सहकर्मी से प्यार और चूत चुदाई
नमस्कार, मेरा नाम मनीष है, दिल्ली का रहने वाला हूँ, मेरा कद 5’6″ है. मेरे लण्ड का साइज साढ़े छह इंच है।
जब मैंने अन्तर्वासना की कई कहानियाँ पढ़ीं.. तो मेरा भी मन अपनी कहानी लिखने का हुआ।
मैं आपको अपनी पहली सेक्स कहानी सुना रहा हूँ।
बात उन दिनों की है.. जब मैं एक कॉल सेन्टर में काम करता था, मेरे साथ कई लड़के लड़कियाँ काम करते थे।
उनमें से एक थी नीलम… नीलम का कद 5 फुट 2 इंच, वक्ष पूरे उभार लिए हुए, रंग दूध जैसा और चूतड़ एकदम गोल थे। कुल मिला कर उसका फिगर 34-32-36 का होगा।
नीलम को देखते ही मुझे उससे प्यार हो गया था, उसे देख कर लगता.. मानो आसमान से कोई अप्सरा उतरी हो।
उसकी मखमली देह.. नशीली आंखें.. किसी को भी एक नजर से ही दीवाना बना दे।
ट्रेनिंग में भी हम दोनों साथ में थे जिससे हम दोनों काफी घुल मिल चुके थे।
किस्मत से वो मेरी टीम में काम करती थी।
मैं नीलम को प्यार करने लगा था और उसको चोदना चाहता था।
पर इतना घुलने मिलने के बावजूद भी मुझे कुछ सूझ ही नहीं रहा था कि कहाँ से प्यार की बात शुरू करूँ।
फिर एक दिन मैंने हिम्मत की और नीलम के पास गया, उसको बोला- नीलम, मुझे कुछ कहना है पर समझ नहीं आ रहा कि कैसे कहूँ! नीलम ने कहा- बोलो ना, क्या कहना है?
मैंने बहुत हिम्मत करके बोल दिया- नीलम, मुझे तुमसे प्यार हो गया है।
नीलम ने कोई जवाब नहीं दिया और अगले दो दिन तक वो ऑफिस नही आई।
उसके अगले दिन उसका फोन आया और उसने मुझे अपने घर पर आने को कहा।
उसकी आवाज में कुछ शरारत थी, मुझे लगा कि आज मेरी मनोकामना पूरी हो जाएगी।
ऑफिस की छुट्टी होते ही मैं नीलम के घर निकल पड़ा।
घर पहुँचते ही नीलम की मेड ने दरवाज़ा खोला और कहा- मैडम ऊपर हैं।
मैं सीढ़ियों से ऊपर गया और नीलम के कमरे का दरवाज़ा खटखटाया।
नीलम ने दरवाज़ा खोला तो मैं नीलम को देखता ही रह गया, नीली पारदर्शी नाइटी में उसका मखमली जिस्म देखकर मेरा लंड मेरी पैंट में ही उफान मारने लगा।
जैसे ही मैं कमरे में घुसा, नीलम ने मुझे सीने से चिपका लिया और मेरे होंठ चूसने लगी, मैं भी नीलम के होठों का रसपान करने लगा।
मेरा एक हाथ नीलम के चूचों पर था और दूसरा हाथ उसकी कमर पर!
नीलम के चूचे मेरे हाथों के स्पर्श से कठोर हो गये थे और वो भी मेरे लंड को सहला रही थी।
नीलम पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी।
मैंने नीलम की नाइटी उतार दी, नाइटी उतारते ही उसका संगमरमर सा बदन क्या लग रहा था। उसके चूचे जैसे कह रहे हों कि इनका सारा दूध पी जाओ।
मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया और उसके ऊपर लेट कर उसके मम्मे चूसने लगा।
वो सिसकारियाँ लेने लगी- उह.. आह.. उम्म.. आह..
उसने काली जालीदार पैंटी पहनी हुई थी।
उसमें उसकी दोनों फांकें फूल कर आकार ले चुकी थीं।
मैंने उसकी पैन्टी उतारी, उसकी चूत की शेव अभी ताजी-ताजी ही हुई थी..