वर्जिन आर्मी चोदा-चुदाई-3
रात को 8 बजे उसने मुझे उठाया, मैंने उसे अपनी ओर खींचते हुए चूम लिया।
और तभी:
कमरे का दरवाजा खुला और जो लेडी मेरे सामने आई उसे देख मेरे होश उड़ गए। वो लेडी और कोई नहीं जहाज में मुझे घूर कर देखने वाली औरत थी।
मेरी बॉस ने इंट्रोडक्शन करवाया- ये मेनका हैं !
मेरे मुँह से निकल गया- और कौन हो सकती है इतनी खूबसूरत !
दोनों हंस पड़ी और मेरी बॉस मेनका को अपने साथ हॉल में ले गई और कुछ बात करने लगी।
फिर हमने खाना मंगवाया और खाने के बाद मेरी बॉस ने कहा- सुनो, मेनका का बर्थडे है कल, तो रात को बारह बजे तुम उसके तोहफे हो मेरी तरफ से। ऐसी खातिरदारी करना कि वो बस तुम्हारी हो जाये ! उसकी चूत तुम्हारे लण्ड की ही पूजा करे !
मैंने कहा- जो हुकुम मेरी आका !
उसके जाने के बाद मेनका ने मुझे अपनी ओर खींचा और गले लगाने लगी, बोली- मुझे आज प्यार के पल जीने हैं, जीने दोगे न?
मैंने उसे आँखों ही आँखों में ‘हाँ’ कह दिया और उसको कस कर गले लगा लिया- मेनका, आज तुम बस मेरा साथ देना।
मैं उसके होंठों को किस करने लगा, वो मुझे और कस कर अपनी ओर खींचने लगी, उसके हाथ मेरी कमर पर घूम रहे थे। उसके उरोज़ हिल रहे थे, जिसका अहसास मुझे मेरे सीने पर हो रहा था।
मैंने भी उसके नितम्बों को कस कर दबाना शुरू किया और ऐसा हम लोग 10 मिनट तक करते रहे।
फिर उसने मुझे बेड पर धक्का दे दिया और कहा- एन्जॉय द मूमेंट्स !
फिर धीरे-धीरे उसने अपने नीले कुर्ते को उतार कर साइड में फेंक दिया।
उसकी अगली हरकत ने तो मुझे पागल ही कर दिया। उसका नाड़ा नहीं खुल रहा था, तो उसने पास ही में रखी फ़्रूट ट्रे से चाकू लेकर नाड़ा काट कर अपने पजामे को भी अपने से अलग कर दिया।
उसकी उत्तेजना चरम पर पहुँचने लगी थी। वो ब्लू और ब्लैक मिक्स कलर की ब्रा और पैन्टी में थी। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।
मेनका मेरे ऊपर आकर मुझे किस करने लगी। उसकी चूत ऊपर से ही मेरी जीन्स पर रगड़ खा रही थी। उसका नशीली काया किसी नागिन की तरह मुझ पर घूम रही थी और उसने मेरे शर्ट को मुझसे अलग कर दिया।
मेरे सीने की तारीफ करते हुए कहा, “एक औरत को ऐसी ही जगह चाहिए, अपनी शर्म को छुपाने के लिए।”
मैं उसके ऊपर पलटी खाते हुए उसके ऊपर आ गया और उसको चूमते हुए कभी गर्दन पर, कभी कान पर, कभी उसकी नाभि पर अपनी जीभ घुमा कर, उसकी वासना के ज्वालामुखी को उकसा रहा था।
उसके मुँह से लगातार सीत्कारें निकल रही थीं, “आआ… आह… हाँ ऐसे हीई… ईईए…, हायई…ईईई… कितना मज़ा आ रहा है, करते रहो मेरे शेर…”
फिर मैंने उसके उरोज़ भी दबाने शुरू कर दिए जिससे वो और तड़पने लगी। अगला निशाना उसके बचे-खुचे कपड़े थे, सो झटके से उसकी ब्रा अलग कर दी और फिर उसकी उरोजों में जीभ घुमा कर उसकी हरकतों को बढ़ावा दे रहा था।
वो भी अपने इस कारनामे में आनन्द उठा रही थी।