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लाईव चुदाई

Story Hindi 3 pages 14 years ago

लाईव चुदाई
लेखक : यो यो सिंह

नमस्कार पाठको, मेरा नाम गौरव है पर मेरे दोस्त मुझे योयो बुलाते हैं। मैं इंदौर में रहता हूँ, मेरी उम्र 19 वर्ष है। मैं कई साल से अर्न्तवासना का पाठक हूँ, आज मैं आपको अपने जीवन में घटित एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ।

जब मैं 18 वर्ष का था तो अपनी मासी के घर पर रहता था, उनका मकान दो मंजिल का है, जिसमें ऊपरी मंजिल पर मेरी मासी का परिवार तथा नीचे किरायेदार रहते थे। किरायेदार एक नवविवाहित दम्पति थे, जिन्हें मैं भैया व भाभी कहता था, भैया एक निजी कम्प्यू टर सेंटर पर टीचर थे तथा भाभी गांव की घरेलू महिला थी। भैया की उम्र 23 व भाभी की उम्र 20 वर्ष होगी।

मेरी मासी के किसी रिश्तेदार के यहाँ शादी थी, जिसमें मेरी मासी परिवार सहित 3 दिन के लिए घर की जिम्मेदारी मुझे सौंपकर चली गई तथा मेरे भोजन के लिये नीचे भाभी को बोल दिया।

पहले दिन ही जब मैं भोजन करने के लिए दोपहर में भाभी के यहाँ गया था तो खिड़की से मैंने देखा कि भैया भाभी को अपनी बाहों में लेकर उन्हें चूम रहे थे।

रविवार के कारण भैया आज घर पर ही थे, मगर भाभी भैया को कहने लगी- अरे अभी नहीं, मुझे बहुत सारा काम है। मुझे यह सबकुछ दिन में अच्छा नहीं लगता।

भैया ने भाभी से कहा कि वो शाम को घूमाने के लिये ले जाएंगे तथा आज मूवी भी दिखाने ले जायेंगे।

मैं अगले दरवाजे पर गया, जाकर डोर बेल बजाई और भाभी से अपना दोनों समय का भोजन टिफिन में पैक करवा लिया।

मुझे पता था कि रात को किरायेदार के यहाँ चुदाई समारोह चलेगा और मुझे वह देखना था इसलिए शाम को उनके जाने के बाद मैंने एक पानी का एक खाली कैम्पर उनके बाथरूम की छत पर रख दिया ताकि रात को उस पर बैठकर उनका खेल देख सकूँ और खिड़की की कुण्डी को भी तोड़ दिया ताकि वो लगा नहीं पायें।

रात को उन दोनों को लौटने के पश्चात एक घण्टे में बीस से पच्चीस बार उन्हें देखने के लिये बाथरूम की छत पर आया। उनके चुदाई समारोह को देखने के लिये मेरे शरीर में मानो खलबली मची हो।

रात को तकरीबन 11 बजे के आसपास भैया बाथरूम में आये तथा वापस जाकर उन्होंने पिछला दरवाजा लगा लिया। वापस जाकर भैया ने जाते से ही भाभी को पीछे की ओर कुर्सी से उठा दिया और उनके गालों व गर्दन को चूसने व चाटने लगे।

भाभी इस हमले से वाकिफ थी, वो भी अपने हाथों से भैया के शरीर को जकड़ने लगी। फिर भैया ने भाभी की साड़ी के पल्लू को नीचे गिरा दिया व ब्लाउज के बटनों को धीरे-धीरे खोलने लगे तथा साथ साथ में भाभी पर चुम्बनों की बौछार को भी जारी रखा।

उन्होंने भाभी के ब्लाउज व ब्रा दोनों को शरीर से हटा दिया और आम की तरह भाभी के चूचों को चूसने लगे। भाभी ने भी भैया को जोरों से जकड़ रखा था, मानो वो अपने नाखूनों को पीठ में ही घुसा देंगी।

बूब्स को भैया कभी चूसते तो कभी हाथों से खींच-खींच कर भाभी को गर्म करने लगते। दस मिनट तक चूमाचाटी करने के बाद भैया ने अपनी बनियान उतार दी व भाभी की साड़ी को खींचकर हटा दिया, उन्होंने भाभी के पेटीकोट का नाड़ा भी खोल दिया और उसे नीचे खसका दिया और वे पेंटी के ऊपर से ही चूत को सहलाने लगे। यह करने के बाद ऐसा लगने लगा मानो भाभी अब चुदने के लिये उतावली हो रही हों।

थोड़ी देर बाद भैया ने भाभी की पेंटी को भी खसका दिया, अब भाभी पूरी नंगी हो चुकी थी। भैया कभी भाभी की चूत को रगड़ते तो कभी उसमें अपनी उंगली डालकर अंदर-बाहर करते जिससे भाभी आहें भरने लगती, सिसकारियाँ भरने लगती।

भैया को देखकर लग रहा था मानो वो कम्प्यूटर के नहीं बल्कि सेक्स के टीचर हों, वो भाभी को चोदने के लिये तैयार कर रहे थे, कभी बूब्स को चूस कर तो कभी चूत को रगड़ कर।

भाभी चुदने के लिये तैयार हो चुकी थी, उन्होंने भैया की लुंगी को हटा दिया और चड्डी में ही उनके लंड को मसलने लगी। अब मानो भैया चोदने के लिये उतावले हो रहे हो, उन्होंने चड्डी उतार दी व लंड को भाभी के हाथ में दे दिया। भाभी भी लंड को खिलौने की तरह खेलने लगी, कभी वो लंड को आगे-पीछे कर खड़ा करने लगती तो कभी लंड पर चुम्मी देने लगती। भाभी लंड चूसने से कतरा रही थी मगर भैया को अच्छा लगे इसलिये उसे बार-बार किस कर देती।

अब भैया के लंड का सुपारा फूल कर लाल हो गया था और लंड तनकर खड़ा हो गया था और भैया भी चोदने के लिये उतावले होने लगे थे। उन्होंने भाभी को खींचकर बिस्तर पर धकेल दिया और उन पर चढ़कर उन्हें चूमने लगे, भाभी व भैया दोनों एक दूसरे के होठों को चूसने व काटने लगे।

मौका देखकर भैया ने एक झटके में अपने लंड को डेढ़ इंच भाभी की चूत में डाल दिया, लंड डलते से ही भाभी चिल्ला उठी, भैया ने होठों पर होठों को रखकर भाभी की आवाज बंद कर दी।

इस झटके के बाद भाभी की आंख में आँसू आ गये, भैया भी बूब्स को जोर जोर से मसलने लगे तथा भाभी के पूरे शरीर को चूमने लगे। हजारों कहानियाँ हैं अन्तर्वासना पर !

भाभी के शांत होते ही उन्होंने धीरे-धारे झटके देकर पूरे लंड को चूत में धकेल दिया तथा भाभी को दर्द न हो इसलिये वो उनके बूब्स दबाते व होठों को चूसना जारी रखा। भाभी का भी दर्द भी अब गायब होने लगा था और वे भी चूतड़ को उपर उठा उठा कर भैया का साथ देने लगी। पूरे कमरे घर में आह उह की आवाज आने लगी थी।

भैया भी जोर जोर से झटके देकर चुदाई की स्पीड बढ़ाने लगे जिससे भाभी को भी मजा आ रहा था। जब भैया को लगा कि वो झड़ने वाले हैं तो उन्होंने चोदने की स्पीड तेज कर दी। वे बूब्स को खींचते, मसलते और गालों पर चुम्बन की बौछार कर देते।भाभी भी दोनों टांगों को उठाकर लंड को चूत में जाने के लिये जगह देने लगी। यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉम पर पढ़ रहे हैं।

15 मिनट तक चोदने के बाद गर्म वीर्य की तेज धार भाभी की चूत से बाहर आने लगी। यानि भैया ने अपना वीर्य भाभी की चूत में छोड़ दिया। भैया भाभी के ऊपर से हटकर एक तरफ़ लेट गये व एक हाथ से भाभी की चूत सहलाने लगे, क्योंकि उन्हें मालूम था कि चूदने के बाद भाभी की चूत में भारी दर्द हो रहा होगा।

10 मिनट लेटने के पश्चात भैया उठे, मुझे लगा कि वो फ़िर से भाभी को चोदेंगे या उनकी गाण्ड मारेंगे मगर वो तो एक कपड़े से लंड को पौंछने लगे तथा भाभी की चूत को भी साफ करने लगे।

दोनों पति-पत्नी अब बिस्तर से उठकर कपड़े पहनने लगे, भाभी चुदवाने के पश्चात थकी हुई नजर आने लगी तथा लगड़ाते हुई चलती प्रतीत हुई।

दोनों बाथरूम की ओर आने लगे इसलिये मैं दौड़ता हुआ अपने कमरे की ओर गया।

वैसे तो मैं हस्तमैथुन करता नहीं हूँ मगर उनकी चुदाई का लाईव टेलीकास्ट देखने के बाद मेरे लंड का वीर्य उथल पुथल करने लगा इसलिये मैंने हस्तमैथुन कर उसे शांत किया।

अगली दो रात तक मैं वापस उनका चुदाई का लाईव टेलीकास्ट देखने के बाथरूम की छत पर इंतजार करता रहा मगर वो दोनों चुदाई समारोह का आयोजन ही नहीं कर रहे थे।

चौथे दिन मेरी मासी का परिवार वापस घर आ गया और मुझे बाद में कभी भी चुदाई का लाईव टेलीकास्ट देखने के लिये नहीं मिला और अब तो भैया भाभी दोनों मकान खाली कर कहीं ओर रहने चले गये।

उस दिन को याद कर मैं बस यह ही सोचता हूँ कि दोबारा ऐसा दिन कब आयेगा और मुझे किसी को चोदने का मौका कब मिलेगा।

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प्रकाशित : 03 जून, 2013

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