यह कथा सम्पूर्ण काल्पनिक है। कुछ समय से मेरे मन मै एक कथा थी पर कुछ वैसीही सुरुवात एक लेखक ने xossip पर की तो मै रुक गया। अफसोस की कथा अलग दिशा मे जाकर रुक गयी। तो आप की अनुमती से अपनी कथा यहान लिख रहा हुं।
कहानी के मुख्य पात्र
1. विक्की- 18 अभी 12वी क्लास और IIT परीक्षा पूर्ण कर छुट्टियों में घर
2. सनी- 18 विक्की की तरह छुट्टी में घर पर
3. लक्ष्मी- 22 विक्की और सनी के घर झाडू-पोछा लगाना, बरतन धोना और खाना बनाने का काम करती है।
4. पवन- 45 विक्की के पिता, अपने दोस्त के साथ अपनी कंपनी चलाते हैं।
5. समीरा- 43 विक्की की मां, पहले पती के साथ काम करती थी पर अब अपनी एजेंसी चलाती हैं।
6. अश्वेत- 45 सनी के पिता और पवन के दोस्त, कंपनी में साझेदार।
7. श्वेता- 42 सनी की मां और एजेंसी में समीरा की साझेदार।
8. पप्पू- 25 लक्ष्मी का पति, शराबी और जुआरी, लक्ष्मी को रोज़ परेशान करने के सिवा इसके पास होई काम होने का पता नही।
1
विक्की
रोज़ की तरह सुबह 8 बजे घरके सारे बड़े अपने अपने काम से चले गए और मैं बोर हो रहा था। 9th क्लास से सुबह 6 बजे उठने की आदत अब सोने नही दे रही थी। सनी को भी यही तकलीफ थी और उसने मुझे अपने कमरे में बुलाया। मैं झटसे t shirt पहनकर उपरी मंजिल पर सनी के घर पहुंचा। सनी ने दिखाया कि किस तरह उसने 6 बजे उठकर कंप्यूटर spyware बनाया और मुझे ईमेल से भेजा। अब सनी मेरे pc का webcam on कर सकता था। हम ने थोड़ी देर webcam से मेरा कमरा देखा तभी वहां लक्ष्मी आंटी आयी। वैसे तो कभी हमने इसकी तरफ देखा नही था पर आज हम इसे घूरने लगे।
लक्ष्मी पास ही की बस्ती में रहती थी। मेरे और सनी के घर काम कर अपना घर चलाती थी। हालांकि लक्ष्मी सिर्फ 22-23 की होगी हम उस आंटी बुलाते थे। लक्ष्मी आंटी ने सलवार कमीज़ पहनी थी और अपना दुपट्टा कमर पर बांध कर मेरे कमरे की साफ सफाई करने लगी। मेरा बेड ठीक करने जब वह बेड पर चढ़ी तो उसकी भरी हुई गोरी चूचियां कमीज़ के गले में से हमें साफ नजर आयी। उसके मुड़ते ही उसकी भरी गोल गदराई गंड के भी दर्शन करने को मिले। सब सामान सही करके लक्ष्मी चली गई और हम दोनों ने एक दूरे की तरफ देखा। दोनों के हात अपने खड़े लंड को छुपा रहे थे। एक दूसरे की तरफ देख कर हम हंस पड़े और लक्ष्मी का यह दर्शन कर हम उसके साथ क्या क्या करना चाहेंगे इसकी कल्पना करने लगे।
खैर आगे क्या होना था? हम online जाकर maid sex videos को देखने लगे। 2 घंटे बाद पूरी तरह उत्तेजित में अपने कमरे में लौटा। लक्ष्मी हमारे घर का काम पूरा कर उपर सनी के घर जा रही थी। मैं उस के बारे में गंदे विचार करने की वजह से उस से नजर नहीं मिला पाया, लेकिन पीछे से फिर भी उसे ताड़ता रहा। अपने कमरे में मैंने देखा की मेरा wallet आज टेबल पर ही मै भुला रखा। अंदर देखा तो पता चला कि अंदर से 500 की नोट गायब है। मुझे होई खर्च होता नहीं फिर भी मै 500 हमेशा wallet में रखता हूं।
मन में एक सवाल उठा तो मैंने सनी को webcam recording देखने को कहा।
लक्ष्मी सनी के घर साफ सफाई कर रही थी और उसे अभी कहीं और जाने को नहीं मिला था। सनी ने तुरंत footage देखा और पाया कि जब हम maid videos देख रहे थे तब लक्ष्मी ने वापस मेरे कमरे में आकर मेरा wallet साफ किया था।
हमने बात की और सोचा कि आज इसे जाने देते हैं। अगर इसने शाम तक पैसे लौटा दिए तो हम जानते थे की हमारे मम्मी पापा कुछ नहीं बोलेंगे। लक्ष्मी दोनों घर के काम करके, खाना पकाके अपने घर चली गई और हम दो शैतान अपने प्लान बनाने लगे।
2
सनी
शाम तक मैं और विक्की अलग अलग plan बनाकर बदल रहे थे। असल बात तो यह थी कि पिछले 4 सालों में हम दोनों पधाई में ऐसे मशगूल थे कि हमने कभी यारी दोस्ती नहीं की। हमें डर था कि अगर हम कॉलेज पहुंचे तो girlfriend के मामले में पक्के अनाड़ी साबित होंगे। साथही में अगर थोड़ा भी अनुभव मिले तो क्यों ना लें?
शाम 7 बजे हमारे पापा वापस आए तो हमने उनसे पूछा कि हमें कुछ दिन farmhouse जाएं। घर पर हम bore होते हैं। परसो शुक्रवार शाम को जा कर सोमवार सुबह तक लौटेंगे। पापा ने पूछा कि तुम दोनों कैसे जाओगे तो मैंने कहा की हम bike चलाके जायेंगे। पापा ने हसकर कहा की थोड़ी देर में बताता हूं।
पापा ने पवन अंकल से बात की और कहा की तुम दोनों बाईक पर नहीं कार लेकर जाओ। और 3 रात रहोगे तो खाने पीने का इंतेज़ाम हम कर रहे हैं। मुझे पता था की इंतजाम क्या होना था।
गुरुवार सुबह 9 बजे जब लक्ष्मी आंटी विक्की के घर पहंची तो विक्की वापस मेरे कमरे में आया। आज हम लक्ष्मी को नहीं अपने शिकार को घुर रहे थे। आज लक्ष्मी आंटी ने हरे रंग का कुर्ता और लाल सलवार पेहनी थी। कल की ही तरह विक्की आज भी सब बाहर छोड़ आया था। लक्ष्मी आंटी ने पहले बेड पर चढ कर उसे ठीक किया और फिर सामान जगह पर रखने लगी। आज विक्की के wallet में 4000 रूपए थे। लक्ष्मी आंटी ने झट से 1 नोट खींच ली और अपनी कमीज़ में छुपा ली। हम भी इसी का इंतजार कर रहे थे। हम दोनों विक्की के कमरे में गए और विक्की अपना wallet ढूंढ़ने का नाटक करने लगा।
विक्की-“अरे सनी मैं तुझे बता रहा हूं मैंने अभी 4000 यहां रखे थे।”
“तो अब 500 कम कैसे हो गए? कल भी तो तेरे 500 गायब हो गए थे ना?”
मैंने देखा लक्ष्मी आंटी दबे पांव बाहर खड़ी हमारी बातें सुन रही थी।
सनी-“पता नहीं यार। ये क्या हो रहा है।”
“तो चल किसी ऐसे को पूछते हैं जिसको पता हो कि यहां पर क्या हो रहा है।”
मैं बाहर झपटा और लक्ष्मी आंटी को पकड़ कर उसे कमरे में खींच लाया। लक्ष्मी आंटी ने उसे ऐसे पकड़ने के लिए हमें डांटने की कोशिश की।
मैंने कहा “देखो आंटी आपके सिवा कोई और इस घर में नहीं आया और लगातार 2 दिन पैसे गायब हो रहे हैं। आपके पास 2 रास्ते हैं, या तो हम आपकी तलाशी लेंगे या फिर हम पुलिस को बुलाएं और वोह आपकी तलाशी ले।
”
लक्ष्मी आंटी रोने लगी और हात जोड़कर बोली कि पुलिस को न बुलाएं, वह बेकसूर है। पर अब मै और विक्की उसका पुलिस का डर भांप चुके थे। हमने कड़ी आवाज में कहा कि अब वह चुप चाप हमें तलाशी लेने दे। क्योंकि चोरी दोनों बार विक्की के पास हुई थी तो विक्की का हक ज्यादा बनता था।
मैं लक्ष्मी आंटी के पीछे खड़ा हो गया और उसके हाथ पकड़ कर शरीर से दूर कर दिए। विक्की ने पहले जेब ढूंढ़ने का नाटक किया और जेब ना मिलने पर लक्ष्मी आंटी के सिनेपर हात घुमाने लगा।
मैंने विक्की से कहा, “अरे यार, कभी हिंदी फिल्म नहीं देखी? औरतों की पैसे रखने की जगह अलग होती है।”
विक्की
अब तक सब प्लान के मुताबिक हो रहा था पर अब सहना मुश्किल हो रहा था। मैंने लक्ष्मी आंटी के कंधों को दबाकर उसे घुटनों पर बिठा दिया। फिर अपना हात कमीज़ के गले के अंदर डाला। लक्ष्मी आंटी सिसकियां भरने लगी और सर हिलाकर मना कर रही थी।
दोनों गरम रसीले गुब्बारों के बीच मैंने अच्छे से हात घुमाया और दबा दबा कर टटोला।
“अरे सनी, यहां बीच में तो कुछ भी नहीं मिला।”
सनी-“विक्की तू ना पक्का अनाड़ी है। देख सिर्फ बीच में नहीं, हर तरफ देखना पड़ेगा। तू तेरे right वाला ले मै मेरे right वाला लेता हूं।”
अब लक्ष्मी आंटी रोने लगी। हात जोड़ कर माफी मांगने लगी।
लक्ष्मी-“नहीं, छोड़ दो मुझे। मैंने मज़बूरी में पैसे लिए थे। मैं लौटा देती हूं पर मुझे अब जाने दो।”
मै और सनी तस से मस नहीं हुए और दोनों ने उसके मम्मे दबाने शुरू कर दिया। मेरी उंगलियों को कुछ लगा, वह एक 500 की नोट थी। मैंने उसे निकाल कर लक्ष्मी आंटी और सनी को दिखाया।
“देखो चोरी पकड़ी गई। अब मै मम्मी पापा को फोन कर सब बताता हूं और पुलिस को भी बुलाता हूं। अब से ये किसी घर में चोरी नहीं कर पाएगी।”
लक्ष्मी आंटी ने मेरे पैर पकड़ लिए। बोली कि मै ऐसे ना करूं। पुलिस उसे कहीं का ना छोड़ेंगे और नौकरी गई तो वो बरबाद हो जाएगी। लक्ष्मी आंटी ने कहा कि वो कुछ भी करेगी अगर हम उसे बचा लें।
सनी-“विक्की तुम इसकी बातों में नहीं आना। पता नहीं और क्या क्या चोरी कर चुकी है। सीधे पुलिस को बुलाते हैं।”
“सनी, गरीब औरत ने मज़बूरी में उठा लिया तो इसकी इतनी बड़ी सजा? तूने तो news में पढ़ा ना किस तरह पुलिस पूछताछ के दौरान जवान औरतों को इस्तमाल करते हैं और साथ में उनसे धंदा भी करवाते हैं। 4 साल से हमारे यहां काम कर रही है। कुछ तो सोचना पड़ेगा।”
सनी- “तू इस चोरनी पर भरोसा करेगा? कल भी तेरे पैसे गायब थे, क्या पता और क्या क्या छुपा कर ल जा रही है?”
“बात तो तेरी भी सही है। अभी तलाशी पूरी नहीं हुई है।
देखो आंटी, अगर तुम हमें तलाशी लेने दो और बाद में हम जो सजा दे वोह करो तो हम ये बात राझ रखेंगे।
पर अगर अभी तुमने हमें रोका या सजा लेने में कुछ नखरे किए तो हम ये सारी बातें सब को बता देंगे। बोलो मंजूर है?”
लक्ष्मी आंटी ने सर हिलाकर हां कर दी और हम दोनों ने एक शैतानी मुस्कुराहट दी। पहले हम ने लक्ष्मी आंटी को खड़ा किया और फिर उसकी कमीज़ उतारी। लक्ष्मी आंटी ने रोते हुए हमे कोई रोक टोक नहीं किया। इस बात से खुश होकर सनी ने फिर से उसके हात शरीर से दूर रखने को कहा। लक्ष्मी आंटी ने skin colour जैसी कॉटन bra पहनी थी जिसमें से उसकी गोरी चूचयां उभर कर सामने आ रही थी। लक्ष्मी की बगल के बाल थे जो कि पसीने से भीग गए थे। लक्ष्मी आंटी का पेट सुडौल था और बिलकुल कसा हुआ था। आंटी की नाभि पर सलवार कि गांठ बंधी हुई थी। हम दोनों ने अच्छे से हात घुमाकर लक्ष्मी आंटी को टटोला और मज़े लिए। सनी ने सलवार का नाड़ा खींच लिया और लक्ष्मी आंटी ने झटसे अपनी सलवार पकड़ ली।
लक्ष्मी-“ये गलत काम है। मै पतिव्रता हूं। तुमने मुझे सजा दी सो मैंने ली। अब मुझे जाने दो।”
“आंटी अभी तो सिर्फ तलाशी ले रहे हैं। अगर फिर से हमें रोका तो सीधे पुलिस को बुला लेंगे। तेरी ब्रा में हमें 500 मिले हैं, न जाने और कितने तूने कहां छुपा रखे हैं।”
ऐसा कहते हुए मैंने लक्ष्मी आंटी को धक्का दिया और वो बेड पर गिर गई। सनी ने उसके हाथ पकड़ लिए और मैने उसकी सलवार खींच कर उतार दी। लाल गुलाबी फूलों वाली पिली निक्कर पहन कर लक्ष्मी आंटी बेड पर पड़ी अपने पैर पटख रही थी। मैंने फिर से आंटी को धमकाया तो वह मुंह फर कर रोने लगी। मै और सनी किसी औरत को इस रूप में पहली बार देख रहे थे। दोनों एक दम गरम हो चुके थे। पर हमला करना आज के प्लान में नहीं था।
सनी ने आंटी को पकड़ कर उसे उलटा कर दिया तो, अपनी इज्जत बचने की खुशी में आंटी झट से उलटी हो गई। अफसोस की, बात ऐसी नहीं थी। सनी ने आंटी की पीठ के दोनो तरफ अपने घुटने टेक दिए और लक्ष्मी आंटी को पकड़ लिया। अब सनी ने आराम से लक्ष्मी आंटी की ब्रा खोलते हुए उसकी पीठ पर हाथ फेरे। इसी दौरान मै भी बेड पर चढ गया और लक्ष्मी आंटी के पैरों के बीच बैठ गया। लक्ष्मी आंटी चाह कर भी सनी को रोक नहीं पा रही थी और मैंने उनकी पैंटी को कमर से पकड़ लिया।
लक्ष्मी आंटी हात पांव मार रही थी पर अब कोई रास्ता नहीं था। कुछ ही देर में लक्ष्मी आंटी पूरी तरह से नंगी होकर बेड पर पड़ी थी। हमने लक्ष्मी आंटी की ब्रा और पैंटी को छू कर, सूंघ कर तलाशा। लक्ष्मी आंटी उलटी पड़ी रो रही थी कि हम ने उसे पकड़ कर सीधा कर दिया।
लक्ष्मी आंटी ने अपने पैर दबाकर अपनी बची कुची इज्जत बचने की कोशिश की। दोनों पैरों में घने घुंघराले काले बालों का जंगल था जिसमें जवानी का हसीन खजाना दबा पड़ा था।
“सनी, क्या लगता है? अब भी इसने कुछ छुपाया होगा?”
सनी-“पता नहीं यार, अभी भी हमने दो पैरों के बीच में नहीं देखा।
देख लें?”
लक्ष्मी आंटी-“ तुम अच्छे लड़के हो। मुझे छोड़ दो। अब तो सब कुछ देख लिया है। मेरे पास मेरा अपना भी कुछ नहीं छोड़ा तुम लोगों ने। अब जाने दो।”
मैंने सनी को इशारा किया और हम दोनों बेड से नीचे उतर आए। मैंने लक्ष्मी आंटी को कपड़े पहन कर बाहर आने को कहा। लक्ष्मी आंटी जब बाहर आई तो हम ने tv पर उसे उसका चोरी वाला विडियो दिखाया। लक्ष्मी आंटी ये सबूत देख कर पूरी तरह टूट गई। वोह समझ चुकी थी कि अब उसका बचना सिर्फ हमारे हाथ में है। मैंने लक्ष्मी आंटी को बताया कि कल शुक्रवार शाम से सोमवार सुबह तक हम दोनों बाहर घूमने जा रहे हैं। लक्ष्मी आंटी को हमारे मम्मी पापा हमारे साथ भेजेंगे तो वह मना नहीं करेगी और अगर उसने कोई चालाकी करने की कोशिश की तो उसकी सजा वोह खुद समझ ले।
लक्ष्मी आंटी ने पूछा कि आप घूमने जाओगे तो मैं क्या करूंगी?
सनी-“ अरे लक्ष्मी आंटी, तुम तो हमारी teacher हो। आज जो भी नहीं किया वोह सब वहां करोगी, हमें लड़कों से मर्द बनाओगी। तुम भी मजे ले कर हमें भी मजे सिखाओ। समझी?”
लक्ष्मी आंटी अपने मुंह पर हाथ पकड़ कर घर से बाहर भाग गई।
हम कल शाम जाने कि तयारी करने में जुट गए और शाम को हमारे मम्मी पापा ने हमें बुला लिया। हमने देखा लक्ष्मी आंटी भी वहां सर नीचे किए खड़ी थी। पापा बोले कि farmhouse जाएं तो वहां बाहर कि साफ सफाई करने के लिए लोग हैं पर अंदर की सफाई और खाने के लिए लक्ष्मी आंटी को तुम्हारे साथ भेज रहे हैं। वोह तुम्हारा खयाल रखेगी।
मैंने और सनी ने इस बात का जम के विरोध किया और कहा की हम दोनों अपना खयाल रख सकते हैं। पर हमारे विरोध
3
सनी
आज सुबह से हमें अलग अलग बातें बताई जा रही थी। गाड़ी तेज मत चलाना, ठीक से खाना, वगैरा वगैरा मानो हम फॉर्महाउस नहीं सीधे कॉलेज जा रहे हों। खैर 9 बजे तक सारे बड़े चले गए और हम दो शैतान हमारे शिकार का इंतार करने लगे। 9.15 को एक डरी सहमी लक्ष्मी आंटी ने विक्की के घर दाखिल हुई।
लक्ष्मी आंटी ने निली सलवार के ऊपर पिला कुर्ता पहना था, मानो वह खुद को छुपाना चाहती हो। हमने उसे उसका काम करने दिया। हम बस हमारी packing पूरी तरह करते रहे। दोपहर का खाना बनाने के बाद हमने लक्ष्मी आंटी को हमारे साथ बैठ कर खाना खाने को कहा।
खाने की मेज पर लक्ष्मी आंटी 2 शेरों के बीच बैठी बकरी की तरह खा रही थी। जब हमारा खाना खा कर हो गया तो मैंने लक्ष्मी आंटी से पूछा कि उसका पति कैसे राजी हो गया उसे 3 दिन छोड़ने के लिए। लक्ष्मी आंटी ने बताया की पापा ने उसे 4 दिन के अलग 2000 देने का वादा किया है और इसी वजह से उसका पति तयार हो गया है।
मैंने लक्ष्मी आंटी को उसका 3 दिन का bag दिखाने को कहा। उसके bag में 3 जोड़ी कपड़े और साथ में टॉवेल, साबुन, पावडर वगैरह चीजें थी।
मैंने आंटी से कहा कि 2 बज रहे हैं और हमें 4 बजे तक निकलना होगा, तो इस देर में वह क्या करना चाहेगी?
लक्ष्मी आंटी समझ नहीं पाई कि अब क्या होगा।
हम लक्ष्मी आंटी को पकड़कर विक्की के कमरे में ले गए। वहां PC पर बुधवार की उसकी चोरी का वीडियो था, उसके बाद गुरुवार की चोरी का वीडियो चला और आखिर में कल की तलाशी लेने के बाद में लक्ष्मी आंटी के कपड़े पहने का वीडियो था। लक्ष्मी आंटी यह सब देख कर सर झुकाए बैठी थी।
“तो आंटी, क्यों न हम तुमको famous बनाएं? कई लडके तेरा नंगा बदन देख कर ही खुश हो जाएंगे। सब लोग तुझे पहचानने लगेंगे, वो रही कपड़े पहन ने वाली आंटी।”
लक्ष्मी आंटी सिर्फ सिर हिलाकर मना करते हुए रो रही थी। विक्की ने उसे हमारे सामने घुटनों के बल बैठ ने को कहा। हम दोनों खड़े हो गए तो हमारी कमर लक्ष्मी आंटी की नाक के सामने थी। मैंने लक्ष्मी आंटी को कहा कि अगर हम ये वीडियो न बांटने के बारे में सोचें तो शायद वह मदद कर सकती है। विक्की ने उसे हमारी पैंट उतार ने को कहा। लक्ष्मी आंटी ने मना करना चाहा तो विक्की ने वो वीडियो email करना शुरु किया।
लक्ष्मी आंटी ने डरते हुए अपना हाथ उसकी पैंट पर रखा और कहा की हम जो बताए वो वह करेगी पर उसे बदनाम ना करें। कांपते हाथों ने विक्की की पैंट उतार दी और उसके underwear में छुपे सांप को उपर से छुआ। विक्की ने उसे underwear उतारने को कहा तो उसने कांपते हाथों से उसकी बात मान ली। विक्की का हथियार 6 इंच लम्बा और काफी मोटा था। लक्ष्मी आंटी उसे देख ऐसे दंग रह गई मानो जिंदगी में पहली बार किसी मर्द का लौड़ा देखा हो।
विक्की ने लक्ष्मी आंटी को उसे हिलाने को कहा। लक्ष्मी आंटी ने हलके हाथों से विक्की ला लौड़ा पकड़ा और उसे आगे पीछे करने लगी। विक्की अपनी आंखे बंद कर मज़े लेने लगा तो लक्ष्मी आंटी को अपने हाथ में एक ताकत का एहसास होने लगा। उसके केवल हात हिलाने से विक्की खुश हो रहा था। मैं और इंतजार नहीं कर सकता था और मैंने लक्ष्मी आंटी को मेरी भी पैंट उतार ने को कहा।। लक्ष्मी आंटी भोंचककी हो गई कि वह दोनों को एक साथ कैसे निपटाएगी। एक हाथ से विक्की को हिलाते हुए लक्ष्मी आंटी ने दूसरे हाथ से मेरी पैंट और अंडरवियर एक साथ खींच उतारी। मेरा लौड़ा विक्की जितना मोटा नहीं है लेकिन उस से काफी लंबा है। 7 इंच का गरम छुरा अपने हाथ में लेकर लक्ष्मी आंटी मुझे देखने लगी। मैंने मुस्कुरते हुए उसे कहा कि वह अपने इस आशिक को भी मज़ा दे तो वह शरमाई।
अब तक लक्ष्मी आंटी समझ चुकी थी कि हम दोनों में से कोई भी रुकने वाला नहीं था और दोनों को एक साथ निपटाना जरूरी था। लक्ष्मी आंटी ने दोनों को एक साथ हिलाना शुरू किया। फिर थोड़ी ही देर में हम दोनों ने आह भरी और उसके चेहरे पर अपने रस का लेप करने लगे। लक्ष्मी आंटी किसी भी तरफ मुड़ती तो भी बच नहीं पाती।
अपना वीर्य से धुला चेहरा हाथों में लेकर लक्ष्मी आंटी उठी और टॉयलेट में भागी।
अगर हमारे फनफनाते गरम लौड़े इतने में ठंडे पड़ जाते तो हम खाक 18 के होते। जैसे तैसे अपने मूसल वापस पैंट में दबाकर हम दोनों बेड पर बैठ गए। लक्ष्मी आंटी जब टॉयलेट में से बाहर आईं तो हम दोनों ने उसे अपने बीच बिठाया और कहा की तुम ने हम दोनों को बहुत मज़ा दिया है और हम भी तुम को मज़ा देना चाहते हैं। विक्की ने लक्ष्मी आंटी को बाल पकड़ कर अपनी और मोड़ा और उसके होंठों पर अपने होंठ लगा कर किस करने लगा। अब तक लक्ष्मी आंटी भी गरमा गई थी और मस्ती में आ कर विक्की का साथ दे रही थी। विक्की ने kiss करते हुए लक्ष्मी आंटी को बेड पर लिटया और कमीज़ के अंदर हाथ डालकर उनके मस्त गुब्बारे दाबने लगा। लक्ष्मी आंटी भी उसे पूरा साथ दे रही थी और अपना हाथ उसके बालों में घुमाकर उसे पकड़ कर किस कर रही थी।
इसी दौरान मै लक्ष्मी आंटी के नीचे सरक गया और उसके सलवार का नाड़ा खोल उसे नीचे सरकाया। लक्ष्मी आंटी की निक्कर उनके पैरों में फसी थी पर बाकी मांसल पैर मेरे लिए खुले रहे। जब मैं लक्ष्मी आंटी के पैरों को चूम रहा था तो विक्की ने उसका कुर्ता उतार दिया और उसके गरम दूधिया गुब्बारे दाबने लगा।
लक्ष्मी आंटी अब पूरी तरह गरमा गई थी और हमारा साथ दे रही थी। मैंने आव देखा ना ताव, झपट कर दोनों पैरों को फैला कर बीच में भीगी हुई चड्डी को चूमा। लक्ष्मी आंटी सिहर उठी और उसने मुझे रोकने की आधी अधूरी कोशिश की। मैंने चूमना चालू रखा और साथ में अपनी जीभ को चूसने के लिए लगाया। लक्ष्मी आंटी आहें भरने लगी और अपने पैरों को फैला कर मेरा साथ देने लगी।
उपर विक्की ने लक्ष्मी आंटी के ब्रा को सरका कर उसके मम्मे खोल दिए और गोरे मम्मे चूमने लगा। नीचे मैंने पैरों के बीच में फसी हुई निक्कर की पट्टी को सरका कर लक्ष्मी आंटी के रस भरे खजाने को देखने लगा। काले घने बालों में चुप्पी गुलाबी मुनिया किसी घने जंगल में छिपी जादुई चिड़िया की तरह लग रही थी। मैंने धीरे से आगे बढ़ कर लक्ष्मी आंटी की खास गंध को सूंघा और मदहोश हो गया। अपनी जीभ आगे कर मैंने उसकी गुलाबी पंखुड़ियों के बीच से बेहती धारा को चखा और लक्ष्मी आंटी ने आआः की गूंज से मुझे शाबाशी दी। उपर विक्की ने गोरे मम्मों पर जड़े लाल बेरियों को चूसना शुरू किया और लक्ष्मी आंटी ने उसे अपनी बाहों में पकड़ कर अपनी छाती से चिपका दिया।
मैंने जीभ से जोर लगाकर चाटना शुरु किया तो लक्ष्मी आंटी का बदन अकड़ने लगा। उसने मुझे रोकने की लाख कोशिशों के बावजूद मैंने अपना हमला जारी रखा। कुछ देर बाद लक्ष्मी आंटी ने एक चीख निकाल कर उसके शरीर को ढीला छोड़ दिया। विक्की और मै समझ गए कि लक्ष्मी आंटी भी झड़ चुकी है और हम दोनों उठ कर बैठ गए।
मैंने दातों में फसे झाट के बाल को निकालते हुए मुंह बनाया तो विक्की हंस पड़ा।
हम दोनों ने बाहर जाकर अपनी bag समेटी और लक्ष्मी आंटी की भी bag उठाते हुए सारा सामान बाहर दरवाजे के पास रख दिया। लक्ष्मी आंटी शर्माती हुई बाहर आई और सर झुकाए खड़ी हो गई। मैंने विक्की से कहा क्योंकि लक्ष्मी आंटी ने हमें इतना अच्छा अनुभव दिया है तो हमें भी कुछ अच्छा देना चाहिए। लक्ष्मी आंटी हमें अचरज से देख रही थी।
विक्की ने एक डिब्बी से एक लिपस्टिक नुमा चीज निकली। विक्की ने फिर लक्ष्मी आंटी को सलवार का नाड़ा खोल देने को कहा। लक्ष्मी आंटी ने हिचिचाहट के साथ खोल दिया और सलवार नीचे पैरों के नीचे गिर गई। विक्की ने लक्ष्मी आंटी के पैरों को फैला कर उसकी गीली निक्कर को थपथपाया तो लक्ष्मी आंटी की आह निकल गई। विक्की ने लक्ष्मी आंटी के पैरों के बीच में निक्कर को नीचे खींचा और वह लिपस्टिक नुमा चीज उसके यौवन के फूल की गिली पंखुड़ियों के बीच रख कर उसकी निक्कर सीधी कर दी। विक्की ने लक्ष्मी आंटी को अपनी सलवार पहनने को कहा और लक्ष्मी आंटी ने झट से अपनी सलवार पहन ली।
हम सब नीचे उतर कर गाड़ी में बैठ गए। मै और विक्की आगे बैठे थे तो लक्ष्मी आंटी पीछे बैठी हुई थी। हम सब के जिंदगी का एक यादगार सफर बस शुरू हो रहा था।
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विक्की
हम सब गाड़ी में बैठे और seat belt पहन लिए। सन्नी गाड़ी चलाने वाला था, मैं उसके बगल में बैठ गया और लक्ष्मी आंटी को हमने पीछे सामान के साथ बैठने को कहा। लक्ष्मी आंटी के साथ सीट पर मेरे और सन्नी के कपड़ों की bag रखी थी और साथ में सन्नी के कुछ कपड़ों से ढकी हुई खास चीजों की bag रखी थी। लक्ष्मी आंटी के पीछे खाने पीने का सामान रखा था।
जैसेही गाड़ी शुरु हो गई लक्ष्मी आंटी ने अपने पेट के उपर हाथ रख आह भरी। सन्नी ने अचरज से पीछे देखा तो मैंने उसे आंख मारते हुए इशारा किया।
सन्नी “विक्की तू बड़ा कमिना है। अरे भाई डरा दिया ना तूने।”
लक्ष्मी आंटी समझ नहीं पा रही थी कि उसके साथ ये क्या हो रहा है। दरअसल मैंने जो लिपस्टिक लक्ष्मी आंटी की निक्कर में रखा था वोह रिमोट कंट्रोल वाला sex toy है जिसका रिमोट कंट्रोल मेरी जेब में से मैंने चालू किया था। १ से ५ की स्पीड में से अभी लक्ष्मी आंटी को सिर्फ १ का पता चला था। इससे अगले २ घंटों में लक्ष्मी आंटी गरमा गरम हो जायेगी पर छुटकारा नहीं मिल पाएगा।
हमने गाड़ी चलाना शुरू किया तो आपस में कॉलेज selection process वगैरा वगैरा बातें करने लगे। लक्ष्मी आंटी की रुचि इन बातों में नहीं थी और उसे अपने शरीर की उत्तेजना की ओर ध्यान देने के सिवा कोई चारा नहीं था। तकरीबन एक घंटे बाद लक्ष्मी आंटी अपने शरीर को कस के पकड़ कर कांपने लगी और उसका चेहरा लाल हो गया। Rear view mirror में से हम दोनों उसकी हालत देख मुस्कुरा रहे थे।
उत्तेजना और संभली जा नहीं रही थी तो लक्ष्मी आंटी ने धीरे धीरे आगे पीछे होना शुरू कर दिया। पर इस से भी उसे कोई छुटकारा नहीं मिल पाया।
१ घंटा ऐसेही तड़पाने के बाद हमने अपनी गाड़ी farmhouse के अंदर लगा दी। बाहर माली चाचा खड़े थे और उन्होंने हमारा सामान अंदर रख दिया तो हमने उनसे कहा कि लक्ष्मी आंटी की तबियत बिगड़ी हुई है तो हम उस हॉल में बिठा देते हैं। सन्नी आगे plan को अंजाम देने लगा जब मैं अपना हिस्सा करने माली चाचा के साथ बाहर गया।
मैंने माली चाचा से पूछा कि वो कहां रहते हैं तो उन्होंने कहा कि २ मील दूर गांव में उनका घर है पर वोह अपने घर हफ़्ते में १ दिन ही जाते हैं और बाकी दिन बाहर कुटिया में रहते हैं। मैंने उन्हें सोमवार सुबह तक छुट्टी दे दी और कहा कि हम दोनों अपना और लक्ष्मी आंटी का खयाल रख लेंगे। माली चाचा ने खुश होकर तुरंत अपनी धोती उठाई और चले गए।
अंदर हॉल में लक्ष्मी आंटी सोफे पर बैठ तड़प रही थी, तो मैंने रिमोट कंट्रोल मेरी जेब से बाहर निकाला और लक्ष्मी आंटी को दिखाकर स्पीड २ कर दिया। लक्ष्मी आंटी ने जैसे एक हिचकी दी और उसने मुझे उसे छुटकारा दिलाने को कहा। मैंने कहा कि दोपहर को उसके बाल सन्नी को पसंद नहीं आए, तो पहले उसके बालों से छुटकारा लेना पड़ेगा। मैंने लक्ष्मी आंटी को पकड़ कर उठाया और toilet में ले गया। वहां मेरे इशारे पर लक्ष्मी आंटी ने अपनी सलवार कमीज़ उतारी। मैंने उसे और तड़पाने के लिए ब्रा पैंटी उतार ने से मना किया। अब लक्ष्मी आंटी को हात शरीर से दूर रखने को कहा और उसकी बगल में shaving cream लगाया। एक नए razor से लक्ष्मी आंटी के बगल के बाल साफ़ कर दिए और फिर उसे धो कर साफ़ कर दिया। लक्ष्मी आंटी की पूरी कोशिश बस छुटकारा पाने तक सीमित थी। जब मैंने लक्ष्मी आंटी को अपने पैर फैला कर खड़े होने को कहा तो वो झट से मान गई। मैंने उसकी गीली निक्कर को थपथपाया तो मुझे sex toy वाली झुनझुनाहट महसूस हुई। मेरी उंगली के दबाव से लक्ष्मी आंटी सिहर उठी तो मैंने रिमोट कंट्रोल से स्पीड बढ़ा कर ३ कर दिया। लक्ष्मी आंटी ने आह भरी और मेरे कंधे पकड़ लिए। मैंने लक्ष्मी आंटी की ब्रा खोली और उसे नीचे उतर फेंका। लक्ष्मी आंटी की निक्कर मैंने नीचे बैठकर बड़ी ध्यान से उतरी। निक्कर उतारते हुए मैंने sex toy को अपनी जगह से हिलने नहीं दिया। लक्ष्मी आंटी अपना सर हिलाकर अपनी विवशता दिखा रही थी और मैंने bag में से trimmer निकाला। Trimmer का इस्तमाल करते हुए मैंने लक्ष्मी आंटी के घने जंगल को छोटी घास में बदल दिया और फिर razor का इस्तमाल कर उसकी गीली चूत के उपर एक उंगली जैसी लकीर छोड़ बाकी सब कुछ साफ़ कर दिया।
मेरे पीछे दरवाजा खुला और सन्नी ने मेरे हाथ में कुछ दिया। यह एक special bra panties का सफेद set हमने लक्ष्मी आंटी के लिए लाया था।
इसमें लक्ष्मी आंटी के मम्मे अपनी बेरीयों को प्रदर्शित करते हुए खुले छोड़ेंगे और पैंटी ना ही चूत को धकेगी न ही गांड़ को। ये sexy सुहागरात set हमने लक्ष्मी आंटी के साथ हमारे सुहागरात को यादगार बनाने के लिए लाया था।
Sex toy वाली झुनझुनाहट जाने के कारण व्याकुल लक्ष्मी आंटी को जैसे ही बताया की उसकी चुटकरा की जगह उपर bedroom में रखी है तो वह मेरा हाथ पकड़ कर मुझे खींचते हुए उपर ले आयी। Bed बिलकुल खाली था तो लक्ष्मी आंटी ने मेरी तरफ देखा। मैंने कहा कि पहले मुझे छुटकारा मिल जाएगा फिर उसकी बारी आएगी।
लक्ष्मी आंटी ने झट से मेरी कमर में हाथ डाल कर मेरी पैन्ट और underwear एक साथ उतार दी। जैसे तैसे मैंने अपनी शर्ट उतार फैंकी की लक्ष्मी आंटी ने मेरा लौड़ा गले तक निगल लिया। मेरी तो जान गले में आ गई। मैंने लक्ष्मी आंटी को धक्का दे कर लिटा दिया और उसके ऊपर लेट कर उसे kiss करने लगा। लक्ष्मी आंटी ने मेरा साथ देने में कोई कसर नही छोड़ी।
मेरे कड़क लौड़े का सुपारा जब उसकी मुनिया को चूमने लगा तब लक्ष्मी आंटी को कुछ होश आया। उसने मेरी kiss रोकते हुए मुझे मना कर दिया। पर असलियत में वो लाचार थी। उसे kiss करते हुए मैंने उसके पैर फैला दिए थे और अपने हाथों से उसके कंधे पकड़ लिए थे।
लक्ष्मी आंटी-“ विक्की बाबू मुझे छोड़ दो। मैं पतिव्रता हूं, में मर जाऊंगी, मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी। जाने दो विक्की बाबू आपको कसम आपकी ई… ई… ई… आंह… मां… आह… हा… हा… ई… ई… इश…”
मेरा सुपाड़ा दनदनाते हुए लक्ष्मी आंटी को चीरता हुआ अंदर दाखिल हो गया और लक्ष्मी आंटी की दर्द भरी चीखों ने पूरा farmhouse हिलाकर रख दिया। लक्ष्मी आंटी इतनी tight निकली की अंदर जाते हुए काफी जोर देना पड़ा और मुझे थोड़ा दर्द भी हुआ। अगर में रुक जाता तो डर था कि अनाड़ी साबित हो जाता इसलिए मैंने अपना छुरा पूरा घोंपकर फिर सुपाड़े तक बाहर निकाला। लक्ष्मी आंटी ने रोते हुए एक सांस ली और मैंने फिरसे अपना छुरा घोंपकर लक्ष्मी आंटी की चीख निकाली। अब मैं बिना रुके अंदर बाहर करने लगा और लक्ष्मी आंटी मुंह फेर कर जोर जोर से रो रही थी। लक्ष्मी आंटी के रोने से, चीखने से मेरे अंदर एक जानवर जाग रहा था। मानो एक शेर किसी हिरन की आखरी पुकार सुन अपनी जीत का एहसास करता है। मैं इस पतिव्रता को लूटने में कोई कसर नही छोड़ रहा था तो लक्ष्मी आंटी भी अपनी उत्तेजनावश नीचे से हिलकर मुझे साथ देने लगी। इस खेल का मेरा पहला match होने के कारण मैं तो zero पर out नहीं होने में ही खुश था पर लक्ष्मी आंटी इतनी कसी हुई निकली की 5 मिनट के पलंग तोड़ कुटाई के बाद ही मै झड़ कर छूट पाया। स्त्री सुख के पहले स्वाद को चखकर मैंने कराहते हुए मैंने अपने ज्वालामुखी का तपता लवा रस लक्ष्मी आंटी की कोख में उड़ेल दिया।
लक्ष्मी आंटी मुंह फेर कर जोर जोर से रो रही थी और मैं उसके ऊपर लेट कर उसके गाल और कान को चूमकर उसे बता रहा था कि मुझे बड़ा मज़ा आया। सन्नी ने मेरे हाथ को छू कर इशारा किया और फिर मैं लक्ष्मी आंटी के ऊपर से उठ गया। लक्ष्मी आंटी एक ओर मुड़कर रोने लगी पर मैंने अभी भी अपना लौड़ा बाहर निकाला नहीं था। मैंने लक्ष्मी आंटी के पैरों को फैला कर अपना लौड़ा बाहर निकाल लिया और अपने कारनामे को देखने के लिए नीचे देखा तो हक्काबक्का रह गया।
4 साल से शादीशुदा लक्ष्मी आंटी किसी कुंवारी लड़की की तरह खून में लथपथ पड़ी थी।
5
सन्नी
Plan के मुताबिक विक्की को सफेद sexy सुहागरात set देने के बाद ही मैंने video recording शुरू कर दी। लक्ष्मी आंटी तो विक्की को ऐसे खींच कर ऊपर bedroom में ले गयी मानो विक्की का अब बलात्कार करके ही दम लेगी। दोनों आपस में इतने उलझे हुए थे कि वे मुझे मानो भूल गए।
लक्ष्मी आंटी शायद यह सोच रही थी कि सुबह की तरह अब विक्की उसे मज़ा देगा तो यह गलती उसे जल्द ही पता चल जाएगी। जैसे लगा था वैसे ही लक्ष्मी आंटी चूक गई और विक्की के बदन के निचे दब गई। विक्की ने लक्ष्मी आंटी को kiss करते हुए अपने लिए उसके पैरों के बीच जगह बना ली और उसके हाथों के नीचे से उसके कंधे पकड़ लिए। लक्ष्मी आंटी खतरे को भांप गई पर बहुत देर से। इस से पहले की लक्ष्मी आंटी विक्की को कोई कसम दे पाती विक्की का हमला हो चुका था।
उफ्फ क्या scene था!
लक्ष्मी आंटी मदहोशी में विक्की को kiss करते हुए अचानक रुक जाती हैं और आंखों को खोलकर विक्की को देखती है। फिर पुरानी फिल्मों की तरह हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाने लगती हैं। विक्की की अनसुनी देख उसे कसम देनेकी कोशिश और आधे अधूरे वाक्य में आई दर्दनाक चींख। उसके बाद दर्द से संभल कर मुंह फेर के अनदेखी आँखो से देखना। अगर कोई ग़लती से भी मेरा हथियार छू लेते तो मेरे बंदूक की सारी गोलियां वही चल जाती। दरअसल plan यह था कि हम लक्ष्मी आंटी को इतना उत्तेजित कर देते की वह हमें रोकने का नहीं सोचती और इस बात का recording आगे हमे उसे इस्तमाल करने में मदत करता। जब विक्की माली चाचा को भगा रहा था और लक्ष्मी आंटी नीचे बैठी थी तब मैं इस पूरे कमरे को camera के जाल में बुन रहा था।
5 मिनिटों की ताबड़तोड़ फायरिंग के बाद जब विक्की की गोलियां लक्ष्मी आंटी में घुसी तो मेरे लिए रुकना नामुमकिन लग रहा था। मैंने विक्की को इशारा किया तो वह उठने लगा और मैंने विक्की का बाहर निकलता हथियार camera से देखा तो डर गया।
विक्की का लौड़ा मुझसे ज्यादा मोटा था पर किसी शादीशुदा आंटी का इतना खून निकाले इस पर यकीन करना मुश्किल था। क्या ताबड़तोड़ फायरिंग में लक्ष्मी आंटी कि चूत फट गई थी? इस हालत में डॉक्टर को बुलाना भी मुश्किल था। विक्की और मैं, एक दूसरे को इशारों में बोलने को कह रहे थे।
आखिर में विक्की ने पहल की, “आंटी, तुम तो 4 साल से शादीशुदा जिंदगी जी रही हो, तो यह कैसे हुआ कि आप किसी कुंवारी दुल्हन की तरह खून से सनी हो? लक्ष्मी आंटी जो होना था वो हो गया है। अब तो तुम सच बता दो। तुम पतिव्रता बोलती रही पर हम ये कैसे समझते कि मामला कुछ और है।”
लक्ष्मी आंटी गुस्से बोली, “तो अगर मैं बता देती की मैं एक कुंवारी दुल्हन हूँ तो क्या तुम दोनों मुझे छोड़ देते? अगर बोल देती कि मेरा पति पिछले 4 सालोंसे इतनी पिता है कि वह अभी तक मुझे अपनी पत्नी नही बना पाया तो छोड देते? अगर बता दिया कि जब वह करना चाहता है पर शराब के कारण खड़ा नहीं कर पाता तब पिटता है, तो छोड़ देते?”
मैंने कहा, “नहीं, बिलकुल नहीं।”
लक्ष्मी आंटी और विक्की दोनों मेरे तरफ देखने लगे। मैन लक्ष्मी आंटी से सीधी बात करना बेहतर समझा।
“देखो लक्ष्मी आंटी, तुम इतनी सुंदर हो के कोई भी तुम्हें अपना बनाना चाहेगा। अफसोस की बात तो यह है कि तुम्हारे पति को यह बात नहीं समझी। अगर तुम तलाशी लेते समय बोल देती की तुम कुंवारी दुल्हन हो तो सच में मैं अपने आप को रोक नहीं पाता और वहीं पर विक्की के bed पर तुमको मेरी बना लेता। लेकिन अगर हमें यह बात पता होती तो शायद हम कोशिश करते कि तुम्हें इतनी तकलीफ सहनी न पड़े। लक्ष्मी आंटी हम तेरे प्रेमी बनाना चाहते हैं तो तुम्हें तकलीफ देने मे कोई मतलब नहीं बनता। है ना?”
लक्ष्मी आंटी सोच में पड़ गई तो मैंने अपने कपड़े उतारे और उसे अपनी बाहों में लेकर bed पर लेट गया।
लक्ष्मी आंटी, “अगर तुम दोनों चाहते तो झूठ बोल कर मुझे बनाने की कोशिश कर सकते थे पर तुम ने सच कहा। तो ये भी हो सकता है कि तुमने पूरा सच कहा है और मेरे कुंवारी रहने में मेरा कोई दोष नहीं है। लेकिन अब मैं और ये वाला काम नहीं कर सकती। मुझे बहुत दर्द हुआ था। फिर से दर्द सहा नहीं जायेगा।”
“अरे लक्ष्मी आंटी, तुम्हें हम ने यहां लाया था हमें जवानी के खेल सिखाने के लिए, लेकिन तुम भी तो कुंवारी निकली। तो क्यों न हम सब मिलकर ये खेल सीखें। तुम भी तो पिछले 4 सालों में काफी तड़पी होगी इस खेल के लिए।”
विक्की, “चलो एक काम करते हैं। सन्नी, मैंने तो अनजाने में कुछ ज्यादा ही जोर लगा दिया होगा। तू लक्ष्मी आंटी को प्यार से लेकर उन्हें यह खेल कितना अच्छा है ये बता।”
लक्ष्मी आंटी विक्की की बात सुनकर चौंक गई और भागने का रास्ता ढूंढने लगी। विक्की ने लक्ष्मी आंटी के हाथ पकड़कर ऊपर किये और bed के headboard मैं लगाये हुए हथकड़ियों में अटका दिये। सदमें में लक्ष्मी आंटी कुछ समझ पाती इस से पहले मैं उसके ऊपर लेट गया और लक्ष्मी आंटी के गाल और कान चूमने लगा।
लक्ष्मी आंटी को अब उम्मीद थी कि मैं अपने हथियार को उनके अंदर घुसा दूंगा पर ऐसा कुछ हुआ नहीं। मैंने आंटी की गर्दन को चूमते हुए नीचे सरकना शुरू किया।
लक्ष्मी आंटी उसके ममों को किये गए प्यार से इतनी उत्तेजित हो गई कि उसने मुझे कहा कि मैं उसे अपना बना लूं।
मैंने अपने सुपडे को उसकी घायल मुनिया के मुंह पर रगड़ कर वहां लगे खून, वीर्य और काम रस के मिश्रण से गिला कर दिया। जब लक्ष्मी आंटी की तरफ से कुछ उत्तेजित आह मिली तो मैंने धीरे से सुपडे को अंदर घुसा दिया। लक्ष्मी आंटी ने चीख कर मुझे रोकने को कहा तो मैं रुक गया और धीरे धीरे उतनी गहराई तक आगे पीछे होने लगा। जब लक्ष्मी आंटी ने रोकना बंद किया तो मैं और 1 इंच अंदर धस गया। धीरे धीरे इसी तरह मैं पूरी तरह लक्ष्मी आंटी को मजे देने लगा और लक्ष्मी आंटी भी मुझे चूमते हुए मजे लेने लगी। विक्की ने लक्ष्मी आंटी के हाथ खोल दिए तो आंटी ने मुझे अपनी बाहों में पकड़ कर जोर जोर से उलटे धक्के देकर मेरा लौड़ा पूरा लेनेकी मानो शर्त लगादी। मेरी तलवार विक्की के मूसल जितनी मोटी नहीं थी पर उस से ज्यादा लंबी थी। मैं लक्ष्मी आंटी की कोरी गहराईयों को छेड़कर उसे नए आनंद दे रहा था। लक्ष्मी आंटी की चूत स्त्री उत्तेजना के रस, खून और विक्की के वीर्य से भरकर इतनी गीली हो गई थी कि मेरी तलवार अब बिना किसी तरह की दर्द दिये लक्ष्मी आंटी को फाड़ रही थी। हम दोनों मस्ती में एक दूसरे को मजा देते हुए जवानी के खेल का लुत्फ उठा रहे थे और विक्की चुपचाप हमें record कर रहा था।
लक्ष्मी आंटी अब दर्द भूल चुकी थीं और गरमा के मजे ले रही थी। मेरी धीमी गति के शुरुवात और लक्ष्मी आंटी के अंदर फैले हुए माल के कारण मुझे थोड़ी देर लग रही थी लेकिन इस बात से लक्ष्मी आंटी खुश थी। लक्ष्मी आंटी मानो कई सालों के बाद अपनी भूख मिटा रही थीं। 7 मिनिटों तक लक्ष्मी आंटी के साथ धमाचौकड़ी मचाने के बाद मेरा signal आया। मैंने कराहते हुए अपनी कमर दबाई और लक्ष्मी आंटी से अपने लौड़े को सटा दिया। मेरा सुपाड़ा लक्ष्मी आंटी की कोरी कोख में मेरे रस की बौछार करते हुए मुझे अपने जीवन के पहले स्त्री सुख की अनुभूति दे रहा था। लक्ष्मी आंटी ने मुझे अपनी बाहों और पैरों से जकड़ लिया। लक्ष्मी आंटी तो मानो मेरी एक एक बूंद अपने अंदर लेना चाहती थीं।
लक्ष्मी आंटी को चूमते चाटते हुए थोड़ी देर बिताने के बाद मैं उसके ऊपर से उठ गया। नीचे देख कर अपना लौड़ा बाहर खींच लिया। मेरा लौड़ा खून और वीर्य के साथ पोता गया था, तो लक्ष्मी आंटी की चूत लाल गुलाबी झाग में लिपटी हुई थी। सफेद crotchless पैंटी के दोनों छोर खून से सने थे। जैसे ही लक्ष्मी आंटी को एहसास हुआ कि मैं, वोह और camera से विक्की सब उसकी चूत निहार रहें हैं, उसने अपने हाथों से अपनी मुनिया को ढकने की कोशिश की। लक्ष्मी आंटी मुड़ कर टॉयलेट की ओर भागी।
बीच में ही मैंने और विक्की ने उसे पकड़ लिया। हमने उसे वापस bed पर लिटाया।
दाहिने हाथ पर विक्की ने अपना सर रखा तो अपने पैर से उसके दाहिने पैर को बाजू में किया। मैंने भी बायें हाथ पैर को वैसे ही पकड़ा तो अब लक्ष्मी आंटी अपने दोनों हाथ पैर फैलाये bed पर हम दोनों के निचे पड़ी थी।
“लक्ष्मी आंटी, ये तो अच्छा हुआ कि विक्की ने पहले ही माली चाचा को भगा दिया है वरना वोह भी अभी अपनी बारी लेने के लिए तैयार होते।”
लक्ष्मी आंटी तो माली चाचा को जैसे भूल ही चुकी थीं, पर हम दोनों उसे और नहीं बाटेंगे यह सुनकर थोड़ी शांत हो गई। हम दोनों ही उसकी खुली चूत और पेट को छू रहे थे और मंमों को चूम रहे थे।
मैंने हम दोनों के मन में घूमने वाला सबसे बड़ा सवाल पूछा, “लक्ष्मी आंटी, तुम्हें भी मजा आया ना?”
लक्ष्मी आंटी ने हमारे बालों में से हाथ घूमते हुए कहा, “तुम दोनों बड़े शैतान हो। पहले मुझे इतना गरम किया के मैं चल नहीं पा रही थी। फिर ऐसे फाड़ा के मैं चलने से भी डरती हूँ। और अब पूछते हो कि मजा आया कि नहीं? सुनलो, मजा तो तब भी आया जब विक्की बाबू ने अपनी गर्मी मेरे अंदर फैलाई। जब सन्नी बाबू ने किया तो और भी मजा आया क्योंकि दर्द नहीं किया। पर अब मुझे जाने दो। ऐसे लगता है कि मेरे अंदर से छिल गया है और ऊपर से अंदर से पूरा चिपचिपा लग रहा है। हटो अब।”
मैंने लक्ष्मी आंटी को डांटा की ये चिपचिपा हम दोनों का तेरे साथ किया प्यार है। इसे बिल्कुल साफ नहीं करना। ये हमारे लिए एक यादगार तोहफा दिया है तुमने। इसे ऐसे धोकर मत निकालो।
लक्ष्मी आंटी शर्माकर मुस्कुराई। मैं और विक्की अपनी प्रेमिका को बीच में लिए bedroom से ऐसे ही नीचे उतरे। मैं और विक्की पूरे नंगे थे तो लक्ष्मी आंटी खून से सनी sexy सुहागरात ड्रेस में थी। शाम के 7 बजे थे और हम सब खाना बनाने में एक दूसरे को मदत करने लग गये।
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विक्की
लक्ष्मी आंटी कि seal तोड़कर जैसे हमने किसी बोतल में से जिन्न निकाला था। सफेद sexy set में अपनी कमर मटकाकर वोह मुझे और सन्नी को ललचा रही थीं। पीछे से देखने से पैंटी में लगे खून के दाग तो मुझे गर्व का एहसास करते थे। लक्ष्मी आंटी ने सन्नी को उबले अंडे छीलने को और मुझे प्याज काटने को कहा था। ये लक्ष्मी आंटी का मुझसे बदला था उसे रुलाने के लिए। खैर, हम सब ने मिलकर काम किया तो खाना आधे घंटे में बन गया।
सन्नी ने वहीं एक चटाई फैलाई और हम सब नीचे बैठ कर खाने लगे। अगर कोई नया जोड़ा खाने बैठे तो क्या नजारा होगा? अब अगर इस जोड़े में दुल्हन एक और दूल्हे दो हो तो? हम लक्ष्मी आंटी को छेड़ रहे थे, छू रहे थे और उसे खिला रहे थे। लक्ष्मी आंटी ने भी मुझे माफ़ कर दिया था और हम दोनों के साथ मजे ले कर foreplay का खेल, खेल रही थी।
जैसे तैसे हमने खाना पूरा किया और लक्ष्मी आंटी के न चाहते हुए भी बर्तन साफ किये।
मैं नहीं चाहता था कि बाद में लक्ष्मी आंटी किसी और बारे में सोचे। जैसे ही बर्तन साफ हो गए मैंने लक्ष्मी आंटी को उठाकर अपने कंधे पर डाला। लक्ष्मी आंटी चीखते हुए हसने लगी तो सन्नी ने उसकी उभरी हुई गांड पर एक छोटा थप्पड़ मारा।
सन्नी, “जी भर के हंस लो आंटी क्योंकि ऊपर ले जा कर हम तुझे रात भर रुलाएंगे।”
सन्नी कि बात पर विश्वास नहीं करने की गलती लक्ष्मी आंटी ने की। ऊपर लक्ष्मी आंटी को मैंने bed पर पटखा तो वह झूठ मुठ में भागने लगी। हम दोनों ने उसे अपने नीचे दबाया तो वह गिड़गिड़ाने का नाटक करने लगी।
लक्ष्मी आंटी, “छोड़ दो मुझे विक्की बाबू, सन्नी बाबू। आप दोनों ने मुझे जो सजा दी उस से अब मैं मुंह दिखाने के लायक नहीं बची। तुम दोनों ने ही मुझे ऐसे फाड़ दिया है कि मैं अंदर से छिल गई हूं। भला कोई भी एक कुंवारी दुल्हन के साथ ऐसा करता है क्या? अब मुझे जाने दो वरना मैं तुम दोनों की शिकायत करूँगी।”
इस खेल में हमें भी मजा आ रहा था पर लक्ष्मी आंटी नहीं जानती थी कि वह कहां फस चुकी थी। मैंने सन्नी से कहा कि अगर लक्ष्मी आंटी हमारी शिकायत करे तो वह कैसे बताएगी की किसने उसके साथ क्या किया? सन्नी मेरा इशारा समझ गया और bed से उतरकर कुछ ले आया। जब लक्ष्मी आंटी सन्नी के हाथ में क्या है देखने के लिए मुड़ी तो मैंने उसके हाथ पकड़कर bed के ऊपर लटकाये हुए हथकड़ियों में बंद कर दिये। लक्ष्मी आंटी हाथों की तरफ देख रही थी कि सन्नी ने उसकी आँखों के ऊपर एक पट्टी बांध दी। अब जब लक्ष्मी आंटी की आंखे बंद हो गई थी तो वह अपने शरीर के साथ हो रहे हर बात को ज्यादा महसूस कर सकती थी। लक्ष्मी आंटी नहीं जानती थी कि उनके साथ क्या होने वाला है तो वह डर गई। मैंने उसे पीठ पर लिटा दिया और उसके ऊपर लेट गया। लक्ष्मी आंटी ने मुझे चूमने के लिए जैसे ही अपना मुंह उठाया तो सामने मेरे मोटे लौड़े का सुपाड़ा पाया। लक्ष्मी आंटी ने बिना वक़्त गंवाए मुझे अपने मुंह में लेकर मुझे जोर जोर से चूसने लगी। मेरी आंखों के सामने लक्ष्मी आंटी कि मेरे और सन्नी के रस से भरी जख्मी चूत थी। मैंने सोचा कि अगर सन्नी मेरे रस में अपना लौड़ा डालने से नहीं हिचकिचाता तो मैं क्यों रुकूँ? वैसे भी लक्ष्मी आंटी को चूत साफ करने से हम ने ही रोका है। मैंने अपनी उंगलियों से लक्ष्मी आंटी के जख्मी फूल को छेड़ना शुरू किया, तो लक्ष्मी आंटी ने आँहें भर मुझे उसकी पसंद सीखने लगी। लक्ष्मी आंटी कि चूत के ऊपर से उंगली घूमने से वह अपने कूल्हे उठाकर मेरा साथ देते हुए मेरी उंगली अंदर लेनेकी कोशिश करती, तो चूत के ऊपर के उभरे हुए दाने को छेड़ने पर कसमसाहट से आह भर देती। सन्नी इस दौरान लक्ष्मी आंटी कि हर हरकत को record कर रहा था।
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मैंने भी अपनी ताल बना ली और लक्ष्मी आंटी के बदन की सितार बजाने लगा।
मेरे बाए हाथ की बीच उंगली से लक्ष्मी आंटी की चूत के मुंह में अंदर बाहर होते हुए मैं उसी ताल में दहिन हाथ की बीच उंगली से लक्ष्मी आंटी कि चूत का दाना घुमा रहा था। लक्ष्मी आंटी तडपकर मुझे चूस रही थी तो मैं भी हिल कर उसका मुंह चोद रहा था।। आखिर में लक्ष्मी आंटी का बदन अकड़ा और उसकी चूत से रस का रिसाव हुआ। लक्ष्मी आंटी ने मुझे इतनी जोर से चूसा के मेरा लंड सीधे उसके गले में दाखिल हुआ। मेरी सबर का बांध टुटा और मेरा रस उसका पेट भरने लगा। लक्ष्मी आंटी के गले में अटका मेरा डंडा उसकी सांस रोक रहा था और इस बात के कारण लक्ष्मी आंटी बस झड़ते जा रही थीं।
जब मेरा रस बह गया तब मैंने अपने लौड़े को बाहर खींच लिया। लक्ष्मी आंटी ने एक गहरी सांस ली और फिर धीरे धीरे उसका झड़ना बंद हुआ। झड़ के पस्त मैंने घूम कर लक्ष्मी आंटी को अपने ऊपर ले लिया। अब लक्ष्मी आंटी कि चूत मेरे गले पर थी तो उसके दोनों जांघों के बीच में मेरा सिर था। लक्ष्मी आंटी ने मेरी जांघों पर सर रख कर एक बडी गलती कर दी।
लक्ष्मी आंटी ने मुझे अपने दांतों से चिमटी काटकर पुकारा, “सन्नी बाबू?”
7
सन्नी
मेरा खून खौल उठा जब मैंने लक्ष्मी आंटी को विक्की को मेरे नाम से पुकरते सुना। Camera बगल में रख मै भी बेड पर चढ गया और लक्ष्मी आंटी के पीछे घुटनों के बल खड़ा हो गया। विक्की ने मेरे इरादे को भांप लेते हुए लक्ष्मी आंटी के पैरों को और फैला दिया। मैंने लक्ष्मी आंटी की कमर को कस कर पकड़ लिया और उसे पिछे खींचते हुए कूत्तीया के जैसे हाथों और घुटनों पर खड़ा कर दिया। मैंने लक्ष्मी आंटी को पहले चाट कर झडाया था तो विक्की ने लक्ष्मी आंटी की seal खोली और फाड़ी थी, तो लक्ष्मी आंटी के मन में हम बस वही कर सकते थे।
मेरे लौड़े का सुपारा पीछे से छूटे ही लक्ष्मी आंटी ने हंस कर कहा, “थोड़ा रुक जाओ विक्की बाबू। मै अभी… आ… आह… सन्नी बाबू!!! ईश… उफ्फ… धीरे से बाबू आपका ज्यादा लंबा है। पूरा झटका मत करो, आप दोनों ने कहा था कि मुझे प्यार करेंगे। आह… गुस्सा मत करो, अंह… धीरे सन्नी बाबू।”
विक्की नीचे से थोड़ा सरक गया और लक्ष्मी आंटी के झूलते हुए मम्मे दबाकर बोला, “लक्ष्मी आंटी तेरे पास दो प्रेमी है तो हम तेरे साथ के लिए सब कुछ बांट लेंगे। मगर तू हमारी प्रेमिका है तो तू अपने यारों कि पहचान सीख। हम एक दूसरे की पहचान नहीं बाटेंगे।”
बेचारी लक्ष्मी आंटी क्या करती? चिल्ला चिल्लाकर मेरे झटके खाकर मजे लेती रही। विक्की ने नीचे से बाहर आकर लक्ष्मी आंटी के सामने घुटनों के बल खड़ा हो गया। अपना फिर से खड़ा होता लौड़ा लक्ष्मी आंटी को चूसने दिया। आंखे बंद लक्ष्मी आंटी हाथ बंधे हुए दोहरा मार झेल रही थी।
मेरा हर झटका विक्की के सुपाड़े को लक्ष्मी आंटी के गले के नीचे उतार देता और लक्ष्मी आंटी सांस लेने के लिए पीछे आती तो मेरी तलवार को अंदर तक लेकर फिर गांड़ से मुझे धकेलना पड़ता। कुछ ही समय में अपनी अपनी ताल पकड़ कर हम सब इस तिकड़म के मज़े लेने लगे। लक्ष्मी आंटी मजे से एक साथ चूसने और चुधने के मजे लेती आहें भर रही थी।
दस मिनट बाद जब मैंने लक्ष्मी आंटी की बूर को अपने गरम पानी से धोया तब तक लक्ष्मी आंटी की कई बार चीखें निकल गई थी। झडकर थकी हुई लक्ष्मी आंटी को हम दोनों ने राहत देने से मना किया। जैसे ही मैं लक्ष्मी आंटी की कोख में से अपनी तलवार बाहर निकाल कर बाजू हुआ तो लक्ष्मी आंटी भी थोड़ी पिछे हो गई। विक्की ने मौक़ा पकड़ कर मेरे साथ अपनी जगह बदल ली। मैंने लक्ष्मी आंटी की बूर चाटी थी पर उसने अब तक मेरा रस पिया नहीं था तो मैं लक्ष्मी आंटी के मुंह में हम सब के रस और लक्ष्मी आंटी के खून से रंगा मेरा लौड़ा घुसा दिया। लक्ष्मी आंटी गुं……… गूं…की आवाज कर चुध रही थीं। लक्ष्मी आंटी नज़ाने कितनी बार झड़ चुकी थी पर हम दोनों ने अपनी सलामी देने तक रात के १०बज गए थे। लक्ष्मी आंटी किसी sex-doll की तरह बेड पर पड़ी थी तो हम दोनों ने उसे अपने बीच लेकर सोना ठीक समझा।
8
विक्की
अगर 2 18साल के लौड़ों को 1 कोरी जवान बूर मिले तो क्या होगा?
रात को सोते समय हम दोनों दो दो बार लक्ष्मी आंटी की चूत के मज़े लेते हुए एक एक बार लक्ष्मी आंटी के मुंह में दिया था। सबेरे 5 बजे flush के आवाज से मेरी नींद खुली। रात को ठीक से सोया नहीं था क्यूंकि जैसे ही हम दोनों में से कोई भी उठ जाता वह सोती लक्ष्मी आंटी की सुनी मुन्निया को अपने कड़े लौड़े का साथ देने में लग जाता। जब तक वह लक्ष्मी आंटी का पेट भर बगल में लेट जाए दूसरा उसके रस में अपना योगदान देना शुरु कर देता। सुबह होते होते तो लक्ष्मी आंटी की हालत ऐसी थी कि हम दोनों को वह अपने पैर फैला कर देते हुए बस नींद में चूध रही थीं।
5 बजे जब दबे पांव लक्ष्मी आंटी toilet में गई तो हम दोनों ने अपनी मर्दानगी का सबूत बेड के बीच देखा। खून और यौन क्रीड़ा के रसों का एक तकिए जितना बड़ा दाग हम दोनों को शाबाशी दे रहा था। सन्नी ने उठकर bag खोली तो मैंने उसका इशारा समझते हुए कैमरा उठाया। लक्ष्मी आंटी ने toilet का दरवाजा खोला और हमें उठा देख वहीं पर रुक गई।
“लक्ष्मी आंटी, हमने बताया था कि हमारे प्यार के निशानी को धोना नहीं। तो चलो इधर आओ और दिखाओ के निशानी बाकी है या नहीं।”
“विक्की बाबू, सुबह जल्दी उठकर अंदर जाने की आदत है मुझे। फिर धोते हुए सब कुछ धूल जाता है ना?”
सन्नी लक्ष्मी आंटी को bed पर ले आया और लक्ष्मी आंटी के पैरों को फैला कर उसकी गीली पंखुड़ियों को चाटने लगा। लक्ष्मी आंटी ने बस नाम का विरोध करते हुए मजे लेने लगी।
लक्ष्मी आंटी को हम दोनों ने अब तक 5-5 बार चोदा था और अभी तो हमें यहां आए १२ घंटे भी नहीं हुए थे। लक्ष्मी आंटी की चूत साफ पाकर सन्नी ने झूठ मुट की डांट लगाई।
सन्नी, “लक्ष्मी आंटी, हमारे रात भर की मेहनत और प्यार को इतनी बेरहमी से धो देने की सजा तुम्हें देनी पड़ेगी। अब मैं यह सजा सुनता हूं कि तुमने हमारा जितना प्यार धोया है वह फिर से भर दिया जाए। इस बार तुम्हें ऐसे भर देंगे कि तुम उसे धो नहीं पाओगी।”
लक्ष्मी आंटी, “सन्नी बाबू, इतना न सताओ। कल रात को तुम दोनों ने मेरी हालत पतली कर दी। जरा सोचिए कि मुझे कितनी बार आपके प्यार को लेना पड़ा है। मैं कच्ची कली कल से 10 बारी आप दोनों से कुटी हुई हूं। 4 बारी आप दोनों ने मुझे अपना पानी पिलाया। अब और नहीं झेल पाऊंगी। थोड़ी देर रुक जाओ, मैं तुम दोनों के लिए बढ़िया चाय नाशता ले आती हूं।”
सन्नी ने लक्ष्मी आंटी की बात नहीं मानी और लक्ष्मी आंटी को पेट पर लिटाते हुए उसके ऊपर लेट गया। लक्ष्मी आंटी के पैरों को फैला कर सन्नी का हतियार बीच में घुस कर लक्ष्मी आंटी की चूत चूम रहा था। लक्ष्मी आंटी भी गरमाने लगी और अपने कु्हे उठा कर सन्नी को जगह देने लगी। मैं उन दोनों की रासलीला को कैमरे में कैद कर रहा था। सन्नी ने अब अपनी जगह बना ली थी और उसने अपने हाथ लक्ष्मी आंटी के बगल में से अंदर लेते हुए लक्ष्मी आंटी के कंधों को पकड़ लिया। सन्नी के लन्ड का सुपारा लक्ष्मी आंटी की बूर के रस से भीग अब बिलकुल चिकना चमकदार हो गया था।
लक्ष्मी आंटी, “सन्नी बाबू, अब और मत तड़पाओ। डाल दो अपना छुरा मेरी कोख में। फ़ाड़ दो मुझे अपने हतियार से!”
सन्नी ने अपनी कमर उठाई और अपनी गाड़ी का इंजन full speed में आगे चला दिया।
लक्ष्मी आंटी, “सन्नी बाबू, जल्दी से करो। अब मत तड़पाओ। सन्नी बाबू, रुक जाओ!! गलत जगह आ… आह… उंह… उफ्फ… इय्या… माँ… मरी… बचाओ… हा… हा… हा… नहीं… नहीं… विक्की बाबू!!! बचाओ मुझे!!!”
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सन्नी का सुपारा लक्ष्मी आंटी के संभलने से पहले ही लक्ष्मी आंटी की गांड़ को फाड़ अंदर दाखिल हो गया था। लक्ष्मी आंटी अपना बदन हिला कर सन्नी को बाहर निकाल ने कि कोशिश कर रही थी पर लक्ष्मी आंटी की कोशिशें सन्नी का लौड़ा और अंदर घुसा रही थी। लक्ष्मी आंटी की गांड़ ने सन्नी के सुपाड़े को ऐसे जकड़ लिया था कि सन्नी अब चाहकर भी अपना लौड़ा बाहर निकाल नहीं पाता।
लक्ष्मी आंटी अपने पैर पटख रही थी, सर झटक रही थी, मुठियों में चादर पकड़ कर अपने शरीर का पूरा जोर लगा रही थी। लक्ष्मी आंटी के आंखों में आंसू छलक आए और लक्ष्मी आंटी ने अपने सर को झुका कर अपना चेहरा छुपाने की कोशिश की। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के बाल पकड़ कर खींच उसका रोता हुआ चेहरा camera को दिखाया।
लक्ष्मी आंटी ने समझ लिया कि कल शाम जो शिकारी विक्की के रूप में उसकी कुंवारी चूत फाड़ गया वह अब सन्नी के रूप में उसका आखरी छेद फाड़ रहा है। लक्ष्मी आंटी छटपटा कर रो रही थी और सन्नी का लौड़ा लक्ष्मी आंटी की गांड़ पर अपना वजन बनाए हुए था। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के रुकते प्रतिकार को देख धीरे धीरे आगे पीछे होना शुरू कर दिया। लक्ष्मी आंटी ने रोना चालू रखा पर रोका नहीं। लक्ष्मी आंटी को bed पर लिटाने से पहले सन्नी ने अपने लौड़े पर gel लगाकर रखा था जिस से गांड़ के अंदर चिकनाहट की कमी ना हो। वही gel कारगर उपाय निकला। धीरे धीरे सन्नी के धक्के तेज होने लगे और साथ में ही उन धक्कों की गहराई भी बढ़ी। 5 मिनट तक लक्ष्मी आंटी को बड़े प्यार से पेलने के बाद अब सन्नी का पूरा लौड़ा लक्ष्मी आंटी की गांड़ को फाड़ कर चौड़ा कर रहा था।। लक्ष्मी आंटी ने भी अब गांड़ मराने का तरीका सीख लिया था। लक्ष्मी आंटी ने अब गांड़ उठा कर सन्नी को साथ देना शुरू कर दिया था। मैं इस पूरे खेल को camera में से देख सोच रहा था कि अगर रात में 2 बार सोती लक्ष्मी आंटी की कोख ना भरी होती तो इस गांड़ की नथ उतारने का scene एक और लौड़े को ले कर पूरा होता।
लक्ष्मी आंटी की कोरी कसी हुई गांड़ या कल शाम से 7 बार झडने की वजह से, लेकिन सन्नी 15 मिनिट तक ठुकाई करने के बाद भी झड़ा नहीं था। शायद सन्नी थक रहा था या वोह कोई और pose में लक्ष्मी आंटी की गांड़ बजाना चाहता था। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को पकड़ कर करवट ली और अपनी बाईं ओर मुड़कर लेट गया। इस दौरान सन्नी ने लक्ष्मी आंटी की गांड़ में से अपना लौड़ा बाहर निकाला नहीं। थोड़ी हिलने कि जगह मिलने से लक्ष्मी आंटी ने सन्नी को रोकने की कोशिश की।
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सन्नी उसे छोड़ दे इतना बेवकूफ नहीं था। उसने अपने धक्के लगाने चालू रखे और लक्ष्मी आंटी की अब झूलती चूचियों को पकड़ कर मसलने लगा। लक्ष्मी आंटी भी क्या करती? अपनी दहिने हाथ की उंगलियों से लक्ष्मी आंटी ने अपनी चूत के दाने को रगड़ना शुरू किया। अपनी उंगलियों और सन्नी के लौड़े को जगह देते हुए लक्ष्मी आंटी ने अपना पैर सन्नी के पैरों पर रख दिया।
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अगले 10 मिनट सन्नी ठोकता रहा और लक्ष्मी आंटी झडती रही। आखिर कार सन्नी ने कराह कर लक्ष्मी आंटी की गांड़ का उदघाटन समारोह पूरा कर दिया। पक्क… की आवाज के साथ सन्नी ने अपने लौड़े को लक्ष्मी आंटी की गदाराई मांसल गांड़ में से खिंच बाहर निकाला तो लक्ष्मी आंटी ने एक आह भरी। लक्ष्मी आंटी की गांड़ का छेद खुला पड़ा था और उसमें से एक बूंद गढ़ा वीर्य छलक आया था। सन्नी अपनी जगह से उठ गया और मैं लक्ष्मी आंटी की गांड़ मारने का पूरा recording का काम करने के बाद अब अपनी बारी लेने निकला।
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सन्नी
विक्की ने छोड़ा हुआ कैमरा उठाते हुए मैंने आगे बढ़कर recording शुरू कर दी। लक्ष्मी आंटी अपनी आखरी virginity खोने के बाद वैसे ही bed पर पड़ी गहरी सांसे ले रही थी। मेरी मेहनत का नतीजा अब एक गाढ़े cream के जैसे उसके बंद न हो रहे छेद से छलक आया था।
विक्की ने लक्ष्मी आंटी को पिछे से पकड़ कर कुंडली मार दी। लक्ष्मी आंटी के दहिने पैर को अपने घुटनों पर ले, विक्की की उंगलियां लक्ष्मी आंटी की चूत कि पंखुड़ियों को फैलाकर उनके उपर छिपे हुए दाने को छेड़ने लगी। लक्ष्मी आंटी को हम दोनों ने ठंडा होने का मौका दिया ही नहीं था। कुछ ही पलों में लक्ष्मी आंटी आहें भरने लगी। लक्ष्मी आंटी ने अपने आप कमर हिलाना शुरू कर दिया तो विक्की ने मेरा गाढ़ा cream अपने लौड़े पर उठाया। लक्ष्मी आंटी ने विक्की का सुपारा अपनी गांड़ के छेद में घुसता पाया तो उन्हहह… की एक मजेदार आह भरी।
विक्की अब रूकने वाला नहीं था। उसने अपने मूसल को पूरी तरह लक्ष्मी आंटी की गांड़ में पेल दिया। लक्ष्मी आंटी की गांड़ और फट गई और लक्ष्मी आंटी तड़पकर कराहने लगी। विक्की ने अपना लौड़ा सुपाड़े तक लक्ष्मी आंटी की गांड़ में से बाहर खींच लिया और फिर से जम कर ठोक दिया। लक्ष्मी आंटी ने अपने भविष्य को समझते हुए विक्की का साथ देने लगी। विक्की को मेरे cream से काफी मदत मिली। विक्की के तेज वार बिना ज्यादा छिले लक्ष्मी आंटी की गांड़ फैला रहे थे और लक्ष्मी आंटी की गांड़ के चारों ओर सफेद गुलाबी झाग जमा हो गया था। लक्ष्मी आंटी भी अपनी कमर को आगे पीछे कर विक्की का पूरा लौड़ा अपनी गांड़ में ले रही थी। 5 मिनट तक ऐसे ही लक्ष्मी आंटी की गांड़ मारने के बाद जब विक्की ने अपना लौड़ा बाहर खिंच लिया। लक्ष्मी आंटी ने किसी बच्चे से lollypop खिंच लिए जाने पर कि जाने वाले आवाज से विरोध किया।
विक्की ने लक्ष्मी आंटी को पकड़ कर उठाया कि लक्ष्मी आंटी की गांड़ छत की ओर इशारा करती दिख रही थी। लक्ष्मी आंटी ने अपने हाथों से कुत्तों के जैसे खड़े न होकर उलटा अपनी गांड़ के छेद को चौड़ा करके विक्की को बुलावा दिया। लक्ष्मी आंटी के इस बुलावे को नजर अंदाज करना हम दोनों के लिए मुमकिन नहीं था।
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विक्की ने अपना सुपाड़ा लक्ष्मी आंटी की गांड़ में पेल दिया तो आगे बढ़कर लक्ष्मी आंटी ने अपनी गांड़ मरवाना शुरु कर दिया।
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विक्की भी उसे पूरा मज़ा लेकर चोदने लगा। लक्ष्मी आंटी की आहों से पूरा घर गूंज उठा। इसी pose में लक्ष्मी आंटी न जाने कितनी बार झड़ गई पर विक्की ने बिना रूके उसकी गीली गांड़ मारने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इन दिनों के कारनामे देख मैं फिर से खड़ा होने लगा। लक्ष्मी आंटी को इस तरह से 10 मिनट तक पेलने के बाद विक्की ने अपना लौड़ा जड़ तक लक्ष्मी आंटी की गांड़ में दबा दिया।
लक्ष्मी आंटी को पकड़ कर उसे अपने शरीर के ऊपर लिटा दिया। अब लक्ष्मी आंटी को खुली छूट थी कि वह उठ कर भागे या फिर अपनी गांड़ में दबे मूसल को प्यार करे।
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पर लक्ष्मी आंटी ने चाव से अपनी गांड़ मरवाते हुए आहें भरी। मैं इस पूरे खेल को record करते हुए लक्ष्मी आंटी की कामुकता को कैद कर रहा था। 5 मिनट तक लक्ष्मी आंटी ने अपनी गांड़ मरवाते हुए विक्की को ऐसे निचोड़ा की विक्की ने करहाते हुए लक्ष्मी आंटी की गांड़ में अपना रस छोड़ा। लक्ष्मी आंटी भी अपनी गांड़ में विक्की का पूरा लौड़ा लेकर उस पर पड़ी थी।
कुदरत किसके काबू में होती है? पकक… की आवाज से विक्की का लौड़ा बाहर निकाला और लक्ष्मी आंटी की गांड़ में से वीर्य की पिचकारी छूट नीचे चादर पर गिरी। लक्ष्मी आंटी बगल में लेट गई तो विक्की ने उठकर लक्ष्मी आंटी की गांड़ पर एक छोटा थप्पड़ जड़ा दिया। जैसे विक्की बेड से उतरा तो लक्ष्मी आंटी को कुछ होश आया।
“तो लक्ष्मी आंटी, कैसे लगा तेरे यारों का प्यार? तू तो ऐसे झड़ रही थी कि हमें लगा तेरा झडना रुकेगा ही नहीं।”
लक्ष्मी आंटी “अगर तुम मिठाई खाओ या कोई और तुम्हारे मुंह में मिठाई ठूस दे फिर भी मिठाई मीठी ही होती है। काश मैं तुम दोनों का भी वही हाल कर पाती जो तुम दोनों ने मेरा किया है।”
विक्की “लक्ष्मी आंटी, शुक्र मना की माली चाचा को पहले ही भगा दिया है वरना अभी वह और गांड़ फाड़ रहा होता।”
लक्ष्मी आंटी “हां हां, हंस लो। सारे मर्द एक जैसे होते हैं। एक बेबस लड़की मिली तो शिकारी कुत्तों की तरह टूट पड़ते हैं।”
“ठीक है लक्ष्मी आंटी। इस बार तुम्हें भी एक मौका मिलेगा। कल रात के कपड़े हमारे लिए यादगार निशानियां हैं। आज के कपड़े बाहर निकाल कर रखे हैं। क्यों ना तुम वोह पेहन के नीचे आ जाती? तुम्हें मौका कैसे देना हैं वह सोचेंगे।”
सुबह के 6 बज गए थे तो हम दोनों नीचे चाय बनाने चले गए। लक्ष्मी आंटी ने bed पर रखे कपड़े देखे।
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10
विक्की
लक्ष्मी आंटी ने अंजाने में हमें नई idea बताई थी। नीचे उतर कर मैंने सन्नी को बताया तो वह भी मान गया। हम चाय लगाकर मुंह धोने गए। ब्रश करने के बाद जब हम kitchen पहुंचे तो वहां लक्ष्मी आंटी को सीढ़ियों से इठलाते हुए उतरते पाया। कहर ढा रही थी लक्ष्मी आंटी और वह ये बात जानती थी। बस एक गलती की थी, जो झाड़ू हाथ में पकड़ा था वह वहां नहीं होना चाहिए था।
लक्ष्मी आंटी “बाबू, आपको नहीं लगता ये कपड़े साफ सफाई करते हुए जल्दी मैले हो जाएंगे?”
सन्नी “लक्ष्मी आंटी, आओ मिलकर नाश्ता करते हैं। काम तो दिन भर होता रहेगा।“
हंसी मजाक में नाश्ता बनाया गया और उसके बाद खत्म हो गया। लक्ष्मी आंटी ने अब हिचकिचाहट छोड़ कर हमसे दोस्ती कर ली थी।
लक्ष्मी आंटी ने हमें जल्द और आसान नाश्ता बनाना सिखाया कि कॉलेज जा कर हम भूके ना रहें।
नाश्ता करने के बाद हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को kitchen table पर बिठाया और सीधी बात की।
सन्नी “लक्ष्मी आंटी, हम दोनों तुम्हें blackmail करके यहां लाए। तुम्हारे साथ बलात्कार कर तुम्हें हर तरफ से इस्तमाल किया। इस बात का पता है पर हमें दुख नहीं। तुमने हमें जो सिखाया है उसे हम दोनों जिंदगी भर याद रखेंगे।”
लक्ष्मी आंटी “बाबू आप बुरा मत मानो। वोह तो उपर मैंने मजाक में कहा था। पहले मुझे बहुत डर लगा और जब विक्की बाबुने मेरी झिल्ली फाड़ी तो बुरा भी लगा। पर बाद में सोचा, मेरे पती ने वैसे भी मेरी जिंदगी खराब कर दी है। अगर आप दोनों मुझे कुछ पल की खुशी दे रहे हो तो मैं उसे क्यों न लूं?”
मैंने मुस्कुराकर लक्ष्मी आंटी के गाल को चूम लिया और कहा “फिर भी हम दोनों ने तय किया है कि तुम्हें एक मौका मिलेगा। तुमने हमें शिकारी कुत्ते कहा था, तो हम सब एक खेल खेलेंगे। शिकारी और चालाक लोमड़ी। चालाक लोमड़ी, यानी कि तुम भागो और छुप जाओ। पूरे फॉर्महाउस में कहीं भी। 10 मिनट बाद शिकारी यानी हम, तुम्हारे पीछे निकलेंगे। अगर 1 घंटे में हम में से कोई भी तुम्हें ढूंढ नहीं लेता तो अगला पूरा दिन हम तुम्हारे इशारों पर रहेंगे। मगर तुम्हें ढूंढ निकाला तो लक्ष्मी आंटी, याद रखना, शिकारी और लोमड़ी…”
लक्ष्मी आंटी के चेहरे से साफ था कि उसे इस खेल में उसका कोई नुकसान नहीं दिख रहा था और हम दोनों को काबू करने की इच्छा भी उसके मन में अंगड़ाई ले रही थी। लक्ष्मी आंटी ने सर हिलाकर हां कर दिया तो हमने उसे पकड़ लिया।
लक्ष्मी आंटी “विक्की बाबू आप ने कहा था कि मुझे 10 मिनट तक छूट मिलेगी। आपने मुझे फिर पकड़ा क्यों?”
“अरे लक्ष्मी आंटी, ऐसे थोड़ी ही तुम लोमड़ी बनोगी?”
सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को दहिनी ओर से पकड़ कर टेबल पर लिटा दिया। लक्ष्मी आंटी का दहिना हाथ और पैर फैला कर पकड़े गए। मैंने लक्ष्मी आंटी को बई ओर से पकड़ लिया। लक्ष्मी आंटी को एहसास हुआ कि इन कपड़ों में वह नीचे से पूरी नंगी थी। तभी पिछे से लक्ष्मी आंटी की बुंड पर किसीने जोर दिया। क्यूंकि सन्नी और विक्की दोनों उसके बगल में थे तो लक्ष्मी आंटी ने डर के पूछा, “क… कौन?”
जोर बढ़ा और वह लक्ष्मी आंटी की गांड़ में घुस गया।
अन्हह… की चीख निकल गई और लक्ष्मी आंटी ने अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया।
“लक्ष्मी आंटी, इस से मिलो। यह तुम्हारा नया दोस्त Simon। भला बिना पूंछ के लोमड़ी कभी होती है? अगर ये पूंछ निकली तो इसका मतलब तुम पकड़ी गई हो।”
लक्ष्मी आंटी ने अचरज से पीछे देखा। उसे जो रंगीन झाड़ू लगा था वह तो एक गांड़ में पेल देने वाली पूंछ थी। लक्ष्मी आंटी जैसे तैसे उठी और लड़खड़ाते हुए भाग गई।
सुबह के 6.50 हुए थे और शिकार 7 बजे शुरू होनी थी।
11
सन्नी
“7 बज गए, चल निकालते हैं। तुझे क्या लगता है, कहां छुपी होगी?”
विक्की “लक्ष्मी आंटी 4 साल से शहर में है लेकिन पहले गांव से आई है। वोह घर में नही छुपेगी। बाहर देखते हैं।”
हमने farmhouse के हिस्से बांट लिए। विक्की ने आगे का हिस्सा और garage ढूंढा तो मैं पीछे सब्ज़ियों के बाग़ और आम की बाग़ ढूंढ़ने लगा। बेचारी लक्ष्मी आंटी, उसे ऐसे पूंछ निकली हुई थी कि वह ना दौड़ पाती और न छुप पाती। मैंने सब्ज़ियों की बाग़ देखी तो वहां छुपने लायक कुछ नहीं था। मै आम के बगीचे में पहुंचा तो मेरे अंदर के शिकारी को मानो गंध मिल गई। पता नहीं क्यों, मै आम के पेड़ के पीछे छिप गया। फिर आंखे बंद कर सुनने लगा। मेरे पीछे सरसराहट हुई तो मैंने कोने में से झांक कर देखा। पेड़ों के बीच में से कुछ रंगीन हिलता नजर आया। मैं छिप कर उसके नजदीक गया और अचानक से सामने खड़ा हो गया।
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लक्ष्मी आंटी ने मुझे देखा और घास में छिपने की कोशिश करने लगी।
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मैंने घड़ी में देखा तो 7.15 बजे थे।
“लक्ष्मी आंटी, मुझे लगता है कि तुम छिपना नहीं चाहती थी। चलो इधर आओ और अपनी इठलाती बलखाती दुम तो दिखाओ। देखूं तो सही, कैसी अदा से लक्ष्मी आंटी की पूंछ निकली हुई है।”
लक्ष्मी आंटी ने अपनी जीभ निकली और मुंह बनाया। लक्ष्मी आंटी ने मेरे सामने आकर गोल चक्कर लगाया। अपनी रंगीन पूंछ हिलाकर, आम के पेड़ का सहारा ले कमर में मुड़कर अपनी पूंछ उपर कर दी। मैंने और इंतजार न करते हुए लक्ष्मी आंटी की पूंछ पकड़ कर उसे उठाया।
लक्ष्मी आंटी की आह निकल गई और उसने अपने ऐड़ियों को उठकर गांड़ और उठाई। मैंने पैंट उतार कर ' लोमड़ी मारने की बंदूक ' निकली और लक्ष्मी आंटी ' लोमड़ी ' की गीली गुन्फा की ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
लक्ष्मी आंटी की गांड़ में फंसा butt plug उसकी गीली चूत में से मेरे लौड़े को दबा रहा था। ये एक अलग ही एहसास था जो अजीब पर मजेदार था। लक्ष्मी आंटी ने अब उस पेड़ को लिपट कर पकड़ा था और इसी लिए वो लाचार होकर मेरे लौड़े का मार खा रही थी। मैंने 10 मिनट तक लक्ष्मी आंटी की कुटाई की और फिर उसे पकड़ कर अपनी ओर मोड़ लिया। मैंने लक्ष्मी आंटी को नीचे घास में लिटाया और झड़कर गीले हुए उसकी जांघों को फैलाया। पनियाई चूत के रस से भिगती उस रंगीन पूंछ को पकड़ कर खींच निकाला। 'चपाक' की आवाज के साथ लक्ष्मी आंटी की पूंछ अलग हुई और मैंने Simon को एक तरफ फेंक दिया। लक्ष्मी आंटी झड़कर घास में फैली पड़ी थी तो मैंने लक्ष्मी आंटी की एडियों को पकड़ कर उन्हें अपने कंधो पर रख दिया। लक्ष्मी आंटी की गांड़ उठ गई तो मैंने लक्ष्मी आंटी की गांड़ चिर दी। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों में घास पकड़ कर अपने शरीर को सहारा देने की कोशिश की मगर मेरी तलवार की वार से उसके हाथ में घास के पत्ते टूट कर आते।
लक्ष्मी आंटी अपना सर हिलाकर अपनी गांड़ में पेल कर बन रही काम उत्तेजना को बता रही थी।
हर झटके से लक्ष्मी आंटी के मम्मे हिचकोले खाते उसके शानदार कपड़ों में से अपना प्रदर्शन कर रहे थे। मैंने लक्ष्मी आंटी का टॉप खींच उतार फेंका। उसके दोनों दूधिया गोले पकड़कर अपनी रफ्तार बढ़ा दी। मेरा स्खलन अब नजदीक आ गया तो मैं लक्ष्मी आंटी को पकड़ तेज झटके देने लगा। लक्ष्मी आंटी ने मेरे लौड़े से आने वाले रस की धार को अपनी गांड में लेने के लिए मुझे पैरों से जकड़ लिया।
गरम विर्य के फव्वारों ने लक्ष्मी आंटी की गांड भरना शुरू किया तो लक्ष्मी आंटी ने पलटी मार दी। मेरा पूरा खूंटा अपने अंदर समाकर लक्ष्मी आंटी मुझपर सवार हो बैठी।
थोड़ी देर में मेरा हथियार लक्ष्मी आंटी कि गांड से निकलने को था तभी हमें विक्की की आवाज सुनाई दी।
विक्की “Simon तू इधर है तो लक्ष्मी आंटी किधर चुध रही है? सन्नी!!!”
लक्ष्मी आंटी झटसे उठी और मेरा रस अपनी गांड से टपकाते भाग खड़ी हो गई।
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विक्की
लक्ष्मी आंटी गेराज और बाकी जगह नहीं मिली तो मैं सन्नी से मिलने आम के बगीचे में आया। वहीं रास्ते में Simon को देख बोल पड़ा “Simon तू इधर है तो लक्ष्मी आंटी किधर चुध रही है? सन्नी!!!”
सन्नी की बस आह सुनाई दी जब मुझे नीचे लक्ष्मी आंटी का पारदर्शी टॉप मिला। आगे बढ़ने पर पाया कि सन्नी नीचे घास में चूसे आम की तरह पड़ा था। मैंने उसका इशारा समझकर लक्ष्मी आंटी का पीछा किया।
लक्ष्मी आंटी एक पेड़ पर चढ रही थी। मैंने कुद के उसको पकड़ने की कोशिश की तो मेरे हाथ सिर्फ लक्ष्मी आंटी का नटखट स्कर्ट आया।
“लक्ष्मी आंटी, लोमड़ी पेड़ पर नही चढ़ती। तुम पकड़ी गई हो, नीचे उतरो।”
लक्ष्मी आंटी “मेरी पूंछ नही तो मैं लोमड़ी नही। पर मेरे शहरी शिकारी आप दोनों पेड़ पर नहीं चढ़ सकते। अब मैं पूरा दिन यहीं रहूंगी।”
लक्ष्मी आंटी ने ऊपर चढ़ते हुए अपनी गांड हिलाकर मुझे चिढ़ाते हुए कहा।
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लक्ष्मी आंटी के पैर को कुछ छू गया और नीच देख कर चीखी। मैं तेज़ी से ऊपर चढ़ गया था और उसके पीछे खड़ा हो गया। लक्ष्मी आंटी बीच में पकड़ी गयी थी। लक्ष्मी आंटी के पैर फैले दो अलग शाखाओं के ऊपर थे तो हाथों से पेड़ का तना पकड़ा था।
मैंने नीचे देखा तो पाया कि हम ज्यादा ऊंचाई पर नही थे और सन्नी ने इशारा कर सहमती दी। मैं लक्ष्मी आंटी के पिछे से उसे चिपक गया कि वह अपनी जगह पर अटक गई।
लक्ष्मी आंटी हंसकर बोली,“ तुम जीते विक्की बाबू। तुम तो पेड़ पर चढ़ने में माहिर हो। अब हटो, मैं नीचे उतरती हूं। सन्नी बाबू ने मिट्टी में लिटाकर गन्दा कर दिया है। अब हटो भी!”
मैंने लक्ष्मी आंटी पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए पेड़ पर दबा दिया। मेरे लौड़े का सुपारा लक्ष्मी आंटी की गांड़ को चूमने लगा तो उसने डर के हटने की कोशिश की।
लक्ष्मी आंटी “विक्की बाबू रुको, रुक जाओ, नहीं, नहीं… मैं गिर जाऊंगी विक्की बाबू। नीचे उतर कर आप को सब कुछ दूंगी पर अब रुक जाओ बाबू। बाबू… बाबू… विक्की… बाबू…!!!! सन्नी बाबू!!! बचाओ…”
तभी नीचे से सन्नी कि आवाज आई “विक्की, मुझे लगता है कि इसे मेरी याद आ रही है। ये ले…”
सन्नी ने उछाली चीज मैंने लपक ली। वह एक लंबा मोटा खीरा था। सन्नी का इशारा समझ कर मैंने उसे लक्ष्मी आंटी की बूर पर रगड़ने लगा। लक्ष्मी आंटी को हम दोनों ने ठंडा होने का मौका दिया ही कब था? जल्द ही लक्ष्मी आंटी दुनिया की सुध भूल कर अपने रस से सन्नी खीरा धोने लगी।
मैंने लक्ष्मी आंटी के फैले पैरों का पूरा फायदा उठाते हुए सन्नी खीरे को पूरा अंदर पेल दिया। लक्ष्मी आंटी उछल कर नीचे गिर जाती अगर मैं तैयार न होता। अपनी उंगलियों से सन्नी खीरे को लक्ष्मी आंटी की गरमी में दबाकर मैंने अपनी हथेली से लक्ष्मी आंटी की चूत का दाना मसलने लगा। लक्ष्मी आंटी ने अपनी गांड़ हिलाकर अपनी उत्तेजना दिखाई तो मैंने उसे दबोच लिया।
अब लक्ष्मी आंटी पेड़ से सटी, डालियों को पकड़ कर खड़ी थी। लक्ष्मी आंटी के पैर फैले दो शाखाओं पर रखे हुए थे। मैंने लक्ष्मी आंटी को पिछे से पकड़ कर उसकी तरह शाखाओं पर खड़ा था पर मेरा एक हाथ उसकी गीली चूत में सन्नी खीरा दबाए हुए था तो दूसरा उसके बगल से होते हुए लक्ष्मी आंटी के कंधे को जकड़े हुए था। लक्ष्मी आंटी सिर्फ सिर हिलाकर, अपनी गांड़ हिलाकर अपनी विवशता दिखा सकती थी। मैंने सन्नी खीरे को लक्ष्मी आंटी की चूत से निकाल कर, उसपर लगे रस से मेरा लौड़ा पोत दिया। सन्नी खीरा फिर से लक्ष्मी आंटी की चूत में डाल दिया गया और उसके दबने पर लक्ष्मी आंटी की गांड़ उठ गई।
मौका साध कर मैंने अपने लौड़े को लक्ष्मी आंटी की गांड़ में पेल कर जड़ तक घुसा दिया। लक्ष्मी आंटी की चीख पूरे आम के बगीचे में गूंज उठी। मैं जवान था, कामोत्तेजना में डूबा हुआ था पर दरिंदा नहीं था। मैं ऐसे ही बिना हिले डुले रुक गया और अपनी हथेली से लक्ष्मी आंटी के दाने को सहलाने लगा। मेरे हथेली के घूमने से सन्नी खीरा हिल रहा था और लक्ष्मी आंटी के रस से वह फिर भीगने लगा।
लक्ष्मी आंटी ने धीरे धीरे आगे पीछे हो कर मुझे गांड़ मारने की इजाजत दी तो मैंने भी बड़े प्यार से लक्ष्मी आंटी की गांड़ मारी। लक्ष्मी आंटी की चूत में घुस बैठा सन्नी खीरा मेरे लौड़े को लक्ष्मी आंटी की गांड़ में बीच के पतले परदे से सेहला रहा था। इस अलग ही हलचल से लक्ष्मी आंटी और मुझे नया मज़ा आ रहा था। इस पोज़ में हम दोनों ने घमासान मचा दिया और केवल 5 मिनट में मैंने लक्ष्मी आंटी को जकड़ कर उसकी गांड़ की गहराई को अपनी गरमी से भर दी।
लक्ष्मी आंटी लगभग बेसुध होकर मेरे सहारे खड़ी थी तो मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया।
सन्नी खीरा लक्ष्मी आंटी की चूत से फिसल कर नीचे सन्नी के पैरों में गिर गया। हम दोनों एक दूसरे की तरफ देख कर मुस्कुराए।
शिकारी शिकार करने के बाद क्या करते हैं? हमने लगभग बेसुध लक्ष्मी आंटी को जैसे तैसे पेड़ से उतरा और सहारा देकर farmhouse में ले गए।
13
सन्नी
लक्ष्मी आंटी को हम दोनों अंदर ले आए पर वह बहुत थकी हुई थी। हम दोनों ने मिलकर एक दिन के अंदर 5-5 बार चोदा था, 3-3 बार अपना रस पिलाया था और अब 2-2 बार गांड़ मारी थी।
विक्की ने गरम पानी चालू किया और हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को बाहों में लेकर नहलाया। बेचारी लक्ष्मी आंटी जब कुछ होश में आई तो अपने को हमारे हाथों धुलता देख शरमा कर लाल हो गई। लक्ष्मी आंटी की गांड़ में से अब तक हमारा रस टपक कर उसकी जांघें रंग रहा था। हमने उसे bathtub में बिठाकर अपने शरीर साफ कर लिए। बिना बोले आपसी सहमति से हम दोनों लक्ष्मी आंटी को थोड़ा आराम करने bathtub में छोड़ कर बाहर आ गए।
हमने ऐसे खुले मन से बातें की को सिर्फ किसी औरत के दो प्रेमी कर सकते हैं। हमने ये मान लिया के हम एक दूसरे को नंगे देख सकते हैं पर छूना नहीं चाहते। मैंने मना के Simon को लेकर लक्ष्मी आंटी की बजाने में मज़ा आया तो विक्की को सन्नी खीरे से भी मज़ा आया। विक्की को तो यकीन था कि लक्ष्मी आंटी की ये बेसुध हालत दोहरे हमले से ही बनी हुई है। हमने ये भी मना की सोमवार सुबह जाने के पहले हमारा Target क्या होगा। साथ ही घर पहुचकर हम दोनों क्या और कैसे करेंगे।
अभी तो सिर्फ शनिवार सुबह के 8 बजे थे। हम दोनों ने bathroom में झांक कर देखा तो लक्ष्मी आंटी बड़े आइने में मूड कर अपनी गांड़ देख रही थी। हम हंस पड़े तो लक्ष्मी आंटी ने गुस्से से लाल हो कर बोला की कभी खुद करवा के देख लो।
“अरे लक्ष्मी आंटी, हम तो चाहकर भी ऐसे नहीं कर सकते। चलो बाहर आ जाओ। हम तुम्हें दिखाते है।”
हॉल में एक बड़ा टीवी था जिस पर computer connect करना मुमकिन था। हमने internet चला दिया और लक्ष्मी आंटी को हमारे ज्ञान का अगाध स्रोत दिखाया। अनेकानेक देसी विदेशी लड़कियां और औरतें कई तरह से अपने मर्दों को संतुष्ट करने की होड़ में थीं। कोई चूस रही थी तो कोई अपना चुसवा कर चटा रही थी। कोई चुध रही थी, कोई चुधवा रही थी और कोई खुद सवारी कर मज़े से चिल्ला रही थी। कोई पहली बार गांड़ मारी जाने से रो रही थी तो कोई अपने आशिक को गांड़ मारने को बता रही थी।
लक्ष्मी आंटी भी गरमा गई और उसने टीवी बन्द कर दिया। लक्ष्मी आंटी ने पूछा कि अब क्या करना है? तो मैंने उसे कहा की वह खुद तय करे की वह हम दोनों को कैसे खुश करेगी।
लक्ष्मी आंटी सोच रही थी कि घंटी बजी और हम सब की धड़कनें बढ़ीं जब तक पता चला कि घंटी फोन की थी। मैंने लक्ष्मी आंटी को चुप रहने का इशारा करते हुए फोन उठाया।
अश्वेत “Good Morning सन्नी बेटा।
कैसे चल रही हैं दोनों की छुट्टियां? लक्ष्मी आंटी को ज्यादा तंग तो नहीं कर रहे ना?”
“पापा आप दोनों से हम ने कहा था की हमें देखभाल करने के लिए किसी की जरूरत नहीं। हम बड़े हो गए हैं और अपना खयाल रख सकते हैं। अगर हम कॉलेज दूर चले जाएं तो वहां लक्ष्मी आंटी को भेजोगे?”
लक्ष्मी आंटी ने मौका साध कर घुटनों के बल बैठ कर हम दोनों को एक साथ चूसना शुरू कर दिया। अगर ये लक्ष्मी आंटी का हमें सजा देने का तरीका था तो लक्ष्मी आंटी सच में सेक्स के खेल में होशियार थी।
अश्वेत “अरे तुम दोनों को तकलीफ़ क्या है? अब तुम्हें ना नाश्ते की चिंता है और न खाने की। मस्त हो कर घूमो फिरो, आम के पेड़ों पर चढ़ो या बचपन में खेलते थे वैसे शिकारी बनो और फॉर्महाउस में जंगली शेर का शिकार करो!!!”
लक्ष्मी आंटी ने चौंक के उपर देखा तो ' चपक ' की आवाज हुई।
पीछे से हंसने की आवाज़ आई।
पवन “याद है, जब हम ऐसे छुप कर अकेले रहने की कोशिश करते थे?”
अश्वेत “अरे बाप बना है तू, अब इन्हें परेशान करना हमारा फर्ज है।”
विक्की “पापा आप दोनों मिले हुए हैं? आपको क्या लगता है? हम यहां क्या करने आए हैं?”
अश्वेत हंसकर “वही जो 2 जवान लडके एक बड़े टीवी, internet connection और खाली घर में करते हैं। लक्ष्मी आंटी हमारी ओर से तुम्हारे लिए चुनौती है। देखते हैं कि तुम दोनों लक्ष्मी आंटी और माली चाचा को कैसे चकमा देते हो।”
लक्ष्मी आंटी को पकड़ कर, अपने लौड़े को उसके मुंह में डाल कर।
“लक्ष्मी आंटी का हमने मुंह बन्द कर दिया। बहुत मना कर रही थी। ये मत करो, वो मत करो। ऐसे मत करो, वैसे मत करो। मगर हमने उसे मना लिया कि वह हमें सिखाए और कॉलेज के लिए तैयार करे। आज सुबह हम सब ने मिलकर नाश्ता बनाया। अब लक्ष्मी आंटी मान गई है कि वह यहां की कोई बात बाहर नहीं बताएगी। रहे माली चाचा तो उन्हें हमने कल से सोमवार सुबह तक छुट्टी दे दी है।”
पवन “बच्चों ये बात ठीक नहीं है। ये तुम दोनों के लिए और खास कर लक्ष्मी आंटी के लिए safe नहीं है।”
विक्की “पापा अगर आप को डर है कि लक्ष्मी आंटी हम से प्याज करवाएगी तो लक्ष्मी आंटी ने ये पहले ही कर दिया है। आप चिंता मत कीजिए।”
पवन “बेटा बात उतनी ही होती तो मैं खुद कुछ प्याज भेज देता। जरा सोचो, तुम बड़े हो गए हो और लक्ष्मी आंटी के साथ अकेले हो ऐसे पप्पू को पता चल गया तो वह क्या करेगा।”
हम अंकल का इशारा समझ गए पर क्या कहते? चिंता मत करो लक्ष्मी आंटी चोद दी गई है या ये की वह अब अपनी मर्जी से हम दोनों को एक साथ चूस रही है? हमने अच्छे लड़के बनाने का वादा करते हुए फोन रख दिया।
लक्ष्मी आंटी हम दोनों को पूरे जोश से चूस रही थी और उसकी मेहनत की कदर करते हुए हम दोनों ने उसे अपना पानी पिलाया। पिछले 14 घंटों में हम दोनों ने 10-10 बार लक्ष्मी आंटी के अलग अलग चेद चोदे थे। जवान हैं मशीन नहीं।
अब कुछ देर आराम करना हमने ठीक समझा और वहीं हॉल में porn videos देखते हुए सो गए।
Score card सुबह 9 बजे तक
लक्ष्मी आंटी मुंह चूत गांड़
विक्की 3 5 2
सन्नी 3 5 2
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विक्की
10 बजे तक झपकी लेने के बाद हम लोग उठ गए। लक्ष्मी आंटी ने अंगड़ाई ली और आगे का कार्यक्रम पूछा तो हमने उसे उसका score card बताया। लक्ष्मी आंटी की गांड़ पर हुआ अन्याय हम दोनों से सहा नहीं गया। लक्ष्मी आंटी ने चिढ़ने नाटक करते हुए कहा “सीधे बोलो ना कि तुम दोनों को मेरी गांड़ मारने का शौक है।”
लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को टटोल कर अच्छे से जांच की। फिर लक्ष्मी आंटी ने सन्नी को अपने मुंह में लेकर चूस कर अच्छे से गीला कर दिया। मैं बाजू में बैठा अपना कड़ा मूसल पकड़े हुए था।
लक्ष्मी आंटी “बुरा मत मानो विक्की बाबू। आप का हथियार इतना मोटा है कि सन्नी बाबू मुझे थोड़ा फैला दे तभी आप को गांड़ में ले पाऊंगी।”
सन्नी को पकड़ कर लक्ष्मी आंटी उपर बेड पर ले गई। वीडियो में देखी पोज़ लेते हुए लक्ष्मी आंटी ने सन्नी को लिटाकर उसकी तरफ पीठ करके उसके लौड़े पर थूंक दिया। अब सन्नी के गिले सुपाड़े को लक्ष्मी आंटी ने अपनी गांड़ के छेद पर रखा और धीरे से धक्का दिया। लक्ष्मी आंटी गांड़ मारने की कला सीख रही थी और उसके थोड़ी कोशिश करने पर सन्नी का सुपारा लक्ष्मी आंटी की गांड़ में था। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी की कमर पकड़ी और लक्ष्मी आंटी को अपने ऊपर खींच लिया।
लक्ष्मी आंटी “आईआई… सन्नी बाबू… आह… हनन… अम्म…”
लक्ष्मी आंटी ने गहरी सांसे लेते हुए अपने आप को संभाला और फिर सन्नी के कंधों पर हाथ रख दिए। अब लक्ष्मी आंटी ने अपने पैर सन्नी के फैले पैरों के पार रखे थे तो लक्ष्मी आंटी के हाथ सन्नी के कंधों पर रखे हुए थे। लक्ष्मी आंटी अब अपनी मर्जी से अपनी गांड़ हिलाकर अपनी गांड़ मरवा सकती थी। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी की कमर थाम कर उसे उठाए रखा था।
लक्ष्मी आंटी ने जल्द ही अपनी ताल पकड़ ली और चाव से अपनी गांड़ मराने लगी। मैं गरम लोहे सा तपा इंतजार कर रहा था। तभी मेरे मन में एक कल्पना आ गई। मैं बेड पर सन्नी के फैले पैरों के बीच खड़ा हो कर लक्ष्मी आंटी के मुंह में अपना मूसल डाल दिया। लक्ष्मी आंटी ने भी मुझे चूसा पर कुछ ही पलों में मैं पीछे हो गया। फिर घुटनों पर बैठ कर मैंने लक्ष्मी आंटी के गाल को चूम कर उसके कान के पास चूमने लगा। लक्ष्मी आंटी ने जैसे ही नीचे होने की कोशिश की तो मैंने अपना मूसल उसकी चूत में डाल दिया।
“मां… आहं… हा… हा… हा… मरी… हा… बाबू…” लक्ष्मी आंटी की चीखें निकल गुंज उठी।
मुझे डर था कि सन्नी को चोट लगी होगी। पर सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के पीछे से मुझे आंख मारते हुए इशारा किया। अब हम दोनों बिना हिले डुले रुक गए थे। लक्ष्मी आंटी ने अपनी चीखें निगल कर अब संभलना शुरु किया।
सन्नी ने लक्ष्मी आंटी की कमर पर पकड़ बना ली और लक्ष्मी आंटी को उठाया। हम दोनों के लौड़े सूपड़े तक बाहर निकले तो लक्ष्मी आंटी ने चैन कि एक गहरी सांस ली। सन्नी ने अपने हाथ अचानक मोड़ लिए तो चीखकर लक्ष्मी आंटी ने दोनों लौड़े अपने अंदर धसे पाए। सन्नी ने ऐसे ही लय पकड़ ली। लक्ष्मी आंटी हर उछाल पर सांस लेती और हर धसने पर चीखकर सांस छोड़ती। कुछ देर में लक्ष्मी आंटी को मज़ा आने लगा और वो सन्नी का साथ देते हुए खुदको दोहरा मज़ा दिलाने लगी। लक्ष्मी आंटी के हर उछाल के साथ हमारे लौड़े उसकी चूत और गांड़ में से दबते हुए एक दूसरे को दबा रहे थे। यह एहसास एक साथ अलग था, अजीब था पर बुरा नहीं था। लक्ष्मी आंटी की पतली हालत होती देख हम दोनों खुशी से लगे रहे। सन्नी और लक्ष्मी आंटी के लय को तोड़ना सही नहीं था पर लक्ष्मी आंटी की उस कामुक सुंदरता को देख चुप रहना नामुमकिन था। मैंने आगे झुक कर लक्ष्मी आंटी की गर्दन को अपने दातों में हलके से पकड़ लिया।
लक्ष्मी आंटी इस तरह से होश उड़ाए हुई चूधा रही थी जब उसने एक लंबी मिठिसी चीख निकाल अपनी चूत में से कोई झरना बहा दिया। लक्ष्मी आंटी ऐसे झड़ी के उसने अपने शरीर से हम दोनों को भींच लिया। लक्ष्मी आंटी का बदन अकड़ कर कांपने लगा और लक्ष्मी आंटी की आंखे घूम कर बन्द हो गई। सन्नी के उपर लक्ष्मी आंटी गिर गई तो उसने आह भरी। मुझे एहसास हुआ कि लक्ष्मी आंटी की गांड़ में सन्नी का लौड़ा धड़क धड़क कर अपना रस छोड़ रहा था। अब मुझे और बर्दाश्त करना नाुमकिन था तो मैंने भी अपना लौड़ा जड़ तक घुसा कर लक्ष्मी आंटी की कोख में रस भर दिया।
थक कर चूर चूर होकर मैंने लक्ष्मी आंटी को सन्नी के उपर से उठा कर बगल में गांड़ उपर कर लिटा दिया। जैसे तैसे हम दोनों उठ गए और अपनी मेहनत का परिणाम देखा।
http://pixbb.com/image/yAyAj
Score card सुबह 10.30 बजे तक
लक्ष्मी आंटी मुंह चूत गांड़
विक्की 4 6 2
सन्नी 4 5 3
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सन्नी
आज 11 बजे हम ने internet का इस्तमाल ऐसी बात के लिए किया जो कभी सोचा भी नही था। हम दोनों ने इंटरनेट पर देख कर पनीर बिरयानी बनाई। साथ में कुछ readymade soup packet में से soup भी बनाया। ये सब लेकर हम उपर लक्ष्मी आंटी के पास पहुंचे।
लक्ष्मी आंटी (थक कर धीमी आवाज में) “बस बाबू। अब और नहीं सहा जाता। थोड़ी देर आराम करने दो।”
लक्ष्मी आंटी एक ओर मुड़ कर लेटी थी। लक्ष्मी आंटी की गांड़ और चूत में से वीर्य की धार निकल कर जांघ पर सुख रही थी। विक्की बाथरूम से गरम पानी से भीगा टॉवेल लाया। विक्की ने बड़े प्यार से लक्ष्मी आंटी का पसीने से भीगा बदन पोंछा। उसके बाद लक्ष्मी आंटी की जखमी और हमारे रस से भरी हुई, चूत और गांड़ को दूसरे साफ गरम पानी के टॉवेल साबुन से धोया। लक्ष्मी आंटी को हमारे इस बरताव से आश्चर्य हुआ और खुशी भी मिली।
जब हमने लक्ष्मी आंटी को बेड पर खाना परोसा तो लक्ष्मी आंटी बस देखती रही। मैंने soup चमच से लक्ष्मी आंटी को पिलाया तो लक्ष्मी आंटी फूटफूट कर रोने लगी। हम दोनों पिछले 12 घंटों में किए हमारे कांड के लिए चीखें जाने के लिए तैयार थे। डर था कि लक्ष्मी आंटी सारी बातें मम्मी पापा को बता देगे। हमने मन ही मन पीटने की तैयारी भी कर ली थी पर रोती हुई लक्ष्मी आंटी को क्या करें ये समझ नहीं आया।
मैंने डरते हुए “पेहली बार बनाया है। इतना बुरा बना है क्या? जाने दो, मत खाओ। कुछ और बना कर लाते हैं।”
अब लक्ष्मी आंटी रोते हुए हंस पड़ी और बोली “अरे मेरे बुद्दू आशिक। ये बहुत अच्छा बना है। मैं तो इस लिए रो पड़ी क्योंकि आज तक किसी ने मेरे लिए ऐसा नहीं किया था। बाबू आप दोनों बहुत अच्छे लड़के हो। अब चुप चाप इधर आओ और अपनी लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में भर लो।”
हम दोनों लपक कर लक्ष्मी आंटी के बगल में बैठ कर उसकी बाहों में समा गए।
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सन्नी
12 बजे तक लक्ष्मी आंटी ने खाना खाया और फिर उसने बड़े प्यार से हम दोनों को भी अपने हाथों से खिलाया। हम सब ने अब हिचकिचाहट छोड़ दी थी। हमें नंगे बदन घूमने में कोई परहेज नहीं था। लेकिन फिर भी हम सब ने कपडे पहने और नीचे हॉल में आ गए।
“लक्ष्मी आंटी, हम दोनों ने तुम से बहुत बुरा व्यवहार किया है। हो सके तो हमें माफ कर दो।”
लक्ष्मी आंटी “सन्नी बाबू माफी का सवाल तब आता है जब मैं तुम्हें दोष दूं। गलती किसी की नहीं बस मेरा नसीब है।”
विक्की “मतलब?”
लक्ष्मी आंटी “मैं बचपन से अभागी हूं इसमें आप दोनों का कसूर नहीं। बचपन में मेरे मां बाप गुजर गए और न चाहते हुए दूर के मामा ने पाला। पर वो भी क्या करता? उसकी ३ बेटियां है। चौथी को दहेज कैसे देता? पप्पू के रिश्तेदारों ने कहा कि वह बिना दहेज के शादी करेगा और मुझे घर से दूर शहेर में ले जायेगा तो मामा झट से मान गया। मैंने सोचा शहर में अपने पैरों पर खड़ी हो जाऊंगी तो पप्पू ने अपना बोझ भी मुझ पर डाल दिया। मकान मालिक ने बिजली काट दी इस लिए चोरी करनी पड़ी। मुझे माफ़ कर दो विक्की बाबू। मैं आप के पैसे सोमवार को लौटा दूंगी।”
विक्की समझ गया कि मामला लक्ष्मी आंटी की खुद्दारी का है और उसने पैसे लेने से मना नहीं किया। हमने नीचे टीवी पर हलकी फुल्की romantic comedy वाली picture चलाई और लक्ष्मी आंटी के साथ गानों पर नाचे। लक्ष्मी आंटी अचानक से किसी कॉलेज की लड़की जैसी लग रही थी। आगे एक धीमा गाना आया तो विक्की ने लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में भर कर नाचना शुरू किया। मुझसे रहा नहीं गया और मैं लक्ष्मी आंटी को पिछे से चिपक गया।
लक्ष्मी आंटी हंस कर बोली “तो मेरे शहरी शेरों को भूक लग ही गई।
सोच रही थी कि इतनी देर से चुप कैसे है?”
विक्की ने सुबह अपने काटे जगह पर जो दाग बना था वहां चूमना शुरू किया तो लक्ष्मी आंटी ने पीछे देख कर अपनी जीभ से मेरी जीभ भिड़ा दी। अब हम सब और न सहते हुए वहीं हॉल के कालीन पर लेट गए।
एक अजीब होड़ सी लग गई कि कोन पहले अपने कपड़े उतार देता है। मैं जीत गया तो विक्की दूसरा आया। लक्ष्मी आंटी अपनी सलवार का नाड़ा खोलने में पीछे रह गई। हम दोनों सामने खड़े हो गए तो लक्ष्मी आंटी ने हमें अगल बगल में लिटा दिया। लक्ष्मी आंटी, विक्की के चेहरे पर सवार होकर उसका मूसल चूसने लगी और एक हाथ से मेरी तलवार हिलने लगी। विक्की ने अच्छे से लक्ष्मी आंटी को चाटा और मैंने अपनी उंगली लक्ष्मी आंटी की चूत में हिलाकर अपना योगदान दिया। हम सब तप गए तो लक्ष्मी आंटी उठकर मेरे ऊपर सवार हो गई। मेरी छाती पर अपने मम्मे दबाकर लक्ष्मी आंटी ने मुझे चूमा। अपना हाथ नीचे करके लक्ष्मी आंटी ने मेरे लौड़े को अपनी पानियाई चूत पर रगड़ना शुरू किया। जैसे ही मेरी तलवार लक्ष्मी आंटी के काम रस से रंग दी गई तो लक्ष्मी आंटी ने मेरे लौड़े को अपनी चूत में निगल लिया।
एंह की हलकी किलकारी के साथ लक्ष्मी आंटी ने मेरे लौड़े का स्वागत किया और थोड़ी आगे होकर मेरे कन्धों पर हाथ रख दिए। अब लक्ष्मी आंटी ने आगे पीछे होते हुए अपनी चूत से मेरे लौड़े की मालिश शुरू कर दी। स्कूल में एक टीचर ने बताया था कि हर औरत में रती (कामदेव की पत्नी) होती है। अगर ये सच है तो कल लक्ष्मी आंटी की चूत की झिल्ली फाड़ देने से रती आज़ाद हो कर अब हमारे संग खेल रही थी। विक्की बेचारा अपना खड़ा मूसल लिए देख रहा था। लक्ष्मी आंटी ने उसकी ओर देखा तो मुस्कुराई।
लक्ष्मी आंटी “विक्की बाबू अब आपको मेरे पिछवाड़े तक पहुंचने का नक्शा चाहिए या न्योता?”
लक्ष्मी आंटी की बात सुनकर विक्की खुशी से कूद पड़ा और लक्ष्मी आंटी के पीछे आ गया। लक्ष्मी आंटी ने मेरे लंड से उठकर उसे अपने रस में डुबकी लगाने को कहा। लक्ष्मी आंटी की चूत में विक्की ने छलांग लगाई तब लक्ष्मी आंटी मुझे चुम रही थीं और उसकी चीख मैं निगल गया।
3 झटके लगाने के बाद विक्की और लक्ष्मी आंटी तैयार हो गए। विक्की बाहर निकल गया और लक्ष्मी आंटी ने मुझे अपनी गरम गुंफा में ले लिया। विक्की ने अपना मूसल लक्ष्मी आंटी के पिछवाड़े पर लगाया तो लक्ष्मी आंटी चीख पड़ी। पर लक्ष्मी आंटी की तरफ ध्यान देने की हालत में कोई नहीं था।
लक्ष्मी आंटी “आह… विक्की बाबू… ओह्ह… रुको… रुक जाओ… विक्की बाबू… ये बहुत बड़ा है… आई… हा… हा… हा… हा…”
मैंने लक्ष्मी आंटी की कमर पकड़ कर उस हिलने से रोक लिया था तो विक्की ने लक्ष्मी आंटी के कंधे पकड़ कर अपना मूसल अंदर ठूस ना जारी रखा। लक्ष्मी आंटी पैर झटक रही थी, चीख रही थी पर हम लगे रहे।
आखिरकार जब विक्की के लौड़े की जड़ लक्ष्मी आंटी की गांड से भिड़ गई तो लक्ष्मी आंटी मुझ पर गिर गई।
लक्ष्मी आंटी “मार दिया रे… आह… जवानी का एक दिन भी नहीं देखा और आप दोनों ने मार दिया… अहह… माँ… आह…”
विक्की ने अपना लौड़ा और दबाया तो लक्ष्मी आंटी मेरे लौड़े से उठ कर सरक गई। जब मेरा सिर्फ सुपाड़ा बाकी रहा तो मैंने लक्ष्मी आंटी की कमर दबाकर उसे अपने लौड़े पर जड़ा दिया। अब विक्की ने अपना लौड़ा सुपडे तक निकाला और फिर अंदर ठूसने लगा। जब विक्की पूरी तरह से दाखिल हो गया तो उसने वापस लक्ष्मी आंटी को उठाना शुरू किया.
अब लक्ष्मी आंटी रो रही थी। हमारे हर एक चाप से लक्ष्मी आंटी को दो लग रही थीं। चूत और गांड के बीच का परदा रगड़ रगड़ कर लक्ष्मी आंटी को इस अजीब चुदाई की दास्तां बता रहा था। हम लक्ष्मी आंटी को चोदते रहे और वो चुदती रही। हम दोनों उसे ठोकते रहे और वह झड़ती रही ठुकती रही और झड़ती रही।
पहली बार झड़कर लक्ष्मी आंटी चीखी तो वो बेहोश हो गई। पर हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को वैसे ही सुलाकर चोदना चालू रखा। दूसरी बार झड़ी तो लक्ष्मी आंटी होश में आयी।
लक्ष्मी आंटी “बाबू… रुकना मत… बहुत मजा आ रहा है… रुकना मत… बस ऐसे प्यार करो… मुझे अपना बना लो… चोदो मुझे…”
हमारी तूफानी ठुकाई तकरीबन 15 मिनट ही चली पर लक्ष्मी आंटी उतने में ही पस्त हो गई। आखिर विक्की लक्ष्मी आंटी को चिपक गया और उसके लौड़े ने झटके देकर अपना रस लक्ष्मी आंटी की गांड की गहराइयों में भर दिया। विक्की के लौड़े की हर हरकत मुझे बीच के पतले परदे से महसूस होते हुए मैं भी झड़ गया। अपनी गरमी से लक्ष्मी आंटी की सुनी कोख भरते हुए मैं कराह उठा।
विक्की लक्ष्मी आंटी को पकड़ कर सरक गया और बगल में लेट गया। हम दोनों अब भी लक्ष्मी आंटी से जुड़े हुए थे और लक्ष्मी आंटी हम दोनों को पकड़ कर चुम रही थी।
Score Card शनिवार दोपहर 3 बजे तक
लक्ष्मी आंटी----- मुंह-----चूत------ गांड
विक्की--------------4-------6---------3
सन्नी-----------------4-------6---------3
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विक्की
लक्ष्मी आंटी हमें ऐस चूम रही थी जैसे हम किसी भी पल गायब हो जाएं।
लक्ष्मी आंटी “आप बहुत बुरे हो बाबू, आप दोनों ने मेरी जिंदगी बरबाद कर दी। जरा सोचा भी नही की जवान औरत को जवानी का मज़ा दिखा कर उसका क्या हाल करोगे?”
“मैं तुम्हारा मतलब नहीं समझा लक्ष्मी आंटी। तुम्हें मज़ा आया और ये गलत बात है?”
लक्ष्मी आंटी “हां, बिलकुल गलत बात है। कभी सोचा कि आप दोनों कहीं चले गए और मैं पप्पू का खड़ा न होनेवाला भाग देख कर पिट गई तो मेरे अंदर क्या बीतेगी? प्यासे को रेगिस्तान मेरे न मारे, जिसने पानी चखा वोह जरूर मरेगा। मुझे पानी क्यों पिलाया?”
लक्ष्मी आंटी रो रही थी। उसके मन में दुख नहीं, डर था। डर कि बाद में उसके शरीर की भुक उसे किस के द्वार पर खड़ा कर दे।
लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को पकड़ कर अपनी बाहों में भर लिया था।
मैंने इशारा किया तो सन्नी बेड से उतर गया। लक्ष्मी आंटी ने मुझे ऐसे पकड़ा जैसे डूबते को तिनका। सन्नी भागते हुए वापस आया और उसने लक्ष्मी आंटी को कोई चीज ऐसे दी जैसे कोहिनूर हीरा हो।
लक्ष्मी आंटी उसे देख कर पहचान गई। यह तो वो था जिस से लक्ष्मी आंटी तड़प तड़प कर farmhouse पहुंची थी।
लक्ष्मी आंटी “सन्नी बाबू अब बोलने की भी सजा दोगे?”
सन्नी “लक्ष्मी आंटी, ये सजा नहीं मज़ा है। जैसे हम दोनों को हिलाकर तुमने हमें खुश किया और हमारी भूक़ मिटाई, ये भी वही करेगा।”
लक्ष्मी आंटी हम से बड़ी थी पर अधेड़ उम्र की नही थी। उसने उत्सुकता से फिर से देखा। सन्नी ने उस lipstick vibrator को मेरे हाथ में दिया। सन्नी खुद लक्ष्मी आंटी को उठाकर, उसके पीछे बैठ गया। अब लक्ष्मी आंटी सन्नी के कंधों पर सर रख कर बैठी थी। लक्ष्मी आंटी के पैर फैले हुए थे और हाथ खुले। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को पीठ पीछे से बहों में भर कर सहारा दिया था तो मैं लक्ष्मी आंटी को उसके शरीर के अंग दिखा रहा था।
लक्ष्मी आंटी को जब पता चला कि वह अपनी भूख अपने हाथों मिटा सकती है तो ऐसे खिली जैसे बच्ची को गुड़िया मिले। लक्ष्मी आंटी को मैंने समझाया कि औरत को यौन सुख उसकी योनी के उपर बने दाने से मिलता है और योनी के अंदर पुरुष का लिंग जाने से। अगर लिंग ना मिले तो लिंग जैसी कोई भी चीज चल जाएगी। शरीर को इस से कोई फरक नही पड़ता।
लक्ष्मी आंटी शर्म से लाल हो गई और उसने अपने हाथों से चेहरा छिपा लिया। 15 मिनट पहले ही 2 मर्दों को एक साथ लेते हूए जो लक्ष्मी आंटी जोर जोर से चिल्ला कर मज़े ले रही थी वो योनी और लिंग सुन कर शरमा रही थी।
सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के हाथ खींच कर नीचे किए। लक्ष्मी आंटी का बदन शरम से लाल हो गया था। मैंने vibrator लक्ष्मी आंटी के हाथ में देकर उसे अपनी मुनिया को प्यार करने के लिए कहा। लक्ष्मी आंटी ने हिचिचाहट के साथ vibrator अपने दाने पर लगाया और बिजली के झटके की तरह बेड से उड़ी।
लक्ष्मी आंटी “विक्की बाबू, ये मुझसे नहीं होगा। गुदगदी सी होती है।”
सन्नी ने पीछे से लक्ष्मी आंटी के दूधिया गोले पकड़ कर दबाने लगा। सन्नी की उंगलियों के बीच फसी लाल बेरियां दबते हुए निचोड़ी जा रही थी। मैंने लक्ष्मी आंटी के हाथ पकड़ कर लक्ष्मी आंटी को अपना मज़ा लेने के लिए मजबूर किया। धीरे धीरे लक्ष्मी आंटी तपने लगी और मज़े से खुद को चोदने लगी।
लक्ष्मी आंटी की आहों से कमरा भर गया। मैं बेड से उतर गया और लक्ष्मी आंटी की मादक सुंदरता निहारने लगा। लक्ष्मी आंटी अब अपना आपा खो कर किलकारियां देते हुए खुद के शरीर को सुख देने में व्यस्त हो गई। सन्नी भी इस मनजर को दंग हो कर देख रहा था।
कुछ देर बाद लक्ष्मी आंटी की योनी से रस का रिसाव हुआ और लक्ष्मी आंटी सन्नी के बदन पर अपना बोझ डाल कर निढाल हो गई।
“क्या लक्ष्मी आंटी? मजा आया कि नहीं?”
लक्ष्मी आंटी ने शरमा के नीचे देखा और सर हिलाकर हां कहा।
सन्नी “लक्ष्मी आंटी, आधी अधूरी खुशी में इतना नहीं शरमाते। विक्की कुछ दिमाग चला।”
अब मैं नीचे भागा। मुझे जो चाहिए था वो लेकर मैं उपर दौड़ा। लक्ष्मी आंटी ने मेरे हाथों में लौकी देख चकराकर मेरी ओर देखा। मैंने हंस कर लक्ष्मी आंटी को कहा कि लौकी का नया उपयोग सीखने का समय हो गया है।
“अरे लक्ष्मी आंटी, डरो मत। सुबह खीरे के साथ कि मस्ती याद है ना? अब लौकी का खेल, खेल लो।”
लक्ष्मी आंटी ने जब मुझे लौकी पर तेल लगाते देखा तो उसकी आंखें फ़टी की फटी रह गई। मैंने हंसकर लौकी से अपना लौड़ा नापा और उतनी लंबाई पर नाखून से लौकी पर निशान बनाया। अब लौकी का तेल लगा छोर लक्ष्मी आंटी की खुली पंखुड़ियों के बीच लगा दिया।
लक्ष्मी आंटी “असस… विक्की बाबू… ये गंदा है। गलत है… अहह…”
मैंने और सन्नी ने लक्ष्मी आंटी की एक न सुनी और उसे हस्तमैथून का अभ्यास कराने लगे। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी का हाथ पकड़कर उसके सुख के दाने को स्वर्ग के सुखों का द्वार बनाने का काम किया था। जबकि मैं, लक्ष्मी को बिना मर्द के चुदाई सीखा रहा था। लक्ष्मी आंटी मुंह से लाख मना करने के बाद भी खुशी से हमारा साथ दे रही थी। कुछ देर की जबरदस्ती के बाद लक्ष्मी आंटी इतनी उत्तेजित हो गई कि हम दोनों उसके हस्तमैथून का खेल देख रहे थे और लक्ष्मी आंटी बड़ी खुशी से खुद को चोद रही थी।
3 मिनट बाद, लक्ष्मी आंटी ने कांपते हुए एक चीख निकाल कर अपनी मुनिया से पानी छोड़ा। हांफते हुए लक्ष्मी आंटी ने पूछा “बाबू, क्या मर्द भी ऐसा करते हैं? आप दोनों भी ऐसे करते हैं?”
सन्नी “हां, लक्ष्मी आंटी। मर्द जवान होने के बाद से ये सब खुद शुरू कर देते हैं। क्या तुम देखना चाहती हो कि तुमने जो खुशी ली है उस से हमें कितनी तकलीफ हुई है?”
हम दोनों बेड पर लक्ष्मी आंटी के सामने खड़े हो गए। हमारे सख्त लौड़े फूलकर लक्ष्मी आंटी कि नाक की ओर इशारा कर खड़े थे। हम दोनों ने एक दूसरे की ओर देखा। हमने आज तक कभी एक दूसरे के सामने नही हिलाया था।
“यार सन्नी, साला एक साथ अगर लक्ष्मी आंटी को चोद सकते हैं तो हिला कर दिखा भी सकते हैं। चल शूरु करते हैं।”
मैंने अपने लौड़े को अपनी मुठी में पकड़ लिया और धीरे धीरे आगे पीछे हिलाने लगा। सन्नी भी मेरे ताल में अपना लौड़ा हिला रहा था। लक्ष्मी आंटी आंखे फाड़ कर हमारे लौडों को देख रही थी।
लक्ष्मी आंटी “जब ये दोनों मेरे अंदर जाते हैं तो ऐसे ही दिखते हैं?”
“हां भी और ना भी। दिखते तो कुछ ऐसे ही होंगे पर कुदरत नही चाहती कि इंसान ऐसे करे।
इसीलिए ऐसा करने में हाथ को रस नहीं होता और ज्यादा करने से लौड़ा छिल सकता है। जब तक लड़के को लड़की अपने अंदर नहीं लेती तब तक लड़का ऐसे ही खुद को बेहला सकता है।”
लक्ष्मी आंटी ने अपने हाथ उठाए और हम दोनों के हाथ हटाए।
लक्ष्मी आंटी “जब तक लक्ष्मी आंटी है, मेरे बाबुओं का हथियार नही छिल सकता। मैं ऐसा होने नहीं दूंगी।”
लक्ष्मी आंटी आगे बढ़ी और हमें एक साथ देखते हुए उसने हम दोनों के लौड़े एक साथ अपने मुंह में ठूस दिए। लक्ष्मी आंटी के गरम गीले मुंह में हम दोनों के लौड़े एक दूसरे से टकराकर बिछड़ रहे थे। हालांकि हमें लक्ष्मी आंटी के अलग अलग छेद एक साथ लेने में दिक्कत नहीं थी पर एक छेद में एक साथ थोड़ा अजीब लग रहा था। खुशी की बात यह थी कि बीच में लक्ष्मी आंटी की जीभ आ कर हमारी मालिश करती। पहले से ही उत्तेजित हम दोनों ज्यादा टिक नहीं पाए। कुछ ही देर में हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी का नाम आलाप कर उसकी जीभ को अपने गाढ़े रस से अभिषिक्त किया। लक्ष्मी आंटी ने हमारे रस को अपने मुंह में संभाल कर रखते हुए अपने होठों से हम दोनों को निचोड़ लिया। जब अपना पूरा रस उड़ेल कर हम दोनों पीछे सरक गए तो लक्ष्मी आंटी ने हमें अपने मुंह में जमा रस दिखाया। लक्ष्मी आंटी ने अपनी गुलाबी जीभ से उस गाढ़े रस को मिलाया और फिर अपने होंठों को दबाकर बंद कर दिया।
लक्ष्मी आंटी हमारी आंखों के सामने, हम दोनों का रस गटक गई। अब की बार हम दोनों आंखे फाड़ कर लक्ष्मी आंटी को देख रहे थे।
लक्ष्मी आंटी “खबरदार अगर किसी ने मेरे बाबुओं के हथियार को छुआ भी तो!!”
Score Card शनिवार दोपहर 4 बजे तक
लक्ष्मी आंटी -मुंह------चूत --------गांड
विक्की---------5---------6---------3
सन्नी------------5---------6---------3
18
सन्नी
हम दोनों को निचोड़ कर लक्ष्मी आंटी अपनी गांड़ ठुमकाते हुए चली गई। हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी का ललचाता पिछ्वाड़ा देख अपने आप पर गुस्सा किया।
“विक्की, ये बड़ी ना इंसाफी है कि हम लक्ष्मी आंटी की चूत मार कर गांड़ को सुखा छोड़ रहे हैं। क्यों ना इसका इंतजाम किया जाए?”
विक्की “सच में, ऐसी लापरवाही हमसे ठीक नहीं। चल करते हैं।”
हम दोनों निचे उतरे तो देखा लक्ष्मी आंटी शाम का नाश्ता कर रही थी। हमने उपर ही तय कर लिया था कि आगे क्या करना है।
विक्की “लक्ष्मी आंटी, अगर इस रूप में kitchen में काम करो तो गलत जगह जल जाओगी फिर हमारा खयाल कौन रखेगा?”
लक्ष्मी आंटी “अब आप दोनों क्या खिचड़ी पका रहे हो? वैसे तो अगर मैं कपड़े पहनूं तो खिंच कर निकाल दोगे। बोलो अब क्या सोचा है?”
“लक्ष्मी आंटी, तुम तो हमें पहचान गई। लो, इसे पहन कर जलने का डर कम हो जायेगा।”
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लक्ष्मी आंटी “आह हा हा हा!!! जलने से तो बच जाऊंगी पर आप दोनों से कैसे बचुंगी? अगाडी पिछाडी चिपक कर ऐसे लगे हो की मुझे नाक के सामने नहीं दिखता।
”
विक्की “लक्ष्मी आंटी, ये बहुत बुरी बात है। पहले तो तुमने हमारे रात भर के प्यार को बड़ी बेरहमी से धो दिया। दुबारा प्यार देना चाहा तो पेड़ पर चढ़ गई। अब बोल रही हो कि नाक के सामने दिखाई नहीं देता? चलो इसका इंतजाम भी किए देते हैं।”
विक्की के बोलने तक मैंने लक्ष्मी आंटी को कुछ दिखाया।
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लक्ष्मी आंटी “सन्नी बाबू, ये क्या बला है?”
“हमारी प्यारी लक्ष्मी आंटी, इसे chastity belt के नाम से जाना जाता है। पुराने जमाने में मर्द घर से दूर जाते हुए इसे अपनी बीवी को पहना जाता था। इस के ताले की चाबी मर्द अपने पास रखता था। अब कोई और उस औरत पर जबरदस्ती कर उसे पेट से नही कर सकता था। समझो कि मर्द अपने सबसे कीमती खजाने को बंद कर जाता था।”
लक्ष्मी आंटी ने पहले apron पहना और फिर उसने मेरी ओर देखा “खजाना बचाने के लिए या बीवी पर विश्वास नहीं था इस लिए? वैसे भी आप दोनों अब मेरे पति हो तो यह पट्टा क्या कर लेगा?”
विक्की “लक्ष्मी आंटी, हम दोनों आप की कसम खा कर कहते हैं कि कल सुबह से पहले हम यह पट्टा बिलकुल नहीं खोलेंगे।”
लक्ष्मी आंटी “अगर मुझे बीच में जाना पडा तो?”
“अरे लक्ष्मी आंटी, जब मर्द कई महीनों के लिए जाते थे तो क्या औरतें सब कुछ रोक लेती? इस में पीछे से खुला छोड़ा हुआ है।”
लक्ष्मी आंटी ने मेरी मदद से belt पहनना शरू किया। जब belt कमर के पास पहुंचा, मैंने बीच में लगा औजार उठा लिया। मेरा इशारा समझ कर विक्की ने लक्ष्मी आंटी की कमर में belt खिंच लिया।
लक्ष्मी आंटी “हान… इसश… सन्नी बाबू… अम्म्म… आह्ह… रुक जाओ बाबू!!!”
“क्या हुआ लक्ष्मी आंटी?”
लक्ष्मी आंटी “ये क्या है? पहले तो नहीं था! कुछ मेरे अंदर गया है। आह… निकालो इसे…”
विक्की “अरे लक्ष्मी आंटी अब तो ताला भी लग गया। कल सुबह तक नहीं खुलेगा। जरा हिलाकर देखो, शायद निकल जाए।”
लक्ष्मी आंटी “विक्की बाबू, तंग मत करो। आपके औजर जितना बड़ा क्या हिलने से निकलेगा? ये तो बिलकुल उस आह्ह्हह्ह… बाबू…”
विक्की (शैतानी मुस्कान से) “क्या हुआ लक्ष्मी आंटी?”
लक्ष्मी आंटी (खुद को संभालते हुए) “बड़े वो हो आप दोनों!!! पुराने जमाने के मर्द अपनी औरत को ऐसे तड़पाकर छोड़ जाते थे क्या?”
“नहीं लक्ष्मी आंटी, उस जमाने में बैटरी और रिमोट कंट्रोल नहीं थे। पर अब ये रिमोट कंट्रोल अगर चाहिए तो इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। बोलो चुकाओगी इसकी कीमत?”
लक्ष्मी आंटी “अब क्या करवाओगे बाबू? अब आपकी हो चुकी हूं और क्या दूं आपको?”
“लक्ष्मी आंटी, पिछले 24 घंटों में तुम ने हम दोनों को वोह खुशी दी है कि हम तेरे गुलाम है। पर सच कहें तो लक्ष्मी आंटी हम दोनों थोड़ा थक गए हैं। क्यों ना हम सब ताश का खेल खेलें?”
लक्ष्मी आंटी “सन्नी बाबू, ये ताश और बोतल ने मेरी जिंदगी बरबाद कर दी है। इसे मेरे हाथ मत दीजिए।
”
“लक्ष्मी आंटी, हर ताश का खेल जुआ नहीं होता और हर बोतल शराब नहीं होती! चलो, आज ताश के पत्तों का सादा खेल दिखाते हैं।”
विक्की ने ताश का पैक लाया और हमने बच्चों के ताश के खेल लक्ष्मी आंटी को सिखाए। लक्ष्मी आंटी अपनी चूत में मचलते vibrator से सिहरते हुए खेल सीख रही थी। लक्ष्मी आंटी हर बात में हम दोनों से हारी थी और अब जीत का एक और मौका पाकर उसे गवाना नहीं चाहती थी।
विक्की और मैं जल्द ही समझ गए कि लक्ष्मी आंटी बड़ी समझदार और तेज दिमाग थी। लक्ष्मी आंटी जल्दी खेल सीख गई और कुछ ही देर में जितने भी लगी। हमने लक्ष्मी आंटी को सिर्फ घर के काम करते देखा था और उसके बाद लक्ष्मी आंटी हमारी हवस का शिकार थी। लक्ष्मी आंटी का ये रूप नया और लुभावना था जब वह एक होशियार जवान लड़की थी। चतुराई और बुद्धि भी औरत को आकर्षक बनती है ये बात हम दोनों को आज समझ आई। अगर बदनसीब लक्ष्मी आंटी पढ़ाई कर पाती तो आज वह इस हालत में नहीं होती।
लक्ष्मी आंटी “मैं जीत गई… मैं जीत गई… हा!!!”
लक्ष्मी आंटी ने खुशी से झूम कर नाचते हुए कहा। हम दोनों लक्ष्मी आंटी की अल्हड़ खूबसरत जवानी को देख दंग थे। लक्ष्मी आंटी ने झुक कर हम दोनों को चूमा और फिर आदेश दिया।
लक्ष्मी आंटी “बाबू, अब आप दोनों हार गए हो। लाओ वो रिमोट कंट्रोल मुझे दो!!! अब और सहा नहीं जाता। दो!!”
मैंने हंसके लक्ष्मी आंटी की बात मानली और रिमोट कंट्रोल उसे से दिया। लक्ष्मी आंटी ने देखा और कहा “इसमें off कैसे करते हैं?”
रिमोटकंट्रोल पर सिर्फ १-४ अंक थे ० नहीं था।
विक्की “लक्ष्मी आंटी, इसको रिमोट कंट्रोल से बंद नहीं कर सकते। अब भी ये 1 पर चल रहा है। 1 से 4 जो मरजी चला लो पर बैटरी ख़तम होने तक ये रुकेगा नहीं। शायद स्पीड बढ़ा कर बैटरी जल्दी ख़तम हो गए।”
लक्ष्मी आंटी “उन्हह… आप दोनों बड़े शैतान हो!!! आह… मां… क्या करूं!!! उफ्फ…”
लक्ष्मी आंटी ने झट से स्पीड बढ़ाई और 1- 2- 3- करते 4 पर पहुंची। लक्ष्मी आंटी का बदन अब सिहरन को पार कर कांपने लगा और लक्ष्मी आंटी ने जमीन पर गिर कर झडना शुरू कर दिया। 3 मिनट तड़पने के बाद लक्ष्मी आंटी ने जैसे तैसे स्पीड घटा कर 1 पर लाया।
लक्ष्मी आंटी की आंखे खुली तो हमें देखता पाया। लक्ष्मी आंटी शरमा कर लाल हो गई तो हम दोनों हंसने लगे। लक्ष्मी आंटी ने नकली गुस्से में हम दोनों पर 1-1 प्याज फेंका। "जल्दी से काटो नहीं तो नाश्ता नहीं दूंगी।”
लक्ष्मी आंटी ठुमकते कूल्हों से kitchen में गई और हम दोनों किसी अदृश्य डोर से बंधे उसके पीछे पीछे खिंचे चले गए
19
शनिवार शाम 6 बजे
सन्नी
लक्ष्मी आंटी के नखरे हमें ज्यादा नहीं झेलने पड़े। नाश्ता करने के बाद Kitchen में ही लक्ष्मी आंटी ने लगभग गिड़गिड़ाते हुए उसे छुटकारा दिलाने की गुहार लगाई।
मैंने बड़े नखरे दिखा कर उसे हमारी कसम याद दिलाई।
लक्ष्मी आंटी तड़प रही थी और मैंने उसे अपना लौड़ा दिखाया तो लक्ष्मी आंटी भूकी शेरनी की तरह लपक कर उसे निगल गई। जब मेरा लौड़ा चिकनाहट से भर गया तो मैंने लक्ष्मी आंटी को kitchen के मेज पर एक पैर रख कर लेटने को कहा। Chastity belt के पिछवाड़े में बनी खाली जगह से लक्ष्मी आंटी की भुरी आंख दिख रही थी।
मैंने अपना चिकना लौड़ा लक्ष्मी आंटी की गांड़ में दबाया तो लक्ष्मी आंटी ने एक प्यारी सी आह… के साथ मेरा डंडा अपनाया। हालांकि लक्ष्मी आंटी ने 6 बार गांड़ मरवाई थी फिर भी वह अब तक गांड़ मारने की आदि नहीं हुई थी। लक्ष्मी आंटी हमारी जिद के लिए गांड़ मराती थी। विक्की ने आगे से झुक कर लक्ष्मी आंटी को चूमना शुरू किया तो मैंने लक्ष्मी आंटी की गांड़ फैलाकर पेलना जारी रखा। लक्ष्मी आंटी की चूत कि गहराइयों में बजता vibrator बीच के पतले मांस के परदे से मेरे लौड़े को मालिश कर रहा था। Vibrator की झुनझुनाहट ने लक्ष्मी आंटी को पहले से गरम कर रखा था और अब मेरे मूसल ने साथ साथ लक्ष्मी आंटी के पिछवाड़े को बजाकर उसे शरीर सुख की चोटी से धकेल दिया। लक्ष्मी आंटी झडने लगी पर मैं रुका नहीं। लक्ष्मी आंटी के बदन में होता लौड़ा-vibrator घर्षण उसे कामोत्तेजना के अधर में लटकाए झूला रहा था। लक्ष्मी आंटी विक्की का लौड़ा चूसते हुए अपना बदन झटक रही थी, कांप रही थी, मुंह से लार टपकाती आंखे घुमाकर अकड़ते हुए झड रही थी।
अचानक विक्की ने अपना लौड़ा लक्ष्मी आंटी के मुंह में से बाहर खींच लिया। लक्ष्मी आंटी ने लगभग रोते हुए हाथ बढ़ाकर उसे पकड़े रखने की कोशिश की पर नाकाम हुई।
तकरीबन 15 मिनट की बेरहम कुटाई के बाद मैंने अपना लौड़ा जड़ तक लक्ष्मी आंटी की गांड़ में पेल दिया और उसके आंत को अपने रस से रंग दिया। मैंने ' प्क्क' की आवाज से लक्ष्मी आंटी की गांड़ में से अपनी तलवार निकाली तो लक्ष्मी आंटी ने कराहकर अपने आखिरकार थमे चरमसुख से सांस ली।
अफसोस की लक्ष्मी आंटी को इतनी ही राहत मिलनी थी। विक्की ने लक्ष्मी आंटी के मुंह में झडने के डर से अपना लौड़ा बाहर निकाला था और अब अपनी बारी लेने को आतुर होकर वह आगे बढ़ा। लक्ष्मी आंटी में इतनी भी ताकत नहीं बची थी कि वह विक्की का विरोध करती। विक्की ने लक्ष्मी आंटी को घुमाकर लक्ष्मी आंटी को पीठ के बल लिटा दिया। फिर विक्की ने लक्ष्मी आंटी के अब खुले और मेरे रस से भरे छेद में अपना खूंटा ठूस दिया।
“विक्की बाबू…” लक्ष्मी आंटी ने पुकारा और उसके लौड़े को अपने पिछले छेद में निगल गई। विक्की ने लक्ष्मी आंटी के दोनो पैर अपने कंधो पर रख दिए और झटकेदार ठुकाई करने लगा। लक्ष्मी आंटी ने मेज को अपनी गांड़ के दोनों तरफ से पकड़ लिया जिस से विक्की को अपने झटके देने में सहूलियत मिली।
मैं मेज के दूसरी ओर से लक्ष्मी आंटी के हिचकोले खाते दूधिया गुब्बारों को देख कर ललचाया। मैंने झुक कर लक्ष्मी आंटी की चूची पर जड़े तंग बेरी को अपने होठों से पकड़ा और दुसरी चूची को पकड़ कर दबाने लगा।
अबकी बार लक्ष्मी आंटी का मुंह खुला था तो उसने असंबद्ध आवाजें निकाल कर अपनी उत्तेजना दिखाई। लक्ष्मी आंटी अब न तो कोई लड़की थी न ही औरत, वह केवल प्रणय सुख में झूलती और उसे झेलती एक मादा थी। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की गांड़ को अच्छे से फैलाकर पेला और 15 मिनट स्वर्ग घुमाकर ही लक्ष्मी आंटी की गांड़ में झड़ गया।
जब हम दोनों पीछे हो कर अपनी मेहनत के असर का निरीक्षण करने लगे। लक्ष्मी आंटी के दोनों पैर अंदर से गीले थे। चूत में से बहता रस देखा तब पाया कि मेज के नीचे लक्ष्मी आंटी के रसों से डबरा बना है। लक्ष्मी आंटी मेज पर निढाल होकर पड़ी थी। लक्ष्मी आंटी की खुली गांड़ में से हमारा गाढ़ा घोल अब टपक कर नीचे बने डबरे को सामूहिक रूप दे रहा था। लगातार आधे घंटे तक झडने से लक्ष्मी आंटी पस्त हो गई थी लेकिन अब भी लक्ष्मी आंटी की चूत में झुनझुनाता vibrator अपना दम तोड़ने से कोसों दूर था।
“बेचारी लक्ष्मी आंटी!!!”
Score Card शनिवार शाम 6 बजे तक
लक्ष्मी आंटी--मुंह------चूत------गांड
विक्की---------5---------6-------4
सन्नी------------5---------6-------4
20
विक्की
लड़खड़ाते कदमों से लक्ष्मी आंटी ने kitchen के मेज से कुर्सी तक का सफर तै किया। लक्ष्मी आंटी ने vibrator की बैटरी जल्दी ख़तम करने के लिए उसे पूरी speed par दौड़ाए रखा था। उस से लक्ष्मी आंटी की हालत जल बिन मछली की तरह तड़पने से थी। रात के खाने के लिए लक्ष्मी आंटी को kitchen में कुर्सी पर बिठा कर हम दोनों ने काम किया। लक्ष्मी आंटी, जैसे तैसे हम दोनों को खाना बनाना सिखा रही थी। जब खाना परोसा गया तो लक्ष्मी आंटी को हिलना डुलना मुश्किल हो गया था।
हमने वहीं पर खाना परोसा। Kitchen में लक्ष्मी आंटी के पैरों के बीच में कोई सैलाब उमड़ा था। लक्ष्मी आंटी की जांघे उसके रस से भीगी हुई थी और लक्ष्मी आंटी बिना रुके झडती हुई कुर्सी पर बैठी थी।
लक्ष्मी आंटी “बाबू, सुबह कब से होगी? मुझे थकान हो गई है। अब सहना मुश्किल है। मुझे छुड़ाओ इस आफत से!!!”
“लक्ष्मी आंटी, जरा खाना खालो। सुबह तो 4 बजे से होती है पर बैटरी उस से पहले ही दम तोड़ देगी। वैसे भी, खाना होते ही हम सब ऊपर जा कर तुम्हारी गांड की वो खबर लेंगे की तुम इस मीठे दर्द को भूल जाओगी।”
लक्ष्मी आंटी ने फटाफट खाना खाया और हमारी ओर देखा। हम दोनों ने भी अपना खाना खा लिया था। लक्ष्मी आंटी के पैर लड़खड़ाये तो मैंने उसे अपनी बाहों में उठा लिया। लक्ष्मी आंटी ने मेरे कंधे पर अपना सिर रख कर मुझपर अपना विश्वास दिखाया। हम सब ऊपर गये तो सन्नी ने लक्ष्मी आंटी का apron उतार दिया। Chastity belt से छुटकारा पाने में अभी पूरी रात जानी थी।
हम दोनों बेडपर बैठ गए तो लक्ष्मी आंटी अपने हाथों और घुटनों के बल रेंगते हुए हमारे सामने आई। अपने पेट के बल लेटकर लक्ष्मी आंटी ने अपने पैरों को फैलाया। इस से vibrator पर पैरों का दबाव कम हुआ पर वह थोड़ा सा अंदर दब गया।
लक्ष्मी आंटी “बाबू, चोदो मुझे। मुझपर कोई रहम मत करना। बुरी तरह कूटो मुझे। आह… बाबू…”
लक्ष्मी आंटी ने अपने सामने नजर आने वाले पहले लौड़े को निगल लिया और दूसरे को पकड़ कर हिलाने लगी। कुछ देर बाद पहले लौड़े पर बनी चिकनाहट से वह लौड़ा गले में उतरने लगा तो लक्ष्मी आंटी ने उसे छोड़ दूसरे को चूसना शुरू किया।
मैंने लक्ष्मी आंटी की इजाजत समझकर, बेड पर से उतर गया। लक्ष्मी आंटी सन्नी के लौड़े को चूसने में दंग थी जब मैं पीछे से चढ़ गया। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी का सर अपने लौड़े पर दबाया, मैंने उसी वक़्त धावा बोला।
मेरे सुपडे ने लक्ष्मी आंटी की गांड को भेद कर फैलाया तो लक्ष्मी आंटी ने फरक पहचाना। अब तक सन्नी पहले गांड फैलता और फिर मैं उसे चौड़ा करता। लक्ष्मी आंटी की कसी हुई गांड फैलते हुए मैं अपने लौड़े को जड़ तक दबाते हुए ले जाया। लक्ष्मी आंटी के बदन पर लेट कर अब हम दोनों सन्नी का पेट देख रहे थे।
आखिरकार मदत सन्नी से ही मिली। सन्नी उठ कर सरक गया और मैंने लक्ष्मी आंटी की गांड मारना शुरू कर दिया। लक्ष्मी आंटी इतनी गरम हो चुकी थी कि वह निचे से अपने कूल्हे उठा कर मेरे हर धक्के को अपने अंदर ले रही थी। इस धमाचौकड़ी में सन्नी चुपचाप बाजू में खड़ा रेकॉर्डिंग कर रहा था।
लक्ष्मी आंटी इस तरह गांड पहले मरा चुकी थी और अब अपना पूरा सहयोग देते हुए मजे ले रही थीं। मैंने लक्ष्मी आंटी के दूधिया गोले अपनी मुठ्ठी में के भींच कर अपनी तोप दागी और लक्ष्मी आंटी कि गदराई गांड में अपने बीज की बौछार कर दी। मैं लक्ष्मी आंटी के बदन पर गिर गया पर लक्ष्मी आंटी ने अपनी गांड से मेरे लौड़े को निचोड़ना जारी रखा।
“सन्नी, यार बचा ले। इसकी गांड अब भी भूकी है। ले तू पेल कर इसकी भूक मिटा दे।”
सन्नी ने कैमरे को बगल में रख दिया और बेड पर लेट गया। मेरे उठते ही लक्ष्मी आंटी उठी और सन्नी का लौड़ा चूसने लगी। मैंने कैमरा उठाया और रिकॉर्डिंग जारी रखा। लक्ष्मी आंटी की गांड का छेद थोड़ा खुला था और मेरे रस की कुछ बूंदें वहां से बाहर निकलने वाली थी। लक्ष्मी आंटी ने अचानक अपने हाथ से अपनी गांड के छेद को दबाया। लक्ष्मी आंटी ने अपनी रस से लबालब भरी गांड सन्नी की सुपडे से बंद कर दी। लक्ष्मी आंटी के थोड़े जोर लगाने से सन्नी का भाला लक्ष्मी आंटी कि गांड में सेंकने लगा।
लक्ष्मी आंटी ने बड़े मस्ताने अंदाज में सन्नी की आंखों में देख कर चुधना शुरू कर दिया और सन्नी भी लक्ष्मी आंटी के मम्मे मालिश करते हुए चुचियों को निचोड रहा था।
उन दिनों की काम वासना देख, उनसे दूर रहना मुश्किल था पर मैंने किया।
जब सन्नी ने आह भरकर लक्ष्मी आंटी की गांड़ भरी तब हम सब थक कर सो गए। लक्ष्मी आंटी के Chastity belt का vibrator कब बंद हो गया ये तो शायद लक्ष्मी आंटी को भी पता नहीं चला। आज रात में हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को ज्यादा परेशान नहीं किया। बस एक एक बार फिर से गांड़ मारी तो दो दो बार अपना रस पिलाया।
Score Card रविवार सबेरे 4 बजे तक
लक्ष्मी आंटी-मुंह----चूत----गांड
विक्की--------7-------6------6
सन्नी-----------7--------6------6
22
सन्नी
पिछले 36 घंटों में हम दोनों 20-20 बार झड़ चुके थे और लक्ष्मी आंटी की हालत न पुछे तो ही बेहतर। अब हम सब ऐसी हालत में थे कि हम थक कर चूर चूर हो गए थे।
सुबह 7 बजे जब मैंने आंखें खोली तब बेड पर लक्ष्मी आंटी नहीं थीं। दबे पांव मै नीचे उतरा तो लक्ष्मी आंटी को kitchen के बाहर सब्जियों के बाग में कुर्सी पर शांत बैठ कर पुराना अखबार पढ़ते पाया। लक्ष्मी आंटी की खुली पीठ उसकी जवानी को उजागर कर, मुझे सोचने पर मजबुर कर रही थी।
लक्ष्मी आंटी काम करती हैं पर वह गुलाम नहीं, मजबुर से चोरी की पर गुनहगार नहीं, एक कि पत्नी होते हुए दो प्रेमी है पर बदचलन या वैष्या नहीं। लक्ष्मी आंटी के साथ आज तक जो भी हुआ है उसके लिए कोई और जिम्मेदार है। लक्ष्मी आंटी तो आज भी छोटी छोटी खुशियों से खुश होने वाली एक जवान लड़की है।
मैंने दूसरी कुर्सी लक्ष्मी आंटी के बगल में रख दी।
लक्ष्मी आंटी ने शरमाकर झट से अखबार छुपाया “सन्नी बाबू, आप उठ गए! आवाज दे देते, मैं अभी चाय बनाती हूं।”
“रुक जाओ लक्ष्मी आंटी। जरा बैठो। अगर मैं और विक्की थके हुए हैं तो तुम हमसे दुगना थकी हुई होगी। फिर भी एक बार भी चुं तक नहीं की। अब लक्ष्मी आंटी तुम बोलो। मैं जानता हूं कि लक्ष्मी आंटी कौन है और क्या करती है। मुझे बताओ कि लक्ष्मी कौन है? लक्ष्मी क्या करती है? क्या करना चाहती है? अगर लक्ष्मी को मिले तो लक्ष्मी क्या चाहेगी?”
लक्ष्मी आंटी ने मेरी बात उड़ा देनी चाही लेकिन फिर धीरे से बोल पड़ी “मैंने दसवी कक्षा पूरी की है। मैं पढ़ना चाहती थी पर पैसे और शादी बीच में आ गई। जब पप्पुजी घर में नही होते तब मैं पड़ोसी का टीवी सुनती हूं, कभी कभी गाने बजते हैं तो अकेली नाचती हूं। मैंने घर का हिसाब अच्छे से संभाला है और अगर मैंने रखे हुए पैसे पप्पूजी शराब के लिए नही लेते तो कभी चोरी नही करती। बचपन में सोचती थी कि बड़ी होकर किसी बड़ी कंपनी मे सारा हिसाब मेरे हाथ में होगा। मेरा बच्चा कभी कमी नहीं देखेगा। लड़का हो या लड़की मैं उसे पढ़ा लिखाकर बहोत बड़ा करूंगी।
छोड़ दो ये फिजूल के सपने बाबू। आप मुंह धो लो, मैं अभी चाय बनाती हूं। विक्की बाबू!!! अं… आप कब आए? आप भी मुंह धो लो, चाय अभी बन जाएगी। नाश्ते में क्या लोगे?”
“सुना तूने?”
विक्की “काश मैं न सुनता।
काश कि लक्ष्मी आंटी एक सिक्के की तरह होती। एक हमारा नजरिया और एक लक्ष्मी आंटी का। लक्ष्मी आंटी आज किसी हीरे की तरह लगी। जहां से देखो एक अलग रूप, अलग पहचान है। क्या करें?
हम दोनों बातें करते हुए bathroom में गए। बाहर आते आते एक बात तो पक्की हो गई कि लक्ष्मी आंटी को हम जितनी खुशी दे सके वो हम दोनों देंगे। लक्ष्मी आंटी ने हमें चाय के साथ biscuit दिए। हमने लक्ष्मी आंटी को अपने साथ बिठा कर खाने के लिए कहा। लक्ष्मी आंटी का बरताव थोड़ा शर्मिला और हिचिचाहट से भरा हुआ था।
लक्ष्मी आंटी ने हमारे साथ नंगे बदन होने की आदत कर ली थी पर आज उसने गलती से अपने सपने दिखाकर अपने मन को नंगा कर दिया था। विक्की ने लक्ष्मी आंटी से कहा कि हम सब बाहर टहलने जाते हैं तो लक्ष्मी आंटी झट से मान गई। नंगे बदन बगीचे में घूमती लक्ष्मी आंटी कोई अप्सरा लग रही थी।
उगते सूरज की किरणों से धूप सेंकते हमने पेड़ पौधों को पानी डाला। लक्ष्मी आंटी ने अलग अलग पौधोंकी पैदावार बताई, उनसे मिलने वाले नफे नुकसान का हिसाब बताया। सुबह के 8 बजे तक हम सब घूम कर वापस आ गए।
लक्ष्मी आंटी का पसीने की महीन परत से चमकता बदन हम युवाओं के यौवन को ऐसे ललचा गया जैसे आदमखोर बाघ को खून की महक। मुझे रहा नहीं गया और मैं ठंडे पानी से नहाने bathroom में दौड़ा। विक्की भी मेरे पीछे पीछे आ गया। लक्ष्मी आंटी ने हिलाने से मना किया था पर अब सहें कैसे? इस विचार में हम दोनों डूबे हुए थे कि लक्ष्मी आंटी अंदर आ गई।
लक्ष्मी आंटी की आंखे नम थी। लक्ष्मी आंटी धीरे से बोली,
“मुझे क्या कोई गलती हुई है? नहीं तो आप दोनों ने मुझसे ऐसी दूरी क्यों बना ली?”
मुझे और बर्दाश्त नही हुआ। मैंने लक्ष्मी आंटी से कहा कि हमें उस पर गुस्सा करने का कोई हक नही। उलटा हम उसके गुनहगार हैं। हम दोनों ने बेरहमी से न केवल उसकी इज्जत लूटी पर उसके तन बदन को निचोड़ कर हर तरफ से इसतेमाल किया।
लक्ष्मी आंटी के होठों पर मुस्कान आ गई, “तो बोलो, अब मैं आप दोनों को सजा दे सकती हूं? हम्म तो मैं आप दोनों को मुर्गा बनाऊं या आप दोनों के कड़क पिछवाड़े पर एक पतली डंडी से चाबुक के वार करूं?
नहीं… नहीं… ये तो बड़ी आसान सजा होगी।"
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22.2
मैं आप दोनों को यह सजा सुनती हूं कि आप दोनों अपनी लक्ष्मी आंटी को कल सुबह तक इतना प्यार करोगे की तुम्हारी लक्ष्मी आंटी को कभी इस सुख की कमी ना खले। समझे?”
लक्ष्मी आंटी ने अपनी बाहें खोली और हम दोनों उससे लिपट गए। हम सब पसीने से भीगे हुए थे तो लक्ष्मी आंटी के सुझाव पर विक्की ने गरम पानी का shower चला दिया। कल सुबह की तरह हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को अच्छे से धोया और साफ किया।
आज लक्ष्मी आंटी होश में थीं तो लक्ष्मी आंटी ने भी हम दोनों को अच्छे से रगड़ रगड़ कर नहलाया। मेरे और विक्की के हाथ लक्ष्मी आंटी की चूत, गांड़ और मम्मों को कुछ ज्यादा ही साफ कर रहे थे तो लक्ष्मी आंटी ने भी हमारे लौड़ों को अच्छे से मालिश कर साफ़ किया।
अब मुझे और सहा नहीं गया। मैंने लक्ष्मी आंटी को कमर में से मोड़ कर उसके मुंह पर विक्की का लौड़ा लगाया। पीछे मैं था तो मैंने लक्ष्मी आंटी के पैरों को फैला कर उसकी गीली चूत को खोल दिया। विक्की ने लक्ष्मी आंटी को अपना लौड़ा चूसता देख उसकी प्रशंसा की पर मुझे गुस्से में आंख दिखाई।
मेरी भी मज़बूरी थी!! मैंने लक्ष्मी आंटी की बहती चूत पर अपने लौड़े का सुपारा रगड़ा और लक्ष्मी आंटी के काम रसों से पहले अपना लौड़ा गीला कर दिया। फिर धीरे धीरे मज़े से एक एक छोटे धक्के से लक्ष्मी आंटी की चूत भर दी। लक्ष्मी आंटी की हालत विक्की के जोर जोर से चूसा जाने वाले लौड़े को समझ आई और उसने मुझे डांटा के मुंह में वह अपना रस छोड़ना नहीं चाहता।
मेरे दिमाग में बत्ती जली और मैंने झूठे गुस्से से कहा, “विक्की, अगर तुझे इतनी जल्दी है तो लक्ष्मी आंटी को उठा ले।”
मैंने लक्ष्मी आंटी के बाल पकड़ कर उसका मुंह खिंच कर विक्की के लौड़े से हटाया। 'चूउप' की आवाज से लक्ष्मी आंटी के मुंह से विक्की को लौड़ा निकला और अगले ही पल लक्ष्मी आंटी की बच्चेदानी तक घुसा मेरा लौड़ा भी बाहर निकल आया।
लक्ष्मी आंटी ने उत्तेजना में अधूरे छोड़ा जाने पर गुस्सा दबते हुए निराशा से कहा “झगड़ा मत करो बाबू, मैं आप दोनों की हूं। जैसे चाहो करो, मैं मना नहीं करुंगी।”
विक्की ने मुझे अलग होता देख गरमी में लक्ष्मी आंटी को bathroom की दीवार पर दबा दिया और उसके होंठ चूमने लगा। गरमाई लक्ष्मी आंटी ने विक्की को पूरा साथ देते हुए अपनी बाहों का हार विक्की के गले में डाल दिया।
विक्की ने मौके पर चौका मारा और लक्ष्मी आंटी चीख उठी,
“विक्की बाबू!!!! मैं गिर जाऊंगी! आह… ऊंह…”
विक्की ने लक्ष्मी आंटी को उठा कर दीवार पर दबाते हुए अपना मूसल उसकी गीली गुफा में गाड़ दिया। लक्ष्मी आंटी ने इस तरह की ठुकाई सपने में भी नही सोची होगी जिसका अब वह अनुभव ले रही थी। विक्की फटाफट वार करते हुए लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में कस कर पकड़ लिया। अब उसके पैरों को अपने हाथों के उपर लेकर लक्ष्मी आंटी की चूत और गांड़ को अच्छे से खोल दिया।
“ला विक्की, मै तेरी मदद करता हूं।”
मैंने पिछे से लक्ष्मी आंटी की जांघे विक्की के हाथों के नीचे से पकड़ ली। लक्ष्मी आंटी ने मूड कर मेरी तरफ देखा तो मैंने लक्ष्मी आंटी को चूमते हुए उसकी गांड़ को अपने सुपारे से भेद दिया।
“मां… अन्हहह… मरी… अहह… बाबू!!!… हां… हां… हां… हां…” लक्ष्मी आंटी की चीखें bathroom में गूंज उठी।
मेरे इस मजे में बस इस बात से निराश था की ये मौका हम रिकॉर्ड नहीं कर पाए।
खैर, लक्ष्मी आंटी की तंग कसी हुई गांड़ में निराशा और अफसोस के लिए जगह कहां? हम दोनों ने मिलकर लक्ष्मी आंटी को अपने लौड़ों पर उठा कर पटखना शुरु कर दिया तो लक्ष्मी आंटी ने बाहों और पैरों से विक्की को पकड़ कर पीठ और सर मेरे भरोसे छोड़ दिया। लक्ष्मी आंटी ने मानो अपने बदन की मिल्कियत हम दोनों में बांट दी थी। यह एहसास एक तरफ से लक्ष्मी आंटी के उपर हमें असीम हक देता था और दूसरी तरफ लक्ष्मी आंटी की पूरी खुशहाली की जिम्मेदारी। उत्तेजना और डर के इस मिश्रण में खुद को भूल कर हम एक दूसरे के एहसास में डूब गए।
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लक्ष्मी आंटी की चिल्लाहत से हमारी वासना बढ़ती जा रही थी। विक्की और मैं लक्ष्मी आंटी को उत्तेजना की चरम सुख में ज्यादा से ज्यादा डुबोने का काम करने के लिए लगे पड़े थे। आखिर कार लक्ष्मी आंटी की कसी हुई गांड़ में, मैं ऐसा निचोड़ा गया कि मैं सह नहीं पाया।
“लक्ष्मी आंटी… आह… आनहह… हा… हा… आह… अह…”की पुकार से लक्ष्मी आंटी की आंत मेरे बीज से भर दी गई। मेरी आवाज और मेरे लन्ड से बाहर निकलते रस को लक्ष्मी आंटी की चूत से महसूस करते हुए विक्की भी झड गया।
थकी हुई लक्ष्मी आंटी को हम दोनों ने सहारा देकर खड़ा रखा तो लक्ष्मी आंटी की चूत और गांड़ में से हमारे रस की धारा बहने लगी। थकी लक्ष्मी आंटी ने मुस्कुराते हुए कहा,
“सन्नी बाबू, इतना गुस्सा ठीक नहीं। अब उतर गया कि अब भी गुस्सा बाकी है?”
हम सब shower चला कर साफ़ हो गए और फिर बड़े bathtub में बैठ गए। लक्ष्मी आंटी bathtub में पैर फैला कर ऐसे लेटी थी कि अंदर दाखिल होता पानी उसके गुपतांगों को हलकी गुदगुदी से साफ करता। हम दोनों लक्ष्मी आंटी के बगल में लेट कर उसके शरीर के अंग अंग को अपने होठों से, हाथों से और पैरों से सहलाकर लक्ष्मी आंटी को हलके हलके उत्तेजित रखे हुए थे।
Score Card रविवार सुबह 8.30 बजे तक
लक्ष्मी आंटी--मुंह------चूत------गांड
विक्की----------8--------7--------6
सन्नी--------------8--------6-------7
23
विक्की
पानी में 10 मिनट बैठने से हमारी त्वचा पर झुर्रीयां पड़ने लगी और हम सब बाहर निकल आए। लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को अच्छे से पोंछा तो हमने भी लक्ष्मी आंटी के बदन से एक एक बूंद चूम कर उसके शरीर को सुखाया।
जाहिर सी बात है कि इस से लक्ष्मी आंटी गरमा गई और लक्ष्मी आंटी को छुटकारा दिलाने में हम दोनों लग गए। हॉल के जिस सोफे पर हम ने लक्ष्मी आंटी को पहली बार बिठाया था, उसी पर अब हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को ऐसे लिटाया के लक्ष्मी आंटी के पैर फैल कर जमीन छू रहे थे और लक्ष्मी आंटी कमर से ऊपर लेटी हुई थी।
लक्ष्मी आंटी की गीली गरमी को सूंघते हुए मैं आगे बढ़ा और अपने होठों से लक्ष्मी आंटी के गुप्तांग को चूमते हुए उसे सुखाने लगा।
लक्ष्मी आंटी ने सिसकारियों भरते हुए अपनी उंलियां मेरे बालों में डाल कर मेरा सर अपनी मुनिया पर दबाया। लक्ष्मी आंटी की आहें भरते समय पूरे बदन में सिहरन दौड़ रही थी। लक्ष्मी आंटी का बदन कांपने लगा और पसीने छूट कर लक्ष्मी आंटी उत्तेजना वश चीखने चिल्लाने लगी। मैंने लक्ष्मी आंटी के सुख के मोती को चूसना चालू रखा और अपनी जीभ से उस दाने को रगड़ते हुए अपनी उंगलियों को लक्ष्मी आंटी की गरम गहराई में उतार दिया।
लक्ष्मी आंटी ने मेरे सर को अपनी मुनिया पर दबाते हुए अपना सर हिलाकर अपनी विवशता और उत्तेजना में तड़पना जारी रखा। मैंने लक्ष्मी आंटी के रस से भरी मेरे दाहिने हाथ की उंगलियों को लक्ष्मी आंटी की चूत में से बाहर निकाला तो लक्ष्मी आंटी ने नाराजी के स्वर में कराहा।
मैंने लक्ष्मी आंटी की खाली चूत को अपनी बाईं हाथ की दो उंगलियों से भरते हुए उसे चुप कराया। लक्ष्मी आंटी के काम रस से भरी हुई दाहिनी उंगलियां अब लक्ष्मी आंटी के पिछले सुराख में फ़ैल ने लगी तो लक्ष्मी आंटी ने मज़े लेने में अगला पड़ाव पकड़ लिया। लक्ष्मी आंटी ने अब अपने हाथों को मेरे सर से हटा कर अपनी कड़ी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया। लक्ष्मी आंटी से इतनी उत्तजना सही नहीं गई और एक मस्तानी चीख निकाल कर लक्ष्मी आंटी ने मेरे जीभ पर रस की धारा उड़ा दी।
सन्नी ने कैमेरा बाजू में रखा और लक्ष्मी आंटी के उपर लेट कर उसके होंठों को हलके से चूमा।
“यार, लक्ष्मी आंटी तो फिर से पसीने में भीग गई। अब लक्ष्मी आंटी को फिर से नहाना पड़ेगा।”
सन्नी, “चल, थोड़ी मदद कर ते हैं।”
हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को फिर से bathtub के गरम पानी में बिठाया। सन्नी लक्ष्मी आंटी की हालत का फायदा उठाकर उसके उपर लेट गया और उसके होंठ चूमने लगा। लक्ष्मी आंटी को bathtub के किनारे से दिक्कत हो रही थी तो सन्नी पीछे हो गया। लक्ष्मी आंटी ने सन्नी के उपर बैठ कर उसे चूमना शुरू किया। अभी अभी झड चुकी लक्ष्मी आंटी को अपनी खाली मुनिया एक पल भी नहीं भाई और लक्ष्मी आंटी ने सन्नी के लौड़े को पकड़ कर उसका सुपाड़ा अपनी मुनिया पर रगड़ना शुरू किया। सन्नी बेचारा लक्ष्मी आंटी का हमला सहते हुए bathtub के किनारे को पकड़ कर लक्ष्मी आंटी को चूमता रहा।
लक्ष्मी आंटी ने सन्नी पर रहम करते हुए उसके लौड़े पर अपना बदन रखा और अपनी गरमी में सन्नी का लौड़ा समा लिया। पानी में मस्ती करते जोड़े को जो रोके वह १२ वर्ष तक जंगल में तपस्या कर के प्रायश्चित करे। पर जो इस जोड़े से जुड़े वो?
लक्ष्मी आंटी पानी में आगे पीछे होते हुए सन्नी के लौड़े को पकड़ कर दबाने में व्यस्त थीं तो सन्नी लक्ष्मी आंटी के इस हमले को उपभोग करते हुए आंखें बंद कर लक्ष्मी आंटी को चूम रहा था।
मेरे bathtub में दाखिल होने का पता लक्ष्मी आंटी को तब चला जब मैंने पीछे से उसके कंधे पकड़े। लक्ष्मी आंटी ने मेरी तरफ देखा तो मैंने अपने लौड़े का सुपारा लक्ष्मी आंटी की गांड़ पर दबाया।
“विक्की बाबू!!!” की चीख निकाल कर लक्ष्मी आंटी ने मेरे लौड़े को अपनी गांड़ में समा लिया। मैंने लक्ष्मी आंटी को कस कर पकड़े रखा और धीरे धीरे अपना मूसल उसकी गांड़ में पेल दिया।
हा… हा… हा… के पुकार के साथ लक्ष्मी आंटी ने सर उठाकर उपर देखते हुए अपनी उत्तेजित विवशता की चीखों से बाथरूम को भर दिया। जब मेरा लौड़ा जड़ तक लक्ष्मी आंटी की गांड़ में समा गया तो मैंने रुकना ठीक समझा। लक्ष्मी आंटी दो पल रुक कर समझ गई कि अब उसकी चाल है। लक्ष्मी आंटी ने धीरे से उठते हुए अपनी चूत और गांड़ से हम दोनों को बाहर निकाला। जब मेरे सूपड़े ने लक्ष्मी आंटी की गांड़ को फैलाया तब लक्ष्मी आंटी ने उपर देखते हुए बैठना शुरु किया।
हा… मां… आह… हनह… अंह… आह… मां!!!
लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को वापस लेने में अपनी पूरी ताकत लगा दी थी। हम दोनों लक्ष्मी आंटी की गरमी में सेकते हुए लक्ष्मी आंटी के मज़े ले रहे थे। सन्नी ने आंखों से इशारा किया तो मैंने बाजू में रखा कैमेरा देखा। लक्ष्मी आंटी की कई सुनहरी यादें हम ने कैमेरा में रिकॉर्ड की है यह देख अच्छा लगा। लक्ष्मी आंटी कैमेरा ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया से बेखबर मानो स्वर्ग में बैठे देवताओं को गुहार लगते हुए हम दोनों के लौडों से अपनी चूत और गांड़ मरवा रही थीं।
में पीछे से लक्ष्मी आंटी के तंग संतरों को पकड़ा तो सन्नी ने आगे बढ़कर उन संतरों पर जडी लाल बेरियों को अपने होठों से पकड़ लिया। हम दोनों ने मानो ठान लिया था कि लक्ष्मी आंटी की मस्तानी आवाज को कोई नहीं रोकेगा। लक्ष्मी आंटी के हर धक्के से छपाक… छ्पाक… की आवाज लक्ष्मी आंटी की चीखों में मिलकर एक नई धुन बना रही थी। लक्ष्मी आंटी ने कई बार झड़ने के कारण होश खोकर किसी जानवर की तरह चुधना जारी रखा।
5 मिनट की बेरहम कुटाई के बाद कुछ ऐसा हुआ जिसकी हम में से किसी को भी उम्मीद नहीं थी। मेरा लौड़ा छीलने लगा और सन्नी का चेहरा भी कुछ असुविधा के भाव दिखा रहे थे। लक्ष्मी आंटी की उत्तेजना की आवाज में कुछ दर्द लग रहा था। मैंने लक्ष्मी आंटी को पिछे से पकड़ कर रोका, “लक्ष्मी आंटी, कुछ गडबड है। मेरा लौड़ा जैसे पानी में भी सुख रहा है”
सन्नी के दिमाग की बत्ती जली, “धत्त तेरे की! अरे चूत में चिकनाहट के लिए रस होता है और गांड़ में भी थोड़ा रस होता है। जब हमने पानी से भरे tub में मस्ती की तो रस धूल गया और फिर हमें तकलीफ हुई।”
लक्ष्मी आंटी को हम दोनों ने उठाया और गरम पानी का shower चलाने को कहा। लक्ष्मी आंटी shower चलाने को भागी तो सन्नी ने bathtub के plug को खिंच निकाला।
Bathtub में जमा पानी बह गया और shower से होती बारिश tub में बरसने लगी। उतने में मैं क्रीम की शीशी लेकर आया।
लक्ष्मी आंटी का चेहरा क्रीम की शीशी देख कर खिल उठा। हमने लक्ष्मी आंटी को खड़ा कर उसके चूचे चूसना शुरू किया तो लक्ष्मी आंटी आहें भरती हुई हमारे सर अपने मम्मो पर दबाने लगी। हमने अपनी उंगलियों पर क्रीम लगा कर लक्ष्मी आंटी के छेदों में भर दी तो लक्ष्मी आंटी ने अपना पैर उठाकर हमें जगह बनाकर दी। हमारी उंगलियां लक्ष्मी आंटी को दोहरा चोद रही थीं जब लक्ष्मी आंटी ने हमें बाजू कर दिया।
अब लक्ष्मी आंटी ने क्रीम की शीशी में से काफी क्रीम अपनी हथेली पर लेकर अपने हाथों पर फैलाया। लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को bathtub के किनारे बिठाकर हमारे कड़े लौड़ों को अच्छे से क्रीम लगा कर चिकना बनाया। अब मेरे पैरों को जोड़ कर लक्ष्मी आंटी मेरी गोद में बैठ गई। अपनी पतली उंगलियों से मेरे लौड़े को पकड़ कर लक्ष्मी आंटी ने मेरे लौड़े को अपनी गांड़ में समा लिया।
“आह… सन्नी बाबू अब अच्छा लग रहा है। बस अब की बार अपनी लक्ष्मी आंटी की गांड़ फाड़ दो पर रुकना नहीं। मां… आह…” कहते हुए लक्ष्मी आंटी ने अपनी गांड़ मरवाना शुरू कर दिया। सन्नी ने अपना मौका नहीं छोड़ा। सन्नी ने मेरे पैर फैला कर बीच में आ गया। लक्ष्मी आंटी के पैर और फ़ैल गए तो लक्ष्मी आंटी के यौवन के फूल की पंखु़रियां भी खुल गई। सन्नी ने एक वार में अपनी तलवार लक्ष्मी आंटी की कोमल जवानी में म्यान कर दी।।
“सन्नी बाबू!!! मां… अन्हह… हा… हा… हा… ओहह… बड़े बेरहम हो बाबू। जरा बता कर आते। मैं आप को मना थोड़ी ना करती। उफ्फ… आह…” करते हुए लक्ष्मी आंटी ने सन्नी के कंधों को अपने हाथों से पकड़ लिया। अब लक्ष्मी आंटी ने सन्नी के कंधों पर जोर देते हुए खुद की चुधाई शुरू कर दी। मैं नीचे से लक्ष्मी आंटी की कमर पकड़ कर लक्ष्मी आंटी को मदद कर रहा था तो सन्नी लक्ष्मी आंटी को पकड़ने की मजबूत जगह दे कर चूधाई में अपना योगदान दे रहा था।
बीच में लगे break के कारण या पता नहीं क्यूं पर अब हमने लक्ष्मी आंटी को ऐसे shower से बेहती धारा में लक्ष्मी आंटी को 15 मिनट कुटा और तब जा कर मैंने लक्ष्मी आंटी की गांड़ भरी। मेरा रस फूट पड़ा तो मैंने लक्ष्मी आंटी की गांड़ पकड़ कर अपना लौड़ा ठूस कर रख दिया। मेरी हालत समझ कर और अपनी आत्तेजना के हाथों मजबुर सन्नी ने लक्ष्मी आंटी का कंधा दबाकर ठाप पर ठाप लगाने लगा। कुछ ही पलों में सन्नी भी अपना रस लक्ष्मी आंटी की कोख में भर कर छूट गया।
Score Card रविवार सुबह 9.30 बजे तक
लक्ष्मी आंटी मुंह----चूत----गांड
विक्की---------8-----7-----7
सन्नी------------8-----7-----7
24
सन्नी
हम सब एक दूसरे को सुखाकर वापस kitchen पहुंच गए और नाश्ता बनाया।
लक्ष्मी आंटी के साथ हंसी मजाक में वक्त का पता नहीं चला और नाश्ता करने के बाद हम सब हॉल में पहुंच गए।
सामने टीवी पर एक वीडियो चल रहा था तो लक्ष्मी आंटी ने हम से पूछा, "बाबू, अगर आप दोनों का इस खेल में कोई तजुर्बा नहीं था तो जरा बताओ ऐसे अलग अलग पैंतरे कहां से लाए? ये मत कहना कि अभी अभी सोचा। सारे कपड़े और वो जो मेरे अंदर डाला था, ये ऐसेही नहीं आया। अब बताओ!!"
विक्की बोला, "अरे लक्ष्मी आंटी, अब तुमसे क्या छुपाना!! जैसे टीवी पर प्यार या हंसी कि फिल्में होती हैं वैसे ही इन बातों की भी होती हैं। पर उन्हें चुपके से वीडियो बनाकर देखते हैं।"
लक्ष्मी आंटी को अभी ऐसी फिल्म देखनी थी पर हम दोनों में से किसी ने भी इस बारे में कुछ इंतजाम नहीं किया था। मैंने कुछ सोचा और उपर से हमारा कैमेरा ले आया। पहला सीन ही बलात्कार का था और वो भी लक्ष्मी आंटी के बलात्कार का। खैर जो होगा सो होगा ऐसे सोच कर मैंने टीवी चालू कर दिया। हम दोनों के बीच में बैठकर लक्ष्मी आंटी ने अपना बलात्कार होते हुए देखने लगी। जब टीवी पर विक्की, लक्ष्मी आंटी को उत्तेजित करता दिखा तो लक्ष्मी आंटी सच में तपने लगी। उसने हम दोनों के लौड़े पकड़ कर हमें हिलाने लगी।
लक्ष्मी आंटी इस सीन में इतनी खो गई थी कि जब उसने अपनी झिल्ली फटते देखी तो वह चीख पड़ी। लक्ष्मी आंटी ने गुस्से से विक्की कि ओर देखते हुए कहा, "विक्की बाबू, आप बहुत बुरे हो!! अब मैं आपका लौड़ा नहीं हिलाऊगी। पता है कितना दर्द हुआ? आप को सजा देनी पड़ेगी।"
लक्ष्मी आंटी ने मेरी गोद में आते हुए मेरा लौड़ा अपने हाथों में लिया और अपनी चूत पर रखा। लक्ष्मी आंटी बैठी तो मेरा लौड़ा उसकी चूत में समा गया। लक्ष्मी आंटी की गीली गरमी मेरे लौड़े को चूमती चूसती रही और मैं विक्की को लक्ष्मी आंटी का बलात्कार करता देख लक्ष्मी आंटी का मज़ा ले रहा था। टीवी पर विक्की के कर धक्के के साथ लक्ष्मी आंटी अपनी कमर उठकर मुझसे चुधवा रही थी। टीवी पर चलते हर चीख और हर आह के साथ लक्ष्मी आंटी मज़े से आह भर रही थी। पाच मिनट बाद जब टीवी पर विक्की कि एक राहत भरी आह निकली तो लक्ष्मी आंटी मेरे लौड़े पर झडने लगी और मैं भी लक्ष्मी आंटी की गरम चूत को गरमी से भरने लगा।
लक्ष्मी आंटी ने मुझे बदन पर लेट कर विक्की को देखा। विक्की लक्ष्मी आंटी की चुधाई देख अपनी उत्तेजना बड़ी मुश्किल से काबू में रखे हुए था। टीवी पर लक्ष्मी आंटी फूटफूट कर रो रही थी और उसकी चूत से खून और वीर्य निकालना साफ दिख रहा था।
लक्ष्मी आंटी बोली, "विक्की बाबू, पता है कि मै इतनी क्यों रो रही थी?"
हम दोनों ने अपने सर हिलाते हुए ना कहा।
लक्ष्मी आंटी ने बताया, "मैंने मन ही मन तयारी कर ली थी कि मेरा आप दोनों से बुरा हाल होने वाला है।
जब आप ने मेरी झिल्ली फाड़ी तो मुझे दर्द हुए पर मैं उसके लिए तयार थी। बाद में को मज़ा आया उसके लिए मैं तयार नहीं थी। जब आप ने मेरी कोरी जवानी में अपना पानी छोड़ दिया तब मैं झडी और उसके लिए मैं तयार नहीं थी।"
मेरे रस से भरी चूत को मेरे लौड़े से उठाते हुए लक्ष्मी आंटी ने अपनी चूत को विक्की के लौड़े पर रखा। टीवी पर अब तक मैंने लक्ष्मी आंटी के हाथ अटका दिए थे उसे उत्तेजित करता दिख रहा था। लक्ष्मी आंटी ने विक्की को लौड़ा पूरा अन्दर लेते हुए मेरी ओर देखते हुए अपनी आंख मारी।
लक्ष्मी आंटी, "सन्नी बाबू, आप तो किसी भी लड़की को खुद अपने कपड़े उतारने पर मजबूर कर सकते हो।"
टीवी पर लक्ष्मी आंटी को मैंने धीरे धीरे चोदना शुरू किया और लक्ष्मी आंटी ने विक्की को अपने अंदर रखते हुए अपनी चूत के दाने को सहलाना शुरू किया। जल्द ही टीवी पर मैंने लक्ष्मी आंटी को अच्छे से चोदना चालू किया और लक्ष्मी आंटी ने विक्की के लौड़े पर बैठ आगे पीछे करते हुए अपने दाने को सहलाना चालू रखा।
हालांकि लक्ष्मी आंटी विक्की से चूधा नहीं रही थी पर लक्ष्मी आंटी के योनि की अकड़न से बनती मालिश विक्की को मज़े दे रही थी। टीवी पर जैसे ही मैंने अपना रस लक्ष्मी आंटी की जख्मी चूत में उड़ेला, लक्ष्मी आंटी ने आह भरते हुए झडना चालू कर दिया और इस से विक्की भी अपना बांध खोल लक्ष्मी आंटी की कोख भरने लगा।
लक्ष्मी आंटी ने मुस्कुराते हुए विक्की को चूमा और दोपहर का खाना पकाने के लिए किचन में चली गई। विक्की ने कहा, "यार, ये हमें निचोड़ कर ही दम लेगी!!"
"तू उसे रोकना चाहता है?"
हम दोनों ने हंसते हुए लक्ष्मी आंटी पीछे जाना ठीक समझा।
Score Card रविवार सुबह 10.30 बजे तक
लक्ष्मी आंटी मुंह----चूत----गांड
विक्की---------8-----8-----7
सन्नी------------8-----8-----7
25
विक्की
शायद हम सब थक रहे थे या अब एक दुसरे को समझ रहे थे पर दोपहर का खाना खाने के बाद कोई लक्ष्मी आंटी पर झपटा नहीं। हम सब एक दूसरे के हाथ पकड़ कर बेडरूम में सुस्ताने गए। लक्ष्मी आंटी ने अपनी बैग में से एक सलवार कमीज़ निकाली और पहन ली।
"लक्ष्मी आंटी, ऐसी चीजें पर क्यों वक़्त जाया करती हो जो बस पल दो पल बची रहेंगी।"
लक्ष्मी आंटी ने अपने पैरों को देखते हुए कहा, "आप जाने दो विक्की बाबू। मैं आप दोनों को कुछ करने से थोड़े ना रोक रही हूं। बस मेरी एक बात मानो लो। एक बार मुझे इन कपड़ों में ही मज़ा दिला दो।"
लक्ष्मी आंटी को चोदने के लिए हम दोनों ने अलग अलग कपड़े और समान लाया था पर लक्ष्मी आंटी की इस बात से हम उलझन में पड़ गए।
सन्नी, "लक्ष्मी आंटी, तुम जो चाहो हम से मांग सकती हो और हम मना नहीं करेंगे। बस ये बता दो कि इस जोड़ी में ऐसा क्या खास है?"
लक्ष्मी आंटी ने शरमाते हुए कहा, "पप्पुजी के साथ शादी के एक साल बाद मुझे लगा कि शायद उन्हें मदद की जरूरत है।
इस लिए मैंने ये जोड़ी सिलाई जिसका गला और पीठ देख पप्पूजी मुझे अपना ले। मुझे इस जोड़े में देख पप्पुजी ने मुझ पर शक करते हुए काफी पीटा और सो गए। मैं शायद इस जोड़ी को गलती से ले आई पर अब मैं इस से जुड़ी बुरी यादें मिटाना चाहती हूं। मेरी बात मानोगे?"
सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में उठा लिया और बेड के बीच रखा। लक्ष्मी आंटी शायद मन ही मन अनेक बातों और यादों से जुंझ रही थी। अब लक्ष्मी आंटी अपनी मर्जी से अपने शराबी पति को धोका देने वाली थी। उसकी इस ड्रेस से बनी आशाएं जागते हुए इस ड्रेस से बनी यादें बदलना चाहती थी।
मैंने लक्ष्मी आंटी के गालों को चूमते हुए उसके कान और गले को निशाना बनाया। सन्नी ने भी वही किया जिस से लक्ष्मी आंटी ने आह भरते हुए अपने सर को उठते हुए हमें जगह बना कर दी। लक्ष्मी आंटी के गले से नीचे सरक कर हम दोनों उसके कंधों को चूमते हुए ड्रेस के उपर से ही उसके बदन के साथ खेलने लगे। लक्ष्मी आंटी ने कमीज़ के अंदर ब्रा पहनी नहीं थी तो उसकी गुलाबी बेरियों ने अपनी उत्तेजना कमीज़ के पार प्रदर्शित की।
सन्नी लक्ष्मी आंटी के पेट को चूमते हुए उसकी सलवार का नाडा खोल कर अंदर चूमने लगा। मैंने कमीज़ को उतारे बगैर अपना मुंह लक्ष्मी आंटी की रसीली बेरीयों को लगा दिया। मैं और सन्नी लक्ष्मी आंटी की ड्रेस सिर्फ इतनी खोल रहे थे जितनी जरूरी है। लक्ष्मी आंटी भी खुशी से आहें भरते हुए अपने सर को झटकते हुए हम दोनों को और करने को कह रही थी।
सन्नी ने लक्ष्मी आंटी की सलवार को घुटनों तक उतार कर उसके पैरों के बीच में अपनी जीभ से हमला कर दिया। मैंने लक्ष्मी आंटी के प्यारे मम्मों को ठीक से दबाते हुए चूसना चालू रखा। लक्ष्मी आंटी ने अपने हाथों से मेरे बालों को और अपनी जांघों में सन्नी को पकड़ कर अपने शरीर में बनती अकड़न को तोड दिया।
सन्नी के चेहरे पर लक्ष्मी आंटी के रसों का झरना फुट कर खुशी में दौड़ पड़ा। लक्ष्मी आंटी का बदन ढीला पड़ गया तो सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को चोदने का मन बना लिया। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को घोड़ी बनाया और उसकी बहती चूत में अपनी तलवार पेल दी। लक्ष्मी आंटी ने आह भरते हुए सन्नी का स्वागत किया और सन्नी ने तेज धक्कों से चुधाई शुरू कर दी। लक्ष्मी आंटी ने खुद को मोड़ते हुए अपने मुंह में मेरा लौड़ा भर लिया और चूसने लगी। सलवार घुटनों में होने से लक्ष्मी आंटी के पैरों में ज्यादा जगह नहीं थी और सन्नी को इस से ज्यादा पकड़ मिल रही थी। सन्नी और मैं लक्ष्मी आंटी के दोनों छोर पर मज़े ले रहे थे कि लक्ष्मी आंटी ने सन्नी को धक्का देते हुए दूर किया।
लक्ष्मी आंटी, "सन्नी बाबू, बहुत मज़ा आया पर अब आप मेरी गांड़ मारो।
"
सन्नी की आंखे चमक उठी और उसने अपने लौड़े का सुपारा लक्ष्मी आंटी की गरम कसी हुई गांड़ पर लगाकर जोर दिया। लक्ष्मी आंटी ने अपनी गांड़ को खोल कर सन्नी को अंदर लिया। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों को अपनी चूत में भर कर हिलाने लगी तो सन्नी ने लक्ष्मी आंटी की पीठ पर गिरते हुए अपनी धारा को लक्ष्मी आंटी की गरम कसी गांड़ में भर दिया। लक्ष्मी आंटी ने चूस कर मेरा लौड़ा तयार कर दिया था तो मैंने बिना रुके सन्नी की जगह ले ली।
लक्ष्मी आंटी की खुली गांड़ मेरा इंतजार कर रही थी और मेरा सुपारा अन्दर लेते हुए उसे चूसने लगी। मैंने लक्ष्मी आंटी के ड्रेस के अंदर हाथ डालकर उसके कड़क दूधिया गोलों को पकड़ लिया। मैं अब काफी रुक चुका था और अब लक्ष्मी आंटी की गांड़ में दौड़ने लगा। लक्ष्मी आंटी के पैर साथ होने से मेरे पैर लक्ष्मी आंटी को पकड़ कर रखे हुए थे। गोलों को पकड़ कर अपनी कमर को तेज हिलाते हुए मैंने लक्ष्मी आंटी की गांड़ मारी। लक्ष्मी आंटी की आहें मुझे उकसा रही थी।
सन्नी अब आराम से लक्ष्मी आंटी के बगल में लेट कर उसके होटों को चूमते हुए उसकी आहें बढ़ा रहा था। मुझसे ज्यादा सहा नहीं गया और मैं भी लक्ष्मी आंटी की गरम गांड़ में ढेर हो गया। जब मैंने लक्ष्मी आंटी की गांड़ में से अपना लौड़ा बाहर खींच लिया तो लक्ष्मी आंटी की गांड़ पर जमा वीर्य का झाग देखा। मैंने अपनी उंगलियों से उस झाग को उठा लिया और लक्ष्मी आंटी को खिलाया।
लक्ष्मी आंटी ने उस झाग को ऐसे चाट कर साफ़ किया जैसे वो कोई मिठाई हो। हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में लेकर आंखे बंद कर ली। अगर आज कोई पूछे मेनाका ने विश्वामित्र को कैसे जीता तो मैं लक्ष्मी आंटी का नाम बोल दूं।
Score Card रविवार दोपहर 1.30 बजे तक
लक्ष्मी आंटी मुंह----चूत----गांड
विक्की---------8-----8-----8
सन्नी------------8-----8-----8
26
सन्नी
शाम तक सुस्ताने के बाद जब मैंने आंखे खोली तो फिर से लक्ष्मी आंटी को गायब पाया। मेरे साथ ही विक्की भी उठ गया और हम दोनों नीचे उतर आए। लक्ष्मी आंटी हमें देख कर मुस्कुराई और अपनी बाहें फैला कर आगे आईं।
लक्ष्मी आंटी ने कहा, "क्या मेरे आशिक अब भी थके हुए हैं या चाय बिस्किट के लिए तयार हैं?"
हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी की बाहों में जाते हुए उसके गाल चूमते हुए चाय के लिए कहा। शाम को हम ने लक्ष्मी आंटी को हमारा आखरी तोहफा दिया। पुराने अख़बार में लिपटा तोहफा देख लक्ष्मी आंटी के चेहरे पर बनी खुशी देख कोई भी समझ सकता था कि इस लड़की को कभी कोई तोहफा मिला नहीं।
लक्ष्मी आंटी तोहफे को लेकर बेडरूम में भाग गई। थोड़ी देर बाद लक्ष्मी आंटी एक एक कदम रखते हुए जब नीचे आई तो उसके चेहरे पर खुशी साफ दिख रही थी।
Satin में बने night set पहन कर इतराते हुए आखरी सीढ़ी से किसी मेमसहब कि तरह उतरने के बाद लक्ष्मी आंटी किसी लड़की की तरह खुशी से चीखती हुई दौड़ पड़ी। लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को गले लगाते हुए हमारे गाल चूमे।
लक्ष्मी आंटी बोली, "आप दोनों बड़े शैतान हो। इतनी अच्छी चीज आखरी पल तक छुपाके रखी! ओह, इसे देखो तो! मैं कब से ऐसा सेट चाहती थी।"
लक्ष्मी आंटी ने अपने सीने पर हाथ फेरते हुए satin को महसूस करते हुए कहा, "बाबू, कल चाहे जो हो जाए पर ये मुझे हमेशा आप दोनों के साथ बिताए इन दिनों की याद दिलाकर मेरी सुनी जिंदगी के बोझ को थोड़ा हलका करेगा। मैं जानती हूं कि मुझे क्या करना है। आप दोनों को कुछ खास खिलाती हूं।"
मैंने विक्की को इशारा कर लक्ष्मी आंटी को चोदने का मन बना लिया था कि फोन की घंटी बज उठी।
पवन अंकल का कॉल था। उन्होंने बताया कि IIT results तारीख आज के समाचार में बताई गई है और 15 दिन बाद हमें एडमिशन किस कॉलेज में मिला ये पता चल जाएगा। हम दोनों ने अंकल को बताने के लिए शुक्रिया कहा और अपने और लक्ष्मी आंटी के ठीक होने का भरोसा दिलाया।
फोन पर आई खबर अपेक्षित थी लेकिन फिर भी हमें हिला गई। हम दोनों फिर से कॉलेज और कोर्स के बारे में बातें करने लगे।
8 बजे लक्ष्मी आंटी से रहा नहीं गया और उसने हमसे पूछा कि फोन पर किसीने हमें डांटा तो नहीं? हम दोनों ने जी जान से पढ़ाई की थी और हमें यकीन था कि हमारे अच्छे नंबर आएंगे पर फिर भी डर तो था। लक्ष्मी आंटी ने हमें अपना सब कुछ दिया था (या हम ने वो सब लूट लिया था)। लक्ष्मी आंटी का हम पर इतना हक बनता था कि हम उसकी बातों का सही और पूरा जवाब दें।
मैंने विक्की कि आंखो में वही बात देखी और हम लक्ष्मी आंटी को पूरी बात समझाने लगे। जब बात पूरी हुई तो लक्ष्मी आंटी भी सोच में पड़ गई।
लक्ष्मी आंटी ने कहा, "अगर आप दोनों के नंबर 15 दिन बाद आएंगे तो आप दोनों चाहकर भी आज कुछ नहीं कर सकते। साथ ही अगर कॉलेज के चुनाव में आप दोनों बिछड़ गए तो भी वह आप दोनों के हाथ में नहीं। सही कहा ना मैंने? तो क्यूं ना हम सब कल के बारे में कल देखें। आज अपनी सारी दुनिया बस अपनी लक्ष्मी आंटी की बाहों तक ही रहने दो।"
हम दोनों मुस्कुरा कर मान गए तो लक्ष्मी आंटी ने हमारी पकड़ से बाहर निकल कर कहा, "अब ऐसे खुश होकर जल्दी से खाना खा लो।"
लक्ष्मी आंटी ने Chinese dish और खीर बनाई थी। हम दोनों को परोसकर लक्ष्मी आंटी satin dress का नाड़ा अपनी उंगलियों में पकड़कर खड़ी हो गई।
"लक्ष्मी आंटी, क्या मस्त बनाया है!! अरे आओ नहीं तो कुछ नहीं बचेगा!!"
लक्ष्मी आंटी भी खाना खाने लगी। लक्ष्मी आंटी ने चुपके से कहा कि यह Chinese बनाने की उसकी पहली कोशिश थी। लक्ष्मी आंटी के अंदर एक शर्मीली लड़की की अपने प्रेमियों को रिझाने की कोशिश साफ दिख रही थी और हमें मोह रही थी।
लक्ष्मी आंटी ने हमें अपने गांव की मजेदार यादें बताकर हमारा मन हलका किया।
खाना खाने के बाद हम दोनों ने जिद करके लक्ष्मी आंटी को उपर भेजा ताकि हम दोनों बरतन और किचन की साफ सफाई कर दें।
जब हम उपर बेडरूम में पहुंचे तो वहां लक्ष्मी आंटी हमारा इंतजार कर रही थी। हमारे आते लक्ष्मी आंटी उठ गई और उसने हमें बैठने को कहा। फिर लक्ष्मी आंटी ने शरमाते हुए बड़े मादक अंदाज से धीरे धीरे अपना satin में बना gown उतारने लगी। पहले gown का wrap उतारा।
फिर पतला छोटा gown उतारा। अब लक्ष्मी आंटी satin में बने ब्रा और पैंटी में हम दोनों के सामने खड़ी थी।
मैंने आगे बढ़कर लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में भर लिया और उसे सहलाते हुए वहीं खड़ा रहा। कुछ पलों में विक्की भी आ गया और लक्ष्मी आंटी को पीछे से चिपक गया। लक्ष्मी आंटी ने अपने सर को उठाते हुए मुझे अपना गला चूमने के लिए दिया तो अपनी उंगलियों से विक्की के बालों को सहलाते हुए उसके साथ को अपनाया।
मैंने लक्ष्मी आंटी की कमर को अपने हाथों में लिया और वहां लगी satin पैंटी कि गांठ को खोला। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की satin bra की गांठ खोलने की मेहनत न करते हुए सीधे उसके सर से उतारी। अब हम खड़े होकर ही अपने बदन एक दूसरे से रगड़ते हुए अपनी काम अग्नि को बढ़ा रहे थे। मैंने लक्ष्मी आंटी को उठाकर बेड पर लिटा दिया और उसके पैरों को फैला कर उनके बीच से बहती यौन नदी का रस पीने लगा। विक्की ने लक्ष्मी आंटी के मुंह में अपना लौड़ा डाल दिया। मैं नीचे से लक्ष्मी आंटी को चाट रहा था तो उपर लक्ष्मी आंटी विक्की को चूस रही थी।
मेरे मुंह में अचानक रस की फुहार हुई तो लक्ष्मी आंटी तयार है समझकर मैंने लक्ष्मी आंटी की गरम गुंफा में अपना लौड़ा डाल दिया। मेरे धक्कों के साथ लक्ष्मी आंटी आहें भरते हुए विक्की को चूस रही थी। लक्ष्मी आंटी ने विक्की को दूर किया और कहा कि वह हम दोनों को एक साथ मज़ा देना चाहती है।
लक्ष्मी आंटी ने कहा, "विक्की बाबू आप का हथियार ज्यादा मोटा है तो सन्नी बाबू का लंबा। मैं आप दोनों को एक साथ मज़ा देना चाहती इसलिए आप दोनों मेरे बगल में लेट जाओ।"
विक्की और मैं लेट गए तो लक्ष्मी आंटी ने विक्की कि और मुड़ कर उसे अपनी बाहों में भर लिया। लक्ष्मी आंटी का पैर विक्की कि कमर पर गया तो विक्की ने अपना थूंक से गीला लौड़ा लक्ष्मी आंटी की बहती नदी में उतार दिया। लक्ष्मी आंटी ने आह भरते हुए उसे कस कर पकड़ लिया। मैंने लक्ष्मी आंटी का इरादा समझते हुए पीछे से आकर अपने लौड़े को उसकी गांड़ में भरने लगा।
लक्ष्मी आंटी चीख पड़ी, "बाबू!! मुझे प्यार करो बाबू!! मुझमें अपना पानी छोड़ दो!! मुझे हर तरह से अपना बना लो!!"
विक्की और मैं पहले से ही गरम हो गए थे और लक्ष्मी आंटी की चीखों ने हम दोनों के होश उड़ा दिए।
हम दोनों ने वो दौड़ लगाई कि लक्ष्मी आंटी की चीखों ने पूरा farmhouse भर दिया। लक्ष्मी आंटी चीखते हुए झड रही थी और झडते हुए चीख रही थी। हम दोनों ने अपने लौड़ों से रस की फुहार उड़ाते हुए लक्ष्मी आंटी के दोनों छेद भर दिए।
लक्ष्मी आंटी अब भी थक कर अपना सुख बटोर रही थी जब मैंने लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में खींच लिया। लक्ष्मी आंटी ने आंखे खोली और मुझे देख शर्माकर हां बोली। मैंने लक्ष्मी आंटी की विक्की के रस से भरी चूत में अपनी तलवार पेल दी। लक्ष्मी आंटी ने मुझे कस कर अपनी बाहों में भर लिया और अपने पैर से मेरी कमर पकड़ ली। विक्की ने लक्ष्मी आंटी और मेरी मुद्रा देख अपना लौड़ा अब रस से भरी गांड़ में डाल दिया। लक्ष्मी आंटी एक ही मुद्रा में दो अलग अलग लौड़ों से चुधनें से यौन सुख के चोटी पर घूमने लगी। मैं लक्ष्मी आंटी की कमर पर हाथ रखकर उसे चूमते हुए उसके चूत के मज़े ले रहा था और विक्की, लक्ष्मी आंटी के कंधे पकड़कर उसके पीछे से उसकी गांड़ मार रहा था। लक्ष्मी आंटी चीखते हुए मानो अपनी पूरी जवानी की खुशी आज और यहां लेना चाहती थी। 10 मिनट तक हम सब सुध बुध खोकर जानवरों की तरह अपने शारीरिक आकर्षण को खुली छूट देते हुए कामक्रीड़ा के खेल में डूब गए। गांड़ के घर्षण से विक्की छूट पड़ा और उसके धड़कते लौड़े को बीच की पतली परत से महसूस कर मैं भी छूट गया। लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को पकड़ कर अपनी आंखें बंद कर ली और हम सब कल को भुलाकर आज अभी में सो गए।
Score Card रविवार रात 9.30 बजे तक
लक्ष्मी आंटी मुंह----चूत----गांड
विक्की---------8-----9-----9
सन्नी------------8-----9-----9
27
विक्की
रात में लक्ष्मी आंटी को अच्छी नींद कैसे आती, खास कर तब जब बीच रात में सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के पैर फैलाकर उसे चोद दिया। बेचारी लक्ष्मी आंटी चुध चुध कर उठने से ऐसे तिलमिला उठी कि जब तक मैंने लक्ष्मी आंटी को चोद कर अच्छे से भरा नहीं, वो सोई नहीं।
फिर भी किसी अच्छी प्रेमिका की तरह लक्ष्मी आंटी की सुबह 6 बजे चाय के साथ हमारे लौड़े चूस कर उनका रस पीने से हुई। जब लक्ष्मी आंटी अपने होठों पर जीभ घुमाकर बाहर निकला रस चाट रही थी तब मुझे दिल पर पत्थर रख कर यहां से जाने के बात करनी पड़ी।
लक्ष्मी आंटी ने कहा, "मैं जानती हूं बाबू कि आप दोनों चाहें नचाहें पर दुनिया चलती रहेगी और पिछले 3 दिन हमारे लिए बस कुछ सुंदर यादें बनकर रह जाएंगे। यहां आने पर मैं एक बात समझ गई हूं कि हमें आज और अभी में जीना चाहिए न कि बीते या आने वाले कल में।
और हम अब भी यहां पर हैं। सुबह 9 बजे तक आप दोनों मेरे साथ जो चाहो मज़ा कर सकते हो। तो…"
हम सब हंसते हुए एक साथ नहाने चले गए और एक दूसरे को चूमते हुए खेलते हुए नहाए। सुबह के 8 बजे तक हम सब ने farmhouse में साफ सफाई करके अपनी बैग गाड़ी में रख दी।
सुहागरात ब्रा और पैंटी हम दोनों ने अपने पास रख लीं और satin night set लक्ष्मी आंटी ने अपने बैग में संभालकर रख दिया। Garage में गाड़ी के पास पहुंच कर लक्ष्मी आंटी ने कहा कि हम दोनों ने उसकी चूत के साथ बड़ी नाइंसाफी की थी।
लक्ष्मी आंटी ने समझाया, "बाबू आप दोनों में से हर एक ने 9 बार मुझे अपना रस पिलाया, 9 बार मेरी गांड़ में अपना पानी छोड़ दिया पर आप दोनों ने 10 बार मेरी कोख भर दी। इस का इंसाफ यहीं होना चाहिए!!"
"सन्नी, लक्ष्मी आंटी की बात तो सही है। ऐसे करें तो गांड़ रूठ जाएगी और देखो मुंह कैसे फूल गया है। चल तेरा थोड़ा पतला है तो तू ही शुरू कर।"
लक्ष्मी आंटी शरमाई की उसने खुद ऐसे मांग लिया। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में खींच लिया और गाड़ी के बॉन्नेट पर लिटा दिया। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी की सलवार के नाड़े को खींच कर खोला और अंदर की पैंटी के साथ घुटनों तक खींच लिया। लक्ष्मी आंटी ने सोचा भी नहीं था कि गाड़ी का bonnet किसी दिन ऐसे काम आएगा। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी की गरम रसों से टपकती चूत में दो डुबकी लगाकर अपने लौड़े को गीला कर दिया। सन्नी के सुपाड़े ने लक्ष्मी आंटी की गांड़ को पार करते ही लक्ष्मी आंटी ने चीख कर अपनी खुशी बताई। पर सन्नी इतने पर रुका नहीं।
सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के दोनों पैरों को कंधे पर रखा और आगे पीछे करते हुए अपनी उंगलियों से लक्ष्मी आंटी की चूत के दाने को सहलाना शुरू किया। लक्ष्मी आंटी के यौन सुख की दर्द भरी चिखों से garage गूंज उठा। लक्ष्मी आंटी bonnet पर होने के कारण मैं उसे ठीक से चूम नहीं पाया और अपना लौड़ा लक्ष्मी आंटी के हाथ में देकर उसके सर पर हाथ फेरने लगा।
सन्नी के तेज धक्कों से लक्ष्मी आंटी की चूचियां कमीज़ के अंदर से हिचकोले खाते हुए मुझे ललचा रहे थे। सन्नी के धक्के लक्ष्मी आंटी को bonnet पर हिलाते हुए मेरा लौड़ा उसकी मुट्ठी में हिला रहे थे।
आखिर में सन्नी ने अपनी बंदूक की नली को लक्ष्मी आंटी की गांड़ में भरते हुए अपने रस की गोलियां चला दीं। सन्नी बाहर निकला तो लक्ष्मी आंटी गाड़ी के bonnet पर से नीचे सरक गई। मैंने गाड़ी का पिछला दरवाजा खोला और लक्ष्मी आंटी को उस सीट पर पेट के बल लिटा दिया पर लक्ष्मी आंटी के पैर कमर के नीचे गाड़ी के बाहर थे। लक्ष्मी आंटी की गांड़ का छेद खुला था और अंदर से सन्नी का वीर्य बाहर निकलने लगा था।
मैंने आगे बढ़कर अपने लौड़े पर सन्नी का बाहर निकला वीर्य उठाया और लक्ष्मी आंटी की गांड़ में वापस भर दिया। लक्ष्मी आंटी ने "विक्की बाबू!!!" करके चीखते हुए मेरा स्वागत किया और अपनी मुठ्ठी में सीट को पकड़कर मेरा साथ देने लगी। लक्ष्मी आंटी की गांड़ पिछले 3 दिनों में काफी खुल गई थी और सन्नी के वीर्य से बनती चिकनाहट एक अलग ही मजा आ रहा था।
लक्ष्मी आंटी को अपनी गांड़ मराने का मानो चस्का लग गया था और वह अपनी कमर उठकर मुझसे अपनी गांड़ मरवा रही थी।
लक्ष्मी आंटी चिल्ला उठी, "गांड़ मारो, बाबू मेरी गांड़ मारो!! मेरी जवानी आप दोनों की ही है। मुझे अपने प्यार से भर दो विक्की बाबू!!"
लक्ष्मी आंटी की पुकार पर मेरा धीरज छूट गया और तेज धक्कों के साथ मैंने लक्ष्मी आंटी की गांड़ में स्खलन हो गया। मैं लक्ष्मी आंटी को अपने नीचे दबा कर उसके बालों को सहलाते हुए चूमने लगा। डिक्की की आवाज से हम दोनों होश में आए। सन्नी ने हमारा समान भर दिया था और हमारा इंतजार कर रहा था।
"सन्नी मुझे नहीं लगता कि मुंह का हम अभी सही मज़ा ले पाएंगे। क्यों न मैं लक्ष्मी आंटी के साथ पीछे बैठूं? 1 घंटे का रस्ता है आधा मै फिर आधा तू।"
लक्ष्मी आंटी चलती गाड़ी में लौड़ा चूसने के बारे में सोच कर ही लाल हो गई पर उसकी बढ़ती इच्छा उसकी आंखों से साफ दिख रही थी।
सन्नी ने गाड़ी शुरू कर दी तो लक्ष्मी आंटी ने अपने कोमल हाथ से मेरा लौड़ा हिलाना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में मेरा लौड़ा खड़ा हो गया तो लक्ष्मी आंटी सीट से उतर कर मेरे पैरों के बीच में बैठ गई।
लक्ष्मी आंटी मेरे लौड़े को, "मेरा बाबू, मेरा शोना, मेरा प्यारा लालू, मेरा चोदु राजा।" ऐसे नामों से पुकारते हुए मुझे चाटने लगी। गाड़ी रास्ते पर तेज चल रही थी और पीछे मैं सीट को पकड़कर अपने लौड़े को लक्ष्मी आंटी के भूखे गले में चूसता हुआ देख तड़प रहा था। मुझे आज तक अफसोस है कि मैं ज्यादा टिक नहीं पाया और लक्ष्मी आंटी का नाम लेते हुए उसे अपना पानी पीला दिया।
लक्ष्मी आंटी ने अपने होंठ चाटते हुए मेरे कंधे पर सर रखकर मुझे आराम करने दिया। आधे घंटे बाद मैंने गाड़ी चलाना शुरू किया तो सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को पिछले सीट पर लिटा दिया। सीट छोटी होने के कारण लक्ष्मी आंटी को अपने पैर मोड़ कर खोलने पड़े। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी पर उल्टे सोते हुए अपना लौड़ा लक्ष्मी आंटी के मुंह में भर दिया और खुद उसकी चूत चाटने लगा। हमारे इलाके में पहुंचने तक सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को अपना रस पिला तो दिया पर लक्ष्मी आंटी का रस तब तक चाटा जब तक गाड़ी कि रफ़्तार कम नहीं हुई।
सबने अपने अपने कपड़े बस ठीक कर दिए थे जब हम सब घर पहुंच गए। मैंने सन्नी की ओर देखा और उसने अपनी आंखों से हां कहते हुए अपनी बैग में से एक पैकेट निकला।
"लक्ष्मी आंटी, तुमने हम दोनों को हमारी जिंदगी का सबसे यादगार पाठ पढ़ाया है। हम नहीं बता सकते हमारे लिए ये कितना कीमती है पर ये तुम अभी खा लो। इस में दो ग्रभ निरोधक गोलियां हैं जो पिछले 3 दिनों के सारे निशान मिटा देगी।"
लक्ष्मी आंटी की आंखों में आसूं भर आए। उसने कहा, "बाबू, ऐसा मत कीजिए। मैं तो जानती थी कि ऐसे मैं पेट से हो जाऊंगी। मुझे अपना बच्चा चाहिए।
मैं किसी को कुछ नहीं बताउंगी!! मैं दूसरे शहर भाग जाऊंगी!! मुझे कोई अपना चाहिए!!"
सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में लेकर कहा, "लक्ष्मी आंटी, जरा सोचो कि हम दोनों पर क्या बीतेगी अगर हमें पता ही कि दुनिया में कहीं हमारी एक औलाद गरीबी और कमी कि जिंदगी जी रही है क्यूंकि हमने 3 दिन तक उसकी मां को इस्तमाल कर के भुला दिया। एक बार हम Engineer थी बन गए तो वादा करते हैं कि तुम्हें मां बनाएंगे और बाप का फ़र्ज़ भी निभाएंगे।"
लक्ष्मी आंटी ने गोली खा ली और हम सब उपर समान रखने गए।
Score Card
लक्ष्मी आंटी मुंह----चूत----गांड
विक्की--------10----10----10
सन्नी-----------10----10----10
28
सन्नी
सुबह के 10 बजे हम सब थके घर पहुंचे तो इच्छा हुई कि लक्ष्मी आंटी को पकड़कर नहाने चला जाऊं। घर का दरवाजा खोला तो सामने का नजारा देख हैरान हो गया। दोनों मम्मियां और दोनों पापा आज घर पर थे।
उन सब कि नजरें हम पर गिरी तो लक्ष्मी आंटी को अपनी हैसियत का एहसास हुआ और उसने अपने बदन को छोटा करने की कोशिश की। मैं और विक्की मानो इस सोच में पड़ गए की जैसे हमारे बदन से इन सब को पिछले 3 दिन की गंध समझ आएगी।
पप्पा ने कहा, "तो जो करने गए थे कर लिया? जिंदगी का नया अनुभव पसंद आया? बड़े हो गए हो तुम, लक्ष्मी आंटी ने अच्छे से सीखा दिया कि नहीं? अब जो सीखा है वो जिंदगी भर काम आयेगा और अच्छे से सीखा होगा तो तुम्हारी बीवियां भी लक्ष्मी आंटी को याद करेंगी।"
सब हमें देख कर हंसने लगे। मेरी और विक्की कि सिट्टी पिट्टी गुम हो गई तो लक्ष्मी आंटी के पैरों तले जमीन खिसक गई।
समीरा आंटी ने हमारी जान बचाई। समीरा आंटी ने पप्पा के कंधे पर फटकार लगाते हुए कहा,
"उफ्फ अश्वेत, तुम कभी कॉलेज से बाहर नहीं आए। श्वेता तुम इसे कैसे बर्दाश्त कर लेती हो!! बच्चों मैं बहुत खुश हूं कि तुम दोनों ने इतनी समझदारी दिखाते हुए खाना बनाना सीख लिया। जब ये दोनों नकारा निकम्मे कॉलेज आए थे तब इन्हें पानी उबालना भी नहीं आता था। लक्ष्मी तुमने इन दोनों को सिखाकर मेरे दिल से बड़ा बोझ हटा दिया। 15 दिन में मेरे बच्चे कहीं दूर चले जाएंगे तो कम से कम भूखे नहीं रहेंगे।"
पवन अंकल बोल पड़े, "डार्लिंग अब ड्रामा बहुत हो गया, चलो मुद्दे की बात करें। लक्ष्मी, तुम ने सच में बहुत मदद की है और इसकी कोई कीमत नहीं पर जैसे तय किया था ये रहे तुम्हारे 2000।"
लक्ष्मी आंटी ने थरथराते हाथों से पैसे लेकर उनमें से 500 विक्की को देते हुए कहा, "बाबू, ये आप से लिए हुए पैसे।"
लक्ष्मी आंटी को मां ने एक दिन कि छुट्टी दे दी तो लक्ष्मी आंटी अपनी बैग उठाकर चली गई।
सोमवार का दिन पिज़्ज़ा, आइसक्रीम और कॉलेज selection में चला गया। शाम होते होते पिछले 3 दिन किसी हसीन सपने की तरह लगने लगे। रात को सोते समय मैंने विक्की से बात की तो उसका हाल भी मेरे जैसा था।
कल मॉक ड्रिल थी और सब से ज्यादा टेंशन इस बात का था कि लक्ष्मी आंटी हम से कैसे बरताव करेगी और हम क्या करेंगे?
29
सन्नी
मंगलवार को हमें selection mock test करना था और उसके बाद हम दोनों टेस्ट के result देखने का बहाना बना कर लक्ष्मी आंटी से मिलना टाल रहे थे। हमें नहीं पता था कि लक्ष्मी आंटी की इज्जत लूटने के बाद अब यहां पर हम क्या करें और कैसे करें। साफ सफाई करते हुए जब लक्ष्मी आंटी विक्की के कमरे में गई तो लक्ष्मी आंटी ने विक्की को कोई पहचान नहीं दी। विक्की भाग कर मेरे कमरे में आ गया। मेरे साथ भी यही हुआ कि लक्ष्मी आंटी ने मुझे पहचान नहीं दी और मैं उस से आंख नहीं मिला पाया। लक्ष्मी आंटी खाना बनाने के बाद चली गई। हम दोनों गुमसुम सोचते रहे की लक्ष्मी आंटी के साथ हम दोनों ने जो किया उसका अंजाम हमें कब और कैसे भुगतना पड़ेगा। बाकी का दिन वैसे मायूसी में ही बीता।
बुधवार सुबह जब लक्ष्मी आंटी विक्की के घर आई तो विक्की दुम दबाकर भाग मेरे कमरे में आ गया। हम दोनों लक्ष्मी आंटी को भुला नहीं पाए थे, तो हमने दूर से लक्ष्मी आंटी को देखने के लिए विक्की के pc camera को चला दिया। थोड़ी देर बाद लक्ष्मी आंटी विक्की के कमरे में आई और उसने सीधे विक्की कि अलमारी में से विक्की का वॉलेट निकाला। विक्की के वॉलेट में से 500 लेकर अपनी ब्रा में रख दिए और वॉलेट वहीं टेबल पर छोड़ दिया।
हम दोनों हैरान रह गए। क्या लक्ष्मी आंटी अब हम दोनों से बिना रोक टोक चोरी करेगी? उसने तो वॉलेट छुपाने की कोशिश भी नहीं कि थी। क्या पप्पू लक्ष्मी को फिर से परेशान कर रहा है कि उसे दोबारा चोरी करनी पड़ी?
लक्ष्मी आंटी के उपर आने तक हम दोनों ने अपनी बात कर ली थी और लक्ष्मी आंटी के लिए तयार थे। लक्ष्मी आंटी के अंदर आते ही हमने उसे मेरे कमरे में बुलाकर बेड पर बैठने को कहा। लक्ष्मी आंटी हिचकिचाते हुए बैठ गई तो विक्की ने लक्ष्मी आंटी को बताया कि हम जानते हैं कि उसने फिर से चोरी कि है। लक्ष्मी आंटी ने मना करने की कोशिश की पर उसके मना करने में उसकी आवाज साथ नहीं दे रही थी।
"लक्ष्मी आंटी, तुम ने हमें जो सिखाया है उसे तो हम कभी भुला नहीं पाएंगे। लेकिन हम दोनों ने तुम्हारे साथ को किया वो एक गुनाह है और तुम्हारा हक्क बनता है हम से जो चाहो मांग लो। हम मना नहीं करेंगे लेकिन ऐसे चोरी करके अपने आप को सजा मत दो।"
विक्की ने मेरा साथ देते हुए कहा, "हां लक्ष्मी आंटी, अगर तुम्हे कुछ चाहिए तो मांग कर तो देखो। ऐसे चोरी करना तुमरे मन को ही खाएगा।"
लक्ष्मी आंटी ने गुस्से से 500 कि नोट निकाल कर विक्की के जेब में डाल कर कहा,
"सच में दे सकते हो जो मांग लूं? आप दोनों तो मुझसे आंख नहीं मिला रहे हो।
जो चाहिए दोगे?"
हम दोनों ने सर हिलाकर हां कहा तो लक्ष्मी आंटी ने अपने पर्स में से एक चमकती पट्टी हम पर फेंकते हुए कहा, "इसका इसतेमाल मुझे सिखाओ तो मैं मानूं।"
विक्की ने लक्ष्मी आंटी ने फेंकी पट्टी उठकर देखी। पान मसाला के चमकीले पैकेट की लडी दुकान से लाई गई हो ऐसे लग रहा था। इस से पहले कि मैं अपने आप को लक्ष्मी आंटी को पन मसाला के बारे में पूछ कर बेइज्जत करता विक्की ने पट्टी घुमाई।
लक्ष्मी आंटी ने हमें 4' कामसूत्र कॉन्डम' के पैकेट थमाए थे।
लक्ष्मी आंटी अचानक अपनी हिम्मत खो कर बैठ गई।
लक्ष्मी आंटी बोली, "बाबू, मैं एक बस्ती में रहती हूं जहां किसी को भनक भी लग गई की मेरा पैर फिसला है तो मुझे नौच खाएंगे और पप्पुजि तो मुझे मार डालेंगे। आप दोनों ने मुझे जवानी की खुशी सिखाई है। मैं आप को आप के रास्तों से नहीं रोकुंगी। आप बड़े कॉलेज में जाओगे, खूबसूरत और स्टाइलिश लड़कियों से दोस्ती करोगे। मेरी जिंदगी यहीं पर पप्पुजी के साथ है और मैं अपनी हैसियत से उपर नहीं देखती। पत्नी तो मैं 4 साल से थी सुहागन आप दोनों ने बनाया है।बस अगले 15 दिन या जितने भी दिन आप दोनों मुझे दे पाएं, आप मुझे सुहागन की जिंदगी दीजिए। बस इतना ही चाहिए।"
हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में भर लिया और उसने हमारे कंधों पर सर रखकर अपने डर और दर्द से सहारा ले लिया।
मैंने लक्ष्मी आंटी के कानों में कहा, "लक्ष्मी आंटी, ये कैसे पहनते हैं? हमने कभी किया नहीं।"
लक्ष्मी आंटी ने आधे हंसते और आधे रोते हुए कहा, "हां, मैं तो इसे रोज लगती हूं ना। बुद्दू कहीं के!!"
हम सब हंस पड़े और फिर हम ने कंप्यूटर पर वीडियो देखे कि कंडोम कैसे पहनते हैं? लक्ष्मी आंटी ने हमारे कपड़े उतारे और हमने उसके। जल्द ही हम दोनों बेड पर नंगे लेट गए और लक्ष्मी आंटी ने हमारे लौड़े चूसकर और कड़े कर दिए। पहले कौन इसका फैसला सिक्का उछाल कर किया और मैं जीता। लक्ष्मी आंटी ने अपने नाजुक हाथों से मेरे लंबे लौड़े पर कंडोम पहनाया।
कंडोम से ढका लौड़ा कुछ अलग लग था था पर लक्ष्मी आंटी ने इस बात पर गौर करने का मौका नहीं दिया। लक्ष्मी आंटी ने अपने पैरों को फैला कर अपने प्यार के खजाने में मुझे खींच लिया। लक्ष्मी आंटी की गरमी ने मुझे घेर लिया और लक्ष्मी आंटी ने अपनी कमर हिलाकर चूधना चालू कर दिया। लक्ष्मी आंटी सुबह से इस पल के इंतजार में थी और उसने कुछ ही धक्कों में अपना पानी छोड़ दिया। मैंने लक्ष्मी आंटी की कमर पर पकड़ बनाते हुए उसकी कुटाई चालू रखी। लक्ष्मी आंटी पसीने से लथपथ हो गई और उसने झड़ने कि लडी लगा दी। मैं लक्ष्मी आंटी की गरमी को ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसकी बहती चूत की गर्मी में झड गया।
लक्ष्मी आंटी बगल में लेट कर हांफने लगी और मैंने गुब्बारे जैसा फूला हुआ कंडोम निकाल कर कचरे के डिब्बे में डाल दिया।
विक्की ने लक्ष्मी आंटी से कंडोम लगवा लिया था। अब लक्ष्मी आंटी की चूचियां दबाते हुए विक्की ने अपना मूसल लक्ष्मी आंटी की चूत में ठूंस दिया। लक्ष्मी आंटी की अाहों का मजा लेते हुए विक्की ने लक्ष्मी आंटी को चोदना शुरू किया। विक्की भी तो 2 दिन का भूका था और बिना रुके उसने लक्ष्मी आंटी की गीली सड़क पर तेज गाड़ी दौड़ाई। लक्ष्मी आंटी तो सातवे आसमान को छूने से अपनी यौन किलकारियों से विक्की को उकसा रही थी। विक्की ने लक्ष्मी आंटी के कंधे पकड़ कर उसे चोदते हुए उसके कानों को चूमा। विक्की जल्द ही लक्ष्मी आंटी को चिपक कर उसकी चूत में अपना कंडोम भरने लगा।
लक्ष्मी आंटी ने इशारे से मुझे बुलाया और दोनों के सर पर हाथ फेरते हुए कहा, "बाबू मैं आप दोनों की गुलाम बन गई हूं। मेरे साथ जो चाहो कर लो, जब चाहो कर लो। बस मुझे भुला नहीं देना।"
मैं लक्ष्मी आंटी को प्यार के गहराई की बात कहने लगा कि मेरे पेट से बड़ी आवाज आई।
लक्ष्मी आंटी ने चौंक कर देखा और हंसते हुए बोली, "गांव में बड़ी औरतें कहती थी कि मर्द की औरत से दो ही चीजें चाहिए और उसमें भी वो एक में ही मेहनत करेगा। रुको मैं जल्दी से खाना बनाती हूं।"
लक्ष्मी आंटी खाना बनाने के लिए किचन में चली गई तो विक्की ने अपना कंडोम भी जल्दी से कचरे के डिब्बे में डाल दिया। हम दोनों लक्ष्मी आंटी को मदद करने गए।
खाना खाने के बाद लक्ष्मी आंटी ने घर की साफ सफाई की तो हम दोनों ने बरतन मांजे और सुखाए। हमारी चुस्त मदद देख लक्ष्मी आंटी ने मेरा इरादा पूछा तो हमने बाकी 2 पैकेट के इस्तमाल का सुझाव दिया। लक्ष्मी आंटी शर्माकर हां बोली ही थी कि हम उस उठाकर मेरे बेड पर ले गए।
विक्की ने कंडोम लगाया और लक्ष्मी आंटी के गांड़ में घुसाने लगा। कंडोम पर लगी चिकनाहट से कुछ आराम मिला और विक्की ने लक्ष्मी आंटी की गांड़ फैला कर अपने लौड़े को गहराई तक पेल दिया। लक्ष्मी आंटी अपने पेट के बल लेट कर पैर फैलाए गांड़ मरवाने लगी तो विक्की लक्ष्मी आंटी की कसी हुई गांड़ के मज़े लेते हुए उसे चोदने लगा। लक्ष्मी आंटी ने गांड़ मरवाते हुए अपनी उंगलियों से अपनी चूत को सहलाते हुए मज़ा लिया और 10 मिनट की तेज रफ्तार चुधाई के बाद दोनों झड गए।
मैंने लक्ष्मी आंटी की खुली गांड़ में अपना कंडोम में लिपटा लौड़ा डालने के लिए बेकरार था। लक्ष्मी आंटी के बगल में लेट कर मैंने उसे अपने बदन पर खींच लिया। अपना लौड़ा लक्ष्मी आंटी की खुली गांड़ में पेलते हुए मैंने लक्ष्मी आंटी को एक ओर लिटा दिया और उसका दूसरा पैर अपनी कमर पर पकड़ लिया। एक हाथ लक्ष्मी आंटी के सर के नीचे से होते हुए उसकी गोल मटोल चूचियों को दबाने लगा।
लक्ष्मी आंटी अब आसानी से अपने एक हाथ की 2 उंगलियों को अपनी चूत में अंदर बाहर करते हुए दूसरे हाथ से अपनी चूत के दाने को सहला रही थी।
लक्ष्मी आंटी अपनी गरमी में झड़ने लगी। 10 मिनट बाद जब मैंने लक्ष्मी आंटी की गांड़ के अंदर अपना कंडोम भरा तो वह थक कर सो गई। लक्ष्मी आंटी ने आधे घंटे बाद हम दोनों को गले लगाते हुए चूमा और कल का वादा ले कर चली गई।
शाम को 6 बजे पापा ने कहा कि मम्मियां हम दोनों को कॉलेज के लिए तयार करने बाहर ले जा रही हैं तो हमें भी जाना पड़ा।
अश्वेत
बिजनेस का उसूल है कि अगर सब कुछ ठीक दिखते हुए गलत लग रहा है, तो दाल में काला है। 6.30 बजे मै सन्नी के कमरे में गया। सबूत मुझे कचरे के डिब्बे में आसानी से मिल गया। पहला धक्का कुछ कम था जो थोड़ी देर में दूसरा लग गया। मेरे पांव कांपने लगे और पसीने छूट गए। मुझे सोचना था और जल्द ही कुछ करना था। मैंने ऑफिस में कॉल किया।
"पवन, कल की सारी मीटिंग रद्द कर दो। हमें बात करनी चाहिए।"
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अश्वेत
गुरुवार सुबह खबर आ गई की रिजल्ट लग गए हैं। दोनों बच्चों को अच्छे नंबर आए थे और सब खुश थे। पवन तो मानो उड़ रहा था।
पवन ने आते ही कहा, "दिल पर से बड़ा बोझ उतर गया!! दोनों को उनके पसंद के कॉलेज में कोर्स मिल जाएंगे। मैंने वहां हमारे दोस्त से बात कर ली है और कॉलेज के बाहर ही एक अच्छा फ्लैट मिल जाएगा। खाने और सफाई के लिए किसी को रख दिया तो बच्चे आराम से पढ़ाई के लेंगे। तू क्यों मुंह फुलाए बैठा है?"
"बच्चे कॉलेज जाएंगे अगर मुसीबत टली तो…"
पवन ने चौंक कर कहा, "क्या बकवास कर रहे हो? कैसी मुसीबत?"
"देख गुस्सा मत होना और पूरी बात सुनने के बाद बोलना।
जब दोनों ने कहा कि वह farmhouse में 3 दिन रहेंगे तो मैं सोच में पड़ गया। दोनों के कोई दोस्त नहीं, कोई पसंदीदा लड़की नहीं। मुझे शक था कि दोनों कहीं Gay तो नहीं? मेरे ही सुझाव पर हम ने लक्ष्मी को भेजा। सोमवार को जब बच्चे लौटे तो मुझे उनके हाव भाव में ठीक नहीं लगा। कल मैंने सन्नी का बेडरूम चेक किया तो वहां मुझे इस्तमाल किए कंडोम मिले।"
पवन ने टोकते हुए कहा, "अरे बच्चे बड़े हो रहे हैं। Try करके देख रहे होंगे।"
"4 कंडोम एक साथ? इसका मतलब दोनों ने दो दो बार किया।"
पवन ने सर पकड़ कर कहा, "Gay होना कोई जुर्म नहीं। बस हमारी बीवियों को समझाना पड़ेगा।"
"बात इतनी आसान नहीं। Gay होते तो मैं ये मीटिंग नहीं बुलाता। 2 बोतल लाता और हम दोनों मस्त दुनिया को गालियां देते। मैंने सन्नी का वीडियो कैमरा देखा। सिर्फ पहले 10-15 मिनट देख कर मेरे पसीने छूट गए।"
पवन ने डरते हुए पूछा, "क्या हुआ है?"
"दोनों ने हमें उल्लू बनाया और हमारे जरिए लक्ष्मी को ले गए। Farmhouse में जाते ही दोनों ने माली को छुट्टी दे दी और गवाह मिटा दिए।
"
पवन, "मतलब?"
"दोनों ने लक्ष्मी का बलात्कार किया और उसका वीडियो भी बनाया!!!"
पवन, "नहीं, ये बिल्कुल गलत है। ये अभी बच्चे हैं। बस 18 के…
हे भगवान!! दोनों जेल जाएंगे!!
हमें लक्ष्मी को पकड़ना होगा। उसका मुंह बंद करना होगा।"
"पवन, मेरी बात सुन। वहां जो कुछ भी हुआ पर अब लक्ष्मी उन्हें साथ दे रही है। जब वो घर पहुंचे तो लक्ष्मी हल्ला मचा सकती थी पर उसने अपने पैसे लिए और चली गई। कल दोनों ने दो दो कंडोम इस्तमाल किए और घर में सिर्फ लक्ष्मी आई थी। हमारा problem तो कोई और है, पप्पू!!!
तुझे राज याद है?"
पवन ने सोच कर कहा, "हां, वो जो मिस कॉलेज के चंगुल में ऐसा फंसा कि उसके पास होने तक खुद फैल हुआ और बाद में खुदकुशी कर ली।"
"सोचो अगर हमारे बच्चों के पास पहले से ही कोई ऐसी हो जो उन्हें शादी के जाल में न फांसते हुए वो सारे मज़े दे जिनका लालच दिखाकर मिस कॉलेज लड़कियां अपना काम करवाती हैं?"
पवन ने मेरा विचार आगे लेते हुए कहा, "पप्पू को हटाना पड़ेगा। लक्ष्मी और बच्चों को नहीं बताएंगे कि उनकी चोरी पकड़ी गई है। खेलने दो उन्हें, हम भी ऐसे खेल खेलने को तरसे थे। पप्पू को पता चला तो उस से बच्चों को डर है। MBS!!! वो हमारी मदद करेगा!! दुबई फोन लगा। 15 दिन में पप्पू का problem solve।"
"मोहम्मद बिन सलीम के लिए हम ने कई काम किए हैं। उसने कई बार मदद का वादा किया है पर तुम्हें यकीन है कि हमारा हाथ नहीं दिखेगा। पकड़े गए बात सीधे घर तक आएगी।"
पवन ने सोच कर कहा, "तू डर मत। ये काम MBS तो रोज करवाता है। देख पप्पू कोई बड़ा आदमी नहीं। उसके लिए ज्यादा से ज्यादा 1 या 2 लाख का खर्चा होगा। बच्चों के लिए अगर घर ले सकते हैं तो ये खर्चा तो furniture से भी कम है।"
मैं कल ही इस नतीजे पर पहुंचा था पर पवन से सुन कर राहत मिली।
मैंने दुबई के पर्सनल लाइन पर फोन लगाया और कहा, "भाई! एक आदमी को… खाड़ी के उस पार भेजना है। जल्दी…"
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विक्की
परसों शाम को हम दोनों को मम्मियां एक बढ़िया salon में ले गई और हमारे बालों को कॉलेज के लिए स्टाइलिश लुक दिया। श्वेता मम्मी ने कहा कि उनके बच्चों को कोई घोंचू नहीं बुलाएगी। मम्मी ने हंसते हुए कहा कि उसने पापा को पहली बार देख कर यही कहा था पर अब उनका बच्चा कॉलेज जायेगा।
हंसी मजाक के साथ हमारे लिए नए कपड़े, बैग और बाकी समान लिया गया। घर पहुंचते ही खाना खाने बैठ गए और लक्ष्मी आंटी के हाथ का खाना उसकी याद दिला गया। सन्नी की हालत कुछ अलग नहीं थी तो हमें तसल्ली थी कि कोई हमारी बात समझ सकता है।
कल सुबह सबके जाने के बाद हम दोनों बाइक सवार होकर शहर के दूसरे कोने पहुंचे। वहां हम ने कंडोम का variety pack खरीद लिया और लक्ष्मी आंटी से मिलने लौट आए।
लक्ष्मी आंटी ने हमारे नए रूप को सराहा और हमें गले लगाते हुए कहा कि अब हम कॉलेज की नकचढ़ी लड़कियों को पटाने के लिए तयार हैं।
कल दोपहर लक्ष्मी आंटी ने पहले अपना पूरा काम निपटा दिया और मेरे कमरे में सन्नी को बुला लिया।
लक्ष्मी आंटी ने कहा, "बाबू, कल मैं गुस्से में थी और मैंने बिना सोचे कंडोम खरीद लिए। आज मेरे पास वो नहीं है।
मैंने भी बाद में सोचा और आप ने सही कहा था। आप कॉलेज जाओगे तो मैं भी यहां कॉलेज जाऊंगी। जब तक आप लौटोगे मैं भी अपने बच्चे को बड़ा बनाने के काबिल हो जाऊंगी। हमारा बच्चा भी बड़े कॉलेज में जाएगा।
उफ्फ… मैं भी किस बात पर अटक गई। मेरा मतलब है कि आप दोनों आज सिर्फ मेरी गांड़ मारो। ठीक है?"
कमिने तो हम हैं ही। तो हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को नंगा करके अपने लौड़े बारी बारी उसकी गांड़ में चलाए। लक्ष्मी आंटी ने मज़े लेते हुए अपनी कमर उठकर पूरे जोश से अपनी गांड़ को हमारे लौड़े की भेट चढ़ा दी। लक्ष्मी आंटी को हम नहीं छोड़ते पर पप्पू के घर आने का वक्त हो गया और लक्ष्मी आंटी को जाना पड़ा। लड़खड़ाते कदमों से चलती लक्ष्मी आंटी को हमने बताया की आज हम दोनों ने कंडोम का बड़ा पैकेट खरीद लिया है।
लक्ष्मी आंटी ने बदले से भरी नजर से देखते हुए कहा, "मैं कल सुबह जल्दी आउंगी। आप दोनों शैतानों से मुझे हिसाब बराबर करना है।"
आज सुबह पापा मम्मी के जाने के बाद मैंने और सन्नी ने घर की साफ सफाई कर ली ताकि लक्ष्मी आंटी को हिसाब बराबर करने के लिए ज्यादा वक्त मिले। लक्ष्मी आंटी भी वादे के मुताबिक जल्दी आ गई और हमारी मदद से कुछ ही देर में काम पूरा हो गया।
लक्ष्मी आंटी मेरे बेडरूम में किसी रानी की तरह दाखिल हुई तो हम दोनों उसके आदेश का इंतजार करने लगे। लक्ष्मी आंटी ने पैकेट अपने हाथों में लिया और अलग अलग तरह के कंडोम का मतलब पूछने लगी।
लक्ष्मी आंटी ने हमें कपड़े उतारने को कहा। लक्ष्मी आंटी ने मुझे पान मसाला कंडोम पहनाया, तो सन्नी को केला कंडोम पहनाया। लक्ष्मी आंटी ने हमें बेड के किनारे बिठाया और खुद हमारे कदमों में बैठ कर हमारे लौड़े चूसने लगा। लक्ष्मी आंटी ने अच्छे से चूसा और चिढ़ाया पर झडने से पहले रुक गई।
लक्ष्मी आंटी बोली, "इन दोनों का स्वाद उतर गया है। कुछ और लगाते हैं।"
लक्ष्मी आंटी ने फिर मुझे स्ट्रॉबेरी पहनाया और सन्नी को आम पहनाया। लक्ष्मी आंटी ने अपने होंठ और हाथों से हम दोनों को सुख के कगार पर खड़ा कर गिरने से रोक रखा था।
"लक्ष्मी आंटी, अब और मत तड़पाओ। छूट जाने दो ना।"
लक्ष्मी आंटी ने कड़े स्वर में कहा, "दुबारा अपनी लक्ष्मी आंटी से कुछ छिपाओगे?"
हम दोनों ने सर हिलाकर ना कहा तो लक्ष्मी आंटी ने अपने होंठ मेरे लौड़े पर रख कर चूसा। मेरा रस कंडोम के अंदर भर रहा था कि लक्ष्मी आंटी ने सन्नी को भी झड़ा दिया।
हम दोनों बेड पर लेट गए तो लक्ष्मी आंटी ने अपने कपड़े उतार फेंके और हम दोनों से कहा,
"चलो उठो!! बताओ ये long lasting कितनी देर तक काम करता है?"
हम दोनों ने कहा कि हम नहीं जानते तो लक्ष्मी आंटी ने 2 पैकेट खोलकर कहा, "पता लगाना चाहते हो?"
नेकी और पूछ पूछ?
हम दोनों कंडोम पहन कर लेट गए। लक्ष्मी आंटी ने अपने घुटनों को मेरी कमर के दोनों तरफ रखते हुए अपनी चूत के मुंह पर मेरा सुपाड़ा रखा। मेरी आंखों में देखते हुए लक्ष्मी आंटी ने कहा,
"खबरदार अगर जरा भी हिले डुले। चुप चाप पड़े रहो।"
लक्ष्मी आंटी के इशारे पर सन्नी ने पीछे से लक्ष्मी आंटी की गांड़ पर अपना लौड़ा लगाया। लक्ष्मी आंटी ने अपने हाथ के इशारे से उसे भी रोक दिया। हम दोनों के सुपाड़े लक्ष्मी आंटी के गरमी से भरे खजाने के दरवाजों पर दस्तक देकर खड़े थे।
लक्ष्मी आंटी ने एक गहरी सांस लेते हुए मेरी आंखों में देखा और बैठ गई।
मां… अन्हह… हां… आह…
लक्ष्मी आंटी ने अपने दोनों छेद हमारे लौड़ों से भर दिए और अब गहराई में उनके एहसास का मज़ा लेते हुए बैठ गई।
लक्ष्मी आंटी ने कहा, "पता है, इन कंडोम पर बने छोटे छोटे नक्काशी से मेरे अंदर तक आप दोनों के लौड़े कुछ अलग ही मजा देते हैं। उफ्फ… काश कि यह पल यहीं रुक जाए। मुझे प्यार करो बाबू। मुझे चोदो बाबू! मुझे फ़ाड़ दो!!!"
हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को पकड़ लिया। मैंने लक्ष्मी आंटी का झूलते मस्त गोले पकड़ लिए तो सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के कंधे पकड़ लिए। लक्ष्मी आंटी ने हमें अभी चूसा था और उपर से long lasting condom पहनाया था। वक़्त तो लगना था। 10 मिनट लक्ष्मी आंटी को चोदने के बाद सन्नी थकने लगा और मैं उसकी जगह लेने के लिए तयार था।
सन्नी ने अपने बदन से लक्ष्मी आंटी को हम दोनों के बीच दबा दिया। बिना अपनी ताल बदले लक्ष्मी आंटी के साथ हम ने पलटी मारी। अब सन्नी पीठ पर लेटे हुए लक्ष्मी आंटी की गांड़ मार रहा था और लक्ष्मी आंटी अपने पैरों से अपनी कमर उठकर मुझसे अपनी चूत मरवा रही थी।
लक्ष्मी आंटी ने मेरी आंखों में देखते हुए अपनी कमर हिलाई और हम दोनों से एक साथ चुधाते हुए झड़ने लगी। सन्नी और मैंने भी ठान ली थी कि long lasting condom पहनाया है तो उसमें ही झड़ेंगे। 10 मिनट और लक्ष्मी आंटी झडते हुए जम कर चुधी। लक्ष्मी आंटी कभी मेरा नाम लेती, तो कभी सन्नी का पर चीखती रही। आखिर में सन्नी ने लक्ष्मी आंटी का नाम लेते हुए अपनी तोप चला दी। लक्ष्मी आंटी सन्नी के बदन पर लेट गई और मैं उसकी चूत को चोदता रहा। 1 मिनट बाद मैंने भी कंडोम भर दिया और लक्ष्मी आंटी की चूचियों को चूमते हुए सुस्ताया।
लक्ष्मी आंटी ने मेरे बालों में उंगलियां घुसा कर मेरे गाल को चूमते हुए कहा, "आप दोनों बड़े वो हो। ऐसे लगा जैसे… पप्पुजी!!"
लक्ष्मी आंटी के हाथ पैर ठंडे पड़ गए।
मैंने मुड़कर देखा तो दरवाजे में एक हट्टा कट्टा आदमी खड़ा था। मैं लक्ष्मी आंटी के नंगे बदन को अपने नीचे छुपाने लगा तो उसने कहा,
"कपड़े पहन कर बाहर आ जाओ। मैं खाना परोसता हूं।"
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सन्नी
मैंने और विक्की ने कपड़े पहन लिए पर लक्ष्मी आंटी अपने बदन से कपड़े लगाए डर कर बैठी रही। हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को हिम्मत दी और उसे कपड़े पहनाकर बाहर ले आए। पप्पू डायनिंग टेबल पर बैठा था और उसकी तेज नजरें हम पर गड़ी हुई थी।
"इस में लक्ष्मी आंटी की कोई गलती नहीं है। हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी का बलात्कार किया है।"
पप्पू ने एक सर्द मुस्कान के साथ कहा, "बिल्कुल!! मैं 20 मिनट से लक्ष्मी की यही चीखें तो सुन रहा था। लक्ष्मी ने मुझे देखने से पहले 10 मिनट तक मैं दरवाजे में खड़ा था। मुझे सब पप्पू बुलाते हैं इसका मतलब ये नहीं कि मैं पप्पू हूं। चलो तीनों मेरे सामने बैठो। आज मैं एक कहानी सुनाऊंगा।"
हम लक्ष्मी आंटी को हमारे बीच बिठाकर पप्पू की बात सुनने लगे।
पप्पू बोला, "मेरा नाम प्रतीक है पर बचपन से सब पप्पू बुलाते हैं। कम उम्र में ही मैंने अपने काम में हुनर को दिखाया और अचानक मेरे पास काम आने लगे। पर ये किसी से देखा नहीं गया। उसने एक रात मेरे पेट में चाकू से वार करने की कोशिश की। मैंने बचते हुए उसका हाथ हिलाया और चाकू नीचे लग गया। डॉक्टर अच्छा आदमी था। उसने जो हो सके वो बचाया पर उसने अकेले में मुझे बताया कि मैं कभी शादी ना करूं। मेरा लौड़ा अब किसी औरत के काम का नहीं। शादी की जिद घरवालों ने पकड़ ली तो मैं शराबी, जुआरी और नशेड़ी बन गया। आखिर ऐसे इंसान को कोई अपनी बेटी क्यों देगा?
फिर लक्ष्मी आई। अपना राझ छुपाने के लिए एक सुंदर और अच्छी लड़की की जिंदगी मुझे बरबाद करनी पड़ी। मैं शराबी, जुआरी और नशेड़ी बन कर लक्ष्मी को बहुत सताया करता पर लक्ष्मी पूरी पतिव्रता नारी निकली। पहले एक साल इसने मुझे सुधारने की कोशिश की, फिर एक साल संभालने की कोशिश की और आगे मुझे झेलती रही। जो सुख मैं लक्ष्मी को नहीं दे सकता वो उसे मिले इसके मेरे पास 2 रास्ते थे। 1 मैं बस्ती के किसी आदमी को बुलाता पर फिर वो लक्ष्मी की इज्जत नहीं करता, उसके बारे में बाहर बोलता, उसे अपने दोस्तों में बांटता और मैं भी अपना राझ नहीं छुपा पता। 2 कोई बड़ी उम्र का अमीर आदमी लक्ष्मी की जवानी पर लट्टू हो जाए और लक्ष्मी को अपना बनाए, तो वो अपनी इज्जत के लिए लक्ष्मी की इज्जत बचाता। इसी लिए मैंने लक्ष्मी को पवन साहब और अश्वेत साहब के पास काम करने भेजा। सोचा कि दोनों अब भी जवान है तो कोई अपनी बीवी से किसी दिन लड़ कर लक्ष्मी को आजमा सकता है। 4 साल तक कुछ नहीं हुआ और मै शरीफों की शराफत को कोसने लगा।
पर पिछले एक हफ़्ते में सब बदल गया।
पिछले हफ़्ते जब मैंने लक्ष्मी के पैसे चुराए तो बिजली कट गई और लक्ष्मी गुस्सा हो कर गई। अगले दिन शाम को बिजली लौट आई थी पर लक्ष्मी बहुत डरी हुई थी। उसने बताया कि 3 दिन बाहर जा कर खाना बनाने की लिए उसे 1500 मिलने वाले हैं। ये तो डरने की बात नहीं थी। मैं समझ गया कि किसी साहब ने लक्ष्मी को फंसा लिया है।
लक्ष्मी के जाने के बाद मैंने ताक झांक कर देखा तो पता चला दोनों साहब अपनी बीवियों के साथ है। मुझे लगा कि मैं गलत था पर लक्ष्मी लौटी तो उसके तेवर बदले हुए थे। उसने मेरा बहुत अच्छा खयाल रखना शुरू किया। लक्ष्मी गुनगुना रही थी। मैं समझ गया कि कोई ऐसा है जो लक्ष्मी को चाबी दे रहा है। लक्ष्मी की बैग में एक satin में बना नाइट गाउन मिला जो उसने कहा कि उसने खरीदा था पर कैसे? पैसे तो उसके पास नहीं थे। सोमवार को उसने गाउन को प्यार से अपने बक्से में रख दिया। Satin गाउन पति के लिए होता है या फिर प्रेमी के लिए। पति के लिए पहना नहीं तो बचा कोन? मंगलवार को लक्ष्मी उदास लौटी और satin dress पहनकर सो गई। बुधवार को मैंने देखा कि लक्ष्मी ने कंडोम खरीद कर अपने पर्स में रखें। कोई कुंवारी कंडोम ले कर काम पर जाए तो उसका आशिक वहीं होगा। तब मुझे आप दोनों याद आए। बच्चे अब जवान हो गए हैं। सोचा की आप दोनों में से किसी ने लक्ष्मी को जवानी का मजा दिलाया होगा। कल मैंने आप दोनों के बारे में सारी बातें जान ली तो पता चला कि आप दोनों तो कुछ ही दिनों में दूसरे शहर के कॉलेज जाओगे। मुझे बहुत बुरा लगा कि मेरी प्यारी दोस्त लक्ष्मी का दिल टूटेगा। सोचने लगा कि जिस कॉलेज में आप जाओगे उस शहर में मैं भी लक्ष्मी के साथ रहने आ जाऊं। लेकिन होनी को ये बात भी मंजूर नहीं।
कल शाम को Gulf across seas job में से मुझे कॉल आया। अच्छे तनखा के साथ मुझे 4 साल का कॉन्ट्रैक्ट दिया है। अब लक्ष्मी को मुझे परेशान करने की जरूरत नहीं पर किसी को लक्ष्मी के साथ होना चाहिए। सोचो क्या करें?"
"गल्फ में शराब, जुआ और नशा तीनों को बहुत ज्यादा सजा है। रह पाओगे?"
प्रतीक ने जोर से हंसते हुए कहा, "अब तक समझे नहीं? मैं अपने उपर शराब उड़ाकर घर लौटता हूं। मैं ना शराब पीता हूं और ना नशा करता हूं। जुआ खेलने के नाम पर बाहर जा कर काम करता हूं। कितने हट्टे कट्टे नशेड़ी शराबियों को जानते हो? मेरी पूरी तनख़ा और लक्ष्मी से चुराया एक एक पैसा मैंने बचाया है, संभाल कर रखा है।"
प्रतीक टेबल से उठकर हमारी ओर आया तो मैंने उस से लक्ष्मी आंटी को बचाने की तयारी कर ली। प्रतीक लक्ष्मी आंटी के पैरों में बैठ गया तो लक्ष्मी आंटी ने उसे उठाने की कोशिश की। प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी के हाथ अपने हाथों में पकड़ कर कहा,
"लक्ष्मी, मैंने तुम्हें धोका दिया है, बहुत ज्यादा सताया है।
पर शादी के दिन हम पहली बार मिले और मैं तुम्हारी मासूमियत देख तुम्हें कैसे बताता की खोट तुम में नहीं मुझ में है। पिछले 4 सालों में तुम मेरी दोस्त बनी ये जानते हुए कि मैं तुम्हारा फायदा उठा रहा था। अपने मन से ये बात निकाल दो के तुम मुझ से धोका कर रही हो। मैं तुम्हें यकीन दिलाता हूं कि मैं चाहता हूं कि तुम्हे वो सारी खुशियां मिले जो मैं तुम्हें देने के काबिल नहीं।"
लक्ष्मी आंटी ने रोते हुए प्रतीक के सर को अपनी बाहों में भर कर अपने दिल पर बना धोखे का बोझ उतार दिया। प्रतीक ने मुझे और विक्की को देखते हुए कहा,
"बाबू, मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि लक्ष्मी को एक से ज्यादा प्रेमी मिलेंगे पर मैं लक्ष्मी को अपमानित होने नहीं दूंगा। आप दोनों लक्ष्मी के साथ सुख बांटो तो मुझे शिकायत का कोई हक़ नहीं पर लक्ष्मी को आप दोनों से आपकी प्रमिका का सम्मान भी मिलना चाहिए। मैं जाने से पहले लक्ष्मी का अच्छा इंतजाम करके जाऊंगा पर मुझे खुशी होगी अगर आप दोनों भी लक्ष्मी पर नजर रखें। समझे?"
पप्पू हमारी नज़रों के सामने प्रतीक बन गया। प्रतीक ने हमारे साथ खाना खाया और लक्ष्मी आंटी अपनी मर्जी से प्रतीक के साथ अपने घर चली गई। आज उन दोनों को पिछले 4 सालों की काफी बातें करनी थीं। मैं और सन्नी सोच में पड़ गए थे कि लक्ष्मी आंटी को प्रतीक के साथ जाने देना सही था या गलत? प्रतीक अगर अब भी पप्पू हुआ तो घर जाकर लक्ष्मी आंटी के साथ कुछ कर सकता है और रोकें तो कैसे?
शाम को मम्मियों को पापाओं ने बताया कि कॉलेज के बाहर ही एक अच्छा फ्लैट मिल गया है और हम दोनों के खाने और सफाई का इंतजाम हो जाए तो अगले 4 साल हमें कोई कमी नहीं होगी। समीरा मम्मी ने कहा कि वह लक्ष्मी आंटी से पूछेगी अगर उसके पहचान कि कोई लड़की या औरत अच्छे तनख़ा के लिए हमारे साथ रहने को तैयार हो जाए। जब पापा ने कहा कि पराई औरत पर विश्वास नहीं कर सकते तो मम्मी ने लक्ष्मी आंटी को शराबी विक्की से दूर करने की बात की।
हम दोनों मेरे कमरे में बैठ कर बड़ों की बातें कंप्यूटर पर सुन रहे थे। मम्मी ने लक्ष्मी आंटी से सुबह बात करने की ठान ली और हमारे मन में लड्डू फ़ूटने लगे।
शनिवार को सब बड़ों ने छुट्टी ली थी ताकि लक्ष्मी आंटी से सीधी बात की जाए। लेकिन लक्ष्मी आंटी के साथ प्रतीक भी आया। प्रतीक को देख मम्मियां चौंक गई तो पापा एक दूसरे की ओर देखने लगे। प्रतीक ने बताया कि उसे दुबई के बिजनेसमैन MBS, मोहम्मद बिन सलीम ने अपनी कंपनी में नौकरी दी है। अच्छी तनखवाह के कारण लक्ष्मी आंटी को अब काम करने की जरूरत नहीं पर लक्ष्मी आंटी को अकेले छोड़ना प्रतीक के मन को नहीं भाता।
पापा ने प्रतीक को पासपोर्ट, विसा और टिकट के लिए एक लाख की मदद देने का वादा किया।
प्रतीक ने कहा कि कल वह अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा जुआ जीता है और अब उसे पैसों की कमी नहीं। जब पवन अंकल ने फिर भी मदद करनी चाही तो प्रतीक ने कहा कि उसे लक्ष्मी का बस्ती में अकेले रहने से डर लगता है।
समीरा मम्मी ने मौके का फ़ायदा उठाया और कहा कि बच्चों को दूसरे शहर में खाना बनाने और सफाई के लिए कोई चाहिए होगा। अगर प्रतीक को ऐतराज नहीं है तो लक्ष्मी आंटी उनके साथ वहीं रह सकती है। प्रतीक तुरंत मान गया और सब अपनी अपनी वजह से खुश हो गए।
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सन्नी
अगले 10 दिन मानो पर लगाकर उड़ गए। पप्पू यानी प्रतीक के कागजात तैयार हो गए तो उसकी भी तैयारी हो गई। हम दोनों का कॉलेज selection final हो गया तो मम्मियां छुट्टी ले कर अपने बच्चों के साथ ज्यादा वक्त बिताना चाहती थी। लक्ष्मी आंटी रविवार को एक नई औरत को लेकर आई जो घर के सारे काम करेंगी। इसका नाम गंगा मासी था और वह किसी भी तरह से दादी से कम नहीं थी। मैंने पापा को पवन अंकल से कहते सुना कि बच्चे बंगाली मिठाई खा गए और हमें तो सुखा डिब्बा भी नसीब नहीं हुआ।
मंगलवार को दोनों पप्पा हमें ले कर मुंबई आ गए। Admission करवाने के बाद हम सब नए फ्लैट को देखने गए। टैक्स के लिए फ्लैट कंपनी के नाम पर था और बिल्कुल खाली था। पवन अंकल ने कहा कि 10 दिन में अंदर हमारे लिए एक अच्छा डबल बेड और वॉर्डरोब लगा होगा। पढ़ाई और बैठने के लिए हॉल में समान लगा दिया जाएगा। कमरा 1BHK है तो साफ सफाई के लिए ज्यादा नहीं है।
मैंने भोलेपन से कहा, "पर लक्ष्मी आंटी का क्या?"
दोनों पापा ने एक दूसरे की ओर देखा और उन्होंने हमारे कान पकड़ कर मोड़ दिए।
पापा ने हमें डांटते हुए कहा, "हम तुम्हारे बाप हैं!! तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई लक्ष्मी आंटी के साथ ऐसा करने की। 4 साल से वो हमारे भी सामने खड़ी थी। नौकर ऐसा करे तो वह जेल जाता है और मालिक ऐसा बरताव करे तो नौकर उसका गला काट देता है। लक्ष्मी आंटी नाजाने क्यों तुम दोनों का साथ दे रही है। पर उसके साथ के कारण हमने पप्पू को नौकरी के बहाने दूर भगाया। हम नहीं जानना चाहते कि यहां क्या होता है और कैसे। बस इतना याद रखो कि ये चार साल वापस नहीं आएंगे। दिल लगाकर पधो और लक्ष्मी आंटी का खयाल रखना। जानते हो मर्द को 21 से पहले शादी क्यों मना है? क्यूंकि शादी के बाद उसे अपने साथ अपनी बीवी की भी जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। लक्ष्मी आंटी से कोई शिकायत आए तो हम उस वापस बुला लेंगे और तुम दोनों अपना हाल खुद संभालो। समझे?"
पवन अंकल ने कहा, "लक्ष्मी आंटी को हम ने कंपनी में नौकरी पर रखा है। उसे हेल्थ इंश्योरेंस भी मिलेगा जिसमें मैटरनिटी की अनुमति है। गलती से भी उसका इसतेमाल मत करना!!! औरत को रिझाया है तो आटे दाल का भाव जान लो। दुबारा गडबड की तो शायद उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
"
ये बताने की जरूरत नहीं की हम दोनों की अकल ठिकाने आ गई थी। एजेंसी को चाबी दे कर हम सब लौट आए। मम्मियों ने हमारा ऐसे स्वागत किया की हम जंग से लौटे हो। पापा ने गुस्सा थुंक दिया और हमारे कॉलेज और कमरे के बारे में सब बताने लगे।
प्रतीक के जाने की तारीख आते हुए हम सब में दोस्ती हो गई। प्रतीक को हम दोनों से 2 दिन पहले जाना था। मैं, विक्की और लक्ष्मी आंटी उसे एयरपोर्ट पर छोड़ने गए तो लक्ष्मी आंटी रो पड़ी। प्रतीक ने उसे गले लगाते हुए उसके कान में कुछ कहा तो लक्ष्मी आंटी ने शर्माकर हां कहा। उन्हें देख कर कोई भी उनके बीच के प्यार को महसूस कर सकता था। प्रतीक ने कहा कि उसने पापा से बात कर ली थी और लक्ष्मी आंटी आगे जा कर कमरा ठीक कर देगी।
प्रतीक का हवाई जहाज सुबह 10 बजे उड़ गया और लक्ष्मी आंटी ने शाम की ट्रेन पकड़ ली। अगले 2 दिन पॅकिंग और नसीहत में उड़ गए। जाने के दिन मम्मियां चिड़चिड़ी हो गई थी और दोनों पापा अकसर उनसे दूर भागते नजर आ रहे थे। आखिर में दोनों मम्मियों ने रोना शुरू किया और हमें गले लगाते हुए अपना खयाल रखने को कहा। सुबह की फ्लाइट से हम दोनों मुंबई पहुंचे तो थके हुए थे और लक्ष्मी आंटी को पकड़ने के लिए बेताब थे। कमरे का दरवाजा खटखटाया तो लक्ष्मी आंटी ने अंदर आने को कहा।
लक्ष्मी आंटी ने अपने चेहरे पर कुछ हरा लेप लगाया था और उसके बालों को एक जालीदार टोपी में ढका हुआ था। हाथों और पैरों में अजीब प्लास्टिक के मोजे थे। Satin dress छोड़कर लक्ष्मी आंटी को पहचानना मुश्किल था।
लक्ष्मी आंटी ने डांटते हुए कहा, "ऑफो, अब ऐसे ही खड़े मत रहो!! आप दोनों के कॉलेज से चिट्ठी आई है कि आज 12 बजे सब को मिलना है। यहां से आप के जहाज को चक्कर काटते देख मेरी जान गले में आ गई। अब पहले ही दिन देर से जाओगे क्या? चलो बाथरूम में घुस जाओ तब तक मैं आप दोनों के कपड़े रख देती हूं। चिट्ठी में लिखा था कि प्रोग्राम देर तक चलेगा तो सीधे खाने पर मिलेंगे।"
मैं और विक्की एक साथ नहाने लगे तो बड़ा अजीब लगा। लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को तौलिए दिए। लक्ष्मी आंटी को हम ने अंदर खींच लेते इस से पहले ही वो भाग गई। बाहर आ गए तो लक्ष्मी आंटी ने हमारे कॉलेज के कपड़े पहनने के लिए तयार रखे थे और साथ में खाना भी लगाया था। लक्ष्मी आंटी के अंदर शायद कोई मिलिट्री का अफसर या कोई मम्मी आ गई थी जो हम दोनों को वक़्त पर तयार कर भेज रही थी। मुंह पर लगे लेप और हाथ पर लगे प्लास्टिक मोजे को दिखाते हुए लक्ष्मी आंटी ने हमारे साथ खाने से मना कर दिया।
उलझे हुए विचार और भारी लौड़े से हम दोनों भी कॉलेज गए। कॉलेज के गेट से अंदर जाते हुए विक्की बोल पड़ा,
"सन्नी, अगले 4 साल ऐसे ही बीते तो…"
34a
विक्की
कॉलेज की अगर ये शुरुवात थी तो अगले 4 साल जालिम होंगे ये बताने की जरूरत नहीं थी।
बड़ी बड़ी हस्तियां हमें सिखाने के लिए आयेंगी और हमें परखेंगी। कॉलेज के अधिकतर लोग स्कूल से सीधे आए लग रहे थे और कुछ हसीनाओं ने हम से बात की। शायद पापा कि डांट या प्रतीक को दिया वादा या लक्ष्मी आंटी की लुभावनी छवि, किसी न किसी वजह से हम इनके हुस्न से बाहर निकल आए।
शाम के 7 बजे थोड़े डर और थोड़ी उत्तेजना से हम दोनों ने दरवाजा खटखटाया। जवाब न मिलने पर चाबी से दरवाजा खोला। पूरे घर में अंधेरा था और मेज पर एक मोमबत्ती के नीचे चिट्ठी रखी थी।
"नहाकर वापस यहां आओ। मैं आप दोनों का इंतजार कर रही हूं। आप दोनों की
लक्ष्मी आंटी"
हम दोनों ने बाथरूम की ओर दौड़ लगाई और बिना कुछ सोचे नहा कर साफ हो गए। हम दोनों ने दाढ़ी बनाई। दोनों के तौलिए अंदर ही रखे हुए थे तो उन्हें पहनकर हम वापस बाहर आए।
कमरे में एक और मोमबत्ती जल रही थी और मेज पर एक नई चिट्ठी थी।
"मेज के नीचे रखे हुए कपड़े पहन कर रोशनी के साथ आओ।
लक्ष्मी आंटी"
कमरे में अब दो मोमबत्तियां थी। एक मेज पर तो दूसरी बेडरूम के दरवाजे में। हमने लक्ष्मी आंटी की तयारी कि कदर करते हुए नीचे से कपड़े निकाले। दो जोड़ी कुर्ता और पजामा देख हम ने जल्दी से अपने कपड़े पहन लिए। मैंने मेज पर रखी मोमबत्ती उठाई तो सन्नी ने आगे बढ़ कर बेडरूम के दरवाजे में रखी मोमबत्ती उठाई।
हम दोनों ने बेडरूम में देखा तो वहां पूरा अंधेरा था। हम दोनों अंदर गए तो अलग अलग जगह पर मोमबत्तियां लगी हुई थी। हमें लक्ष्मी आंटी की आवाज सुनाई दी,
"बाहर से अंदर तक उजाला कर दो पर जो मेरी ओर देखेगा वह कल सुबह तक सिर्फ देखेगा।"
लक्ष्मी आंटी की बात मान कर, हम दोनों ने सारी मोमबत्तियां जलाई। आखरी मोमबत्तीयां बेड किनारे बनी मेजों पर रखी थी। मोमबत्ती जलाने पर वहां हमें दूध का एक एक प्याला मिला जिसके नीचे एक और चिट्ठी थी।
"दूध ले कर बेड पर आ जाओ।"
हम दोनों को पता था कि लक्ष्मी आंटी ने क्या किया है पर फिर भी लक्ष्मी आंटी को देख दिल की धड़कन बढ़ गई। लक्ष्मी आंटी दुल्हन का जोड़ा पहने बेड के बीच में बैठी थी। लक्ष्मी आंटी ने सर से घूंघट में अपना चेहरा छिपाया था। लक्ष्मी आंटी के मेहंदी से रंगे हाथों से उसके घुटनों को घेरा था। पायल में बंधे हुए मेहंदी लगे पांव अपनी हिचकिचाहट में कांपती उंगलियों को गद्दे पर दबा रहे थे। हम दोनों लक्ष्मी आंटी के दोनों तरफ बैठ गए।
हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी के घूंघट को हाथ लगाया तो लक्ष्मी आंटी ने हमारे हाथ पकड़ लिए।
लक्ष्मी आंटी ने चिढ़ाते हुए कहा, "ऐसे नहीं होता बाबू!! पहले मुंह दिखाई कि कीमत चुकानी पड़ेगी। बोलो क्या दोगे आप दोनों?"
ये तो हम ने सोचा ही नहीं था। खड़े लौड़े के सिवा हमारे पास देने लायक कुछ नहीं था।
सन्नी ने दिमाग लगाया और कहा, "रामायण के भगवान राम के तरह हम तुम्हें वचन देते हैं कि…"
लक्ष्मी आंटी ने सन्नी के होटों पर मेहेंदी लगी उंगली रख कर उसे रोक दिया। लक्ष्मी आंटी बोली,
"बाबू, वादा ऐसा करो जो निभा पाओ। क्यों न आप दोनों मुझे कैकई की तरह 2 वचन दो?"
हम दोनों को लक्ष्मी आंटी पर विश्वास था और हम दोनों ने हां कहा।
लक्ष्मी आंटी ने कहा, "आप मुझे वचन देते हो के जब तक हम साथ हैं आप किसी और लड़की के प्यार में नहीं पड़ेंगे। मेरे साथ धोका नहीं करेंगे। यहां सिर्फ पढ़ाई करोगे और बाकी मुझ पर छोड़ दोगे। मंजूर है?"
हम दोनों ने खुशी खुशी हां कहा।
लक्ष्मी आंटी ने अपनी दूसरी शर्त कही, "बाबू आप दोनों अब मुझे दूसरा वादा करो कि आप दोनों मुझे किसी और के साथ बांटोगे नहीं। अब आप दोनों बड़े शहर के कॉलेज के लड़के हो गए हो और शहरी लोगों से डर लगता है बाबू।"
हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी से वादा किया कि हम उसके प्यार को उसके खिलाफ इस्तमाल नहीं करेंगे। हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में भर लिया और लक्ष्मी आंटी ने हमारे बीच में बैठ कर हमारे सर पर हाथ रखा। हम पीछे हो गए और लक्ष्मी आंटी का घूंघट उठने लगे। लक्ष्मी आंटी के सर से घूंघट उतर गया और लक्ष्मी आंटी के अवर्णनीय रूप ने हमें मोह लिया।
नई नवेली दुल्हन की तरह सजी हुई लक्ष्मी आंटी को हम दोनों आंखे फाड़कर देखते रह गए। लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को देख कहा,
"बाबू, ऐसे क्या देख रहे हो? मैंने भी आप दोनों के लिए कुछ किया है। अभी दिखाऊं?"
हम दोनों बस सर हिलाकर हां कर पाए। लक्ष्मी आंटी ने तकिए के नीचे से कुछ निकाल कर हमें दिया। मोमबत्तियों के उजाले में, लक्ष्मी आंटी के रूप से चोंधियाई आंखों को वह चीज पहचानने में थोड़ी दिक्कत हुई । वह गर्भनिरोधक गोलियों का चौकोनी पैकेट था जिस में से 6 गोलियों खाई गई थी।
सन्नी के दिमाग की बत्ती जली तो उसने लक्ष्मी आंटी की ओर देखा। लक्ष्मी आंटी ने शर्माकर मुस्कुराते हुए अपने मेहंदी लगे हाथ को आगे कर दिया। सन्नी ने एक गोली लक्ष्मी आंटी के हाथ में रख दी और लक्ष्मी आंटी ने हमारी नज़रों में देखते हुए उसे निगल लिया। मैंने होश में आ कर दूध का ग्लास लक्ष्मी आंटी को दिया और उसने शरमाते हुए आधे से थोड़ा कम पी लिया। सन्नी ने भी लक्ष्मी आंटी को अपना ग्लास दिया तो उसके ग्लास को भी जूठा कर लक्ष्मी आंटी ने लौटाया। आगे की बात समझकर हम दोनों ने बाकी दूध गटक लिया और ग्लास मेजों पर रख दिए।
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सन्नी
आज शाम को कॉलेज की कई हसीनाओं ने शरमाते हुए हम से बात की थी पर लक्ष्मी आंटी को देख उन्हें याद करना भी मुश्किल था। घूंघट बना दुपट्टा उतरने के बाद लेहेंगे चोली में बैठी लक्ष्मी आंटी पर झपट पड़ने से हम दोनों ने खुद को रोका।
मैंने लक्ष्मी आंटी के पैरों के उंगलियों को सहलाकर चूमते हुए उसके पायल को अपनी जीभ से बजाया। विक्की ने लक्ष्मी आंटी के बालों में सजे मांग टिक्के को चूमकर हटाया तो उसके नीचे लक्ष्मी आंटी की मांग में सिंदूर भरा हुआ था।
हमें याद आया की लक्ष्मी आंटी प्रतीक कि बीवी है। लेकिन प्रतीक कि अनुमति याद करते हुए सोचा कि बीवी किसी की हो तो भी हम दोनों की सुहागन है। मैंने इंच इंच करके लक्ष्मी आंटी के लेहेंज को मोड़ते हुए उसके सुडौल पैरों को उजागर किया। मोमबत्तियों के उजाले में लक्ष्मी आंटी की काया सोने की तरह चमक रही थी। विक्की ने मांग टिक्के से मिलती बालियों को चूमते हुए लक्ष्मी आंटी की उत्तेजना से बन्द होती आंखों को चूमा। लक्ष्मी आंटी के घुटनों को चूमकर मैंने फैलाया तो लक्ष्मी आंटी बेड पर लेट गई। विक्की ने लक्ष्मी आंटी के गले को चूमते हुए उसकी चोली के गले में जाते मंगलसूत्र को भी चूमा।
प्रतीक कि अनुमति से उसे धोका देने की बात से लक्ष्मी आंटी के बदन में उत्तेजना से लहर दौड़ गई। विक्की ने लक्ष्मी आंटी को पेट के बल लिटा दिया और उसके पीठ पर लगी चोली की गांठ को अपने दातों से खोलने लगा। मैंने मौके का फायदा उठाकर लक्ष्मी आंटी के घुटनों के पीछे का हिस्सा चूमा। लक्ष्मी आंटी ने सर उठाकर उत्तेजना से आह भरी। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की चोली खोली और पीठ चूमते हुए कंधे पर से चोली का कपड़ा सरकाकर उतारने लगा। मैंने लक्ष्मी आंटी की मांसल जांघों को चूमते हुए उसकी गोल मटोल गांड़ को छिपाते पैंटी के किनारे चूमे।
लक्ष्मी आंटी ने उत्तेनापूर्ण नजरों से हमें देख कर कहा, "बाबू अब और मत तड़पाओ। मेरा बदन जल रहा है। इस आग को अपने प्यार से बुझाओ।"
मैंने लक्ष्मी आंटी के लहंगे का नाड़ा खींच लिया तो लक्ष्मी आंटी ने अपनी कमर उठकर उसे उतारने में मेरी मदद की। लहंगा घुटनों तक उतार दिया तो विक्की ने लक्ष्मी आंटी को पलट दिया। लक्ष्मी आंटी ने अपने हाथ और पैर उठाए और हम दोनों ने लहंगा चोली उतार फेंका। लक्ष्मी आंटी ने सेक्सी लाल ब्रा और पैंटी कि जोड़ी पहनी थी। मैंने लक्ष्मी आंटी की जांघों को चूमते हुए खोला। लक्ष्मी आंटी की गीली पैंटी से आती उसकी यौन खुशबू ने मुझे बुलाया। मैंने लक्ष्मी आंटी की चूत को उस पैंटी में से चूमना और चूसना शुरू किया।
लक्ष्मी आंटी से अब और इंतजार नहीं हुआ और उसने अपनी पैंटी उतार फेंकते हुए अपनी जांघों को फैलकर मुझे जगह दी। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की ब्रा उतारी और लक्ष्मी आंटी के रसीले फलों को चूसने लगा। लक्ष्मी आंटी ने एक हाथ से विक्की के बालों को सहलाते हुए दूसरे हाथ से मेरे बाल पकड़ कर मुझे अपने ऊपर खींच लिया। लक्ष्मी आंटी की चूत को मेरा कुर्ता पजामा में बन्द लौड़ा रगड़ रहा था।
लक्ष्मी आंटी ने विक्की के सर को अपने स्तन पर दबाते हुए मेरे पजामे का नाड़ा तोड दिया।
लक्ष्मी आंटी ने मेरी आंखों में देख कर सिर्फ 1 शब्द कहा, "चोदो!!"
मैंने पल दो पल में अपने सारे कपड़े उतार फेंके और लक्ष्मी आंटी के बदन पर लेट गया। लक्ष्मी आंटी ने अपने पैरों से मेरी कमर पकड़ ली और मुझे अपनी धधकती गरमी में खींच लिया। मेरा लौड़ा लक्ष्मी आंटी चूत की गहराई नापने अंदर गया तो लक्ष्मी आंटी ने विक्की के सर को पकड़ कर उसे चूमते हुए उसके होंठों से अपनी चीखें दबाई।
लक्ष्मी आंटी ने विक्की का भी नाड़ा तोड दिया और उसके लौड़े को हिलाने लगी। मैंने लक्ष्मी आंटी की लाल बरियों को चूमते, चूसते हुए अपनी रफ़्तार बढ़ा दी तो लक्ष्मी आंटी ने अपना बदन अकड़ते हुए मुझे अंदर खींच लिया। लक्ष्मी आंटी के खजाने में से यौन रस की नदी फुट कर बहने लगी और लक्ष्मी आंटी ने झडते हुए अपना बदन ढीला छोड़ दिया। मैं झडने के करीब था पर मैंने विक्की को आंख मारी और वह समझ गया।
विक्की ने लक्ष्मी आंटी की पकड़ से खुद को छुड़ाकर अपने कपड़े उतार दिए। विक्की जल्द ही मेरे पास आ गया और मैंने अपना लौड़ा बाहर निकाला। लक्ष्मी आंटी ने बस पल भर के लिए विरोध किया था कि विक्की ने मेरी जगह ले ली।
"विक्की बाबू!!", लक्ष्मी आंटी ने पुकारते हुए अपने दूसरे प्रेमी को आलिंगन में भर लिया। विक्की ने तेज धक्कों से लक्ष्मी आंटी को चोदना चालू रखा और लक्ष्मी आंटी ने तप कर दुबारा अपना पानी छोड़ दिया। विक्की लक्ष्मी आंटी को बाहों में भर कर चूमते हुए चोद रहा था और मुझे डर था कि वह अपने आप को रोक नहीं पायेगा। विक्की के तेज धक्कों से लक्ष्मी आंटी ने लगातार दूसरी बार पानी छोड़ा तो विक्की ने लक्ष्मी आंटी को घोड़ी बनाया। विक्की ने मुझे आंख मारी और मैंने विक्की कि जगह ले ली।
"बाबू! आप दोनों क्या कर रहे हो! उन्हहह… मुझे भर दो ना… मैं आपके प्यार की प्यासी हूं।", लक्ष्मी आंटी ने गिड़गिड़ाते हुए कहा।
लक्ष्मी आंटी को मैंने पैर फैलाकर घुटनों पर खड़ा किया और अपने लौड़े को एक झटके में पूरा पेल दिया। लक्ष्मी आंटी ने अपने होठों को दातों में पकड़ कर अपनी चीख निगल ली। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की हालत का मजा लेते हुए उसके नीचे सरक गया और लक्ष्मी आंटी के झूलते मम्मों को अपने हाथों में पकड़ कर उन मम्मों की लाल बेरियों को चूसने लगा।
लक्ष्मी आंटी ने बात करने की सारी कोशिशों को भूल कर अपने बदन को छूट दी।
"हनहह…हम्ममम… अन्ह… आंह… आईआईइश… आह… अम्म्म… मां… अंहह… हां… हा हा हा…", करते हुए लक्ष्मी आंटी लगातार झडती रही।
दूसरी बार लक्ष्मी आंटी की गरमी में से बाहर निकल पाना मुझसे नहीं हुआ और मैंने लक्ष्मी आंटी की कमर पकड़ कर उसे अपने लौड़े पर खींच कर दबाया।
"अहहह… आंटी… आह… हुँहह…" करते हुए मैंने अपना गाढ़ा घोल लक्ष्मी आंटी को भेंट चढ़ा दिया।
विक्की मेरे लिए तयार था और मेरा लौड़ा बाहर निकलते ही विक्की ने लक्ष्मी आंटी को पीठ पर लिटाकर उसकी गांड़ के नीचे एक तकिया रख दिया। लक्ष्मी आंटी की गांड़ उठ गई और मेरा रस लक्ष्मी आंटी के अंदर जमा रहा। विक्की ने अब अपने लौड़े को लक्ष्मी आंटी की चूत में उतार कर लक्ष्मी आंटी के बदन पर लेट गया। विक्की ने लक्ष्मी आंटी को चोदना शुरू किया तो लक्ष्मी आंटी ने उसे अपने पैरों से जकड़ लिया। विक्की के तेज धक्के अब लंबे नहीं थे पर हर धक्के से ऐसा आवाज आता जैसे भरी बाल्टी में लोटा गिरने से होता है। लक्ष्मी आंटी ने अपनी कामुक आवाज से उसका साथ दिया और विक्की ने अपनी ताल पकड़ ली।
"पुच्च… अन्ह… चुपक… पुच्च… आह… चूपाक… पुच्च… हां…"
इस संगीतमय कामक्रीड़ा को कोई ज्यादा भोग नहीं पता और विक्की जल्द ही लक्ष्मी आंटी को पुकारते हुए उस से चिपक गया।
लक्ष्मी आंटी अपनी टांगे फैला कर बेड पर लेटी छत देख रही थी और हम दोनों उसकी बगल में लेट कर उसके कंगन, बाली और पायल के साथ खेल रहे थे।
लक्ष्मी आंटी ने पूछा, "बाबू, मैं ये मंगलसूत्र उतार कर रख दूं? पहले मैंने इसे गिरवी रखा था और प्रतिकजी ने इसे छुड़ाकर छिपा दिया था। पर शायद अब ये आप दोनों को पसंद नहीं आए।"
"जानू, ये मंगलसूत्र निशानी है प्रतीक ने हम दोनों पर तुम्हे खुश रखने की दी हुई जिम्मेदारी कि। इसे कभी नहीं निकालना।"
लक्ष्मी आंटी ने कहा, "बाबू आप दोनों मेरी बात मान लीजिए कि मै आप दोनों को बाबू ही कहूंगी और आप दोनों मुझे लक्ष्मी आंटी कहोगे। इस से किसी और के सामने हमारा भेद नहीं खुलेगा। ठीक है?"
विक्की और मैं लक्ष्मी आंटी की इस बात में छिपी सच्चाई को स्वीकार कर मान गए। थोड़ी देर सुस्ताने के बाद हमारे लौड़े फिर से बढ़ने लगे। लक्ष्मी आंटी ने हमारा इरादा पहचानते हुए कहा, "अब क्या 1/2 ग्लास दूध पीकर पिलाकर पूरी रात गुजारनी है? चलो खाना तयार है। (शर्माकर) बाकी का काम खाना खाने के बाद करेंगे।"
लक्ष्मी आंटी का शर्माना हमारा दिल जीत गया और हम लक्ष्मी आंटी के पीछे पीछे गए। खाने में लक्ष्मी आंटी की दिन भर की मेहनत दिख रहा थी और हम दोनों खाने पर टूट पड़े। खाना खाने के बाद विक्की बड़े नटखट अंदाज में बोला,
"लक्ष्मी आंटी, कल कॉलेज को छुट्टी है। हमें किताबें खरीदने और शहर देखने को कहा है। तो जल्दी सोने की जरूरत नहीं। चाहें तो पूरी रात जाग सकते हैं।"
लक्ष्मी आंटी का चेहरा शर्म से लाल हो गया और उसके होंठों से, "हे राम…" निकल गया।
लक्ष्मी आंटी सोने से पहले ही बेसुध हो गई पर हम दोनों सबेरे 3 तक हर तरह अपनी सुहागरात मनाते रहे।
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विक्की
थक कर चूर होकर मानो आंखें बंद की ही थी कि फोन की घंटी ने उठाया।
मैंने एक आंख खोल कर देखा तो दीवार पर घड़ी सुबह के 8 बता रही थी। सन्नी भी मेरी तरह बिल्कुल नंगा बेड पर लेट कर देख रहा था। बेड के बीच में बने दाग के सिवा लक्ष्मी आंटी की कोई निशानी नहीं थी।
लक्ष्मी आंटी की आवाज के पीछे गया तो लक्ष्मी आंटी को मेरे फोन पर बात करते हुए पाया।
लक्ष्मी आंटी बोल रही थी, "… और वहां कोई दिक्कत तो नहीं? सुना है पाकिस्तानी लोग भी आप के साथ काम करेंगे। जरा संभलकर रहिए। खाना अच्छा है ना?…
आह हा हा… मुझे तो कभी नहीं बताया कि मेरी रोटियां ऐसी होती हैं।…
एम्म… हम्म…
नहीं!! मुझे शर्म आती है!!…
नहीं!!!!…
छाहह…
हां किया…
नहीं ना!!…
ठीक है, बाबा! बताती हूं। आप ने जैसे बताया था उस से भी बेहतर हुआ। सुबह दोनों बाबू हवाई जहाज से आए तो उन्हें कॉलेज में तुरन्त जाना पड़ा और हमारी तयारी कि भनक तक नहीं लगी। शाम को दोनों थक कर लौटे…
नहीं! इतने भी थके नहीं थे!!…
हां। तो जैसे आप ने बताया था वैसे तयारी कर के मैं छुप गई और दोनों को नहाने भेजा। उन्हें पता था कि आगे क्या होगा पर ये नहीं कि कैसे। हां दोनों ने मुझे आधा आधा दूध पिलाया।… आप तो शराब में नहाकर आए थे!! डर के मारे मैंने खाना नहीं खाया था और दूध रात में मैंने पी लिया था।… हां… गोलियां देख कर दोनों की आंखे चमक उठी।…
बड़ी मुश्किल से उठी हूं। दोनों बाबू मुझे झड़ा कर अदला बदली कर लेते। इस से मुझ बेचारी को न जाने कब तक…
हां…
चलने में तकलीफ हो रही है। अंदर से जैसे कोई नदी बह रही थी!!…
हां!! बहुत ज्यादा मजा आया!!… उफ्फ…
आप सच में खुश हो?…
मेरे इकलौते दोस्त हो आप!! मैं आप को नहीं खो सकती!…
ठीक है। अब दोनों के लिए नाश्ता बनाकर उन्हें उठाऊंगी।…
नहीं। कल बाबुओं को कॉलेज जाना है। हम कल शाम को बात करें?… ठीक है। मैं उन्हें बता दूंगी। अपना खयाल रखना… "
लक्ष्मी आंटी ने फोन रखा और किचन से चाय का ट्रे लेकर आई। हम दोनों को हॉल में बैठा देख शर्माकर मुस्कुराते हुए बोली,
"प्रतीक जी आप दोनों को बधाई दे रहे थे और उन्होंने कहा कि आप दोनों पर उन्हें भरोसा है। चलो अब मुंह धो कर जल्दी आ जाओ। नाश्ता अभी लग जायेगा।"
लक्ष्मी आंटी को पता भी नहीं था कि उसके रूप का हम पर क्या असर हो रहा था। हम दोनों ने अपने पैरों को खींच कर बाथरूम में गए। मुंह धोकर बाहर आते हुए मेरी नजर किचन में गई तो वहां एक बिस्तर लगा हुआ था।
"लक्ष्मी आंटी, ये बिस्तर किस के लिए बिछाया है?"
लक्ष्मी आंटी ने हमें नाश्ता परोसते हुए कहा, "वो मेरा बिस्तर है। प्रतीक जी ने जाने से पहले कुछ बातें बताई थी और उसमें से एक बात यह है। भले हम अपने आप को कितना ही छुपा लें पर घर में कोई न कोई आयेगा ही। अगर मेरा बिस्तर अलग लगा दिखे तो शक हो सकता है पर सबूत नहीं मिलता। समझते हो ना बात को।
"
मैंने और सन्नी ने सर हिलाकर हां कहा और मन ही मन प्रतीक को हम सब के बारे में इतना सोचने के लिए धन्यवाद करने लगे। लक्ष्मी आंटी को हम ने अपने साथ नाश्ता करने पर मजबूर किया और उसे अपने हाथों से खिलाया। हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को पकड़कर चोदने की कोशिश की पर लक्ष्मी आंटी ने हमें रोक दिया।
लक्ष्मी आंटी ने कहा, "बाबू आप दोनों को आज कि छुट्टी अपनी माशूका के बाहों में सोने के लिए नहीं मिली। चलो नहा धो कर खरीददारी करने निकलो। किताबें ख़तम हो गई तो लक्ष्मी आंटी से सजा मिलेगी!! समझे?"
सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को चिढ़ाते हुए पूछा, "लक्ष्मी आंटी तुम हमें पिटोगी? हमारे खुले पिछवाड़े पर पट्टी से मारोगी? या 2 दिन सुखी रोटी और पानी पर रखोगी?"
लक्ष्मी आंटी ने शर्माते हुए अपनी दो उंगलियों को फैलाया और कहा, "जब तक आप दोनों की सारी किताबें न मिलें…" लक्ष्मी आंटी ने अपनी दोनों उंगलियों को एक दूसरे पर चढ़ा दिया।
"हाय रे जालिम!! ये कैसी सजा हैं!! पहले अफीम चखा दी और अब ऐसी कीमत मांगते हो!!"
लक्ष्मी आंटी ने हंसते हुए अपनी उंगली मेरे नाक पर लगाकर कहा, "विक्की बाबू नौटंकी कोई आप से सीखे!! चलो निकलो!! और हां घर में कुछ चीजें चाहिए उन्हें भी लाइए, नहीं तो हफ़्ते भर सिर्फ दाल चावल पर गुजारा करना पड़ेगा।"
पापा की शादी, औरत और आटे दाल की बात अचानक मेरे दिमाग में घूम गई और मैं नहाने चला गया। सन्नी अब भी लक्ष्मी आंटी को छेड़ते हुए उसे हंसा रहा था।
36
सन्नी
हम दोनों ने नहा कर कपड़े पहन लिए तो लक्ष्मी आंटी भी नहाने चली गई। विक्की ने लक्ष्मी आंटी से कहा कि हम दोनों कुछ देर नीचे हो आते हैं। हम दोनों कॉलेज के पास बने बुक स्टोर पहुंचे और वहां से हमारी सारी किताबें खरीद ली।
विक्की ने पवन पापा को फोन करके कॉलेज के बारे में बताया और खरीददारी कैसे करते हैं उसके बारे में पूछा। अकेले रहने का हमें कोई तजुर्बा नहीं था। पवन पापा ने लक्ष्मी आंटी की मदद लेने की सलाह दी तो मैं ने कहा तीन लोग शहर में पैदल ज्यादा नहीं घूम सकते। बस तो काफी थीं पर कुछ समझ नहीं आ रहा था। पापा ने हंसते हुए कहा कि बड़ा होने का मतलब है हालात के साथ बदलना। वैसे मम्मियों ने कुछ करने का प्लान बनाया है पर इसके बारे में वह कुछ बता नहीं सकते।
किताबें ले कर हम घर पहुंचे तो वहां लक्ष्मी आंटी ने साफ सफाई कर ली थी और हमारा बेड ठीक कर रही थी। लक्ष्मी आंटी ने हमें देख कर कहा,
"बाबू इतनी जल्दी किताबें खरीद ली? अगर पता होता तो मैं घर के सामान की पर्ची देती। दुबारा जाना नहीं पड़ता "
विक्की ने कहा, "लक्ष्मी आंटी, हमने किताबों की दुकान कल कॉलेज से आते हुए देख ली थी पर बाकी खरीददारी के लिए मदद की जरूरत पड़ेगी। हम बाकी खरीददारी के लिए मॉल जा रहे हैं। आओगी हमारे साथ?"
लक्ष्मी आंटी की आंखे चमक उठी।
उसने कहा,
"मॉल में मैं कभी गई नहीं। सुना है वहां सब महंगा होता है और कई चीजें एक साथ मिलती हैं। क्या मुझे आने देंगे? मैं कोई मेमसहाब नहीं।"
मैंने हंसकर कहा कि हम दोनों के होते हुए उसे कोई नहीं रोक सकता। लक्ष्मी आंटी ने दौड़ते हुए अपने बाल बनाए और अपने अच्छे कपडे पहन कर बाहर आ गई। हम ने बाहर से रिक्शा कर ली और मॉल पहुंचे। मॉल कि चमक देख लक्ष्मी आंटी का चेहरा खिल उठा। मॉल के अंदर जाने पर वहां के स्टॉल और दुकानों में मेकअप से बनठन कर खूबसूरत लड़कियां समान बेचती लक्ष्मी आंटी को दिखी।
लक्ष्मी आंटी की खूबसूरती किसी पाउडर या लिपस्टिक की मोहताज नहीं थी पर उसके कपड़े काफी पुराने और सस्ते थे। बस्ती में लोगों की नजरों से छुपने के लिए बने कपड़े यहां उसे बुरा महसूस करा रहे थे। हम सब एक बड़े स्टोर में गए जहां काफी समान किफायती दाम पर रखा था। लक्ष्मी आंटी बाकी सब को देखते हुए हमारे पीछे पीछे चल रही थी। मैं जानबूझकर लक्ष्मी आंटी को स्टोर के हर कोने में घूमाने लगा। लक्ष्मी आंटी ने अब यहां से भागने का मन बना लिया था और उसन जल्दी से हमारा पर्ची में रखा सामान भर लिया। अपने कपड़ों से संकोच में लक्ष्मी आंटी को विक्की का खयाल नहीं रहा और उसने मेरे साथ सामान भर लिया। जब हम पैसे देने की कतार में खड़े हो गए तो लक्ष्मी आंटी सामान के ढेर को देख कर चौंक गई।
लक्ष्मी आंटी ने कहा, "हे भगवान, मैंने इतना सामान भर लिया? बाबू इस में से कम कर देंगे तो चलेगा।"
मैंने लक्ष्मी आंटी को कतार से बाहर निकाल कर कहा कि विक्की बिल चुका देगा तब तक हम कुछ और करते हैं। विक्की ने आंख मारी और हां कहा।
लक्ष्मी आंटी ने बाहर आ कर भी सामान कम करने की बात की तो मैंने कहा कि अब हम अपना घर बना रहे हैं तो पहली खरीददारी बड़ी होनी है। अगली बार कम सामान लगेगा। लक्ष्मी आंटी ने माना कि यह बात सही थी और उसने अपनी नजर घुमाई। वहां तकरीबन खाली पड़े दुकान को लक्ष्मी आंटी किसी खजाने की तरह देख रही थी। मैं लक्ष्मी आंटी को अंदर ले गया तो उसने शर्माकर बाहर भागने की कोशिश की।
पूरे दुकान में किताबों के ढेर लगे थे। कहीं बच्चों की किताबें थीं, तो कहीं आत्मकथा और कहीं और स्कूल की किताबें। कॉपियां और पेन के अलग अलग ढेर और गुच्छे थे। लक्ष्मी आंटी ने किसी जेवर की तरह उन पर अपनी उंगली घुमाई। मैंने पीछे से लक्ष्मी आंटी के कान में कहा,
"लक्ष्मी आंटी, अब तुम्हारी की तनख़ा बढ़ गई है और तुम जो चाहो खरीद सकती हो। मैं जानता हूं कि तुम अपनी पढ़ाई अपने दम पर करना चाहती हो। तुम जो खरीद लोगी उसके पैसे तुम्हारी तनख़ा से काट लेंगे।
लक्ष्मी आंटी ने खुश होकर दौड़ना शुरू किया। उसने अलग अलग तरह की कॉपियां और पेन लिए।
लक्ष्मी आंटी ने कुछ 10 वी कक्षा की किताबें खरीद ली और साथ में इंग्लिश सीखने की किताब भी ली। मैंने लक्ष्मी आंटी के हाथ में भारी वजन को देखा पर लक्ष्मी आंटी को उस का कोई ग़म नहीं था।
विक्की दुकान के बाहर से ही लक्ष्मी आंटी को देख रहा था और हमारे बाहर आते ही लक्ष्मी आंटी को चिढ़ाने लगा।
लक्ष्मी आंटी अपने कपड़ों के बारे में पूरा भूल गई। उस वक़्त अगर कोई हमें देखता तो उसे बस कॉलेज के 3 दोस्त दिखते। हम दोनों लक्ष्मी आंटी को होटल में ले गए और लक्ष्मी आंटी को मुंबई कि पाव भाजी खिलाई। लक्ष्मी आंटी तो सातवे आसमान में उड़ रही थी कि उसका दिन ऐसे बिता। पेट भरने के बाद जब हम ने बिल चुकाया तो कीमत देख लक्ष्मी आंटी चौंक गई।
लक्ष्मी आंटी बोल पड़ी, "बाबू, इतने में तो मैं आप दोनों को 3दिन ये सब्जी बना कर खिलाऊं!!"
विक्की ने लक्ष्मी आंटी को हंसकर कंधे से धक्का देते हुए कहा, "लेकिन थकने के बाद अच्छा खाना तुरन्त मिलने की भी कीमत होती है ना?"
लक्ष्मी आंटी ने सोच कर हां कहा और हम सब ने रिक्शा कर घर लौट आए। लक्ष्मी आंटी ने हमारी भरी हुई थैलियां घर में जा कर खोली। पहले उसने बड़े प्यार से अपनी किताबें हमारे पढ़ाई के समान के साथ में रख दी। बाकी सामान ले कर लक्ष्मी आंटी किचन में गई। हम दोनों हॉल में बैठ कर घड़ी देखने लगे।
लक्ष्मी आंटी ने किचन में से कहा, "बाबू, अब जब सारा सामान आ गया है तो मै आप दोनों को परेशान नहीं करूंगी। ताजी सब्जियां मै यहीं से खरीद लूंगी पर कोई सब्ज़ी पसंद ना हो तो मुझे अभी… आ!!!"
लक्ष्मी आंटी ने थैला बाहर लाते हुए कहा, "बाबू उन्होंने आप के थैले में किसी और का सामान भर दिया है। हमें इसे लौटकर पैसे वापस लेने होंगे!"
"तो तुम्हें ये कपड़े पसंद नहीं आए? कुछ ज्यादा ही बड़े हैं पर सोचा शहरी लड़कियों के छोटे कपडे तुम्हे पसंद नहीं आयेंगे।"
लक्ष्मी आंटी वहीं जमीन पर थैला ले कर बैठ गई। उसने एक एक कपड़ा बाहर निकलते हुए उसे छुआ।
लाल और सफेद टॉप के साथ पहनने के लिए हरी लेगिंग्स थी। अनेक रंगों के डिजाइन से बनी नीली सलवार कमीज़ कि जोड़ी थी। इन कपड़ों के नीचे एक गुलाबी शर्ट और सफेद लेडीज पतलून थी। पतलून के साथ satin में बना पट्टा निकल आया। यह गुलाबी satin में बना camisole और boy-shorts थे।
लक्ष्मी आंटी ने हमारी ओर देखा तो मैंने कहा, "घर में पहनने के लिए दूसरी जोड़ी भी होनी चाहिए। नीचे देखो, कुछ और भी होगा।"
लक्ष्मी आंटी के हाथ एक पैकेट लगा जिस में कॉम्पैक्ट पाउडर, कुछ लिपस्टिक और सिंदूर कि एक डिब्बी थी। लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को गले लगाया और कहा कि वह हमारा शुक्रिया कैसे अदा करे।
"लक्ष्मी आंटी क्यों न तुम ये कपड़े पहन कर देखो? इन कपड़ों के नाप बड़ी मुश्किल से लिए थे।
"
लक्ष्मी आंटी थैला बेडरूम में ले गई और एक एक ड्रेस कि नुमाईश हमारे लिए करने लगी। गुलाबी शर्ट और सफेद लेडीज पैंट पहन कर लक्ष्मी आंटी किसी बड़ी कंपनी की अफसर लग रही थी पर उसे इन कपड़ों की आदत नहीं थी और उसने सुडौल पैरों को हाथों से छिपा रही थी।
शिकायत के स्वर में लक्ष्मी आंटी बोली, "बाबू ये किस काम आयेगा?"
विक्की ने गूढ़ अर्थ से कहा, "हर चीज का वक़्त होता है।"
लक्ष्मी आंटी समझ गई कि उसे जवाब आसानी से नहीं मिलेगा और आखरी जोड़ी पहनने के लिए अंदर चली गई।
37
विक्की
लक्ष्मी आंटी को बाहर आने में कुछ ज्यादा समय लगा पर इंतजार करना बिल्कुल ठीक था। लक्ष्मी आंटी ने दरवाजा खोल कर अपना पैर हॉल में रखा और मेरी नजर उसकी खुली टांग पर से उठती हुई satin में रंगी हुई उसकी जांघ पर अटकी। दो पैरों के बीच में शॉर्ट्स जहां जुड़कर जवानी का खजाना छुपाते हैं वहां camisole का किनारा हमें ललचा रहा था। Camisole का कपड़ा लक्ष्मी आंटी के पेट की झलक हर सांस के साथ दिखाते हुए लक्ष्मी आंटी के भरे स्तन को उजागर कर रहा था। Camisole का गला और पीठ गहरी थी और लक्ष्मी आंटी के गोलों की उपरी गोलाई पतली पट्टी से छुप नहीं रही थी।
अपने शरीर से हमारी हालत बिगड़ती देख लक्ष्मी आंटी ने कहा, "बाबू मेरा एक छोटा सा काम करोगे?"
ना तो हम बोल नहीं सकते थे तो हमने सर हिलाकर हां कर दी। लक्ष्मी आंटी ने हमारे सामने घुटनों पर बैठ कर कहा,
"बाबू प्रतीक जी के नाम से मेरी मांग भर दीजिए।"
मेरे लौड़े में मानो कोई बम फट गया। मेरी पैंट तन कर मुझे दर्द होने लगा। मैंने बड़ी मुश्किल से लक्ष्मी आंटी की मांग में प्रतीक का नाम लेते हुए सिंदूर भरा। लक्ष्मी आंटी ने अपना मोर्चा सन्नी कि ओर मोड़ते हुए उस से पूछा,
"सन्नी बाबू, इन कपड़ों में मेरा मंगलसूत्र ठीक लग रहा है ना?"
Camisole की पट्टियां लक्ष्मी आंटी के कंधों पर थीं और लक्ष्मी आंटी के गले में बंधे मंगलसूत्र को किसी फ्रेम कि तरह उजागर कर रही थी। लक्ष्मी आंटी का मंगलसूत्र उसके दूधिया गोलों के बीच झूलता हुआ उन्हें छेड कर हमें तड़पा रहा था। मुझसे और रहा नहीं गया। मैंने लक्ष्मी आंटी को अपने कंधे पर रखा और उसे उठाकर बेडरूम में ले गया।
"विक्की बाबू!!", लक्ष्मी आंटी हंसते हुए उत्तेजना से चीख पड़ी।
लक्ष्मी आंटी को बेड पर मैंने फेंका तो लक्ष्मी आंटी ने भागने की कोशिश की। सन्नी लक्ष्मी आंटी पर झपटा और लक्ष्मी आंटी के कंधों पर से camisole के पट्टे नीचे उतारे। लक्ष्मी आंटी की लाल बेरियां खुल गईं और सन्नी उन्हें दबाकर चूसने लगा। मैंने लक्ष्मी आंटी के boy-shorts उतारे तो देखा कि लक्ष्मी आंटी के कामरस से उसकी पैंटी भीग गई है।
"ये तो ना इंसाफी हुई लक्ष्मी आंटी। उपर से सीधा रस्ता था और नीचे दरवाजा अब भी बाकी है।
"
लक्ष्मी आंटी ने मुझे पैर मार कर हटाने की झूठी कोशिश करते हुए कहा, "अगर उपर ब्रा पहनती तो उसके पट्टे नजर आते इसलिए नहीं पहनी थी।"
मैं लक्ष्मी आंटी के पैरों को फैला कर उठते हुए अपना मुंह लक्ष्मी आंटी के खजाने तक ले गया। लक्ष्मी आंटी मेरा इरादा भांप कर चीखने लगी तो सन्नी ने उसका मुंह दबा दिया। मैंने लक्ष्मी आंटी की पैंटी को दातों में पकड़ा और उसे उठाकर उतारने लगा। पैंटी के घुटनों में पहुंचने पर मेरा मकसद पूरा हो गया। मैंने लक्ष्मी आंटी की पैंटी के अन्दर सर डालकर उसकी काम अग्नि की ज्वाला को अपनी जीभ से भड़काया। लक्ष्मी आंटी ने अपना सर हिलाकर अपनी उत्तेजना पर से काबू छोड़ दिया। लक्ष्मी आंटी के पैरों में मेरा सर पकड़ कर लक्ष्मी आंटी ने अपने घुटने मोड़ दिए। मेरा शरीर बेड पर दब गया और लक्ष्मी आंटी ने मेरी पीठ पर जोर देते हुए अपनी बहती योनी को मेरे मुंह पर लगा दिया। लक्ष्मी आंटी ने अपना बदन कांपते हुए मेरी जीभ पर रसों की बाढ बहा दी और बेड पर लेट गई।
मैं इतना तप चुका था कि सन्नी को इंतजार करना पड़ा। मैंने लक्ष्मी आंटी की पैंटी उतार फैंकी और लक्ष्मी आंटी पर लेट गया। लक्ष्मी आंटी को सन्नी चूम रहा था तो मैंने लक्ष्मी आंटी के गरदन को जोर से चूमते हुए उसकी भट्टी में अपना लोहा डाल दिया।
मुझ में मानो कोई जानवर जग गया था जिसके इशारों पर मैं लक्ष्मी आंटी को नहीं बल्कि अपनी मादा को चोद रहा था। मैंने लक्ष्मी आंटी के कंधे पकड़ लिए और अपने लौड़े को खुली छूट दी। मेरे तेज धक्के लक्ष्मी आंटी को पूरा हिला रहे थे। मैं जल्द ही लक्ष्मी आंटी की चूत में अपना पानी छोड़ कर गिर गया।
"Sorry लक्ष्मी आंटी। मैं ज्यादा देर टिक नहीं पाया।"
लक्ष्मी आंटी ने मेरे बालों में हाथ फेरा और कहा, "मुझे बहुत मजा आया और मुझे नहीं लगता कि इतने पर आप मुझे सोने दोगे।"
मैं लक्ष्मी आंटी के होंठ चूमकर बगल में लेट गया और सन्नी ने मेरी जगह ले ली। सन्नी तयार था पर मेरी गलती से सीख कर उसने लक्ष्मी आंटी को धीरे धीरे चोदना शुरू किया। लक्ष्मी आंटी जल्द ही जल बिन मछली की तरह तड़पते हुए सन्नी को अपने गले लगाकर रोते हुए झड़ने लगी।
लक्ष्मी आंटी ने सन्नी को अपनी बाहों और टांगों से अपने अंदर खींचते हुए कहा, "सन्नी बाबू! अपनी लक्ष्मी आंटी पर रहम करो! फट रही हूं मैं! अपना पानी छोड़ो! भर दो मुझे अपने प्यार से। मेरी कोख भर दो सन्नी बाबू!!"
इतने प्यार से कि गई मिन्नत को सन्नी मना कैसे करता? सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के गले के दूसरी तरफ जोर से चूमते हुए अपने रस की धारा लक्ष्मी आंटी की नदी में बहा दी। सन्नी लक्ष्मी आंटी पर लेटा रहा और लक्ष्मी आंटी छत को देखती गहरी सांसे लेती रही।
लक्ष्मी आंटी ने कहा, "पता नहीं कि पिछले जनम में मैंने ऐसा क्या किया था कि मैं आप दोनों की प्रेमिका बनी। पाप तो नहीं होगा पर उफ्फ…"
हम सब एक दूसरे की बाहों में लेटे रहे और फिर लक्ष्मी आंटी उठ गई। हमारी कुश्ती में उड़ी हुई लक्ष्मी आंटी की पैंटी उसे नहीं मिल रही थी। मैंने लक्ष्मी आंटी से कहा कि वह satin के नीचे पैंटी ना पहने और वह पैंटी वैसे भी गीली हो गई थी तो सुबह उसे ढूंढ लेना। लक्ष्मी आंटी को दूसरा रास्ता नहीं मिला और वह मान गई।
रात को हम ने दुबारा जिद करके पिज़्ज़ा मंगवाया। यह नहीं चीज लक्ष्मी आंटी ने बड़े चाव से खाते हुए हम दोनों से पढ़ाई के लिए मदद मांगी। हम दोनों मान गए और लक्ष्मी आंटी को 10वी कक्षा का अभ्यास कराते हुए काफी बातें की। रात के 9 बजे लक्ष्मी आंटी ने हमें बेडरूम में भेजा क्योंकि कल कॉलेज में सुबह 8 बजे हाजिर होना था।
लक्ष्मी आंटी ने किचन में अपना बिस्तर लगाया और बेडरूम में आ गई। पेट की भूख मिट चुकी थी और वासना की आग पहले भड़क कर अब अंगारों की तरह हलके से हमें सेंक रही थी। लक्ष्मी आंटी को हम दोनों ने अपनी बाहों में भर लिया और उसके दोनों छेद हमारे लौड़ों से भर दिए। धीरे धीरे चोदना औरत को कैसे पागल कर देता है यह बात हम दोनों ने सीखी। लक्ष्मी आंटी के पागल पन के मज़े ले लेकर हम दोनों झड़ कर सो गए।
सुबह 6 बजे लक्ष्मी आंटी उठ गई तो हम दोनों भी कॉलेज के लिए तयार होने उठ गए। हमें जल्दी होगी जान कर लक्ष्मी आंटी ने हमें नहाने और तयार होने हो कहा। जब तक हम दोनों तयार हो गए लक्ष्मी आंटी ने हमारे लिए नाश्ता बनाया और दोपहर के खाने में क्या चाहिए पूछा। हम ने लक्ष्मी आंटी को छेड़ने की कोशिश की तो उसने नाश्ता पहले खत्म करने को कहा। नाश्ता 4 मिनट में हम ने खा लिया और अब लक्ष्मी आंटी पर लपके।
हॉल में लक्ष्मी आंटी को मेज पर लिटाकर सन्नी ने उसकी boy-shorts को उतारा। लक्ष्मी आंटी ने कुछ कहने के लिए मुंह खोला तो मैंने उसे अपना लौड़ा खिला दिया। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के पैर उठाकर लक्ष्मी आंटी की गांड़ में अपना भाला पूरा भर दिया। सन्नी के हर धक्के से लक्ष्मी आंटी मेरा लौड़ा निगल लेती और सांस लेने जब नीचे सरकती तब अपनी गांड़ को सन्नी के लौड़े पर दबाती। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के पैरों को अपने कंधे पर रखा और आगे बढ़कर लक्ष्मी आंटी की कमर पकड़ कर पेलने लगा। लक्ष्मी आंटी को चूधाई का नशा चढ़ गया और उसने मेरे लौड़े को जोर से चूसते हुए अपने मम्में दबाने लगी। सन्नी ने अच्छे से पेल कर लक्ष्मी आंटी की गांड़ में अपना रस छोड़ दिया। मैंने लक्ष्मी आंटी को पलटा और उसकी कमर उठाई। लक्ष्मी आंटी की थूक से गीला लौड़ा लक्ष्मी आंटी की गांड़ को फैलाते हुए उसके अंदर सन्नी का वीर्य फेंटने लगा।
मैंने लक्ष्मी आंटी की चूचियां दबाते हुए उसे तेज धक्के से चोद दिया। सन्नी के साथ हुई चुसाई के कारण मैं लक्ष्मी आंटी को ज्यादा चोदे बिना झड गया और उसके बदन पर लेट गया।
लक्ष्मी आंटी ने कहा, "अगर रोज सुबह ऐसे ही जाना तय कर लिया है तो रोज जल्दी सोना पड़ेगा।"
हम दोनों ने हंसकर अपने कपड़े ठीक किए और लक्ष्मी आंटी को आखरी बार चूम कर कॉलेज के लिए निकले। रास्ते में मैंने सन्नी से कहा कि हमें लक्ष्मी आंटी को प्यार से चोदना चाहिए। हम दोनों ने कल जो किया उस से आज सुबह लक्ष्मी आंटी के गले पर लाल नीले निशान बन गए थे। सन्नी ने सोचते हुए कहा कि शायद हमें दाग के बारे में लक्ष्मी आंटी को बताना चाहिए पर देर हो रही थी और हम ने शाम को लक्ष्मी आंटी को बताने का तय किया।
38
लक्ष्मी आंटी ने अपनी boy-shorts पहनकर लड़खड़ाते कदमों से हॉल को फिर से साफ करते हुए खुद से कहा, "कल सुबह उठते ही मैं दोनों से अपनी गांड़ मरवा लूंगी। कम से कम दो बार सफाई नहीं करनी पड़ेगी।"
अचानक अपनी बातों का मतलब समझ कर लक्ष्मी आंटी हंसने लगी कि तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। कचरा बाहर रखा था पर शायद कोई बाबू को शैतानी सूझी हो। ये सोच कर लक्ष्मी आंटी ने हंसते हुए एक हाथ से अपने बाल पीछे करते हुए दरवाजा खोला।
"Surprise!!!"
लक्ष्मी आंटी का चेहरा डर से बर्फ हो गया और उसने दरवाजे को पकड़ कर अपने आप को संभाला। दोनों मम्मियां लक्ष्मी आंटी को आंखें फ़ाड़ कर देख रही थी। लक्ष्मी आंटी ने हिम्मत जुटाकर दरवाजा खोला और उन्हें हाथ से अंदर बुलाया। श्वेता और समीरा सिर्फ सहेलियां नहीं बिजनेस पार्टनर्स भी थीं और बिना बोले सब समझने और समझाने की ताकत रखती थी।
श्वेता ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा, "लगता है कि हमें आने में देर हो गई है।"
समीरा की आंखों में कुछ ऐसे भाव थे मानो किसी शेरनी ने दूसरी शेरनी के मुंह में अपना बच्चा देख लिया हो। सर्द स्वर में समीरा बोली, "हां बहुत ज्यादा देर हो गई है। बच्चे कॉलेज गए हैं?"
समीरा ने जहरीला सवाल पूछते हुए अपनी गरदन पर हाथ फेरा। लक्ष्मी आंटी ने झट से कहा,
"हां, दोनों बाबुओं को परसों ही कॉलेज बुला लिया गया था और आज 8 बजे क्लास शुरू होना था। दोनों बाबू आप के आने से 10 मिनट पहले ही चले गए। आप बैठिए, मैं आप के लिए कुछ लाती हूं।"
लक्ष्मी किचन में जाने के लिए मुड़ी और श्वेता ने चौंक कर समीरा की ओर देखा। समीरा लक्ष्मी आंटी के पीछे से इशारा कर हाथ पैर धोने गई। श्वेता भी हाथ पैर धोकर घर देखने लगी। लक्ष्मी आंटी डर कर किचन में नाश्ता बनाने के बहाने से छुप गई। समीरा ने किचन में चक्कर लगाते हुए सब देख लिया और हॉल के श्वेता के बगल में बैठ गई।श्वेता ने अपना सर सोफे पर रख कर छत को अनदेखी आंखों से ताक रही थी।
समीरा गुस्से से लाल हो कर फुसफुसाई, "4 दिन हो गए उसे यहां आए अब तक किचन ठीक से लगा नहीं है। नाश्ता इतना ही बनाया था कि ख़तम हो गया और धोने के लिए 2 प्लेट्स ही है। चाय भी अब बना रही है। बच्चों के साथ अगर ऐसा होता है तो हमें कुछ करना पड़ेगा!"
श्वेता ने सर को ठंडा रखते हुए कहा, "समीरा जरा अपनी बात सुन। ऐसे लगता है कि कोई सास अपनी बहू का घर देख रही है। यहां आने से पहले अश्वेत ने कहा था कि चाहे जो हो जाए मैं हर बात समझने की कोशिश करूं। उसे कुछ तो खबर थी।"
समीरा ने शांत होते हुए कहा, "कम से कम लक्ष्मी का बिस्तर किचन में है। शायद अब भी देर नहीं हुई। जब समीर ने मुझे ठंडा दिमाग रखने को कहा मैं नहीं जानती थी कि ऐसा कुछ होगा। लक्ष्मी हमारे बच्चों को ऐसे कपड़े पहन कर ललचा रही है। उसे जल्दी नहीं रोका तो हमारे बच्चे…"
श्वेता ने समीरा की बात काटते हुए कहा, "बच्चे नहीं रहे!! बेडरूम में ड्रेसर के नीचे मुझे इस्तमाल कि हुई पैंटी मिली। इस घर में पैंटी सिर्फ 1 व्यक्ति इस्तमाल करती है। जरा गहरी सांस लेकर देख। हम अगर आधे घंटे पहले आते तो कुछ और देख रहे होते।"
समीरा ने अपना सर हाथ में रख कर कहा, "नहीं! ऐसा नहीं हो सकता! वो बच्चें है! नहीं! मैं ऐसा होने नहीं दूंगी। हम लक्ष्मी को निकाल देंगे! नहीं तो उसे वापस अपने यहां बुला लेंगे। उसे ज्यादा तनख़ा देकर किसी और के घर भेज देंगे।"
श्वेता ने सिर्फ समीरा की ओर देखा और चुप रही। समीरा ने अपनी सहेली की आंखों में देखा और समझ गई। समीर और अश्वेत इस बात के बारे में जानते थे और उन्होंने ऐसा इंतजाम किया था कि बच्चों को महफूज रखते हुए उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का एहसास हो।
लक्ष्मी आंटी नाश्ता ले कर आ गई तो दोनों मम्मियों की आंखों में आंसू भर आए थे। श्वेता ने चुपके से पूछा, "क्यों?"
लक्ष्मी आंटी किसी मां को यह नहीं बता सकती थी कि उसके बेटे ने लक्ष्मी की इज्जत लूटी थी पर राज़ खुल गया है इस बात में कोई शक नहीं था। लक्ष्मी आंटी ने हिचकिचाते हुए अपने बचपन और शादी की कहानी बताई। चोरी पकड़ी जाने पर उसने farmhouse में काम कर के पैसे लौटाने का ठान लिया। Farmhouse में बात से बात बढ़ी और सब अपना आपा खो बैठे। वापस लौटने पर प्रतीक को नौकरी लग गई और उसने अपनी सच्चाई बताते हुए विक्की और सन्नी को लक्ष्मी का ख्याल रखने को कहा।
समीरा समझ गई कि न केवल पूरी सच्चाई उसे समीर से निकालनी होगी बल्कि लक्ष्मी दोनों बच्चों को बचाते हुए उसे बता रही थी कि वह पप्पू के लौटने तक ही बच्चों के साथ रहेगी। समीरा और श्वेता ने नाश्ता किया और लक्ष्मी से कहा कि वह दोपहर के खाने के वक़्त बच्चों से मिलने आयेंगी। दोनों मम्मियां घर से निकल कर अपने होटल गई जहां से उन्होंने समीर और अश्वेत को फोन किया।
सच्चाई जान लेने के बाद दोनों ने बैठ कर काफी देर तक बातें की और बच्चों से मिलने गई।
सन्नी और विक्की खुशी में मदहोश दोपहर को घर खाना खाने गए। दोनों ने तय किया था कि लक्ष्मी आंटी की अगाडी और पिछाडी कौन बजाएगा। बिल्डिंग के नीचे सन्नी कुछ देख कर रुक गया। विक्की ने सन्नी को देखा और उसकी नजर का पीछा किया। वहां सन्नी कि गाड़ी खड़ी थी।
दोनों ने धीरे से दरवाजे पर दस्तक दी तो समीरा ने अंदर बुलाया। मम्मियों के इस सरप्राईज से खुश पर राज खुलने के डर से सेहमे लड़कों ने मम्मियों के गले लगते हुए नजरों से लक्ष्मी आंटी को ढूंढा। लक्ष्मी आंटी ने नया नीला सलवार सूट पहना था और काफी खुश लग रही थी। लक्ष्मी आंटी बाद में खाना खाने वाली थी पर श्वेता मम्मी ने जिद की और सब ने मिलकर खाना खाया। कॉलेज की बातें हुई तो पता चला कि आज कई लोग अपने घरवालों के साथ आए थे।
खाने का समय ख़तम हो रहा था तो मम्मियों ने दोनों के साथ कॉलेज देखने की जिद की। घर से बाहर जाने के बाद मम्मियों ने अपने बेटों को पकड़ा और धीमी आवाज में खूब खरी खोटी सुनाई। अच्छी तरह डांटने और धमकाने के बाद उन्होंने दोनों को लक्ष्मी आंटी का खयाल रखने की सलाह दी और दो बिजनेस कार्ड दिए।
दोनों लड़कों की क्लास शुरू हो गई और मम्मियां अपने पतियों को सच छुपाने की सजा देने के लिए चली गई।
39
सन्नी
शाम को 6 बजे हम दोनों घर लौटे तो मैंने देखा लक्ष्मी आंटी उदास बैठी थी। हमारी ओर देखते ही उस ने कहा,
"बाबू, मैंने उन्हें नहीं बताया पर मै दोनों मेमसाहब से झूठ नहीं बोल पाई। आप मुझे वापस भेज देंगे?"
"लक्ष्मी आंटी, गलती हमारी है। तुम्हारे गले पर चूमते हुए हमने निशान बना दिए और अब मम्मियों को पता चल गया है। दोनों पापा पहले से ही सब समझ चुके थे और इसीलिए उन्होंने तुम्हारे यहां आने का इंतजाम किया। लक्ष्मी आंटी, डरो मत। अब हमें अपने घरवालों से छुपने छुपाने की जरूरत नहीं है। तुम हमारी हो और हम दोनों तुम्हारे।"
लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को देख कर मुस्कुराते हुए हमें गले लगाया और फ्रेश होने को कहा। हमारे बाहर आते ही लक्ष्मी आंटी ने चाय बिस्किट लाए थे। उन्हें खाने के बाद लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को कम से कम दो घंटे पढ़ाई करने का हुकुम सुनाया।
विक्की ने लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में खींच कर कहा,
"अब भी थोड़ी भूख बाकी है। सुबह से भूकों को रात तक यूं ही छोड़ोगी!"
लक्ष्मी आंटी ने कहा,
"छोड़ो विक्की बाबू! आप दोनों की भुक तो कभी नहीं मिटती। अभी खाना परोसा तो भी सुबह तक खाते रहोगे।"
"बात तो सच है लक्ष्मी आंटी। पर जरा सोचो अगर खाना इतना लजीज हो तो पेट कैसे भरे।"
हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को एक साथ खड़े खड़े बाहों में पकड़ कर उसे चूमने लगे।
लक्ष्मी आंटी ने विरोध करते हुए हमें काफी डांटा और हमारे कपड़े उतार फेंके। फर्श पर मेरे शर्ट और विक्की कि पैंट के बीच लक्ष्मी आंटी का satin gown पड़ा था। लक्ष्मी आंटी ने घुटनों पर बैठते हुए हम दोनों के कड़े लौड़ों को चूसकर गीला कर दिया।
लक्ष्मी आंटी ने अपनी दहिने हाथ की दो उंगलियां दिखाते हुए हमें चुनने को कहा। मैंने बीच वाली उंगली पकड़ी तो विक्की ने पहली उंगली पकड़ी।
लक्ष्मी आंटी ने कहा, "सन्नी बाबू, पकड़ो मुझे।"
लक्ष्मी आंटी ने मेरे गले में अपनी बाहों से पकड़ लिया और मैंने उसे अपने बाहों में लिया। लक्ष्मी आंटी ने कुदकर अपने पैरों से मेरी कमर पकड़ ली। मेरा लौड़ा लक्ष्मी आंटी की गीली गरमी को रगड़ रहा था। लक्ष्मी आंटी ने अपनी कमर उठकर कुछ बार अपनी चूत को मेरे लौड़े की लंबाई पर घुमाया। मुझसे और रहा नहीं गया और मैंने लक्ष्मी आंटी के अगले उठने पर अपने भाले को सीधा कर दिया।
"आह… मां… उन्मम…", के साथ लक्ष्मी आंटी ने अपनी गरमी में मुझे अपनाया।
मैंने लक्ष्मी आंटी को उठकर चोदते हुए विक्की को देखा। विक्की बेडरूम में से lubricant jel को अपने लौड़े पर लगाते हुए लक्ष्मी आंटी के पीछे आ गया। लक्ष्मी आंटी की अगली उठा पटख पर विक्की पीछे से तैयार था।
"आह… हा… हा… अनहह… विक्की बाबू… मैं आप… आह… का इंतजार … उन्म… कर रही… ऊंह… थी। हा… चोदो मुझे!", लक्ष्मी आंटी ने चुदाते हुए कहा।
हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को जम कर अपने लौड़ों पर उठाकर पटखा। लक्ष्मी आंटी ने अपनी होटों को मेरे होटों पर दबाते हुए मुझे अपनी सारी चीखें खिला दी। विक्की ने लक्ष्मी आंटी और मेरे बीच हाथ डालकर लक्ष्मी आंटी के मम्मे दबा कर पकड़े।
हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को चोदने की दौड़ लगाई। हमेशा कि लक्ष्मी आंटी की कसी हुई गांड़ ने अपने लौड़े को ऐसा निचोड़ा की विक्की ने कांपते हुए लक्ष्मी आंटी की गांड़ को अपने लौड़े पर खींच कर दबाया। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की गांड़ में अपना रस छोड़ा और लक्ष्मी आंटी भी झड़ने लगी। उन दोनों के कामसुख का मजा लेते हुए मैंने भी अपनी तोप चला दी।
हम सब ऐसे ही थोड़ी देर सोफे पर बैठ गए और अपनी फुली सांसों को काबू किया। मैंने लक्ष्मी आंटी को टेबल पर रखा पानी पिलाया और उसने अपनी प्यास बुझाने के बाद हमें बॉटल दी। हम दोनों ने पानी पिया तब तक लक्ष्मी आंटी ने उठ कर गाउन पहना और कहा,
"आप दोनों तो किसी औरत को सुख से मार दोगे। चलो अभी दो घंटे पढ़ाई करने के बाद ही कोई भी भूख मिटेगी।"
लक्ष्मी आंटी ने किचन में जाते हुए satin gown को उपर उठते हुए अपनी रसीली टपकती गांड़ दिखाते हुए कहा और चली गई।
"आज रात इसे सोने देंगे। कल Mr. शास्त्री सुबह 8 बजे सर पर बैठेंगे। शुक्रवार रात को देखते हैं।"
विक्की ने सर हिलाकर हां कहा और हम पढ़ाई करने लगे।
थोड़ी देर बाद लक्ष्मी आंटी भी बाहर आकर हॉल में बैठ गई और अपनी किताब से पढ़ने लगी।
40
विक्की
दो घंटे तक हम सब ने मन लगाकर पढ़ाई की और फिर लक्ष्मी आंटी किचन में खाना गरम करने चली गई। थोड़ी देर बाद लक्ष्मी आंटी ने किचन से बाहर झांकते हुए पूछा कि खाना कब परोसना है?
हम दोनों ने हाथ मुंह फिर से धोए और लक्ष्मी आंटी को खाना परोसने को कहा। लक्ष्मी आंटी ने सब के लिए खाना परोसा और हम ने खाना खाते हुए लक्ष्मी आंटी को उसकी पढ़ाई के बारे में पूछा।
लक्ष्मी आंटी ने शर्माकर कहा कि कुछ साल बीच में जाने के कारण थोड़ी देर लग रही है। लक्ष्मी आंटी को डर था कि उसे आज वापस भेज दिया जाएगा और इसलिए उसने दोपहर को ही हमारे लिए खाना बनाया था। कल से वह दोपहर को पढ़ाई करेगी और शाम को हमारे आने के बाद खाना बनाएगी। हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को पढ़ाई में मदद करने का वादा किया।
खाने के बाद हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी के मना करने पर भी उसे साफ सफाई में हाथ बटाया और काम ख़तम होने पर नहाने चले गए। हम दोनों नहाकर बाहर आए तो लक्ष्मी आंटी ने हमें बेडरूम में इंतजार करने को कहा और नहाने चली गई। हम दोनों ने बेडरूम में जा कर बत्तियां बुझा दी और बेसब्री से लक्ष्मी आंटी का इंतजार करने लगे।
बाथरूम में से पानी की आवाज बन्द हो गई और अंधेरे में से एक एक कदम हॉल में आया। हॉल में बत्ती जली और लक्ष्मी आंटी की मोहनी मूर्ति बेडरूम के दरवाजे में नजर आई। लक्ष्मी आंटी के पीछे उजाला था और आगे अंधेरा था। इसलिए हम दोनों को गीले बालों से satin में अर्ध पारदर्शी gown में रती की मोहक छवि नजर आई। लक्ष्मी आंटी ये जानती थी कि हम दोनों पर क्या असर होगा क्योकि वह वहीं खड़ी हो गई।
अब लक्ष्मी आंटी ने अपनी बाहों को फैलकर दरवाजे के दोनों तरफ छुआ और अपने आप को दरवाजे के बीच लाया। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से अपनी गिली जुल्फें चेहरे से पीछे लेते हुए अपने कामुक बदन की झलक दिखाई। लक्ष्मी आंटी ने फिर अपने हाथों से अपने गले पर बने पाशवी प्रणय के निशानों को सहलाते हुए हमें तड़पाया। लक्ष्मी आंटी के हाथ धीरे धीरे नीचे सरकते हुए उसके मम्मे दबाने लगे। कोई औरत अपने बदन को सहलाते हुए इतना तड़पा सकती है यह बात हमें अब समझ आई। लक्ष्मी आंटी ने अपने हाथ और नीचे लाते हुए अपने पेट पर satin gown को लगाते हुए अपनी उंगलियों को गाउन के डोर में फंसाया।
लक्ष्मी आंटी ने अपनी बाहें खोली और गाउन का डोर खुल गया। लक्ष्मी आंटी ने अपने कंधे गोल घुमाए तो लक्ष्मी आंटी के संगमरमरी बदन से satin के परदे का फिसलना तय था। लक्ष्मी आंटी ने एक ओर मुड़कर घुटनों को सीधे रखते हुए नीचे गिर gown उठाया।
अगर 3 घंटे पहले लक्ष्मी आंटी ने राहत नहीं दी होती तो हमारे गोटे फटकर बेड पर हमारा रस फैला चुके होते।
हम दोनों मंत्रमुग्ध हो कर रती के यौवन का छलकता प्याला देख रहे थे।
लक्ष्मी आंटी ने अपने satin gown को हॉल के सोफे पर उड़ाया और एक ओर मुड़कर खड़ी हो गई। लक्ष्मी आंटी का एक हाथ उसकी पीठ पर उपर होते हुए satin bra की निचली गांठ को लगा। दो उंगलियों से गांठ को खींच कर छुड़ाने के बाद वह हाथ नीचे गया। दूसरे हाथ ने बालों को कंधों पर लेते हुए गले के पीछे की गांठ खींचकर खोली। उंगलियों से छूटते ही लक्ष्मी आंटी की satin bra नीचे गिर गई।
लक्ष्मी आंटी ने दुबारा झुककर जब अपनी ब्रा उठाई तो उसके जुलते गोलों पर जड़ी बेरीयां साफ नजर आई। लक्ष्मी आंटी ने हमारी ओर पीठ करके ब्रा को गाउन के साथ रख दिया। लक्ष्मी आंटी ने वैसे ही खड़े होकर कमर में थोड़ी झुक गई। लक्ष्मी आंटी के हाथ उसके घुटनों के से उपर उसकी जांघों को सहलाते हुए satin पैंटी कि कमर में लगी गांठों को लगे। दोनों हाथों की दो दो उंगलियों से दोनों ओर के डोर खींच लिए। लक्ष्मी आंटी नहीं जानती थी कि हम दोनों ने बिना बोले एक दूसरे से बात कर ली थी।
दोनों ओर की गांठें खुल गई और satin की वह गीली पैंटी लक्ष्मी आंटी की उंगलियों में झूलने लगी।
लक्ष्मी आंटी ने कहा, "बाबू आप दोनों तो… आह!!! मां!!!…"
मैंने झुकी हुई लक्ष्मी आंटी की रस भरी योनि में अपना लिंग भर दिया और बिना वक्त गंवाए उसकी तेज चुदाई करने लगा। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से दरवाजे के दोनों छोर पकड़ कर अपनी चुदाई के लुफ्त उठाने लगी।
मैंने आगे बढ़कर लक्ष्मी आंटी के बाल पकड़ लिए और उन्हें खींच कर लक्ष्मी आंटी को थोड़ा उठाया। लक्ष्मी आंटी के उठने से लक्ष्मी आंटी की चूत में रगड़ते मेरे सुपाड़े की दिशा बदली और लक्ष्मी आंटी के G-spot में झनझनाहट हुई। लक्ष्मी आंटी ने अपनी चूत में मुझे कस कर पकड़ लिया और रस की फुहार उड़ाते हुए झड़ने लगी। लक्ष्मी आंटी के डांस से उत्तेजित मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और अपना लौड़ा लक्ष्मी आंटी की कोख में ठूंस कर झड़ने लगा।
लक्ष्मी आंटी ने दरवाजे पर अपनी पकड़ ढीली कर दी और नीचे घुटनों पर बैठ गई। मैंने लक्ष्मी आंटी को उठाया और बेड की ओर ले गया। लक्ष्मी आंटी थक कर चूर बेड पर पेट ओर जमीन पर पैर रखकर लेट गई। लक्ष्मी आंटी के फैले हुए पैरों के बीच में मेरा रस टपक कर जमीन पर दाग बना रहा था। लक्ष्मी आंटी ने अपनी आंखे खोली और मेरी ओर देख मुस्कुराई। मैंने लक्ष्मी आंटी के बालों को पीछे कर के अपने होंठों को उसके होठों पर लगाया।
लक्ष्मी आंटी ने मुझे चूमने से पीछे ध्यान नहीं दिया। सन्नी ने अपने लौड़े को वेसलीन से पूरा पोत लिया था और उसकी नजर लक्ष्मी आंटी की तंग गली पर थी।
लक्ष्मी आंटी ने अपना चुंबन तोड़कर मुझे पूछा,
"सन्नी बाबू? वोह… आह… सन्नी… बाबू!!! अन्ह… हा……"
सन्नी ने अपने भाले की जड़ को लक्ष्मी आंटी की गांड़ में दबाते हुए उसे अपने प्यार का पूरा नाप दिया। वेसलीन और लक्ष्मी आंटी को इस चुदाई की आदत हो जाने के कारण सन्नी अपना काम पूरा कर पाया था। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के कंधे पकड़ लिए और अपने लौड़े को आगे पीछे करते हुए तेज धक्के लगाने लगा। लक्ष्मी आंटी ने बड़ी ही आसानी से अब सन्नी के हर धक्के का साथ देना शुरू किया।
सन्नी लक्ष्मी आंटी की गांड़ मारते हुए उसे बता रहा था कि वह उसे कैसे रात भर तड़पाएगा। लक्ष्मी आंटी भी उसे साथ देते हुए उकसा रही थी कि वह और ज्यादा जोर से और तेज धक्कों से उसे चोदे। लक्ष्मी आंटी के उकसाने के बाद सन्नी के साथ मै भी गरमाने लगा। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को बेड पर दबाते हुए उसकी गांड़ कि गहराई में अपना पानी छोड़ दिया और खुद बाहर निकल आया।
लक्ष्मी आंटी अपनी चूत और गांड से गरम वीर्य टपकाते हुए बेड के किनारे पड़ी थी कि सन्नी बेड के सिरहाने बैठ गया। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को खींच कर बेड पर ऐसे लिटाया कि पेट के बल लेटी लक्ष्मी आंटी के मुंह में सन्नी का लंबा चिकना लौड़ा था। मुंह भरा हुआ हो तो बातें नहीं करते इस बात को स्वीकार कर लक्ष्मी आंटी ने अपनी गांड़ में डुबकी लगाकर आए हुए लौड़े को अच्छे से चूस कर साफ़ करने लगी। खींच कर बेड पर लाते हुए लक्ष्मी आंटी के पैर अब जुड़ जाए थे। उसकी गदराई गांड़ और चिकने बदन ने मुझे बुलाया और मैं खींचा चला गया। लक्ष्मी आंटी के घुटनों के बगल में अपने घुटनों को रख कर मै लक्ष्मी आंटी की पीठ पर लेट गया।
मेरे मूसल का सुपाड़ा लक्ष्मी आंटी की गांड़ के सुराख पर दब गया तो लक्ष्मी आंटी ने अपना सर उठा कर,
"विक्की बाबू!!" की गुहार लगाई।
क्या लक्ष्मी आंटी चाहती थी कि मैं उसकी गांड़ मारूं या गांड़ नहीं मारूं?
समझदार लोग हमेशा दूसरों के भलाई की बात सोचते हैं। इसलिए मैंने लक्ष्मी आंटी की गांड़ में अपना लौड़ा पेल दिया। सन्नी के लौड़े पर अपना मुंह दबाकर चीखते हुए लक्ष्मी आंटी ने अपने पैर फैलाने की कोशिश की। मेरे घुटनों ने लक्ष्मी आंटी के पैरों को दबोच लिया था और उसकी वीर्य से लबालब भरी गांड़ को दबाकर पतली बना दिया था। वेसलीन, वीर्य और लक्ष्मी आंटी की अंदरूनी चिकनाहट से लक्ष्मी आंटी की गांड़ मारते हुए मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। लक्ष्मी आंटी का सर सन्नी ने अपने लौड़े पर दबा दिया और मुझे देख कर सन्नी ने आंख मारी।
अभी अभी तो मै झड़ा था और लक्ष्मी आंटी की कसी हुई गांड़ को काफी देर चोदना बाकी था। मैंने लक्ष्मी आंटी की गांड़ उसी अंदाज में मारते हुए उसे बता रहा था कि उसकी गांड़ मुझे कितना सुख दे रही है।
लक्ष्मी आंटी भी कराहकर सन्नी का लंबा लौड़ा चूसते हुए अपनी गांड़ को दबाकर मुझे साथ दे रही थी। मैंने लक्ष्मी आंटी की पीठ को सहला कर चूमते हुए उसकी गांड़ मारना जारी रखा।
लक्ष्मी आंटी को चोदते हुए सन्नी का लौड़ा देखना मुझे रास नहीं आ रहा था और शायद यही तकलीफ सन्नी को भी थी।
सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के मुंह से अपना लौड़ा बाहर निकाला और बगल में लेट कर लक्ष्मी आंटी को चूमने लगा। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से सन्नी का हथियार सहलाते हुए तयार रखा जब मैंने अपने लौड़े के धक्के का जोर बढ़ा दिया। लक्ष्मी आंटी की कसी हुई गांड़ में अपना रस छोड़ कर मैं लक्ष्मी आंटी के उपर से सरक गया।
इस से पहले कि सन्नी लक्ष्मी आंटी को पकड़ लेता लक्ष्मी आंटी बोली,
"बाबू आप दोनों को सुबह जल्दी उठना चाहिए इस लिए अब आप दोनों सो जाओ। बाकी का खेल कल सुबह खेलेंगे।"
सन्नी ने शिकायद की तो लक्ष्मी आंटी ने उसे पीठ पर लिटाकर उस पर चढ गई। लक्ष्मी आंटी ने अपनी थुंक से सन्नी का लौड़ा गीला कर दिया और खुद उसके लौड़े को अपनी योनी मुख पर रगड़ने लगी। कुछ ही पल में सन्नी के लौड़े पर थुंक, वीर्य और स्त्री उत्तेजना का काम रस मल दिया गया। लक्ष्मी आंटी ने अब सन्नी के लौड़े पर अपना वजन रखा और सन्नी के लौड़े ने लक्ष्मी आंटी की गरमी का नाप लिया। सन्नी आराम से लेट कर लक्ष्मी आंटी के मज़े ले रहा था और लक्ष्मी आंटी भी अपनी मर्जी से अपनी ताल पर चुदाने में व्यस्त हो गई थी। लक्ष्मी आंटी झडते हुए चुदा रही थी और चुदाते हुए झड रही थी।
रात के अंधेरे में यौन सुख की किलकारियों के बीच हम सब की कामक्रीड़ा कब खत्म हुई और कब सोए किसी को पता नहीं चला।
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सन्नी
कराहने की आवाज़ से मेरी नींद खुली। मैंने देखा कि लक्ष्मी आंटी ने विक्की के लौड़े को अपनी चूत में भर लिया था और वह विक्की कि घुड़सवारी करने में लगी हुई थी। विक्की कि आंखें ऐसी खुली थी कि वह समझ नहीं पा रहा था कि लक्ष्मी आंटी के साथ मिलने वाले मज़े सच है या सपना। मैं लक्ष्मी आंटी को चूधता देख पूरा तन गया और मैंने बेड़पर खड़े होकर अपना लौड़ा लक्ष्मी आंटी के मुंह में भर दिया। लक्ष्मी आंटी ने विक्की से चुदाते हुए मुझे चुसा। हर बार लक्ष्मी आंटी अपनी कमर को उठाती तो वह मेरा लौड़ा गले तक निगल लेती। विक्की को अपने अंदर रखते हुए नीचे बैठ जाती तो लक्ष्मी आंटी के मुंह में मेरा सुपाड़ा बाकी रहता।
विक्की कि नींद उड़ गई और उसने लक्ष्मी आंटी के गोले दबाते हुए उसकी उत्तजना बढ़ाने लगा। मैंने लक्ष्मी आंटी के गले को चोदते हुए अपने लौड़े को अच्छे से गीला कर दिया और पीछे हट गया। मेरा लौड़ा हटते ही लक्ष्मी आंटी झुककर विक्की को चूमने लगी।
मैंने लक्ष्मी आंटी के पीछे जाते हुए अपने आप को सही दिशा में बना लिया और ताल पकड़ कर आगे बढ़ा।
"मां… आह… हां… हां… हां…", की चीखों के साथ लक्ष्मी आंटी ने अपनी गांड़ में मेरा स्वागत किया। लक्ष्मी आंटी ने विक्की से लिपट कर कमर हिलाकर चुधना चालू रखा। लक्ष्मी आंटी खुद ही अपनी चूत और गांड़ चूधवा रही थी और हम दोनों सुबह के morning wood का सही मज़ा उठा रहे थे।
"हनः… अन्ह… आनः… ऊंह… अम्हह… आह… हन… अन्ह…", करते हुए लक्ष्मी आंटी पूरे जोश में अपनी गांड़ मरवा रही थी। विक्की लक्ष्मी आंटी की चूचियों को दबाने, चूमते और चूसते हुए अपनी बढ़ती बेताबी बता रहा था तो मैंने लक्ष्मी आंटी के ताल से अपनी ताल बनते हुए उसे और जोर से चोदने लगा।
लक्ष्मी आंटी के इस सरप्राईज से खुश हो कर हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी के दोनों छेद हमारे प्रेम रस से लबालब भर दिए। लक्ष्मी आंटी हम दोनों के बीच लेटी हुई अपनी कोख और आतों में जमा हमारी गीली गरमी को महसूस करते हुए सुस्ताने लगी। लक्ष्मी आंटी की पीठ को सहलाकर चूमते हुए मेरा लौड़ा फिर से फूलने लगा और विक्की के लौड़े की बढ़ती सख्ती भी मुझे और लक्ष्मी आंटी को महसूस हुई।
लक्ष्मी आंटी ने एक ओर मुड़कर हम दोनों को गिरा दिया और कहा,
"उफ्फ… आप दोनों बाबू तो किसीको अपने प्यार से मारोगे। हटो…!!"
लक्ष्मी आंटी बेड से उठ कर बाहर भागी तो हम दोनों उसके पीछे पीछे हॉल में गए। लक्ष्मी आंटी ने हमें फ्रेश होने को कहा और बोली,
"मैं जानती हूं कि आप दोनों को मेरे दोनों छेद पसंद है पर अगली बारी दोपहर को खाना खाने के बाद। अब चलो तयार हो जाओ तब तक मैं नाश्ता लगा देती हूं।"
लक्ष्मी आंटी ने सिर्फ satin gown को पहना और किचन में चली गई। हम दोनों तयार हो गए और लक्ष्मी आंटी ने परोसा हुआ नाश्ता करके कॉलेज के लिए निकले। लक्ष्मी आंटी ने किसी माशूका की तरह दरवाजे में हमें चूमकर दोपहर के खेल का वादा करते हुए हमें गले लगाया। मेरी उंगलियों ने लक्ष्मी आंटी के पैरों के बीच में उसकी जांघों को सहलाने पर वहां हमारे रस की धारा को छुआ। लक्ष्मी आंटी को देखते हुए मैंने उसे चाटा तो लक्ष्मी आंटी शर्माकर अंदर भाग गई।
मैं और विक्की हंसते हुए कॉलेज के लिए निकले।
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विक्की
"सन्नी, रीटा से बच के रहना। जब वो तुझसे चिपक रही थी तब अमित ने मुझे बताया कि उसके क्लासेस के एक लडके की वह गर्ल फ्रेंड हुआ करती थी। उसे इस्तमाल करके फेंक दिया और यहां वह किसी और को ढूंढ रही है।"
सन्नी ने दरवाजा खोलते हुए कहा, "हां, मैं उसे पहले ही दिन पहचान गया था। वह आदमखोर बाघिन है। पहले बुलाकर खेलेगी और फिर खा कर हड्डियां छोड़ जायेगी।"
अंदर देखा तो लक्ष्मी आंटी की किताबें खुली पड़ी थी और लक्ष्मी आंटी किचन में खाना बनाने में व्यस्त थी।
लक्ष्मी आंटी ने न केवल हमारा खयाल रखा था पर हमें रीटा जैसी आदमखोर से भी बचाया था। मन में लगा कि शायद हम सब अब भी उसके सपनों को नजर अंदाज कर रहे हैं। मेरी नजरें देख सन्नी भी मेरा इशारा समझ गया।
लक्ष्मी आंटी ने किचन से बाहर झांक कर देखा और कहा,
"अरे बाबू आप दोनों आ गए! चलो खाना खा लो, अभी गरमा गरम परोस देती हूं।"
हम दोनों ने अपने हाथ मुंह धोकर मेज पर बैठे और लक्ष्मी आंटी को भी अपने साथ खाना खाने के लिए कहा। लक्ष्मी आंटी से बातें करते हुए हमारा मन हलका हो गया। लक्ष्मी आंटी ने सन्नी और मुझे रीटा से दूरी बनाने के लिए कहा। हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को कहा कि हम दोनों ने वादा किया था और हम दोनों अपना वादा पूरा करेंगे। खाना खाते हुए मैंने लक्ष्मी आंटी से उसकी पढ़ाई के बारे में पूछा तो उसने कहा कि जैसा वक्त मिले वह अपनी पढ़ाई कर रही है। मैंने और सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को इस बारे में ज्यादा नहीं बोला। लक्ष्मी आंटी के कारण हमारा खाना 15 मिनट में हो गया। हम दोनों ने हाथ धोते हुए कुछ बातें तय की और हॉल में आ गए। लक्ष्मी आंटी शरमाते हुए हॉल में हमारे हमले के इंतजार में थी।
दिल पर पत्थर रख कर हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी से कहा कि हमें कॉलेज के लिए तुरंत जाना होगा। लक्ष्मी आंटी ने सर झुकाकर हां कहा और हम दोनों अपनी बैग उठाकर चल पड़े। बिल्डिंग के नीचे से सन्नी ने मम्मियों ने दिए हुए कार्ड पर छपे नंबर पर फोन किया और उसे मिलने गए।
शाम को कॉलेज से आते हुए हम दोनों को थोड़ी देर लग गई तो लक्ष्मी आंटी बेचैन हो गई। हमारे आते लक्ष्मी आंटी ने देरी की वजह पूछी। जवाब में सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को एक थैली दी। थैली में लक्ष्मी आंटी को दो हलके नीले रंग के टॉप और 2 भुरी पैंट मिली।
"बाबू एक ही रंग के दो जोड़ी क्यों लाए? वैसे भी आप के साथ मैंने काफी अच्छे कपडे लाए हैं। इसकी कोई जरूरत नहीं थी।", लक्ष्मी आंटी ने उन बेजान रंगो को देखते हुए कहा।
"इनकी जरूरत पड़ेगी और उसकी वजह अब भी थैली में है।"
लक्ष्मी आंटी ने थैली को ठीक से देखा तो अंदर से प्लास्टिक का एक कार्ड निकला। लक्ष्मी आंटी कार्ड पर छपे अक्षर पढ़ते हुए जमीन पर बैठ गई। जब लक्ष्मी आंटी ने सर उठाकर हमारी ओर देखा तो उसकी आंखों में आंसू भर आए थे। लक्ष्मी आंटी ने उस कार्ड को अपने सीने से लगा कर हमें खुशी के आसुओं से देखा।
सन्नी बोल पड़ा, "नहीं, हमें कुछ मत कहना। प्रतीक ने तुम्हारे कागजात मम्मियों के पास दिए थे और यहां से जाते हुए सारे इंतजाम मम्मियां कर के गई थी। हम ने बस फॉर्म भरने और कपड़े लाने का काम किया है।"
लक्ष्मी आंटी के गले से अचरज की आवाज निकली, "मैं कॉलेज जाऊंगी। मैं भी पढ़ाई करूंगी। अब ऐसे खड़े मत रहो!!"
लक्ष्मी आंटी ने दौड़ते हुए हमें गले लगाया और हम दोनों को चूमने लगी।
मैंने लक्ष्मी आंटी को दूर करते हुए कहा, "लक्ष्मी आंटी, जल्दी से मुंह धो लो। प्रतीक थोड़ी ही देर में कंप्यूटर पर कॉल करेगा। उसे नहीं बताओगी?"
लक्ष्मी आंटी ने जल्दी से अपना चेहरा धोया, हमें चाय बिस्किट देते हुए पढ़ाई करने को कहा और थैली ले कर बेडरूम में भागी। लक्ष्मी आंटी ने कॉलेज के नीले टॉप और भुरी पैंट के uniform में प्रतीक से काफी देर तक बातें की और फिर बड़ी खुशी से रात का खाना बनाने में जुट गई।
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विक्की
शाम को लक्ष्मी आंटी बहुत खुश थी और उसने हमें खाना परोसा तो हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी से बात करने के लिए उसे हमारे साथ बिठाया।
सन्नी, "लक्ष्मी आंटी, हम सब ने, मतलब हम दोनों, मम्मियां और प्रतीक ने तुम्हारे कॉलेज के दाखिले का काम किया है पर आगे सब तुम्हें करना होगा। 6 महीने में 12 वी कक्षा की परीक्षा होगी। उसकी पढ़ाई के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। क्या तुम तैयार हो?"
लक्ष्मी आंटी ने निश्चय से कहा, "हां बाबू। मैं अच्छे नंबर ला कर सब को दिखाऊंगी की मैं आप सब के विश्वास के काबिल हूं।"
"लक्ष्मी आंटी, ये आसान नहीं होगा। तुम्हारा कॉलेज हमारे साथ शुरू होता है और हम दोपहर को खाना खाने आएंगे तब तक चलेगा। साथ ही पूरे साल की पढ़ाई 6 महीने में करनी पड़ेगी। घर के काम करके इतना सब कुछ नहीं हो पाएगा।"
अपना सपना हाथों से फिसलता देख लक्ष्मी आंटी उदास हो गई। उसने कहा,
"बाबू आप चिंता मत करो। मैं सब संभाल लूंगी। मुझे जल्दी उठने की आदत है। मैं सब तयारी करके जाऊंगी। दोपहर के खाने के लिए कोई तकलीफ़ नहीं होगी और शाम का खाना पकाते हुए अपनी पढ़ाई कर लूंगी। मैं कर सकती हूं बाबू। मुझे एक मौका दो।"
लक्ष्मी आंटी ने गिड़गिड़ाते हुए कहा तो मैंने उसे अपनी बाहों में लिया और उसके बाल चूमते हुए कहा,
"अरे बुद्दु, हमारा मतलब ये नहीं है। हम दोनों ने तय किया है कि अब से घर में तुम्हारा काम कम किया जाएगा। सुबह और शाम खाना बनाने की जगह सिर्फ एक बार खाना पकाने का काम किया जाएगा, कपड़े दो दिन में एक बार धोए जाएंगे और बरतन मांजे और बाकी कामों में हम दोनों तुम्हारा हाथ बटाएंगे। कॉलेज की टीचर इसी building में रहती हैं और उनके पास रोज दोपहर को जाकर 2 घंटे पढ़ाई करने से सीखना आसान होगा। प्रतीक ने तुम्हारी पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी ली है। हम दोनों बस मदद कर रहे हैं।"
लक्ष्मी आंटी ने अपनी समझदारी दिखाते हुए हमारी मदद कुबूल की और हमें अपने गले लगाकर शुक्रिया कहा। हम सब बिना कुछ कहे बेडरूम में गए और एक दूसरे को नंगा करते हुए हमने अपने प्यार का इजहार किया। हम दोनों के प्यार से खुश होकर लक्ष्मी आंटी हम दोनों के बीच में खुशी खुशी सो गई।
सुबह 5 बजे लक्ष्मी आंटी ने उठकर पूरे दिन की तैयारी शुरू कर दी।
सुबह 6 बजे तक लक्ष्मी आंटी ने रोटी, सब्जी और नाश्ता बना दिया था और वह अपनी कॉलेज के पहले दिन की तैयारी में जुट गई। हम दोनों फ्रेश होकर हॉल में आए तो लक्ष्मी आंटी ने हमें नाश्ता परोसा। हमारे कहने पर लक्ष्मी आंटी ने भी नाश्ता किया। मैंने लक्ष्मी आंटी से कहा कि उसने हमें अभी तक अपना कॉलेज uniform पहनकर नहीं दिखाया तो लक्ष्मी आंटी किसी चुलबुली लड़की की तरह नया यूनिफॉर्म पहनने के लिए भागी।
लक्ष्मी आंटी हलका नीला टॉप और भुरी पैंट पहन कर बाहर आई तो मेरा गला सूख गया। यह यूनिफॉर्म 16-17 साल की नवयुवतियों के लिए बना था, पकी हुई कहर ढाती औरतों के लिए नहीं। लक्ष्मी आंटी को इन कपड़ों में अपने रूप के असर का कोई अंदाज नहीं था। एक हाथ में किताबों की बैग और दूसरा कमर पर रख कर लक्ष्मी आंटी ने पूछा,
"कैसी लग रही हूं? बिल्कुल किसी कॉलेज गर्ल जैसी?"
सन्नी ने बड़ी मुश्किल से पूछा, "कॉलेज गर्ल ऐसे दिखती है ये पता कैसे चला?"
लक्ष्मी आंटी ने भोले मन से कहा, "हमारे गांव में एक आदमी जीप में थिएटर लाता था। वह फिल्म देखने गांव के सारे मर्द जाते थे। उसके पोस्टर पर ऐसी ही लड़की थी जिसे कॉलेज गर्ल कहते थे।"
"लक्ष्मी आंटी, मुझे लगता है कि कॉलेज के कुछ नियम हमें समझाने पड़ेंगे।यहां आओ और हमारे सामने खड़ी हो जाओ।"
लक्ष्मी आंटी ने अपनी बैग मेज पर रखी और हमारे सामने खड़ी हो गई।
सन्नी ने कहा, "लक्ष्मी आंटी, फिल्मों में जो होता है वह असलियत में नहीं होता ना? फिल्म के पोस्टर कि तरह तुमने कपड़े पहने हैं पर फिल्म में क्या है यह पता है?"
लक्ष्मी आंटी ने सर हिलाकर ना कहा, "हमारे गांव में औरतें फिल्म नहीं देखती थी। फिल्म में क्या है?"
"शुरुवात कुछ ऐसी है कि लड़की बिल्कुल ऐसे ही कॉलेज जाती है। टॉप के ऊपर से 2 बटन खुले और बाकी टॉप को पैंट में इन कर के। कॉलेज के गेट पर ही लडके उसपर मरने लगते हैं तो लड़कियां जलने लगती हैं। क्लास में मास्टर ने लड़की को एक नजर देख कर ही head master को मिलने भेज देता है। फिर हेड मास्टर (लक्ष्मी आंटी के सोफे पर बैठा कर खुद खड़े होते हुए) लड़की को सोफे पर बैठा कर समझता है कि लड़कियां यूनिफॉर्म ऐसे पहनेंगी तो कॉलेज के नियम का उललघंन होगा।"
सन्नी ने कहा, "क्लास मास्टर भी आ गया और उसने कहा कि यूनिफॉर्म को ठीक से कैसे पहनना चाहिए यह अब हमें बताना होगा। क्लास मास्टर ने…”
सन्नी ने पीछे से लक्ष्मी आंटी का मुंह दबाया और हाथ पकड़े। मैंने लक्ष्मी आंटी की टॉप के सारे बटन खोल कर उसकी ब्रा में कैद चूचियों को दबाने लगा। लक्ष्मी आंटी ने पैर पठखते हुए अपने आप को छुड़ाने की कोशिश की पर दो मर्दों की हवस उस पर भारी पड़ी। मैंने लक्ष्मी आंटी कि पैंट की बटन खोल कर उसकी पैंटी के साथ ही सब कुछ खींच कर उतारा। सन्नी ने मेरी तरफ देखा तो मैंने सर हिलाकर हां कहा।
सन्नी लक्ष्मी आंटी के नंगे बदन पर लेट गया और मैंने उसकी भी पैंट और अंडरवियर उतार दी।
लक्ष्मी आंटी ने सर हिलाकर अपने हाथों को छुड़ाने की कोशिश की पर सन्नी ने तब तक निशाना साधते हुए अपने लौड़े को कॉलेज गर्ल लक्ष्मी की चूत में पेल दिया। लक्ष्मी की चीख को सन्नी के हथेली ने रोक दिया। लक्ष्मी के पैर सन्नी के दोनों ओर बेबस झटक कर उसे दूर करने की विफल कोशिश कर रहे थे।
मैंने उपर होते हुए लक्ष्मी के हाथ पकड़ लिए तो सन्नी ने लक्ष्मी को चूमते हुए अपने हाथ को नीचे किया। सन्नी ने लक्ष्मी की चीखों को निगलते हुए उसकी ब्रा खोली और लक्ष्मी के मंम्मों को कस कर पकड़ते हुए उसकी चूत में अपना लौड़ा पेलने लगा। लक्ष्मी ने अपने हाथ छुड़ाने की कई कोशिशें की पर मैंने लक्ष्मी को नहीं छोड़ा।
"बस, बस लक्ष्मी। अब तुम सीख गई ना ऐसे यूनिफॉर्म पहनने से क्या होता है? हम दोनों तो तुम्हारी भलाई के लिए ये सब कर रहे हैं।", कहते हुए मैंने लक्ष्मी आंटी के मुंह पर हाथ रख दिया। सन्नी ने लक्ष्मी के कंधे दबाते हुए उठकर उसे चोदने लगा। लक्ष्मी की छटपटाहट अब भी जारी थी जब सन्नी के लौड़े ने तेज धक्के देने शुरू किए। आगे क्या होगा यह पहचानकर लक्ष्मी ने पूरे जोर से बचने की कोशिश की और सन्नी ने लक्ष्मी की कोख में अपना रस उड़ेल दिया।
सन्नी लक्ष्मी पर से उठ गया तो लक्ष्मी का बदन कांप रहा था। लक्ष्मी ने अपने पैरों को साथ लाते हुए अपनी चूचियों को हाथों से ढक दिया। मैंने लक्ष्मी के सर पर चूमते हुए उसके कान में कहा,
"टॉप के बटन बंद रखने से पैंट के बटन की हिफाजत होती है।"
लक्ष्मी ने सर झकाकर हां कहा और अपने कपड़े ढूंढने लगी। लक्ष्मी नीचे पड़ी पैंट को उठाने के लिए झुकी और उसकी गदराई मस्त गांड़ पर मेरी नजर जड़ गई। मैंने झट से अपने लौड़े को अपने हाथों में लिया और लक्ष्मी आंटी की चिकनी चूत में पेल दिया।
"आह… नहीं… रुक जाओ… बस करो…", लक्ष्मी हर ठाप के साथ कह रही थी पर उसे पता चलने से पहले मेरा चिकनाहट में लिपटा लौड़ा उसकी चूत में से बाहर निकल कर अपने सही निशाने पर जा लगा।
"मां!!! आह… अन्ह… हा… नहीं… रुको ना… आह… आः…", लक्ष्मी की आहो ने पूरा कमरा भर दिया। सन्नी ने लक्ष्मी के साथ बैठते हुए उसके होंठों को चूम कर उसकी आहें दबा दी और एक हाथ उसकी चूत पर रख कर उसे छेड़ने लगा। लक्ष्मी जल्द ही गरम हो कर झडने लगी। मैंने लक्ष्मी की गांड़ मारते हुए उसे कंधे पकड़ कर सीधा कर दिया और सन्नी को लक्ष्मी की चूत में उंगलियां दौड़ाने की सलाह दी। सन्नी ने अपनी उंगलियों को मोड़ कर अंदर डाल दिया और हिलाने लगा। लक्ष्मी की योनी में छुपा G-spot हरकत में आते ही लक्ष्मी तड़पने लगी। लक्ष्मी के रसों की बौछार में सन्नी का हाथ भीग गया और लक्ष्मी के नाखून सन्नी के कंधों में धस गए।
लक्ष्मी इस तरह झडने लगी कि मेरा लौड़ा निचोड़ लिया गया। मेरे गरम वीर्य से लक्ष्मी की आतें रंग दी गई और मैं लक्ष्मी को अपने लौड़े पर बिठाकर हांफने लगा।
हालांकि सन्नी रुक गया था पर लक्ष्मी का झडना अब भी रुक रुक कर चल रहा था। आखिर में लक्ष्मी रुक गई और उसने अपने आप को मेरे लौड़े से उठाया।
सन्नी ने पूछा, "लक्ष्मी आंटी, जब मैंने अपना लौड़ा अन्दर डाला तो दर्द हुआ था?"
लक्ष्मी आंटी ने सन्नी के होंठों को चूमते हुए कहा, "नहीं तो।"
"फिर इतना चीखी क्यों?"
लक्ष्मी आंटी ने आंख मारी और कहा, "एक कुंवारी कॉलेज गर्ल को दो मर्द लूटेंगे तो वो चीखेगी ना?"
सन्नी ने हंसकर कहा, "बिल्कुल सही।"
लक्ष्मी आंटी ने अपने कपड़े उठाए और टॉयलेट की ओर निकली। मैंने लक्ष्मी आंटी को पकड़ लिया और कहा कि वह ऐसे ही कपड़े पहन कर कॉलेज जाए।
लक्ष्मी आंटी ने विरोध में कहा, "पर मेरी पैंटी में आप दोनों का रस उतर आयेगा और पूरा दिन मुझे ऐसे ही रहना होगा।"
जब लक्ष्मी आंटी ने समझ की मैं भी यही चाहता था तो उसने,
"धत् बाबू!" कहकर मेरी बात मान ली और अपने कपड़े ठीक से पहन कर तैयार हो गई।
हम सब सुबह 8 बजे से थोड़ी देर पहले घर से निकले तो सन्नी ने लक्ष्मी आंटी से पूछा,
"लक्ष्मी आंटी, आज सुबह के सरप्राईज की तरकीब कब सोची?"
लक्ष्मी आंटी ने शरमाते हुए कहा, "ये तरकीब प्रतीक जी ने कल शाम को मेरा यूनिफॉर्म देख कर बताई थी।"
हम सब हंस पड़े और मैंने देखा की लक्ष्मी आंटी की खूबसूरती यूनिफॉर्म में छुप नहीं रही थी पर अब लक्ष्मी आंटी सच में कॉलेज गर्ल लग रहा थी न कि कोई पॉर्नस्टार।
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सन्नी
शाम को हम दोनों घर लौटे तो लक्ष्मी आंटी को चिंता में बैठा पाया। खोद कर पूछा तो पता चला कि टीचर को उसके हमारे साथ रहने से शक है। हमने लक्ष्मी आंटी को विश्वास दिलाया कि जब तक हम खुद किसी को कुछ बताते नहीं तब तक शक करने से ज्यादा लोग कुछ नहीं कर सकते। वैसे भी मुंबई एक खुले विचारों का शहर है और हमें कोई परेशान नहीं करेगा।
लक्ष्मी आंटी ने हमारे बात पर सोचा और मान गई। रोज की तरह हम दोनों ने फ्रेश होकर नाश्ता किया। लक्ष्मी आंटी भी हमारे साथ पढ़ने लगी और 2 घंटे मन लगाकर पढ़ने के बाद हम सब ने खाना खाया, बरतन मांजे और सोने चले गए।
हमारी एक तय दिनचर्या बनने लगी थी और आम शादीशुदा लोगों की तरह हम भी रहने लगे। अगर आम में दो पति अपनी एक पत्नी को रोज जोड़ी में तीन बार चोदते हो। हमारे दिन बीतते गए और जल्द ही लक्ष्मी आंटी की 12वी की परीक्षा आ गई। लक्ष्मी आंटी काफी चिड़चिड़ी हो गई पर हम दोनों ने उसे संभाला।
दोनों पापा और मम्मी अक्सर मिलने आते और लक्ष्मी आंटी को कोई गलत बरताव या बोल नहीं लगाते। लक्ष्मी आंटी ने 12वी कक्षा की परीक्षा के बाद रुकना ठीक नहीं समझा और सीधे आगे की पढ़ाई में जुट गई।
हम दोनों भी engineering exams में गले तक डूबे हुए थे। अक्सर तो हम सब सेक्स को दवाई या नशे की तरह अपने मन को हलका करने के लिए इसतेमाल करने लगे।
Engineering exams पूरे होने के दिन हमें पवन अंकल का कॉल आया। उन्होंने सलाह दी कि गाड़ी एक ही रास्ते पर ज्यादा देर दौड़े तो टूट सकती है इस लिए कभी कभी रास्ता बदलना जरूरी हो जाता है। मैं समझ गया और विक्की से बात कर शाम को लक्ष्मी आंटी को तयार रहने को कहा।
"हम घूमने जा रहे हैं!!"
लक्ष्मी आंटी का चेहरा खिल उठा और वह खुशी खुशी गुनगुनाते हुए घर में गई। हम दोनों भी कॉलेज में अपना इम्तिहान पूरा करने गए तो हमें अभी से खुश लग रहा था।
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विक्की
परीक्षा में जाने से पहले ही हमारा मन छुट्टी के बारे में सोच हलका हो गया था और परीक्षा अचानक से बहुत आसान लगी। दोपहर तक सब ख़तम कर के हम लक्ष्मी आंटी से मिलने भागे।
घर पहुंच कर देखा तो लक्ष्मी आंटी ने खाने के साथ और भी कई चीजें बनाई थी। जब हमने लक्ष्मी आंटी से कहा की जहां जाएंगे वहां खाने को मिलेगा तो लक्ष्मी आंटी थोड़ी उदास हो गई। उसने हमारे लिए की हुई तयारी देख मैं समझ गया कि लक्ष्मी आंटी को लगा था कि हम उसे छोड़ कर जा रहे हैं। मैंने लक्ष्मी आंटी को पीछे से अपनी बाहों में लेते हुए कहा,
"तुम्हें इतनी आसानी से नहीं छोड़ेंगे लक्ष्मी आंटी। तुम भी तयार हो जाओ। हम सब 1 घंटे में निकल रहे हैं।"
लक्ष्मी आंटी ने खुश होकर पूछा, "इतनी वक़्त की पाबंदी क्यों? अगर छुट्टी पर जाना है तो ऐसे भागा दौड़ी क्यों?"
सन्नी ने लक्ष्मी आंटी की चाल पकड़ ली और कहा,
"ये सब तो वहां जाने पर ही समझ जाओगी। बस इतना बताऊंगा कि ज्यादा कपड़े लेने की कोशिश भी मत करना।"
लक्ष्मी आंटी की जिज्ञासा को शांत किए बगैर हम सब गाड़ी में बैठ गए। लक्ष्मी आंटी पीछे की सीट से आगे झांक कर देख रही थी कि हम किस ओर जा रहे हैं।
"सन्नी, याद कर की पिछली बार जब हम सब घूमने निकले थे तो लक्ष्मी आंटी कैसे चुपके से पीछे बैठकर आहें भर रही थी। एक दिन वो था और एक दिन आज है।"
लक्ष्मी आंटी, "आह हा हा!! आप दोनों ने मेरे अंदर जो झुनझुना डाल रखा था उसके बारे में भूल गए? आज भी उस बारे में सोचा तो पसीने छूट जाते हैं।"
"और चूत गीली हो जाती है, ये भी बता दो।"
हंसी मजाक में रास्ता कटने लगा और सन्नी ने लक्ष्मी आंटी से असली सवाल पूछा,
"लक्ष्मी आंटी, तुम्हें अपने गांव की याद नहीं आती?"
लक्ष्मी आंटी ने चुपके से कहा, "बाबू, वहां कोई अपना बचा हो तो उस बारे में सोच कर मतलब है। किसी दिन अगर बहुत उदास हो गई तो पहाड़ों के बीच से ढलते सूरज को याद कर अपना मन बहला लेती हूं। बाबू शहर में सब मिलता होगा पर सूरज आते और जाते हुए नहीं दिखता।"
हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को चिढ़ाते हुए उसका ध्यान भटकाया और गाड़ी पुराने मुंबई पुणे हाईवे पर लग गई।
शहर को गुजरता देख लक्ष्मी आंटी खुली जमीन और हरियाली को निहारने लगी। बीच बीच में लक्ष्मी आंटी हम दोनों से हमारी मंजिल के बारे में पूछती पर अब वह भी समझ गई थी कि हम Lonavala जा रहे थे।
लक्ष्मी आंटी, "बाबू पहले बोल दिया होता कि हम Lonavala जा रहे हैं तो कुछ गरम कपड़े लाती। सुना है वहां साल भर सरदी रहती है।"
सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को एक अय्याश मुस्कान देते हुए कहा, "लक्ष्मी आंटी हम दोनों तुम्हें अंदर- बाहर आगे - पीछे से हमारी गरमी से भर देंगे।"
लक्ष्मी आंटी ने सन्नी के कंधे पर हलकी चुटकी लेते हुए कहा, "हट बदमाश!"
तभी मैंने सिग्नल दिया और गाड़ी रास्ते छोड़ कर पुराने घाट को चढ़ने लगी। बुधवार की शाम होने से यहां कोई और नहीं था।
लक्ष्मी आंटी, "बाबू, यहां हम क्यों आए हैं? यहां पर तो दूर दूर तक कोई नहीं है।"
गाड़ी से उतरते हुए मैंने कहा," लक्ष्मी आंटी, यहां पर वेताल का मंदिर है। अगर यहां किसी औरत की बली चढ़ा दी तो हम दोनों को सिद्धि मिलेगी।"
लक्ष्मी आंटी हंस पड़ी, "बाबू ये पट्टी कॉलेज की किसी लड़की को पढ़ना। बली कुंवारियों की दी जाती होगी, तीन पतियों के बीवी की नहीं।"
चलते चलते हम सब उस घाट की चोटी पर पहुंच गए थे। ढलते सूरज ने अपना रंग बदला और सह्याद्रि की पहाड़ श्रृंखला को छूने चला। दूर नीचे गाडियां इस मंत्रमुग्ध करने वाले नजारे से अंजान छोटे छोटे खिलौनों की तरह दौड़ रही थीं।
मैंने एक चादर फैलाई और सन्नी ने लक्ष्मी आंटी ने बनाई खाने की चीजें लाई। हम सब चुप रह कर ढलता सूरज देख रहे थे। इस अनुभव में शब्द बेकार ही नहीं बल्कि बोझ थे। सूरज जमीन के पीछे छिपने लगा तो लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को अपनी बाहों में लेते हुए बहती आंखों से सूरज की आखरी किरणों को देखा। हम दोनों जानते थे की लक्ष्मी आंटी के इस आलिंगन में दोस्ती और ममता के अलावा और कुछ नहीं था। हमने भी अच्छे दोस्त की तरह लक्ष्मी आंटी का साथ दिया।
सूरज ढलते ही अंधेरा छा गया और हम सब गाड़ी में बैठ गए।
लक्ष्मी आंटी ने चुपके से कहा, "बाबू, मैं नहीं बता सकती की इतने सालों बाद ये देख कर कैसा लग रहा है पर यह किसी भी तोहफे से कीमती तोहफा दिया है आप दोनों ने।"
सन्नी, "अरे लक्ष्मी आंटी, अब जब हम दोनों को तुमने इतना पूजनीय बना दिया है तो शायद हमें अपनी हवस का शिकार किसी और को बनाना पड़ेगा।"
गाड़ी में माहौल अचानक हलका हो गया जब लक्ष्मी आंटी ने आगे बढ़कर सन्नी के कान को खींचकर उसके गाल को चूम लिया। हाईवे पर लगने से पहले एक छोटा पर अच्छा होटल दिखा और हमने यहां रात गुजारना ठीक समझा।
बुधवार शाम को यहां कोई रहता नहीं और सारे कमरे खाली होते हैं। होटल मैनेजर ने कमरे का भाड़ा 1500 कहा तो मैंने लोक लाज के खातिर 2 कमरे मांगे।
मैनेजर ने कहा कि होटल के नियमों के अनुसार दो मर्द एक कमरे में नहीं रह सकते। 3 कमरे लेने के बारे में सोच रहा था कि लक्ष्मी आंटी बीच में आ गई।
लक्ष्मी आंटी (मैनेजर से), "अजीब बात है! क्या एक मर्द और एक औरत एक साथ रह सकते हैं? शादीशुदा ना हो तो भी? (मैनेजर ने सर हिलाकर हां कहा) क्या एक मर्द और एक औरत के साथ उस कमरे में एक और इंसान रह सकता है? (फिर से हां) क्या दो मर्द एक दूसरे से कुछ करेंगे या एक दूसरे की इज्जत लूटेंगे? चलो हम सब एक ही कमरे में रहेंगे।"
मैंने लक्ष्मी आंटी को समझने की कोशिश करते हुए कहा, "लक्ष्मी आंटी, अगर यहां…"
लक्ष्मी आंटी, "पुलिस आ गई तो क्या होगा? आप दोनों ने पिछले एक साल में मेरे साथ जबरदस्ती नहीं की तो क्या अब करोगे?"
सच में, पिछले साल में हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी से कोई जबरदस्ती नहीं की थी। जरूरत ही नहीं थी!
लक्ष्मी आंटी ने आगे कहा, "और क्या? साहब मेमसाब को बताएंगे? उन्होंने ही तो मुझे आप का खयाल रखने की जिम्मेदारी दी है। (मैनेजर से) हम सब एक ही कमरे में रहेंगे। एक चाबी दो और सुबह की चाय और नाश्ता वक़्त पर नहीं मिला तो समझ लेना।"
लक्ष्मी आंटी फिर मुड़ी और गाड़ी की ओर गई। 3 जोड़ी मरदाना आंखों ने उसके ठुमकते पिछवाड़े का दरवाजे तक पीछा किया और एक दूसरे से टकराई।
मैनेजर ने हमारी बेचैन जवानी के अधूरे सपनों पर अपनी नजरों से अफसोस दिखाते एक चाबी सौंपी। मैनेजर,
"रेस्टोरेंट में रात को veg non veg खाना मिलता है और सुबह 6 बजे से नाश्ता मिलेगा।"
हम सब अपना सामान गाड़ी से ले कर कमरे में पहुंचे। कमरे का दरवाज़ा बंद होते ही लक्ष्मी आंटी ने नटखट मुस्कान देते हुए कहा,
"कैसी रही?"
समझ नहीं आ रहा था कि लक्ष्मी आंटी के पैर पकडूं या उस बेड पर पटख दूं। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को कंधे पर उठाकर बेड पर पटक दिया और
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सन्नी
लक्ष्मी आंटी की चुलबुली जवानी तो खुद कामदेव को बलात्कारी बना देती, मैं तो सिर्फ जवान था। जिस तरह लक्ष्मी आंटी ने न केवल हमारे पैसे बचाए बल्कि रात को दो कमरों के बीच छुपना भी नहीं पड़ेगा।
कमरे का दरवाज़ा बंद होते ही लक्ष्मी आंटी ने नटखट मुस्कान देते हुए कहा,
"कैसी रही?"
मैंने लक्ष्मी आंटी को सीधे अपनी बाहों में लेते हुए बेड पर पटक दिया और उसके ऊपर लेट गया। लक्ष्मी आंटी ने तुरंत अपने हाथ मेरे गले में डाल कर मुझे अपनी ओर खींचा। लक्ष्मी आंटी के होटों को चूमते ही दिमाग के बाकी हिस्सों ने काम करना बन्द कर दिया। लक्ष्मी आंटी ने अपनी नाज़ुक उंगलियों से मेरे बाल पकड़ लिए तो मैंने लक्ष्मी आंटी की लेगिंग्स को खींच कर उतारने लगा। लक्ष्मी आंटी ने पिछले एक साल में elastic band वाली लेगिंग्स पहनना जरूरी समझा था क्योंकि हम दोनों उसकी कई सलवार के नाड़े तोड़ चुके थे।
लक्ष्मी आंटी की लेगिंग्स और पैंटी को नीचे घुटनों तक उतार कर मैंने अपनी पैंट और अंडरवियर को भी अपने घुटनों तक उतारा।
मेरा तपा लौड़ा लक्ष्मी आंटी की पनियाई बुर से टकराया तो लक्ष्मी आंटी सिहर उठी। मैंने लक्ष्मी आंटी की गीली बुर में एक जोर का धक्का दिया और अपना पूरा झंडा गाड़ दिया।
लक्ष्मी आंटी, "मां… आह… हां… सन्नी बाबू… शैतान… चोदो…"
लक्ष्मी आंटी को आज सुबह से चोदा नहीं था और मैं बहुत उतावला हो गया था। मैंने लक्ष्मी आंटी के कंधों को पकड़ा और उसके गाल को चूम कर उसके कानों में अपनी खुशी बताते हुए अपनी हवस की आग को बुझाने में जुट गया। लक्ष्मी आंटी भी शायद सुबह से चुदाने के लिए उतावली थी और उसके बाहों ने मुझे जकड़ लिया और वह झडने लगी।
लक्ष्मी आंटी की चूत में बढ़े गरमी, कसाव और रस की अनुभूति ने मुझे चरम सुख के पार कर दिया और अपना गाढ़ा घोल लक्ष्मी आंटी की सुनी कोख में भर कर मैं निढाल हो गया।
अब मेरा दिमाग काम करने लगा और मुझे विक्की की याद आई। मै लक्ष्मी आंटी के उपर से हट गया और देखा तो विक्की बगल में sofa bed पर बैठा अपना सामान मल रहा है। मेरे हटते ही विक्की उठा और हमारी ओर बढ़ा।
विक्की ने लक्ष्मी आंटी के घुटनों को लेगिंग्स के साथ पकड़ कर लक्ष्मी आंटी को बेड से आधा नीचे खींचा। लक्ष्मी आंटी की गीली बुर अब बेड के किनारे पर लग हमारे रस टपका रही थी। मैंने बेड पर ठीक से बैठते हुए विक्की की मुद्रा को देखा।
विक्की ने लक्ष्मी आंटी के घुटनों में फंसी लेगिंग्स और पैंटी को अपने गले के पीछे फंसाकर उठाया तो लेगिंग्स थोड़ी और उतरी पर साथ ही लक्ष्मी आंटी की गेंद भी बेड से उठ गई।
लक्ष्मी आंटी ने सुस्ताई मादक मुस्कान से विक्की का स्वागत किया। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की गीली बुर के छेद पर अपना मोटा लौड़ा रगड़ कर उसके टोपे को मेरे गाढ़े वीर्य से पोत लेते हुए मेरा वीर्य लक्ष्मी आंटी की खुली चूत में फिर से भरा।
लक्ष्मी आंटी की भरी हुई चूत अब ऐसे उठी थी कि वह बिना छलके मेरा वीर्य संजो कर रही थी। विक्की के पंजों ने लक्ष्मी आंटी के गोल मटोल गांड़ के गोलों को कस कर पकड़ लिया और उनके बीच में छिपे हुए छेद को चौड़ा किया। विक्की का इरादा पहचान कर लक्ष्मी आंटी ने कहा,
"रुक जाओ विक्की बाबू! आप का बहुत मोटा… आ… आह… हा… हा… उन्ह…"
विक्की बोल पड़ा, "अरे लक्ष्मी आंटी, सन्नी से चुदा चुदा कर मुझे तडपाने के बाद मैंने आसानी से छोड़ दिया तो मुझ पर शक करना बनता है। अब तक तो समझ लेना चाहिए था कि तेरा दूसरा आशिक हमेशा बेरेहम होता है।"
विक्की ने मेरे वीर्य से चिकना अपना लौड़ा लक्ष्मी आंटी की कसी हुई गांड़ से सुपाड़े की गीली चोंच तक बाहर खींच लिया।
लक्ष्मी आंटी को एक हवस भरी कातिलाना मुस्कान देते हुए विक्की ने लक्ष्मी आंटी की खुली गांड़ एक धक्के में पूरी तरह पेल दी। लक्ष्मी आंटी ने अगर पिछले एक साल में हम दोनों से कुछ सीखा था तो वो था कि जब भी गांड़ मारी जाए तो उसका मज़ा उठाया जाए।
विक्की ने लक्ष्मी आंटी के घुटनों को अपने गले में लटका कर उसकी गांड़ फैला कर मारी। लक्ष्मी आंटी ने भी उसे साथ देते हुए अपनी गांड़ से विक्की के लौड़े को निचोड़ते हुए अपनी लंबी उंगलियों से अपनी चूत पर रखे यौन सुख के मणि को सहलाते हुए अपनी काम ज्योति को भड़काकर विक्की के बदन में आग लगा दी। विक्की बेचारा सुबह से भूका, मेरे कारण पहले से तपा लौड़ा रगड़ बैठा कितनी देर लक्ष्मी आंटी की अनुभवी प्रेम क्रीड़ा को सेहेता?
विक्की ने लक्ष्मी आंटी की गांड़ को एक गहरे धक्के से पेलते हुए अपनी काम अग्नि समर्पित कर दी। विक्की पीछे सरक कर सोफ़ा बेड पर मेरे बगल में बैठ गया और हम दोनों लक्ष्मी आंटी का अद्भुत रूप निहारते रहे।
लक्ष्मी आंटी के पैर सलवार में बंधे हुए थे पर घुटने फैल कर लक्ष्मी आंटी की खुली चूत और गांड़ में से बहती हमारी गंगा जमुना की धाराओं का संगम होते दिखा रहे थे।
लक्ष्मी आंटी ने उठकर अपने कपड़े उतारे और satin की camisole और शॉर्ट्स पहन कर सोफे पर बैठ गई।
लक्ष्मी आंटी ने कहा, "बाबू वो मैनेजर यहां तांक झांक करने के लिए उतावला हो रहा होगा। जल्दी से खाना मंगवा लो और बताती हूं वैसा करो।"
मैनेजर खुद खाना ले आया तब मैं और विक्की बेड पर बैठ कर वीडियो game खेल रहे थे तो लक्ष्मी आंटी सोफ़ा बेड पर बैठ अपना एक पैर बेड के हाथ पर रख पैरों में nail polish लगा रही थी। Camisole में जैसे तैसे सिमटती चूचियां घुटने से दब कर विद्रोह कर बाहर आने की कोशिश कर रही थीं। शॉर्ट्स पहने होने के कारण लक्ष्मी आंटी की मनमोहक काया का बिना अश्लीलता के दर्शन हो रहा था। लक्ष्मी आंटी गाना गुनगुना रही थी,
"aai main to aai nazaro ke
anjane ek jahan se
layi main to layi bahaaro ke
afsaane bhi waha se
na na mujhe chhuna na door rakhna
pari hun main
aye koi meri panaho le jaye ye nazare
dekhe koi meri nigaaho me pahchane ye ishaare
na na mujhe chhuna na door hi rakhna
pari hun main
pari hun main, mujhe na chhuna
pari hun main…"
मैनेजर ने हमारे लिए खाना परोसा तो लक्ष्मी आंटी हाथ धोने भागी।
मैनेजर (दबी आवाज में), "मैं समझ सकता हूं कि आप दोनों पर क्या गुजर रही होगी। मैं होता तो नजदीक के बार से शराब ला कर थोड़ी खुद पिता बाकी सब (बाथरूम की ओर देखते हुए) दूसरों को पिलाता। सुबह सर पकड़ कर सब शराब के नाम बोल देता। अफसोस मैं ऐसा करने की सलाह नहीं दे सकता।"
"बात हमारे घर तक की है और इसीलिए हमें ये अफसोस नजाने कब से है।"
मैनेजर अफसोस का भाव चेहरे पर रख चला गया और लक्ष्मी आंटी के बाहर आते ही हम सब कमरे का दरवाजा बंद करके हंसने लगे।
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विक्की
खाना खाने के बाद हम ने plates भिजवा दिए और वहीं नीचे टहलने लगे।
मैनेजर को आंखे दिखाकर लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों के बीच में आते हुए हमारे हाथ पकड़ लिए और हम सब बाहर गए।
"लक्ष्मी आंटी, उस मैनेजर को इतना भी मत डांटो। बेचारा अपना काम कर रहा है।"
लक्ष्मी आंटी, "बाबू आप दोनों को बड़ी बड़ी बातें समझ आती हैं पर मैं इंसान पहचानती हूं। ये कामिना आप को 3 कमरे लेने पर मजबुर करता और मालिक को 1 कमर दिखाकर बीच में खुद मलाई खाता। अगर मेरे साथ आप दोनों में से एक का नाम लिखवाते, तो जरूर बाद में फोन कर के ब्लैकमेल करने की कोशिश जरूर करता।"
सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को चिढ़ाते हुए कहा, "तो लक्ष्मी आंटी, आज रात को चुप चाप सो जाना पड़ेगा?"
लक्ष्मी आंटी ने नटखट मुस्कान देते हुए कहा, "बस आप दोनों मुझे इतना तंग मत करना की मेरी चीख निकल आए।"
हम सब ने हंसते हुए वापस होटल को रस्ता पकड़ा। मैंने होटल मैनेजर से बात की और सुबह जल्दी नाश्ता तयार रखने को कहा। लक्ष्मी आंटी ने मेरी बात सुन कर पूछा,
"बाबू, यहां तो छुट्टी पर आए हैं। तो आप को जल्दी क्यों उठना है? सो जाओ 1 दिन आराम से!"
"अरे लक्ष्मी आंटी, कल सुबह से बहुत बड़ा प्लान तैयार किया है। शाम होने तक पूरा हो जाए तो भी काफी।"
लक्ष्मी आंटी ने झूठे गुस्से में कहा, "आप प्लान मुझ से छुपाकर मुझे परेशान कर रहे हो।" और अपनी कमर मटकाती हुई कमरे में चली गई। तीन जोड़ी मर्दानी आंखें फिर मिली तो सन्नी ने बड़े भारी मन से कहा,
"चल हम भी सो जाते हैं। कल बहुत घूमना है।"
हम दोनों कमरे में दाखिल हुए तो लक्ष्मी आंटी बेड के बीच में सर तक चादर ओढ़े लेटी हुई थी। सन्नी ने दरवाजा बंद करके लॉक किया और बेड कि ओर बढ़ा।
लक्ष्मी आंटी ने हमें रोकते हुए कहा, "रुको! ये हमारे लिए नया बेड है। इसके साथ अच्छी यादें बनाना हमारा फ़र्ज़ बनता है।"
मुझे शक हुए और मैंने लक्ष्मी आंटी के पैरों पर से चादर को नीचे खींचा।
लक्ष्मी आंटी के बाल तकिए पर फैले हुए थे तो लक्ष्मी आंटी की आंखे शरारत से चमक रही थी। लक्ष्मी आंटी के कंधे खुले थे और उन पर camisole के पट्टे नहीं थे। चादर और नीचे खींचने पर लक्ष्मी आंटी के नंगी चूचियों पर जडी लाल बेरियों के ललचाते दर्शन हुए। लक्ष्मी आंटी ने मेरे सर पर अपना camisole फेंका और अपनी बाहों को खोल कर अपने खूबसूरत बदन को दिखाया। सन्नी ने मेरे हाथ में से चादर को खींच लिया और तेजी से नीचे खींचने लगा। लक्ष्मी आंटी के कसे हुए पेट के बीच में बने नाभि के कुंवे की गहराई साफ झलक रही थी। लक्ष्मी आंटी का बदन चादर के नीचे से खुलता गया और उसकी साफ गुप्तांग को पैरों के बीच दबाकर छुपाया देख हमारी हवस की आग और भड़क उठी। तभी लक्ष्मी आंटी ने अपने पैरों को फैला कर घुटनों को मोड़ते हुए उठाया।
लक्ष्मी आंटी की बुर बुरी तरह से पनिया रही थी और उसके चादर पर टपकते काम उत्तजना के आंसू हमसे देखे नहीं गए।
लक्ष्मी आंटी के इस चाल का मतलब समझते हुए हम दोनों ने अपने कपड़े उतार फेंके और लक्ष्मी आंटी पर कूद पड़े।
सन्नी, "लक्ष्मी आंटी, चाहे जो हो जाए पर चिल्लाना मत।"
अपना ही इशारा खुद को मिलने से लक्ष्मी आंटी चौंक गई। सन्नी ने अपने घुटनों को लक्ष्मी आंटी के फैले हाथों पर ऐसे रख दिया कि लक्ष्मी आंटी अपने हाथ बिना किसी तकलीफ के रख सकती थी और कोहनी से मोड़ सकती थी पर हाथ मिटा नहीं पाती। सन्नी का लंबा भाला लक्ष्मी आंटी के होठों को चूम रहा था तो लक्ष्मी आंटी ने अपनी जीभ से सन्नी के सुपाड़े को चाटते हुए अपनी होठों को सुपाड़े के ऊपर लगी खुली त्वचा पर लगाते हुए चूमने लगी। सन्नी ने बेड के सिरहाने को पकड़ बिना आवाज किए लक्ष्मी आंटी के अत्याचार को सहना शुरू किया।
अपने मित्र को बचाने के परम कर्तव्य के कारण मैंने लक्ष्मी आंटी के पैरों के बीच जा कर उसके पैर अपने कंधों पर रख दिए। मेरी नाक में लक्ष्मी आंटी की जवानी की मादक खुशबू चलने लगी तो लक्ष्मी आंटी को अपनी हार का अंदाजा हो गया। लक्ष्मी आंटी ने मुझे रोकने के लिए अपने पैरों को बन्द करने की कोशिश की पर मेरा सर बीच में पकड़ा गया और वह अपने हाथों से सन्नी को हटाने की कोशिश करने लगी।
सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के बाल पकड़ लिए और उसे अपने लौड़े को ज्यादा गहराई तक चूसने से रोका। मैंने अपनी जीभ से थुंकी की एक बूंद को लक्ष्मी आंटी के यौन मणि पर टपका दिया और फिर अपनी जीभ की नोक से उस बूंद को मणि पर मालिश करने के लिए इसतेमाल करने लगा। लक्ष्मी आंटी की बुर में सैलाब उमड़ पड़ा और काम रस की धारा बह उठी। लक्ष्मी आंटी ने अपनी पूरी उत्तेजना को सन्नी के सुपाड़े पर लगाया तो वह बेचारा कराहने लगा। मैंने अपने दोस्त को मिलती यातना को वापस देने की ठान ली और
लक्ष्मी आंटी के यौन मणि ने उत्तेजित हो कर त्वचा से बना अपना घर छोड़ दिया था और बाहर आ कर मेरी जीभ के हमले का सामना कर रहा था। मैंने अपने होठों को उस मणि के इर्द गिर्द बनी त्वचा पर रखते हुए जोर दिया और मणि को ज्यादा बाहर निकाला। अब अपने होटों को उस त्वचा से लगाकर अपनी जीभ से मणि को छेड़ते हुए चूमने लगा।
चूमने से मणि की उत्तेजना बढ़ी और होठों से मणि का पूरा आकार मेरे जीभ की पहुंच में था। लक्ष्मी आंटी की उत्तेजना ऐसे बढ़ी की उसका शरीर कांपने लगा और लक्ष्मी आंटी की चूत में से फव्वारे फुट पड़े। लक्ष्मी आंटी की चीखें सन्नी के सुपाड़े से होती हुई उसके अंडकोष तक पहुंची।
सन्नी बुदबुदाने लगा, "विक्की की गांड़! काले भैंसे की गोबर लगी गांड़! मोटे बूढ़े प्रोफेसर राव की ढीली पतलून!…"
सन्नी ने बड़े संयम से अपने स्खलन को रोका और लक्ष्मी आंटी बेड पर बेहोश हो गई। मैंने सन्नी की मदद करते हुए अपनी जगह उसे दे दी।
लक्ष्मी आंटी की आज खैर नहीं
48
सन्नी
मैंने विक्की के साथ 2 बार जगह बदली और लक्ष्मी आंटी से कभी चुसाया तो कभी चूसकर चाटा। जब दूसरी बार मेरा लौड़ा बड़ी मुश्किल से रोक कर लक्ष्मी आंटी के रसीले होंठों से दूर किया तो और सेह पाना ना मुमकिन था। विक्की ने लक्ष्मी आंटी के मुंह में अपना मूसल ढ़क्कन की तरह लगा दिया और मैंने लक्ष्मी आंटी के बाएं मम्मे को दबाते हुए उस पर जड़ी बेरी को अपने होठों में कस कर पकड़ लिया।
लक्ष्मी आंटी चुध चूध कर बेसुध हो गई थी। मैंने लक्ष्मी आंटी की चूची को चूसा तो वह बस "ऊंह!" कर पड़ी रही। मैंने लक्ष्मी आंटी की बहती यौन गंगोत्री को उसके भक्त की चोंच से स्पर्श किया तो लक्ष्मी आंटी को कुछ होश आया। मेरे सुपाड़े ने बिना किसी तकलीफ के एक साफ धक्के में अपने आप को लक्ष्मी आंटी की गहराई में गाड़ दिया।
लक्ष्मी आंटी, "अंह… हां… आंह… "
मैंने अपने लौड़े को सुपाड़े तक बाहर खींच लिया और 1 पल के लिए वैसे ही रुक गया। लक्ष्मी आंटी ने सिसकते हुए अपनी कमर उठाते हुए अपनी टांगों से मुझे पकड़ने की कोशिश की।
लक्ष्मी आंटी, "अन्ह… उम्म… उम्… "
मेरे धीरज की हालत धागे से टंगे पर्वत की तरह थी और धागा तो टूटना था। मैंने लक्ष्मी आंटी की गीली चूत के मज़े लेने के लिए अपने लौड़े को खुली छूट दे दी। लक्ष्मी आंटी के दूधिया गोले मेरे हर धक्के से हिचकोले खा रहे थे। लक्ष्मी आंटी ने अपनी पूरी ताकत से विक्की का लौड़ा चूसना शुरू किया। मैंने लक्ष्मी आंटी के यौन कूंवे से उड़ते गरम पानी के फव्वारों की मधुरता में खुद को भुलाकर उससे एक हो गया। लक्ष्मी आंटी अब तेज झड़ते हुए मानो एक बहुत लंबे स्खलन की शिकार हो गई। लक्ष्मी आंटी की झडती चूत में मेरा लौड़ा ऐसे निचोड़ लिया गया कि मैं अपनी एक एक बूंद उसकी कोख में उड़ेलकर ही रुका।
विक्की ने मुझे रुकने के बाद सुस्ताने का मौका नहीं दिया। मैंने अपने लौड़े को बाहर खींच लेते ही विक्की ने लक्ष्मी आंटी के अंदर मेरी जगह ले ली। लक्ष्मी आंटी को झडने से कोई राहत नहीं मिले यह जैसे विक्की ने ठान लिया था।
विक्की ने लक्ष्मी आंटी की तेज रफ्तार से ठुकाई करते हुए उसकी कोख में मेरा वीर्य पेल कर भर दिया। बचा कुचा जो रस अंदर रह नहीं पाया वह झाग बन कर लक्ष्मी आंटी की गीली चूत की शोभा बढ़ाने लगा। विक्की ने लक्ष्मी आंटी को कस कर पकड़ लिया और अपने लौड़े को जड़ तक घुसा दिया।
लक्ष्मी आंटी की आहें विक्की की आह में मिल गई और दोनों ढेर हो गए। रात के 10 बजने से पहले ही हम सब थक कर चूर होकर एक दूसरे की बाहों में सो गए।
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विक्की
मैनेजर ने तय समय पर सुबह 5 बजे फोन कर हमें उठाया। मैंने सन्नी को उठाया पर लक्ष्मी आंटी पहले ही उठ चुकी थी और टॉयलेट की बत्ती जल रही थी।
"नशेड़ी को नशा और लक्ष्मी आंटी को पढ़ाई से दूर रखना मुश्किल है।"
लक्ष्मी आंटी ने मुस्कुरा कर अपनी कॉपी बन्द करके कहा, "टीचर ने कहा है कि अगर मैं जल्दी से सब सीख लूं तो एक साल में मेरी डिग्री पूरी हो जाएगी। कल रात आप दोनों ने मुझे ऐसे थका दिया कि सुबह जल्दी आंख खुली। मैं आप दोनों को सोने को मिले इस लिए यहां बैठ गई।"
सन्नी ने मुंह धोते हुए कहा, "हमने बताया वैसे लक्ष्मी आंटी ने कोई कपड़े नहीं लिए पर अपनी कॉपी लेना नहीं भूली।"
हम दोनों ने वहीं अपने कपड़े उतारे और शॉवर में नहाने लगे।
लक्ष्मी आंटी, "वो सब छोड़ो। बाबू आप दोनों इतनी जल्दी क्यों उठ गए? अभी तो सूरज भी नहीं उगा!"
"यही सही वक़्त है यहां से निकलने का। मैनेजर ने चाय और नाश्ता तयार किया है। बेड पर तुम्हारे लिए नए कपड़े रखे हैं। जल्दी से निकलना है, तो कपड़े पहन कर नीचे आ जाओ।"
इतना कह कर हम चकराई लक्ष्मी आंटी को छोड़ बाहर आ गए और कपड़े पहन कर बैग भर दी। लक्ष्मी आंटी नहाकर बाहर आने से पहले ही हम सामान गाड़ी में रखने ले जा चुके थे।
लक्ष्मी आंटी ने लाउंज में अपने कदम रखने की खबर हमें मैनेजर के चेहरे से हुई। मैनेजर ने झट से अपने हाथ में से चाय का tray मेज पर रखा और सूखे गले के लिए पानी गटक लिया।
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लक्ष्मी आंटी हमारे पीछे से इठलाते हुए आई और हमें पीछे से एक साथ गले लगते हुए कहा,
"पता नहीं था कि कल रात मैं इतना थक गई थी। ऐसे सोई की अब नींद खुली। मैनेजर साहब आप का होटल मुझे बहुत पसंद आया। आप दोनों ये मत समझो कि मैं गांव से हूं तो गंवार हूं। मैं खूब जानती हूं कि बेड पर क्या बू आ रही थी। अगर मेरे होते हुए ऐसा दोबारा किया तो आप दोनों की शिकायत कर दूंगी।"
हम सब नाश्ता कर के जल्द ही गाड़ी में बैठ गए और गाड़ी निकल पड़ी। लक्ष्मी आंटी किसी बच्ची की तरह उतावली हो रही थी कि हम सब कहां जा रहे हैं? इतनी जल्दी से क्यों निकले? कब तक पहुंचेंगे? आधे घंटे बाद हम ने अपनी गाड़ी एक गांव की ओर मोडी और गाड़ी खुली जगह पर पार्क की। लक्ष्मी आंटी ने गाड़ी से बाहर दौड़ कर इर्द गिर्द देखा।
लक्ष्मी आंटी, "यहां पर कुछ नहीं दिख रहा! बस ये गांव का मंदिर और वो पहाड़।"
"अगर मैं ये कहूं कि इस मंदिर में मांगी हर बात मिल जाती है तो?"
लक्ष्मी आंटी, "बाबू आप दोनों के हाथ लगने के बाद मेरी सारी इच्छाएं पूरी हो गई है। और ज्यादा मांग कर लालची क्यों बनूं?"
सन्नी, "हाय लक्ष्मी आंटी! ऐसा कह कर तो तुमने हमें धर्म संकट में डाल दिया! ऐसे इंसान को क्या दें किसके पास सब कुछ है।"
"लक्ष्मी आंटी, कपड़ों से तो समझ गई होगी कि मंदिर नहीं जाने वाले। तो चलो सूरज बढ़ने से पहले पहाड़ चधते हैं।"
पहाड़ पर चढ़ने के लिए सीढ़ियां बनी हुई थी और हम सब खेल खेल में चढ़ने लगे।
थोड़ी ही देर में लक्ष्मी आंटी ने साबित कर दिया कि वह अब भी किसी पहाड़ी घोड़ी की तरह अपनी लंबी टांगों से कोई भी चढ़ाई पार कर सकती है। लेकिन हम दोनों शहरी अड़ियल टट्टू निकले जो रोज दिन में तीन बार लक्ष्मी आंटी की चढ़ाई कर झंडा गाड़ने के बाद भी आधे रास्ते में हांफने लगे।
लक्ष्मी आंटी, "हा! हा! हा! बड़े आए मुझे चौंकाने वाले! लगता है कि आप दोनों का पासा उल्टा पड़ गया! वैसे ये किला है ना? इसका नाम क्या है? ये इतना सुनसान क्यों है? यहां कोई आता जाता नहीं क्या?"
"हुफ… बताता हूं लक्ष्मी आंटी, बताता हूं। इस किले का नाम लोहगड है और यह एक जाना माना tourist spot है। पर आज गुरुवार की सुबह लोग बहुत कम आयेंगे। शनिवार रविवार को यहां भीड़ होती है। हम लगभग पहुंच गए हैं। उपर बैठ कर बात करते हैं।"
लक्ष्मी आंटी, "जो पहले पहुंचा वो राजा!!"
लक्ष्मी आंटी अपनी लंबी टांगों से सीढियों को पार करते हुए भाग गई।
सन्नी, "तुझे लगता है यहां हमें कोई पकड़ेगा?"
"पता लगाने का एक ही तरीका है। जो पहले पहुंचा वो राजा!!"
हम दोनों लक्ष्मी आंटी के पीछे भागने लगे।
50
सन्नी
लक्ष्मी आंटी ने अपनी लंबी टांगों के लुभावने दर्शन करते हुए किले की रानी का पद जीता तो हम दोनों एक साथ पहुंचने के कारण राजा न बनते हुए सिपहसालार बने। किले के विशाल दरवाजे के अंदर एक छोटा सा नया कमरा बना था जहां से हमें टिकट लेनी पड़ी। रानी साहिबा ने बड़े शान से हम तीनों की टिकट खरीदी और हम अंदर गए।
लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों के हाथों में अपने हाथ डाले और हम सब किला देखने लगे। लोहगड़ देखने का सही मौसम सर्दी या बरसात का होता है उसमें भी हम गुरुवार की सुबह वहां पहुंचे थे। पूरा किला मानो अतीत की स्मृतियां केवल हमारे लिए दिखा रहा था। सुबह होटल से नाश्ता करके निकले थे इसलिए हम सुबह 6 बजे लोहगढ़ के नीचे पहुंचे थे। उपर चढ ने में और 1 घंटा लगा तो हम सब किले में 7 के थोड़ी देर बाद पहुंचे। सूरज अभी उगा था और किले की सरद हवाओं में सूरज की किरणों की गरमी एक सुखद अनुभव था। किले के चार बड़े दरवाजे पार कर अंदर घूमने लगे। धान के पुराने गोदाम के आगे एक दर्गा बना था और आगे कुछ कमरे थे जिसमें लोग रहा करते होंगे।
लक्ष्मी आंटी, "बाबू, आप को लगता है कि यहां लोग रहते थे?"
सन्नी, "हमारे घर अगर 300 साल बन्द रहें तो ऐसे ही दिखेंगे। जो चुराने लायक था वो अंग्रेज ले गए और जो बचा वो वक़्त खा गया।"
लक्ष्मी आंटी, "मैं आज इस किले की रानी हूं और आप दोनों मेरे सिपाही। याद है ना?"
हम दोनों ने अपने सर हिलाकर हां कहा।
लक्ष्मी आंटी, "मुझे भूक लगी है और आप दोनों अभी मेरे लिए इंतजाम करोगे।"
"लक्ष्मी आंटी! यहां पर कुछ खाने को नहीं मिलता। खाने को अब नीचे जाने के बाद मिलेगा।
पानी पियोगी?"
लक्ष्मी आंटी ने मुंह फुलाकर कहा, "आप दोनों को तो कुछ समझ में नहीं आता।"
लक्ष्मी आंटी ने हमारे पीछे देखा और हमें खींच कर एक कमरे में ले गई। अंदर अंधेरा था और जमीन भी काफी मैली थी। लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को दरवाजे के बगल में खड़ा कर दिया और हमारे सामने घुटनों पर बैठ गई। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से हमारे लौड़े पैंट के ऊपर से सहलाते हुए हमारी चैन खोली और हमारे लौड़े बाहर निकले। आगे क्या होगा यह जानकर हम दोनों चुप चाप खड़े हो गए।
लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों को मुठ्ठी में मोड़ कर हमें हिलाने लगी और हम दोनों बड़ी मुश्किल से अपनी आहें दबाकर लक्ष्मी आंटी की मुठ मारने का मजा उठाने लगे। लक्ष्मी आंटी ने हमारे सुपाड़े को बारी बारी चूमकर उस गीला किया और उस पर आयी रस की पारदर्शी बूंद को चाट लिया। हम दोनों को उत्तेजना असेहनिय होने लगी थी कि लक्ष्मी आंटी अचानक उठकर बाहर भाग गई।
हम दोनों ने जैसे तैसे अपनी पैंट बन्द की और उसके पीछे भागने लगे। लक्ष्मी आंटी कुछ ही कदम दरवाजे के बाहर टिकिट बेचने वाले से टकराई थी और अब उसके पीछे छुप कर खड़ी थी। टिकट बेचने वाला हमारी ओर संदेह से देख रहा था।
"देखो साहब, यही है वो दो लोग जो मेरा पीछा कर रहे हैं। पकड़ो इन्हें!!", लक्ष्मी आंटी ने पीछे से कहा।
"लक्ष्मी आंटी! ये अच्छी बात नहीं! उस कमरे में हमें डराकर यहां हमारी शिकायत करना। चलो इन्हें सच बताओ!"
लक्ष्मी आंटी ने चिढ़ाते हुए कहा, "हां, मैंने आप दोनों को परेशान किया तो क्या? आप दोनों मेरा पीछा करते हुए बाहर आए हो!"
टिकट बेचने वाले आदमी ने सब को डांटते हुए कहा कि हमें यहां कोई बचकाने खेल नहीं करने चाहिए और संभलकर रहना चाहिए। हमने हां कहा तो एक बार और डांट कर वह वापस अपनी जगह पर चला गया।
लक्ष्मी आंटी, "मैंने कहा था कि मैं इंसान को पहचानती हूं। अगर हम मस्ती करते पकड़े नहीं जाते तो ये हमारे पीछे पीछे आता रहता। चलो अब हमें कोई तंग नहीं करेगा।"
कभी कभी लक्ष्मी आंटी से डर लगता है।
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विक्की
लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों के हाथों में अपने हाथ रख कर घूमना चालू रखा और जल्द ही हम वहां के महादेव मंदिर पहुंचे। हम सब ने वहां नमस्कार किया और आगे घूमने लगे। लोहगढ़ का किला जंग के हिसाब से बना था तो कई पानी की तालाब भी बने थे।
जैसे सूरज की गर्मी बढ़ने लगी तालाब के किनारे पर हम सब बैठ गए। लक्ष्मी आंटी ने तालाब के पानी से अपनी लंबी टांगों को धोते हुए कहा,
"पता नहीं, आप दोनों इतने कपड़े पहन कर इतनी गरमी कैसे सेह पाते हो? मेरा तो पूरा बदन जल रहा है।"
मैंने और सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के पानी में जाते ही बात कर ली थी। मैंने लक्ष्मी आंटी को तालाब की सीढियों पर मेरे पैरों के बीच में बैठने का इशारा किया।
लक्ष्मी आंटी मेरे पैरों के बीच मेरी छांव में बैठी और मैंने उसके सर को पकड़ कर उसे चूमने लगा। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के पैरों के बीच जा कर उस की पैंट उतार दी।
लक्ष्मी आंटी ने हमें रोकने की कोशिश की पर मुंह बन्द होने के कारण कुछ बोल नहीं पाई। सन्नी ने पैंट को लक्ष्मी आंटी के घुटनों तक उतार कर उसके पैर उठाए। अब लक्ष्मी आंटी की गीली चूत और कसी हुई गांड़ सन्नी की जीभ का हमला झेलने के लिए सामने थी। मैं और सन्नी पिछले साल में लक्ष्मी आंटी की सारी कमजोरियां सीख चुके थे और अब सन्नी ने लक्ष्मी आंटी की हर रग रग को चूम चाट कर छेडा। लक्ष्मी आंटी यूं खुले में होते प्रणय से डर गई थी पर साथी ही उत्तेजित भी थी। सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को चूम चाट कर उत्तेजना के शिखर पर पहुंचने पर अपनी जीभ को उसकी गरम योनि में भर दिया। लक्ष्मी आंटी ने मेरे सर को खींच कर मुझे चूमते हुए सन्नी को अपना पानी पिलाया।
जब पूरा पानी पी कर सन्नी उठा तो लक्ष्मी आंटी ने थक कर मेरे सीने पर अपने आप को छोड़ दिया। पर लक्ष्मी आंटी को इतनी सी सजा मिले यह कहां का न्याय होता? सन्नी ने लक्ष्मी आंटी को पकड़ कर मेरी जगह ले ली और उसकी जगह पर मैं बैठ गया। लक्ष्मी आंटी ने बस हलके स्वर में "कोई आ जाएगा।" की शिकायत की और मुझे अपने पैर खोल कर जगह दे दी। मैंने लक्ष्मी आंटी के यौन मणि को चूमते हुए उसकी चूत में अपनी दो उंगलियां डाल दी। लक्ष्मी आंटी चिहक के अपनी कमर उठाते हुए मेरा साथ देने लगी। मैंने पूरी तेजी से अपनी उंगलियों को आगे पीछे करते हुए लक्ष्मी आंटी को उत्तेजना में बनाए रखा पर झडने नहीं दिया। उत्तेजना वश लक्ष्मी आंटी का बदन अकड़ने लगा और वह कराहते हुए बोल पड़ी,
"बाबू ऐसे ना तड़पाओ! छुड़ा दो मुझे! झड़ा दो मुझे!…"
लक्ष्मी आंटी की हालत मुझसे देखी नहीं गई। खास कर इतनी उत्तेजना मैं झेल नहीं पाया और मैंने अपनी उंगलियों को लक्ष्मी आंटी की चूत में से निकाल कर उसकी गांड़ में भरते हुए अपनी जीभ को उसकी चूत में डाल कर हिलाने लगा।
लक्ष्मी आंटी की सहनशीलता का बांध टूटा और वह झड गई। लक्ष्मी आंटी के रस से मेरी जीभ ही नहीं बल्कि मेरा पूरा चेहरा भीग गया और मैंने उसके रस को तब तक पिया जब तक उसका बदन अकड़ना बन्द नहीं हुआ।
सुसताई लक्ष्मी आंटी को सन्नी ने चिढ़ाते हुए कहा, "क्यों लक्ष्मी आंटी? इतने में थक गई? अभी एक खास जगह देखनी बाकी है।"
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सन्नी
लक्ष्मी आंटी ने जैसे तैसे अपने आप को संभाला और हम सब लड़खड़ाते कदमों से आगे निकल पड़े। लक्ष्मी आंटी के पैर झडने से नरम हो गए थे तो हमारे पैरों के बीच लोहे के गरम डंडे ने घर बना लिया था।
थोड़ी दूर जाते ही लक्ष्मी आंटी ने डर से एक गहरी सांस ली।
लक्ष्मी आंटी, "बाबू, ऐसी जगह पर भी लोग जाते हैं? अगर पैर फिसला तो?"
सामने एक पट्टी लगी थी जिस पर लिखा था "विंचू कट्टा"
एक पतली पगडंडी किले में से निकल कर आगे लंबे पतले पहाड़ की चोटी पर के जा रही थी। ये पहाड़ की बाहर निकली लकीर नक्शे में किसी बिच्छू की पूंछ लग रही होगी। लक्ष्मी आंटी को ऊंचाई से डर लगना कोई बड़ी बात नहीं थी और इस लिए हम दोनों ने उसका हाथ पकड़ कर आगे बढ़े।
दोनों ओर गहरी खाई और ठीक सीधे दूरी पर लगा झंडा। यह दृश्य जितना अनोखा था उतना ही डरावना। एक एक कदम आगे बढ़कर हम आगे बढ़े। आगे रस्ता चौड़ा हो गया तो हम सब ने चैन की सांस ली। आगे रास्ते में एक छोटा तालाब जैसा अवशेष था उस पार कर के हम झंडे तक पहुंचे।
दूर दूर तक हवा की आवाज के सिवा कुछ नहीं था। किनारे पर बनी दीवार से नीचे गांव के घर किसी खिलौने की तरह दिख रहे थे। लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों को अपनी बाहों में भर लिया और हम दोनों को चूमा। भूखे शेरों को सहलाने की गलती का अंजाम लक्ष्मी आंटी को तुरंत पता चला।
मैंने लक्ष्मी आंटी को उठाकर झंडे के नीचे बने चबूतरे के नीचे लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया। लक्ष्मी आंटी ने "सन्नी बाबू!!" कर के मुझे रोकना चाहा पर अब रुकना मुमकिन नहीं था। मैंने लक्ष्मी आंटी की शॉर्ट्स को घुटनों के नीचे तक उतार कर उसके पैर फैलाए। अपनी पैंट की ज़िप खोल कर अपने गरम लोहे को आजाद किया।
लक्ष्मी आंटी ने ऐतराज़ में कहा, "कोई आ जाएगा… आ… हा… आह…"
लक्ष्मी आंटी के टॉप ऊपर सरका कर मैंने उसके मम्मे दबोच लिए और तेज रफ्तार से चोदने लगा।
लक्ष्मी आंटी ने मेरी पाशविक हवस से बचने के लिए विक्की की ओर देखते हुए पुकारा, "विक्की बाबू!! हा… बचाओ मुझे!! आ… कोई देख लेगा!! आह…"
विक्की ने कहा, "सन्नी अगर किसी ने देख लिया तो बेहती गंगा में हाथ धो लेगा। हमें यहां ज्यादा वक़्त नहीं लगाना चाहिए।"
विक्की की बात समझ कर मैंने पलट कर लक्ष्मी आंटी को अपने ऊपर खींच लिया। लक्ष्मी आंटी की एड़ियां शॉट्स में जकड़ कर मेरे घुटनों के बीच थी तो उसके घुटने मेरे दोनों ओर थे। लक्ष्मी आंटी ने उठने की कोशिश की तो मैंने उसे खींच कर चूमते हुए नीचे किया।
लक्ष्मी आंटी, "सन्नी बाबू, बाद में जो चाहे कर लो पर कोई आ गया आ!… आह… विक्की बाबू!!…"
लक्ष्मी आंटी की चीख दूर की पहाड़ियों तक गूंज उठी और हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को जोर जोर से पेलना शुरू किया। अब लक्ष्मी आंटी ने अपने होंठ दबाकर चुधने लगी पर उसकी आहें फिर भी निकल रही थीं।
"ऊंह… अम्म… हा… हनः… आह…"
सुबह से भूखे आदमखोर बाघ अपने शिकार पर झपटे तो क्या होना था। मैंने लक्ष्मी आंटी की चूचियां दबोच कर उन्हें मसलते हुए पीने लगा तो विक्की ने लक्ष्मी आंटी की गरदन पकड़ कर उसके कानों को चूमते हुए उसकी गांड़ में धमाचौकड़ी मचाने लगा।
लक्ष्मी आंटी अभी अभी झडकर जैसे तैसे अपनी सांसों को काबू में कर पाई थी पर अब उसका बांध फिर टूटने लगा। पर्वत के किनारे, सीधी गहरी खाई को देखते हुए मौत का डर होता है। साथ ही कभी भी किसी के भी हाथों पकड़े जाने का डर। इन सब के बीच चुधाई की जिंदगी की खुशी दिलाने वाला एहसास। ये सब मिलकर ऐसा उत्तेजक बनता है कि लक्ष्मी आंटी के गले से पतली चीख निकल पड़ी और उसकी चूत और गांड़ ने हम दोनों के लौड़ों को कस कर पकड़ कर निचोड़ लिया। हमारे लौड़ों ने तोप की तरह अपना गरम लोहा लक्ष्मी आंटी की गरमी में भर दिया और हम सब वहीं थक कर गिर गए।
"बुरे बाबू!! बारी बारी लेते तो क्या होता? उफ्फ अब मैं सीढ़ियों से नहीं उतरूंगी। आप दोनों मुझे नीचे ले चलो।", लक्ष्मी आंटी ने आदेश दिया।
विक्की ने लक्ष्मी आंटी के गले को पीछे से चूमते हुए कहा, "अरे लक्ष्मी आंटी, ऐसा मज़ा आने के बाद हम दोनों तो सीढ़ियों के उपर भी ले जाएं।"
पकड़े जाने के डर से हम तीनों ने अपने कपड़े ठीक किए और वापस जाने के लिए निकले। सुबह के 11 बज रहे थे और महादेव मंदिर के करीब हमें कुछ और सैलानी दिखे। शायद हमारे चेहरे से कुछ समझ आ रहा था कि लड़के लक्ष्मी आंटी को घुर रहे थे और लड़कियां आंखे फाड़ कर हमें देख रही थीं।
जब हम टिकट घर पहुंचे तो हमें देख टिकिट बेचने वाला हमें देखता रहा। हवस का नशा उतरने के बाद अब धीरे धीरे समझ आने लगा कि लोगों को पता कैसे चल रहा था। मेरी और लक्ष्मी आंटी के पीठ और घुटनों पर मिट्टी लगी थी तो विक्की के सिर्फ घुटनों पर मिट्टी थी। बालों की हालत, आंखों में चमक, लक्ष्मी आंटी के चेहरे पर लाली और हम सब के चेहरे की मुस्कान कुछ छुपाने के लिए नहीं थी। विक्की ने हंसना शुरु किया और हम दोनों उसके साथ मिल गए। मैंने विक्की का बैग पकड़ा और उसने ' रानी साहिबा' लक्ष्मी आंटी को अपनी पीठ पर उठा लिया। आधे रास्ते में विक्की से उसका हसीन बोझ छीन लेने के बाद जब मैं गाड़ी के पास पहुंचा तो लक्ष्मी आंटी ने शर्म से अपना मुंह छुपा लिया था। लक्ष्मी आंटी की इस मासूम अदाने हम दोनों को छू लिया। ऐसे लग रहा था कि लक्ष्मी आंटी को यहीं बीच बाजार चोद दें पर हमें आगे जाना था।
लक्ष्मी आंटी पीछे बैठी और हम सब वहां से गाड़ी में बाहर निकले।
लक्ष्मी आंटी, "बाबू आप दोनों तो हद कर दी!! अब तो आप दोनों के साथ मैं भीड़ की जगह कभी नहीं जाऊंगी।"
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विक्की
थक कर चूर चूर लक्ष्मी आंटी अपना सर पीछे रख कर पड़ी रही और हम गाड़ी अपने अगले पड़ाव तक ले गए। आधे घंटे बाद हम ने अपनी गाड़ी रोकी और नीचे उतरने लगे।
लक्ष्मी आंटी ने अपनी आंखे खोली और पूछा,
"हम इतनी जल्दी वापस आ गए? (बाहर झांक कर) बाबू, हम कहां आए हैं? ये सब क्या है?"
"हमारी प्यारी लक्ष्मी आंटी, ये camping ground है और आज हम सब यहां रहेंगे।
"
"बाबू आप दोनों को यूं खुले में करने से डर नहीं लगता? किसने देख लिया तो मैं बरबाद हो जाऊंगी।", लक्ष्मी आंटी ने गिड़गिड़ाते हुए कहा।
सन्नी, " लक्ष्मी आंटी तुम हमारे लिए कोई खिलौना नहीं जो हम औरों से बांटे। हमारी प्रेमिका सिर्फ हमारी रहेगी। ये जगह एक कैंपिंग साइट है और लोग यहां होटल की तरह ही रहते हैं। यहां खाना पानी तो है ही पर बिजली भी है। चलो दिखता हूं।"
लक्ष्मी आंटी को हम ने पूरे इलाके का मुआयना करने दिया। पावना तालाब के किनारे पर बना ये कैंप शहरी सुख सुविधाओं से लैस पर्यावरण का सुरक्षित आनंद लेने के लिए बना था। यहां शनिवार रविवार को भीड़ होती है पर गुरुवार को सब खाली था।
हम सब अपनी जगह पर लौट आए तब तक वहां कैंप के लोगों ने एक तंबू लगा दिया था और साथ ही बाहर सेंकने के लिए अलाव की व्यवस्था भी की थी। कैंप मैनेजर ने खाना परोसा था जो हम सब ने चट कर दिया। कैंप मैनेजर ने शाम को चाय लाने का वादा किया और चला गया।
सुबह की सैर या बाद में की गई खुले में चुदाई पता नहीं पर हम सब अब शांति का अनुभव कर रहे थे। गरमी के मौसम में दोपहर की धूप से बचने के लिए हम सब तंबू में पंखे के सामने बैठ कर गप्पे लडा रहे थे कि प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी को कॉल किया।
लक्ष्मी आंटी ने अपनी खुशी का पिटारा खोल कर प्रतीक को बताया कि हम सब सैर करने आए हैं और बड़े अरसे के बाद उसे यूं खुले आसमान को देखने की खुशी मिली है।
लक्ष्मी आंटी की बातें सुनकर प्रतीक ने उसे विश्वास दिलाया कि वह लक्ष्मी आंटी की खुशी में ही खुश है। प्रतीक ने आगे बताया कि MBS को उसका बनाया काम बहुत पसंद आया है और उसने प्रतीक को अपने खास गिरोह में शामिल कर लिया है। प्रतीक ने कहा कि और भी अच्छी बातें हो सकती हैं पर वह होने के बाद ही पता चलेगा।
लक्ष्मी आंटी ने अपने पति के खुशी में खुशी मान कर फोन रखा। मै और सन्नी कुछ देर बाद पास में रखी नाव में सवार होकर तालाब की सैर के लिए निकले। हमें पता था कि लक्ष्मी आंटी अपनी पढ़ाई के लिए उतावली हो रही थी। तालाब के बीच जा कर हम दोनों ने मछली पकड़ने के लिए पानी में कांटा डाला। खाली दिमाग शैतान का घर होता है तो हम उस शैतान का पूरा इसतेमाल करने का ठान चुके थे।
बातों बातों में हमारे दिमाग में एक कंपनी बनाने की कल्पना बनी। सूरज जमीन की ओर निकला तब तक हमारे हाथों में खाली कांटे और दिल में नए सपने थे। वापस लौट कर देखा तो चाय और नाश्ता लाया गया था। हमने लक्ष्मी आंटी को अपनी कल्पना बताई तो लक्ष्मी आंटी ने उसमें कई खामियां निकलते हुए उन्हें ठीक करने की सलाह भी दी।
सूरज ढलते हुए पहाड़ों की चोटियों के बीच समाने लगा और हम तीनों तालाब के बीच में नाव में बैठकर ये नजारा देख रहे थे। कोई अनजान ताकत हमें बता रही थी कि हमारी जिंदगी फिर से बदलने वाली है।
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सन्नी
अगर कोई छुप कर हमारी निगरानी कर रहा था कि लक्ष्मी आंटी के साथ हम दोनों कुछ करते हुए पकड़े जाएं तो उसे रात तक सिर्फ 3 दोस्त खेलते और हंसते हुए नजर आते। रात का खाना परोसा जाना था कि लक्ष्मी आंटी टॉयलेट की ओर गई। बस तभी प्रतीक ने मुझे message किया की उसका कॉल लक्ष्मी आंटी से छुप कर लिया जाए। इस प्रकार से उलझन में पड़ा था कि उसका कॉल आया। प्रतीक ने मुझे और विक्की को बताया कि MBS के लिए काम करते हुए उसे एक बड़ा आदमी मिला जिसने उसे एक खास शर्त पर बड़ी मदद करने का वादा किया है। शर्त और मदद दोनों बातों के बारे में सुनकर मैं समझ गया कि सच में हम सब की जिंदगी बदलने वाली है।
विक्की की आंखों में भी इस बात का असर दिख रहा था। हम दोनों ने प्रतीक से वादा किया कि हम दोनों उसकी हर संभव मदद करने के लिए तयार हैं। लक्ष्मी आंटी ने इठलाते हुए टेबल पर रखा खाना उठाया पर हमारे गंभीर चेहरे देख कर रुक गई।
लक्ष्मी आंटी ने पूछा, "क्या हुआ बाबू? आप दोनों मुझे ऐसे क्यों देख रहे हो?"
"कुछ नहीं, लक्ष्मी आंटी। हम दोनों बस ये सोच रहे थे कि पढ़ाई करना तो हमारी इच्छा थी जो हम दोनों की पूरी हो रही है। पर तुम तो मां बनना चाहती थी और हम दोनों ने तुम्हें अपनी इच्छा में खींच लिया।"
लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों के बीच में बैठ कर, "बाबू आप दोनों ने तो मुझे नई दुनिया दिखाई है। अगर मैं पहले मां बनती तो अपने बच्चे को क्या अलग जिंदगी देती? अब मैं अपना सपना साकार कर के अपने बच्चे को अच्छी तरह बढ़ाऊंगी। क्या ये कम है?"
हम सब ने अलाव जलाकर खाना खाया और बहुत जल्दी ही सोने चले गए। हम दोनों के मुरझाए चेहरे को देखकर लक्ष्मी आंटी ने मामला अपने हाथ में लिया। लक्ष्मी आंटी ने टेंट में रखे गद्दे पर हम दोनों को लिटाकर हमारी पैंट उतारी। हमारे तने हुए लौड़े टेंट की छत की ओर बढ़े देख लक्ष्मी आंटी मुस्कुराई।
लक्ष्मी आंटी, "चाहे जितना मुंह फुलाकर बैठो आप दोनों की चाबी मैं अच्छे से जानती हूं।"
लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से हमारे लौड़े को सहलाते हुए अपनी जीभ से बारी बारी चाटना शुरू किया। लक्ष्मी आंटी को कोई जल्दी नहीं थी और वह हम दोनों को तड़पा तड़पा कर मज़े ले रही थी। हमारे लौड़े जब लोहे की लाल छड बन गए तब लक्ष्मी आंटी ने एक गहरी सांस लेकर पूछा,
"अब बताओ, एक एक करके आओगे या एक साथ? अपना माल मेरे मुंह में डाल कर उसे जाया मत करना।"
लक्ष्मी आंटी की बात से मेरी आंखे खुली और मैंने उसे पीठ के बल लिटाकर उसके पैरों के बीच की गंगा को पीते हुए अपनी जीभ से उपर बने मोती सहलाने लगा। लक्ष्मी आंटी अब उत्तेजना से भर कर कसमसाने लगी। लक्ष्मी आंटी की बहती चूत में मैंने दो उंगलियां डाल कर उसकी योनी को अंदर से सहलाते हुए लक्ष्मी शरीर सुख के शिखर तक पहुंचाया।
इस दौरान विक्की लक्ष्मी आंटी के मम्मों को निचोड़ कर चूमते हुए उस पर जड़ी बेरीयों को दांत लगाकर उत्तेजित कर रहा था।
लक्ष्मी आंटी ने गिड़गिड़ाते हुए, "बाबू… आह… मत तड़पा… ओ… मुझे अपने आईं… लौड़े दो… चोदो…!!!"
मेरी उंगलियों को लक्ष्मी आंटी की तंग गली में पकड़ा गया और लक्ष्मी आंटी ने सिसकियां भर कर मेरी जीभ पर अपना रस उड़ेल दिया। लक्ष्मी आंटी झड कर निढाल हो गई तो मैंने विक्की के साथ अपनी जगह बदल ली।
ढीली पड़ी लक्ष्मी आंटी पर विक्की ने बेरहमी से हमला किया और अपनी उंगलियों से लक्ष्मी आंटी की चूत के रस लक्ष्मी आंटी की कसी हुई गांड़ के पोतने लगा। लक्ष्मी आंटी कुछ सुध लेने से पहले ही दूसरे हाथ की उंगलियों ने चूत में अपनी जगह बना ली और लक्ष्मी आंटी फिर से सिहरने लगी। लक्ष्मी आंटी की चूचियों पर उभरे हुए लाल मेवे को अपने दातों और होंठों से चूसते हुए अपनी उत्तेजना मैंने लक्ष्मी आंटी पर न्योछावर कर दी। लक्ष्मी आंटी को इस तरह लगातार झडने की आदत पड़ चुकी थी और उसके बदन में थरथराहट से लक्ष्मी आंटी की चीख निकल गई।
लक्ष्मी आंटी के पैरों को फैला कर विक्की ने उन्हें लक्ष्मी आंटी के कंधों से लगाया। मैंने लक्ष्मी आंटी को चूमते हुए उसके बालों में से हाथ फेरे और विक्की ने धीरे धीरे अपना सामान लक्ष्मी आंटी की कुप्पी में भर दिया।
प्यासे को पानी मिले वैसे लक्ष्मी आंटी ने विक्की के लौड़े को लेते हुए मुझे चूमा। विक्की ने लक्ष्मी आंटी को लंबे और धीरे धक्का देते हुए उसे चरम सुख की ओर ले गया। इस तरह प्यार से कि गई चूधाई से लक्ष्मी आंटी लगातार झडती रही पर विक्की ने अपना संयम नहीं खोया।
लक्ष्मी आंटी की तालीम में हम दोनों बहुत सीख चुके थे और आज हमारी गुरु दक्षिणा थी। लक्ष्मी आंटी को चोदते हुए जब विक्की को अपना नियंत्रण छूटता लगा तो मैंने उसकी जगह ले ली। लक्ष्मी आंटी की योनि गीली आग की तरह धुं धूं कर जल रही थी और मेरा लौड़ा इस हवन में जलकर उस आग को बढ़ा रहा था। लक्ष्मी आंटी ने अब गिड़गिड़ाना छोड़ दिया था।
"हंह… हुम्मम… आनः… आह… हाः… ऊंह… उम्म्म… उम्मम… हा… हा… हा… हा…ह!!", की पुकार के साथ लक्ष्मी आंटी तो बस काम उत्तेजना में जलता हुआ देह था।
लक्ष्मी आंटी की गरम गहराइयों में अपनी शिक्षा से मिले हुनर को साबित करने के बाद मैंने अपने लौड़े के जड़ पर अपना उबलता हुआ वीर्य महसूस कर अपना लौड़ा बाहर खींच लिया। विक्की अब अपनी बेसबरी पर काबू पाने में सफल हो गया था और उसने मेरी जगह ले ली।
लक्ष्मी आंटी ने हमारी जगह बदलने का फायदा उठाकर विक्की को अपने पैरों से जकड़ लिया।
विक्की भी अब ज्यादा रुक नहीं पता पर फिर भी उसने बड़ी हिम्मत से लक्ष्मी आंटी का पानी दो बार निकालने के बाद ही कराहते हुए अपना रस लक्ष्मी आंटी की कोख में उड़ेलकर लक्ष्मी आंटी को चूमने लगा।
लक्ष्मी आंटी की आंखों में थकान से आंसू थे और उसने विक्की को अपनी बाहों में भर कर मानो उसकी ताकत महसूस कि। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की बाहों में से बाहर निकलते हुए मुझे जगह दी तो लक्ष्मी आंटी ने विरोध किया।
लक्ष्मी आंटी, "मैं थक गई हूं सन्नी बाबू। कल सुबह आप जितना चाहे प्यार कर लो। छिल जाऊंगी अब और प्यार मिला तो। सन्नी बाबू आह… आ… हा… हा… उन्हहह… आहा… आ!"
मैंने लक्ष्मी आंटी की चूत के अंदर सन्नी के वीर्य को अपने लौड़े से मथते हुए अपना हथियार जड़ तक भर दिया। लक्ष्मी आंटी के माथे को चूमते हुए उसकी भौं में जमे पसीने के अपने होठों पर लगाया। लक्ष्मी आंटी की योनि रसों की टंकी बन कर बह रही थी और मैंने अपने लौड़े को बाहर निकाल कर तेज धक्का दिया।
"मां… आह… सन्नी बाबू… पेलो… चोदो… लूटो मुझे… हां… हां… अन्ह… आंहा… और… और… और…", लक्ष्मी आंटी ने आहें चीखें बन गई और पूरा तालाब हमारे यौन मिलन के संगीत में डूब गया। लक्ष्मी आंटी के कान कि बाली को अपने होठों में दबा मैंने लक्ष्मी आंटी को तेज रफ्तार लंबे धक्कों से पेलना शुरू किया। लक्ष्मी आंटी फिर से शब्द भूल कर जानवरों की तरह चिल्लाते हुए अपनी हवस का पिटारा खोल मेरा लौड़ा अपनी योनि से निचोड़ने लगी। अगर झडता तो गुरु दक्षिणा अधूरी रह जाती इसी लिए मैंने ताबड़तोड़ ठुकाई के बीच भी अपने नियंत्रण के कच्चे धागे को थामे रखा।
लक्ष्मी आंटी ने घायल शेरनी की तरह अपने नाखून मेरे पिछवाड़े में धंसा ते हुए अपनी कमर को उठाया। लक्ष्मी आंटी के दातों ने अब मेरा कंधा दबोच कर मेरी त्वचा फाड़ दी थी।
दर्द का भी अपना मज़ा होता है।
लक्ष्मी आंटी की दूसरी चीख ने मेरा बांध तोड़ा और मैंने लक्ष्मी आंटी को अपनी गरमी का पूरा मज़ा दिया। लक्ष्मी आंटी ने मुझे अपनी बाहों में भर कर रोना शुरू किया दिया।
"क्या हुआ लक्ष्मी आंटी? दर्द हुए? छिल गया? तकलीफ हुई?"
लक्ष्मी आंटी ने बस मेरे गले में अपना मुंह छुपा कर मुझे पकड़े रखा। कुछ समय बाद लक्ष्मी आंटी ने मुझे थोड़ा छोडा पर सिर्फ विक्की को अपने साथ लेने के लिए। आगे शब्द बेकार थे और सांसे सच्चाई बयां कर रही थीं। हम सब अपने अपने विचारों में डूब कर सो गए।
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विक्की
तालाब के किनारे पर सबेरे सर्दी होती है और रजाई में लक्ष्मी आंटी की गरमी और भी लुभावनी लगती है।
सन्नी ने लक्ष्मी आंटी की चूची को चूमते हुए उसे चूसना शुरू कर दिया और अपना हाथ उसके पैरों को फैला गीली गरमी के उपर बने मोती को रगड़ने लगा।
मैंने दूसरे मम्मे को अपने होठों से पकड़ते हुए अपनी जीभ से चूची को छेड़ते हुए चूमने लगा और अपनी उंगली को लक्ष्मी आंटी की गरमी में भर दिया। लक्ष्मी आंटी तिलमिलाकर उठी और आहें भरते हुए हमारे बाल पकड़ कर अपने भरे हुए मम्मों पर दबाने लगी।
लक्ष्मी आंटी की आग बुझाना उतनी ही हमारी जिम्मेदारी थी जितनी उस आग को जलाना हमारा फ़र्ज़ बनता था। लक्ष्मी आंटी का बदन थरथाया और लक्ष्मी आंटी की चीख निकल गई। लक्ष्मी आंटी ने झडने के बाद हमारे सर को बाल पकड़ कर उठाया और कहा,
"क्या हो गया है आप दोनों को? कल रात को आप दोनों ने कुछ कम परेशान किया था जो ऐसे उठाया? कोई देख या सुन लेगा तो?"
"अरे लक्ष्मी आंटी, आज यहां कोई नहीं होगा। यहां सिर्फ शनिवार रविवार को चहल पहल होती है। आज तो नाश्ता भी देर से आयेगा।"
लक्ष्मी आंटी को विश्वास नहीं हो रहा था तो मैंने तंबू के परदे खोल दिए और नंगा ही बाहर टहलने लगा। जहां तक नजर जाए इंसान का कोई पता नहीं था। सन्नी भी बाहर खड़ा था और अपने इर्द गिर्द देख रहा था।
कुछ समय बाद टॉयलेट में से flush के आवाज के साथ लक्ष्मी आंटी बाहर आई। लक्ष्मी आंटी ने अब भी पतला satin gown पहन रखा था। बाहर भोर का हलका उजाला सुबह की याद दिला रहा था।
लक्ष्मी आंटी ने हम दोनों की ओर देखते हुए एक पल में पहचान लिया के हमारा विचार क्या है और तंबू में छुपने भागी। हम दोनों ने लपक कर लक्ष्मी आंटी को दबोच लिया। मैंने लक्ष्मी आंटी को अपने कंधे पर रख लिया और सन्नी ने लक्ष्मी आंटी का gown उतार फेंका। लक्ष्मी आंटी ने हलकी चीख से अपने बदन को ढकने की कोशिश की पर मैंने लक्ष्मी आंटी को तालाब किनारे रखे गद्दे पर पटक दिया।
लक्ष्मी आंटीने "आह… विक्की बाबू!!!" चिल्ला पड़ी की सन्नी ने उसके मुंह में अपना मूसल ठूंस दिया। आदत से मजबुर लक्ष्मी आंटी की तुरंत सन्नी के लौड़े को पूरा निगलकर चुस्कियां लेते हुए चूसने लगी। मैंने लक्ष्मी आंटी की भट्टी में अपना लोहा पेल दिया और तेज रफ्तार से चोदने लगा। लक्ष्मी आंटी एक हाथ से सन्नी को पकड़ा था तो दूसरे से अपने यौवन के दाने के साथ खेलने लगी। मैंने लक्ष्मी आंटी के दोनों गोले मेरे हाथों में लेकर उन्हें मसलते हुए लक्ष्मी आंटी को तेज धक्कों से चोदता रहा। लक्ष्मी आंटी ने सन्नी के लौड़े पर अपनी चीख को दबाकर झडते हुए मेरे लौड़े को कस कर निचोड़ा।
लक्ष्मी आंटी की उत्तेनापूर्ण चुदाई के कारण कम दोनों जैसे तैसे अपने आप को संभाल पाए। और सहना मुश्किल होगा यह जानकर मैंने लक्ष्मी आंटी के उपर लेट कर पलटी मारी। अब लक्ष्मी आंटी ने मेरी सवारी करते हुए सन्नी को चूसने के लिए हाथ बढ़ाया। सन्नी के दिमाग में कुछ और ही था।
सन्नी ने लक्ष्मी आंटी की गांड़ को अपने पंजों से खोल कर अपने गरम लोहे के छड़ को लक्ष्मी आंटी के संकरी गली के मुहाने पर रखा। लक्ष्मी आंटी मुझे अपनी चूची खिलाते हुए चीखी,
"सन्नी बाबू! मेरी गांड़ मरो सन्नी बाबू!! भर दो अपनी लक्ष्मी को!! आह… मां… हा… हा… हा…"
लक्ष्मी आंटी के मम्मो को पकड़कर उन पर उभरी चूचियों को दबा कर चूसते हुए मैं लक्ष्मी आंटी को उत्तेजना के साथ ही आधार भी दे रहा था। लक्ष्मी आंटी तो अपनी सुध बुध छोड़ कर शरीर सुख के सागर में गोते लगाने में व्यस्त थी। लक्ष्मी आंटी अपनी छाती को मुझ पर दबाकर अपनी कमर हिलाते हुए हम दोनों प्रेमियों का पूरा मज़ा ले रही थी। सन्नी के लौड़े की रगड़न चूत और गांड़ के पतले परदे से मेरे लौड़े को और भी मज़ा दे रही थी।
अब सुबह से सुलगता वीर्य हमारे गोटों को गरमाते हुए दोबारा लक्ष्मी आंटी की गरमी में मिलने दौड़ा तो मैंने उसे नहीं रोका। सन्नी के तेज रफ्तार झटके बता रहे थे कि अब वह भी अपना रस उड़ेलने को बेताब है। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उत्तेजना की हदें पार करते हुए झडने की लड़ी लगा दी। सन्नी के लौड़े से वीर्य की पहली पिचकारी से मेरा भी रस छूट गया और लक्ष्मी आंटी के दोनों तरफ गरमी भर गई। लक्ष्मी आंटी ने सर उठाकर उगते सूरज को हमारे रस की गरमी का गीत सुनाकर मेरे ऊपर लेट गई।
कुछ देर ऐसे ही पड़े रहने के बाद लक्ष्मी आंटी ने कहा, "अगर किसीने कहा होता की सूरज का स्वागत ऐसे भी हो सकता है तो मैंने उसे पागल कहा होता। आप दोनों बहुत बुरे हो। आप मुझे बिगड़ दोगे।"
"अरे लक्ष्मी आंटी, अगर अब तक बिगड़ी नहीं हो तो यही हमारी नाकामयाबी होगी!"
हम सब ने हंसी मजाक में कपड़े पहन लिए और वापस तालाब किनारे बैठे की नाश्ता ले कर कैंप के लोग आ गए। नाश्ता करके मैं और सन्नी trekking करने गए तो लक्ष्मी आंटी ने सुबह की अधूरी पढ़ाई पूरी करना जरूरी समझ कर आने से मना कर दिया।
Trekking में आगे बढ़ने के बाद मैंने सन्नी से कहा, "लक्ष्मी आंटी के बारे में प्रतीक ने जो तय किया है उस बारे में सोच रहा हूं। हम प्रतीक की मदद कर लक्ष्मी आंटी को मुसीबत में न डाल दें।"
सन्नी, "जिंदगी कुछ ऐसी ही है मेरे दोस्त। किसने सोचा था कि हम दोनों किसी के साथ बलात्कार करेंगे?"
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सन्नी
पिछले दो महीने कुछ अलग थे। विरह की आने वाली चोट और साथ में खामोशी की चुभती जलन हम सब को तकलीफ दे रही थी। लक्ष्मी आंटी को अपने लिए वक़्त मिलना मुश्किल हो गया था।
लक्ष्मी आंटी को अब दोपहर को ही पूरी पढ़ाई करनी पड़ती थी क्यूंकि कॉलेज से वापस आते ही हम दोनों उस पर टूट पड़ते। कोई एक पढ़ाई करता तो दूसरा लक्ष्मी आंटी को चोदने में लगा रहता। लक्ष्मी आंटी ने तो चुदाते हुए ही खाना पकाना और बरतन मांजना शुरू कर दिया था।
रात को सोते समय हम दोनों बड़े प्यार से उसे फिर से चोदते और उसे अपने बाहों में लेकर सोते।
लक्ष्मी आंटी समझ गई थी कि हम दोनों कोई राझ रख कर हैं पर उसने पूछा नहीं। कॉलेज में जाते हुए प्रतीक का कॉल आया और हम समझ गए कि अब वह दिन आ गया है। शाम को हमने लक्ष्मी आंटी को कहा कि वह कल फिर से दुल्हन का श्रृंगार कर अपने प्रेमी का इंतजार करे जैसे उसने पहले दिन किया था। लक्ष्मी आंटी हमारे सुझाव से चौंक गई और खुश भी हुई। उस रात मैं और विक्की लक्ष्मी आंटी को चोद नहीं पाए। हम दोनों बस लक्ष्मी आंटी के साथ बातें करते रहे और रात को उसे अपनी बाहों में भर कर सो गए।
अगली शाम को हम ने घर का दरवाजा खोला तो हॉल खाली था और लक्ष्मी आंटी ने आवाज दी की हम नहा कर अंदर आएं। मैं और विक्की अंदर गए और लक्ष्मी आंटी को बेड पर दुल्हन की तरह बैठे पाया।
"लक्ष्मी आंटी, तुम तो बहुत सुंदर लग रही हो! पर आज बन्द आंखों से तुम्हे अपने पती को पहचानना होगा।"
विक्की ने लक्ष्मी आंटी की आंखों पर पट्टी बांध दी और हम दोनों बाहर आ गए। कुछ ही देर में लक्ष्मी आंटी के पति ने नहा कर तयारी कर ली और लक्ष्मी आंटी को प्यार करने अंदर पहुंचा।
लक्ष्मी आंटी के बगल में बैठ कर उसने लक्ष्मी आंटी के माथे पर लगे सिंदूर को चूमा।
लक्ष्मी आंटी, "बाबू संभाल कर! सिंदूर को मत चेडना!!"
जैसे ही लक्ष्मी आंटी के होंठों से होंठ टकराए, लक्ष्मी आंटी के होंठ खुल गए और तुरंत बन्द हो गए। लक्ष्मी आंटी ने अपने पति को धक्का दे कर दूर करते हुए कहा, "क… कौन…? कौन ? कौन है? सन्नी बाबू! विक्की बाबू! ये मजाक ठीक नहीं!! छोड़ो ! छोड़ो मुझे!! सन्नी बाबू!! विक्की बाबू!! बचाओ!!.…"
छटपटाहट में लक्ष्मी आंटी की आंखों से पट्टी उतर आई और वह अचानक रुक गई।
लक्ष्मी आंटी, "जी? आप?"
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विक्की
लक्ष्मी आंटी की आहों से bedroom पूरी शाम गूंजती रही और हम दोनों बाहर बैठ कर खामोशी से लक्ष्मी आंटी की खुशी में अपनी खुशी मानते रहे। तीन घंटों के घमासान द्वंद्व के बाद लक्ष्मी आंटी बेड पर निढाल होकर पड़ी रही और प्रतीक लड़खड़ाते कदमों से बाहर आ गया।
प्रतीक की हालत देख मुझे farmhouse पर बिताई पहली रात याद आई। शर्माती हुई जीत की मुस्कान प्रतीक के चेहरे पर लाली बन कर फैली हुई थी। प्रतीक को चिढाना वैसे तो आम बात होती पर लक्ष्मी आंटी के साथ हम दोनों ने बनाए संबंध को याद कर हम चुप रहे।
"एक भुख मिट गई हो तो दूसरी का हल ढूंढे?"
प्रतीक ने कहा कि उन्हें भी भुख लगी है तो मैंने फोन कर पिज़्ज़ा मंगवाया। हम सब हॉल में बैठ कर इधर उधर की बातें करते हुए पिज़्ज़ा का इंतजार कर रहे थे कि लक्ष्मी आंटी ने दीवार को पकड़ते हुए हॉल में कदम रखा। हम सब को बाहर देख लक्ष्मी आंटी शर्म से पानी हो गई तो प्रतीक ने उसे अपनी बाहों में लेते हुए हम सब के साथ बिठाया।
लक्ष्मी आंटी के चेहरे पर लाली छाई हुई थी और वह आंखों के किनारे से हम सब को देख रही थी। लक्ष्मी आंटी को चिढ़ाने से हम बाज नहीं आए।
"अरे लक्ष्मी आंटी, क्या हुआ? अभी इतना थक गई? प्रतीक जी तो आप के लिए ही छुट्टी पर आए हैं!"
सन्नी, "लक्ष्मी आंटी तुम्हारे पास मेकअप का सामान है ना? लगता है कल सुबह गरदन, गाल और कान पर नहीं लगाया तो पूरा कॉलेज जान जाएगा कि जी छुट्टी पर आए हैं।"
लक्ष्मी आंटी शर्माती हुई प्रतीक के बाहों में मुंह छुपा कर हंसने लगी और प्रतीक किसी मोर की तरह खिल उठा।
पिज्जा आया तो हम सब खाने लगे और मुख्य बात बाहर लक्ष्मी आंटी ने लाई।
लक्ष्मी आंटी, "बाबू आप दोनों ने जी के आने की बात छुपाई सो ठीक। पर क्या बाकी हिस्सों में जो हुआ है वह आप दोनों को पता नहीं था?"
"लक्ष्मी आंटी अंदर से आती आहें हम दोनों को कब से उलझाए हुए हैं। तुम ही बताओ कि ये माजरा क्या है?"
प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी की उंगलियों को अपने होठों से छू कर अपनी कहानी बताने लगा।
प्रतीक, "जब मैं खाड़ी के पार पहुंचा तो मैं कई मजदूरों की भीड़ में से एक हो गया। लेकिन मेरे मन में ये आग जलती रही की इतने सालों तक लक्ष्मी को परेशान करने के बाद अब मुझे अपने आप को लक्ष्मी की नजरों में साबित करना है।
बदन की मेहनत करने वालों की वहां कोई कमी नहीं, इसलिए मैंने अकल से काम करना शुरू किया। पहले कुछ समय तक तकलीफ हुई पर अकेले काम करना मेरे लिए नया नहीं था और मैं अपना हुनर आजमाता रहा। इसी तरह एक दिन मुझे एक बड़े होटल का काम करते हुए Amber ने देखा। मेरी कारीगरी से खुश होकर उसने मुझे अपनी खास team में ले लिया। मुझे बाद में पता चला कि Amber कोई interior designer या architect नहीं बल्कि MBS की तीसरी बीवी है। उसके साथ काम करते हुए मैंने कई नामी हस्तियों से मुलाकात की और उन्हीं में से एक है Dr. Balakrishna जो पुरुष रोग के बड़े जानकार हैं।
दर असल बात ये है कि वहां के अमीरों में दिखावे की होड़ लगी रहती है। बड़ी गाडियां, बड़े जहाज, हवाई जहाज, ज्यादा और खूबसूरत बीवियां और ऐसे ही। लेकिन अब जब सब के पास यह सब है तो और किस बात का दिखावा हो? मर्दानगी का! Dr. Balakrishna ने मुझे check up के बाद बताया कि मेरी खड़ा करने की नस कट गई है पर संवेदना बाकी है। Dr Balkrishna ने मेरे लौड़े में कुछ ऐसा कर दिया है कि अब मेरा लौड़ा कभी नरम नहीं हो सकता।"
लक्ष्मी आंटी के मुंह से "हे भगवान!!" निकल आया और हम सब हंस पड़े।
सन्नी, "ये तो बहुत अच्छा हुआ। अब आप दोनों को अपनी जिंदगी जीने में कोई रुकावट नहीं रही। मुबारक हो।"
मुझे लगा था कि हम दोनों का आशीर्वाद मिलने से प्रतीक खुश हो जाएगा पर ऐसा कुछ हुआ नहीं। प्रतीक ने अपना सर झुकाकर लक्ष्मी आंटी की ओर देखते हुए कहा,
"लक्ष्मी मुझे माफ करना पर दुनिया में मुफ्त कुछ नहीं होता।
Dr Balkrishna ने जो operation किया है उसके लिए मुझे कॉन्ट्रैक्ट करने पड़े। एक शर्त यह है कि मैं अगले 3 साल तक वापस नहीं आ सकता। Dr Balkrishna न केवल वहां मेरी हालत पर नजर रखेंगे पर मुझे उनके कहने पर अलग अलग शेख के सामने उनके काम को साबित करना होगा।"
लक्ष्मी आंटी ने चौंक कर, "मतलब?"
प्रतीक ने एक गहरी सांस लेकर कहा, "सच्चाई तो यह है कि कुछ शेख को नवाबी शौक होता है। लोगों को दिखाने के लिए 4 बीवियां कर लें फिर भी प्यार अपने ड्राइवर या assistant से ही कर सकते हैं। मैं नाम नहीं ले सकता पर ऐसे ही एक बड़े आदमी ने मेरी मदद करने के बदले अगले 3 सालों तक अपनी बीवियों को संभालने की बात की है। अगर उसका या उसकी किसी भी बीवी का नाम आया या मैंने वादा तोड़ा तो शेख मुझे मार कर ही दम लेगा। मगर मैंने अपना वादा पूरा किया तो 3 साल बाद शेख न केवल मुझे लौटने देगा पर हमारे लिए कई दरवाजे खोल देगा।"
लक्ष्मी आंटी ने प्रतीक को गले लगाया और रोने लगी।
लक्ष्मी आंटी, "क्यों किया ऐसा? मैं आप के साथ खुशी खुशी अपनी जिंदगी हमारे झोंपड़े में बीता लूंगी। आप मेरे दोस्त हो पर मैं फिर भी आप से प्यार करती हूं। मुझे बोल दिया होता तो मैं आप को रोक देती। क्यों अपनी जान जोखिम में डाल दी?"
प्रतीक, "लक्ष्मी मेरी तरफ देखो। क्या मेरी आंखों में डर है? मैंने ये तुम्हारे लिए नहीं किया। मैंने ये हमारे लिए किया है। मैं जानता था कि तुम मना कर देती इसीलिए तुम सब से ये बात छुपाई। लक्ष्मी मैं भी तुम से प्यार करता हूं। मैं तुम्हारे साथ एक फलता फूलता परिवार चाहता हूं। तुम्हें मां बनते हुए देखना चाहता हूं। इस के लिए ये बस छोटी सी कीमत है। तुम अपनी पढ़ाई पूरी करने पर ध्यान देना और हम जल्द ही अपना घर बसाएंगे।"
लक्ष्मी आंटी ने प्रतीक के सीने में अपना मुंह छुपा कर कहा, "आप को उस शेख की बीवी पसंद आ गई तो?"
प्रतीक ने हंसकर, "तो उसे भी ले आऊंगा। दोनों मेरा खयाल रखना आ…!"
लक्ष्मी आंटी ने प्रतीक को काट लिया देख हम दोनों हंसते हुए लोट पोट हो गए और लक्ष्मी आंटी ने अपनी मुंह को अपनी हाथों में छुपा लिया।
सन्नी, "प्रतीक, लक्ष्मी आंटी ने तुम्हे अपना मान लिया है। लक्ष्मी आंटी उन्हें ही तकलीफ देती है जिन्हे वो अपना मानती है।"
प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी का हाथ खोल कर उसके होंठों को चूमते हुए कहा, "जान तेरे लिए मैं मौत से खेल सकता हूं। अगर ऐसा है तो किसी और के लिए मैं तुम्हे कैसे छोड़ सकता हूं।"
लक्ष्मी आंटी को प्रतीक ने अपनी बाहों में भर लिया और हमारी ओर देखते हुए कहा,
"आप दोनों ने लक्ष्मी के लिए जो किया है मैं उसे कभी भूल नहीं सकता। अगले 3 साल लक्ष्मी का ऐसे ही खयाल रखना। हां… मैं सच में यही चाहता हूं।"
प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में लेते हुए बेडरूम की तरफ चलने लगा।
Bedroom के दरवाजे में रुक कर प्रतीक ने कहा,
"आ जाओ! मुझे सीखोगे नहीं औरत को खुश करने के तरीके? पूरी रात है सीखने सिखाने के लिए।"
58
सन्नी
प्रतीक के बुलाने पर हम दोनों भी बेडरूम में आ गए। लक्ष्मी आंटी बेड पर शर्माकर बैठी थी। प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में लेते हुए उसके माथे पर लगे सिंदूर को चूमा और लक्ष्मी आंटी को बेड पर लिटाकर चूमने लगा। लक्ष्मी आंटी ने शर्माते हुए प्रतीक को रोका और कहा,
"जी, मुझे शर्म आती है। बाबुओं के सामने कैसे? और आप? नहीं…?"
प्रतीक, "वहां जब मुझे दूसरी औरतों के साथ रहना होगा तब मुझे बुरा लगे कि मैं तुम्हारे साथ धोखा कर रहा हूं, यह सही होगा? नहीं? जान, मैंने हमारे लिए खुशी और परिवार चुना है। लेकिन अगर तुम अपनी खुशी से मुंह मोड़ लोगी तो मैं कैसे खुश हो सकता हूं?"
प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी को चूमते हुए लक्ष्मी आंटी के हाथ उठाए और बेड के सिरहाने बांध दिए। लक्ष्मी आंटी ने अपने आप को बेबस पाकर चैन की सांस ली। अब उसे अपने पति से धोका करने का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। प्रतीक ने कमरे के उजाला कर दिया और कहा,
"बाबू, जैसा कि आप दोनों जानते हैं। मैंने जवानी के खेल में आज ही पहल की है। पर वहां शेख के हिसाब से मैं कई साल का माहिर हूं। अगर शेख की बीवी ने खुशी नहीं मिलने का कहा तो मुश्किल होगी। आओ अब मुझे वो सब सिखाओ जो आप दोनों ने सीखा है।"
मैंने और विक्की ने इस बात पर सोच कर फैसला लिया की प्रतीक को पहले सीखना होगा और फिर अनुभव करना होगा। प्रतीक ने हमारी बात मान ली और एक कुर्सी ले कर बेड के नीचे बैठ गया।
मैंने और विक्की ने प्रतीक को सिक्का उछाल कर हम दोनों में बारी तय करने को कहा। पहली बारी जीत कर विक्की ने लक्ष्मी आंटी को चूमते हुए प्रतीक को चूमने की कला सिखाई। लक्ष्मी आंटी ने उत्तेजना वश आहें भरते ही विक्की ने अपने होंठ नीचे लेते हुए दूधिया गोलों पर लाए। विक्की एक गोले को चूम रहा था तो दूसरे को अपने पंजे में दबोच कर उस पर बनी चूची को छेड़ रहा था। लक्ष्मी आंटी ने उत्तेनापूर्ण हरकतों से अपनी पीठ उठाते हुए अपनी चूची विक्की के मुंह में दबाने लगी। विक्की ने लक्ष्मी आंटी की चूची को चूसते हुए अपने घुटने से लक्ष्मी आंटी के पैरों को फैला दिया। लक्ष्मी आंटी की पनीयाई बुर से बहती धारा साफ नजर आ रही थी।
"प्रतीक औरत और मर्द के बीच एक खास फर्क यह है कि मर्द बिजली के बल्ब की तरह तुरंत तयार हो जाता है पर औरत बिजली की इस्त्री की तरह धीरे धीरे तपती है और काफी देर तक गरम रहती है। तो एक बात हमेशा याद रखना। लक्ष्मी आंटी को तब तक गरम करना जब तक तुम से रहा जाए और उसके बाद 10 मिनिट तक अधिक करना।"
प्रतीक सच में लक्ष्मी को खुश रखने के लिए कुछ भी करने को तैयार था।
वह लक्ष्मी आंटी को चुधते देखने के लिए भी तयार था ताकि वह उसे खुशी दे पाता। विक्की की हालत पस्त हो गई तो मैंने उसके साथ जगह बदल ली।
लक्ष्मी आंटी ने आह भरते हुए अपनी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया और मैंने उसके पैरों को फैला कर उसके गुपतांगों को अपनी उंगलियों से खोल कर उजागर किया।
"प्रतीक, औरत के निचले होटों की दो परतें होती हैं। बाहर की पाव रोटी जैसी मांसाल परत और अंदर की नाजुक पंखुरी सी पतली परत। बाहर की परत को चूमने से लक्ष्मी आंटी की रस की धारा बहना तेज हो जाता है।"
लक्ष्मी आंटी की खुली चूत के बाहरी होटों को बारी बारी चूमते हुए उसकी आहों से कमरा भर उठा। मैंने अपनी जीभ की नोक से निचले होटों के उपरी जोड़ को छू लिया और लक्ष्मी आंटी ने अपना बदन झटक दिया।
विक्की, "प्रतीक, नीचे के बाहरी और अंदरूनी होठों के जोड़ने से बने उपरी हिस्से में छिपा होता है औरत के यौन सुख का खजाना। इसे हम दोनों लक्ष्मी आंटी का मोती कहते हैं। इसे चाटने, चूमने और चूसने से लक्ष्मी आंटी को वही होता है जो हमें अपना लौड़ा चाटने, चूमने और चूसने से होता है। लक्ष्मी आंटी की कोई चुदाई हम तब तक नहीं करते जब तक लक्ष्मी आंटी इस मोती का पूरा मज़ा नहीं लेती। देखो सन्नी ने लक्ष्मी आंटी के पैरों को कस कर पकड़ लिया है कि वह सन्नी को हिला न पाए। लक्ष्मी आंटी अक्सर झडते हुए ऐसे तड़पती है कि हम हिल जाते हैं और लक्ष्मी आंटी अधूरी रह जाती हैं।"
मैंने लक्ष्मी आंटी की जांघों को पकड़ कर अपने होठों से लक्ष्मी आंटी के मोती को चूमा। लक्ष्मी आंटी तप कर तिलमिलाने लगी तो मैंने उसके मोती को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा और मोती का अब उभरा हुआ हिस्सा अपनी जीभ से चाटने लगा। लक्ष्मी आंटी ने अपनी जांघो से मेरा सर पकड़ लिया और खुद सिसक सिसक कर आहें भरते हुए उत्तेजना वश तड़पने लगी।
बेड के पास बैठ कर हमारे दर्शक मेरी कला को निहार रहे थे और उस से सीख रहे थे। मैं और विक्की कई बार एक दूसरे के सामने लक्ष्मी आंटी का पानी निकाल चुके थे पर ऐसे जान कर किसी की बीवी को उसके सामने चोदना एक अलग ही अनुभव था। मैंने लक्ष्मी आंटी की आवाज और लक्ष्मी आंटी की बुर का रिसाव देख अपनी 1 उंगली को लक्ष्मी आंटी की तपती भट्टी में डाल दिया।
"आह… सन्नी बाबू… और मत तड़पाओ!!… चोदो मुझे!!… कोई तो चोदो मुझे!!!… कोई भी चोदो मुझे!!!…", लक्ष्मी आंटी गिड़गिड़ाई।
मैंने मुस्कुराकर जवाब में अपनी दो उंगलियां उसकी गर्मी में भर दी और लक्ष्मी आंटी के मोती को चूमते हुए अपनी उंगलियों को तेज रफ्तार से चलाने लगा। लक्ष्मी आंटी की आहें तेज होते हुए एक चोटी तक गई और एक ऊंची चीख के साथ लक्ष्मी आंटी ने झडते हुए मेरा मुंह अपने रस से भर दिया। लक्ष्मी आंटी का बदन ढीला पड़ गया था पर अब भी उसमें कुछ कांपना जारी था।
"इस तरह लक्ष्मी आंटी के झडने से हम ये मान सकते हैं कि जब हम लक्ष्मी आंटी को चोद कर झड जाएं तो वह असंतुष्ट न रहे।"
विक्की ने लक्ष्मी आंटी के उपर लेटते हुए मेरी जगह ले ली थी और अब उसके माथे को चूमते हुए उसका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
"प्रतीक, लक्ष्मी आंटी अपने प्रेमियों को बस छूने से ही पहचान लेटी है पर फिर भी बताकर करना अच्छा होता है। अगर घर में सिर्फ दोनों ही हो फिर भी अचानक अंदर जाना अच्छा नहीं लगता।"
लक्ष्मी आंटी ने विक्की को अपनी बाहों में भर लिया तो विक्की ने लक्ष्मी आंटी के गाल चूमते हुए उसकी बुर पर अपना सुपाड़ा सटा दिया।
"अन्ह… आह… ऊंह…", लक्ष्मी आंटी ने अधीर होकर अपनी गांड़ उठाकर विक्की को अपने पैरों में पकड़ कर अपने अंदर खींच लिया।
"आह… हा… आ… हा… आनह… अम्म्म……", लक्ष्मी आंटी की यह पाष्वी उत्तेजना की भाषा हमें आगे का रास्ता दिखा रही थी और हम दोनों यही भाषा प्रतीक को सीखा रहे थे। विक्की को लक्ष्मी आंटी को चूमते हुए चोदना पसंद था पर आज वह प्रतीक को सीखने के लिए लक्ष्मी आंटी के कान और गाल को चूमते हुए उसके सुख के स्वर सुना रहा था। लक्ष्मी आंटी ने विक्की को कस कर पकड़ कर उसे तेज धक्कों से चोदने पर मजबुर कर दिया था।
"प्रतीक, लक्ष्मी आंटी को कभी प्यार से धीरे और लंबे धक्के चाहिए होते हैं। कभी तो बस तेज रफ्तार झटके से मज़ा चाहिए होता है। ये हमारा फ़र्ज़ है कि हम उसकी मर्जी को समझे और उसे उसकी मन चाही खुशी दें।"
विक्की ने लक्ष्मी आंटी को तेज रफ्तार चोदते हुए अपनी पूरी ताकत लगा दी और लक्ष्मी आंटी ने झडते हुए उसका लौड़ा निचोड़ लिया। विक्की लक्ष्मी आंटी के उपर लेट गया और लक्ष्मी आंटी ने उसे पकड़ कर चूमते हुए उसका रस अपनी कोख में भर लिया।
कुछ देर बाद लक्ष्मी आंटी ने विक्की को छोड़ दिया और विक्की एक ओर लेट गया। लक्ष्मी आंटी ने दूसरी ओर मुड़ते हुए एक घुटना तकिए पर रख कर पेट के बल अधूरी लेट गई।
लक्ष्मी आंटी की योनि की पंखुड़ियां खुली हुई थी और उनमें जमा विक्की का माल एक गाढ़ी मलाई की बूंद की तरह धीरे धीरे बाहर आता दिख रहा था।
59
सन्नी
विक्की के बगल में लेट ने से लक्ष्मी आंटी एक ओर मुड़ कर अपना घुटना तकिए पर रख पेट के बल अधूरी लेट गई जिस से लक्ष्मी आंटी की चूत में जमा वीर्य बाहर झांकने लगा। लक्ष्मी आंटी को ठंडा होने देना मेरे लिए बेवकूफी होती।
मैंने लक्ष्मी आंटी को पीछे से चूमते हुए उसकी गांड़ के उपर अपना लौड़ा घुमाया।
"सन्नी बाबू!!… उफ्फ…", लक्ष्मी आंटी जानती थी कि मुझे रोकना मेरे साथ नाइंसाफी होती। प्रतीक धान से मेरे पैंतरे और उन पर लक्ष्मी आंटी की प्रतिक्रिया देख रहा था।
मैंने अपने लौड़े पर विक्की के वीर्य की गाढ़ी मलाई लक्ष्मी आंटी की चूत के मुंह से उठाई और लक्ष्मी आंटी की गरमी चूत में मेरा लौड़ा पेल दिया।
"मां… आह… आह…", लक्ष्मी आंटी ने मेरा स्वागत किया ही था कि मैंने अपने लौड़े को बाहर खींच लिया।
विक्की, "औरत चाहे जितनी तयार हो उसकी गांड़ मारने से पहले अपने लौड़े को रस में अच्छे से पोत लो। यौन रस से अच्छा अगर कुछ है तो वह है वीर्य से भरा यौन रस। वैसे vaseline gel भी काम करता है पर हमें तो यही पसंद है।"
मेरे लौड़े का सुपारा लक्ष्मी आंटी की कसी गांड़ के सुराख को खोलने लगा तो लक्ष्मी आंटी फिर से आहें भरने लगी।
"आह… आंह… उंह… मां!!… हां… हा… हा… हा… आ…आह… आहा…", लक्ष्मी आंटी ने मुझे अपनी गांड़ के अंदर लेते हुए आंहे भरी।
"सन्नी बाबू!! प्यार से करो!! मैं थक गई हूं।", लक्ष्मी आंटी ने मुझे समझाते हुए कहा।
मैंने लक्ष्मी आंटी के बाल उसके माथे से पीछे लेते हुए अपने हाथ में लेकर उन्हें थोड़ा खींचा।
"सन्नी बाबू!! आह… आ…", लक्ष्मी आंटी ने शिकायत करना शुरू किया ही था कि मैंने अपने लौड़े को सुपाड़े तक बाहर खींच लिया।
"मां… आंह… आ… आ…आआह…", लक्ष्मी आंटी ने अपनी गांड़ में मेरे लौड़े को दनदनाते हुए घुसता पाया।
"डरो मत। लक्ष्मी आंटी को गांड़ मराना पसंद है। यह एक हुनर है जो हर औरत नहीं कर पाती पर लक्ष्मी आंटी ने इस में महारथ हासिल कर ली है।", विक्की ने प्रतीक के व्याकुल भाव देख कर कहा।
मैंने लक्ष्मी आंटी के बाल पकड़ कर उसे पीछे खींच कर लक्ष्मी आंटी को उठा लिया था और खुद उस पर लेट कर उसकी गांड़ के लंबे ठाप लगाते हुए चोद रहा था। लक्ष्मी आंटी ने एक हाथ से अपने आप को उपर उठाया और दूसरे हाथ से अपनी खाली चूत को सहलाने लगी।
"लक्ष्मी आंटी की गांड़ मारते हुए यह ध्यान रखना चाहिए कि लक्ष्मी आंटी की चूत खाली न रहे। अगर अब की तरह लक्ष्मी आंटी ने अपना इंतजाम खुद नहीं किया तो दो उंगलियों को लक्ष्मी आंटी की चूत में डाल कर अंगूठे से लक्ष्मी आंटी का मोती चलते रहना चाहिए।", विक्की ने प्रतीक को गांड़ चुदाई की बारीकियां समझते हुए हम।
मैंने लक्ष्मी आंटी के गाल को पीछे से चूमते हुए उसकी गांड़ में धमाचौकड़ी मचाने लगा। लक्ष्मी आंटी की उंगलियां मुझे चूत के परदे से महसूस हो रही थी। लक्ष्मी आंटी की उत्तेजना में बहते हुए मैंने जैसे तैसे अपने आप को लक्ष्मी आंटी के झडने तक रोके रखा। लक्ष्मी आंटी ने झड़ते हुए अपनी गांड़ को भींच लिया और मेरा लौड़ा अपनी गांड़ में बन्द कर दिया। लक्ष्मी आंटी के छूट ते ही मेरा बांध टूटा और मेरे वीर्य की धार से लक्ष्मी आंटी की गांड़ रंग दी गई।
"आह… हा… हा… आ…ह। बड़े वो हो सन्नी बाबू!!," लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों को मेरे बालों में फेरते हुए मुझे डांटा।
प्रतीक ने आगे बढ़कर लक्ष्मी आंटी का माथा चूमा और मैंने पति पत्नी को उनकी जगह देते हुए अपना लौड़ा लक्ष्मी आंटी की गरमी में से बाहर खींच लिया।
"आप को बुरा लगा?" लक्ष्मी आंटी ने डरते हुए प्रतीक से पूछा।
"जान जिस बात से तुम्हें इतनी खुशी मिले उस से में बुरा क्यों मान लूं?" प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी को चूमते हुए कहा।
विक्की का लौड़ा फिर से खड़ा हो गया था और पत्नी को चुदा हुआ पा कर पति कि खुशी देख मेरे लौड़े में भी तकद भर गई। हम दोनों के खड़े लौड़े देख लक्ष्मी आंटी ने शर्माकर मुस्कुराते हुए प्रतीक से कहा,
"अगर मैं इन दोनों को पहले सुला दूं तो चलेगा?"
प्रतीक बस सर हिलाकर हां बोल पाया। लक्ष्मी आंटी ने मुझे बेड पर लिटाकर मेरा लौड़ा अपनी जीभ से चाट कर साफ़ करने लगी। जब मेरा लौड़ा फूल गया तब विक्की ने पीछे से लक्ष्मी आंटी की चूत में अपना मूसल ठूंस दिया।
"मां… आह…", लक्ष्मी आंटी ने अपनी आवाज को दबाने के लिए मेरा लौड़ा निगल लिया। थोड़ी देर में ही मैं पूरी तरह तयार हो गया और विक्की लक्ष्मी आंटी को पीछे से दनदनाते हुए चोद रहा था। लक्ष्मी आंटी ने अचानक आगे बढ़ ते हुए मेरे ऊपर लेट गई जिस से विक्की का लौड़ा सुना रह गया। लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से अपनी बहती योनि को खोल दिया और मेरे लौड़े का सुपारा उपर घुमाने लगी। जब मेरे सुपाड़े को रस में अच्छे से धोया गया तब लक्ष्मी आंटी मेरे लौड़े पर बैठ गई।
"आह… आ… हा… हा… अन्ह… अम्मम… आह!!", लक्ष्मी आंटी ने मुझे अपनी गरमी सही जगह रख कर नीचे झुक गई और अपनी चूची को मेरे मुंह पर रखा। इतना इशारा मेरे लिए काफी था। मैंने लक्ष्मी आंटी की चूची को चूसने में पूरा ध्यान लगा दिया।
लक्ष्मी आंटी ने उदास खड़े विक्की को पीछे मुड़ कर देखा और अपनी गांड़ पर हलके से थप्पड़ लगते हुए कहा,
"विक्की बाबू, अब और कितना इंतजार करोगे? आओ अपनी लक्ष्मी आंटी को प्यार करने।"
विक्की खुशी से ऐसे कूद पड़ा की सीधे लौड़ा लक्ष्मी आंटी की गांड़ में भरकर ही रुका।
"मां!!… आह… उफ्फ… बाबू प्यार करने को कहा था पेल देने को नहीं!……", लक्ष्मी आंटी ने शिकायत की।
हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी के दोनों छेद अपने लौड़े से पूरी तरह भर दिए पर रुक कर उसे अपनी लय पकड़ने दी। कुछ पल बाद लक्ष्मी आंटी ने आगे बढ़कर हमारे लौड़े अपने अंदर से सुपाड़े तक बाहर निकलने दिए और फिर धीरे से हमारे लौड़ों पर अपनी गांड़ दबाते हुए बैठ गई। प्रतीक फटी आंखों से देख रहा था कैसे लक्ष्मी आंटी अपनी कमर हिलाते हुए दो लौड़ों से अपनी चूत और गांड़ एक साथ मरवा रही है।
कुछ देर तक ऐसे ही अपनी मरवाते हुए लक्ष्मी आंटी ने अपनी लय पकड़ ली और प्रतीक की ओर देखते हुए कहा,
"जी सुनिए! आप ने कहा कि आप को बुरा नहीं लगता इस लिए मैंने बाबुओं को लिया है।
पर आप ऐसे दूर बैठ कर देखते हुए मुझे अच्छा नहीं लगता। इधर आइए।"
प्रतीक ने आगे बढ़कर लक्ष्मी आंटी को चूमा। लक्ष्मी आंटी ने अपनी लय बदले बगैर प्रतीक से चुम्बन लिया और अब उसे खींच कर बेड के सिरहाने अपने मुंह के पास खड़ा कर दिया। प्रतीक अपने साथ क्या हो रहा है यह समझने से पहले ही हमारे खेल में शामिल हो गया था।
लक्ष्मी आंटी ने प्रतीक के लौड़े को चूमते हुए उसका सुपाड़ा अपने मुंह में लिया। प्रतीक इस अनुभव के लिए नया था और जल्द ही लक्ष्मी आंटी के बाल पकड़ कर उसका मुंह चोदने लगा। लक्ष्मी आंटी प्रतीक का लौड़ा मुंह से निकालते हुए अपनी कमर हिलाते हुए हम दोनों के लौड़ों पर बैठ जाती। फिर उठाते हुए हमारे लौड़ों को सुपाड़े तक बाहर निकालते हुए अपने पति का पूरा लौड़ा निगल जाती।
लक्ष्मी आंटी ने इस तरह अपने प्रेमियों को संभालते हुए अपने पति को भी खुश किया। हम दोनों तो अभी झड़े थे पर प्रतीक ने भी शाम को काफी मजे लिए होंगे। लक्ष्मी आंटी ने झड़ते हुए भी अपनी चुदाई बन्द नहीं होने दी और तकरीबन दस मिनट की सामूहिक चुदाई के बाद विक्की ने लक्ष्मी आंटी की गांड़ में अपना लावा रस भर दिया।
विक्की अब थक कर चूर हो गया था और बगल में लेट गया। मैंने लक्ष्मी आंटी को पकड़ कर पलट दिया और लक्ष्मी आंटी का बदन ढकते हुए अपनी रफ्तार बढ़ा दी। प्रतीक ने मेरे साथ घूमते हुए अपना लौड़ा लक्ष्मी आंटी के मुंह से बाहर निकलने नहीं दिया। मैं लक्ष्मी आंटी की चूची को मुंह में लेकर उसे जोर जोर से लंबा और तेज पेल रहा था तो लक्ष्मी आंटी प्रतीक के लौड़े पर उं… उन्म… कर मेरे प्रशंसा के गीत गा रही थी। मुझसे और रहा नहीं गया और लक्ष्मी आंटी की कोख में मेरा वीर्य छूट गया। प्रतीक ने मानो मेरे इंतजार में खुद को रोक रखा था और उसने मुझे रस से लक्ष्मी आंटी की प्यास बुझा दी।
लक्ष्मी आंटी थक कर चूर हो गई थी और हम सब लेट गए। मेरी आंख लग रही थी कि लक्ष्मी की आह से मेरी नींद खुली। प्रतीक ने पिछले कुछ सालों का हिसाब करने की ठान ली थी और लक्ष्मी मदहोशी में प्रतीक का साथ दे रही थी। मैं मुस्कुराकर दूसरी ओर मुड़ कर सो गया।
मेरे मन में बस एक खयाल आया, "शुक्र है कि प्रतीक को लड़के पसंद नहीं वरना प्रतीक के ऑपरेशन के बाद ये रात खौफनाक हो जाती।
60
विक्की
लक्ष्मी आंटी की आहों से मेरी आंख खुली और कानों ने लक्ष्मी आंटी की आवाज को टॉयलेट में से आते पाया। मैं और सन्नी आगे बढ़े और अंदर झांकने लगे। लक्ष्मी आंटी basin के नीचे घुटनों के बल खड़ी थी और प्रतीक पूरी जोर से उसे चोद रहा था।
सन्नी, "अरे लक्ष्मी आंटी चुदाना ही था तो बेड पर आ जाती यूं चुदाने से घुटने छिल जाएंगे।"
"कौन कमबख्त… चूधने के… लिए मुड़ी ई… थी।
आह… मैं तो ओह… बस साबुन उठाने… आह…", लक्ष्मी आंटी का दुखड़ा सुन हम दोनों हंसी से लोट पोट हो गए। प्रतीक ने हमें आंख मारते हुए अपनी चुदाई चालू रखी।
लक्ष्मी आंटी ने प्रतीक से कहा, "अजी सुनिए, बाबुओं को ओह… तयार कर… के कॉलेज आह… भेजना है। थोड़ी देर अन्ह… रुकिए तो ओ… सही।"
"अरे लक्ष्मी आंटी, चलने दो तुम्हारा काम। हम दोनों के लिए प्रतीक को मत रोको।"
"कीड़े पड़े… उस balakrishna को! आह… कल रात… भर चोद चोद… कर मुझे अंदर… से छिल… गया है… और इन्हें… कोई ई… फ़र्क ही नहीं पड़ा! आह… नजाने क्या… भर दिया… है अंदर!", लक्ष्मी आंटी चुदाते हुए ही बाहर आने लगी। प्रतीक भी लक्ष्मी आंटी को चोदते हुए उसके साथ बाहर आया। लक्ष्मी आंटी ने सन्नी को इशारा किया और हम दोनों बेड के किनारे पर बैठ गए।
लक्ष्मी आंटी ने अपनी उंगलियों से हमारे लौड़े सहलाते हुए उन्हें अपनी मुठ्ठी में भर लिया। लक्ष्मी आंटी ने हमारे लौड़ों को चाटकर साफ़ किया और उन्हें चूसने लगी। लक्ष्मी आंटी की इस प्रकार की सेवा पा कर हम दोनों ने लक्ष्मी आंटी को उसके काम करने से नहीं रोका और लक्ष्मी आंटी ने चूस चूस कर चुदाते हुए ही हमारा रस पी गई।
लक्ष्मी आंटी को हमारा वीर्य पीते देख प्रतीक ने (आखिरकार) झड कर लक्ष्मी आंटी का पिछ्वाड़ा छोड़ दिया। लक्ष्मी आंटी ने बेड पर लेट कर अपने पैरों को फैला कर उनके बीच देखा। लक्ष्मी आंटी की बुर और गांड़ फट कर सुज गई थी। लक्ष्मी आंटी के छेद अब बन्द नहीं हो रहे थे और खून की छटा लगा वीर्य कहीं से निकल रहा था तो कहीं सुख कर पपड़ी बन गया था।
"हाय रे मैं मर गई!! बाबू लोगों ने मेरा जो हाल पूरे साल में नहीं किया वह आप ने बस आधे दिन में कर दिया। सुनिए जी, मैं दोनों बाबुओं को संभाल सकती हूं पर आप को संभालने के लिए 4 को भी मुश्किल होगा। ना!!… ना!!.… अब मेरी ओर देखना भी नहीं।", लक्ष्मी आंटी ने प्रतीक से कहा।
प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी को अपनी बाहों में लेते हुए कहा, "जान तुम्हारे प्यार के लिए ही मैं समुंदर पार कर आया हूं। अब अगर तुम मुझे रोकना चाहती हो तो उसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।"
लक्ष्मी आंटी, "सब कुछ तो आप का है। बोलिए आप को और क्या चाहिए?"
प्रतीक ने लक्ष्मी आंटी के होठों से होंठ लगाते हुए कहा, "आज से तुम मुझे प्रतीक कहोगी। ना आप ना जी ना कुछ और। बस प्रतीक।"
लक्ष्मी आंटी अपने प्रेमियों से अपने पति के सामने और अपने प्रेमियों के सामने अपने पति से चुदा चुकी थी पर अपने पति का ऐसे नाम लेना उस से नहीं हो रहा था। प्रतीक ने लक्ष्मी को मनाते हुए कहा,
"लक्ष्मी सही मायनों में मैं तुम्हारा पति कल शाम से बना हूं पर हम पिछले एक साल से अच्छे दोस्त हैं। और दोस्त एक दूसरे को यूं जी कहके बुलाते नहीं। बोलो ' प्रतीक '।
"
लक्ष्मी आंटी ने प्रतीक के होठों पर होठ रख कर उसका नाम लिया और पति पत्नी एक दूसरे के प्यार में लिपट गए। हम दोनों ने bedroom से बाहर निकलते हुए उन्हें उनका वक़्त देना सही समझा।
उस दिन साल में पहली बार लक्ष्मी आंटी कॉलेज नहीं गई और हमारे कॉलेज से लौट आने तक लक्ष्मी आंटी और प्रतीक बातें और बाकी सब कुछ करते रहे। शनिवार रविवार के लिए मम्मियों ने लक्ष्मी आंटी और प्रतीक को
अलीबाग में second honeymoon trip पर भेज दिया और हम दोनों ने पहली बार bachelor life जीते हुए पिज़्ज़ा खाया और बरतन धोए।
रविवार को प्रतीक को खाड़ी के पार से टिकट आ गया और लक्ष्मी आंटी ने रोते हुए उसे एयरपोर्ट पर विदा किया। प्रतीक के लौटने के बाद हम सब अपनी दिन चर्या में वापस व्यस्त हो गए। हम दोनों को खयाल रखते हुए लक्ष्मी आंटी ने अपनी पढ़ाई और जोर से की।
लक्ष्मी आंटी ने अगले 3 साल में न केवल अपनी B. Com. की डिग्री हासिल की बल्कि finance में MBA भी कर लिया। 3 साल के अंत तक हम दोनों भी अपनी डिग्री पूरी कर घर वापस लौट रहे थे। पिछले साल हम दोनों ने एक छोटी कंपनी शुरू कर दी थी जिसका सारा हिसाब लक्ष्मी आंटी की देखरेख में था। उसे खुशी थी कि उसे एक पूरी कंपनी का हिसाब चलाने का मौका मिला पर वह नहीं जानती थी की हम ने उसे हमारी कंपनी में साझेदार बनाया था।
लक्ष्मी आंटी के graduation के दिन प्रतीक लौट आया और लक्ष्मी आंटी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। हमारे कहने पर लक्ष्मी आंटी ने कंपनी के मुंबई ऑफिस की जिम्मेदारी संभाली और हम दोनों वापस जा कर पापा के बिजनेस में हाथ बंटाते हुए अपना business बढ़ाने लगे।