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राजा का फ़रमान-2

Story Hindi 2 pages 14 years ago

राजा का फ़रमान-2
पिछले भाग से आगे:
राजा ने फैसला सुनाया- आज से लेकर कल इसी समय तक तेरी लगातार चुदाई होगी और वो भी भरे महल में..!!
राजा: सिपाहियो ले जाओ इस लड़की को और तैयार करो हमारे लिए! इसकी अक्ल तो हम ठिकाने लगायेंगे, आजकल बहुत पर निकल आए हैं इन रांडों के!!
मुझे महल में ले जाया गया और स्नानघर में ले जाकर एक तालाब में कपड़ों समेत धकेल दिया गया। फिर सिपाही भी नंगे हो अन्दर उतर आए और मेरे बदन को धोने के बहाने मसलने लगे।
एक ने मेरी चूत में ऊँगली डाल दी, एक ने गाण्ड में अंगूठा घुसा दिया और हाथों की उंगलियों और हथेलियों से मेरी गोल-गोल गाण्ड को मसल कर मज़े लेने लगा।
दूसरे ने मेरे चूचे दबोच लिए और एक मेरा दाना हिला हिला के मुझे तड़पाने लगा।
मेरे मुँह से आनन्द भरी आहें निकलने लगी।
तभी एक ने मेरे मुँह में दो उंगलियाँ डाल दी, कोई भी अपने औजार का प्रयोग नहीं कर रहा था, क्यूंकि सबको पता था कि मैं राजा का माल हूँ, और मुझ में मुँह मारना यानि जान से हाथ धोना!
और तभी राजा अन्दर आया और मुझे 5-6 सिपाहियों के बीच कसमसाता देख मजे लेने लगा।
मैं आँखें बंद कर आहें भर रही थी, मेरी अन्तर्वासना जाग चुकी थी, आँखों में कामवासना भर चुकी थी।
तभी जाने अनजाने मेरे हाथ एक सिपाही के लण्ड तक जा पहुँचे, सिपाही झेंपते हुए पीछे हो गया यह सोच कर कि राजा को पता लगा तो लण्ड कटवा देंगे!
मैं चुदने को तड़पने लगी।

तभी राजा ने सिपाहियों को जाने का इशारा किया और मेरी कामतन्द्रा टूट गई।
राजा पानी में उतर आया और उसने मेरे कंधे पर जोर से काट खाया, मेरा खून निकलने लगा और मुझे अपनी ओर खींचा.
वह बोला- मैं जानता हूँ कि तू अब खुद के काबू में भी नहीं है.
मैं- जा जा! तुझ में इतनी हिम्मत नहीं कि किसी औरत का सतीत्व बिना उसकी मर्जी के तोड़ सके! इतनी हिम्मत होती तो क्या औरतों पर जुल्म करता? उन्हें मजबूर करके अपनी रखैल बनाता? अपने फरमान से प्रजा को दुखी करता? नहीं, तू तो एक नपुंसक है, जब तेरी कोई भी पत्नी माँ नहीं बन सकी तो तूने बाहरी औरतों का शोषण किया, तेरे जैसा बुज़दिल और बेगैरत इन्सान मैंने आज तक नहीं देखा..!!
राजा- मैं बेगैरत … मैं बुज़दिल..? तो तू क्या है? रण्डियों की रानी? जब सिपाही तुझे मसल कुचल रहे थे, तब कहाँ था तेरा सतीत्व..!!!
मैं- वो तेरे आदेश का पालन कर रहे थे और अगर मैं साथ न देती तो तू उनका क़त्ल करवा देता! मेरी वजह से किसी बेक़सूर की जान जाये, यह पाप मैं अपने सर नहीं ले सकती..!!
राजा- अच्छा!!
यह कहते ही राजा ने मेरी चूचियों पर से कपड़ा नीचे सरका दिया। मैंने बिन कंधे का टॉप पहना था और ब्रा तो रास्ते में ही खुल चुकी थी, सो चूचियाँ उसके सामने झूलने लगी और राजा की आँखों में लालच आने लगा…
बाकी अगले भाग में…
क्या राजा मुझे पानी में चोदेगा… या मुझे अपने सिपाहियों से चुदवा कर मज़े लेगा..

क्या होगा आगे मेरे साथ ..!!!!
पढ़ते रहिए.. “राजा का फरमान”
कई भागों में समाप्त …[email protected]
कहानी का अगला भाग: राजा का फ़रमान-3

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