मेरी सहयोगी ने मुझे ब्लैकमेल किया
Meri Sahyogi ne Mujhe Blackmail Kiya Sex Kiya
मैं एक 25 वर्षीय पुरुष हूँ, मैं सात्विक हिंदू हूँ यानि मांस, मछली, शराब, तम्बाकू आदि से दूर हूँ।
मैं तीन साल पहले अपनी नौकरी के लिए कोलकाता चला गया।
वहाँ मेरे ही ऑफ़िस में अनायास ही मेरे साथ पढ़ने वाली युवती से मुलाकात हुई वह मुझसे एक साल छोटी है, वह एक बंगाली लड़की है।
वो लड़की उसी ऑफ़िस में कार्यरत है।
यहाँ कोलकाता में और मेरे कार्यालय में मेरे लिये माहौल बहुत सहज नहीं है। सबसे पहले मैं शुद्ध शाकाहारी हूँ, तो भोजन एक समस्या थी। दूसरे आसपास के ज्यादातर सहयोगी बंगाली थे तो भाषा एक समस्या है, क्योंकि मुझे लोगों के साथ बातचीत में दिक्कत होती है।
पर वो युवती अपने पिता की तबादले वाली नौकरी के कारण लंबे समय के लिए कोलकाता से बाहर रही है और हिंदी भाषा में ठीक है तो मैं ज्यादातर उसके माध्यम से बात अपने सहयोगियों से अपनी बात कहने लगा।
जल्द ही, हम दोनों के बीच अच्छी दोस्ती विकसित हो गई और एक साथ अक्सर बाहर जाना भी शुरू कर दिया।
इस सब के कारण उस लड़की के मन में मेरे लिए भावनाएँ पैदा होने लगी और वो मुझे चाहने लगी।
लेकिन मैं एक कट्टर पृष्ठभूमि से हूँ, इसलिए मैं ऐसे किसी भी रिश्ते में पड़ना नहीं चाहता था।
एक वर्ष के बाद, उसने मेरे जन्मदिन पर मेरे सामने अपने प्यार का इज़हार किया और कहा कि उसका परिवार भी मुझे स्वीकार कर लेगा।
जब मैंने उसे बताया कि मेरे लिये उसका यह प्रस्ताव स्वीकार करना सम्भव नहीं तो वह थोड़ी पागल सी हो गई और मुझे थप्पड़ मारा। फिर वह वहाँ से चली गई।
उसने कुछ दिनों के लिए मुझसे बात करना बंद कर दिया और कार्यालय में भी बातचीत बन्द रही।
एक या दो सप्ताह के बाद मैंने सम्बन्ध सुधारने की दृष्टि से खुद उसे फोन किया और उसने फोन उठाया।
मैंने कहा कि उस दिन के लिए मैं माफी चाहता हूँ, और फिल्म के लिए उससे पूछा।
वह मेरे साथ फ़िल्म देखने जाने तो तैयार थी और धीरे धीरे हमने सामान्य होने की कोशिश की।
यह कुछ महीने के लिए सही चलता गया।
शनिवार को एक दिन उसने मुझे फोन किया और कहा कि उसकी सहेली का जन्मदिन है और वह मुझे भी अपने साथ ले जाना चाहती है।
मैं उसके साथ जाने को राजी था और हम दोनों उसकी सहेली के घर गए।
उसकी सहेली अकेली एक फ्लैट में रह रही थी, वह भी बंगाली थी।
जब हम उसके घर पहुँचे तो वहाँ हमारे अलावा और कोई नहीं था।
मैं हैरान था, मैंने अन्य मेहमानों के लिये पूछा तो बताया कि और लोग भी आने ही वाले है, कहा कि हम सबसे पहले पहुंच गए।
हम बैठे थे और उन दोनों ने बंगाली में बात कर शुरू किया।
तब वे दोनों रसोई में अंदर गई, मैं हॉल में बैठा हुआ था।
वे पीने के लिए जूस लाई, उन्होंने मुझे एक गिलास दे दिया, मैंने जूस पिया। मुझे जूस का स्वाद कुछ अजीब सा लगा पर मैइंए उसे नजर अन्दाज कर दिया।