कल्लो रानी की काली चूत की लाली
Choot Ki Lali Kallo Rani Ki
यह कहानी मेरे मित्र की है.. और उसी के आग्रह पर मैं भेज रहा हूँ। नाम स्थान आदि बदल दिए गए हैं।
कहानी को मेरे दोस्त के शब्दों में ही लिख रहा हूँ, आप कहानी का आनन्द लीजिए।
मेरा नाम पुष्पेंद्र है.. मैं शरीर में चौड़ा लंबा हूँ। मेरे दोस्तों ने किताबों, एलबम के माध्यम से तथा अपनी चुदाई की कहानियों के माध्यम से मुझे बुर और लंड के खेल से अच्छी तरह परिचित करवा दिया था।
मेरा घर किराए का था। जब हम दोनों दोपहर में खाली होते तो मेरे घर पर ब्लू-फिल्म देखते थे।
मेरे घर के बगल में कल्लो का घर था, वो तीन बच्चों की माँ थी.. पर भरे हुए कामुक शरीर की मालकिन थी। वो बहुत खूबसूरत नहीं थी.. लेकिन पैसे लेकर अपनी बुर को चुदवाती थी।
एक दिन मैं और मेरा मित्र सुदर्शन घर में ब्लू-फिल्म टीवी की आवाज बंद करके देख रहे थे, तभी कल्लो मेरे घर बर्फ माँगने आई।
हम दोनों बुरी तरह गर्म हुए पड़े थे।
मैंने उससे बोला- अन्दर आकर फ्रिज से निकाल लो।
जैसे ही कल्लो अन्दर आई.. मैंने दरवाजा बंद कर दिया और उसको अपनी बाँहों में भरते हुए चूमने लगा। वो छूटने की कोशिश करने लगी।
मैंने एक हाथ से उसके पेटीकोट को ऊपर उठाया और दूसरे हाथ में लंड पकड़ कर कल्लो की चूत से सटाने लगा.. तभी सुदर्शन पीछे से उसके चूची को दबाने लगा।
कल्लो बोली- छोड़ दो साले.. वरना शोर मचा दूँगी।
मैंने कहा- चुप साली ‘फादरचोद’ सबसे चुदवाती हो.. अब नाटक मत करो.. वैसे भी दोपहर में कोई आने वाला नहीं है।
उसने खुद को ढीला छोड़ते हुए कहा- ठीक है.. पर आराम से चोदना।
मैं उसके निचले हिस्से को वस्त्र रहित करने लगा और सुदर्शन ऊपरी हिस्से को नंगा करने में जुट गया।
उसने पैंटी नहीं पहनी थी.. उसकी बुर चौड़ी.. काली.. पर झांट मुक्त थी। बुर में ऊँगली डाली.. तो मुझे अन्दर गीला.. परंतु गर्म महसूस हुआ।
सुदर्शन उसके अत्यंत सुडौल मम्मों को खूब जोर-जोर से मसल रहा था.. उसकी चूचियाँ तीन बच्चों को दूध पिलाने से इतनी बड़ी हो गई थीं कि सुदर्शन अपने दोनों हाथों से केवल एक चूची को रगड़ पा रहा था।
मैंने एक टुकड़ा बर्फ लेकर उसकी बुर के ऊपर रगड़ने लगा।
वो मस्ती में चिहुंकने लगी और अपनी दोनों टाँगों को एक-दूसरे पर चढ़ाकर बुर को छुपाने लगी।
मैंने आईसक्रीम लाकर अपने सुपाड़े पर लगा ली और कल्लो को लंड चूसने को कहा.. वो तो साली मेरे लौड़े पर ऐसी लपकी.. जैसे छिनाल को कभी जवान लौड़ा नसीब ही न हुआ हो।
उसके वहशी अंदाज में चूसने के कारण मैं दो मिनट में ही झड़ गया।
अब सुदर्शन ने अपने लंड को कल्लो की बुर के निचले छेद पर रखा.. दो धक्कों में पूरा लवड़ा उसकी बुर में समा गया। पूरा कमरा साँसों और ‘फच्च-फच्च’ से भर गया।
अब तो कल्लो भी कमर उछाल कर साथ देने लगी.. जब कमरे में उन दोनों की चुदाई का तूफान थमा तो..