मेरी चालू बीवी-43
इमरान
मदन लाल पूरा घाघ आदमी था- अरे नीलू मेमसाब कहाँ हैं साब… कॉफ़ी ठंडी हो जायेगी।
ओ बाप रे ..
साले ने मेज पर रखे कपड़े देख लिए थे… उसके होंठों पर एक कुटिल मुस्कान थी…
मैं जरा आवाज में कठोरता लाते हुए- तुझे मतलब? ..अपना काम कर… वो बाथरूम में है…
मदन लाल- व्व… व…व…वो साब यहाँ उनके कपड़े…??
मैं- हाँ वो अपनी ड्रेस ही बदलने गई है… और तू अपना काम से मतलब रखा कर… समझा?
मेरी हालत ख़राब थी, मैं इधर मदन लाल को समझाने में लगा था और नीचे नीलू हंस भी रही थी और मेरे लण्ड को नोच या काट भी रही थी..
मैं कुछ भी रियेक्ट नहीं कर पा रहा था.. समझ नहीं आ रहा था कि कैसे खुद को रोकूँ..
मगर थैंक्स गॉड.. मदन लाल बाहर चला गया..
मुझे नीलू पर इतना गुस्सा आ रहा था कि मैंने तुरंत उसको मेज के नीचे से निकाला और मेज पर लिटा दिया… उसकी दोनों टांगों को फैलाकर.. सीधे उसकी पूरी चूत अपने मुँह में भर ली और दांतों से काटने लगा..
अब मचलने की बारी नीलू की थी.. वह बुरी तरह सिसकार रही थी और अपनी कमर हिलाये जा रही थी।
मैं अपने दोनों हाथों की मुट्ठियों में उसके चूतड़ों को पकड़ कस कस कर दबाने लगा तो जरा सी देर में नीलू की हालत बुरी हो गई, वो छोड़ने के लिए मिन्नतें करने लगी…
नीलू: नहींईइइइइ… छोड़ दीजिये ना.. आह्ह्ह्ह्ह्हाआआ… नहींईइइ… आआअ… अब्बब्बब नहींई अह्ह्ह…
मैंने उसको उसी अवस्था में रखा और अपनी पैंट खोल दी, मेरी पैंट नीचे मेरे जूतों पर जाकर ठहर गई..
मैंने अंडरवियर भी नीचे घुटनों तक उतार अपने मस्ताने लण्ड को आज़ाद किया और नीलू की मेरे थूक से गीली चूत के छेद पर टिका एक ही बार में अंदर ठोक दिया…
ठक की आवाज से लण्ड पूरा चूत की जड़ तक चला गया।
पिछले 24 घंटे में यह चौथी चूत थी जिसमें मेरा लण्ड प्रवेश कर रहा था…
मगर शायद आज किस्मत उतनी अच्छी नहीं थी, अभी लण्ड ने जगह बनाई ही थी कि एक बार फिर…
ठक ठक… ठक ठक…
दरवाजे पर फिर दस्तक हुई…
और इस बार कोई महीन आवाज थी…
ओह रोज़ी… मर गए… मैं तो भूल ही गया था…
अब क्या होगा..??
नीलू को पहले भी ऑफिस में मैंने कई बार चोदा था…
मगर हमेशा दोपहर के बाद या फिर शाम को…
मैं हमेशा यह ध्यान रखता था कि अब कोई नहीं आने वाला है, और सभी कार्य निबटने के बाद ही उसको चोदता था..
मगर आज तो सुबह आते ही यह कार्यक्रम सेट हो गया था…
इसीलिए हद हो गई यार…
पहले मदन लाल नीलू के कपड़े देख गया…
ना जाने क्या क्या सोच रहा होगा…
और अब बिल्कुल नई स्टाफ, वो भी शादीशुदा.. दरवाजे के बाहर खड़ी थी..
नीलू पूरी नंगी अपनी टाँगें फैलाये मेरी मेज पर लेटी थी…
और मैं लगभग नंगा..
पैंट और अंडरवियर दोनों मेरे जूतों पर पड़े रो रहे थे..
मेरा लण्ड जड़ तक नीलू की चूत में घुसा था..