मेरी चालू बीवी-85
सम्पादक – इमरान
‘लगता है नीलू के फोन की बैटरी डाउन हो गई इसीलिए मुझे भी कॉल नहीं कर पाई।’
रोजी- हाँ सर, यही लगता है… मैं भी कोशिश कर रही थी पर नहीं लग रहा… कोई काम हो तो बता दीजिये सर, मैं कर देती हूँ।
मैं- अरे नीलू वाला काम तुम नहीं कर पाओगी।
वो बिना सोचे समझे बोल गई- क्यों नहीं कर पाऊँगी सर…? आप बोल कर तो देखिये?
मैं हंसने लगा- हा हा हा…
अब उसका चेहरा देखने लायक था, वो समझ गई कि मैं किस काम के लिए कह रहा था, मगर उसमें कुछ गुरुर के भाव भी थे जो उसको झुकने नहीं दे रहे थे इसलिए उसने अब भी हामी भरी- अरे, आप हंस क्यों रहे हैं… मैं नीलू से कमजोर नहीं हूँ… ऑफिस का कोई भी काम कर सकती हूँ।
मैं उसकी बातों का मंतव्य समझते हुए ही उससे खेलने की सोचने लगा, रोजी के मासूम चेहरे को देखते हुए मैं सोच रहा था कि इसको बहुत प्यार से टैकल करूँगा।
इस समय वो बहुत मासूम लग रही थी, मैंने रोजी के साथ ऑफिस के काफ़ी कामों के बारे में चर्चा की, नीलू ने उसको सभी कार्य बहुत अच्छी तरह समझा दिए थे और सबसे बड़ी बात वो आसानी से सब समझ गई थी, उसने सभी काम अच्छी तरह किये थे।
मुझे बहुत ख़ुशी हुई कि चलो मुझे एक और कर्मी अपने काम करने के लिए मिल गया था।
अब मेरी ऑफिस की चिंता कुछ और कम हो जाने वाली थी, नीलू और रोजी मिलकर मेरे सारे काम आसानी से कर सकती थीं। नीलू ने तो पूरी ज़िंदगी शादी ना करने की कसम खाई थी, उसने कई बार मुझसे कहा था कि वो ऐसे ही काम करती रहेगी, मेरी बीवी की तरह ही रहेगी और ऑफिस में काम करती रहेगी।
अब रोजी भी उसी तरह काम सँभालने को राजी थी, भले ही उसकी शादी हो गई थी पर वो लम्बे समय तक काम कर सकती थी, मैं उस पर भरोसा कर सकता था।
अब अगर वो नीलू की तरह ही मेरे मस्ती में भी साथ देने लगे तो मजा आ जाये, ऑफिस के काम करते हुए मैं रोजी से थोड़ी बहुत छेड़छाड़ भी करने लगा जिसका वो बुरा नहीं मान रही थी।
एक बार मुझे कुछ बताने के लिए जब वो मेरे बराबर में खड़ी थी, मैंने नीलू की तरह ही उसके गोल मटोल चूतड़ों पर हाथ रख दिया।
यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
उसने तिरछी नजरों से मुझे देखा और बोली- सर आपके हाथ फिर से गलत प्रॉपर्टी पर जा रहे हैं।
मैंने मुस्कुराते हुए उसके चूतड़ों के चारों ओर अपनी हथेली को घुमाया और बोला- दूसरे की प्रॉपर्टी कैसे? मेरे ऑफिस में जो भी है, वो तो मेरी प्रॉपर्टी हुई, नीलू ने तो कभी ऐसा नहीं कहा…
मेरी होंटों पर एक मुस्कान थी पर वो थोड़ा अलग हटकर खड़ी हो गई। मेरा हाथ उसके चूतड़ों से हट गया पर इस दौरान मैंने महसूस किया था कि उसने कच्छी नहीं पहनी है।
पतली सी साड़ी और पेटीकोट जो उसने इतने कसकर बांधे थे कि चूतड़ों पर पूरी तरह कसी थी।