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घने कोहरे में चूत मरवाई

Story Hindi 2 pages 13 years ago

घने कोहरे में चूत मरवाई
मेरा नाम दीपिका वर्मा है, मेरी उम्र बीस साल है, रंग इतना गोरा नहीं है पर नैन-नक्श तीखे हैं और बेहतरीन जिस्म की मलिका हूँ। इस वक़्त कॉलेज में पढ़ती हूँ। किसी लड़के की नज़र मेरे गोल-मटोल मम्मों पर न रुके, यह हो ही नहीं सकता। लड़कों ने मेरा नाम जुगाड़ डाल रखा है।
मैं शुरु से ही एक ऐसे माहौल में रही हूँ, जिससे मैं अपनी जवानी को शुरु से ही क़ाबू में नहीं कर पाई, मेरी संगत और गन्दी लड़कियों से रही। खाली समय में कक्षा में ही एक-दूसरी के मम्मे दबाना, पेन-पेन्सिल चूत में डाल कर मज़े लेना आदि। जल्दी ही पेन-पेन्सिल छोड़कर लंड भी तलाश लिया। उसके बाद कई लड़कों के साथ मैंने मज़े लूटे। वैसे मैंने बहुत चुदाई करवाई है, लेकिन आपको अपनी एक ऐसी चुदाई सुनाऊँगी जो मैं कभी नहीं भूल सकती।
मोहल्ले के ही एक लड़के के साथ मेरा चक्कर चल निकला। वह मुहल्ले का एक गुंडा टाईप लड़का था, जिससे सभी डरते हैं, कोई भी उसके साथ पंगा नहीं लेता। मुझे वह बहुत पसन्द था, इसलिए मैंने उसे बढ़ावा दिया और उसके इजहार करते ही मैंने हाँ कह डाली। हम छुप-छुप कर मिलने लगा। वो मेरे हर-एक अंग से खेल चुका था। बस जगह न मिलने के कारण उसने मुझे चोदा नहीं था। उसका मोटा लंड कई बार हाथ में लेकर सहलाया और मुठ मार चुकी थी। एक बार साईबर कैफे के केबिन में चूसा भी था।
जैसे ही मौसम बदला, सर्दी के दिन आए और घना कोहरा पड़ना शुरु हुआ, उसकी आड़ में हम मिलने लगे। हम चुदाई के लिए तड़प रहे थे, क्योंकि जब से उसके साथ मेरे चक्कर के बार में मेरे दूसरे बोर दोस्तों को पता चला तो वह मेरा साथ छोड़ धीरे-धीरे पीछे हट गए थे। एक दिन घना कोहरा पड़ा हुआ था। मैं स्कूल के लिए निकली थी, रोज़ की तरह थोड़ा आगे जाकर वह जहाँ मुझे रोज़ मिलता था, आज वह वहाँ नहीं मिला। थोड़ा आगे बढ़ी तो किसी ने मेरी बाँह पकड़ कर मुझे अपनी ओर खींच लिया। मैं उसकी बाँहों में चली गई। प्लॉट खाली था, कोहरा इतना था कि आदमी को पास खड़ा आदमी भी नहीं दिख पाता था। मैं उससे लिपट गई, उसने बेइन्तहा चूमना शुरु कर दिया। दोनों हाथों से मेरी चूचियाँ दबाने लगा।
मैंने उसका लंड पकड़ लिया। उसने मेरी स्कर्ट में हाथ डाल दिया। अन्दर स्लाक्स पहनी हुई थी, जो शरीर से बिल्कुल चिपकी हुई थी। उसने मेरी चूत मसल डाली। मेरे अन्दर आग आज कुछ अधिक ही धधक रही थी, आज मैं बहुत प्यासी थी। मैंने उसके लंड को पैन्ट के ऊपर से पकड़ लिया।
मैंने उसकी बाँह पकड़ कर उसे प्लॉट के पिछले हिस्से में खींच लिया और उसकी ज़िप में से लंड निकाल लिया, पैरों के बल बैठ मुँह में डाल लिया और पागलों की तरह चूसने लगी। उसने नीचे से अपना पैर स्कर्ट में डाल अपने पैर के अँगूठे से मेरी चूत को दबा दिया। ओस से कपड़े गीले हो जाते, इस वज़ह से हम नीचे नहीं लेट सकते थे।

उसने मुझे खड़ा किया, स्कर्ट खोल डाली। हुक़ खुलते ही स्कर्ट नीचे गिर गई। हाय… यह क्या कर दिया तुमने?
तुझे नंगी किया.. साली…!
उसने चूस-चूस कर पागल कर दिया और स्लाक्स उतार कर फेंक दी।

मैंने कहा, ठीक से रख दो, फिर पहनने भी तो हैं। मैं भी बेशर्म हो गई और पैन्टी ख़ुद ही उतार दी। उसने अपनी शर्ट उतार कर वहीं नीचे बैठते हुए मुझे घुटने रखवा कर घोड़ी बना दिया और अपनी जीभ मेरी चूत में डाल कर चूसने लगा।
हाय… लंड पेल दो प्लीज़…
ले रानी, कहते हुए उसने लंड को चूत पर रखते हुए धक्का मारा। उसके तीन धक्कों से ही लंड मेरी चूत में पूरा समा गया। अब करो… फाड़ डालो… बहुत प्यासी है यह तेरे लंड की आज… ठंडी कर दे मेरी आग…
वह तेज़-तेज़ धक्के मारता गया… अचानक उसने पासा पलटा और सीधा लिटा कर अन्दर डालते हुए करारे झटके मारे… मैं झड़ गई और मेरी गर्मी से वो भी पिघल गया और अपना सारा पानी मेरी चूत में ही डाल दिया।
कितना मज़ा आया इस तरह रास्ते में चूत मरवा कर… ऐसा मज़ा बिस्तर पर कभी नहीं आया।
तो यह थी मेरी एक मस्त चुदाई की कहानी। फिर हाज़िर होऊँगी अगली कहानी लेकर। सब लड़कों के लंड खड़े रहें। भगवान सभी को मोटे लंड दें, ताकि मुझ जैसी प्यासियों की आग बुझती रहे।
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