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हीरोइन (Completed)

Story Hindi 32 pages 7 months ago

UPDATE - 1
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राजेश मुंबई के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल के शवगृह (मोरचरी) में डॉक्टर था...
दिन भर लाशों की चीड़ फाड़ करना , उनकी पोस्टमारटम रिपोर्ट बनाना, यही काम था उसका..
काम बेहद घिनोना था पर पैसा बहुत था उसमें, कई बार मनचाही रिपोर्ट बनाने के लिए उसने मुँह माँगी रकम ली थी कई रईसों से..

दिल से भी बड़ा रंगीन था वो...
एक ही शौंक था उसको, बॉलीवुड का, फ़िल्मो का और रसभरी हेरोइनों के जिस्म देखने का..

आज जब राजेश हॉस्पिटल से से थका मांदा घर आया ही था की उसकी बेटी ईशा की बाते शुरू हो गयी

''पापा...मुझे भी डॉक्टर ही बनना है...मुझे पड़ाई करनी है...आप मुझे एक्टिंग में क्यो डलवाना चाहते हो...मुझे पढ़ना पसंद है...''

ये एक ऐसा टॉपिक था उनके घर का जो शायद दूसरे घरो में तो अच्छा लगे, पर यहाँ बिल्कुल उल्टा था..

राजेश की जवान हो रही बेटी को पड़ने का शॉंक था,
वो भी उसकी तरह डॉक्टर ही बनना चाहती थी पर उसके पापा उसे फ़िल्मो में देखना चाहते थे,
उन्होने अपने दोस्त से बात भी की थी, जिसके बेटे ने फिल्म इंडस्ट्री में अच्छा ख़ासा नाम भी कमा लिया था,
पर उसके परिवार वाले उसकी बातो को सुनकर राज़ी ही नही थे..

राजेश की बीबी रजनी भी अपनी बेटी की तरफ़दारी करते हुए बोली : "मैने पहला बाप देखा है जो अपनी जवान बेटी को ऐसी फिल्म इंडस्ट्री में भेजने पर उतारू है जो पूरी तरह से बदनाम है, सबको पता है की बाहरी दुनिया से आने वाले एक्टर्स को कितना स्ट्रगल करना पड़ता है फ़िल्मो के लिए...डायरेक्टर्स और प्रोड्यूसर्स की गंदी नज़रो और बातों का सामना करना पड़ता है...उनसे बच गये तो हीरो लोग नही छोड़ते....पता नही आपको कैसा भूत सवार हुआ है ईशा को फ़िल्मो मे भेजने का...''

उसने हमेशा की तरह बात को ना बढ़ाते हुए सिर दर्द का बहाना बनाया और रजनी को चाय बनाकर लाने को कहा...
ईशा भी पैर पटकती हुई अपने रूम में चली गयी और राजेश ने रिमोट उठाकर टीवी ओंन कर दिया...
ऑफीस से आने के बाद वो हमेशा न्यूज़ देखना पसंद करता था...
और बाद में कोई अच्छी सी मूवी देखता था.

पर आज जैसे ही उसने न्यूज़ चैनल लगाया, नीचे आ रही ब्रेकिंग न्यूज़ ने उसके दिल को ब्रेक कर दिया...
खबर ही कुछ ऐसी थी...

फिल्म जगत की जानी मानी हीरोइन शैफाली ने आत्महत्या कर ली थी,
उसकी उम्र भी करीब राजेश जितनी ही थी, यानी 48 साल की..
जब वो डॉक्टरी कर रहा था तब वो नंबर 1 की हेरोयिन थी,
उसकी लगभग हर मूवी हिट जाती थी उन दिनों...
कारण भी था हिट होने का, वो अपने साथ की हेरोइनो से काफ़ी आगे रहती थी जिस्म दिखाने के मामले में...
लेकिन जैसे-2 समय बीता उसे काम मिलना बंद सा हो गया...
एक समय तो ऐसा आया की उसने बी ग्रेड की कुछ मूवीस में भी काम किया पर वहां भी उसकी मूवीस नही चली...

(राजेश के लैपटॉप में आज तक उसकी बी ग्रेड मूवीज का अच्छा ख़ासा कलेक्शन था, उसकी बाकी की मूवीज के अलावा )

न्यूज़ में आ रहा था की पिछले कुछ टाइम से उसे शराब की लत्त लग चुकी थी, अंदर से शायद टूट चुकी थी वो इसलिए उसने खुदखुशी जैसा कदम उठाया..

राजेश को सच में काफ़ी दुख हुआ शैफाली की मौत पर...
अपनी जवानी के दिनों में उसे याद करके उसने ना जाने कितनी बार मुट्ठ मारी थी...
शादी के बाद भी वो अपनी बीबी रजनी में शैफाली का चेहरा ढूंढता था और उसे सोचकर ही उसके लंड में एक अजीब सा तनाव आ जाता था जिसके बाद रजनी की चीखो से पूरा कमरा दहल जाता था...

तभी रजनी उसके लिए चाय लेकर आ गयी...
राजेश का उतरा हुआ चेहरा देखकर उसने जब न्यूज़ देखी तो हंसते हुए बोली : "चलो अच्छा हुआ जो तुम्हारी चहेती शैफाली मर गयी, वरना मुझे तो शक था की एक दिन तुम मुझे छोड़कर उसके पास चले जाओगे....''

उसने ये बात कही तो मज़ाक में थी, पर राजेश का कई बार ये मन हुआ था की काश वो ऐसा कर पाता की अपनी बीबी को छोड़कर वो हमेशा-2 के लिए अपनी दिल की राजकुमारी शैफाली के पास जा सकता...
पर वो सब इच्छाएं दिल में ही रह गयी...
बेचारी उपर चली गयी, उसे ऐसा नही करना चाहिए था.

बस यही सब सोचते-2 उसने चाय पी, बाद में फ्रेश होकर खाना खाया और सो गया...पर मन काफ़ी उचाट हो चुका था उसका शैफाली की न्यूज़ देखकर.

अगले दिन हमेशा की तरहा जब वो हॉस्पिटल पहुँचा तो वहां काफ़ी भीड़ थी...
शैफाली की बॉडी को वहीं लाया गया था पोस्मॉर्टम के लिए...यानी उसे ही शैफाली का पोस्टमॉर्टम करना था.

एक पल के लिए तो राजेश को लगा की वो कोई सपना देख रहा है, क्योंकि उसी के बारे में सोचते हुए उसने पूरी रात निकाली थी...

पर अंदर ही अंदर उसे ज़्यादा खुशी भी नही हुई,
क्योंकि जिससे वो जीते जी मिलना चाहता था वो उसे मरने के बाद देखने जा रहा था...

खैर, धड़कते दिल से जब वो पोस्टमॉर्टम रूम में पहुँचा तो सफेद चादर में लिपटा उसका शरीर देखकर उसकी आँखो में आँसू ज़रूर आ गये...
पास जाकर जब उसने चेहरे से चादर हटाई तो उसका सफेद चेहरा देखकर उसे यकीन ही नही हुआ की वो शैफाली ही है...
आँखे धँस चुकी थी...
आँखो के चारो तरफ डार्क सर्कल थे, होंठ भी काले पड़ चुके थे...
उसने धीरे-2 करके पूरी चादर निकाल फेंकी, वो सिर्फ़ एक नाइट गाउन में थी,
हाथ की कलाई काटी थी उसने, काफ़ी खून बहा था उसका, वही कारण था शायद उसकी मौत का..

उसने अपने सहयोगी से उसके कपड़े हटाने को कहा...
साथ ही उसने जो भी गले में और उंगलियो में पहना हुआ था वो सब भी निकालने को कहा..
गले में एक मोतियों की माला थी, उसी से मैच करते हुए ईयर रिंग्स भी थे...
हाथ में एक अंगूठी भी थी मोतियो की और कलाई में भी उसी तरह के मोतियो से बना एक ब्रेस्लेट था...
पूरा सेट था जो उसने पहन रखा था मोतियो से बना हुआ....

उन्हे हाथ में लेकर राजेश भी काफ़ी देर तक हैरानी से उन्हे देखता रहा...
फिर उन सबकी इकट्ठा करके एक ज़िप पाउच में रख दिया और चुपके से अपने सहयोगी की नज़र से बचाते हुए वो सामान अपनी जेब में रख लिया..

एक सोने की चैन और 2 पायल भी थी,वो उसने एक अलग पाउच में रख दी, हॉस्पिटल में जमा कराने के लिए.

उसके सहयोगी ने जब नाइट गाउन हटाया तो शैफाली के नंगे शरीर को देखकर राजेश की धड़कने रुक सी गयी...
यही वो शरीर था जिसके बारे में सोचकर उसने कई बार मुट्ठ मारी थी...
पर इस वक़्त वो शरीर बेजान सा होकर उसके सामने पड़ा था...
कोई आकर्षण नही रह गया था उसके अंदर...
मरने के बाद कैसी बेजान सी पड़ी थी शेफाली, राजेश की आँखे भर आई उसे देखकर , जब उसका सहायक पेन लेने के लिए बाहर गया तो उसने झुक कर उसके माथे को चूम लिया
फिर उसने अपनी पोस्टपॉर्टम रिपोर्ट बनानी शुरू की...
पूरे शरीर की जाँच की, कलाई के कट को देखकर, उसकी गहराई को समझकर, जिन नसों को काटा गया था उन्हे रिपोर्ट में डाला, कितना ब्लॉड़ निकला उसका अंदाज़ा लगाकर उसे भी मेन्षन किया, शरीर पर कोई और घाव के निशान नही थे, कुछ कट के पुराने निशान थे, जिन्हे मेंशन करना जरुरी नहीं था..

इसलिए उसने भी अपनी तरफ से स्पेशल कॉमेंट्स में सुसाईड डालकर पूरी रिपोर्ट बना दी और नीचे साइन भी कर दिया...

बाहर निकलते ही उसे मीडिआ ने घेर लिया...
ये शायद पहला मौका था जब उसका चेहरा कई कैमरों के सामने चमक रहा था...
उसने स्माइल करते हुए रिपोर्टर्स से बात की, और जितनी ज़रूरत थी उसके हिसाब से उन्हे बताया..
और फिर सभी कामो से निपट कर वो अपने केबिन में वापिस गया और कपड़े बदल कर अपने घर की तरफ चल दिया...

घर जाते हुए वो अपनी जेब में पड़ी पोटली को सहला रहा था जिसमें शेफाली के शरीर पर सजे वो आर्टिफिशियल ज्वेलेरी थी...

पर बेचारा ये नही जानता था की ये गहने उसकी जिंदगी को पूरी तरह से उलट पलट कर रख देंगे.

UPDATE - 2
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घर जाते हुए वो अपनी जेब में पड़ी पोटली को सहला रहा था जिसमें शेफाली के शरीर पर सजे वो आर्टिफिशियल ज्वेलेरी थी...

पर बेचारा ये नही जानता था की ये गहने उसकी जिंदगी को पूरी तरह से उलट पलट कर रख देंगे.

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अब आगे
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रात को घर पहुँचकर राजेश ने वो पैकेट निकाल कर अपने बेड के साइड वाली टेबल की ड्रा में रख दिया और फिर मुँह हाथ धोकर फ्रेश हुआ और टीवी के सामने बैठ कर चैनल चेक करने लगा की शायद किसी न्यूज़ पर उसका इंटरव्यू दिख जाए जिसमें वो रिपोर्टर्स को शैफाली की सुसाईड डीटेल्स बता रहा था...
पर किसी भी चैनल पर शेफाली से समन्धित कोई भी न्यूज़ नही आ रही थी....
हां,नीचे रनिंग न्यूज़ में ये ज़रूर आ रहा था की शेफाली की मौत से फिल्म जगत को काफ़ी बड़ा आघात पहुँचा है...

राजेश (मन ही मन झुंझलाते हुए) 'हुंह ...आघात...माय फुट...

जब तक इंसान जिंदा होता है तब तो कोई पूछता नही, अब मरने के बाद सभी को आघात पहुँचा है...साले मतलबी लोग...'

वो बड़बड़ा रहा था तब तक रजनी उसके लिए चाय ले आई : "किस बात पर गुस्सा आ रहा है....अपनी चहेती हीरोइन के मरने का अफ़सोस आपको अभी तक हो रहा है क्या...''

वो कुछ बोल पाता, इससे हले ही टीवी स्क्रीन पर राजेश का चेहरा आ गया, जिसमें रिपोर्टर्स उस से सवाल जवाब कर रहे थे...

वो देखते ही रजनी का चेहरा एकदम से खिल उठा...

''ओह्ह माय गॉड ...आप टीवी पर...आपने बताया ही नही की आपने ही उसका पोस्टमॉर्टम किया है...बता देते तो अपने मायके में और सहेलियों को बोल तो देती, वो भी देखते आपको...एक अलग ही इंप्रेशन पड़ता...''

राजेश उसकी बात सुनकर झुंझला सा गया...
शेफाली की मौत पर अपनी बीबी की ये खुशी शायद उससे बर्दाश्त नही हो रही थी..

खैर, कुछ देर वहां बैठकर वो बाहर निकल गया,
नीचे सोसाइटी पार्क में जाकर अपने कुछ दोस्तो से मिला, थोड़ी सी वॉक की और वापिस उपर आ गया, तब तक खाना लग चुका था.

खाना खाकर वो अपने रूम में गया और लेट गया,
पर उसके दिमाग़ में अभी तक शेफाली से जुड़ी बातें घूम रही थी...
और अचानक उसकी आँखो के सामने उसका नंगा शरीर तैर गया...

काश, वो जीते जी उसके सैक्सी शरीर को इस तरह से नंगा देख पाता...
ये सोचते हुए वो अपने लंड को पायजामे के उपर से ही रगड़ने लगा.

तभी किचन का काम निपटा कर रजनी कमरे में दाखिल हुई और राजेश को जब उसने अपना लंड मसालते हुए देखा तो ठंडे स्वर बोली : "फिर में से शुरू हो गये आप...मैने बोला था ना अब अगले 15-20 दिन से पहले बात नही करना...अभी तो एक हफ़्ता भी नहीं हुआ...''

राजेश ने सिर पीट लिया...की वो सोच क्या रहा था और रजनी ने समझ क्या लिया...

रजनी हमेशा से ही सैक्स के मामले में ठंडी औरत रही थी,
ईशा के जन्म के बाद तो 2-2 महीने निकल जाते थे सैक्स किए बिना,
और कभी कभार राजेश गुस्से में या चिड़कर इस बात का मुद्दा बना लेता तो मजबूरी में रजनी को उसका साथ देना ही पड़ता था...
पर कुल मिलाकर राजेश की सैक्स लाईफ नील बटे सन्नाटा जैसी थी...
दूर -2 तक रोमांस नाम की कोई चीज़ ही नही रह गयी थी रजनी में .
इसलिए इस उम्र में भी राजेश अक्सर नहाते हुए मुठ मार लिया करता था..

अचानक रजनी की खुशी से भरी आवाज़ सुनकर राजेश चोंक गया..

''ओ वाउ....कितना सुंदर पर्ल का सेट है...ये आप मेरे लिए लाए हो, बताया ही नही..''

राजेश ने देखा तो रजनी उसके साइड वाले ड्रॉवर को खोलकर उसमें से वो शेफाली वाला पर्ल सेट निकाल चुकी थी और उसे निकाल कर हाथो में लेकर उलट पलट कर देख रही थी और खुश हो रही थी..

राजेश को गुस्सा तो बहुत आया पर बेचारा कुछ कर ही नही सकता था,
ग़लती उसी की थी, उसे वो सामान संभाल कर अपने लॉकर में रख देना चाहिए था,
रजनी ने मोबाइल चार्जर उसी ड्रॉ में रखा हुआ था, जिसे निकालते वक़्त उसकी नज़र उस सेट पर पड़ गयी..

वो उसे निकाल कर ड्रेसिंग टेबल तक ले गयी और पर्ल नेकलेस को अपने गले में पहन लिया...

राजेश बेचारा मायूस चेहरा लिए उसे ऐसा करते हुए देख रहा था...
वो नोट कर रहा था की जैसे- 2 वो सेट पहन रही थी, उसके एक्सप्रेशन्स चेंज हो रहे थे....
नेकलेस पहनने के बाद उसने कानो में इयरिंग्स पहने, हाथो में बेंगल और उंगली में अंगूठी.....

उन्हे पहन कर वो उसकी तरफ पलटी और बड़े ही सैक्सी अंदाज में अपनी भोंहे चड़ा कर बोली : "कैसी लग रही हूँ मैं ....सैक्सी ना...''

राजेश तो उसके एक्सप्रेशन्स देखता ही रह गया,
आज तक रजनी ने इतने सैक्सी तरीके से बात नही की थी..

रजनी ने जैकेट वाला नाइट गाउन पहना हुआ था....

वो बड़े ही सैक्सी अंदाज में राजेश की तरफ चलने लगी और चलते-2 उसने अपने गाउन की जैकेट निकाल फेंकी...

ये सब राजेश को किसी सपने जैसा लग रहा था..
क्योंकि रजनी के हाव भाव से लग रहा था की आज वो कुछ अलग ही मूड में है..
और जैसे हाव भाव वो दिखा रही थी, ऐसा आज तक नही हुआ था.

वो सैक्सी चाल में चलती हुई उसके करीब आई और बेड के साइड पर बैठ कर उसके उपर झुकती चली गयी...
रजनी के रेशमी बालो ने उसके चेहरे को ढक दिया और उन्ही बालो की आड़ में रजनी ने अपने होंठ उसके होंठो पर रखकर उसे चूमना शुरू कर दिया...
साथ ही उसका एक हाथ राजेश के कसमसा रहे लंड पर आया और उसे मसलने लगा...

राजेश को अभी भी ये सब एक सपने जैसा ही लग रहा था...
क्योंकि उसे अपनी बीबी की सैक्स कैपेसिटी का पता था,
उसने आज तक खुद से पहल करके कभी भी सैक्स की शुरूवात नही की थी,
उसे खुद ही रजनी को तैयार करना पड़ता था चुदाई के लिए
और वो एकाध महीने में जब करती भी तो किसी एहसान की तरह..

पर आज रजनी जिस तरह से खुद ही राजेश के पास आई थी और उसे तैयार कर रही थी, वो उसकी सोच से परे था..

खैर,वो इन सब बातो को भूलकर उसके स्मूच को एंजाय करने लगा और उसके गुदाज मुम्मो को दबाकर मज़े लेने लगा.

और फिर राजेश को अपनी लाइफ का दूसरा झटका मिला जब रजनी उसे चूमते-2 नीचे की तरफ जाने लगी और उसके लंड को पज़ामे से निकालकर उसे मुँह में भरकर उसे किसी प्रोफेशनल रंडी की तरह चूसने लगी..

ये वो काम था जिसके लिए राजेश 20 सालो तक उसके आगे गिड़गिडया था...
उसके लंड को आज तक किसी ने मुँह मे नही लिया था...
शादी से पहले 1-2 गर्लफ्रेंड्स थी पर बात सिर्फ़ चूमा चाटी तक ही सीमित रही थी उन दिनों ...
शादी के बाद दूर की एक कज़िन के साथ उसका चक्कर चला था, पर वो मामला भी सिर्फ़ जल्दबाज़ी की चुदाई तक ही सीमित रहा था...बाद में वो भी अमेरिका जाकर सेट्ल हो गयी थी..

पर आज उसे अपने लंड पर रजनी के होंठो का एहसास वो खुशी दे रहा था जिसके लिए वो सालो से वंचित था...

हमेशा से ही ब्लू फिल्म्स या पॉर्न साइट्स पर कॉक सकिंग के वीडियोस देखकर उसका लंड कड़क हो जाया करता था, और वो अपनी किस्मत को कोसता हुआ यही सोचता रह जाता था की पता नहीं उसकी किस्मत में ये सुख लिखा भी है या नहीं , वो सोचता की काश एक दिन उसके लंड को भी कोई चूसे ताकि वो भी जान सके की गर्म जीभ और होंठो का संगम क्या असर करता है खड़े हुए लंड पर...

और आज वो उस एहसास को महसूस करके एक अलग ही दुनिया में पहुँच चुका था...
उसने रजनी के बालो को बेदर्दी से पकड़ा और उसे अपने लंड पर दबाकर ज़ोर से चिल्लाया..

''आआआआआआआआहह....... शाआबाअश मेरी ज़ाआाआअंन्न...... अहह आअज तो मज़ा ही आ गययआआआआ..... उफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़.....''

इतना कहते हुए उसके लॅंड से ढेर सारा पानी निकल गया, और उसने रजनी के बालो पर अपनी पकड़ ढीली कर दी..

पर रजनी ने अपना सिर उसके लंड से नही हटाया...
बल्कि उसके लंड को मुँह में लेकर और जोरों से चूसने लगी....
ऐसा करते हुए वो मुँह से अजीब सी आवाज़ें भी निकाल रही थी...
और अंत मे जब राजेश के लंड में एक भी बूँद नही बची तो उसने उसे छोड़ दिया
वो मुस्कुराती हुई उपर आई और फिर से उसके होंठो को चूमकर उसे अपने ही लंड से निकली मलाई का स्वाद चखाने लगी..

राजेश पस्त हो चुका था...पर रजनी नही.

वो खड़ी हुई और उसने अपने बचे खुचे कपड़े निकाल फेंके ,
वो अब अपने पति के सामने पूरी नंगी होकर खड़ी थी..
राजेश की समझ मे नही आया की अब वो क्या करने वाली है..
क्योंकि अब उसकी इतनी उम्र नही रह गई थी की एक के बाद दूसरी बार उसका लंड खड़ा हो सके और वो भी इतनी जल्दी..

पर वो कुछ नही बोला...
आज वो देखना चाहता था की रजनी और क्या कर सकती है उसके

UPDATE - 3
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राजेश पस्त हो चुका था...पर रजनी नही. वो खड़ी हुई और उसने अपने बचे खुचे कपड़े निकाल फेंके ,
वो अब अपने पति के सामने पूरी नंगी होकर खड़ी थी..राजेश की समझ मे नही आया की अब वो क्या करने वाली है..क्योंकि अब उसकी इतनी उम्र नही रह गई थी की एक के बाद दूसरी बार उसका लंड खड़ा हो सके और वो भी इतनी जल्दी..पर वो कुछ नही बोला...आज वो देखना चाहता था की रजनी और क्या कर सकती है उसके साथ.

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अब आगे
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आज शायद काफ़ी समय बाद रजनी को इस तरह से अपने सामने पूरा नंगा खड़े हुए देख रहा था राजेश...
वरना पिछले कुछ सालों से तो सिर्फ़ काम की चीज़ों से ही परदा हटता था और नाम मात्र की चुदाई करके दोनो सो जाया करते थे..

आज भी उसकी चुचिया काफ़ी लुभावनी थी..

वो मुस्कुराती हुई आई और सीधा उसके उपर चढ़ कर बैठ गयी....
रजनी की गर्म चूत की सिंकाई उसे अपने लंड पर महसूस हो रही थी, वो इस वक़्त काफ़ी गीली थी....

वो अपनी गीली चूत उसके लंड पर घिसने लगी..

3.

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उसकी चूत से निकल रहे रस ने राजेश के मुरझाए हुए लंड को तर करना शुरू कर दिया और साथ ही साथ नीचे झुकते हुए उसने अपने मुम्मे राजेश के होंठो से लगा कर उसे ललचाने लगी..

एक अजीब सी सिसकारी मारी राजेश ने जब उसके लंड ने एक जोरदार झटका मारकर फिर से अंगड़ाई लेनी शुरू कर दी..
वो भी हैरान था अपने लंड की हरकत देखकर..
वैसे ग़लती उसकी भी थी..
आज तक एक के बाद दूसरी बार उसने भी तो ट्राइ नही किया था...
ये बात तो तभी पता चले ना जब ऐसा कोई मौका मिले..
और आज जब मौका मिला तो लंड के रिस्पांस को महसूस करके वो अपने आप को सुपरमैन समझ रहा था..

और सबसे ज़्यादा हैरानी तो उसे रजनी के अंदाज और व्यवहार पर हो रही थी
जो ऐसी हरकतें कर रही थी
जो आज से पहले कभी नही की थी उसने..

पर अभी के लिए ये सब बातें ना सोचकर वो इस मौके का पूरा मज़ा लेना चाहता था,
इसलिए वो रजनी के लटक रहे मुम्मो को मुँह में लेकर जोरों से चूसने लगा..

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उसका लंड कब खड़ा हुआ और कब वो उसकी चूत में घुस गया उसे भी पता नही चला...
वो तो जब रजनी उसके उपर कूदने लगी तो उसकी समझ में आया...
राजेश के हाथ उसके मुम्मो पर आए वो उन्हे दबाते हुए उसकी चुदाई करने लगा...
आज तक बहुत कम बार ऐसा हुआ था की वो नीचे लेटकर उसकी चुदाई कर पाता था..
हमेशा से ही वो उसकी सलवार निकालकर उसे घोड़ी बनाता और अपने लंड पर थूक मलकर उसे अंदर उतार देता और कुछ देर में सारा माल अंदर निकाल कर साइड में हाँफता हुआ गिर जाता..
और ऐसा करके उसने आज तक शायद इस बात का भी ध्यान नही रखा की रजनी भी तृप्त हुई है या नही....
शायद नही होती होगी..

पर आज उसके हाव भाव से पता चल रहा था की वो अपने अंदर गये लंड का भरपूर मज़ा ले रही है...
राजेश को भी अपना लंड उसकी मखमली चूत में अंदर बाहर होते हुए पूरा महसूस हो रहा था...

और फिर राजेश ने उसके चेहरे पर आए भाव को बदलते देखा
जैसे कोई बहुत बड़ी खुशी से सामना होने जा रहा था उसका
वो बुदबुदाने लगी..

''आआआआअहह....... उम्म्म्ममममममममममम...... यएससस्स......... फकककक मी......और ज़ोर से......चोदो मुझे.......आअह्ह्ह्हह..... मेरी ज़ाआाआआअंन्न..... और तेज.......और तेज चोदो मुझे.....''

ये सब राजेश की बर्दाश्त से बाहर था....
वो किसी प्रोफेशनल रंडी की तरहा चिल्लाने लग गयी थी अचानक...
और राजेश ने भी उसके मोटे कूल्हे पकड़े और नीचे से दनादन शॉट मारकर उसे ऑर्गॅज़म के करीब ले जाने लगा....

और रजनी से पहले ही राजेश का पानी छूट गया....
वो उपर चड़कर अपनी चूत से उसके लंड को घिस्स ही इतनी बुरी तरह से रही थी की राजेश से कंट्रोल ही नही हुआ...

UPDATE - 4
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पूरा दिन उसके दिलो दिमाग़ में यही उलझन रही...
फिर वो एक निर्णय पर पहुँचा की ये सब जान ने के लिए सिर्फ़ एक ही तरीका है,
उसे रजनी को इस बात के लिए राज़ी करना पड़ेगा की वो पर्ल सेट उतार दे...

और उतारने के बाद भी अगर वो कल रात की तरह चुदाई करने में इंट्रेस्टेड रही तो इसका मतलब ये सब भूत-वूत की बातें उसका वहम है...

पर फिर से कल रात की तरह चुदाई की बात सोचकर उसके लंड ने अकड़ना ज़रूर शुरू कर दिया था...
अब तो उसे रात का इंतजार था बस.

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अब आगे
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घर पहुँचकर हमेशा की तरह वो फ्रेश होकर टीवी के सामने बैठ गया और न्यूज़ चला ली,
रजनी का चेहरा देखकर उसे अभी ये अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो रहा था की उसपे अभी तक कल रात वाला असर है या नही...
वो राजेश के लिए चाय बनाकर लाई और किचन में जाकर रात का खाना तैयार करने लगी.
राजेश ने नोट किया की उसने वो पर्ल सेट उतार दिया है....
गले के हार के साथ उसने कानो के टॉप्स और अंगूठी भी उतार दी थी, ये देखकर राजेश को खुशी हुई की चलो अच्छा है, अब ये जानना आसान रहेगा की सच क्या है.

राजेश ने चाय पी और किचन की तरफ चल दिया, ईशा अपने रूम में थी इसलिए वो थोड़ा निश्चिंत था अभी.

वो रजनी के पीछे गया और उसके पेट पर अपनी बाँहों को कसते हुए उसे पीछे से जाकड़ लिया और अपना सिर उसके कंधे पर रख दिया...

रजनी ने मुस्कुराते हुए कहा : "अर्रे....क्या हो गया है आपको...आज तक तो ऐसे नही किया कभी...''

राजेश ने उसके गालो को चूमते हुए कहा : "तुमने भी तो आज तक वो सब नही किया जो कल रात किया था...''

राजेश की बात सुनके वो मुस्कुरा दी...
राजेश ने देखा की उसके ब्लाउज़ में तनी हुई चुचियों में अचानक निप्पल्स चमकने लग गये...
यानी उसकी बात सुनकर वो उत्तेजित हो रही थी.

राजेश ने एक बार पलटकर पीछे देखा की कहीं ईशा तो नही आ रही और फिर अपने हाथ उपर करते हुए वो रजनी के बूब्स को साड़ी के उपर से ही पकड़ लेता है...

''आआआआआआआआआआआअहह...... म्‍म्म्ममममममममममममममममम.......... छोड़ो ना......क्या कर रहे हो..... काम करने दो प्लीज़..... ईशा आ जाएगी....मत करो ना...''

पर वो उसकी नही सुनता और उसके निप्पल्स को ब्लाउस के उपर से ही पकड़कर उन्हे उंगलियो के बीच मसलने लगता है और अपना खड़ा हुआ लंड वो उसकी भरी हुई गांड पर घिसकर ज़ोर से दबाने लगता है...

''आआआआआआआआआअहह रआआआजीईईश....... मत करो ना........ डार्लिंग...... उम्म्म्मममममममम......''

ऐसा करते हुए वो नागिन की तरह अपने बदन को लहराकर उसके खड़े लंड पर रगड़ भी रही थी और उसके हाथो को अपनी छाती के उपर दबाकर उनका मज़ा भी ले रही थी..

अब तक राजेश शायद समझ चुका था की शेफाली के भूत वाली बात शायद उसका वहम था...
रजनी में सचमुच कुछ बदलाव आ चुका है..

पर जो भी था, ये बदलाव उसे बहुत पसंद आ रहा था..

रजनी की हालत ऐसी हो चुकी थी की राजेश अगर चाहता तो उसे वहीं किचन में चोद डालता पर ईशा घर में थी अभी...
इसलिए उसने अपने आप पर काबू किया और अपनी बाँहों में मचलती हुई रजनी के कानो में धीरे से कहा

''आज रात को कल से भी ज़्यादा बुरी तरह से चोदूँगा तुझे....देख लेना..

''

इतना कहकर वो उसे अधमरी सी हालत में छोड़कर मुड़ा और सीधा बाथरूम में घुस गया..

पीछे बेचारी रजनी अपनी उखड़ी हुई सांसो पर काबू पाती हुई, अपनी चूत से रिस रहे रस को अपने पेटीकोट से रगड़कर उसे सॉफ करने लगी और रात को होने वाली चुदाई के बारे में सोचकर मुस्कुराती हुई फिर से अपने काम में लग गयी.

राजेश ने अपने सारे कपड़े निकाल फेंके और रेजर लेकर सबसे पहले उसने अपने लंड की शेव की, जो काफ़ी समय से नही की थी...करता भी क्यों भला, आज तक उसे देखने की भी ज़रूरत महसूस नही की थी रजनी ने...
पर अब तो वो उसे देखेगी भी और चुसेगी भी, इसलिए उसका फैशियल करना तो बनता ही है...
अपने लंड के चारों तरफ की घास हटाकर उसने उसे चमका कर चिकना बना दिया...
और फिर खूब मल-मलकर उसने अपने शरीर पर बॉडी वॉश लगाया और रात की तैयारी पूरी करके वो अपने बेडरूम में आया और ढीले ढाले से कपड़े पहन कर वापिस बाहर आ गया.

रजनी तब तक खाना बना चुकी थी, वो जब वो नहाने जा रही थी वो राजेश उसके कान में बोला ''डार्लिंग...अपनी चूत की अच्छे से क्लीन कर लेना...''

वो झुकी और उसके कान मे फुसफुसाई : "सुबह ही कर ली थी मैने तो...''

इतना कहकर वो खिलखिलाती हुई बाथरूम की तरफ चल दी..

डाइनिंग टेबल पर बैठी ईशा उन्हे देखकर हैरान हो रही थी की अचानक उसके माँ बाप इतने रोमॅंटिक कपल कैसे बन गये..
पर जो भी था ये अच्छा था, इसलिए वो बिना कुछ कहे मंद-2 मुस्कुराती हुई डिन्नर करने लगी.

रजनी के आने के बाद राजेश ने उसके साथ डिन्नर किया और रूम में पहुँचकर बेड पर लेट गया.

कुछ देर में ही रजनी आई और उसने बड़े ही सैक्सी अंदाज में उसे देखते हुए दरवाजा अंदर से लॉक कर दिया.

राजेश बेड से उठ खड़ा हुआ और उसका लंड भी पायजामे में अंगड़ाइयां लेने लगा.

नहाने के बाद रजनी ने एक गाउन पहन लिया था, जिसे बेड पर आने से पहले उसने उतार दिया..
सामने से खुलने वाले गाउन पर लगी तनी जब उसने खोली तो अनुमान के मुताबिक अंदर उसने कुछ भी नहीं पहना हुआ था , एक ही पल में वो पूरी नंगी होकर खड़ी थी राजेश के सामने.

UPDATE - 5
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रजनी जल्दी से रूम मे गयी और वही शेफाली वाला पर्ल सेट निकाल कर ले आई और उसके सामने रख दिया.वो सेट देखते ही राजेश के चेहरे के रंग बदल गये..

वो बोला : "अर्रे...ये...ये भला इसे क्यों दे रही हो....ये तो...''

वो बोलता, इस से पहले ही ईशा बोल पड़ी : "सो वॉट पापा....मोंम के लिए आप लाए तो मैं नही पहन सकती क्या...और वैसे भी एक दिन के लिए तो मैं कुछ नया समान लेने मार्केट नही जाउंगी ना...एक तो आपके पैसे बचा रही हूँ उपर से आप ऐसे बोल रहे हो....चलो अब जल्दी से चलो, मुझे कॉलेज पहुँचकर मेकअप भी करना है..''

इतना कहते हुए उसने वो सेट अपने पर्स में डाला और राजेश का हाथ पकड़कर लगभग खींचते हुए उसे बाहर कार तक ले गयी...राजेश पूरे रास्ते बस यही सोचता रहा की अब क्या होगा.

***********
अब आगे
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ईशा को उसके कॉलेज उतारकर वो अपने हॉस्पिटल पहुँच गया...
वो अभी भी परेशान था पर अपनी परेशानी को वो ज़्यादा देर तक रख नही पाया क्योंकि एक बिज़नेसमेन की फॅमिली का सुसाईड केस आया हुआ था हॉस्पिटल में , उसने, उसकी बीबी और बेटी के साथ फाँसी लगा ली थी....
उसका पूरा दिन उन्ही के पोस्टमॉर्टम में और रिपोर्ट्स बनाने में निकल गया...

रात को वो अपने टाइम के बाद ही घर पहुँचा और तब तक वो सुबह वाली बात भूल ही चुका था की ईशा वो पर्ल सेट लेकर गयी है.

उसने बेल बजाई तो दरवाजा एक अंजान और सुन्दर सी लड़की ने खोला.

एक पल के लिए तो वो खुद चोंक गया की ये कौन है, या फिर कहीं वो किसी ग़लत घर में तो नही आ गया..

पर तभी पीछे से रजनी की आवाज़ आई : "कौन है चाँदनी...ईशा के पापा है क्या ?''

इतने कहते हुए वो अपने गीले हाथ पोंछते हुए दरवाजे तक आ गयी.
उस लड़की ने सिर झुका कर राजेश को नमस्ते किया

रजनी : "आ गये आप, आज इतनी देर कर दी, मैं कॉल करने ही वाली थी....ये चाँदनी है, ईशा की दोस्त...आज वो स्टेज पर गिर गयी थी तो यही उसे घर लेकर आई ...''

उसके इतना कहने की देर थी की राजेश का दिल बैठ सा गया

''गिर गयी थी....कैसे....कहीं लगी तो नही....कहाँ है वो....ईशा ....ईशा...''

इतना कहते हुए वो पागलो की तरह उसके रूम की तरफ भागा...
वो अपनी बेटी से बहुत प्यार करता था, उसके गिरने की खबर सुनते ही वो बदहवास सा हो गया...
पीछे-2 चाँदनी और रजनी भी ईशा के रूम में आ गये..

ईशा अपने बेड पर बैठी थी, उसके पैर में मोच आई थी शायद, उसने बैंडेज लगा रखी थी.

राजेश ने जाते ही उसे गले से लगा लिया

"तू ठीक तो है बेटा...क्या हुआ...कैसे गिर गयी...ज़्यादा चोट तो नही लगी...मुझे कॉल क्यों नहीं किया...''

रजनी पीछे से बोली : "मैने किया था पर आपका फोन बंद था, मैं समझ गयी की ज़रूर कोई बड़ा केस आया होगा...''

ईशा : "मैं ठीक हूँ पापा...नथिंग मेजर....वो आज प्ले था ना हमारा, मैं कॉलेज पहुँचकर फाइनल रिहर्सल करने लगी तो मेरा पैर फिसल गया और मोच आ गयी...फिर चाँदनी को मेरी जगह लेनी पड़ी...एंड पापा, आज तो इसने कमाल ही कर दिया, बिना किसी प्रिपेरेशन के इतना अच्छा परफॉर्म किया की हमारे कॉलेज की प्रिन्सिपल ने स्पेशल स्टेज पर आकर इसे कांग्रेचुलेट किया...''

राजेश की नज़र फिर से चाँदनी की तरफ गयी...
वो अभी भी कोने में खड़ी मुस्कुरा रही थी, पर इस बार राजेश के चेहरे की हँसी गायब थी क्योंकि चाँदनी ने वही पर्ल सेट पहना हुआ था...
शेफाली वाला.

ईशा : "एंड पापा, चाँदनी ने प्ले के बाद मुझे घर भी छोड़ा और अपने घर पर फोन करके आज रात मेरे साथ ही रहने की परमिशन भी ले ली अपनी मोम से....शी इस माय बेस्ट फ्रेंड यू नो...''

इतना कहकर वो क्यूट सी स्माइल देकर चाँदनी को देखने लगी...
पर चाँदनी बड़े ही रहस्यमय ढंग से राजेश को ही देखे जा रही थी.

राजेश बेचारा समझ नही पा रहा था की कैसे रिएक्ट करे...

रजनी उसके लिए चाय बनाने जा चुकी थी...
राजेश भी एक्सक्यूस मी कहता हुआ वहां से निकला और अपने बाथरूम में आकर अपने चेहरे पर ठंडे पानी के छींटे मारे..

शीशे मे अपना चेहरा देखकर वो ये जानने की कोशिश कर रहा था की ये हो क्या रहा है उसके साथ....उसकी लाइफ में.

शेफाली का वो सेट इस वक़्त चाँदनी के गले में था...
जाहिर सी बात थी, ईशा वो प्ले नही कर पाई तो चाँदनी ने उसकी जगह ली, उसके कपड़े पहने होंगे और उसकी ज्वेलरी भी यूज़ की होगी, और इसी वजह से अभी तक चाँदनी के गले में वो सेट था..

पर राजेश का दिमाग़ उन सब बातों का पीछा छोड़ ही नही रहा था की शेफाली की आत्मा उस शरीर पर क़ब्ज़ा कर लेती है जो उसे पहनता है...
उसकी बीबी भी तो 2 ही दिन में बदल सी गयी थी...
और चाँदनी के चेहरे को देखकर और वो जिस अंदाज से राजेश को घूरे जा रही थी , उसे फिर से वही लगने लगा था की कहीं चाँदनी पर भी तो शेफाली के साँए ने अपना असर नही कर दिया है...

ऊपर से चाँदनी थी भी बहुत सैक्सी ...
22 साल की जवान लड़की, कसा हुआ बदन, छोटे पर भरे हुए स्तन और सबसे बड़ी बात उसका मासूम सा चेहरा...
उसके पिंक लिप्स जिनपर लिपिस्टिक लगाने की भी ज़रूरत नही थी, उन्हे चूसने में कितना मज़ा आएगा ये सोचते ही राजेश के तन बदन में सुइयाँ सी चुभने लगी.

वो सोचने लगा की कहीं वो सब सच हो जाए जो वो सोच रहा है तो कैसा होगा...
उसके लिए तो अच्छा ही है..
पर साथ ही एक मरे हुए इंसान के भूत के संपर्क में आने की कल्पना उसे डरा भी रही थी...
उसका दिल डाँवाडोल हो रहा था

UPDATE - 6
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''चले अंकल....उपर...''
राजेश ने उसे देखा, वो बड़े ही सैक्सी अंदाज में अपनी नन्ही सी गोल मटोल गांड मटकाती हुई उपर बने गेस्ट रूम की तरफ चल दी.ईशा बेंडेज लगाकर अपने रूम में बैठी टीवी देख रही थी और रजनी ने खुद ही उसे बोल दिया था की आप देख लो,मैं खाना बना रही हूँ, यानी उसका 'चेकअप' करते हुए बीच में कोई नही आएगा...

राजेश धड़कते दिल से उसके पीछे चल दिया.ऊपर.

**********
अब आगे
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राजेश उपर पहुँचा तो वो बेड पर बैठ चुकी थी...
राजेश ने दरवाजा बंद कर दिया और उसकी तरफ कदम बदाए.

चाँदनी : "कैसे करना पसंद करेंगे अंकल...''

राजेश : "क..क....क्या ...?''

चाँदनी (मुस्कुराते हुए) : "चेकअप....मेरी थाई का....''

इतना कहते हुए उसने एक बार फिर से अपनी सुडोल जाँघो पर हाथ रखकर उसे थोड़ा सा दबा दिया..

राजेश बेचारा अचकचाता हुआ सा इधर-उधर देखने लगा और बोला : "यहीं ....यहीं लेट जाओ...बेड पर....''

चाँदनी : "उल्टी होकर....या सीधी...''

ये कहते हुए वो मुस्कुरा भी रही थी....
उसकी आँखो में आई शरारत सॉफ देखी जा सकती थी....
राजेश समझ चुका था की वो उसके साथ मज़े ले रही है.

राजेश : "दर्द कहाँ है....आगे या पीछे....''

चाँदनी : "वो तो आप चेक करके देखो ना...मुझे तो हर जगह दर्द होता है...

''

इतना कहते हुए बड़े ही नशीले अंदाज में उसने हाथ उपर करते हुए अपने मुम्मो को सहला दिया..

राजेश का लौड़ा तुनके मारने लगा ये देखकर...
फिर भी उसने अपने आप पर काबू पाते हुए उस से कहा : "उल्टी होकर लेट जाओ...लेट मी चेक..''

वो खुशी-2 बेड पर उल्टी होकर लेट गयी....
उसकी नन्ही सी गोल गांड एक कटावदार घुमाव के साथ लहराते हुए उपर नीचे हो रही थी...
राजेश उसके करीब गया और अपने हाथ आगे बढ़ाये.

उसे हाथ लगाने से पहले उसने एक बार फिर से दरवाजे की तरफ देखा

उसे बाहर की तरफ देखते हुए चाँदनी ने देखा और बोली : "डोंट वरी अंकल...रजनी आंटी उपर नही आएगी...यू केन कंटिन्यू...''

वो ऐसे बोल रही थी जैसे उसे राजेश के दिलो दिमाग़ की सारी बातें पता थी, और जिस कॉन्फिडेंस से वो रजनी के उपर ना आने की बात बोल रही थी, राजेश की हालत फिर से खराब सी होने लगी शेफाली के बारे में सोचकर..

उसने अपने काँपते हुए हाथ उसकी जाँघो पर रखे और उन्हे धीरे से दबाया..

''आआआआआआआआआअहह.....सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स........म्‍म्म्ममममममम''

एक ठंडी और मीठी सी सिसकारी निकल गयी चाँदनी के मुँह से जब राजेश ने उसे ऐसे छुआ तो...

राजेश की भी हालत खराब हो गयी इतने जवान जिस्म को छूकर...
एकदम मलाई पनीर जैसी जाँघ थी उसकी...
छूने से पनीर की तरह अंदर धँसती चली गयी उसकी त्वचा...
राजेश ने उंगलियो के साथ-2 अपनी पूरी हथेली उसकी जाँघ पर फेरा दी....
चाँदनी बेचारी पिल्लो में अपना चेहरा दबाकर ज़ोर से सिसक पड़ी.

''उम्म्म्ममममममममममममममममममममममम.........आआआआआआआअहह''

राजेश ने धीरे से पूछा : "यहाँ दर्द है क्या...''

चाँदनी : "उम्म्म.................. नही......... दर्द तो नही पर बहुत अच्छा लग रहा है आपके टच करने से .....''

राजेश मुस्कुरा दिया.....
अच्छा तो उसे भी लग रहा था ऐसे करते हुए...
उसने दूसरा हाथ भी उसकी जाँघ पर लगाया और दोनो हाथों से उसकी नर्म मुलायम जाँघ को दबाकर अच्छे से चेकअप करने लगा....
उसकी जाँघ उसके दोनो हाथो में आ भी नही रही थी.....
वो उसकी मालिश सी करने लगा अपने हाथो से.

अपडेट - 7
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चाँदनी ने मुस्कुराते हुए अपने चेहरे पर लगी मलाई को उंगलियो से इकठ्ठा करके चाटनी शुरू कर दी और बोली : "आप जाओ नीचे, खाना खा लो, मेरा तो हो गया डिन्नर...''

राजेश अवाक सा होकर उसके इस रूप को देखता रह गया...और सोचने लगा की काश ईशा भी एक दिन उसके साथ ऐसा ही करे.खैर, वो जल्दी से उठा, अपनी पेंट और हुलिया ठीक किया और नीचे चल दिया...और पता नही क्यूँ , उसका लंड अभी तक बैठने का नाम नही ले रहा था.

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अब आगे
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नीचे पहुँचकर राजेश ने देखा की डिन्नर लग चुका है,
वो टेबल पर बैठ गया, ईशा को चलने में तकलीफ़ थी, इसलिए उसका डिन्नर प्लेट में लगाकर उस तक पहुँचा दिया था रजनी ने.

रजनी : "क्या हुआ...चाँदनी नही आई..?"

राजेश (हड़बड़ाते हुए) : "वो...वो.....कह रही है की भूख नही है...

''

रजनी उसके करीब आई और नीचे झुकते हुए उसने राजेश के कड़क लंड को पकड़कर धीरे से सहला दिया और बोली : "ऐसा क्या खिला दिया उसे जो उसकी भूख मिट गयी...कहीं मेरे हिस्से की क्रीम तो नही खिला दी...''

उसकी बेबाकी पर राजेश हैरान सा होकर उसे देखता रह गया और वो खिलखिलाकर हँसती हुई सी वहाँ से निकलकर किचन में भाग गयी

ये रजनी का एकदम नया रूप था...
कहाँ तो वो किसी और लड़की या औरत के नाम से भी चिढ़ जाती थी और अब खुद ही उसकी बेटी की उम्र की लड़की का नाम लेकर इतना भद्दा मज़ाक कर रही है, जैसे इस बात से उसे कोई फ़र्क ही नही पड़ता...

वैसे रजनी ने अंदाज़ा तो एकदम सटीक लगाया था ,
राजेश उसके हिस्से की क्रीम ही तो खिला कर आ रहा था चाँदनी को,
जिसे खाकर उसकी भूख मिट चुकी थी.

कुछ देर बाद रजनी भी आ गयी और दोनो ने मिलकर डिन्नर किया..

राजेश एकदम चुप था, शायद उसे अभी तक अपनी किस्मत पर विश्वास ही नही हो रहा था..
एक जवान लड़की के हुस्न का दीदार करना और उसके मज़े लेना इस उम्र में इतना आसान नही होता...
पर जितने आराम से उसे आज ये सुख मिला था वो उसकी समझ से परे था...
एक के बाद एक किस्से होते जा रहे थे उसकी लाइफ में, जब से वो शेफाली वाला नैकलेस सेट लाया था वो,
उस नैकलेस के बारे में सोचते ही उसका दिमाग़ फिर से उसी बात की गवाही देने लगा की हो ना हो उसी का हाथ है उसकी लाइफ में आए इन सुखद हादसों में.

खाना खाकर वो बाहर बने पार्क में कुछ देर टहलने निकल गया और रजनी किचन समेटने लगी.

पार्क में जाकर राजेश ने शुरू से लेकर आज तक के सारे किस्से जोड़े,
उसका दिल तो पहले ही इस बात को मान चुका था,
आज दिमाग़ भी मानने पर मजबूर हो गया की शेफाली के नैकलेस का ही कमाल है ये.

और ये सब बाते सोचते हुए उसने ये भी नोट किया की अगर सच में ये भूत-प्रेत का असर है तो जो भी हो रहा है उसके अच्छे के लिए ही तो हो रहा है...
यानी उसे सैक्स का मज़ा मिल रहा है.
और इसमें उसे कोई बुराई नही दिखी और ना ही इस बात से या किसी और बात से उसे कोई नुकसान हुआ था अभी तक.

और जहाँ नुकसान ना हो, फायदा भी मिले और वो भी सैक्स के रूप में तो इसमें डरने जैसी तो कोई बात ही नही हो सकती..

पर शेफाली की आत्मा उसके उपर ही इतनी मेहरबान क्यों है,
ये सोचते हुए उसने अपना सिर खुजलाना शुरू कर दिया...
क्योंकि उसकी तरह तो शेफाली के लाखों -करोड़ों प्रशंसक होंगे जो शेफाली के बारे में सोचकर मुट्ठ मारा करते थे..
फिर ये ख़ास मेहरबानी उसी पर क्यों कर रही है शेफाली की आत्मा.

फिर उसे अपने एक सहायक डॉक्टर विकास की बात याद आई..
एक बार जब वो विकास के साथ मिलकर एक बॉडी का पोस्टमार्टम कर रहा था तो उसने कहा था की मरने के बाद आत्मा काफ़ी देर तक शरीर के आस पास रहती है...
ये देखने के लिए की कौन-2 उसे मरा हुआ देखकर दुखी है, कौन कैसी बातें बना रहा है, कौन खुश है, कौन हंस रहा है...

वगेरह वागेहर...

और उसने ये भी कहा था की उस वक़्त उस शख्स की आत्मा भी वहीं मौजूद है जिसका वो दोनो पोस्टमॉर्टम कर रहे थे......
उस वक़्त तो राजेश ने विकास की बातो को मज़ाक में उड़ा दिया था पर आज उसे वो सब सही लग रहा था...
क्योंकि शेफाली जब मरी थी तो उसके आस पास कोई नही था...
उसके रिश्तेदार बरसों पहले उसकी अय्याश लाइफ की वजह से उसका साथ छोड़ चुके थे, और जब वो मरी तो उसके पास रोने वाला भी कोई नही था...
और राजेश को अच्छी तरह से याद है की उसकी बॉडी को देखकर उसका खुद का रोना निकल गया था और भावेश में बहकर उसने उसका माथा भी चूम लिया था...
और शायद शेफाली की आत्मा उसी से खुश होकर उसपर ये मेहरबानियां कर रही थी..

हालाँकि भूत का असर था उसकी लाइफ में पर अच्छे वाला... जो उस नेकलेस के थ्रू उसे पहनने वाले के जिस्म को राजेश की इच्छाओं और इमैजिनेशन को पूरा करवाती थी , और एक बार नैकलेस को पहनने के बाद वो इंसान उसे अगर उतार भी दे तो उसका असर बना ही रहता था, जैसे रजनी पर अभी तक बना हुआ था और अब चांदनी पर भी उसका असर पड़ चुका था.

उसने एक गहरी साँस ली और उपर देखते हुए धीरे से बुदबुदाया "थेंक्स शेफाली...थॅंक्स फॉर एवरीथिंग ..''

और उसी वक़्त उसे एहसास हुआ जैसे एक ठंडी हवा का झोंका उसके चेहरे को छूकर निकल गया...
यानी उसका अंदाज़ा सही था.
शेफाली उसके आस पास ही थी.

राजेश ने उसी वक़्त अपने दिलो दिमाग़ का डर निकाल फेंका और सोच लिया की जब ये मेहरबानी उसपर हो ही रही है तो उसे अच्छे से एंजाय करना चाहिए...
क्योंकि इस वक़्त उसे इन सबके पीछे अपनी बेटी ईशा की जवानी को हासिल करने का तरीका नज़र आने लगा था, जिसके बारे में सोचकर उसका लंड हमेशा कड़क रहता था..

UPDATE - 8
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''राजेश.....वो देखो सामने....चाँदनी हमे छुप कर देख रही है...''

राजेश की तो गांड ही फट्ट गयी ये सुनकर....उसने तो ये सोचा भी नही था की जैसे वो उसे देख सकता है , बेड पर उल्टी लेटी हुई रजनी को भी तो वो दिखाई ही दे रही होगी...वो तो मज़े में अपनी चूत में अंदर बाहर हो रहे लंड का मज़ा ले रही थी, थोड़ा सा चेहरा उपर किया तो सामने शीशे के पीछे खड़ी चाँदनी दिखाई दे गयी, जो इस वक़्त अपनी आँखे बंद किए बड़े ही मज़े में अपनी चुचि और चूत मसल रही थी...राजेश ये सुनते ही रुक गया....रजनी ने जब उसे रुकता देखा तो बोली : "अरे ...तुम क्यों रुक गये...उसे देखने दो..यही तो उम्र है ये सब सीखने की...यू प्लीज़ फक मी हार्ड.....''

राजेश समझ गया की ये शेफाली की आत्मा ही रजनी से बुलवा रही है , उसे और क्या चाहिए था, रजनी की तरफ से हरी झंडी मिलते ही वो पहले से ज़्यादा तेज़ी से उसकी चूत मारने लगा...
आज तो सच में उसका लंड स्टील जैसा बन चुका था...और ये चुदाई कम से कम आधा घंटा और चलने वाली थी...और राजेश ये नही जानता था की इस वक़्त रजनी के मन में क्या चल रहा है..

पर उसे अच्छे से पता था की अगले आधे या एक घंटे में जो भी होगा उनके बेडरूम में वो मजेदार ही होगा.

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अब आगे
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राजेश के हर झटके से अब रजनी और भी ज़्यादा कामुक तरीके से अपनी चुदाई करवा रही थी...
वो ज़ोर से चीख रही थी ताकि बाहर खड़ी चाँदनी तक उसकी सिसकारियाँ पहुँच सके..

''ओह राजेश....... ज़ोर से चोदो मुझे...... उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ तुम्हारा ये मोटा लंड ..... आअहहह मज़ा आ रहा है आज तो बहुत चुदवाने में....... आज ये कुछ.....अहह ज़्यादा ही .....उफफफफफफ्फ़ ....मोटा लग...... रा है........ अहह...... ऐसे ही चोदो मुझे.....डार्लिंग.......''

राजेश भी मंद -2 मुस्कुराते हुए अपने काम में लगा रहा....

राजेश अब उसके ऊपर लेट कर उसे चोद रहा था....
इस पोज़ में तो राजेश के लंड का आखरी कतरा भी रजनी की चूत में उतर चुका था..

ये शायद रजनी के लिए भी काफ़ी आनंददायक पोज़ था
क्योंकि उसके बाद उसका ध्यान चाँदनी से हट सा गया
और वो आँखे बंद करके अपने पिछवाड़े कब्बड्डी कर रहे राजेश के लंड का मज़ा लेने लगी
जो उसकी चूत की अंदरूनी रेखा तक जाता और उसे छूकर फिर से वापिस भाग जाता.

रजनी ने अचानक आँखे खोली और एक बार फिर से चाँदनी की तरफ दौड़ाई जो उन्हे देखकर अभी तक अपनी मुनिया को मसल रही थी..
अब उसने अपनी टी शर्ट उपर कर ली थी और शॉर्ट्स को नीचे...
एक तरह से वो लगभग नंगी खड़ी होकर अपनी चूत की जबरदस्त घुटाई कर रही थी....

अब शायद रजनी के दिमाग़ में कुछ शैतानी उभरने लगी थी...
वो धीरे से राजेश से बोली : "डार्लिंग...मुझे उपर आने दो...''

राजेश तो मस्ती में उसकी चूत मारने में लगा था,
आज तक वो ऐसे बोलकर उपर नही आई थी उसके...
वो समझ गया की वो चाँदनी के लिए शो का इंतज़ाम कर रही है..
उसे तो वैसे भी कोई दिक्कत नही थी इसमें..
उसने अपना लंड चूत से बाहर निकाल लिया और बेड पर उल्टा होकर लेट गया...
वो बेड पर तिरछा होकर इस पोज़ में लेटा की थोड़ा सा सिर पीछे करने से उसे भी चाँदनी दिखाई दे रही थी.

चूत से निकलने के बाद राजेश के लंड की शक्ल बहुत ही ख़तरनाक नज़र आ रही थी,
ऐसा लग रहा था जैसे किसी जंगली सूअर के उपर चमकीले तेल की मालिश कर दी हो..

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और उसके इस भयानक और मोटे लंड को देखकर चाँदनी की हालत और भी ज़्यादा खराब हो गयी...
पहले रूम में तो इतना मोटा और चमकीला नही लग रहा था अंकल का लंड, ये चूत में जाने के बाद उसे क्या हो गया है...
बेचारी यही सोचकर अपनी चूत मसलने लगी की अगर ये भयानक शक्ल वाला लंड इस वक़्त अगर उसकी चूत में चला गया तो उसका क्या हाल होगा.

इस बात को सोचकर ही उसके तन बदन में सिहरन सी दौड़ गयी..

वो ज़्यादा नही देख पाई उसके लंड को क्योंकि एक बार फिर से रजनी उसके उपर आ बैठी थी और उसके घोड़े जैसे लंड की सवारी करते हुए दूर तक दौड़ती चली जा रही थी..

राजेश की भी आँखे बंद होती चली गयी ,
मज़ा ही इतना ज़्यादा मिल रहा था उसे आज...

शादी के इतने सालो बाद अब उसे असली मज़ा मिल रहा था चुदाई का अपनी बीबी के द्वारा...
वो मन ही मन शेफाली को धन्यवाद दे रहा था रजनी के इस बदलाव के लिए..
और नीचे से लंड को उपर की तरफ धक्के मारते हुए जोरों से उसकी चुदाई भी कर रहा था.

और जल्द ही राजेश के लंड ने शोले उगलने शुरू कर दिए....
सिर्फ़ 1 घंटे में ये दूसरी बार था जब उसके लंड ने अपना गाड़ा माल निकाला था.

बाहर खड़ी चाँदनी ने भी अपनी चूत से चाँदनी टपका डाली...
तीनो अब अपनी-2 जगह पर पड़े गहरी साँसे ले रहे थे.

चाँदनी दबे पाँव अपने रूम में वापिस गयी, कपड़े पहने और सो गयी..
आज के लिए उसके साथ भी काफ़ी कुछ हो चुका था.

वो अपना सिर हिला कर अपने होंठो को उसके गाल पर रगड़े जा रही थी...अगर उसने लिपस्टिक लगाई होती तो राजेश का पूरा गाल रंगीन हो जाना था. राजेश ने भी उसे नही रोका और उसके नाज़ुक होंठो का स्पर्श महसूस करके आनंद लेता रहा...करीब 2 मिनट बाद जब वो रुकी तो राजेश का गाल गीला हो चुका था...ईशा के चेहरे पर शरारत भरी मुस्कान थी.

वो बोली : "आप कितने क्यूट हो पापा...मन करता है आपको किस्स करती रहूं..करती रहूं...''

राजेश बेचारा बस मुस्कुरा कर रह गया...वो समझने की कोशिश कर रहा था की वो किस वे में ऐसा बोल रही है...
पर अंदर ही अंदर वो जानता था की अंगूठी पहनने के बाद उसपर शेफाली ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है...और ये किस्स वो किस वे में करने को बोल रही थी..उसने कार स्टार्ट की और मंद-2 मुस्कुराते हुए घर की तरफ चल दिया...अब उसकी लाइफ का नया चेपटर जो खुलने वाला था.

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अब आगे
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घर पहुँचकर भी राजेश ने ईशा को गोद में उठाया और अंदर ले गया...
ईशा ने अपनी बाहें राजेश के गले में डालकर अपने नन्हे बूब्स उसकी छाती से सटा रखे थे.

रजनी को वो पहले ही फोन पर प्लास्टर वाली बात बता चुका था, उसने ईशा के रूम को ढंग से सॉफ सुथरा करके उसके लिए नर्म गद्दा लगा दिया ताकि लेटे रहने में उसे ज़्यादा परेशानी ना हो.

ईशा को उसके बेड पर लिटाते हुए राजेश ने जब उसे छोड़ा तो ईशा ने अपनी बाहे उसके गले से निकाली ही नही...
बेचारे राजेश को उसके साथ-2 बेड पर झुक कर बैठे रहना पड़ा..

राजेश : "छोड़ो ईशा...ये क्या कर रही हो...''

ईशा : "नो पापा...आप मेरे पास ही रूको आज...कहीं नही जाना..''

नंदिनी उन बाप बेटी की नोक झक देखकर हंसते हुए बोली : "आप दोनो आपस मे निपटो, मैं किचन में जाकर डिन्नर बना लेती हूँ ''

इतना कहकर वो उन्हे उसी हालत मे छोड़कर किचन में चली गयी...
रजनी के जाते ही ईशा ने राजेश को पूरा अपने उपर खींच लिया..
उसकी ताक़त देखकर राजेश भी हैरान रह गया, उसने शूज़ भी नही उतारे थे,
उस हालत में वो पूरा अपनी फूल जैसी बेटी पर लेटा हुआ था.

राजेश : "ये क्या बचपन है ईशा...छोड़ो मुझे...शूज़ भी नही उतारे मैने..

''

ईशा ने राजेश को अपनी बगल में लिटाया और उपर उठकर उसके शूज़ निकाल फेंके और वापिस आकर अपने पापा से लिपट कर आँखे बंद कर ली...
राजेश उसके मासूम से चेहरे को देखकर ये अंदाज़ा लगाने की कोशिश कर रहा था की ये उसे सच में अपने पापा पर प्यार आ रहा है या फिर शेफाली की आत्मा उस से ये सब करवा रही है...
पर वो कुछ समझ नही पाया.

वो भी आँखे बंद करके अपनी बेटी के साथ लेट गया..
काम तो ज़्यादा नही किया था आज उसने पर आने-जाने मे ही उसकी कमर दुखने लगी थी,
ऐसे लेटने में उसे भी आराम मिल रहा था.

उसकी आँख कब लग गयी उसे भी पता नही चला...ईशा भी सो चुकी थी.

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रात 9 बजे रजनी ने आकर उसे जगाया की खाना बन चुका है, वो उठा और कपड़े बदलकर फ्रेश हुआ और रजनी के साथ बैठकर खाना खाया..ईशा अभी तक सो रही थी..शायद गोलियों का असर था.

डिन्नर के बाद रजनी बोली : "ऐसा करो आज आप ईशा के साथ ही सो जाओ...उसे आप पर कुछ ज़्यादा ही लाड़ आ रहा है..ऐसा ना हो की रात को उठकर आपको आवाज़ें लगाने लगे..और उसे भूख लगे तो प्लीज़ खाना गर्म करके दे देना उसे, मुझे भी आज कुछ ज़्यादा नींद आ रही है..''

इतना कहकर वो अपने बेडरूम में चली गयी...
राजेश बेचारा अवाक सा बैठा देखता रह गया...
उसने सोचा की रजनी भी तो ईशा के पास सो सकती थी, उसे खाना भी गर्म करके दे सकती थी, आज एकदम से ये पापा पर लाड़ वाली बात निकालकर वो खुद उसे सोने के लिए कह रही है, यानी शेफाली उससे ये सब करवा रही है...

ईशा के साथ रात भर सोने की बात सोचते ही राजेश का लंड सुर सुर करने लगा...
अभी कल ही उसकी कमसिन सहेली को अपना लंड चुस्वाकार और उसके कच्चे बदन को नंगा देखकर उसे ये तो यकीन हो ही चुका था की ईशा अपनी सहेली से एक कदम आगे ही निकलेगी, क्योंकि ईशा का शरीर थोड़ा भरा हुआ और ज़्यादा कटावदार था.

खैर, वो अपनी तरफ से कोई भी ऐसी हरकत नही करना चाहता था जिससे उसकी बेटी को बुरा लगे...
क्योंकि अंदर ही अंदर उसे अभी तक यही लग रहा था की ये सब शायद उसका वहम है,
रजनी में आए बदलाव शायद नेचुरल थे और चाँदनी भी शायद अपनी दोस्त के पापा पर मोहित होकर वो सब कर बैठी थी...
पर ईशा के बारे में ऐसा कुछ भी नही था...
वो हमेशा उसकी बातो का विरोध ही करती थी,
ये तो बस वो उसकी इतनी तिमारदारी कर रहा था शायद इसलिए उसे अपने पापा पर लाड़ आ गया था वरना आज तक उसने इस तरह से कभी प्यार नही किया था उसे.

ऐसा करते हुए वो राजेश की गोद में चड़कर उसकी जाँघ पर बैठ गयी...एक पैर इधर और दूसरा उधर...
और अपनी चूत को उसपर घिसते हुए जोरों से रगड़ने लगी....और जल्द ही अपना मुम्मा चुस्वाते हुए, अपने पापा की गोद में झटके मारते हुए वो जोरों से झड़ने लगी....
''आआआआआआआआआआआअहह पापा....... उम्म्म्ममममममममममममममममममममममममम......... यसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स....... आई एम् कमिंग........

''
राजेश को भी अपनी बेटी की गर्माहट अपनी जाँघो पर पिघलती हुई महसूस हुई..और एक बार फिर से दोनो के होंठ एक दूसरे से मिलकर एक लंबी स्मूच में बदल गये...अभी तो ये शुरूवात थी...आज की रात बहुत लंबी होने वाली थी.

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अब आगे
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अभी तक वो सिर्फ़ टॉपलेस थी
नीचे उसने स्लेक्स अभी तक पहनी हुई थी,
जो झड़ने के बाद काफ़ी गीली हो चुकी थी,
ईशा का बदन अभी तक ऑर्गेज़म के झटके मार रहा था...
रह रहकर उसकी नन्ही चुचियों में एक सिहरन सी दौड़ जाती जिसका कंपन राजेश को भी महसूस होता....
शायद इतने जबरदस्त तरीके से वो पहली बार झड़ी थी.

राजेश की बाहो में लेटे हुए जब उसने अपनी नशीली आँखे खोली तो ऐसा लगा जैसे वो किसी गहरी नींद से जागी हो...
और अचानक उसे लगा की वो ईशा को नही बल्कि शेफाली को देख रहा है...
वही नशीलापन,
वही कशिश,
वही गहराई
और
वही सैक्सीनेस.
सब दिख रहा था उन आँखो मे.

ईशा ने अपना एक हाथ उसके चेहरे पर रखा और उसे सहलाने लगी...
सहलाते हुए वो अपनी उस उंगली को उसके होंठो तक ले आई जिसमे ईशा ने वो शेफाली की अंगूठी पहनी हुई थी...
और वो बुदबुदाई : "कैसा फील हो रहा है डार्लिंग....''

ये शायद राजेश की लाइफ में पहली बार था जब ईशा ने उसे बिना 'पापा' बोले सबोधित किया था.

एक पल के लिए तो उसकी गांड ही फट गयी ये सोचकर की इस वक़्त उसकी बाहों में उसकी जवान बेटी नही बल्कि शेफाली है...
पर फिर उसने उस विचार को झटका देकर निकाल दिया क्योंकि वो पहले ही जान चुका था की शेफाली जो भी कर रही है उसे मज़े देने के लिए और उसके भले के लिए ही कर रही है...

वो मुस्कुराया और बोला : "बहुत मज़ा आ रहा है जानेमन ''

ये सुनते ही वो पागलों की तरह उसके चेहरे और होंठो को चूमने लगी और अपनी जीभ और होंठों से चूम-चूमकर उसे भिगो ही डाला उसने..

और बोली : "इतने सालो से इस प्यार के लिए तरस गयी थी मैं ...अब मिला है मुझे ये प्यार...अब देखना , कितना प्यार करती हू तुम्हे और करवाती हूँ ...''

ये कहकर वो राजेश के गले लगकर चिपक गयी...
राजेश को शेफाली के इस इक़बालनामे को सुनकर काफ़ी खुशी भी हो रही थी और आने वाली दिनों में मिलने वाले मज़े को सोचकर उसे अपनी किस्मत पर नाज़ भी हुआ की इतने करोड़ों लोगो के होते हुए इस शेफाली ने मज़े देने के लिए उसे चुना है.

खैर, अभी के लिए तो उसे अपनी प्यास बुझानी थी और एक जवान जिस्म से बह रहे रस से अच्छी ड्रिंक कोई हो ही नही सकती थी,
इसलिए उसने हाथ नीचे करते हुए उसकी स्लेक्स को उसकी गांड से नीचे खिसका दिया,
ऐसा लगा जैसे फुटबॉल के उपर से रबड़ का कवर निकाल फेंका हो..
नीचे से हश्ट पुष्ट और स्वस्थ गांड निकल आयी राजेश के सामने,

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उसने उन्हे पकड़कर भींच दिया,
ईशा को ऐसा फील हुआ जैसे किसी ने उसकी गांड नही बल्कि नींबू निचोड़ दिया हो,
जिसके नीचूड़ने से उसकी चूत का रस पानी की तरह छींटे मारता हुआ बाहर गिरने लगा.

''आआअहह......सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स......... मज़ा आ गया ......''

राजेश ने उसकी गांड अपनी तरफ घुमा ली और अपने लंड को उसकी गांड के गद्दे पर दबाकर उसकी पीठ से जोरदार तरीके से चिपक गया..

ईशा ने खुद ही बाकी की बची हुई स्लेक्स को नीचे खिसका कर अपनी टाँगो से निकाल फेंका...
अब वो जन्मजात नंगी थी,
एकदम नंगी...
अपने प्यारे पापा की बाहों में जकड़ी हुई,
नंगी ईशा.

अचानक लगभग 1 घंटे बाद उसे कुछ हिलता हुआ सा महसूस हुआ....कमरे में अंधेरा था इसलिए उसे कुछ सॉफ-2 दिखाई नही दे रहा था...ईशा और वो अभी तक नंगे होकर एक दूसरे से लिपटकर सो रहे थे...कोई सामने खड़ा हुआ ईशा को हिला कर उठाने की कोशिश कर रहा था , और तभी उसे फुसफुसाति हुई सी आवाज़ सुनाई दी , जो उसकी बीबी रजनी की थी, वो उनके बेड के पास खड़ी हुई ईशा को झंझोड़ कर उठाने की कोशिश कर रही थी..

रजनी को देखते ही राजेश की सिट्टी पिटी गुम सी हो गयी....उसकी जवान बेटी नंगी होकर उससे लिपट कर सो रही थी और उसकी बीबी उनके कमरे में आकर ईशा को उठाने का प्रयास कर रही थी, उसे तो समझ ही नही आ रहा था की वो क्या करे...अब वो उठकर भाग तो नही सकता था, इसलिए उसने गहरी नींद में सोए रहना ही बेहतर समझा...पर आने वाले पल उसकी लाइफ को पूरी तरह से बदलने वाले थे.

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अब आगे
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शायद ये पल राजेश की लाइफ का सबसे गांड फाड़ू पल था,
उसकी वाइफ ने आज तक उसपर शक नही किया था क्योंकि राजेश ने ऐसा कोई मौका ही नही दिया था उसे,
और आज वो रंगे हाथो पकड़ा गया था अपनी बीबी के सामने
और वो भी अपनी नंगी बेटी के साथ......

रजनी ने फिर से ईशा को झींझोड़ा और फुसफुसाई : "ईशा.....ओ ईशा.....उठ....खड़ी हो...''

ईशा की गहरी साँसे राजेश की गर्दन पर पड़ रही थी....
उसने ऊंघते हुए अपनी आँखे खोली और बुदबुदाई : "क्या है मोम ....क्यूँ उठा रहे हो....''

रजनी : "चल उठ, मेरे साथ बाहर आ ड्राइंग रूम में....''

और इतना कहकर वो बाहर निकल गयी....
राजेश भी अपनी अधखुली आँखो से हैरान परेशान होकर उसे जाते हुए देखता रहा..
और वो हैरान परेशन इसलिए था की रजनी ने कुछ बोला क्यों नही,
उन दोनो को ऐसी हालत में सोते देखने के बाद भी उसका रिएक्शन एकदम शांत सा था...
और तो और वो फुसफुसा कर बाते कर रही थी ताकि राजेश की नींद ना खराब हो जाए...
और फिर अचानक उसे फिर से शेफाली का ध्यान आया और इन सब बातों को शेफाली की मेहरबानी समझ कर अपने विचारों पर विराम लगा दिया.

तब तक ईशा उठ चुकी थी...
और उठकर अपने कपड़े देख रही थी जो पूरे कमरे में इधर उधर फेले पड़े थे...

उसकी हालत भी कुछ ऐसी ही थी, बिखरी हुई सी, पर इस हालत में वो और भी ज़्यादा सैक्सी दिख रही थी.

उसे शायद फिर से कपड़े पहनने का आलस आ रहा था इसलिए वो ऐसे ही उठी, एक नज़र उसने सोते हुए राजेश पर डाली और नंगी ही बाहर की तरफ चल दी..हालाँकि उसके पैर में प्लास्टर लगा था, पर एक पैर को मोड़कर वो राजेश की लाई बैसाखी के सहारे चलती हुई बाहर आ गयी.

राजेश भी तुरंत उठा और बंद दरवाजे के पीछे से बाहर ड्राइंग रूम का नज़ारा देखने लगा,
उसके मन में भी उत्सुकतता थी की आख़िर वो इतनी रात को ईशा को ऐसे बाहर क्यों बुला रही है..

बाहर रजनी एक सोफे पर बैठी उसका ही इंतजार कर रही थी, उसे ऐसे नंगी ही बाहर आते देखकर वो मुस्कुराइ और उठकर उसे गले से लगा लिया.. और फिर उसे अपनी गोद में लेकर बैठ गयी...

माँ बेटी का ऐसा प्यार देखकर राजेश भी हैरान हो रहा था..

रजनी ने उसके फूल जैसे नर्म मुम्मो पर लगे राजेश के दांतो के निशान देखे और बोली : "देखा, मैने कहा था ना , पापा के दांतो से बचकर रहना, काफ़ी तेज है वो,ख़ासकर आगे के दो दाँत, देख मुझे भी काटा था कल...''

इतने कहते हुए रजनी ने अपने गाउन की सामने वाली जीप नीचे की और अपना दांया मुम्मा बाहर निकाल कर उसपे लगे राजेश के दांतो के निशान दिखाने लगी..

ईशा ने हंसते हुए अपनी मोम के निशान को सहलाया और बोली : "इस दर्द में भी अपना ही मज़ा है मॉम ..जैसे भी है ये निशान, इन्हे महसूस करके बहुत अच्छा फील हुआ...''

रजनी भी मुस्कुराइ और बोली : "अच्छा छोड़ ये सब, पहले बता की हुआ या नही...''

ईशा (थोड़ा मायूस सा चेहरा बनाकर बोली ) : "नही मॉम ...आज रात नही हुआ...इन्फेक्ट पापा ने पूछा भी था, और मैने हां भी कर दी थी, पर पता नही क्यों सिर्फ़ सकिंग करके ही सो गये वो...मैं भी काफ़ी थक गयी थी इसलिए नींद आ गयी वरना पापा को सोने नही देती जब तक वो मेरी वर्जिनिटी नही ले लेते...''

ये सब बाते दोनो इतने आराम से कर रही थी मानो रात को क्या पकना है ये डिसकस कर रहे हो...
और राजेश उनकी बाते सुनकर फिर से उसी हैरानी परेशानी में डूबने लगा जो उसे थोड़ी देर पहले महसूस हुई थी.

रजनी : "कोई बात नही....आज नही तो कल वो कर ही लेंगे...अब जब हमने इतनी मेहनत से ये सब प्लान किया है तो ऐसे ही थोड़े जाने देंगे, असली चुदाई का मज़ा ज़रूर मिलेगा तुझे...''

ईशा भी आँखे चमकाती हुई बोली : "हाँ बिल्कुल, जैसा मज़ा आप ले रहे हो आजकल, दिन रात...''

ये सुनकर दोनो माँ बेटियाँ ज़ोर-2 से हँसने लगी....
और राजेश बेचारा चूतिया सा बनकर उनकी बाते सुनता रहा और समझने की कोशिश करने लगा की आख़िर ये हो क्या रहा है..

जब उन्होने हँसना बंद किया तो ईशा बोली : "मॉम, आपने और राधिका ऑन्टी ने मिलकर जो ये प्लान बनाया है ना, इसमे मज़ा भी बहुत आ रहा है, और रोमांच भी फील हो रहा है...

''

राजेश ने जब राधिका आंटी का नाम सुना तो उसका माथा ठनका,
ये तो चाँदनी की माँ का नाम है,
ईशा और चाँदनी तो काफ़ी सालो से दोस्त है और अक्सर ईशा को छोड़ने या लेने जब भी वो चाँदनी के घर जाता तो राधिका उसे ज़रूर मिलती,
और क्या माल है वो,
एकदम गदराया हुआ सा बदन था उसका...
डाइवोरसी थी और एक प्राइवेट स्कूल में टीचर थी

घर में सिर्फ़ वो अपनी बेटी के साथ ही रहती थी
राजेश का मन कई बार हुआ की उसके उपर लाइन मारके देखे, पर अपनी ही बेटी की सहेली की माँ के साथ ऐसा कुछ करना उसे शोभा नही देता था, इसलिए बेचारा कुछ नही कर पाया था आज तक..

अक्सर वो फॅमिली गेट-टुगेदर में भी मिला करती थी और शायद इसलिए रजनी की भी ख़ास सहेली बन चुकी थी वो..

पर ईशा ये क्या बोल रही थी अभी, की राधिका आंटी के साथ मिलकर अच्छा प्लान बनाया रजनी ने...
अब तो उसे दाल में कुछ काला लग रहा था..

सैक्स के बवंडर के निकल जाने के बाद दोनों एक दूसरे से लिपटकर सो गये.पर राजेश के दिमाग़ में अब चैन नही था....उसे तो इस षड्यंत्र की तह तक जाना था और इसके लिए उसे वो डायरीस पढ़नी ज़रूरी थी, वो किचन में गया जहाँ फ्रिज के उपर रजनी का पर्स रखा रहता था, उसमें से उसने चाभी निकाली , और फर्स्ट फ्लोर में पड़ी रजनी की अलमारी खोली और वो तीनो डाइयरीस निकाल कर ले आया, जिसमें वो सारे राज दफ़न थे और अपने रूम का दरवाजा अंदर से लॉक करके उन्हे पढ़ना शुरू कर दिया..आज की रात उन्हे पढ़कर कई राज से पड़दे उठने वाले थे.

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अब आगे
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टोटल 3 डायरीस थी,
पहली 2 डायरीस में तो शादी के बाद से लेकर ईशा के जन्म तक की कहानी थी...
इसलिए उन्हे उपर-2 से पढ़कर राजेश ने 10 मिनट में ही तीसरी डायरी उठा ली, जो आधी से ज़्यादा भर चुकी थी...
इस डाइयरी में ही वो सभी राज थे जो राजेश के लिए एक पहेली बन चुके थे.

उसने पढ़ना शुरू किया , जिसमें रजनी ने लिखा था की

ईशा के जन्म के बाद मुझमें सैक्स की चाहत ख़त्म सी हो गयी है....
राजेश के कहने पर ही मैं बुझे मन से सैक्स किया करती थी वरना अंदर से मुझे कुछ फील ही नहीं होता था.

राजेश भी सोचकर उस वक़्त का अंदाज़ा लगाने की कोशिश करने लगा..
उसे याद आया की उन दिनों रजनी कैसे एकदम से सैक्स के नाम से दूर भागने लगी थी...
और शायद वही दौर था जब दोनो के बीच शारीरिक संबंधो में बदलाव आने शुरू हुए थे...
हालाँकि एक डॉक्टर होने के नाते वो भी जानता था की औरत के शरीर में प्रेगनेंसी के बाद हॉर्मोनल चेंजस आते है जिसमें ऐसा अक्सर होता है...
पर फिर भी एक ठरकी मर्द होने के नाते वो अपने लंड की ठरक दूर करने के लिए उसे अपने अनुसार ही पेलता रहता था.

आगे डाइरी में उसने लिखा था की कैसे रजनी ने अपनी लाइफ ईशा का इर्द गिर्द ही रखनी शुरू कर दी और इसी में उसे सबसे ज़्यादा खुशी मिलती थी...

अगले 15-20 पन्नो में उसकी जवानी की दहलीज तक पहुँचने का सफ़र था...
और आख़िरकार एक पन्ने पर आकर उसकी नज़रें रुक गयी.

ये 112th के बोर्ड एग्जाम्स के दिन थे जब ईशा और चाँदनी अक्सर घंटो तक एक दूसरे के साथ कमरे में बैठकर पढ़ा करती थी...
राजेश को भी याद आया की उन दोनो पर राजेश और रजनी ने कैसे प्रेशर बनाकर रखा हुआ था ताकि कॉलेज में एडमिशन के लिए अच्छे नंबर आए.

रजनी ने एक वाकये का ज़िक्र किया हुआ था उस पेज पर जब ईशा और चाँदनी रूम में बैठकर स्टडी कर रहे थे..

दोनो बच्चे रूम में बैठकर पढ़ रहे थे...मैं भी काफी थकी हुई थी इसलिए रूम में जाकर सो गयी जो मेरा रोज का नीयम था... अचानक मेरी नींद खुली क्योंकि मुझे ज़ोर से पेशाब आया था...अभी मुझे एक घंटा और सोना था, इसलिए जल्दी-2 पेशाब करके मैं बेड तक आई पर फिर सोचा की एक बार बच्चों से पूछ लेती हूँ की किसी चीज़ की ज़रूरत तो नही है, ये सोचकर मैं उनके रूम में गयी पर वो अंदर से लॉक था, वो पहले भी ऐसा अक्सर करते थे पर इसके लिए मैने उन्हे डाँटकर मना किया हुआ था, मैं जैसे ही दरवाजा खटकाने लगी तो अंदर से मुझे ईशा की सिसकारी सुनाई दी....मेरा दिल धक् से बैठ गया...उस सिसकारी की गहराई बता रही थी की अंदर क्या चल रहा है...मैं एक स्टूल उठा कर लाई और उसपर चड़कर दरवाजे के उपर बनी विंडो से अंदर झाँक कर देखा और अंदर का नज़ारा देखकर मेरा शक़ यकीन में बदल गया

चाँदनी और ईशा एकदम नंगी होकर बेड पर बैठी थी...
दोनो नंगी होकर एक दूसरे से चिपकी हुई बैठी थी और एक दूसरे के मुम्मे सहलाते हुए, स्मूच कर रही थी...बीच-2 में चाँदनी का हाथ ईशा की चूत को भी मसल रहा था जिसकी वजह से वो सिसकार रही थी....

ये देखकर मेरा पूरा शरीर काँप सा गया...मैं चेयर से गिरते-2 बची...नीचे उतरकर मैं वापिस रूम में गई और फफक-2 कर रोने लगी...ये सोचकर की आख़िर ये सब कब हुआ, कैसे हुआ, क्यों हुआ...उसकी बेटी एक लेस्बियन है.....ये कैसे हो सकता है...राजेश और उसके प्यार में क्या कमी रह गयी थी जो ईशा इस दिशा में चली गयी....माना की इस उम्र में प्यार और एट्रेक्शन होता है, सैक्स के प्रति जिज्ञासा रहती है, पर एक लड़की के साथ ...छी: ...वो ऐसा कर भी कैसे सकती है...

फिर मैने सोच लिया की शाम को चाँदनी के जाने के बाद वो ईशा को समझाएगी और फिर भी वो ना मानी तो राजेश के घर आने के बाद उसे ये सब बताएगी और ईशा की पिटाई करवाएगी...

राजेश भी ये सब पड़कर सोचने पर विवश हो गया की उसकी बेटी गे कैसे हो सकती है.

और अपने लंड को मसलते हुए वो बोला : "प्लान तो तुम सभी ने बहुत अच्छा बनाया है....और सबसे बड़ी बात मुझे इसमें मज़ा भी आ रहा है...पर अभी तक तुमने मुझे अपने इशारों पर नचाया है, अब मेरी बारी है....तुम्हारा प्लान अपने हिसाब से ही चलेगा पर होगा वही जैसा मैं चाहूँगा....क्योंकि अब मुझे भी इस बात का डर नही है की ईशा क्या सोचेगी...

रजनी को पता चलेगा तो उसे कैसा लगेगा....बेटी की सहेली चाँदनी के साथ ऐसा कुछ करना सही नही होगा...या फिर एक डाइवोर्स लेडी राधिका को पटाना एक डॉक्टर को शोबा नही देता....अब तो ये सब होगा भी और शोभा भी देगा...''

ये बुदबुदाते हुए उसने उस डायरी को एक कुटिल मुस्कान के साथ चूमा और उसे लेजाकर फिर से उसी जगह रख दिया जहाँ से उठाई थी.अब पासा पलट चुका था....जो शिकारी थे अब शिकार बन चुके थे और शिकार अब शिकारी बनकर ये सोच रहा था की इस मौके का ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा कैसे उठाया जाए.आने वाले दिनों के बारे में सोचकर राजेश का लंड एकदम से टाइट होने लगा.

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अब आगे
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अगले दिन की प्लानिंग राजेश ने बेड पर लेटे -2 ही बना ली...
वो आने वाले दिनों में होने वाली संभावनाओ को ध्यान में रखते हुए ये सब कर रहा था
जिससे उसे ज़्यादा से ज़्यादा मज़ा मिले.

राजेश अगली सुबह जल्दी उठ गया, वो सोया तो ईशा के बेड पर हुआ था और वो वहाँ थी नही..
रात को अपनी मोम के साथ मज़े लेने के बाद शायद वो वहीं सो गयी थी...उसने वापिस आने की जहमत भी नहीं उठायी,
वो उठा और अपने बेडरूम की तरफ चल दिया...
वहाँ दोनो माँ बेटियाँ एक दूसरे से लिपटकर नंगी ही सो रही थी...
हालाँकि उन्होने एक ब्लेंकेट ओढ़ रखा था पर उनके नंगे कंधे बाहर थे जो ये बयान कर रहे थे की मज़े लेने के बाद उन्होने कुछ पहनने की जहमत ही नही उठाई.

राजेश ने उस वक़्त एक सेंडो और पायजामा पहना हुआ था, वो मुस्कुराता हुआ बेड के अंदर घुसा गया, और वो जान बूझकर दूसरी तरफ से अंदर गया जहाँ ईशा सो रही थी...
अब ईशा उन दोनो के बीच में थी...
एकदम नंगी,
रजनी की तरह.

राजेश का लंड तो उसके नंगे बदन को सोचकर ही खड़ा हो चुका था,
इसने पायजामे में उभरे लंड को ईशा की चिकनी गांड पर दबाते हुए उसे पीछे से दबोच कर अपनी बाहों में ले लिया...
उसके अमरूद के साइज़ के नन्हे और कठोर बूब्स को उसने जब अपने हाथो में पकड़ा तो उसके मुँह से एक सिसक सी निकल गयी...
उसके हाथो में अपनी बेटी के बूब्स थे और हाथो के पिछले हिस्से पर रजनी के मोटे मुम्मो का दबाव....
ऐसा सुखद एहसास उसे आज तक नही हुआ था...

अचानक उसे महसूस हुआ की ईशा जागने को हो रही है,
उसने गहरी साँस लेते हुए एक मजेदार सी अंगड़ाई ली और फिर अपनी नशीली आँखे खोलकर सामने सो रही रजनी को बड़े ही प्यार से देखा...
राजेश ने तब तक अपने हाथो की पकड़ ढीली कर दी और आँखे बंद करके सोने की एक्टिंग करने लगा..

और ईशा को जब एहसास हुआ की कोई उसके पीछे चिपककर सो रहा है तो उसने तुरंत पीछे गर्दन घुमाई,
अपने पापा को अपने साथ लिपटकर सोते देखा तो एक पल के लिए उसकी सिट्टी पिटी ही गुम हो गयी, क्योंकि इस वक़्त वो अपनी मोम के साथ नंगी सो रही थी...
यानी उसके पापा ये बात शायद जान चुके थे की माँ बेटियाँ नंगी सोई हुई है...
या शायद नही...

उसने राजेश के चेहरे को गोर से देखा,
उन्हे थोड़ा सा हिलाकर पुकारा भी पर वो उठा नही...
फिर उसने तुरंत गर्दन घुमा कर अपनी माँ को उठाया..
वो भी उंघते हुए बोली : "क्या है ईशा...इतनी सुबह क्यों उठा रही है...''

ईशा : "मोम ....यहाँ देखो...पापा लेटे हैं मेरे पीछे...''

रजनी भी चोंक गयी...
उसे तुरंत अपनी और ईशा की हालत का ध्यान आया,
चादर उठा कर देखा तो दोनो नंगी ही थी अभी तक...
राजेश का हाथ ईशा की छाती पर रखा हुआ था.

रजनी : "ये कब आए यहाँ ....इन्होने देख तो नही लिया हमे ऐसी हालत में.''

ईशा : "आई डोंट नो मोम ....मैने भी अभी देखा...पर आई थिंक कमरे में अंधेरा था, इसलिए सीधा आकर सो गये ये...वर्ना चिल्ला कर उठा देते हम दोनों को...''

रजनी कुछ देर तक सोचती रही और बोली : "यू डोंट वरी, जस्ट एंजाय....ज़्यादा कुछ हुआ तो वो शेफाली है ना, वो संभाल लेगी...''

इतना कहकर दोनो माँ बेटियां हँसने लगी...
ईशा ने राजेश के हाथ पर हाथ रखकर उसे अच्छी तरह से अपने जिस्म से चिपका लिया..
रजनी की नींद खुल चुकी थी और उसका इस तरह से साथ लेटे रहना शायद उसे भी सही नही लगा, इसलिए वो नंगी ही अपने बिस्तर से निकली और नहाने के लिए बाथरूम में घुस गयी.

इधर ईशा धीरे-2 वो अपनी कमर मटका कर अपने नंगे चूतड़ राजेश के लंड पर रगड़ने लगी...
राजेश के लंड का आकार बढ़ने लगा और उसके हाथ की ग्रिप भी उसके मुम्मो पर ज्यादा होती गयी.

ईशा का एक हाथ पीछे की तरफ आया और उसने अपना हाथ सीधा राजेश के पायजामें में घुसा दिया और उसके खड़े लंड को पकड़ लिया...
अब राजेश के बस की बात नही थी ज़्यादा देर तक सोने का नाटक करना, इसलिए वो भी जम्हाई लेता हुआ उठ गया

राजेश : "उम्म....गुड मॉर्निंग हनी...''

ईशा भी मुस्कुराती हुई अपने पापा की तरफ घूम गई और उनके लिप्स पर एक प्यारी सी किस्स करते हुए बोली : "गुड मॉर्निंग पापा...उठ गये आप...''

ह्म....
इतना कहकर राजेश ने अपनी जवान बेटी के जिस्म को अपने आगोश में लेकर एक गहरी साँस ली....
उसका लंड इस वक़्त स्टील की तरह खड़ा था और वो अगर चाहता तो रात के अधूरे काम को अभी निपटा डालता क्योंकि सुबह के इरेक्शन में अलग ही बात होती है..

पर अब वो पूरी कहानी जान चुका था,
इसलिए अपने प्लान के अनुसार अभी तो उसे कुछ दीनो तक ईशा को तड़पाना था और उसके मज़े धीरे-2 लेने थे....
इसलिए उसने वो सब भी नही पूछा की वो इस रूम में कैसे आई या वो अपनी माँ के साथ नंगी क्यों सो रही थी...

मोम ....छोड़ो ये सब....अंदर जाओ बाथरूम में ...पापा बुला रहे है....और उनका लंड पूरा खड़ा है इस वक़्त...''

अपनी ही बेटी के मुँह से अपने पति के खड़े लंड की बात सुनते ही रजनी की चूत एकदम से पनिया गयी...उसने 2 बूँद पानी वहीं खड़े-2 छोड़ दिया....और मुस्कुराते हुए वो ईशा की तरफ पलटी और शरमाते हुए उस से बोली : "बेशरम कहीं की....चल तू जा अपने रूम में , कपड़े पहन ले...मैं आती हूँ अभी...

''

इतना कहकर वो नशीली चाल चलती हुई बाथरूम की तरफ चल दी....आज बरसों बाद वो राजेश से बाथरूम में चुदने वाली थी.

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अब आगे
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रजनी की हालत ऐसी हो रही थी की उसे किचन से बाथरूम तक का सफ़र कोसो दूर लग रहा था...
वो अपनी गीली छूट को जाँघो के बीच दबाती हुई धीरे-2 कदमो से उस तरफ जा रही थी ,
और उसकी चूत हर कदम पर जांघो के बीच दबकर निम्बू की तरह खुद ब खुद निचुड़ रही थी

इस वक़्त अगर उसकी रसीली गांड पर कोई ज़ोर से चांटा मारता तो चूत में से झनझनाकर गाड़े रस की बारिश हो जाती..

उसने कुरती और नीचे एक ढीला सा पयज़ामा पहना हुआ था, कुरती उसने निकाल फेंकी और ब्रा भी खोल कर नीचे गिरा दी...
इतनी बेशरम शायद वो आज से पहले कभी नही हुई थी जब उसकी बेटी घर पर हो और वो राजेश के साथ ऐसी रासलीला मनाने जा रही हो..
पर इस वक़्त शायद उसका खुद पर भी काबू नही रह गया था और ये बात उसके खड़े हुए निप्पल्स सॉफ दर्शा रहे थे...
नंगे होने के बाद उसके मुम्मे और उनपर लगे निप्पल्स और भी कठोर हो चुके थे.

अब तो बस उसका मन कर रहा था की राजेश उन्हे पकड़े और निचोड़ डाले...
अंदर ही अंदर उसकी रगों में जो मीठा सा दर्द उठ रहा था वो इसी तरीके से जा सकता था.

उसने जल्दी से अपना पायजामा भी उतार फेंका और बाथरूम के अंदर जा घुसी.

अंदर का नज़ारा देखकर उसके तन बदन की आग और भी भड़क उठी...
राजेश अपने पूरे शरीर में साबुन लगाकर अपने खड़े लंड को बड़े ही प्यार से अपने हाथो में लेकर मसल रहा था...
शायद ईशा के जवान जिस्म को सोचकर वो अपने नाग को सहला कर शांत करने की कोशिश कर रहा था.

उसने भी जब रजनी को नंगी ही अंदर आते देखा तो उसके हाथो की गति और तेज हो गयी...
पर फिर उसने हाथो को बड़ी मुश्किल से रोका, क्योंकि ऐसा करके तो वो खुद ही अपना माल निकाल देता और फिर रजनी को बुलाने का कोई मतलब ही नही रह जाना था.

और आज तो उसे रजनी की चूत अच्छी तरह से चोदनी थी...
उसने रजनी का हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींचा और अपने गले से लगाकर उसके पूरे शरीर पर अपना बदन रगड़ने लगा...उसके होंठो को मुँह में लेकर उन्हे चूसने लगा और उसकी देसी शराब जैसे होंठो का मज़ा लेने लगा.

रजनी भी अपने भरे पूरे मुम्मो को राजेश के बदन से रगड़कर अपनी खुजली कम करने की कोशिश करने लगी... राजेश ने उसे सामने से पूरा रगड़ा और फिर उसे पलटाकार उसकी गांड से चिपक गया और अपने हाथ आगे करके उसके मोटे मुम्मो को अपने हाथो से निचोड़ने लगा.

उफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ क्या जादू था राजेश के हाथो में...
इन्फेक्ट मुम्मो को कैसे निचोड़ा जाता है ये एक मर्द ही अच्छे से जान सकता है
यही तो सोचती हुई आ रही थी वो की उसका पति उसके मुम्मो को पकड़े और निचोड़ डाले.

राजेश के हाथ उसके मुम्मो पर फिसलकर उनकी मसाज करने लगे..

साथ ही साथ वो उसकी भरंवा गांड पर अपने खड़े लंड की रगड़ाई भी कर रहा था...

साबुन की फिसलन इतनी थी की वो अगर अपने लंड को पकड़कर उसकी गांड पर लगाता तो भी वो वहाँ जा घुसता...
हालाँकि आज तक राजेश ने कभी गांड नही मारी थी रजनी की पर अब शायद शेफाली की कृपा से वो काम भी कर सकता था...
पर ये जगह पहली बार गांड मरवाई के लिए सही नही थी क्योंकि उसमे दर्द भी होना था उसे
और इस वक़्त वो उसे दर्द नही बल्कि मज़े देना चाहता था.

राजेश के इस गिफ्ट को पाकर उसका चेहरा खिल उठा...वो भी सोचने लगी की इस खड़ूस को अचानक क्या हो गया...आज तक उसे ढंग से देखा तो है नही और आज एकदम से उसे गिफ्ट दे रहा है...कही उसपर लाइन तो नही मार रहा...वैसे मार भी रहा है तो उसे बुरा थोड़े ही लगेगा...इतने हेंडसम है साहब.

ये सोचकर वो खुद ही शर्मा गयी और उसने तुरंत राजेश के दिए गिफ्ट को अपने गले में डाल लिया...
और फिर गुनगुनाते हुए घर की सफाई करने लगी.राजेश भी मुस्कराते हुए कमरे से निकलकर बाहर आया और डाइनिंग टेबल पर बैठकर उसने नाश्ता किया और फिर टिफ़िन लेकर वो अपने हॉस्पिटल की तरफ चल दिया....उसने अपना जाल फेंक दिया था, अब बाकी का काम शेफाली के हार ने करना था.

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अब आगे
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हार पहेन्ने के बाद टोपींकी खुद को कहीं की महारानी समझ रही थी...उसने अपनी सॅडी का आँचल तोड़ा और नीचे किया ताकि हार पूरा दिखाई दे...बातरूम मे जाकर वो काफ़ी देर तक उसे निहारती भी रही.

फिर वो एक गाना गुनगुनाती हुई घर का काम करने लगी...
आज सच में उसे अंदर से खुशी हो रही थी...
शादी को 5 साल हो चुके थे उसकी पर आज तक उसके बेवड़े पति ने एक भी गिफ्ट नही दिया था उसे...
हालाँकि दूसरे घरों में काम करने की वजह से वहां की मेमसाब् पुराने कपड़े दे दिया करती थी पर आज तक किसी ने ऐसा नया हार नही दिया था.

ईशा अपने रूम में नाश्ता करने के बाद दवाई लेकर फिर से सो गयी..
रजनी बैठ कर अपना सीरियल देख ही रही थी की तभी उसकी नज़र पिंकी के गले में पड़े नेकलेस पर गयी...
और उसे देखते ही उसके तोते उड़ गये.

वो लगभग चिल्लाते हुए बोली : "अर्रे पिंकी.....ये....ये हार तेरे पास कैसे....''

वो मुस्कुराते हुए बोली : "ये....ये तो साहब ने दिया है मुझे....''

रजनी ने अपना माथा पीट लिया...
ये राजेश को क्या हो गया है...
ये उसे क्यों दे दिया...
आज तक की जो प्लानिंग उन लोगो ने की थी वो इसी हार के इर्द गिर्द ही तो थी...
अगर ये हार पिंकी के पास चला गया तो उनका सारा प्लान ही खराब हो जाएगा...
वैसे तो राजेश को इस बात का अब भरोसा हो चुका था की सिर्फ़ हार को पहनने मात्र से ही शेफाली की आत्मा उस शरीर पर जादू सा कर देती है, बाद में वो हार पहना हो या ना पहना हो, शेफाली का वो जादू बरकरार ही रहता है...
और अभी तक वो, ईशा और चाँदनी तो उस हार को पहन कर मज़े भी ले चुके थे...
पर अभी तो राधिका भी बची थी और हो सकता है बाद में भी वो हार काम आता.

लेकिन राजेश ने वो हार पिंकी को देकर उनके सारे मंसूबों पर पानी ही फेर दिया था.

और पिंकी को वो हार देने के 2 ही मतलब ही सकते थे....
एक, वो उस हार को उसे देकर अपने घर से शेफाली के साए को दूर करना चाहता था ,
दूसरा, वो शायद ये हार पिंकी को देकर उसके उपर भी शेफाली का असर देखना चाहता था...
यानी राजेश का मन पिंकी को चोदने का था.

नही नही....
ऐसा नही हो सकता....
जब राजेश के सामने इतने अच्छे विकल्प है, कच्ची जवानियां है तो वो उस कामवाली के पीछे क्यों भागेगा.

पर ये भी तो हो सकता है की वो देखना चाहता हो की उस हार का असर पिंकी पर होता है या नही...
हाँ , ये पासिबल है,
और शायद इसलिए उसने ऑफीस जाने से पहले वो हार उसे दिया हो ताकि शाम तक या कल उसका असर देखने को मिल जाए..

पर कोई जादू या शेफाली की आत्मा हो तभी तो असर होगा,
ये तो उन सबका प्लान था जो आपस में मिलकर बनाया गया था...
पर अब पिंकी के बीच में आ जाने से उस प्लान की ऐसी तैसी हो चुकी थी.

उसने तुरंत राधिका को कॉल मिलाया और उसे विस्तार से सारी बाते बताई...
और जिन बातों का उसे अंदेशा हो रहा था वो भी बताया.

राधिका भी चकरा गयी इस बात को सुनकर...
फिर दोनो ने यही उपाय निकाला की या तो पिंकी को अपने खेल में शामिल कर लो या फिर उसे एक्टिंग करने के लिए कहा जाए ताकि राजेश का भरोसा उस हार पर बना रहे. और साथ ही उससे वो हार भी वापिस ले लिया जाए.

उस कामवाली को अपने प्लान में शामिल करने का तो सवाल ही नही उठता था,
वो 10 घरों में काम करने वाली औरत अगर बाहर जाकर ये बोल दे की राजेश की बीबी और बेटी ने उसका लंड लेने के लिए ये सब प्लानिंग की है तो वो दुनिया को मुँह दिखाने लायक नही रहेगी.

इसलिए उसे पटाकर राजेश के साथ चुदाई के लिए तैय्यार करवाना पड़ेगा...
और उससे वो हार भी वापिस लेना पड़ेगा
यही सही ऑप्शन था.

कुछ देर बाद जब पिंकी घर का सारा काम निपटा कर जाने लगी तो रजनी ने उसे अपने कमरे में आने के लिए कहा...

उसके अंदर आते ही रजनी ने उसके हाथ में 500 का नोट रख दिया और बोली : "ये पैसे रख ले और आज से अगले 3-4 दिन तक मेरे बदन की मालिश भी कर दिया कर...पिछले कुछ दिनों से काफ़ी दर्द हो रहा है..''

पहले हार और अब 500 रुपय पाकर पिंकी तो खुशी के मारे चहकने ही लगी...

वो बोली : "ठीक है मेमसाब्....आप कपड़े निकालो, मैं तेल गर्म करके लाती हूँ ''

और वो पैसे अपने ब्लाउज़ में ठूसकर वो किचन में चल दी.

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इंस्पेक्टर की बेटी​

जनी : "हाँ .......साब के रसगुल्ले तू चूस....बिरजू के गुलाब जामुन मैं चुसूंगी.......''

दोनो की हँसी निकल गयी इस बात पर....और दोनो एक दूसरे को देखकर काफ़ी देर तक हंसते भी रहे....
और हंसते-2 जब दोनो की नज़रें इस बार आपस मे मिली तो अगले ही पल , एक झटके में रजनी ने पिंकी को अपने उपर खींच लिया और उसके होंठो पर अपने होंठ रखकर उन्हे चूसने लगी....

पिंकी भी पागलों की तरह अपनी गोरी मेमसाब् के रसीले बदन को उपर से नीचे तक मसलते हुए, उनके होंठों का रस पीने लगी....रजनी ने आनन फानन में उसकी साड़ी को खींचकर निकाल फेंका...

उसके कसे हुए ब्लाउज़ को खींचकर चिथड़े -2 करके फाड़ दिया और फटी हुई ब्रा को भी एक झटके में खींचकर तोड़ दिया...पेटीकोट और पेंटी का भी वही हश्र हुआ....1 मिनट के अंदर उसका कसा हुआ बदन पूरा नंगा होकर रजनी के सामने था...और अब दोनो एक दूसरे के शरीर को ऐसे चाट रहे थे मानो खा ही जाएँगे एक दूसरे को.अब सच में उस कमरे का तापमान पहले से काफ़ी बढ़ चुका था...जो एक आने वाले तूफान का संकेत था.

***************
अब आगे
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रजनी ने जब पिंकी की चूत को देखा तो एक बार के लिए उसकी सिहरन सी निकल गयी.....
चूत पर घने बालों का गुच्छा लटक रहा था उसकी...
जैसे बरसों से काटे ही ना हो वहाँ के बाल..

उसे याद आया की वो भी तो ऐसी ही थी शादी से पहले तक...
जब उसने जवानी में कदम रखा था तब से लेकर शादी तक उसने भी अपनी चूत के बालों को काटा नही था...
वो तो सहेलियो के कहने पर उसने चूत सॉफ करवाई थी सुहागरात के लिए वरना उसे अपने बालों से बहुत प्यार था...
उसके बाद उसे कभी मौका ही नही मिला बाल बड़ाने का,वो खुद ही काट दिया करती थी उन्हे ताकि सफाई बनी रहे और राजेश को बुरा ना लगे......

पर उन बालों की गर्मी का एहसास अलग ही हुआ करता था उन दिनों।
आज वैसे ही बाल पिंकी की चूत पर देखते ही वो और ज़्यादा उत्तेजित हो गयी और एक ही बार में उसे बिस्तर पर धकेलकर उसने अपना चेहरा उन बालों पर रख दिया...
एक अजीब सी गंध आ रही थी उनमें से...
पसीने और पेशाब की मिली जुली गंध मिलकर एक नशा सा उत्पन कर रहे थे....
और उस नशे में डूबती हुई रजनी ने अपने होंठ खोलकर उसकी चूत पर रखे और उसे चूसने लगी....
और जब उसकी चूत की नर्मी महसूस हुई तो उसकी चूसने की गति और भी ज़्यादा बढ़ गयी.

और शायद ये पिंकी के साथ पहली बार था जब उसकी चूत को कोई चूस रहा था....
क्योंकि गीली जीभ के एहसास ने उसकी चूत से गर्म पानी के फव्वारे निकालने शुरू कर दिए थे.
''आआआआआआआहह मेंमसाआआआआआआअब्ब्ब........ ये.....ये तो बहुत मजेदार है....... अहह..... मेरे मर्द ने तो आज तक सिर्फ़ इसमें अपना लॅंड ही डाला है..... उम्म्म्मममममममममममम..... आअज्जजज...... आाज पहली बार....... किसी ने मुँह लगाया है यहाँ..... अहह......... कसम से......... बहुत मज़ा...... आआईयईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई....... आआआहह ..... आआआआआ रहाआआआआआअ है...................... अहह मेंसाआआआआअब्ब्ब्ब चूसो ना ....और ज़ोर से चूसो........''

और रजनी को तो जैसे कोई छुपा हुआ खजाना मिल गया था....
वो खजाना जिसे बरसों से किसी ने निकाला नही था....
और जिसे वो अब अपनी जीभ के फावड़े से खोदकर निकाल रही थी...
उफफफफफफफफफफफफफ्फ़....
कितना नशा भरा हुआ था पिंकी की चूत में ...
जैसे पुरानी शराब का कोई ड्रम खोल दिया हो.....

उसमें से शराब रिस-रिसकर बाहर निकलती जा रही थी और रजनी उस शराब को पीकर मस्त हुए जा रही थी.

लेकिन वो ये नही जान पाई की उसकी खुद की शेम्पेन बहे जा रही है उसकी चूत से और बर्बाद हुए जा रही है.
पर पिंकी वो कैसे बर्बाद होने देती.....
उसने जब देखा की गाड़े रस की धार निकालकर मेमसाब की जाँघो से होती हुई नीचे गिर रही है तो उसने तुरंत उनकी जांघे पकड़ कर अपनी तरफ खींची और उनकी चूत को अपने मुँह के उपर लाकर पटक लिया....
आज उसका भी पहली बार था इस तरह से किसी दूसरी औरत की चूत का जाम पीना....
लॅंड तो उसने कई बार चूसा था बिरजू का पर चूत रस चखने का पहला मौका था.

राजेश : “तो एक काम करो….ये कपड़े उतार दो और बेड पर लेट जाओ…’’

पिंकी बिना कुछ बोले उठी और एक-2 करके उसने अपने सारे कपड़े निकाल फेंके….उसका बदन जल सा रहा था…
उसके शरीर की गर्मी को राजेश भी महसूस कर पा रहा था…पहले रजनी के कमरे का तापमान बड़ा था जब पिंकी ने उसकी मसाज की थी ….
अब इस कमरे का तापमान बढ़ चुका था जब राजेश उसकी मसाज करने वाला था…आज पिंकी को उसके काम का फल मसाज और एक खड़े लंड के रूप में मिलने जा रहा था…

अब असली तूफान आने वाला था कमरे में …लॅंड का तूफान.

**************
अब आगे
**************

राजेश इस वक़्त बनियान और पायजामे में था….
पिंकी के नंगे बंदन को देखकर उसका लॅंड फटने को हो रहा था….
सच में…
आज तक उसकी नज़र से वो पता नही कैसे बची रह गयी थी….
शायद अपने मैले कपड़ो में अपनी उफनती जवानी को बाँध कर रखती थी वो आज तक…
पर अब उस जवानी का उफान अपनी चरम सीमा पर था और बिल्कुल नंगा होकर उसकी नज़रों के सामने था…

राजेश ने पास पड़ी तेल की शीशी से तेल लेकर अपने हाथ पर लगाया और उसे बेड पर लेटने को कहा…
और फिर अपने गर्म हाथ उसके तपते बदन पर रखकर मालिश करने लगा…
सबसे पहले उसके हाथ पिंकी की मोटी जाँघ से टकराए…
ऐसा लगा जैसे चिकने पेड़ का तना पकड़ लिया हो…
एकदम कठोर था वहाँ का माँस…
पूरा दिन काम करने के कारण जिम जैसी बॉडी बन चुकी थी पिंकी की…
वो इस वक़्त उल्टी होकर लेटी हुई थी…
राजेश के हाथ लगते ही उसका बदन अकड़ सा गया और उसकी गांड अपने आप कमान की तरह हवा में उठती चली गयी….

और साथ में एक ठंडी सिसकारी निकली उसके होंठो से…

‘’सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स आआआआआआआआआआआआआआअहह’’

राजेश के हाथ थोड़ा उपर गये और उसने उसके उभरे हुए पुट्ठ को पकड़कर नीचे की तरफ दबाया और फिर से धरातल पर ला पटका…
ऐसा करते हुए उसके हाथों ने अच्छी तरह से उसकी गांड के माँस को अंदर तक महसूस किया…
जो लोग भरी हुई गांड के दीवाने होते है वो अच्छी तरह जानते है की इस तरह से गांड को दबाने पर कैसा महसूस होता है…
ठीक वैसा ही राजेश को फील हो रहा था इस वक़्त…
मन तो उसका कर रहा था की अपना मुँह उसके पीछे डाल कर उसकी चूत चूस डाले, पर वो अभी जल्दबाज़ी नही करना चाहता था…

धीरे-2 उसके हाथ उपर तक जाकर उसकी चिकनी पीठ और कंधो को भी मसल रहे थे….
ऐसा करते-2 वो उसकी पीठ पर सवार होकर अपना खड़ा लंड भी उसके उपर रगड़ रहा था….
पायज़ामे में खड़े लॅंड ने जब उसके बदन को छुआ तो एक गीलेपन की लकीर पिंकी के बदन पर खींचती चली गयी..
उसके गर्म बदन पर राजेश का प्रीकम इस वक़्त गर्म तवे पर पानी जैसा लग रहा था…
पड़ने के साथ ही भाप बॅंकर उड़ जाता…
ऐसी आग लगी हुई थी उसके बदन में.

उसे पीछे से अच्छी तरह मसलने के बाद राजेश ने उसे पलटने के लिए कहा…
पिंकी तो कब से इसी पल का इंतजार कर रही थी….
पलटने के बाद उसकी नज़रें सबसे पहले राजेश के खड़े लंड पर गयी जो काफ़ी देर से उसकी पीठ पर चुभकर उसे परेशान कर रहा था…
और राजेश की नज़रें उसके मोटे -2 मुम्मों पर जिन्हे मसलने के लिए उसके हाथ कब से तरस रहे थे…

उसने ढेर सारा तेल लेकर अपने हाथ जब उसके मुम्मो पर रखे तो आनंद के मारे पिंकी ने राजेश की जाँघो को पकड़ लिया और ज़ोर से चिल्लाई “ आआआआआआहह साआआआब्ब्बब …… बोला था ना ….यहाँ सबसे ज़्यादा दर्द है…..’’

राजेश : “फ़िक्र ना करो….तुम्हारा डॉक्टर अब तुम्हारा इलाज कर रहा है….सब ठीक हो जाएगा….’’

ऐसा कहते हुए उसने अपनी उंगलियो मे पकड़कर उसके निप्पल को ज़ोर से मसल दिया….
वो चिहुंक उठी और उसके हाथ राजेश की जाँघो से थोड़ा उपर खिसक कर उसके खड़े लॅंड पर पहुँच गये और उसे उसने ज़ोर से दबा दिया…..

अब सिसकने की बारी राजेश की थी

‘’आआआआआआआआआआआआआआआआअहह भेंन चोद …..’’

इस वक़्त तो पिंकी को वो गाली भी आई लव यू जैसी लग रही थी….
लॅंड की मोटाई और लंबाई महसूस करके वो जान गयी की उसे काफ़ी मज़ा आने वाला है….
अब राजेश के हाथ उसके जिस्म पर उपर से नीचे तक जा रहे थे पर पिंकी उसके लॅंड को छोड़ने को तैयार ही नही थी….
राजेश के हाथ जब उसकी चूत को सहला रहे थे तो उसके मुँह से शब्द फूटने से लगे, जिनको राजेश समझ भी नही पा रहा था…

‘’आआआआअहह उम्म्म्ममम ज्ज्ज्जाआाआअ द्दद्डूऊऊऊऊऊऊ इसस्सीईई…… उम्म्म्मममममम हाआआआअ मीईरीईईईईईईई अन्न्ननननननन्णन्द…..मीईई….अहह’’

राजेश : “तो एक काम करो….

ये कपड़े उतार दो और बेड पर लेट जाओ…’’

पिंकी बिना कुछ बोले उठी और एक-2 करके उसने अपने सारे कपड़े निकाल फेंके….उसका बदन जल सा रहा था…
उसके शरीर की गर्मी को राजेश भी महसूस कर पा रहा था…पहले रजनी के कमरे का तापमान बड़ा था जब पिंकी ने उसकी मसाज की थी ….
अब इस कमरे का तापमान बढ़ चुका था जब राजेश उसकी मसाज करने वाला था…आज पिंकी को उसके काम का फल मसाज और एक खड़े लंड के रूप में मिलने जा रहा था…

अब असली तूफान आने वाला था कमरे में …लॅंड का तूफान.

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अब आगे
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राजेश इस वक़्त बनियान और पायजामे में था….
पिंकी के नंगे बंदन को देखकर उसका लॅंड फटने को हो रहा था….
सच में…
आज तक उसकी नज़र से वो पता नही कैसे बची रह गयी थी….
शायद अपने मैले कपड़ो में अपनी उफनती जवानी को बाँध कर रखती थी वो आज तक…
पर अब उस जवानी का उफान अपनी चरम सीमा पर था और बिल्कुल नंगा होकर उसकी नज़रों के सामने था…

राजेश ने पास पड़ी तेल की शीशी से तेल लेकर अपने हाथ पर लगाया और उसे बेड पर लेटने को कहा…
और फिर अपने गर्म हाथ उसके तपते बदन पर रखकर मालिश करने लगा…
सबसे पहले उसके हाथ पिंकी की मोटी जाँघ से टकराए…
ऐसा लगा जैसे चिकने पेड़ का तना पकड़ लिया हो…
एकदम कठोर था वहाँ का माँस…
पूरा दिन काम करने के कारण जिम जैसी बॉडी बन चुकी थी पिंकी की…
वो इस वक़्त उल्टी होकर लेटी हुई थी…
राजेश के हाथ लगते ही उसका बदन अकड़ सा गया और उसकी गांड अपने आप कमान की तरह हवा में उठती चली गयी….
और साथ में एक ठंडी सिसकारी निकली उसके होंठो से…

‘’सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स आआआआआआआआआआआआआआअहह’’

राजेश के हाथ थोड़ा उपर गये और उसने उसके उभरे हुए पुट्ठ को पकड़कर नीचे की तरफ दबाया और फिर से धरातल पर ला पटका…
ऐसा करते हुए उसके हाथों ने अच्छी तरह से उसकी गांड के माँस को अंदर तक महसूस किया…
जो लोग भरी हुई गांड के दीवाने होते है वो अच्छी तरह जानते है की इस तरह से गांड को दबाने पर कैसा महसूस होता है…
ठीक वैसा ही राजेश को फील हो रहा था इस वक़्त…
मन तो उसका कर रहा था की अपना मुँह उसके पीछे डाल कर उसकी चूत चूस डाले, पर वो अभी जल्दबाज़ी नही करना चाहता था…

धीरे-2 उसके हाथ उपर तक जाकर उसकी चिकनी पीठ और कंधो को भी मसल रहे थे….
ऐसा करते-2 वो उसकी पीठ पर सवार होकर अपना खड़ा लंड भी उसके उपर रगड़ रहा था….
पायज़ामे में खड़े लॅंड ने जब उसके बदन को छुआ तो एक गीलेपन की लकीर पिंकी के बदन पर खींचती चली गयी..
उसके गर्म बदन पर राजेश का प्रीकम इस वक़्त गर्म तवे पर पानी जैसा लग रहा था…
पड़ने के साथ ही भाप बॅंकर उड़ जाता…
ऐसी आग लगी हुई थी उसके बदन में.

उसे पीछे से अच्छी तरह मसलने के बाद राजेश ने उसे पलटने के लिए कहा…
पिंकी तो कब से इसी पल का इंतजार कर रही थी….

पलटने के बाद उसकी नज़रें सबसे पहले राजेश के खड़े लंड पर गयी जो काफ़ी देर से उसकी पीठ पर चुभकर उसे परेशान कर रहा था…
और राजेश की नज़रें उसके मोटे -2 मुम्मों पर जिन्हे मसलने के लिए उसके हाथ कब से तरस रहे थे…

उसने ढेर सारा तेल लेकर अपने हाथ जब उसके मुम्मो पर रखे तो आनंद के मारे पिंकी ने राजेश की जाँघो को पकड़ लिया और ज़ोर से चिल्लाई “ आआआआआआहह साआआआब्ब्बब …… बोला था ना ….यहाँ सबसे ज़्यादा दर्द है…..’’

राजेश : “फ़िक्र ना करो….तुम्हारा डॉक्टर अब तुम्हारा इलाज कर रहा है….सब ठीक हो जाएगा….’’

ऐसा कहते हुए उसने अपनी उंगलियो मे पकड़कर उसके निप्पल को ज़ोर से मसल दिया….
वो चिहुंक उठी और उसके हाथ राजेश की जाँघो से थोड़ा उपर खिसक कर उसके खड़े लॅंड पर पहुँच गये और उसे उसने ज़ोर से दबा दिया…..

अब सिसकने की बारी राजेश की थी

‘’आआआआआआआआआआआआआआआआअहह भेंन चोद …..’’

इस वक़्त तो पिंकी को वो गाली भी आई लव यू जैसी लग रही थी….
लॅंड की मोटाई और लंबाई महसूस करके वो जान गयी की उसे काफ़ी मज़ा आने वाला है….
अब राजेश के हाथ उसके जिस्म पर उपर से नीचे तक जा रहे थे पर पिंकी उसके लॅंड को छोड़ने को तैयार ही नही थी….
राजेश के हाथ जब उसकी चूत को सहला रहे थे तो उसके मुँह से शब्द फूटने से लगे, जिनको राजेश समझ भी नही पा रहा था…

‘’आआआआअहह उम्म्म्ममम ज्ज्ज्जाआाआअ द्दद्डूऊऊऊऊऊऊ इसस्सीईई…… उम्म्म्मममममम हाआआआअ मीईरीईईईईईईई अन्न्ननननननन्णन्द…..मीईई….अहह’’

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