मेरी चालू बीवी-21
इमरान
मैं बाथरूम में जाकर नहाने की तैयारी कर ही रहा था कि मुझे दरवाजे की घण्टी की आवाज सुनाई दी…
ट्रीन्न्न्न्न… ट्रीन्न्न्न्न…
मैं सोचने लगा कि अभी कौन आ गया… प्रणव तो रात को आने वाला था…
तभी मेरे दिमाग में आया… कि सलोनी तो सिर्फ तौलिया में ही थी… वो कैसे दरवाजा खोलेगी…
ट्रीन्न्न्न्न… ट्रीन्न्न्न्न…
एक बार फिर से घंटी बजी…
इसका मतलब सलोनी कपड़े पहन रही होगी… इसीलिए कोई बेचारा इन्तजार कर रहा होगा…
मगर अचानक मुझे दरवाजा खुलने की आवाज भी आ गई…
इतनी जल्दी तो सलोनी कपड़े नहीं पहन सकती… उसने शायद गाउन डालकर ही दरवाजा खोल दिया होगा…
मैं खुद को रोक नहीं पाया… फिर से रोशनदान पर चढ़कर देखने लगा कि आखिर क्या पहनकर उसने दरवाजा खोला…
और है कौन आने वाला…??
और मैं चौंक गया… सलोनी अभी भी तौलिये में ही थी… उसने वैसे ही दरवाजा खोला था…
और आने वाले अरविन्द अंकल थे… उनके हाथ में सलोनी के कपड़े थे जो भाभी पहनकर गई थी…
सलोनी- ओह आप अंकल… क्या हुआ??
अंकल- बेटा लो ये तेरे कपड़े…
सलोनी- अरे इतनी क्या जल्दी थी… आ जाते…
फिर थोड़ा शरमा कर मुस्कुराते हुए- क्यों, आपको भाभी अच्छी नहीं लगी इन कपड़ों में?
अंकल- अरे नहीं, सही ही थी… उसमें इतना दम कहाँ… ये कपड़े तो तेरे ऊपर ही गजब ढाते हैं…
सलोनी- अरे नहीं अंकल… भाभी भी गजब ढा रही थीं… अंकुर तो बस उनको ही देख रहे थे…
अंकल- क्या अंकुर आ गया? उसने बताया नहीं…
सलोनी- अरे भूल गई होंगी… पर अंकुर उनको देख मस्त हो गए थे…
अंकल- अच्छा तो उसने भी… उसको इन कपड़ों में देख लिया?
सलोनी- वैसे सच बताओ अंकल… आंटी मस्त लग रही थी या नहीं?
अंकल- हाँ बेटा, लग तो जानमारु रही थी… अब तू कल उसको बढ़िया… बढ़िया सेट दिलवा देना…
सलोनी- ठीक है अंकल… आप चिंता ना करो… मैं उनको पूरा सेक्सी बना दूंगी…
अंकल- अच्छा अब उसके कपड़े तो दे दे… कह रही है वही पहनेगी… अपनी कच्छी ब्रा भी यहीं छोड़कर चली गई…
सलोनी- हाय, तो क्या भाभी अभी नंगी ही बैठी हैं?
दोनों अंदर बैडरूम में ही आ गये…
अंकल- हाँ बेटा… जब मैं आया तब तो नंगी ही थी… जल्दी दे… कहीं और कोई आ गया तो? …हे हे हे…
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सलोनी- क्या अंकल आप भी… ये रखे हैं भाभी के कपड़े…
अंकल कपड़ों को एक हाथ से पकड़… बेड पर सलोनी के बाकी कपड़े और कच्छी ब्रा देख रहे थे।