सब्र का फल मीठा होता है
शाहरूख खान
हाय दोस्तों, आप सभी अन्तर्वासना पढ़ने वालों को मेरा सलाम। मेरा नाम शाहरूख है मैं राजस्थान का रहने वाला हूँ। यह मेरी पहली कहानी है, पहले मैं अपने बारे में बता देता हूँ। मैं बी.कॉम. फाइनल ईयर का छात्र हूँ। मेरा कद 5 फीट 8 इंच है, मेरा लिंग 7 इंच लम्बा 3” मोटा है।
यह घटना मेरे साथ दो साल पहली घटी थी, जब मैं शहर में नया-नया पढ़ने आया था। तब मैंने उसे पहली बार देखा था उसका नाम आशना था। उसे देखते ही मैं तो पागल हो गया, उसका बदन 32-28-30 होगा। मेरा दोस्त जो मेरे साथ रहता था, वो भी उसे चाहने लगा था। तब हमारे बीच शर्त लगी कि जिसके साथ भी वो पट गई वह ले जाएगा।
हमारी किस्मत भी बहुत अच्छी थी, हमने जिस घर में कमरा लिया था, उसका घर हमारे कमरे से 10 घर छोड़ कर ही था। हम एक ही जगह कोचिंग पढ़ने जाते थे।
धीरे-धीरे हमारे बीच बात होने लगी। पहले तो हम दोनों दोस्त उससे बात करते थे। ऐसे करते-करते 11वीं निकल गई। क्योंकि मैं पढ़ने में होशियार था, तो उसका आकर्षण मेरी तरफ होने लगा।
12वीं आते ही जैसे मेरी लाटरी निकल आई हो, उसने मेरा फोन नंबर ले लिया। तीन-चार दिन तो ऐसे ही निकल गए, फिर एक दिन उसका मैसेज आया। तब हमारे बीच मैसेज से बात होने लगी।
एक दिन उसके घर वाले बाहर गए हुए थे, तब उसने मुझे फोन लगाया। उस दिन हमने 4 घंटे लगातार बात की और मुझे अपने घर बुलाया।
मैं उसके घर गया था तो उसकी बहन और वो बैठी थी फिर उसने मेरा परिचय अपनी बहन से करवाया।
जब उसकी बहन कमरे से बाहर गई तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया, उसने कुछ नहीं कहा, तो मेरी हिम्मत और बढ़ गई।
फिर मैंने उसके होंठों पर चुम्बन कर दिया, तब भी उसने कुछ नहीं कहा, लेकिन उसकी बहन वापस कमरे में आ गई।
मेरा लण्ड तो खड़ा का खड़ा ही रह गया, उसकी बहन पर गुस्सा तो बहुत आया लेकिन करता भी क्या..!
फिर हमने इधर-उधर की बातें की और बाद मैं अपने कमरे पर आ गया।
उसका मैसेज रात तक नहीं आया तो मैंने उसे मैसेज किया कि मैंने आज जो भी किया उसके लिए नाराज हो क्या?
उसने कहा- नहीं, बहुत अच्छा लगा था!
फिर हमारे बीच सेक्सी बातें भी होने लगीं।
एक दिन मैंने हिम्मत कर के मेरे रूम पर बुला लिया, क्योंकि उस दिन मेरे मकान मालिक बाहर गए हुए थे। जब वो मेरे कमरे में आई तो मैंने जल्दी से गेट बंद किया और मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया।
उसने गुलाबी रंग का टॉप और काले रंग की जींस पहन रखी थी।
क्या मस्त लग रही थी वो.. मैं बयान नहीं कर सकता।
उसने कहा- सब्र करो.. सब्र का फल मीठा होता है..
उसने अपना चेहरा मेरी तरफ किया और मेरे गले लग गई। दस मिनट तो हम ऐसे ही रहे, फिर मैंने उसके होंठों को चूमना शुरू किया। मेरा एक हाथ उसके मम्मों पर था।
करीब 10-15 मिनट चूमने के बाद मैंने उसका टॉप और जींस उतार दी। उसने ब्रा और पैंटी भी उसी रंग की पहन रखी थी।