बीमारी ने दिलायी प्यासी भाभी की चूत-3
दोस्तो, कहानी के पिछले भागबीमारी ने दिलायी प्यासी भाभी की चूत-2
में आपने पढ़ा कि मैं काम के सिलसिले में हैदराबाद गया था. वहां एक रात अचानक मेरी तबीयत खराब हो गयी. वहां मैं एक महिला से मिला और रात उसके साथ बिताने के बाद जब सुबह मैं निकलने लगा तो वो बोली कि अब तुम यही मेरे साथ मेरे घर पर ही रहोगे. मुझे भी केवल 2-3 दिन का काम बाकी था तो मैंने कहा कि ठीक है, तुम परेशान मत हो मैं शाम को आ जाऊंगा. लेकिन वो नहीं मानी और मेरे साथ जा कर मेरा सामान ले कर आ गयी.
अब आगे:
शाम को काम के बाद जब मैं 6 बजे घर पहुंचने वाला था. तो मैंने उसे फोन किया कि वो कहां है और कितने बजे तक घर आएगी. उसी समय मैं भी वापस आ जाऊंगा.. तब तक मैं किसी बार में बैठता हूँ.
वो बोली- तुम मेरी चिन्ता मत करो, मैंने इन्तजाम कर दिया है. तुम कभी भी घर पहुंचो, तुमको घर खुला मिलेगा.
मेरे पूछने पर वो बोली- मैंने अपनी काम वाली को बोल दिया है और वो शाम 4 बजे से 8 बजे मेरे आने तक तुम्हारा ख्याल रखेगी.
मैंने सोचा कि चलो कोई बात नहीं केवल दो घन्टे की तो बात है, काट लेंगे.
जब मैं घर पहुँचा तो घर का दरवाज़ा खुला था लेकिन फिर भी मैंने घन्टी बजायी. तो एक 22-24 साल की लड़की बाहर आयी और उसने मेरे बारे में पूछा.
मैं बोला- मेमसाब ने बताया होगा कि मैं आने वाला हूँ.
तो वो बोली- ओके ओके … वो आप हैं उनके दोस्त. आइये आइये मैं आपका ही इन्तज़ार कर रही थी.
मैं चौंक गया और मैंने पूछा- मेरा इन्तज़ार क्यों?
तो वो अचकचा कर बोली- व्वो … मेरी चाय पीने की बहुत इच्छा हो रही थी और मैं अभी सोच ही रही थी कि आप आ गए, सच में बहुत सही समय पर आए हो.
खैर मैं उसे बोल कर कि ‘चाय बना लो’ अन्दर फ़्रेश होने चला गया. लेकिन होटल की आदत बहुत खराब होती है, मतलब मैं बिना तौलिए के ही चला गया. नहाने के बाद जब मैंने तौलिया खोजा, तो याद आया कि ये तो किसी का घर है और खुद अपना तौलिया लाना था.
पहले सोचा कि उसे आवाज़ लगा कर उससे मंगा लूँ, लेकिन फिर सोचा कि छोड़ो, वो तो किचन में है, मैं जल्दी से बाहर जा कर ले लेता हूँ.
बाथरूम तो उसी कमरे में था, जिसमें मेरा सामान रखा था. तो मैं थोड़ा पानी झाड़ कर बाहर निकला और तौलिया खोजने लगा, लेकिन किस्मत मेरी कि उस कमरे में कोई तौलिया ही नहीं था.
अब मैं जब तक वापस गुसलखाने में जाता, वो कामवाली लौंडिया कमरे आ गयी और मुझे नंगा देख कर हंसने लगी.
मैंने कहा- अन्दर तौलिया नहीं था तो ऐसे आना पड़ा.
वो बोली- मैंने बाहर सुखाये हैं, मुझे आवाज़ लगा देते, मैं दे देती.
मैंने देखा कि जब वो नहीं शर्मा रही तो मैं क्यों शर्माऊं … और वो डबल मीनिंग वाली बात बोल रही है.
मैं उससे बोला- तो अब दे दे.
वो आँख मटका कर बोली- क्या?
मैंने कहा- जो तू देने की कह रही थी.
वो बोली- मैं तो चाय की बात कह रही थी.
मैंने भी सोचा कि कहां इसके चक्कर में पड़ना. मैं उससे बोला- जा और जा कर तौलिया ले आ.
वो बोली- तौलिये तो अभी सूखे नहीं हैं.
यह कहते हुए उसने चाय के कप मेज़ पर रख दिए और झुक कर अपनी गांड हिलाने लगी.
मैं समझ गया कि इसके मन में कुछ तो चल रहा है. तो मैं उसके पीछे गया और उससे चिपक कर अपना शरीर उसके लहंगे से पौंछने लगा. जब मेरी टांगें पुंछ गईं, तब तक तो कोई बात नहीं थी, लेकिन जब मैं उसका लहंगा उठा कर ऊपर का शरीर पौंछने लगा तो मेरा लंड उसकी गांड से टच कर गया.
वो ईईइश्श्श्स्श … करते हुए बोली- साब क्या कर रहे हो.. नीचे कुछ चुभ रहा है.
मैं बोला- एक तो तौलिया नहीं दिया और फिर झुक कर गांड हिलाती है. जब पहले लहंगा उठा कर टांगें पौंछी, तब कुछ नहीं बोली, तो अब क्यों बोल रही है?
वो बोली- मेमसाब आने वाली होंगी.
मैंने कहा- ओह तो ये बात है मेमसाब का डर लग रहा है. वो तो अभी और 1 घन्टे नहीं आने वाली.
वो बोली- अगर पानी पौंछ लिया हो तो मैं अपनी चाय पी आऊं.
मैं चौंक गया कि ये क्या चीज़ है … पल पल में रंग बदल रही है. मैंने एक हल्का सा नीचे से धक्का मारा और कहा- जा अपनी चाय यहीं ले आ.
वो बोली- क्यों?
मैंने कहा- चाय में दूध कम है … ताज़ा दूध डाल कर पीने में मज़ा आएगा.
वो बोली- अभी ताज़ा दूध नहीं आता.
मतलब वो भी पूरी गुरु थी.
मैंने कहा- फिर कब आता है?
तो बोली- अभी आने में बहुत टाइम है.
मैंने भी कहा- कभी कोशिश करी?
तो बोली- बहुत बार.
अब मैं समझ गया था कि ये अपने दूध के बारे में ही बोल रही है.
तो मैंने कहा- मैं भी आज कोशिश कर के देख लेता हूँ.
वो हंसने लगी और बोली- फिर थक जाओगे और फिर रात को कुछ खा नहीं पाओगे.
मैंने कहा- तू पहले चाय तो ले आ.
अब तक मैं कपड़े पहन चुका था तो वो जोर से सांस लेते हुए बोली- लोग केवल बोलते रहते हैं और कपड़े पहन कर कमरे में बैठे रहते हैं.
यह बोल कर हंसती हुई भाग गयी.
मैंने कोई जल्दबाज़ी नहीं की और आराम से चाय पी और फिर वहीं पलंग पर लेट गया.
थोड़ी देर में वो आयी और बोली- क्या हुआ .. दूध नहीं निकालना?
मैंने कहा- अभी थोड़ा थका हुआ हूँ. कुछ देर आराम कर लूँ, फिर देखते हैं.
वो बोली- फिर तो मेमसाब आ जाएंगी फिर मेरी तरफ़ थोड़ा देखोगे?
मतलब उसे भी नीचे आग लगी हुई थी.
मैंने कहा- फिर पहले मेरी थोड़ी मालिश कर दे.
वो बोली- ठीक है.
वो भाग कर तेल ले कर आ गयी. मैंने निक्कर और टी-शर्ट पहनी थी.
वो बोली- इनको उतार दो … नहीं तो तेल लग जाएगा.
मैंने कहा- खुद उतार दे.
उसने एक झटके में मेरा निक्कर निकाल दिया और दूसरे झटके में टी-शर्ट उतार दी.
मैंने कहा- बहुत जल्दी है?
तो बोली- हां है तो.
मैंने कहा- अपने कपड़े निकाल दे … नहीं तो ये तेल में खराब हो जाएंगे.
वो बोली- मेरे कपड़ों की इतनी चिन्ता है तो खुद निकाल दो न.
मैंने कहा- मुझे क्यों चिन्ता होती, मत उतार.
मैं लेट गया.
वो बोली- बहुत गन्दे आदमी हो … पता नहीं मेमसाब ने क्या देखा और घर ले आयीं.
फिर उसने अपना लहंगा निकाल कर मेरे सामने ही एक पतली सी चुन्नी बाँध ली और मुझसे थोड़ा गुस्से में बोली- पीठ ऊपर कर के लेट जाओ.
मैं कन्धे और घुटनों पर हो गया तो वो जोर से हंसी और बोली- ये मेरी पोजीशन है … मुझे आती है, तुम आदमी की तरह लेट जाओ.
मैंने कहा- बहुत मज़ाक हो गया.
मैं एकदम से पलटा और उसे बांहों में लेकर अपने नीचे लिटा लिया. अब मैं बोला- बहुत देर हो गयी दोअर्थी बात करते हुए … अब बता कौन सी पोजीशन पसन्द है.
वो बोली- छोड़ो मुझे … वरना मैं चिल्ला दूँगी.
मैंने कहा- कोई बात नहीं … लोगों को देखने दे कि तू इतनी पतली चुन्नी बाँध कर मेरे कमरे में क्या करने आयी थी.
वो खुल कर बोली- गांड मराने आयी थी … पर बोल दूंगी कि इनका खड़ा ही नहीं होता है.
मैंने कहा- साली, एक बार नीचे हाथ कर के देख ले, कहीं तेरी बात झूठी न हो जाए.
उसने हाथ नीचे किया और बोली- अरे बाप रे … इत्ता बड़ा!
उसने दूसरे हाथ से मेरी गर्दन पकड़ कर होंठों से होंठ चिपका दिए. वो एक तरफ़ ज़ोर से होंठ चूस रही थी और दूसरी तरफ़ मेरे लंड को पकड़ कर दबा रही थी.
मैं भी कहां पीछे रहने वाला था, मैं उसके कुर्ते के अन्दर हाथ डाल कर उसकी चुच्ची जोर के मसलने लगा. चुच्ची मसलते ही उसने होंठ छोड़े बिना अपनी कमर का धनुषबाण बना दिया. मैं तो नंगा था ही.. और उसकी चुन्नी बहुत छोटी और हल्की सी थी.