पलक की चाहत-1
लेखक : सन्दीप शर्मा
यह कहानी मेरी और मेरी एक दोस्त की है जो आज से कुछ साल पहले घटी थी उसका नाम बदल कर मैं पलक लिख रहा हूँ। मेरी पिछली कहानी को पढ़ने के बाद उसने मुझे कहा कि मैं हम दोनों की कहानी भी लिखूँ और उसके बाद मैंने इस किस्से को लिखना शुरू किया। इस कहानी का हर भाग उसकी रजामंदी के बाद ही आपके पास पहुँच रहा है और आप सभी को पहले ही एक निराशा दे दूँ कि आप मुझ से उसका नम्बर या आईडी मांगने की कोशिश ना करें, वो अपनी शादीशुदा जिंदगी में बहुत खुश है और फिलहाल अमेरिका में है।
मैं कहानी पर आता हूँ, हम दोनों की बातें अंग्रेजी और हिन्दी दोनों में होती थी, अधिकतर अंग्रेजी में तो अत: कुछ जगहों पर जहाँ जरूरी लगा है, मैंने अंग्रेजी का इस्तेमाल किया है पर उसका हिन्दी मतलब भी साथ में लिख दिया है तो उम्मीद है आपको दिक्कत नहीं आएगी।
हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त हैं जो हर बात के बारे में खुले तरीके से बाते करते हैं और हमारे बीच में सेक्स सम्बन्धी बातें भी ऐसे ही होती थी जैसे कोई सामान्य बातें हो रही हों, उसे भी वयस्क फिल्में देखने का बहुत शौक था तो वो मुझसे माँगा करती थी क्योंकि मैं इन्टरनेट से डाउनलोड कर लिया करता था और उसे दिया करता था। उसे मेरे सारे सम्बन्धों के बारे में भी विस्तार से पता होता था और आज भी है।
एक दिन शनिवार को सुबह 11 बजे पलक का फोन आया, मैं तब सो ही रहा था मैंने जैसे ही फोन उठाया तो वो चिल्लाते हुए बोली- गधे, एस एम एस का जवाब क्यों नहीं देता?
मैंने कहा- तू तो ऐसे बोल रही है जैसे तुझे पता ही नहीं मैं शनिवार और रविवार को 12 बजे तक सोता हूँ?
वो बोली- पता है लेकिन फिर भी मेरे मैसेज का जवाब देना चाहिए ना, मैसेज का जवाब दे !
और यह बोल कर उसने फोन काट दिया।
हाँ ! ऐसी ही है वो पागल !
मैंने एस एम एस पढ़ा, लिखा था,”सैंडी सुन ना ! कुछ बोलना था, बोलूँ क्या?”
मैंने जवाब दिया,”नहीं, मत बोल। तुझे कब से जरूरत पड़ने लगी है मुझसे कुछ बोलने के लिए?”
पलक ने जवाब दिया,,”सुन तो ले क्या कह रही हूँ !”
मैंने कहा,”तो बोल न नालायक?”
वो बोली,”अच्छा मैसेज पर नहीं बोलती, मिल कर बताऊँगी, तू काफी शॉप पर आ जा ! जैसा है वैसा ही आ जा ! सजने-संवरने की जरूरत नहीं है, तू ऐसे ही बहुत स्मार्ट लगता है।”
मैं क्या बोलता, उसके सामने कुछ बोलने का कोई मतलब था नहीं, मैंने जवाब दिया,”ठीक है, 15 मिनट में पहुँच रहा हूँ !”
और उधर से जवाब आया- ओके।
मैं बिना नहाये बिना कपडे बदले बरमूडा और टीशर्ट में ही वहाँ पहुँच गया तो वो मोहतरमा पहले से ही पहुँची हुई थी और मेरी केपेचिनो का ऑर्डर भी दे रखा था।