भाग 1
मेरा नाम सागर है, उम्र 19 साल | मैं और मेरा परिवार मुंबई में रहते हैं । पिताजी मुंबई में एक छोटा सा व्यवसाय करते हैं | माँ घर पर रहती हैं । मेरी एक बड़ी बहन है । उसका नाम संगीता है, उम्र 25 साल । मेरी बहन की शादी दो साल पहले हुई थी और अब वह अपने पति के साथ दिल्ली में रहती है । संगीता दी और मैं अपने माता-पिता के आँखों के तारे हैं । वे दोनों हमें खुद से ज्यादा प्यार करते हैं । जब दो साल पहले संगीता की शादी हुई और मैं इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए बैंगलोर चला गया तो मेरे माता-पिता बहुत अकेला महसूस करने लगे । माँ हमेशा रोती रहती थी | मुझे बहुत भावुक पत्र लिखती कि वह मेरे और संगीता के बिना कैसे ज़िन्दगी गुज़ार रही है और मेरे घर वापिस आने का इंतजार कर रही है | पिताजी भी दुखी थे लेकिन उन्होंने कभी इसे व्यक्त नहीं किया ।
जब मैं इस गर्मी की छुट्टी में घर आया तो माँ और पिताजी बहुत खुश थे । एक हफ्ते तक मस्ती और उत्साह के बाद हम सभी को संगीता की कमी खलने लगी । मेरी प्यारी, सुंदर और सेक्सी, संगीता दी ! मैंने पिछले दो सालों में संगीता दी को नहीं देखा था । लेकिन उसकी तस्वीरों को देख कर ये तो कह सकता था की संगीता दी पहले से अधिक सुंदर और सेक्सी हो गयी है । शादी से पहले भी संगीता दी काफी सूंदर लगती थी, मासूम ज़्यादा और सेक्सी कम | संगीता दी कि हाइट 5 फीट 6 इंच है, लंबे काले बाल, नशीली आँखें और गोरा-गोरा रंग, पतला शरीर, वजन में केवल 54 किलो। दुबले-पतले शरीर के बावजूद बड़े-बड़े चूतड़ और गोल-गोल भारी चूचे । भले ही मैंने संगीता दी को कभी पूरी तरह से नंगा नहीं देखा था, पर मुझे इस बात का अंदाजा था कि वो ड्रेस के अंदर कितनी आकर्षक और सेक्सी होगी ।
उसकी तस्वीरों को देखते हुए, अचानक से मेरा ध्यान उसकी छाती पर गया, उसकी बहुत ही बड़ी और भारी लग रही थीं । फोटो में संगीता के सुंदर चेहरे और सेक्सी शरीर को देखते-२ मेरा लौड़ा बुरी तरह से टन्ना गया | मैं वासना में इस बुरी तरह से चूर हो गया कि मुझे जल्दी से जाकर मुठ मारनी पड़ी | संगीता के नाम कि ये पहली मुठ नहीं थी, जब से मुझे सेक्स के बारे में पता चला था और ये भी समझ आया था कि संगीता दी कितनी सेक्सी माल हैं, तभी से मैंने उसके नाम पर मुठ मारना चालू कर दिया था | पूरी रात मैं ये सोचता रहा कि कैसे मैं होंठ चूमना चाहता हूँ, कैसे मैं उसकी छातियों का दबाऊंगा, कैसे उसके निपल्स को होंठों में लेके चबाऊँगा और कैसे उसकी रसीली चूत में ताबड़ तोड़ धक्के लगाऊंगा | उस रात, अपनी बड़ी बहन की याद में, मैंने दो से तीन बार मुठ मारी और हर बार इतना वीर्य निकला, इतना शक्तिशाली स्खलन हुआ जो जीवन में कभी नहीं हुआ | फोटो को देख के संगीता दी को देखने कि इतनी प्रबल इच्छा हुई कि मैंने अगले दिन ही दिल्ली जाने का फैसला कर लिया ।
भाग 2
अगले दिन जब मैंने माँ को दिल्ली जाने का प्लान बताया तो माँ बहुत खुश हुई | हमने प्लान किया कि एक महीने भर के लिए संगीता दी को रहने साथ के लिए ले आऊंगा । माँ ने तुरंत संगीता को फोन किया और उसे बताया कि मैं उसे लेने आ रहा हूं। यह सुनकर कि वह भी बहुत खुश हुई । मैं अपनी सेक्सी बहन को देखने के लिए इतना अधीर था कि मैंने अगले दिन दिल्ली के लिए उड़ान भरी और कुछ घंटों में उसके दरवाजे पर खड़े लंड के साथ दस्तक दी। मैं अपनी खूबसूरत और सेक्सी बहन को देखने के लिए पहले से ही बहुत उत्साहित था, और जब मैंने वास्तव में उसे देखा, तो मेरा लंड और टाइट हो गया था। उसके साथ रहने के दौरान, मेरा लंड इतना कड़ा हो गया कि बार-२ उससे नज़र बचा के मुझे लंड एडजस्ट करना पड़ रहा था |
मुझे लगा था कि मैं संगीताई को साथ के साथ ले आऊंगा और तुरंत मुंबई के लिए उड़ान भरूंगा, लेकिन मेरे प्लान कि सारी हवा तब निकल गयी जब मुझे पता चला कि संगीता के ससुराल वाले थोड़े पुराने जमाने के हैं | संगीता दी मेरे साथ तब तक नहीं आ सकती थी जब तक कि परिवार के मुखिया और उसकी सास से अनुमति ना मिल जाए । उसकी सास कहीं बाहर गई हुई थी और हमारे पास उनके लौटने का इंतजार करने के अलावा कोई चारा नहीं था ।
मैंने महसूस किया कि संगीता दी थोड़ी परेशान सी और दुखी थी । वह बहुत-२ सुस्त और किसी दबाव में लग रही थी | उसने एक भारी साड़ी पहनी हुई थी और सिर को अच्छे से ढक रखा था । सेक्सी शरीर तो छोड़ो, उसका चेहरा भी ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था । दीदी को मॉडर्न कपडे पहनने कि आदत थी पर उसकी सास ने उसे कभी भी साड़ी के अलावा कुछ भी पहनने नहीं दिया । ज्यादातर संगीता दी को अपनी सास के साथ घर पर और अपने कमरे में ही समय बिताना पड़ता था ।
इसलिए जब मेरे साथ जाने का प्लान बना तो संगीता दी बहुत खुश थी | उसे तो जैसे जेल से रिहाई मिल रही थी | लेकिन उसकी सास की अनुमति के बिना जाना संभव नहीं था | इंतज़ार करती-२ संगीता दी इतनी परेशान हो गयी कि रोना शुरू कर दिया | उसकी हालत देखकर मुझे बहुत अफ़सोस हो रहा था और उसकी सास पर भी बहुत गुस्सा आ रहा था । मैं जल्द से जल्द संगीता दी को वहां से आज़ादी दिलवाना चाह रहा था ।
रात को जब उसके सास-ससुर वापिस आए तो मुझे उनसे बात करने का मौका मिला | मैंने उन्हें बताया कि कैसे संगीता दी के जाने से घर सूना-२ हो गया है, घर कि तो जैसे जान ही चली गयी है, हमारा परिवार को पिछले दो सालों से संगीता को मिस कर रहा है | मैंने झूठे मन से उसके सास-ससुर कि भी तारीफ की और उनसे एक महीने के लिए संगीता को ले जाने अनुमति मांगी। मेरी बातों ने उन्हें प्रभावित किया और उन्होंने हमें अनुमति दे दी, लेकिन केवल पंद्रह और बीस दिनों के लिए | हमारे पास उनकी बात मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं था ।
मेरा वापसी का हवाई जहाज का टिकट बर्बाद हो गया था इसलिए हमने अगले सुबह का ट्रेन का टिकट बुक करवाया ।
भाग 3
अगली सुबह हम निकल पड़े | हम उनके घर के ड्राइवर के साथ कार में ट्रेन स्टेशन पहुँच गए । ट्रेन पहले से प्लेटफार्म पर खड़ी थी । हमने प्रथम श्रेणी के डिब्बे में आरक्षण करवा रखा था और हम उस पर चढ़ गए। हमारा कंपार्टमेंट के अगले दरवाजे पे ही शौचालय था। चूंकि हमारा अंतिम डिब्बे था इसलिए काफी छोटा था | नीचे एक तरफ एक लंबी सीट और ऊपर एक लंबी बर्थ थी । एक तरफ एक छोटी सी खिड़की थी और उसके विपरीत तरफ एक डिब्बे का दरवाजा था । चूंकि डिब्बे का फर्श बहुत गंदा था, इसलिए ड्राइवर ने हमारे सामान को ऊपरी बर्थ पर रखा, जिससे बर्थ भर गया। तो नीचे की एकमात्र सीट मेरे और संगीताई के लिए रह गयी थी | ट्रेन ने सीटी दी और ड्राइवर नीचे उतर गया | जब ट्रेन चल पड़ी और ड्राइवर आँखों से औझल हो गया तब संगीता दी के चहेरे पे पहली बार मुस्कराहट दिखी |
संगीता दी अंगड़ाई लेते हुए अपने दोनों हाथों को फैलाया और मुस्कुराते हुई बोली "भाई ! क्या मैं इन कपड़ों को बदल दूं "
"ठीक है, संगीता दी ! तुम कपड़े बदल लो, मैं टॉयलेट हो कर आता हूँ | दरवाजा अंदर से बंद कर लो और मैं बाहर खड़ा रहूँगा । जब तुम्हारा काम हो जाए तो तुम दरवाजा खोल देना," मैंने उससे कहा।
"ओ.के. मेरे प्यारे भाई!" उसने मस्ती भरे लहज़े से कहा ।
संगीता की तो बोली ही बदल गयी थी | जब तक वह घर से निकल कर ट्रेन में नहीं चढ़ी थी, तब तक संगीता बहुत चुप-२ और शांत थी । वह बात नहीं कर रही थी या चेहरे पर कोई हावभाव नहीं दिखा रही थी । और अब, किसी चंचल हसीना कि तरह सब बंधन से मुक्त हो गई थी । मैं टॉयलेट से आया और डिब्बे के दरवाजे के बाहर खड़ा हो गया । थोड़ी देर बाद संगीता ने दरवाजा खोला । मैंने अंदर आकर दरवाजा बंद कर दिया। जैसे ही मैंने मुड़कर संगीता दी को देखा तो मैं चकित रह गया ।
भाग 4
संगीता दी ने साड़ी बदल कर एक टाइट फिटिंग वाली सलवार कमीज पहन ली थी । यह सलवार कमीज शिफॉन की क्रीम रंग की थी और पारदर्शी भी थी | ऐसे लग रहा था मानो उसने साड़ी के साथ लाज और शर्म भी उतार दी हो | अब संगीता दी कोई भयंकर पटाखा लग रही थी | उसने अपने लंबे काले बाल खुले छोड़ दिए थे। मेकअप भी कर लिया था | होंठों पे गहरे लाल रंग की लिपस्टिक लगा रही थी । उसके लाल होंठ रस से भरी चेरी की तरह लग रहे थे । मैं उसके सामने हैरान खड़ा संगीता दीदी को लिपस्टिक लगाते देख रहा था ।
संगीता दी अब पहले की तरह पतली नहीं रही थी | उसके अंगों पर थोड़ी चर्बी चढ़ गयी थी, लेकिन सही जगह पर | सबसे ज़्यादा उसकी छाती पर। उसकी छाती अब बड़ी और भारी लग रही थी । उसके बोबे जो पहले सेब की तरह लगते थे अब बड़े होकर नारियल के आकार के हो गए थे | पारदर्शी ड्रेस से, उसकी ब्रा साफ़ दिखाई दे रही थी ।
ब्रा बहुत अच्छे इलास्टिक की बनी होगी, कोई लोकल ब्रा होती तो फट ही जाती | इतने बड़े-२ बोबों को संभालना कोई आसान काम थोड़ा न है | उसकी कमीज पूरी तरफ से स्ट्रेच हो रखी थी, एक-२ टांका खींचा हुआ था, जैसे अब फटा की तब | और तो और उसकी कमीज का गला इतना गहरा था की आधे से ज्यादा चूचे बाहर आने को थे, क्या मस्त क्लीवेज दिखाई दे रहा था |
मैं बेमन से अपनी नज़रें बोबों से हटा के निचे की तरफ देखने लगा | पारदर्शी शर्ट से उसका सपाट सफेद गोरा पेट और गहरी नाभि साफ़-२ दिखाई दे रही थे | नीचे उसने क्रीम कलर की ही सलवार पहनी हुई थी । और उसने जो ऊँची हील की सैंडल पहनी हुई थी, सेंडल पहन के तो वो मुझ से भी लम्बी लग रही थी | मुझे याद नहीं कि मैं अपनी बहन को कितनी देर तक कामुक नजर से घूरता रहा | हो सकता है की कुछ सेकंड ही देखा हो पर मेरे लिए तो जैसे समय रुक गया था | मेरा लंड बहुत टाइट हो गया था। मेरा लंड इतना टाइट था कि जैसे अंडरवियर फाड़ से बाहर आ जायेगा | मेरी पैंट से लंड का बड़ा सा उभार दिखाई दे रहा था | मेरा लण्ड अब मेरे नियंत्रण में नहीं था । मैं कर भी क्या सकता था ? अपनी बहन की बेकाबू जवानी, जिसको मैं सपने में देखता था, उसका सेक्सी स्लिम शरीर, बड़े चूचे, विशाल चुस्त गांड , सामने पाकर मेरा लंड मेरे काबू में नहीं रहा था | मैं जल्दी से सीट पर बैठ गया ताकि मेरे लंड का उभार संगीता दीदी को दिखाई न दे जाये, लेकिन उसके चेहरे से पता लग रहा था की उसने देख लिया था |
भाग 5
वह मुस्कुराई और थोड़ा सा खांसी | उसकी आवाज़ सुन के मैं तन्द्रा से बहार आया |
वो बोली, "क्या हुआ, सागर? तुम ऐसे देख रहे हो जैसे तुमने कभी लड़की नहीं देखी ।"
"हह मममम! नहीं ....... ! मेरा मतलब है, देखी तो बहुत है, लेकिन इतनी सुंदर लड़की कभी नहीं देखी | मुझे नहीं पता था की आप अब इतनी सुंदर लगने लगी हो |" ना जाने कैसे मैंने अचानक से बोल दिया |
संगीता दीदी बोली "ओहो, अच्छा जी, इतना मस्का लगाने की ज़रुरत नहीं है | मैंने ये ड्रेस तेरे को सुंदर दिखने के लिए नहीं पहनी है | वो यो मुझे ऐसे कपडे पहनने का मौका नहीं मिलता | तेरे जीजा ने पिछले साल मुझे ये ड्रेस दिलवाई थी, तभी से पहनना चाह रही थी, लेकिन सास के सामने कभी हिम्मत ही नहीं हुई | भाई, अब तो ये ड्रेस थोड़ी टाइट हो गयी है, क्या करूँ, मोटी भी तो हो गयी पहले से | देख ना कितनी तंग हो गयी है |"
"हम्म्म्म" मेरे मुंह से इतना ही निकला |
वो बोली, "चल ये सब छोड़, मैं बहुत खुश हूं कि मैं अपने छोटे भाई के साथ घर जा रही हूँ, मेरा प्यारा-२ भाई |"
इतना कहते हुए उसने मेरे गालों पे चिकोटी काट ली | जब मैं बच्चा था तब से संगीत हमेशा ऐसे ही मेरे गालों को चिकोटती थी और मुझे यह कभी पसंद नहीं था ।
वो ऐसे कर रही थी जैसे मैं दो साल का बच्चा हूँ |
मैंने थोड़ा नाराज होते हुए कहा, "क्या दीदी, आपको पता नहीं है की मैं अब छोटा नहीं रहा, ऐसे मेरे गाल मत खिंचा करो |"
"नहीं! मेरे प्यारे-२ भाई! मेरे लिए तुम अभी भी मेरे छोटे भाई हो और सदा रहोगे| मेरा वही छोटा भाई जो अपनी बड़ी बहन से बहुत प्यार करता था और झप्पी देता रहता था |"
"झप्पी" मेरे दिमाग में गुंजा | मैं सोचने लगा की अगर संगीता दीदी ने मुझे अभी टाइट हग दिया तो क्या होगा । उसके उभरे हुए बड़े-२ बोबे और मेरा अंडरवियर से बाहर आने को बेताब लंड, झुरझुरी सी मच गयी शरीर में, दिल कर रहा था की अभी बता दूँ की जवान भाई की झप्पी कैसी होती है |
उस दिन बहुत गर्मी थी | बाहर का तापमान लगभग 45 डिग्री होगा | हवा तो चल रही थी, लेकिन वो भी गरमा-गरम | मुझे बहुत पसीना आ रहा था । शायद AC भी काम नहीं कर रहा था और उसके ऊपर से संगीता दीदी की उफनती जवानी | अब और बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था, मैं बचने के लिए जल्दी से उठा और उससे कहा कि मैं AC के बारे में पता करके आता हूँ, बहुत गर्मी हो रही है |
बाहर जाके अटेंडेंट से पता चला की AC का यूनिट ख़राब हो गया है, पूरा सफर गर्मी में ही करना पड़ेगा |
फिर मैं पैंट्री कार में गया और हमारे लिए कोल्ड ड्रिंक्स ले के तकरीबन दस मिनट के बाद वापस आया ।
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भाग 6
संगीता दीदी खिड़की के पास बैठी फिल्मफेयर मैगजीन पढ़ रही थीं। मैंने उसे पेप्सी दी और सामने की सीट पर बैठ गया ताकि चुपचाप संगीता दीदी को ताड़ सकूँ । संगीता दीदी को भी बहुत पसीना आ रहा था। उसकी पारदर्शी कमीज उसके शरीर से चिपक गयी थी | ब्रा ना होती तो बिलकुल "राम तेरी गंगा मैली" की मंदाकनी बन जाती | उसका ये रूप देख कर मेरा लंड फिर से सख्त होने लगा | गरम लंड के सामने कोल्ड ड्रिंक भी फ़ैल हो गयी, लंड ठंडा होने का नाम ही नहीं ले रहा था | उसके शरीर से ध्यान हटाने के लिए मैंने दीदी से बातचीत शुरू कर दी। मम्मी, पापा, स्टडीज, जीजा आदि बातों के बाद आखिरकार हम मूवीज पे पहुँच गए ।
उसने मुझसे पूछा, "भाई, तुम मूवीज देखते हो या नहीं?"
"हाँ, देखता तो हूँ, लेकिन ज़्यादा नहीं, कुछ खास-२ | मेरा मतलब है, जिस मूवी के reviews अच्छे हों ?"
"सही है भाई, अच्छा ये बताओ की तुम्हे सबसे ज्यादा हीरोइन कोनसी पसंद है?" उसने शैतानी भरे लहजे में पूछा ।
"हर हीरोइन अच्छी ही है | लेकिन मुझे ऐश्वर्या बहुत पसंद है। और माधुरी भी और आइशा भी।"
"अच्छा जी, तो भाई को ऐश्वर्या पसंद है, क्यों? ... क्या वो सेक्सी है ?" संगीता दीदी ने मुस्कुराते हुए पूछा ।
मुझे थोड़ा शर्म महसूस हुई लेकिन फिर भी मैंने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, "सेक्सी ! हाँ, ऐश्वर्या है सेक्सी और सुंदर भी | माधुरी तो बहुत सुन्दर है लेकिन आइशा ...
बिल्कुल पटाखा ! सौ प्रतिशत सेक्सी !"
ये कहते ही मैंने गौर किया की शादी होने के बाद दीदी बहुत कुछ आयशा टाकिया जैसी लगने लगी हैं | दोनों के बीच बहुत कुछ एक जैसा है। केवल संगीता दीदी थोड़ी लम्बी हैं, और बोबे थोड़े मोटे हैं, नहीं तो बिलकुल सेम तो सेम आयशा टाकिया | चेहरा तो दोनों का एक जैसा ही है | मेरे बात सुन के संगीता दीदी ने खुश होते हुए कहा, "भाई, तुझे पता है बहुत लोग कहते हैं की मैं आयशा जैसी लगती हूँ | शायद मैं उसकी तरह सुंदर नहीं हूँ, लेकिन कुछ न कुछ समानता हो सकती है |"
"दीदी, तुम अब ज़्यादा बनो मत | हाँ माना की तुम्हारा चेहरा थोड़ा आयशा से मिलता हैं, लेकिन तुम उससे कहीं ज़्यादा खूबसूरत हो। अगर तुम मूवीज में काम करना शुरू करोगी तो आयशा जैसी सब हेरोइनो की छुट्टी हो जाएगी | तुम आज के ज़माने की सबसे सुन्दर हीरोइन बन जाओगी |"
"अरे-२ रुको भाई, इतना भी चने के झाड़ पे मत चढ़ाओ", संगीता दीदी ने हँसते हुए कहा, "बस मुझे तुम एक बात बताओ, अभी-२ तुमने कहा की आयशा बहुत ही पटाखा और सेक्सी लगती है, और मैं उससे और भी बेहतर हूँ | इस हिसाब से, क्या ....... तुम्हे अपनी बहन भी पटाखा और सेक्सी लगती है ?”
भाग 7
संगीत के उस सवाल से मैं दंग रह गया। मुझे समझ नहीं आया कि उसे क्या जवाब देना है। अंत में मेरे दिल के सच्चे विचार ही मेरे मुंह से निकले,
"दीदी अगर मैं सच कहूँ, तो आपसे खूबसूरत लड़की मैंने कोई भी नहीं देखी | ये आयशा, माधुरी तो आपके सामने कुछ भी नहीं है | अगर तुम्हें पता होता कि तुम कितनी मस्त और सेक्सी लग रही हो, तो शायद तुम्हें किसी भी लड़के के साथ अकेले यात्रा करने में डर लगता ... भले ही वह लड़का आपका भाई ही क्यों ना हो ... "
इस बात पर संगीता दीदी जोर से हंसने लगी और मेरे गालों को खींचते हुए बोली, "ओह! क्या सच में भाई! लेकिन भाई, मैं तुम्हारे साथ अकेले यात्रा करने से नहीं डरती, क्योंकि .... तुम मेरे भाई हो .... प्यारे-2 छोटे-2 अच्छे भाई, इतने भी बड़े नहीं हुए हो अभी की तुम्हारे साथ डर लगे!"
कहकर वह मुस्कुराती रही। मुझे भी उसकी हंसी देख हंसी आ गई। फिर हम कुछ देर तक चुपचाप बैठे रहे।
"ओह्ह्ह्हह्हह ... कितनी गर्मी है यार | मुझे तो आलस आ रहा है | भाई, क्या मैंने थोड़ी देर के लिए नींद ले लूँ? " थोड़ी देर बाद संगीताई ने कहा।
"सो तो जाओ पर कहाँ? यहाँ तो केवल एक ही सीट रह गयी है।"
"अरे तो क्या हुआ? तुम थोड़ा सा खिड़की की तरफ खिसको, मैंने तुम्हारी गोदी में सर रख कर सो जाउंगी ।"
वह कह कर उठ गई। मैं उठ कर खिड़की के पास बैठ गया। बिना कुछ कहे तुरंत संगीता दीदी ने अपना सिर मेरी गोद में रख दिया और वह सोने लगी |
मेरी हालत बहुत टाइट हो गयी थी।
मेरा लंड पहले से ही खड़ा था और अब तो संगीता दीदी का सर बिलकुल मेरे लंड के ऊपर आ गया था | उसके बदन का मेरे पैरों पे गरम-२ स्पर्श, मेरे हाथों में उसके रेशमी बाल, १० इंच से भी कम दुरी पे पारदर्शी शर्ट से झांकती उसकी लगभग नंगी छातीयां, उसके शरीर से आती परफ्यूम और पसीने की मिलीझुली मदहोश कर देने वाली गंध से मेरा लंड खुली हवा में सांस लेने की लिए तड़पने लगा | लंड की हालत ऐसी थी की अगर बाहर निकल की सिर्फ दो-तीन बार हिला भी लेता तो इतने में ही मेरा माल निकल जाता |
मेरा लंड बहुत दमदार है, तकरीबन १० इंच लम्बा और बहुत मोटा | मेरा लंड संगीता दीदी के सर को मेरी गोदी से उठाने में लगा हुआ था | अचानक से मेरे लंड में एक लहर सी आयी और लंड ने संगीता दी के सर को झटके से हल्का सा उछाल दिया | संगीता दी को कुछ पता नहीं चला, शायद नींद थोड़ी गहरी हो गयी थी | उसको पता ही नहीं चला की उसके जवान भाई का हब्शी लंड उसके सर से साथ खेल रहा है |
अब संगीता दीदी की साँसे गहरी और लयबद्ध चल रही थी, उसी लय के साथ उसके बोबे भी ऊपर-नीचे हो रहे थे | उसकी पारदर्शी शर्ट पसीने से लथपथ हो कर उसके अंगों से चिपक गयी थी | उसका शरीर पूरी तरह से दिखाई दे रहा था । ऐसा लग रहा था जैसे उसने सिर्फ ब्रा पहन रखी हो । उसके बोबे इतने गोर थे के उनमें से उसकी नीली-हरी नसें भी दिखाई दे रही थी | मेरा दिल कर रहा था की अभी उसकी कमीज फाड़ कर उसके बोबों की गहरी घाटी में अपना मुंह घुसा दूँ | लेकिन मुझे हर हाल में अपने अंदर के जानवर को बाहर आने से रोकना था |
उसके पसीने की गंध अब शायद बढ़ गयी थी, अब उससे और ज्यादा पसीना आ रहा था | शायद नींद में सभी को ज़्यादा गर्मी लगती है और पसीना आता है | महिलाओं का पसीना भी किसी परफ्यूम की तरह ही होता है | जो भी हो मेरी सेक्सी दीदी के पसीने की नमकीन गंध बहुत ही मदहोश करने वाली थी | पसीने की बूंदे उसकी गर्दन, कन्धों और बोबों पे चिपकी हुई दिखाई दे रही थी | दिल कर रहा था की कुत्ते की तरह जीभ निकल के उसका सारा पसीना चाट जाऊं |
भाग 8
तभी अचानक से संगीता दीदी ने अपना एक हाथ मेरे कंधे पर रख दिया और मेरी तरफ करवट ले ली | उसने मुझे वैसे ही पकड़ा हुआ था जैसे कोई छोटा बच्चा अपनी माँ से लिपटा होता है | उसके हाथ का स्पर्श बहुत गरम था | अब इस नयी पोजीशन में उसका बायां मुम्मा मेरे पेट से चिपक गया था | उसके मुम्मे का स्पर्श बहुत ही मस्त था | और तो और अब उसकी पारदर्शी कमीज से उसकी पसीने से लथपथ कांख बिलकुल साफ़ दिखाई दे रही थी |
बड़े आश्चर्य की बात थी की दीदी के कांख में गहरे काले-२ बाल थे | कांख में अगर बाल हों तो बहुत पसीना आता है, संगीता से आती हुई पसीने की गंध सबसे ज़्यादा उसकी कांख से ही आ रही थी | आज की मॉडर्न लड़कियां अपनी कांख बिलकुल सफाचट रखती हैं, लेकिन शायद वो ये नहीं जानती की कांख के बाल कितने सेक्सी
दीखते हैं | बाकि सब का तो पता नहीं लेकिन मैं कांख के बालों का दीवाना हूँ | लड़कियों की काखों में बाल होना बहुत ही कामुक होता है और कामोन्माद को बढ़ाता है। लेकिन आजकल, लड़कियों को अपनी त्वचा पर बाल नहीं रखना चाहती | अपनी बहन की काखों में बाल देख के मुझे बहुत खुशी हुई, मेरा लंड और भी टाइट हो गया |
अब और बर्दाश्त कर पाना मेरे लिए नामुनकिन हो गया था, मैं थोड़ा सा झुका और अपनी नाक को, जितना हो सकता था उतना, संगीता दीदी की काखों के पास ले गया | मैं बता भी नहीं सकता, ये सब मेरे लिए कितना नशीला और कामुक था | ऐसा लग रहा था की उसका मुम्मा और मोटा होके मुझे बुला रहा था | मेरा लंड अंडरवियर फाड़ के बाहर आने को मचल उठा था, ऐसा लग रहा था कि लंड अभी फटेगा । आखिरकार में अपना हाथ धीरे से उसके मुम्मों पे रखने के लिए उठाया | जैसे ही मैंने अपना अपना हाथ उठा के उसके सीने की तरफ बढ़ाया, संगीता दीदी ने अपनी आँखें खोल दीं । मैंने तुरंत अपना हाथ अपने बालों पर ऐसे घुमाया जैसे मैंने अभी-अभी अपने बालों को हिलाने के लिए ही उठाया हो।
"कितनी देर से सो रहा हूँ? अरे यार कितनी गर्मी है ......... मैं तो पसीने से पूरी तरह नहा ली हूँ .... ये शर्ट पूरी गीली हो गयी है, मैं इसे बदल लेती हूँ | ," संगीता दीदी उठते हुए बोली |
भाग 9
संगीता दीदी ने मुझे ऊपर की बर्थ से बैग उतारने को कहा | मैंने बैग उतार दिया | दीदी अपने पर्स में बैग की चाबी तलाश करने लगी | उसने बहुत ढूंढी लेकिन नहीं मिली।
मैंने संगीताई से कहा, "कहीं आप चाबी घर पे तो नहीं भूल आये?"
"नहीं भाई, मैंने अभी तो कपडे चेंज किये हैं| साडी भी बैग में रखी थी। उसके बाद बैग लॉक करके शायद से चाबी पर्स में ही तो रखी थी|," उसने जवाब दिया ।
मैंने कहा, "फिर कहाँ जा सकती है? मैं ढूंढ़ता हूँ, शायद सीट के नीचे ना गिर गयी हो |"
मैं नीचे झुक गया और सीट के नीचे झाँकने लगा । जमीन पर बहुत गंदगी पड़ी थी लेकिन चाबी कहीं नहीं दिख रही थी । मैं थोड़ा और झुक के ध्यान से देखने लगा । अचानक से मुझे सीट के निचे, एक कोने में चाबी दिखाई दी | मैंने सोचा की अगर मैं दीदी को चाबी दे देता हूँ तो संगीता दीदी कपडे चेंज कर लेंगी और इतना सेक्सी शो ख़तम | ना ना ।
मैंने उठ के दीदी से कहा," दीदी, चाबी तो नहीं मिल रही | अभी कुछ काम चला लो, जब घर आने वाला होगा तब दोनों मिल के चाबी अच्छे से ढून्ढ लेंगे, अभी छोड़ो, गर्मी से वैसे भी कुछ काम करने का मन नहीं हो रहा |"
"ओके", फिर से हम दोनों वापस सीट पर बैठ गए।
"भाई, सीरियसली, बहुत गर्मी लग रही है | मैं इस गर्मी और पसीने से मरी जा रही हूँ? " संगीता दीदी बोली ।
"अब मैं क्या कहूं दीदी, मुझे थोड़ा ना पता था की AC ख़राब हो जायेगा | तुम्हारे ससुराल वालों ने प्लेन की टिकट की तो ऐसी-तैसी कर दी ।
" मैंने कहा | मन ही मन सोच रहा था की अगर AC ख़राब ना होता तो अपनी जवान बहन के सेक्सी बदन का जलवा कैसे देखने को मिलता |
"ओह्ह्ह्हह ..... | मुझे पूरा सफर इस पसीने से भीगी ड्रेस में ही करना होगा | अब क्या कर सकते हैं ..... एक ये फैन, चल रहा है की हिल रहा है ..... जब ठीक से चलता ही नहीं तो लगाने की भी क्या ज़रुरत थी |", दीदी ने परेशान होते हुए कहा |
फैन की बात सुनते ही मुझे एक जोक याद आया | दीदी की थोड़ा मूड ठीक करने के लिए मैंने पुछा,"दीदी, क्या तुमने वो फैन वाला जोक सुना है ?,
"कोनसा जोक भाई, मुझे नहीं पता यार ।" दीदी ने झुंझलाते हुए कहा |
"एक बार एक बहुत ही फेमस हीरोइन थी | वह अपनी कुर्सी पर बैठी हुई अगले शूट का इंतज़ार कर रही थी | बहुत गर्मी थी | वो बहुत परेशान हो रही थी | वो बोली, कितनी गर्मी है यहाँ .... ऐसे मौसम में तो सारे कपड़े उतार के फैन के नीचे फ़ैल के सो जाना चाहिए | साथ खड़े स्पॉटबॉय ने तुरंत कहा, मैडम, मैं तो शुरू से ही आपका फैन हूँ |”
"हा हा .... very फनी, हुंह" दीदी ने बड़े बेमन से कहा |
"दीदी, उस स्पॉटबॉय की तरह मैं भी आपका फैन हूँ ..... मेरा मतलब है ..... अगर आप कहो तो मैं सीलिंग से बेताल की तरह लटक के आपको ठंडी-२ हवा दे सकता हूँ |", मैंने हँसते हुए कहा |
अब जाके दीदी थोड़ा सा मुस्करायी | मेरे दिल की समझी या नहीं, ये तो पता नहीं | मैं दीदी को अपने नीचे सुलाने के लिए ना जाने कब से तड़प रहा था |
"जोक छोड़ो दीदी, सच में अगर आप कहो तो मैं इस मेगज़ीन से आपको हवा कर देता हूँ," में पास पड़ी एक मैगज़ीन उठाते हुए कहा ।
"ओहो, क्या बात है, बहन की इतनी सेवा ......... अभी रहने दे भाई .... बता दूंगी जब सेवा करवाने का मन होगा," उसने हँसते हुए कहा |
भाग 10
"कम से कम इस मुई नायलॉन की ब्रा को तो उतार देती हूँ, ये मेरे बदन को काट रही है।", वो बोली |
"ब्रा ही क्यों, पूरी नंगी हो जा ना दीदी", मैंने मन में सोचा |
"ब्रा उतारने के लिए अब कोन जायेगा टॉयलेट में, ऐसा कर भाई, थोड़ी देर के लिए तू प्लीज अपनी आँखें बंद कर ले | ज़्यादा समय नहीं लगेगा । जब मैं बोलूं तभी खोलना ... पक्का |"
मैंने ईमानदारी से अपनी आँखें बंद कर लीं ! मन में सोच रहा था की संगीता दीदी नंगी होकर कैसी दिखाई देंगी |
"ठीक है भाई | खोल ले आँखें |" उसने संक्षेप में कहा और मैंने अपनी आँखें खोलीं और उसकी तरफ देखा।
ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, क्या नज़ारा था | संगीता दीदी के सीने से ब्रा गायब हो गई थी | उसके गोरे-२, बड़े-२ विशाल मुम्मे उसकी पारदर्शी, थोड़ी गीली शिफॉन शर्ट से साफ़-२ दिखाई दे रहे थे | ब्रा के बिना उसके मुम्मे और भी बड़े लग रहे थे | गोरे गोरे मुम्मे के बीच में डार्क चॉकलेट रंग का निप्पल साफ दिखाई दे रहा था । उसके निप्पल बिलकुल कड़क लग रहे थे और उनकी शेप ऊपर से साफ़-२ दिखाई दे रही थी ।
मैं अपनी जवान बहन को लगभग ऊपर से नंगा देख कर बुरी तरह से मदहोश हो गया | ऐसा लग रहा था जैसे मेरा कड़क लंड किसी भी पल में झड़ जाएगा । ये नज़ारा देख के मेरा पूरा शरीर गरम हो गया और मुझे पहले से भी ज़्यादा पसीना आने लगा | मेरा दिल कर रहा था की अभी लंड बाहर निकाल के उसके मुम्मे पे मुठ गिरा दूँ | लेकिन, क्या कर सकता था, आखिर बहन-भाई का रिश्ता था | मैं मन को समझा के बैठ गया |
संगीता दीदी मेरी हालत से बेखबर दिख रही थी, उसके चेहरे पे कोई भाव नहीं थे, बस हल्का सा मुस्कुरा रही थी|
कुछ समय बाद दीदी ने मेरी तरफ देखा और कहा, "तुझे कितना पसीना आ रहा है भाई | देख कैसे पसीने से भीग गया है |"
मैं: तो कर भी क्या सकता हूँ दीदी?
दीदी: उतार दे तू भी
मैं: क्या उतार दूँ? मैंने तो ब्रा पहन भी नहीं रखी |
दीदी: हा हा ... very funny ... क्यों इतनी मोटी कमीज पहन रखी है? उतार दे कमीज को |
सच पूछो तो मैं भी यही सोच रहा था और अब तो दीदी ने भी कह दिया | बढ़िया था, दीदी सही लाइन पे जा रही थी | मैंने जल्दी से शर्ट निकाल दी। मुझे खेल-कूद का बहुत शोक है | मैं अपने कॉलेज में कबाड़ी की टीम का कप्तान भी था | थोड़ा बहुत जिम भी कर लेता था |
मेरे हष्ट-पुष्ट शरीर देखकर संगीता दीदी की आँखें चमक उठीं। उसने कहा, "क्या बात है भाई, बॉडी तो मस्त बना रखी है | एकदम मरदाना, वाह"
मैं: चलो अच्छा है, आपको मेरी बॉडी पसंद आयी | कुछ तो फायदा हुआ जिम जाने का |
दीदी: मुझे फिट लोग ही पसंद हैं | एक तेरे जीजा जी हैं, तोंद फुलाए पूरे दिन गद्दी पे बैठे रहते हैं |
मैं: तो आप बोला करो ने उन्हें जिम जाने के लिए
दीदी (धीमी आवाज़ में): हाँ, वो और जिम, कुछ होता-हवाता तो है नहीं उनसे ....
दीदी: चल अब बातें छोड़, सोने दे मुझे
भाग 11
हम फिर से पहले वाली पोजीशन में आ गए | मैं पहले की तरह खिड़की के पास बैठ गया और संगीता दीदी ने अपना सिर मेरी गोद में रख लिया और फिर से सोने लगी | थोड़ी देर के बाद उसकी सांसें गहरी हो गयी, उसकी नींद पक्की हो गयी थी | अब मैंने उससे फिर से वासना भरी नज़रों से घूरना शुरू कर दिया | जब तक वो जाग रही थी, मैं उसे अच्छे से नहीं देख सकता था | अब मैं उससे सर से पाँव तक आराम से देख रहा था |
ब्रा निकालने के बाद उसके बोबे बिलकुल साफ़ दिखाई दे रहे थे | तकरीबन 25 % बोबे तो वैसे ही कमीज से बाहर थे और जो 75 % अंदर भी थे वो भी उस पसीने से भीगी पारदर्शी कमीज से नंगे ही प्रतीत हो रहे थे | उसके उभरे हुए निप्पल उसकी ड्रेस में अलग से खड़े हुए स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ रहे थे | उसके पसीने ही उग्र गंध मेरे नथुनों में समा रही थी |
मेरे काखों में भी बहुत बाल हैं, मुझे काखों से बाल साफ़ करना अच्छा भी नहीं लगता | एक तो मौसम इतना गरम था और उस पर मेरी जवान बहन की गरमा-गरम जवानी, मुझे भी बहुत पसीना आ रहा था | पहले तो शायद मेरे पसीने की गंध शर्ट की वजह से रुक रही थी, लेकिन अब तो मैंने शर्ट भी उतार दी थी | मेरे पसीने की गंध पूरे कम्पार्टमेंट में फ़ैल रही थी |
मुझे यकीन था कि संगीता दीदी सो रही थी और उसे मेरे पसीने की गंध का पता नहीं चला होगा | माना की मेरे पसीने की गंध तेज थी लेकिन संगीता दीदी भी इस बात में पीछे नहीं थी | उसके पसीने की महक मुझे पागल कर रही थी । मैं संगीता दीदी को टंग बाथ देना चाहता था, उसके पूरे शरीर को चाटना चाहता था | मुझे विश्वास था की उसके पसीने में शराब से भी ज़्यादा नशा होगा | मेरा लंड बुरी तरह से सख्त हो चूका था और उसमें से थोड़ा सा पानी भी निकलना शुरू हो गया था | मुझे लग रहा था कि कहीं मेरी पैंट गीली ना हो जाये, लेकिन मैं कर भी क्या सकता था, ये मेरे नियंत्रण में नहीं था ।
यह सब मेरे लिए किसी कामुक सपने की तरह था | जिस बहन के जिस्म को सपनो में सोच-२ कर ना जाने कितने सालों से मुठ मारा करता था वही बहन आज वास्तव में मेरी गोदी में अपना सिर रख कर सोई हुई थी |
उसके नंगे बोबे, खड़े निप्पल, पसीने से लथपथ शरीर मेरी आँखों और लपलपाती जीभ से केवल कुछ इंच की दूरी पर थे । मैं अत्यधिक उत्तेजित हो चूका था | मैं मन ही मन प्रार्थना कर रहा था कि कहीं मेरा वीर्य छूट न जाये | अगर ऐसा हुआ तो मैं मर ही जाऊंगा | संगीता दीदी को पता चल जायेगा | वो शायद मुझसे नफरत करने लग जाये, शायद मुझसे फिर कभी बात ना करे | ये विचार आते ही मैं घबरा गया था।
तभी नींद में संगीता दीदी ने करवट ली और अपना मुंह मेरे तरफ कर लिया | उसने अपना सर उठाकर थोड़ा सा आगे कर लिया । इस पोजीशन में उसके होंठ मेरे पेट के साइड को छूने लगे ।
मैं उसके रसीले होठों के मुलायम-२ स्पर्श से गनगना गया | तभी मैंने नीचे की तरफ देखा तो हिल गया। मेरी छाती पे कुछ पसीने की बूंदे इकठी हो हर एक बड़ी बूँद बन गयी थी और वहां बहुत सा पसीना इकठा हो गया था | अब वो पसीना धीरे-२ एक धार का रूप लेके नीचे मेरे पेट की तरफ जा रहा था | अगर मेरा पसीना इसी तरह से गिरता रहता तो निश्चित रूप से वो वहां पहुँच जाता जहाँ संगीता दीदी के कामुक होंठ मेरे पेट हो छू रहे थे |
वो धार चलनी शुरू हो गयी, पक्के से वो संगीता दीदी के होंठो तक पहुँचाने वाली थी | मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या किया जाये | डर के मारे मैंने अपनी आँखें बंद कर ली और संगीता दीदी की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा करने लगा |
भाग 12
मैं कुछ देर तक इंतज़ार करता रहा लेकिन संगीता दीदी की और से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई | थोड़ा और इंतज़ार करके मैंने अपनी आँखें खोली और नीचे देखा | नीचे का नज़ारा देख कर मैं आश्चर्यचकित रह गया । संगीता दीदी मुस्कुराते हुए मेरे पसीने से भीगे हुए होंठों पर अपनी जीभ फिरा रही थी | ओह .... वो मेरे पसीने को चाट रही थी ।
जब हम दोनों की ऑंखें मिली तो वो मुस्कुराते हुए बोली: वाह भाई ..... क्या बात है | मुझे नहीं पता था की तुम्हारा पसीना इतना टेस्टी होगा | तुम तो सही में बड़े हो गए हो | तुम्हारे पसीने का स्वाद एक जवान आदमी के जैसा है | और ..... मुझे ये स्वाद बहुत पसंद है | भाई, प्लीज-२ .... क्या मैं तुम्हारा पसीना चाट सकती हूँ ?
उसने मेरे उत्तर की प्रतीक्षा नहीं की | शायद वो मेरा उत्तर पहले से ही जानती थी | उसने अपनी जीभ को पूरा बाहर निकाल के मेरे पेट के एक बड़े हिस्से को चाट लिया | मैं तो जैसे स्वर्ग में पहुँच गया | वो मेरे शरीर पर लगे पसीने को चाटती हुई ऊपर की तरफ बढ़ रही थी | जैसे-२ संगीता दीदी मुझे चाट रही थी वैसे-२ मेरी उनको
चोदने की इच्छा बलवती होती जा रही थी | मेरे बदन को चाटते हुए दीदी ऊपर की तरफ आ रही थी और साथ में मेरी छाती पर हाथ भी फेरा रही थी | धीरे-२ वो मेरे निप्पल तक पहुँच गयी | अब वो मेरे एक निप्पल को चाट रही थी जबकि दूसरे निप्पल को अपने लंबे नाखूनों से हल्का-२ खरोंच रही थी |
चाटते-२ उसके मुंह से मदहोशी में निकला: ओह, भाई ...... तू कितना टेस्टी है यार | पहले पता होता तो में तुझे अभी तक तो कच्चा चबा गयी होती | तेरी काखों से कितना पसीना निकल रहा है | ज़रा अपनी कांख तो दिखा भाई |
मुझे बहुत आश्चर्य हुआ कि मेरे पसीने की गंध से संगीता दीदी परेशान नहीं हुई बल्कि वह इसे पसंद कर रही थी | मैंने हिचकिचाते हुए अपना दाहिना हाथ उठा दिया | वह बहुत खुश लग रही थी, पहले वो थोड़ा सा मुस्कुराई और फिर मुझे थोड़ा सा अपनी तरफ झुका से अपनी नाक को मेरी कांख में घुसा दिया | पहले उसने एक गहरी साँस ले के मेरे पसीने को सूँघा और फिर वो मेरी कांख को अपनी जीभ से चाटने लगी ।
उसकी जीभ से मुझे बहुत गुदगुदी होने लगी | थोड़ी देर बाद उसने मुझ से बिना पूछे ही मेरा दूसरा हाथ उठाया और फिर से वही ... सूंघना और चाटना शुरू कर दिया | उसके चाटने से मैं मस्ती में भर गया और मेरे शरीर के सारे रोंगटे खड़े हो गए ।
कुछ देर मुझे दिल भर चाटने के बाद दीदी अपने होंठो पे जीभ फिराती हुई उठी और बोली: भाई, तुझे नहीं पता की मुझे ये टेस्ट कितना पसंद है | मैं बहुत फ्रेश और एनर्जेटिक फील कर रही हूँ | इतना मज़ा तो निम्बू पानी में नहीं होता जितना तेरे पसीने में है | तूने क्या कभी अपने काखों के बाल शेव नहीं किये ?
मैं: एक बार किये थे, वैसे ही try करने के लिए | लेकिन मुझे बाल रखना पसंद है | मुझे तो वो लोग, खासकर लड़के, ही पसंद नहीं आते जो अपने काखों के बाल साफ़ करते हैं |
दीदी (उत्तेजित स्वर में): भाई, मुझे भी काखों के बाल बहुत पसंद है | अच्छा है की तेरे काखों में लम्बे-२ बाल हैं |
भाग 13
मैं (धीरे से): बाल तो आपकी काखों के भी कम नहीं हैं |
दीदी: अच्छा जी, तो यही सब देख रहे थे भाई साहिब | बताया ना तेरे को मुझे काखों के बाल पसंद हैं | उनको रखना भी और ..... चाटना भी |
दीदी (मेरी पैंट के उभार को देखते हुए): क्या ..... तुझे भी काखों के बाल सूंघना और चाटना पसंद है ?
मैं (तपाक से): हाँ दीदी, बहुत ......
दीदी (हँसते हुए): पता था मुझे ... आखिर खून तो एक ही है | भाई, क्या सूंघेगा अपनी दीदी की कांख को?
मैं (जल्दी से): खुशी-२ दीदी, ख़ुशी-२ .... मैं तो आपसे पूछने ही वाला था।
यह कहते हुए मैं संगीता दीदी की तरफ खिसक गया | संगीता दीदी ने एक कातिल स्माइल देते हुए अपना हाथ ऊपर उठा लिया और अपनी काख मेरे मुंह के पास ले आयी | मैंने जल्दी से अपना मुंह उसकी कांख में गुस्सा दिया और एक गहरी साँस ली ।
जैसे ही मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली और उसके उसकी कांख को पतली सी ड्रेस के ऊपर से चाटना शुरू किया, दीदी ने अपना हाथ हटा लिया और बोली, "रुक भाई रुक, ये तो गलत बात है | मैंने तो डायरेक्ट चाटा था और तुम ड्रेस के ऊपर से | मैं इस कमीज को उतार देती हूँ ताकि तुम भी डायरेक्ट मेरे पसीने का मज़ा ले सको |"
तो उसने तुरंत ही कमीज़ के बटन खोले और पलक झपकते ही अपनी कमीज निकल दी | मुझे विस्वाश ही नहीं हो रहा था, मेरी जवान बहन मेरे सामने अपने बड़े-२ पपीते जैसे बोबों को शान से दिखते हुए आधी नंगी बैठी हुई थी | कमीज में तो मैं उसके बोबे पहले ही देख चूका था लेकिन कमीज के बाहर उसके बोबे और भी गोर और बड़े लग रहे थे, उसके निप्पल पहले से ज़्यादा कड़े और बड़े लग रहे थे | दीदी का ये रूप देख कर मैं पागल हो रहा था, मेरे हाथ पैर उतेज़ना से कम्कम्पाने से लगे थे | ना जाने मैं कितनी देर दीदी के बोबों को निहारता रहा |
दीदी: भाई, तेरा तो ठीक है लेकिन पूरी दुनिया को अपनी बहन नंगी दिखायेगा क्या? खिड़की तो बंद कर दे कम से कम |
दीदी की बात सुन के जैसे मैं नींद से जगा और खड़ा हो के तुरंत खिडकी बंद करने लगा |
यहाँ मेरा बुरा हाल हो रहा था और दीदी को जैसे कोई फरक ही नहीं पड़ रहा था | वो बिलकुल नार्मल तरीके से पेश आ रही थी | जैसे ही मैं खिड़की बंद करके वापिस मुडा दीदी ने अपने हाथ उठा दिए, जैसे मुझे अपने शरीर का रस पीने के लिए आमंत्रित कर रही हो |
यहाँ मेरा बुरा हाल हो रहा था और दीदी को जैसे कोई फरक ही नहीं पड़ रहा था | संगीता दीदी को अपने भाई के सामने ऐसे खुल के नंगी खड़ी होने में कोई शर्म महसूस नहीं हो रही थी | जैसे ही मैं खिड़की बंद करके वापिस मुडा दीदी ने अपने हाथ उठा दिए, जैसे मुझे अपने शरीर का रस पीने के लिए आमंत्रित कर रही हो |
दीदी सीट पर बैठी थी और उसने अपने हाथ अपने सिर के पीछे से हुए थे | मैं निचे अपने घुटने टेक कर बैठ गया और वापिस अपनी बहन के कांख में घुस गया | मैं जीभ निकाल कर संगीता दीदी की पसीने से भरी कांख चाटने लगा | उसके पसीने का स्वाद बिलकुल सस्ती देसी शराब की तरह था और नशा उससे कई गुना | उस पोज़िशन में बैठ कर अपनी बहन की बालों से भरी कांख चाटने से मेरा लंड और भी सख्त हो रहा था । इस पोजीशन में मेरे लंड को फैलने की लिए जगह भी थोड़ा ज़्यादा मिल रही थी | वासना से दीदी की ऑंखें बंद हो गयी थी | मैं दीदी को बहुत देर तक चाटता रहा |
फिर कुछ देर बाद दीदी ने कहा: ओह भाई ....
इतना पसंद आया तुझे अपनी बहन का पसीना | मैं कब से इस दिन का इंतज़ार कर रही थी की कोई इतने प्यार से मेरी कांखों को चाटे | तेरे जीजा को तो जैसे इन सब से कोई मतलब ही नहीं है | मैं बहुत खुश हूँ भाई |
मैं: दीदी आपकी ख़ुशी के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ और आपका पसीना तो जैसे अमृत है | अगर आप कहो तो मैं इससे ज़िन्दगी भर चाट सकता हूँ |
दीदी (ख़ुशी से): सच में भाई .... मुझे चाटने की तू कोई चिंता न कर | जब तेरा दिल करे मुझे बता देना ... तेरी बहन तेरे लिए सदा हाज़िर है | अब बहुत देर हो गयी तुझे चाटते हुए, अब मेरी बारी ।
भाग 14
यह कहते हुए संगीता दीदी ने मुझे उठाया और सीट पर बैठा दिया । फिर वो भी मेरे पास बैठ गई और फिर से मेरे हाथ को उठाते हुए मेरी कांख को चाटने लगी | चाटने के साथ-२ वो अपनी हथेली को मेरे सीने पर घुमा भी रही थी | कभी वो अपना हाथ मेरे पेट पर ले आती और फिर से ऊपर उठाते हुए मेरे सीने के बालों से खेलने लगती | अपनी जवान बहन के हाथ के स्पर्श से मैं बहुत ही कामुक हो गया था। मेरा सख्त लंड मेरी पैंट के ऊपर से साफ़ दिख रहा था । अगर संगीता दीदी देख लेती तो उससे तुरंत पता चल जाता की उसका भाई कितना उत्तेजित हो रखा है | लेकिन मुझे अब कोई परवाह नहीं थी । बल्कि इसके विपरीत मैं तो चाहता था की वो अपने भाई के विशाल लंड को देखे इसलिए मैंने अपने उभार को छिपाने की कोई कोशिश नहीं की ।
एक बार फिर से संगीता दीदी अपना हाथ घुमाते हुए नीचे ले गयी | इस बार उसका हाथ थोड़ा ज़्यादा की नीचे चला गया और मेरे लंड से छू गया । मुझे एक दम से 440 वोल्ट का झटका लगा और मस्ती से मेरी आँखें बंद हो गयी | उसने अपना हाथ वापिस ऊपर कर लिया और छाती पे फिराने लगी | कुछ ही पलों में उसका हाथ वापिस से नीचे खिसक गया और अब दीदी मेरे लंड पे अपना हाथ फिराने लगी | मैंने धीरे से अपनी आँखें खोलीं और उसकी तरफ देखा । संगीता दीदी मुस्कुराते हुए मुझे ही देख रही थी | उसका हाथ धीरे धीरे मेरे लंड को पैंट के ऊपर से सहला रहा था जैसे की मेरे लंड के साइज को कड़कपन का अंदाजा लगा रही हो |
दीदी: ओह भाई, तुम तो बहुत उत्तेजित हो रखे हो |
मैं (शरमाते हुए): वो तो ..... दीदी बस ऐसे ही |
दीदी: अरे .. शर्माने की क्या बात है ...अच्छा खासा तो है तुम्हारा लंड | ऐसे लंड की तो लोग नुमाइश करते हैं, और तुम हो की शर्मा रहे हो |
संगीताई के उन शब्दों ने मुझे भोचक्का कर दिया था | दीदी मेरे खड़े लंड को देख के गुस्सा नहीं हुई उल्टा उसे सहला रही थी | मैं आश्चर्यचकित था कि वह कितनी आसानी से 'लंड' जैसे शब्द को बोल रही थी । उसके मुंह से ऐसे शब्द मैंने पहले कभी नहीं सुने थे | मैं उसके इस खुलेपन से हैरान था ।
माना की मैं उसके खुलेपन से हैरान हो गया था लेकिन लंड की तो शायद अपनी ही अलग दुनिया था | उसके मुंह से लंड सुन के, मेरे लोडे ने भी एक झटका मारा | दीदी का हाथ अब भी मेरे लंड पर घूम रहा था ।
"यह ... अब मैं क्या कहूं दीदी" मैं आगे कुछ नहीं कह सका।
दीदी: भाई, इसमें शर्म की बात है | मैं समझ सकती हूँ | इतना कुछ हो रहा है तो तेरा लंड टाइट नहीं होगा क्या।
ओह, तो ये बात | उसके ये बात सुन के मैंने मन बना लिया था की अगर दीदी इतना खुलकर के पेश आएगी तो मैं भी पीछे नहीं हटूंगा, मैं भी खुल के पेश आऊंगा |
दीदी: अच्छा भाई ... एक बात बता ... तू मेरे चाटने से ज़्यादा उत्तेजित हुआ है या मेरे बोबों को देख कर ?
मैं (बिना हिचकिचाहट के, पूरी बेशर्मी से): दोनों से, दीदी
दीदी (सेक्सी लहजे में): ओहो .... तब तो तुम्हारे लंड का कुछ करना पड़ेगा ... नहीं तो खड़ा-२ कहीं दर्द न करने लग जाये बेचारा ।
भाग 15
यह कहते हुए संगीता दीदी उठ कर मेरे सामने घुटने के बल बैठ गई । पूरे समय हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे | मैं उसे आश्चर्य से देख रहा था । वो बैठ कर मेरी बेल्ट खोलने लगी ।
मैं (आश्चर्य से): क्या ... क्या कर रही हो दीदी ?
दीदी: ओह भाई रिलैक्स, तू बस मज़े ले और देख की मैं क्या-२ करती हूँ | ये बेल्ट तुम खोलोगे या ये ही मुझे ही करना पड़ेगा ?
मैंने बिना और कुछ भी बोले फटाफट अपनी पैंट की बेल्ट खोल के ज़िप नीचे कर दी | दीदी ने जल्दी से मेरी पैंट और मेरे अंडरवियर की इलास्टिक को पकड़ लिया नीचे सरकाना शुरू कर दिया | मैंने अपनी गांड उठा के अपने लंड को आज़ाद करने में उसकी मदद की | एक झटके से दीदी ने मेरी पैंट और अंडरवियर को मेरे टखने तक पहुंचा दिया | मेरा लंड एक स्प्रिंग की तरह उछल कर खड़ा हो गया । अब मैं अपनी बहन के सामने बिल्कुल नंगा था | अब उसके सामने नंगे होने में शर्माना कैसा जब नंगा ही उसने खुद किया था ।
दीदी (लंड को मुठी में जकड़ते हुए): भाई तेरा लंड बहुत लंबा और मोटा है | लड़कियाँ तो ज़रूर तेरे ऊपर मरती होंगी । कितनी लड़कियों को अभी तक अपने लंड से संतुष्ट हो चुके हो ?
मैं (मासूमियत से): लंड पकड़ाया तो है दो-तीन को, लेकिन किसी को संतुष्ट करने का मौका अभी तक नहीं मिला |
दीदी: चूतिया थी वो लड़कियाँ जो इतने मस्त लंड का स्वाद नहीं लिया | कोई बात नहीं भाई, जो उन्होंने गँवा दिया वो स्वाद अब मैं लुंगी |
यह कहते हुए दीदी मेरा लंड अपनी मुट्ठी में पकड़ कर ऊपर नीचे करने लगी । वो लगातार मेरी आँखों में देख रही थी और शायद मेरी उत्तेजना को देख कर खुद भी उत्तेजित हो रही थी । मैं तो जैसे स्वर्ग में पहुँच गया था । मस्ती से मेरी आँखें बंद हो रही थी | कुछ समय बाद मैंने अपनी ऑंखें बंद कर ली और पीछे की तरफ सिर झुका कर इस स्वर्गिक समय का आनंद लेने लगा ।
अचानक से मुझे अपने लंड पे कुछ टाइट-२ और गरम सा महसूस हुआ | मैंने नज़र घुमा कर नीचे देखा तो ....
ओह माय-२ .... माय गॉड | दीदी ने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया था और उसे बड़े ही प्यार से चूस रही थी । ये दृश्य मैं अपने सपनो में सैकड़ों बार देख चूका था | मेरी सेक्सी, लाड़ली, प्यारी जवान बहन, सच-मुच में मेरा लंड चूस रही थी। क्या बात थी, क्या मज़ा था, क्या अनुभूति थी | क्या स्पर्श था उसके नरम-२ होंटो का, गीले-२ मुंह का, खुरदरी-२ जीभ का, गरम-२ साँसों का मेरे टाइट-२ लोडे पे | ये सोच कर की मेरी बहन मेरा लंड वास्तविकता में चूस रही है, मैं झड़ने के बिलकुल करीब आ गया | मेरा लंड इतना कड़ा हो गया था कि जैसे फट ही जाएगा ।
मैं (हांफते हुए): ओह दीदी .... मेरा .... मेरा निकलने वाला है |
दीदी ने एक पल के लिए मुंह से लंड निकला और बोली: ओके भाई ... आ जा ... मैं तैयार हूँ | और फिर लंड मुंह में लेके और जोर से चूसने लगी |
मैं झड़ने लगा | वीर्य की पहली धार सीधे दीदी के गले तक पहुँच गयी | मैं जैसे पागल हो गया | मैं बेरहमी से अपने दोनों हाथों से दीदी के सिर को पकड़ कर अपने लंड पे दबाने लगा | मेरा लंड उसके मुंह की जड़ तक पहुँच गया था | मेरे वीर्य की पिचकारी सीधे दीदी के हलक में उतर रही थी | मेरे कड़क लंड का मोटा सुपाड़ा दीदी के गले तक पहुँच गया था । वो अपना मुँह हिला रही थी और सिर उठाने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैं अलग ही दुनिया में था | मैं अभी भी ताकत से उसके मुँह को अपने लंड पर दबा रहा था । उसके मुंह से उह… उह… उ की आवाज निकल रही थी | वो अपना सिर छुड़ाने का इशारा कर रही थी लेकिन मैं अपने लंड पर उसके मुँह को तब तक दबाता रहा जब तक कि मेरे लंड से वीर्य की आखिरी बून्द तक निचुड़ नहीं गयी ।
मेरे लंड का पूरा माल दीदी के मुँह में चला गया | मैं बिलकुल शक्तिहीन हो गया था | एक आह के साथ मैंने अपनी आँखें मूँद लीं और बिलकुल निष्क्रिय हो कर बैठ गया । कुछ क्षण के बाद जब मैं होश में आया तो देखा की दीदी अपने गले को सहला रही थी और ज़ोर-२ से खांस रही थी | दीदी मुझे बहुत ही गुस्से से देख रही थी ।
ओह गॉड, ये ,मैंने क्या कर दिया था ... अभी तो कहानी अच्छे से शुरू भी नहीं हुई थी, अभी से दीदी को नाराज़ कर दिया | मैं प्राथना करने लगा की कहीं दीदी नाराज़ ना हो जाये, कहीं गाड़ी चलने से पहले ही पटड़ी से ना उतर जाये |
भाग 16
दीदी (गुस्से से): कमीने .... वहशी .... मैं मर जाती तो ?
मैं (रोनी सूरत बना के): दीदी .... मुझे माफ़ कर दो .... जब निकलने वाला था तो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था .... ना जाने कैसे हो गया ... अपने-आप
दीदी (इतराते हुए): ये माफ़ी-वाफी से काम नहीं चलने वाला ... समझा ... अब मेरी बारी है ... चल शुरू हो जा
ओह, क्या अदा है दीदी तेरी |
मैं (उत्साहित होते हुए): हाँ, क्यों नहीं दीदी ... बताओ ना ... आपका सेवक आपकी सेवा में हाज़िर है |
इतना कहते हुए मैं सीट से नंगा ही उठ गया।
दीदी ने तुरंत अपने पैर फैलाए और अपने दोनों हाथों को सिर के पीछे ले गयी |
दीदी (रोब से): "इधर आओ ..... चलो शुरू हो जाओ .... मेरे दोनों हाथों को चाटो ।
मैं: दीदी हाथ क्या ... मैं तो आपका पूरा शरीर चाटूंगा ।
दीदी: बस .. बस ... अब मुंह से बोलना छोड़ ... चाटना शुरू कर |
दीदी सीट पर बैठी हुई थी और मैं उसके सामने खड़ा हुआ था | मैं पूरा जन्मजात नंगा था जबकि दीदी ने अभी भी नीचे सलवार पहनी हुई थी | दीदी का भी ऊपरी हिस्सा नंगा था और उसके बड़े-२ बोबे खुली हवा झूल रहे थे | दीदी ने जब चाटने के लिए कहा तो मैं अपने दोनों हाथ दीदी के दोनों तरफ रख के उनकी तरफ झुक गया | मैंने अपने शरीर का भार अपने हाथों पर लिया हुआ था ।
मैं धीरे-२ दीदी के हाथों की उँगलियों को चाटने लगा | चाटते-२ मैं उसकी बाँहों तक पहुँच गया | उसकी बाँहों को अच्छे से चाटने के बाद मैं उसकी काखों तक पहुँच गया | अब मुझे ज़्यादा झुकना पड़ रहा था | उसके बोबे मेरे कन्धों से रगड़ खाने लगे | मैं अपने कन्धों पर उसके उत्तेजक लंबे, सख्त रबर जैसे निप्पल साफ़ महसूस कर पा रहा था | मैं पूरी लगन से दीदी को चाटने में लगा हुआ था | बीच-२ में दीदी के मुंह से निकलती सिसकारी माहौल को और कामुक बना रही थी | दीदी भी धीरे-२ मेरी पीठ सहला रही थी |
दीदी की बगलों को धीरे-धीरे चाटने के बाद मैं उसके कंधे पर चला गया । उसके कंधों को चाटते हुए मैंने अपने दोनों हाथ उसके बोबों पर कस कर रख दिए और उसके बोबों को दबा दिया । दीदी मुंह से एक तेज सिसकी निकली | मैंने दीदी के दोनों निप्पल पकडे और उसके निप्पल को दबाने और मरोड़ने लगा | थोड़ी देर निप्पल दबाने के बाद भी जब मुझे राहत नहीं मिली तो और मैं थोड़ा नीचे खिसक गया और अपना मुँह उसके कड़े चुचों पर रख दिया। दीदी के मुंह से उतेज़ना से भरी की एक चीख निकल गई ।
मैं बहुत खुश था की मैं दीदी को इतना उत्तेजित कर पा रहा था और दीदी को इतना मज़ा दे पा रहा था । उसके बोबों को दोनों हाथों से पकड़ कर मैंने उसे चूसना शुरू कर दिया । मैं बीच-२ में उसके निप्पलों को अपने होंठों में लेकर दबाना और चबाता भी जा रहा था | मैं बहुत देर तक उसके बोबों को चूसता और चाटता रहा लेकिन मन नहीं भरा | मन मार कर मैं नीचे की तरफ खिसका, चूची के चक्कर में चूत थोड़ा ना छोड़नी थी |
भाग 17
नीचे खिसक कर मैंने थोड़ी देर उसके सपाट पेट और गोल गहरी नाभि को चाटा । जब मैं अपनी जीभ को उसकी नाभि के सबसे गहरे हिस्से में ले जा कर चारों तरफ घुमा रहा था तो दीदी मस्ती के मारे दोहरी हो गयी और नीचे झुक कर अपने पेट को मेरे मुंह पे दबाने लगी | फिर मैं और नीचे खिसक गया और उसके सूट के ऊपर से ही उसकी चूत को चूमने लगा | दीदी तो जैसे पागल हो गई।
जैसे ही मैंने अपने चेहरे को उसकी चूत पर रखा उसने अपने दोनों हाथों से मेरे बालों को पकड़ लिया |
दीदी: रुको, भाई | मैं सलवार निकाल देती हूँ |
इतना कहते हुए, दीदी ने एक झटके में अपनी सलवार का नाडा खींच दिया | मैं उठ कर खड़ा हो गया । उसने नितंबों को ऊपर उठाते हुए सलवार को नीचे खिसका दिया और एक ही झटके में सलवार पैंटी को निकाल दिया।
अब मेरी जवान बहन पूरी तरह से नंगी थी | मैं उसे वासना भरी नजरों से देख रहा था । जिस बहन को हजारों बार सपनो में नंगी देखा था वो आज वास्तव में मेरे सामने नंगी लेटी हुई थी | उसने अपने हाथों को अपने सिर के नीचे रखा हुआ था | उसकी चूत पर बालों का एक घन्ना जंगल था | शायद ही कभी उसकी चूत की पंखुड़ियों ने दुनिया देखि हो, हमेशा उसके झांटों के जंगल में छुपी रहती होंगी | जैसे मुझे काखों के बाल पसंद हैं, वैसे ही मुझे झांटों से बहुत लगाव है | उसकी झांटों से भरी चूत बहुत सेक्सी लग रही थी |
दीदी (सेक्सी लहज़े में): भाई, क्या हुआ ... तुम रुक क्यों गए ?
मैंने भी बिना रुके सीधे उसकी चूत पर हमला कर दिया | मैंने नीचे झुकते हुए अपना मुँह उसकी चूत पर रख दिया । दीदी पूरी तरफ से गरम हो चुकी थी | उसकी चूत से कामरस रिसने लगा था | उसकी चूत से बहुत ही मादक खुशबु आ रही थी जो मुझे पागल बना रही थी | मैंने जीभ निकाल कर उसकी चूत को ऊपर से नीचे तक चाटा । चाटते हुए मैंने देखा कि उसकी चूत के ऊपर के छोटा सा चने जितना दाना उभर आया था | मैंने अपना पूरा ध्यान वहीँ लगा दिया | जैसे ही मैंने दाने को चाटना शुरू किया, उसने मेरे बालों को दोनों हाथों से पकड़ लिया और मेरे सिर को अपनी चूत पे दबाने लगी | उसकी इस हरकत से मैं उत्साहित हो गया और उसके दाने को दुगने जोश से चूसने लगा |
अब दीदी मस्ती के मारे बेहोश सी होने लगी | उसने मेरे सिर को कसकर दबाते हुए, अपने कूल्हों को हिलाना शुरू कर दिया। ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरा मुँह अपनी चूत में घुसाने की कोशिश कर रही थी | मैं पागलों की तरह उसकी चूत चाट रहा था। उसके कूल्हे और तेज हिलने लगे | उसके मुंह से निकलती सिसकारियां अब चीखों में बदल रही थी | अचानक से वो जोर से चीखी और मेरा मुँह कस कर अपनी चूत पर दबा लिया । वो इतने ज़ोर से मुझे दबा रही थी कि मैं अपना सिर हिला नहीं सकता था । मेरी नाक उसकी चूत में दब गयी थी इसलिए मैं सांस भी नहीं ले पा रहा था । कुछ देर तक तो मैंने अपनी सांस रोक कर रखी पर जब यह असहनीय हो गया तो मैंने ज़ोर से अपना सिर हिलाया और थोड़ा उठ कर सांस ली।
दीदी की चूत अभी तक रिस रही थी | उसका शरीर अब निढाल हो गया था | उसने मेरे सिर को छोड़ दिया | दीदी से छूटते ही मैंने अपना मुंह पूंछा हो उठकर दीदी के पैरों के पास बैठ गया और खुलकर सांस २-३ सांस ली | कुछ देर आराम करने के बाद मैं फिर से दीदी के नंगे बदन को देखने लगा | दीदी की ऑंखें अभी तक बंद थी | दीदी को ऊपर-नीचे होते बोबों को देख कर मेरा लंड फिर से टाइट हो गया । मैंने अपने कठोर लंड पर दीदी का हाथ रख दिया और हिलने लगा | मैं वासना से उसके नंगे शरीर को घुर रहा था | उसकी बालों से भरी चूत को देख के सोच रहा था कि यह मेरा अगला टारगेट यही है।
भाग 18
ना जाने मैंने कितनी देर तक दीदी की चूत को मंत्र्मुघ्द हो कर देखता रहा | मुझे पता ही नहीं लगा की दीदी ने कब ऑंखें खोली | अचानक से उसने चुटकी बजायी तो मैं उसकी चूत की दुनिया से बाहर आया | मैंने उसकी तरफ देखा और वो शरारत से मुस्कुरा दी ।
दीदी: ये अच्छा है तुम जैसे कम उम्र के लड़कों का, तुरंत दूसरे राउंड के लिए त्यार हो जाते हो |
यह कहते हुए दीदी उठ कर मेरे सामने खड़ी हो गई । मुझे धक्का देते हुए सीट धकेल दिया | मेरे कंधे का सहारा लेते हुए दीदी मेरे ऊपर बैठने लगी | अभी दीदी अपने घुटनो पे खड़ी थी | उसके बोबे बिलकुल मेरे मुंह से सामने आ गए थे | मैंने अपने हाथ उसके कूल्हों पर मजबूती से टिका दिए | दीदी ने एक हाथ नीचे ले जाकर मेरे लंड को पकड़ कर तीन से चार बार हिलाया और फिर अपनी चूत के मुहाने पे टिका दिया ।
मैं जैसे स्वर्ग पहुँच गया था | मेरी प्यारी बहन की चुत के स्पर्श से मेरा लंड धन्य हो गया था । मैं ज़िन्दगी में कभी भी उस पल को कभी नहीं भूल पाऊंगा । फिर दीदी ने मेरे लंड को दो से तीन बार अपनी चूत पर रगड़ा । फिर उसने मेरा लंड अपनी चूत के छेद पर टिका दिया और धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी । जैसे ही वह नीचे बैठने लगी, मेरा लंड उसकी चूत में गायब होता जा रहा था | कुछ समय बाद जब मुझे अपने लंड पे दीदी की झांटे महसूस हुई तो पता चला की मेरा पूरा लंड मेरी बहन की चूत में घुस गया था । मेरी बहन की चूत मेरे लंड से पूरी तरह भर गयी थी | दीदी की चूत इतनी टाइट थी की मेरा लंड बुरी तरह से खिंच गया था | उसकी चूत भट्टी की तरह गरम थी | अब मुझ से रुका नहीं गया | मैंने उसके कूल्हों को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए । मैंने अपनी बहन के रसीले होंठो को पीना शुरू कर दिया | दीदी भी पूरे जोश से मेरा साथ दे रही थी | मुझे नहीं पता था कि कब हम होंठ छोड़ के एक दूसरे की जीभ चूसने लगे ।
मेरे हाथ अब दीदी के कूल्हों पर और कस गए थे और मैं उसके भारी नितंबों को पागलों की तरह सहलाने लगा था । धीरे धीरे वो मेरे लंड पर ऊपर-नीचे होने लगी | मैंने भी उसके नितंबों को पकड़ कर उसे अपने लंड पर ऊपर नीचे करने लगा ।
उसके बोबे मेरे मुंह से बार-२ टकरा रहे थे | दीदी ने एक हाथ से मेरा सर पकड़ा और उस अपनी छाती पे दबा दिया ।
मैंने भी उसका इशारा समझते हुए देर नहीं की और तुरंत उसके बोबे को मुंह में भर कर बेसब्री से चूसने लगा | बीच बीच में मैं उत्तेजित को कर उसके निप्पल को काट लेता | धीरे धीरे हमारे धक्कों को स्पीड बढ़ती जा रही थी | मेरा लंड पिस्टन की तरह घर्षण करता हुआ उसकी चूत को दीवारों को पूरा फैला रहा था | अब उसके चुचों को चूसते रहना मुश्किल हो रहा था | मैंने अपने हाथ उसके नितम्बों से हटा के उसके बोबों को कस के पकड़ लिया और उसके बोबों को गूंथने लगा |
दीदी की स्पीड और भी बढ़ गई थी । अब वो बिना रुके ऊपर-नीचे हो रही थी । मेरा लंड उसकी चूत की गहराई तक जा रहा था । उसने मेरे सिर को पकड़ा और मुझे कस कर गले लगा लिया । उसके मुँह से सिसकारियां निकल रही थी | अचानक से दीदी ने तेज चीख मारी और अपने चरम पर पहुंच कर धीरे-धीरे शांत होने लगी | दीदी एक बार फिर से झड़ गयी थी | मैं अभी नहीं झडा था | मैंने उसके दोनों नितंबों को अपने दोनों हाथों से उठा लिया और नीचे से ज़ोर-२ से अपने चूतड़ हिला के ताबड़तोड़ धक्के मारने लगा |
दीदी: "ए ... आ .. आईई ... सी ... भाई ..... धीरे ... धीरे ..... करो ... ओह ....
मैं: दीदी ..... बस थोड़ा सा .... मेरा भी होने वाला है .....
दीदी: ओह ... ह ..... इ .... रुक जा ..... सांस ...... सांस तो लेने दे ..... कुत्ते ....
मैं: "दीदी ...... दीदी ...... मैं ..... मेरा ...... फिनिश ... .. हा ... हह ... हह ... आह ... आह ...
फिर कुछ और ताबड़तोड़ धक्के लगा कर मेरा पानी भी दीदी की चूत में छूटने लगा । धीरे-धीरे मैं भी शांत हो गया और दीदी को गले लगा लिया | कुछ देर तक हम भाई बहन एक दूसरे को गले लगा कर शांत बैठे रहे और उस खुमार का आँखें मूँद कर मज़ा उठाते रहे |
भाग 19
कुछ मिनटों के बाद दीदी ने कहा: भाई पसीने और तेरे पानी से सब चिपचिपा हो गया | कुछ है क्या साफ़ करने के लिए ?
मैंने तुरंत अपनी शर्ट उठाई और उसे दे दी।
उसने एक मुस्कान के साथ मेरी टी-शर्ट के मेरे माथे से पसीने को पूंछा और फिर मेरे लंड को अच्छे से साफ़ किया | मुझे साफ़ करने के बाद दीदी अपने बदन और चूत को पूंछने लगी |
दीदी: भाई, मेरे कपडे भी पसीने से भीग गए हैं , अब तो तुम्हें मेरे बैग का ताला तोड़ना ही पड़ेगा |
मैं: अरे, मेरे होते हुए , ऐसे-कैसे
मैंने तुरंत नीचे से दीदी को चाबी निकल के दे दी |
दीदी: अच्छा जी, तो चाबी जनाब को पहले ही मिल गयी थी, फिर पहले क्यों नहीं दी
मैं: फिर आपके साथ चुदाई करने का मौका कैसे मिलता?
दीदी (मुस्कुराते हुए): कमीने, तुझे शर्म नहीं आयी | अपनी जवान बहन को अपने जाल मैंने फसा लिया | मैं कपडे चेंज कर लूँ फिर तेरी खबर लेती हूँ |
दीदी ने अपने बैग से एक सिंपल सी पतली सूती ड्रेस निकाल कर बिना ब्रा पैंटी के पहन ली |
दीदी: हाँ अब बता, क्यों फसाया अपनी दीदी को ये गंदा काम करने के लिए
मैं: छोड़ो दीदी, कम तो तुम भी नहीं हो | जब ये सूती ड्रेस थी, वो शिफॉन की भड़काऊ ड्रेस क्यों पहनी थी ?
दीदी: अरे वो तो ... कितने दिनों के तू मुझे भूखी नज़रों से देख रहा था | तेरे को क्या लगा, मुझे पता नहीं चलता की तेरी नज़रें मुझे कैसे घूरती थी | मैं सोचा आज बेचारे बच्चे को थोड़ा बहुत मज़े दे दिए जाये | पर मुझे क्या पता था की तू इतना आगे पहुँच जायेगा | अपनी बहन को चोद ही देगा |
मैं: दीदी, अभी आपने अपने भाई को अच्छे से जाना ही कहाँ है | मेरे प्लान तो पता नहीं क्या-२ हैं |
दीदी: हमें भी तो पता चले .. क्या-२ हैं आपके .. प्लान ?
मैं: दीदी, अभी तो बहुत भूख लगी है | मैं पैंट्री से कुछ खाने को लेके आता हूँ, फिर बताऊंगा आपको आगे का प्लान |
दीदी: हाँ भाई, पहले पेट पूजा, फिर काम दूजा .. या फिर काम पूजा
मैं हँसते हुए पैंट्री की और जाने लगा | मैं गुनगुनाते हुए जा रहा था और सोच रहा था की दीदी की कैसे-२ चुदाई करूँगा .....
समाप्त