बहन की सहेली की चूत की चुदाई की सेक्सी स्टोरी
इस सेक्सी स्टोरी में मैं आपको बताना चाहूँगा कि कैसे मैंने मेरी बहन की सहेली शीला की चूत की चुदाई की!
अन्तर्वासना के पाठकों को नमस्कार.. मैं अन्तर्वासना में प्रकाशित हिंदी सेक्सी स्टोरी को काफ़ी समय से पढ़ रहा हूँ।
मैं दिल्ली में रहता हूँ.. आज मुझे भी अपनी सेक्सी स्टोरी आप सभी के सामने रखने का मौका मिला है.. साथ ही मेरा यह भी मानना है कि आप सभी को भी अपने सेक्सी अनुभवों को अन्तर्वासना पर साझा करना चाहिए ताकि इस विषय को रुचिकर बनाते हुए, इससे सम्बन्धित तमाम भ्रांतियों को समझा जा सके।
इस सेक्सी स्टोरी में मैं आपको बताना चाहूँगा कि कैसे मैंने मेरी बहन की सहेली शीला को चोदा।
शीला हमारे घर के पास ही रहती थी, दिखने में काफ़ी सेक्सी थी.. साफ़ बोलूँ तो वो एकदम जबरदस्त माल थी। वो 12वीं क्लास में पढ़ती थी, अभी जवानी की दहलीज़ पर ही कदम रख रही थी।
शीला के सेक्सी फिगर के बारे में हमारे आस-पड़ोस के लोंडे भी काफ़ी अश्लील बातें करते थे।
वाकयी में वो थी ही इतनी सेक्सी कि उसे देखते ही किसी का मन उसे चोदने का करने लगे।
मेरा तो काफ़ी मन करता था कि उसको अभी ही पटक कर चोद दूँ.. मगर पड़ोस का मामला था, कहीं बात बिगड़ ना जाए.. इसलिए चुप रह जाता था।
शीला कुछ समय बाद मेरी बहन की अच्छी सहेली बन गई और उसका हमारे घर में आना-जाना भी होने लगा, हमारे परिवार की उनके परिवार से भी अच्छी बोल-चाल हो गई थी।
मैं पढ़ाई में अच्छा था और इसी कारण उसकी मम्मी ने मुझे टयूशन पढ़ाने के लिए बोला.. मैंने तुरंत ‘हाँ’ कर दी। चूंकि मैं उस टाइम कॉलेज में था.. मैंने सोचा इसको पास से देखने के साथ-साथ कुछ पॉकेट मनी भी बन जाएगी।
अगले दिन वो मुझसे पढ़ने मेरे घर आई… जीन्स-टॉप में क्या गजब माल लग रही थी। उसका दूध सा गोरा बदन.. मोटी चुची और कदली सी जांघें.. अह.. सब कुछ बहुत ही मस्त लग रहा था। उसका फिगर लगभग 32-28-30 का रहा होगा। मेरा पढ़ाने में कम.. उसकी चुची में ज्यादा लग रहा था।
वो भी मुझे पढ़ते हुए मेरी आँखों में आँखें मिला कर पढ़ रही थी, उसकी निगाहों से ऐसा लग रहा था मानो जैसे लंड चूसने को तैयार हो।
कुछ समय बाद हमारी दोस्ती भी हो गई और उसने मुझे प्रपोज़ भी कर दिया।
मानो मेरी तो लॉटरी ही निकल पड़ी हो, मैंने भी उसको बोला कि मैं भी तुम्हें काफ़ी टाइम से पसंद करता हूँ.. पर पड़ोस का मामला होने के कारण बोल ना सका।
वह मुस्कुरा दी और मैंने उसको अपनी बांहों में भर लिया, उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए, वो भी मेरा साथ देने लगी।
प्यार-मुहब्बत का सिलसिला चल पड़ा.. बस अब चोदने की तड़प थी और उसे भी चुदने की चुल्ल हो गई थी।
घर मैं ज्यादा लोग होने के कारण मैं अपने ही घर में रिस्क नहीं लेना चाहता था.. बस सही मौके का इंतज़ार कर रहा था.. और वो मौका भी जल्द ही आ गया।