गैर मर्द से बीवी की चुदाई का सपना
दोस्तो, यह कहानी मेरे एक दोस्त साजिद ने भेजी है, उसी की जुबानी सुनिये।
यह मेरी बीवी की चुदाई का सच्चा वाकिया है। हर इंसान की एक ठरक होती है। मैं जब भी अपनी बीवी के साथ चुदाई करता था.. तो सोचता था कि मैं ये चुदाई नहीं कर रहा हूँ.. बल्कि कोई दूसरा इंसान है जो मेरी बीवी को चोद रहा है।
लेकिन अब तक मैंने इस बात को किसी से भी साझा नहीं किया है।
मैंने कभी सोचा भी ना था कि मेरा ये सपना सच में पूरा हो जाएगा।
मेरी बीवी का नाम शबनम है.. वो एक कम्पनी में नौकरी करती है। शबनम देखने में काफी मस्त और कामुक महिला है। शबनम का कद साढ़े पांच फुट है.. यानि वो मुझसे दो इंच अधिक ऊँची है। उसका जिस्म भी मांसल और गदराया हुआ है वो बहुत ही सुडौल है.. जबकि मैं काफी मरियल सा हूँ।
उसके मम्मे भरे हुए और एकदम गोल है उसके चूतड़ों का आकार भी बहुत ही मस्त है।
हम लोग लखनऊ की एक आभिजात्य वर्ग की कॉलोनी में रहते हैं। हमारे फ्लैट के पास एक ज्वैलरी का बड़ा शोरूम है। उसका मालिक गजेन्द्र सिंह है।
हम लोग अक्सर उसके शोरूम पर जाते रहते हैं।
गजेन्द्र एक विवाहित मर्द है। उसकी बीवी मेघा भी उसके साथ ही शोरूम में रहती है। वो दोनों रंग-रूप में एक-दूसरे से उलट है। गजेन्द्र जहाँ एक शानदार गबरू जवान है.. वहीं मेघा एक दुबली-पतली मुरदैली टाइप की औरत है। गजेन्द्र गठीले और कसरती जिस्म का मालिक है।
मैं गजेन्द्र को देखकर बड़ा प्रभावित हो जाता था, उसकी मर्दानगी उसके रोम-रोम से टपकती थी। लेकिन मुझे ज़रा सा अंदाज़ा ना था कि गजेन्द्र की निगाह मेरी बीवी शबनम पर है।
यह मैं कभी नहीं जान पाता.. लेकिन एक रात सारा भांड फूट गया।
दरअसल दिल्ली की मेरी ट्रेन देर रात को थी। मैं स्टेशन पहुँच कर इंतज़ार करता रहा.. बाद में किसी वजह से ट्रेन ही कैंसिल हो गई। रात के दो बजे जब मैं वापस घर पहुँचा तो चौंक गया।
मेरे घर के सामने गजेन्द्र की ऑडी कार खड़ी हुई थी।
अब मुझे सारा माजरा समझ में आ गया, मेरे दिल की धड़कन बढ़ने लगीं, मैंने अपने घर के दरवाजे की दूसरी चाबी निकाली.. जो मेरे पास होती है।
दरवाजा खोल कर मैं चुपचाप अन्दर घुस गया। मैंने छुप कर जो अन्दर का नज़ारा देखा तो मेरी आँखें फट गईं.. वो पूरा वाकिया मैं आपको बता रहा हूँ।
मेरे बेडरूम में गजेन्द्र और शबनम एकदम नंगे थे।
गजेन्द्र सीधा खड़ा था उसका लंड पूरी तरह से खड़ा था। गजेन्द्र का लंड मेरे लंड से दोगुना लम्बा और कम से कम तीन गुना मोटा था।
शबनम उसके लंड के सामने घुटनों के बल बैठी हुई उसका लौड़ा सहला रही थी और चूम रही थी।
गजेन्द्र आँखें बंद करके ‘आह.. आह..’ कर रहा था।
वो दोनों बीच-बीच में कामुक बातें भी कर रहे थे।
गजेन्द्र- शबनम मेरी जान.. तेरा लौड़ा चूसने में कोई जवाब नहीं.. तू पक्की रंडी का मज़ा देती है।