्टों से बचा लेती थी।
अब हर रात को हम तीनों चुदाई का यह खेल खेलते थे। कभी चम्पा नीचे होती थी और मैं उसके ऊपर और फुलवा मेरे ऊपर।
चम्पा ने नीचे से मारा गया हर धक्का मेरे ऊपर लेटी फुलवा मुको धक्का मार कर जवाब देती थी। नीचे से चम्पा और ऊपर से फुलवा के धक्कों के कारण चम्पा जल्दी ही झड़ जाती और तब फ़ोरन चम्पा अपनी जगह फुलवा को दे देती और मैं फिर उन दोनों के बीच में ही रहता।
जब दो दो बार दोनों झड़ गई तब मेरा एक बार फ़व्वारा छूटा लेकिन मैं अपना लंड फुलवा की चूत में ही डाले लेटा रहा।
मेरा लंड उसकी चूत में पूरा खड़ा था और वो धीरे धीरे नीचे से धक्के मारती रही। चम्पा एक हाथ से मेरे अंडकोष पकड़ रही थी और दूसरे की ऊँगली मेरी गांड में डाल रखी थी। उन दोनों के ऐसा करने से मुझ को बड़ा आनन्द आ रहा था।
और फिर एक दिन हम तीनों आसमान में उड़ते हुए ज़मीन पर आ गिरे।
उस रात मैं उन दोनों को चुदाई का नया तरीका सोच रहा था की वो दोनों मुंह लटकाये कमरे के अंदर आई।
मैंने पूछा- क्या बात है?
दोनों चुप रहीं और फिर मेरे दोबारा पूछने पर चम्पा बोली- फुलवा को गर्भ ठहर गया है।