दोपहर में पूजा का मजा-3
प्रेषक : राज कौशिक
मैं बोला- पूजा, दर्द होगा।
“पता है पर तुम बस डालो अब।”
“ठीक है !”
और मैंने एक झटका मारा पर लण्ड फिसल कर गाण्ड के छेद से जा लगा।
“आह ! क्या कर रहे हो राज?”
मैंने एक तकिया लेकर उसके कूल्हों के नीचे रख दिया, अब चूत का छेद ऊपर आ गया, फिर लण्ड चूत पर रखकर उसके कन्धे पकड़ लिये और जोर से झटका मारा। एक बार में ही लण्ड चूत को फाड़ता हुआ आधे से ज्यादा अन्दर चला गया।
पूजा के मुँह से चीख निकली- ऊई ई ई माँ आ अ.. मर गई ई राज ज अ..आँ ! रुको ! बाहर निकालो !
कहते हुए पीछे को हटने लगी तो उसका सिर दीवार से टकरा गया और मेरे हाथों की वजह से वो उठ भी न सकी। मैंने उसके होंट अपने होंटों में लेकर एक और झटका मारा और पूरा लण्ड चूत में डाल दिया।
पूजा की आँखों से आँसू निकल आये। मैं जीभ से उसके आँसू चाटने लगा और चूचियाँ दबाने लगा, गर्दन पर चूमते हुए धीरे धीरे धक्के मारने लगा। पूजा का दर्द कम होने लगा तो मेरा साथ देने लगी। मैंने लण्ड बाहर खींचा तो वो खून से लाल था, मैंने उसे दुबारा अन्दर ठोक दिया।
आह ओह ! पूजा के मुँह से निकला।
फिर वो गाण्ड उठा कर मेरा साथ देने लगी। मैंने उसकी चूचियाँ पकड़ी और जोर-जोर से झटके मारने लगा। पूजा भी पूरा साथ दे रही थी। हम दोनों पसीने से बिल्कुल नहा गये और कमरे में पूजा और मेरी सिसकारियाँ गूँज रही थी।
पूजा बोल रही थी- आह राज ! कम ऑन फास्ट ! चोदो ! मुझे फ फाड़ डालो ! आह सी ई बहुत आग है इस कुतिया में ! निकाल दो सारी आग ! फाड़ डालो आ आ आह ओर तेज. .
मैं भी पूरे जोर से झटके मार रहा था- यह ले ! और ले ! कुतिया की आग बुझा ! आँ आँ बहुत गर्मी है तेरे अन्दर ! कब से चोदने की सोच रहा था।
“तो चोदो ना ! फाड़ डालो ! लगा दो अपनी जान जान को चोदने में ! आ सी ई राज गई तेज !” पूजा ने मुझे कसकर पकड़ लिया उसके नाखून मेरी कमर में गड़ गये, हाँ राज ! बस आह ! कहते हुए चिपक गई।
मैंने देर न करते हुए उसे उल्टा करके तकिए पर लिटा दिया और दोनों तरफ पैर करके उसके ऊपर बैठ गया।
पूजा समझ गई कि मैं क्या करने वाला हूँ।
“नहीं राज, गाण्ड आज नहीं ! बहुत दर्द होगा। प्लीज राज नहीं। मैं मर जाऊँगी।”
मैंने उसकी नहीं सुनी और लण्ड उसकी गाण्ड पर लगा दिया और दोनो हाथों से कमर पकड़कर 2-3 झटके मार दिये, पूरा लण्ड गाण्ड में डाल दिया।
पूजा चीख रही थी पर उसके चीखने का मुझ पर कोई असर नहीं हो रहा था। मैं लगातार झटके मारे जा रहा था थोड़ी देर बाद वो शान्त हो गई और गाण्ड आगे पीछे करने लगी। मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी।पूजा अब आहे भर रही थी- आह आ अ !
मेरी नसें खिंचने लगी और 5-6 झटकों में उसकी गाण्ड अपने वीर्य से भर दी। मैं पूजा के ऊपर ही लेट गया। थोड़ी देर बाद मैं उठा और लण्ड पूजा की पैंटी से पौंछा। पूजा चुप उल्टी ही लेटी थी शायद उसे दर्द हो रहा था।