मंजू की अच्छी चुदाई
दोस्तो!
मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ।
मैंने भी सोचा कि मैं भी अपनी एक कहानी अन्तर्वासना को भेज ही दूँ !
मेरा नाम राज है और मैं सहारनपुर का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र इस वक्त तीस साल है।
सहारनपुर से मेरा गांव चालीस किलोमीटर दूर पड़ता है।
मेरे गाँव की एक लड़की जिसका नाम है मंजू, मैं बहुत पहले से ही उसे चोदने की इच्छा रखता था लेकिन कभी मौका नहीं मिला।
फिर उसकी शादी हो गई और मेरा सपना सपना ही रह गया।
लेकिन दोस्तो, जब ऊपर वाला देता है तो छप्पर फाड़ के देता है.
एक दिन मंजू अपनी ससुराल से अकेली ही गाँव के लिए चली.
तो उसके ट्रेन किसी वजह से लेट हो गई और वो स्टेशन पर फँस गई क्योंकि गाँव के लिए बस से जाना पड़ता है और रात के 8 बजे कोई भी बस गाँव नहीं जाती थी।
इसलिए उसने अपने भाई से पता किया तो उसके भाई ने हमारे घर का एड्रेस और मेरा नंबर उसे दे दिया और बोला कि रात को वहां रुक जाओ।
वो एड्रेस पता करते करते हमारे घर तक आ गई।
इत्तफाक से मेरे सभी घरवाले गाँव में गए हुए थे। घर पे सिर्फ मैं ही अकेला था.
वो मेरे घर पे आ गई और सारी बात बताई।
मैंने कहा- कोई बात नहीं तुम सुबह घर चली जाना!
तो उसने रसोई पूछी और अपने और मेरे लिए खाना बनाया और हम दोनों ने खाना खाया।
थोड़ी देर मेरे साथ बैठ कर उसने टीवी देखा और मैंने उसे माँ वाला कमरा दिखा दिया, जो ड्राइंगरूम के बगल में ही था।
वो उसमें सोने के लिए चली गई।
लेकिन मेरा लण्ड खड़ा हो चुका था, मैं आज किसी भी तरह से मंजू को चोदना चाहता था।
फिर मैंने जानबूझ कर एक ब्लू मूवी की सी डी लगा दी और आवाज थोड़ी सी तेज़ कर दी ताकि मंजू उन आवाजों को सुन सके।
फिल्म चलते हुए आधा घंटा ही बीता था कि मंजू आकर मुझ से लिपट गई और मेरे होंठ चूसने लगी।
मैं समझ गया कि वो बुरी तरह से चुदासी हो गई है फिल्म की आवाज को सुनकर।
तो मैंने भी उसकी मुंह में अपनी जीभ डाल दी, वो मज़े से चूसने लगी।
मैंने जल्दी से उसको नंगा किया, खुद भी नंगा हो गया और उसको उठाकर अपने बेडरूम में ले आया और बेड पे लिटा दिया.
मैं भी उसके मम्मो से खेलने लगा और वो मेरे लण्ड से खेलने लगी।
मन ही मन मैं बहुत खुश हो रहा था कि ये तो बहुत गरम निकली।
खैर अब उसने मेरा लौड़ा अपने मुंह में ले लिया और मज़े से चूसने लगी।
वाह क्या सीन था!
मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था.
चूँकि मैं कई दिनों से रुका हुआ था इसलिए मेरे लण्ड से बहुत सारा पानी का धार छुट गया और मंजू का मुंह भर गया.
वो गटागट सारा का सारा रस पी गई.
फिर भी उसने मेरे लौड़े की चुसाई बंद नहीं की, वो चूसती ही जा रही थी।
दो तीन मिनट के बाद मेरा लौड़ा फिर से खड़ा हो गया.
अब मैंने उसे लिटाया और उसकी टांगों के बीच आ गया, उसकी गुलाबी चूत देख कर मेरा लण्ड और भी कड़क हो गया.
मैंने लण्ड उसके छेद पर रख कर पूरे जोर से धक्का मारा.