मेरे दोस्त की प्रेमिका
संपादक : मारवाड़ी लड़का
मेरा नाम विक्की, राजकोट (गुजरात) में रहता हूँ। यह मेरी तीसरी कहानी है अन्तर्वासना पर।
यह कहानी है मेरे दोस्त विशाल की प्रेमिका अवनी और मेरी !
विशाल मेरा बहुत ही करीबी दोस्त था। हम दोनों रोज एक ही साथ घूमते थे और साथ साथ ही मस्ती करते थे। उसकी एक प्रेमिका थी अवनी। वो बहुत ही खूबसूरत थी।
उसका बदन, उसके मम्मे बहुत ही सेक्सी थे। हम तीनों साथ में ही घूमते फिरते थे।
जब भी हम लोग कहीं घूमने जाते थे, तब वह बार बार विशाल से चिपकती थी, उसे चूमती थी और मुझे देखती रहती थी। पहले पहले मेरे मन में उसे लेकर कोई गलत भावना नहीं थी। पर धीरे धीरे मुझे भी कुछ कुछ होने लगा था। मेरा दोस्त एकदम लल्लू था। वो अवनी की ऐसी हरकतों से झेंप कर दूर हो जाता था।
एक दिन मैंने एक पिकनिक रखी थी हम तीनों के लिए। तीनों एक साथ मेरी कार में पिकनिक गए। हम तय समय से सुबह ही वहाँ पहुँच गए, खाना और बाकी जरुरी सामान भी साथ ले गए थे।
वहाँ हम मस्ती कर रहे थे मगर अवनी का ध्यान मेरी तरफ ही था।
जब हम खेल रहे थे तब अवनी बार बार मुझसे टकराती थी। मैं बहुत बार उससे दूर गया पर वह फिर से पास आ जाती थी।
हमें वहाँ खाना बनाना तो था नहीं, इसलिए विशाल कुछ चीजें लाने बाजार चला गया। अब हम दोनों अकेले थे।
मैं भी अपना कुछ काम करने लगा और गाड़ी से सामान निकालने लगा। तभी अवनी मेरे पास आई और उसने कहा- मैं आपकी मदद करती हूँ ! और वह मुझे छूते हुए काम करने लगी।
मैंने उसे दूर जाने को कहा पर वो और नजदीक आ गई और उसने मेरा हाथ पकड़ लिया।
मैं थोड़ा घबरा गया था पर मेरे अन्दर सेक्स की भूख जाग उठी थी। उसने धीरे से मेरे करीब आकर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर मुझे एक चुम्बन दिया।
मैंने उससे कहा- यह गलत है ! अगर विशाल को पता चला तो अच्छा नहीं होगा !
उसने मुझे समझाया- कुछ नहीं पता चलेगा उस लल्लू को !
और वह मुझे फ़िर चूमने लगी।
मुझसे रहा नहीं गया और मैं भी उसकी चुम्मियों का आनंद लेने लगा। उसने काले रंग की टीशर्ट पहनी थी। मैं उसे अपनी गाड़ी में ले गया और उसकी टीशर्ट को प्यार से निकाल दिया।
टॉप के अन्दर उसने काले ही रंग की ब्रा पहनी थी और उस ब्रा के ऊपर से उसके सफ़ेद दूध दिखाई दे रहे थे। मैंने जोश में आ कर उसकी ब्रा भी निकाल दी और उसके बड़े बड़े दूध चूसने लगा।
करीब पाँच मिनट तक उसके मम्मों के साथ खेलने के बाद उसने मेरी पैंट उतार कर मेरा लौड़ा निकाल लिया और अपने मुट्ठी में भर कर वो मेरा लौड़ा हिलाने लगी। मेरा लौड़ा एकदम लोहे की छड़ की तरह हो गया था। उसने मेरे लौड़े को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।
मेरी सीत्कारें निकलने लगी ….आह….आह्ह……ऊउइ माँ….।
मुझसे अब रह पाना मुश्किल हो रहा था।
मैंने उसकी पैंट भी निकाल फेंकी।