अध्याय 1
“तुम कहना क्या चाहते हो गौरव ,क्या ये हमारे जीवन के लिए एक जरूरी फैसला नही है “
मेरी बात से पूर्वी बहुत ही गुस्से में दिख रही थी
“मैंने ये तो नही कहा ना जान लेकिन ...लेकिन आखिर रोहन की ही कंपनी क्यो???”
मेरा ये सवाल बेहद ही अटपटा था लेकिन फिर भी ये ना जाने कैसे मेरे होठो से फिसल ही गया…
पूर्वी मेरे सवाल से बिल्कुल ही अचंभित मालूम हो रही थी ,वो मुझे अजीब सी नजरो से घूर रही थी जैसे उसे भरोसा ही नही हुआ जो मैंने उससे कहा था..
“रोहन की कंपनी क्यो???...तुम सुनना क्या चाहते हो गौरव..???..और क्या तुम मुझ पा शक कर रहे हो या ये बस एक पति वाली जलनखोरी है…”
उसका लहजा ठंडा था,लेकिन उसके बातों की गर्मी से मेरे पसीने ही निकल गए...जलन या शक ,मुझे चुनना था की आखिर मेरे अंदर क्या हो रहा है,मेरे एक जवाब में मेरी शादीशुदा जीवन का भविष्य छिपा हुआ था..
मैं बड़ी से मुश्किल से ही सही लेकिन मुस्कुराया..और पूर्वी के कंधे पर अपना हाथ रख दिया..
“पागल हो गई हो क्या जो मैं तुम्हारे ऊपर शक करूंगा,हा ये तो तुम भी जानती हो की रोहन से मुझे थोड़ी सी जलन होती है,और हो भी क्यो ना,वो साला मेरी बीवी के बचपन का दोस्त है जिसने कालेज में उसे डेट भी किया था,और वो है भी मुझसे ज्यादा हेंडसम और पैसे वाला…”
मेरी इन बातों से आखिर पूर्वी के चहरे में थोड़ी मुस्कान आ ही गई ..
उसने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे सोफे में बिठा दिया और खुद को मेरे सीने में छिपा लिया..
“तुम सच में पागल ही हो और पागल ही रहोगे,तुम्हे रोहन से नही बल्कि रोहन को तुमसे जलना चाहिए...हा वो मेरे बचपन का दोस्त है और मुझे कालेज के समय में डेट भी कर रहा था लेकिन फिर भी आखिर मैं प्यार में तो तुम्हारे ही पड़ी ना.
उसके पिता और मेरे पापा दोनों ही अच्छे दोस्त है,और तुम्हे भी पता है की हमारे परिवार को हमेशा से यही लगता था की रोहन और मैं एक दूसरे के लिए बने है,सब को यही लगता था की हम दोनों शादी करेंगे,इसलिए जब मैंने पाप को तुम्हारे बारे में बताया था तो वो इतना गुस्सा हुए थे,मैंने तुम्हारे लिए अपने परिवार से झगड़ा किया,सारे ऐशोआराम और पापा के 8 हजार करोड़ की दौलत को लात मार कर तुम्हारे पास चली आयी,हा रोहन हेंडसम भी है,मुझसे प्यार भी करता है और पापा की तरह उसके पास बेसुमार दौलत भी है ,लेकिन फिर भी मैंने तुम्हे चुना,तुमसे प्यार किया,और तुम इतने पागल हो की इन सबके बाद भी तुम्हे लगता है की तुम्हे रोहन से जलना चाहिए…”
मेरे मन में एक अजीब सी ग्लानि से जन्म लिया ,हा शायद मैं जल ही नही रहा था,असल में मेरी मानसिकता और मेरी परवरिश ही ऐसी हुई थी की मैं किसी लड़के और लड़की को दोस्त की तरह नही देख सकता था,मैं जानता था की रोहन अब भी पूर्वी से बहुत प्यार करता है,और पूर्वी के दिल में भी उसके लिए एक प्यार है ,भले ही वो प्यार कितना भी पवित्र क्यो ना हो लेकिन फिर भी मेरी मानसिकता के कारण मैं इस रिश्ते को गलत निगाहों से ही देखता था,मैं लाख कोसिस करके भी खुद को शक करने से नही रोक पाता था और मेरे लाख छिपाने पर भी ये शक पूर्वी के समझ में आ जाता,
पूर्वी एक ऐसी लड़की जिसने समाज से सिर्फ मेरे लिए बगावत कर दी,उसके पापा के पास इतनी दौलत और रुतबा होने के बावजूद भी मेरा कुछ नही बिगड़ पाए उसका कारण यही था की पूर्वी मेरे बचाव के लिए हमेशा से ही खड़ी रही ,मैं एक गरीब तो नही लेकिन सामान्य सा कालेज का प्रोफेसर हु,और वो महलों की रानी थी ,फिर भी उसने मुझे अपनाया,मुझे प्यार दिया ,और खुद सारे ऐशोआराम छोड़ कर मेरी सामान्य सी जीवन में खुद को एडजेस्ट कर लिया,अब वो मेरी आर्थिक मदद करना चाहती थी,ताकि हम अपने बल बूते पर एक अच्छी जिंदगी जी सके,उसने अपने सारे अमीरों वाले शौक को मेरे कारण ही छोड़ दिया था ,हमारी शादी को डेड साल हो चुके थे और उसने मुझे कभी इसकी शिकायत नही की ,सच में मैं पागल ही हु ,उसने अब जॉब करने का फैसला किया,मुझे ऐसे तो कोई दिक्कत नही थी लेकिन मैं यही सोचता ताकि आखिर वो ऐसा करेगी कैसे,जो लड़की खुद कई कंपनी की मालकिन हो वो किसी के अदंर कैसे नॉकरी कर पाएगी,फिर भी मैंने अपनी हामी भर दी,लेकिन जब मुझे पता चला की रोहन ने ही उसे जॉब का ऑफर दिया है तो मेरी थोड़ी जल गई ,और मैं फिर से अपनी जान पर शक कर बैठा…
“तो कब से जॉइन कर रही हो ..???”
मैं पूर्वी के बालो को सहला रहा था..
“कल से ही ,और तुम्हारे सवाल का जवाब ये है की रोहन मुझे अच्छी सैलरी दे रहा है,हा वो मेरा दोस्त है लेकिन फिर भी उसने वादा दिया है ऑफिस में हमारा रिश्ता प्रोफेशनल होगा,और जैसे ही थोड़े पैसे जमा हो जाए मैं उसका जॉब छोड़कर स्टार्टअप शुरू कर करूंगी,यार कब तक दूसरे की नॉकरी करना “
उसका कांफिडेंस मुझे हमेशा से ही भाता था,वो अब भी उसी आत्मविस्वास से लबरेज थी ,मेरी पूर्वी जिसने कभी भी अपने आत्मसम्मान से
कोई भी समझौता नही किया,उसके पिता ने उसे कई ऑफर दिए ,मुझे कई ऑफर दिए लेकिन उसने मेरे और खुद के आत्मसम्मन के लिए पिता की कोई भी मदद नही ली..
“ओक्के तो काम क्या रहेगा..”
मुझे उसके कारपोरेट वाले काम की ज्यादा समझ तो नही थी फिर भी पूछने में क्या जाता है ..
“वही जो पापा की कंपनी में करती थी ,क्लाइंट से मीटिंग्स वगैरह..”
वो थोड़ी देर चुप ही रही ..
“यार गौरव एक काम वाली बाई रखनी पड़ेगी ,यू नो ना की मैं अब तुम्हारे लिए रोज खाना भी नही बना पाऊंगी ..”
उसकी बात सुनकर मैं हंस पड़ा ..और उसके होठो को चूम लिया..
“लव यू मेरी जान ..”मैंने उसके चहरे को देखा वो मुस्कुरा रही थी..
“लव यु बाबू ..”
उसने मुझे अपने बांहों में भर लिया…
अध्याय 2
पूर्वी का काम बहुत ही अच्छे से चल रहा था,वो कभी कभी लेट हो जाया करती थी लेकिन फिर भी मेरा ध्यान रखने में उसने कभी भी कोई कमी नही दिखाई…
मुझे भी एक रिसर्च पेपर में काम करना था,मै भी उसमें बिजी रहने लगा था ,कुछ दो ही महीने हुए थे की ममेरे डिपार्टमेंट की HOD ने बुलाया..
“हैल्लो गौरव कैसा चल रहा है तुम्हारा काम ..”
“कुछ खास नही मेम मुझे लगता है मुझे एक असिस्टेंड की जरूरत है ..”
“हा वो तो है लेकिन तुम्हे कोई पसंद आये तब ना,ऐसे मेरे दिमाग में कोई है ..”
मैं उन्हें देखता रह गया,प्रोफेसर मालती की उम्र कुछ 50 साल की होगी ,आंखों में चश्मा लगाए हुए और बल खुले किये इस उम्र में भी कातिल लगती है ,उन्होंने शादी नही की और दिन रात अपने काम में ही लगी रहती ,मैं उनके साथ कई रिसर्च का काम कर चुका हु ,वो मुझे बहुत पसंद करती थी,वो कभी मेरी टीचर भी थी और मेरा पहला क्रश भी ...आज भी उन्हें देखकर मुझे वही आकर्षण दिखाई देता है जो कभी उन्हें पहली बार देखकर दिखा था..
स्लेवलेस ब्लाउज और बिल्कुल हल्के रंग की साड़ी उनकी खासियत थी,जिसमे उनका दूधिया बदन चमक कर दिखाई देता,
“अरे क्या देख रहे हो ..”
मैं चौका ,और उनके अधरों में फिर से वही प्यारी मुस्कान ने घर कर लिया,
“तो मैं कह रही हु की मेरे नजर में कोई है जो तुम्हारी असिस्टेंट बनने के काबिल है ..”
उन्होंने मुझे भेदक नजर से देखा मैं अपने ही ख्यालों में गुम था,
“अगर आप सपना की बात कर रहे हो तो नही ..
”
मैंने सीधे शब्दो में कह दिया,सपना मेरी स्टूडेंट रह चुकी थी,अभी वो मालती मेडम के अंडर PhD कर रही थी,मेडम चाहती थी की मैं उसे अपने साथ अपने रिसर्च में रख लू लेकिन मुझे सपना का नकचढ़ा व्यवहार बिल्कुल भी पसंद नही था,उसका टीचर रहते भी मेरी उससे नही बनती थी ,लेकिन एक चीज उसमें थी वो था उसका दिमाग ,बेहद ही तेज दिमाग …
“अरे एक बार साथ काम करके तो देखो,मैं भी उसकी गाइड बनने को तैयार हुई ना..”
“आपकी बात और है मेम ,वो आपकी बात सुनती है लेकिन आपके सिवा वो और किसी की बात नही सुनती,आप तो जानती हो की रिसर्च कितने पेसेंस का काम है और वो मुझे पागल कर देगी ,नही नही वो तो बिल्कुल नही …”
मालती मेडम ने मुझे थोड़ी देर ध्यान से देखा और बड़े ही शांत लहजे में बोली
“देखो गौरव ,मैं तुम्हे जानती हु सपना भी तुम्हारी ही तरह मेरी सबसे फेवरेट स्टूडेंट और अब पीएचडी स्कॉलर है ,उसके व्यवहार को छोड़ दो तो तुम्हे भी पता है की वो कितनी टैलेंटेड और सोर्स वाली है ,वो तुम्हारे लिए वो डेटा ला सकती है जो तुम लाख कोशिस के बाद भी नही पा सकते,वो तुम्हारा कई काम आसान कर देगी,और इस प्रोजेक्ट में तुम्हे ऐसे ही किसी की जरूरत है ,मेरी बात को मान लो ,सपना इस प्रोजेक्ट के लिए सबसे सही असिस्टेंट है ,और वो तुम्हारे साथ इस प्रोजेक्ट में काम करने के लिए मरी जा रही है,दिन में 10 बार वो मुझसे रिक्वेस्ट करती है की तुम्हे बोलकर तुम्हारा असिस्टेंट बना दु ,वो लायक है और मैं कब तक उसे मना कर पाऊंगी ,मान जाओ इससे सबका फायदा होगा,”
मैं थोड़ी देर तक सोचता रह गया फिर कुछ सोचकर बोला
“लेकिन मेम आप जानती है ना हमारे बीच क्या हुआ था ..”
मेडम जोरो से हँस पड़ी
“तो क्या हुआ तुमने भी तो मुझे प्रपोज किया था,ऐसे उम्र में ये सब होता है ..
”
मैं शर्म से पानी पानी हो गया,
“लेकिन मेरी बात अलग थी मेडम,मैं उस समय नादान था,लेकिन सपना तो मेरे घर तक आ गई थी ,इतना बखेड़ा मचा दिया था,पूर्वी से झगड़ा किया,अब अगर पूर्वी को पता चलेगा की मैं उसके साथ काम कर रहा हु तो वो तो मुझे मार ही डालेगी “
मेरी बात सुनकर मेडम की जोरदार हँसी कमरे में गूंज गई
“अच्छा तो इसलिए इतना डर रहे हो ,फिक्र मत करो मैं पूर्वी से बात कर लुंगी तुम भी जानते हो की वो मेरी बात कभी नही टलेगी,और उसे ये भी बता दूंगी की तुम उससे कितना डरते हो ,इससे वो खुश भी हो जाएगी “
अब मेरे पास कहने के लिए कुछ भी नही था सिवाय इसके की मैं मेडम की बात मान लू,तभी मेडम ने एक फोन किया और थोड़े ही देर में कमरे का दरवाजा खुला,सपना के अंदर आते ही माहौल कुछ अलग ही हो गया था,उसके तेवर आज भी वैसे ही थे,उसने बस मुझे एक नजर देखा और फिर मेडम की ओर रुख किया,वही तेज गोरा चहरा ,वही टाइट जीन्स और टीशर्ट जिसमे उसके उभार सामने गर्व से उठे हुए होते थे,कमर की वो गोलाई और उसके नीचे मटकों से उठे हुए उसके चूतड़ जो जीन्स को फाड़ देने को बेताब लगते थे, दिखाने में भले ही ये कितने भी सुंदर क्यो ना हो लेकिन किसी बम से भी ज्यादा खतरनाक थे ,जिसने भी उन्हें छुवा या छूने की कोशिस की सपना ने उसके परखच्चे ही उड़ा दिए…
बेहद अमीर बाप की नकचढ़ी लेकिन टैलेंटेड बेटी जो कभी मेरे पीछे पागल थी,पता नही मुझ गरीब में ऐसा क्या था जो इन अमीर बाप की बेटियों को मैं पसंद आ जाता हु ,
मुझे तो नही समझ आया लेकिन ऐसा था जरूर…
“तो गौरव सर मान ही गए “
सपना ने आते ही कहा
“मान तो ये गया है लेकिन तुम्हे इससे अच्छे से पेश आना होगा,बी प्रोफेसनल ओके…”मेडम थोड़ा स्ट्रिक्ट होते हुए बोली
“ह्म्म्म ओके ..”
बस इतना ही बोलकर वंहा से निकल गई ,मैंने उसका तेवर देखकर मेडम को इशारा किया और मेडम ने मुझे बस एक आंख मार दी ...
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अध्याय 3
“तो तुम उस चुड़ैल के साथ काम करने वाले हो “
पूर्वी थोड़ी गुस्से में थी शायद मालती मेडम ने उससे बात की थी..
वो अभी अभी तो ऑफिस से आयी थी और अभी ही शुरू हो गई ..
“अरे जान बैठ भी जाओ ,थोड़ा पानी वानी तो पी लो “
मैं हंसता हुआ बोला
“नही पीना है कुछ ,अब मैडम ने फोन किया तो मुझे भी इजाजत देनी पड़ी ..”
“और मेडम ने ये नही बताया की तुम्हारा पति तुमसे कितना डरता है …”
पूर्वी के होठो पर एक प्यारी सी मुस्कान खिल गई
“बताया ,लेकिन जान आप तो सपना को जानते हो ना,वो हमेशा से मुझसे कंपीटिशन करने में लगी रहती है ,हम दोनों के पिता भी बिजनेस कॉम्पिटिटर थे,स्कूल हो या कालेज सभी जगह वो उसने मुझे परेशान किया और जब कालेज में हमारे बीच प्यार हुआ तो वो भी आपको मुझसे छिनने में लग गई ,अब आप ही बताओ मैं गुस्सा ना करू तो क्या करू साली अब भी आपके पीछे लगी हुई है ..
”
उसका मुह फूल चुका था,
“अरे मेरी जान मैं तब भी तुम्हारा था और आज भी तुम्हारा हु और जीवन भर तुम्हारा ही रहूंगा ,अपने प्यार पर इतना तो यकीन करो “
उसने मुझे गीली आंखों से देखा
“आप पर पूरा यकीन है लेकिन उस सपना पर नही ,कालेज की तरह अकेला पाकर उसने अपने कपड़े उतार दिए तो ..”
मेरे सामने वो मंजर तैर गया जब सपना और पूर्वी दोनों ही एक ही क्लास में हुआ करते थे और मैं उनका टीचर था,पूर्वी और सपना दोनों को ही मुझसे प्यार हो गया ,दोनों के बीच जैसे एक कंपीटिशन चल पड़ा था मुझे पाने के लिए,मैं पूर्वी से प्यार करता था लेकिन सपना ये बात मानने को राजी ही नही थी ,और एक दिन उसने वो किया जो कोई सोच भी नही सकता था,मैं अपने लेब में काम कर रहा था और उसने मेरे सामने अपने सारे कपड़े उतार दिए,उसका मादक जिस्म मेरे सामने खुला हुआ था,उसने खुद को भोगने का खुला आमंत्रण दिया था ,लेकिन वो पूर्वी का प्यार ही था जिसने मुझे बचा लिया,लेब का दरवाजा अंदर से लगा था और मैं पसीने से भीग चुका था ,लेकिन मेरे अंदर से आवाज उठी की भाग जा और मैं भागा,दरवाजा खोल कर सीधे पूर्वी को ढूंढने भागा और उसे सब कुछ बता दिया..
इस बात से सपना का गुस्सा सातवे आसमान पर पहुच चुका था उसे लगाने लगा जैसे मैंने उसकी और उसके हुस्न की बेज्जती कर दी ,उस समय तक पूर्वी मेरे बारे में उतनी सीरियस नही थी ,उसका ब्रेकअप रोहन से हो चुका था ,हमारे रिश्ते को भी 6 महीने ही हुए थे और वो सीरियस नही होना चाहती थी,अभी एक दूसरे को समझने में ही समय बिता रहे थे लेकिन सपना के इस काम से पूर्वी के मन में मुझे खो देने का भाव जाग उठा और वो मेरे लिए बहुत ही डिस्प्रेट हो गई ,कालेज खत्म होते ही उसने अपने घर में शादी की बात कर दी और कुछ ही दिनों में उसने घर वालो से बगावत कर मुझसे शादी कर ली …
एक ही क्षण में मेरे सामने सारी बाते घूम गई और साथ ही सपना को वो रूप भी ,चाहे जैसा भी हो लेकिन वो थी बेहद ही सेक्सी जिस्म की मलिका,इस घटना के बाद उसका पूर्वी और मुझसे झगड़ा हो गया और उसके बाद हमने कभी भी बात नही किया,हा उसने हमारी शादी तोड़ने की कोशिश जरूर की थी ,लेकिन पूर्वी के सामने कुछ नही कर पाई…
पूर्वी मुझे सोच में डूबा हुआ देखकर फिर से बोल उठी
“क्या हुआ मैं कुछ पूछ रही हु ,अगर उसने फिर से कपड़े खोल दिए तो ,और अब तो मैं भी नही होंगी आपको बचने के लिए”
मैं उसके प्यारे चहरे को ध्यान से देखने लगा..
“पगली उस समय मेरे जीवन में तेरा प्यार घुला नही था और मैं तब नही बहका तो अब तो मेरे जीवन में तेरा प्यार घुल चुका है तुझे लगता है की मैं अब बहक जाऊंगा ..”
उसकी आंखों में पानी आ गए थे और उसने मुझे जोरो से जकड़ लिया..
“आई लव यू जान ..
”
मैने उसके होठो में अपने होठो को मिला दिया
“लव यू बाबू…”
लेकिन मेरा दिमाग अब भी उस बात को लेकर बेचैन था की आखिर मैं सपना का सामना कैसे करूंगा….
************
मैं अपने लेब में बैठा हुआ डेटा को जांच रहा था ,तभी सपना वंहा आयी ..वो आज थोड़े अलग अवतार में थी ,आज उसने जीन्स टॉप की जगह सलवार कमीज पहन रखी थी और बहुत ही शांत लग रही थी शायद मेडम ने इसे ऐसा करनी की एडवाइस दी हो ..
“गुड आफ्टरनून सर “
उसकी आवाज थोड़ी नरम थी ..
“ह्म्म्म चलो काम में लग जाओ ,अभी तक के सारे डिटेल्स मैंने तुम्हे भेज दिए थे आई थिंक की तुमने सभी पढ़ लिए होंगे..”
“जी ,”
“तो तुम्हे क्या लगता है की हम कितने सक्सेजफुल होंगे..”
“सर सक्सेज फूल हो हम हो जाएंगे लेकिन हमे वालेंटियर चाहिए होंगे….जिनके ऊपर हम ये सब केमिकल टेस्ट करे “
“अभी तो चूहों पर ही करना पड़ेगा ,बाद में वालेंटियर ढूंढेंगे..”
“आप बोलो तो मैं कुछ का जुगाड़ कर सकती हु ..”
मैने उसे ध्यान से देखा
“तुम मुझे जेल कार्रवाओगी क्या ,ये कानूनी रूप से गलत होगा..”
वो जोरो से हँस पड़ी
“सर यंहा कानून को कौन मानता है ..”
“नही सपना अभी नही ,जब जरूरत होगी तब ले आना ,चलो काम पर लगो ..”
वो आश्चर्यजनक रूप से मुस्कुराई
“सर क्यों ना हम फिर से नई शुरुवात करे ..बीती बातों को भूलकर ..”
उसने अपना हाथ मेरे सामने किया ..
मैं भी रात भर से यही सोच रहा था की आखिर मैं सपना से कैसे डील करूंगा ,नई शुरुवात का आईडिया मुझे पसंद आया और मैंने अपना हाथ आगे कर दिया …
“ऐसे सुना है पूर्वी आजकल रोहन के साथ काम कर रही है ..”
सपना काम करते हुए अचानक ही बोल पड़ी …
मैंने उसे घूरा ..
“सम्हाल कर रहिएगा सर ,रोहन है बड़ा ही कमीना ..”
“मैं भी तो तुम्हारे साथ काम कर रहा हु और तुम कौन सी सीधी हो ..फिर भी पूर्वी ने इसकी इजाजत दी ना..”
सपना मेरी बात सुनकर खिलखिला कर हँस पड़ी ..
“आप दोनों के बीच बहुत ही भरोसा है सर शायद इसलिए आप दोनों ने एक दूसरे को पुराने प्रेमियों के साथ काम करने की इजाजत दे दी ..”
उसकी आंखे अजीब से भाव से भर गई थी ,जो मुझे अंकम्फर्टबल कर रहा था..
“पहली बात की हा हमे एक दूसरे पर पूरा भरोसा है ,और दूसरी बात की तुम मेरी प्रेमिका नही थी …”
मैंने स्पष्ट शब्दो में कहा,सपना की आंखे अब भी मुझपर गड़ी हुई थी .
“लेकिन मैं तो आज भी आपसे उतनी ही मोहोब्बत करती हु “
उसने बहुत ही हल्के आवाज में कहा लेकिन लेब की खामोशी में उसकी आवज मुझे सुनाई दे गई ..
“सपना ...ये तुम्हारी नई शुरुवात है ,तुम आज भी उन्ही बातों को लेकर बैठी हो …”
मैं चिल्लाया
वो झेंप गई ..
“सॉरी सॉरी सर ..”
अब मैं भी शांत था ,मुझे लगा जैसे सच में सपना बहुत ही बदल गई है …..
अध्याय 4
पूर्वी का सर मेरे सीने में था,अभी अभी हम दोनों ने एक दूजे के जिस्म को भोगा था,और एक दूसरे से लिपटे हुए सोए थे..
“लगता है आजकल आप टेंशन में रहते हो ..
”पूर्वी मेरे छाती के बालो से खेलते हुए बोली
“ऐसा क्यो ???”
“जल्दी गिर जाते हो “
वो हल्के से हँस पड़ी और मुझे याद आया की मैं कुछ दिनों से सच में उसे पूरी तरह से संतुष्ट नही कर पा रहा हु..
“सॉरी जान ..”
“अरे इसमें सॉरी वाली क्या बात है ,मन में कोई बात हो तो बताओ यू टेंशन में रहने से क्या फायदा होगा ,”
“कोई खास बात नही है लेकिन मुझे दुख होता है जब मैं तुम्हे पूरी तरह से संतुष्ट नही कर पाता,ये रिसर्च साला दिमाग खराब कर रखा है ..’
वो खिलखिलाई और मेरे सीने को एक किस किया ..
“पागल हो आप ,इसमें दुखी होने वाली कोई बात नही है ,सिर्फ शारीरिक संतुष्टि मायने थोड़ी रखती ,हमारे बीच इतना प्यार वही मायने रखता है “
“हा लेकिन संतुष्टि भी तो जरूरी है ना”
पूर्वी मेरी आंखों में देखते हुए मुस्कुराई
“अरे रोज रोज थोड़ी चाहिए रहता है सप्ताह में दो दिन ओर्गास्म हो काफी है ,और उसके लिए मेरे पास रोहन का दिया गिफ्ट है ना “
पहले तो मैं आश्चर्य से भर गया फिर मुझे याद आया की वो किसकी बात कर रही है ,जब रोहन उसका बॉयफ्रेंड था तब उसने पूर्वी को एक डिल्डो गिफ्ट किया था,पूर्वी ने मुझसे ये बात नही छिपाई थी लेकिन मुझे पता नही था की शादी के बाद उसका क्या हुआ ...शादी से पहले पूर्वी फोन सेक्स के समय उसका यूज़ किया करती थी …
“तुम्हारे पास वो अब भी है …”
“हा मेरे प्यारे दोस्त ने दिया था कैसे फेक देती ,”उसने मुझे चिढ़ाते हुए कहा
“ओह तो मेडम आज भी उसका यूज़ करती है ..”
“नही शादी के बाद उसकी जरूरत नही पड़ी ,आप को ही सम्हालना मुश्किल होता था मेरे लिए लेकिन अब लग रहा है की फिर से उस तेल लगा कर तैयार करना होगा …”
पूर्वी की बातों और आंखों में शरारत ही शरारत थी,वो कभी कभी बेहद ही नॉटी हो जाती थी,बट आई लाइक इट ..
और मैंने फिर से उसे दबोच लिया,वो खिलखिलाने लगी ,हमारे होठ फिर से मिले और उसने मेरे लिंग को सहलाना शुरू कर दिया ,उसके हाथो की कोमलता को पाकर मेरा लिग फिर से फुंकार मारने लगा और पूर्वी ने अपने हाथो से उसे अपने नाजुक और गीले योनि में प्रवेश करवाया ,उसका अहसास ही मेरी उत्तेजना को बढ़ाने को काफी था,हम दोनों फिर से एक दूसरे में घुलने लगे और एक दूसरे की चमड़ी को अपनी चमड़ी से घिसने लगे,
इस बार मैं थोड़ी देर तक टिका और आखिर में अपना लावा मेरी जान के गर्भ में छोड़ दिया …
हम फिर से एक दूसरे से लिपटे हुए पड़े थे,लिंग अभी भी थोड़ी उत्तेजित अवस्था में पूर्वी के योनि से सटा हुआ था और मेरा ही वीर्य उसके गीलेपन से मिलकर मुझे सुखद अहसास दे रहा था…
वो मेरे सिने को सहला रही थी ..
“तो ..सपना से मिले आज ..”
“ह्म्म्म”
“क्या कहा उसने “
“कुछ नही मुझे लगता है अब वो बदल गई है ,वो पहले वाली सपना नही रही “
“वो चुड़ैल कभी बदलने वाली नही है “
मैं पूर्वी की बात सुनकर हँस पड़ा..
“ऐसे क्यो हँस रहे हो आप,इस बार तो उसने अपने कपड़े नही उतारे ना..”
वो थोड़े गुस्से में बोली
“कम ऑन यार पूर्वी ,तुम भी ना…”
“क्या आप उसके साथ काम कर रहे हो और मेरी जान निकली रहती है साली ना जाने फिर क्या कर दे ..”
मैं फिर थोड़ा हँसा
“तू भी ना पूर्वी ऐसे रोहन ने भी तो तुम्हारे सामने अपने कपड़े निकाले थे इफेक्ट तुम्हारे भी थोड़े निकाल ही दिए थे,फिर भी आज तुम उसके साथ काम कर रही हो ,है ना..”
मैं हंसते हुए बोला और पूर्वी झूठा गुस्सा दिखाते हुए मेरे ऊपर चढ़ गई और मेरे बालो को अपने मुठ्ठी में पकड़ लिया..
“यू….उसकी बात अलग है ओके ..तब वो मेरा बॉयफ्रेंड था ,और ऐसे भी उस रात हमारे बीच कुछ नही हुआ था,मैंने अपनी वर्जिनिटी आपको ही दी है ..वो बेचारा तो आज भी मुझे करने को तरस रहा है ..”
“आज भी ???”मेरे मुह से अनायास निकल गया..
पूर्वी भाव के आवेग में आ के बोल तो गई लेकिन फिर उसे अहसास हुआ की वो क्या बोल गई …
उसने अपनी नजर झुका ली ..
“तुमने मुझे कुछ बताया क्यो नही ,क्या उसने तुम्हारे साथ कुछ जबरदस्ती …”
पूर्वी ने अपना चहरा ऊपर किया और मेरे आंखों में देखने लगी ..
“ओहो आपको लगता है की वो मेरे साथ कुछ जबरदस्ती करने की कोशिश करेगा,झापड़ खायेगा,बस मुझे उसकी आंखों से लगता है ,जैसे वो मुझे घूरता है कभी कभी ...यंहा को तो कभी यंहा को ..”
पूर्वी ने फिर से बेहद ही शरारत के साथ अपने बूब्स और चूतड़ की तरफ इशारा किया ..
और हँस पड़ी ..
“उसे जलाने में मुझे मजा आता है जान ,”
“इतना भी मत जलाओ की उसके सब्र का बांध ही टूट जाए,”
“आप फिक्र मत करो मैं उसे सम्हाल लुंगी ,अभी तक तो सम्हालते आयी हु ना आगे भी सम्हाल लुंगी डोंट वरी अबाउट इट..”
पूर्वी ने फिर से अपने होठो को मेरे होठो से मिला दिया और हम एक बार फिर इस एक दूसरे में घुलने को तैयार हो गए……..
अध्याय 5
लेब में काम करते हुए अचानक से ही सपना का पेन गिर गया था,वो उसे उठाने के लिए झुकी थी लेकिन औसत से कुछ ज्यादा देर लगा रही थी,उसके दिमाग में क्या चल रहा था ये तो में नही कह सकता लेकिन हा मेरी नजर उसके टाइट लेगिंस से झांकते हुए चूतड़ों में कुछ देर के लिए टिक गई,वो जैसे दिल का सेप बना रहे थे,मांसल और भारी पिछवाड़े वाली सपना जब भी टाइट कपड़े पहनती थी तो कई लड़के अपना सीने का और टांगो के बीच वाला दिल हार बैठते थे ,कुछ ही सेकंड के लिए सही लेकिन मेरा भी कुछ ऐसा ही हाल हो गया था, पतले कपड़े से उसकी पेंटी का रंग तक मुझे दिखाई दे रहा और साइज तो …….वाह..
मैंने अपना सर झटका और फिर से अपनी किताब की ओर देखने लगा,सपना खड़ी हो चुकी थी और मेरी नजर बचाती हुई नजरो को समझने में उसने बिल्कुल भी देर नही की ,उसके होठो की मुस्कान ही ये बता रही थी की उसे पता है की मेरी नजर कहा टिकी हुई थी …
थोड़े देर तक कमरे में खामोशी ही छाई रही ..
“सर देखना है तो खुल कर देख लिया करो मैं किसी से नही कहूंगी ..”सपना की शरारत से भरी हुई आवाज मेरे कानो में पड़ा और मैं फिर से बुरी तरह से झेंप गया..
“सपना मैंने कहा था की नो मोर फ्लर्टिंग ..”मैंने आवाज को थोड़ा सख्त किया
“अरे सर देखने और दिखाने में क्या है ,अब पूर्वी भी तो कभी रोहन को कुछ दिखाने में नही शर्माती ,और रोहन भी भूखे कुत्ते की तरह उसे घूरता रहता है “
सपना की बात से मुझे पूर्वी की कल वाली बात याद आ गई..की रोहन आज भी उसके जिस्म को घूरता है,लेकिन साथ ही साथ मेरे नशों में खून का प्रवाह भी तेज हो चुका था,मेरा चहेरा लाल हो गया..
“गेट आउट ..”मैं जोर से चिल्लाया..
“इसीलिए मैं तुम्हे इतने दिनों से इग्नोर कर रहा था,तुम आज भी मेरे और पूर्वी के बीच आना चाहती हो ,तुम वो जगह कभी भी नही ले सकती सपना ..”
मेरे चिल्लाने का जैसे सपना पर कोई भी असर नही हुआ था,वो अब भी मंद मंद मुस्कुरा रही थी ..
“सर जी आप तो गुस्सा ही हो गए ..थोड़ी मोड़ी फ्लर्टिंग तो वर्क प्लेस में होती ही है ,इससे काम का बोझ भी हल्का रहता है ,और क्या आपको सच में लगता है की पूर्वी ऐसा कुछ नही करती होगी ..”
मैं बुरी तरह से झल्ला गया था..
“वो तुम्हारे जैसे नही है सपना जो किसी गैर मर्द के सामने अपने जिस्म की नुमाइश करे ..”
वो खिलखिला कर हंसी
मैं उसे बुत बना देख रहा था,हसने के बाद उसने बहुत ही ठंडे लहजे में कहा
“ना आप मेरे लिए कोई गैर मर्द है ना ही रोहन पूर्वी के लिए”
वो अपना पर्स उठा कर वंहा से इतने तेजी से निकली की मुझे कुछ कहने का मौका ही नही दिया ,वही मैं बस खड़ा हुआ उसकी बातों को सोचता रह गया ……..
अध्याय 6
सुबह का अलार्म और नीद खुल गई,आज मुझे पूर्वी के साथ जिम जाना था,पता नही क्यो लेकिन कुछ अजीब सा लग रहा था,लेकिन पूर्वी ने मुझे जगाने में और तैयार करने में कोई भी कसर नही छोड़ी…
वो अमीरों वाली जगह थी,जंहा पूर्वी शादी से पहले रोज जाया करती थी लेकिन शादी के बाद उसने जिम जाना ही बंद कर दिया था,वो जिम रोहन का था और रोहन ने पूर्वी को इस्पेसल फ्री एंट्री दी थी.असल ,में रोहन के कंपनी के सभी मैनेजर और एक्सीक्यूतुव लेवल के लोगो और परिवार के लिए जिम में एंट्री फ्री थी इसीलिए पूर्वी ने भी वंहा जाने के लिए स्वीकृति दे दी थी,उससे पहले रोहन के लाख कहने पर भी पूर्वी ने अपने और मेरे आत्मसमाम को गिरने नही दिया था,वो भी सेल्स एक्सिक्यूटिव लेवल की अधिकारी बन चुकी थी और जिम का फ्री पास मिलने पर उसने मना नही किया और मुझे भी तैयार कर ली …
जिम में एंटर करते ही पहला सामना रोहन से ही हुआ,उसने ऐसा वेलकम किया जैसे हम उसके महमान हो ..
“ये कुतिया यंहा क्या कर रही है …”
पूर्वी ने अचानक ही कहा
रोहन और मैं अनायास ही उस दृश्य को देखने पर मजबूर हो हो गए जिसके बारे में पूर्वी ने कहा था,
वंहा सपना थी जो पसीने से भीगी हुई वर्कआउट कर रही थी,उसके जिस्म में उसका पतला शार्ट और टीशर्ट चिपक सा गया था,उसके जिस्म का हर कटाव मानो जमाने की हर बंदिश को तोड़कर बाहर आने को बेताब था….
“यार पूर्वी तुम भी, वो तो हमेशा से इस जीम की मेंबर है ,भूल गई हो क्या???:”
रोहन ने एक सदा सा रिप्लाई किया
“जानती हु की वो कुतिया पुरानी मेम्बर है मैं भी थी …,लेकिन अभी इस समय ये क्या कर रही है ,अगर इस समय वो वर्कआउट करेगी तो मुझे भूल जाओ की मैं यंहा आऊंगी ..”
पूर्वी ने सपाट शब्दो में कहा जिसे मैं भी काट नही सकता था..
‘कम ऑन यार..उस घटना को इतने दिन हो चुके है तुम अभी तक उसे लेके बैठी हो…”
रोहन कुछ झल्लाया हुआ सा लगा,लेकिन पूर्वी शांत थी
“मैं अपने पति के साथ यंहा हु ,तुम्हे मालूम होना चाहिए की उसने क्या किया था,मेरे पति…”
वो कुछ बोल पति उससे पहले ही रोहन ने उसे टोक दिया..
“तुम सच में एक मिडिल क्लास हाउसवाइफ की तरह बात कर रही हो ,तुम हाई क्लास की लड़की हो तुम्हारा ये सब सोचना शोभा नही देता..”
रोहन की कही बात को मैं पूरे होशो हवास में समझने की कोशिश कर रहा था की पूर्वी ने तपाक से कहा
“जो मेरे पति है वही मैं भी हु रोहन,एक मिडिल क्लास हाउसवाइफ ,तुम जो भी समझो लेकिन वो मेरे लिए कुतिया थी और वही रहेगी “
मैने आंखों ही आंखों में रोहन को समझाया की ठीक है…
रोहन अब थोड़ा नार्मल था..
“मेरी जान अपने प्यार पर भरोसा रखो,जब तुमने मुझे उसके साथ काम करने तक की परमिशन दे दी तो उसके यंहा होने से क्या ही फर्क पड़ जाएगा…”
मैंने पूर्वी को समझाने का प्रयास किया ,
उसने मुझे घुरा और हल्के से मुस्कुराई
“मुझे खुद पर अपने प्यार पर पूरा भरोसा है मेरी जान ..”
पूर्वी को शांत देख कर रोहन ने भी एक गहरी सांस भरी,और थोड़ा उत्साह से बोला
“ऐसे भी उसका होना तो अच्छा है ना पूर्वी ,तुम दोनों को देखकर उसकी भी जलेगी ..”
हम तीनो ही हंस पड़े ,वही सपना हमे देखकर हमारी ओर ही आने लगी ..
“हाय पूर्वी हैल्लो सर,वाट ए प्लेजेंट सरप्राइज,आप दोनों भी जिम जॉइन कर रहे है ,अब तो मजा आएगा वर्कआउट करने में ..”
सपना की बात पर तो मुझे आश्चर्य नही हुआ लेकिन इस बात पर जरूर। हुआ की पूर्वी ने जवाब में मुस्कुरा कर दिया ,वो बस मुस्कुराई ,और उसकी मुस्कुराहट में सपना के लिए एक व्यंग था,मेरे लिए एक गर्व,रोहन के लिए खुसी थी और खुद के लिए संतुष्टि ..
एक ही मुस्कुराहट सभी के लिए अलग अलग मायने रखने वाली थी ,
“ओके ओके अब बाते बंद करो,मैं तुमलोगो का शेड्यूल तैयार करवाता हु तब तक स्ट्रेचिंग कर लो ..
”
रोहन ने जल्दी जल्दी कहा ,सपना भी मुस्कुराते हुए जाने लगी ,उसके टाइट कपड़े से झांकते हुए उसके जिस्म को देखकर एक बात तो मेरी भी आह सी निकल गई थी ..
“यार रोहन कुछ बोल लेकिन सपना है बहुत ही टाइट ..”
मैंने ये बात कही तो रोहन से थी लेकिन मेरी नजर थी पूर्वी के ऊपर ,उसने मुझे खा जाने वाली निगाहों से देखा वही रोहन हंस पड़ा,उसे पता था की मैं ये पूर्वी को जलाने के लिए कर रहा हु ,
“हा ये बात तो सही है ,मेरे जिम में कई लड़के तो बस उसे देखने ही आते है ..”
रोहन ने हंसते हुए कहा अब पूर्वी ने उसे झूठे गुस्से से घुरा,उसे पता था की हम उसको जलने के लिए ये बोल रहे है ..
“अच्छा तो तुम लोगो को ये लगता है ,अभी दिखती हु “
मैं और रोहन इस इंतजार में थे की आखिर पूर्वी क्या दिखाने वाली है ,और उसने अपना स्पोर्ट जैकेट की चैन खोली और उसे निकाल कर बाजू में रख दिया ,उसने अंदर स्पोर्ट ब्रा पहनी थी,जिससे उसके मांसल उरोज निकलने को बेताब मालूम हो रहे थे,उसके क्लेवेज में कुछ ज्यादा ही उभार दिखाई दे रहा था,मैं तो इन वक्षो को रोज ही देखता और सहलाता था लेकिन फिर भी मेरा मुह खुल गया,वही रोहन तो उसे ऐसे देख रहा था जैसे कोई बच्चा आइसक्रीम को देखता है ,पूर्वी के होठो में गर्व से एक मुस्कान आ गई,उसने नीचे योग लेगिंस पहनी थी जो की उसके जिस्म से पूरी तरह से चिपका हुआ था,मैं उसके खूबसूरत चहरे का दीवाना तो हमेशा से ही था लेकिन आज उसके जिस्म को इतने बरकी से पहली बार निहार रहा था,उसके कटाव किसी मायने में सपना से कम नही थे ,और हम ही क्या अचानक से ही मैंने कई लोगो को पूर्वी को घूरते पाया…
पूर्वी कुछ भी छिपाने के मूड में नही लग रही थी,लग रहा था जैसे उसे अपने जिस्म पर गर्व है ,और होना भी चाहिए,उसका जिस्म था भी इतना खूबसूरत ..
“अब कुत्तों जैसे लार टपकना बंद करो ..”
पूर्वी ने हंसते हुए रोहन से कहा जो की मेरे लिए भी कहा गया था लेकिन रोहन को पॉइंट करके ..
“कसम से पूर्वी तुम तो जिम ना आकर भी इतनी फिट हो ,अब मजा आएगा ,पुराने दिनों जैसे टक्कर होगी पूर्वी वर्सेस सपना ..”
रोहन ने बेहद ही मजाकिया अंदाज में कहा
“क्यो तुम्हरे जिम में कोई और लड़की नही आती क्या …”
“अरे लडकिया तो बहुत आती है लेकिन तुम दोनों की बात ही कुछ अलग है ,”
रोहन मुस्कुराने लगा,
“कोई टक्कर नही होने वाली समझ गया,मैं यंहा वर्कआउट करने आऊंगी ना की मुझे कोई कम्पीटिसन जीतनी है ..”
इतना बोलकर पूर्वी मुड़ी और जाने लगी ,इस बार हमारी नजर उसके पिछवाड़े में उभरे हुए दो मटकों पर थी,जो एक बेहद ही उतेजित करने वाले लय से मटक रही थी ..
“यार गौरव कुछ भी बोले लेकिन तुम बहुत ही किस्मत वाले हो ,हमारे ग्रुप की सबसे सुंदर लड़की तुम्हारी बीबी है और सबसे हॉट लड़की तुम्हे अपना बनाना चाहती है ...
और अब तो पूर्वी भी हॉट होने लगी है ,”
रोहन की नजर अब भी पूर्वी के पिछवाड़े पर टिकी थी ,अचकन उसने मुझे खुद को घूरते हुए देखा और थोड़ा झेंप गया ..असल में मेरे लिए ये पहली बार था जब कोई मेरी बीबी को मेरे ही सामने ऐसे घूर रहा था,एक दो नही लगभग सभी लोग ,यंहा तक की लडकिया भी पूर्वी को घूरे बिना नही रह पा रही थी,इस बात पर मुझे गुस्सा करना चाहिए या गर्व मुझे बिल्कुल भी समझ नही आ रहा था,पूर्वी का दोस्त ,उसका पुराना बॉयफ्रेंड मेरे सामने उसके चूतड़ों को घूरता हुआ उसके सुंदरता की तारीफ कर रहा था,और मैं ये समझने की कोशिश में था की आखिर मुझे कैसा रिएक्शन देना चाहिए…
मैं एक मिडिल क्लास परिवार का लड़का हु जिसके लिए ये सब बिल्कुल ही अजीब बात थी,मेरे परिवार की लडकिया दिन भर अपना पल्लू ही सम्हालती रहती है और यंहा मेरी बीबी सबको गर्व से अपने उठे हुए वक्षो के दर्शन करवा रही थी ,ऐसे ये सब शहरों में आम सी बात है लेकिन फिर भी मेरे लिए ये कोई आम बात नही थी,क्या मुझे इस बारे में पूर्वी से बात करनी चाहिए ..??
अभी तो नही शायद घर जाने के बाद ..
“ह्म्म्म बात तो सही कही कह रहे हो ,चलो वर्कआउट प्लान तैयार करते है ..”
मैंने शांत लहजे में कहा………..
अध्याय 7
पूर्वी की नजर से
कभी कभी जीवन का एक फैसला आपके जीवन की दिशा और दशा तय करता है,मेरे जीवन मे भी वो पल आया जब मुझे वो फैसला करना था जिससे मेरी आने वाली जिंदगी तय होती…
वो फैसला था गौरव से शादी करने का फैसला,
मैं एक बेहद अमीर और रसूखदार परिवार की इकलौती नकचढ़ी बेटी हु,पिता के बेहिसाब संपत्ति की इकलौती वारिस और पिता की परी,उनके आंखों का तारा और जो भी कहना चाहो,
जीवन मे कभी किसी चीज को कोई कमी नही रही, भगवान ने हुस्न दौलत और जिस्म सब भर भर कर दिया था,और वहीं गौरव थे जो एक निम्न मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते थे,दिखने में कोई ख़ास सुंदर नही थे ,और मुझे लगभग10 साल उम्र में बड़े भी थे,मैं उनके प्यार में कैसे पड़ी ये कह पाना मुश्किल था,पिता की सारी दौलत शोहरत, आजादी ,हुस्न और पैसे का घमंड ,सब जैसे धरा का धरा रह गया,एक पल नही लगा इन्हें छोड़ने में ,ये सब कैसे और क्यो हुआ समझना थोड़ा मुश्किल है,
बचपन से हम तीन दोस्त हमेशा साथ रहते थे,या ये कहु की मेरा एक सबसे दोस्त और मेरी सबसे बड़ी दुश्मन हमेशा मेरे साथ रहते थे,
सपना, रोहन और मैं हमारी जोड़ी की मिसाल सारी दुनिया देती थी,सपना और मैं खानदानी दुश्मन है, हमारे दादा, हमारे पिता और फिर हम दोनों,हमेशा से गला काट प्रतियोगिता में लगे रहे,हमारा बिजनेस एक था प्रोपर्टी एक ही जगह थी,और बचपन से साथ ही पढ़े, अजीब सी दुश्मनी थी हमारे परिवार के बीच, साथ साथ रहते थे,लेकिन एक दूसरे को हमेशा नीचा दिखाने की कोशिश में लगे रहते,
वही एक तीसरा परिवार था रोहन का परिवार वो हम दोनों परिवार के
बीच मध्यस्थता का काम करता, दोनों ही उनके बेहद ही अच्छे दोस्त थे,वही एक कारण थे जिसके वजह से हमारा परिवार साथ रहता था,
पारिवारिक रिश्तों का असर हमपर भी पड़ा, चीजे सामान्य ही थी जब तक कि जवानी नहीं आयी,
मेरे पहले भी कुछ बॉयफ्रेंड रहे लेकिन बस बोलने को,पहली बार प्यार का अहसास रोहन के साथ ही हुआ,वो दिन मैं कभी नही भूल सकती जब हम रोहन के बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे थे ,उसने अपने फॉर्महाउस में पार्टी रखी थी,शराब की नदियां बह रही थी और सभी दोस्त नशे में झूम रहे थे,रोहन बहुत खुश था और साथ मे मैं भी,
आखिर मैं बुरी तरह से थक गई और रोहन का हाथ पकड़ उसे एक कमरे में ले आयी,वो काउच पर बैठा हुआ था और मैं उसकी गोद मे बैठ गई ,उसने मुझे जकड़ रखा था,
“आई एम सो हैप्पी बेबी ,अब हम कॉलेज जाएंगे”
मैंने चहकते हुए अपना चहरा रोहन के चहरे से टिका दिया,हमारी नाक आपस मे मिल रही थी,ये कोई पहली बार नही था जब हम इतने पास थे,हम बचपन कर दोस्त थे और एक दूसरे पर प्यार लुटाने में कभी कोई कमी नही की,आज भी उसके लिए बहुत प्यार आ रहा था,हमारी नाक आपस मे मिली थी और हम मुस्कुराते हुए एक दूसरे की आंखों में झांक रहे थे,
“आई लव यू बेबी”
रोहन ने बड़े ही प्यार से कहा,मैंने उसका चेहरा पकड़ कर जोरो से उसके गालों को चूम लिया, और थोड़ा चूस भी लिया जिससे उसके गाल पर मेरे लार की हल्की परत बन गई थी,
“आई लव यू टू माय स्वीट बेबी यू आर माय बेस्ट बेस्ट फ्रेंड एंड आई लव यू टू मच,”मैंने फिर से उसके गालों में चिपचिपा किस किया और मुस्कुराते हुए उसकी आँखों मे देखने लगी,
,मैं मुस्कुरा रही थी लेकिन रोहन के होठो से मुस्कान गायब हो गई ,
“क्या हुआ “उसके चेहरे की संजीदगी से मैं थोड़ा घबरा गई थी,
उसने अपने हाथों से मेरे चेहरे को पकड़कर मुझे अपने और करीब खिंचा और मेरे नाजुक होठो में अपने होठो को रख दिया,उसके होठ बहुत ही आराम से मेरे होठो को चूम रहे थे,ऐसे तो मुझे पहले भी 2 लड़को ने किस किया था लेकिन रोहन की बात अलग थी ,वो मेरा दोस्त था,मैं उसकी फिक्र करती थी…..
“रोहन तुम ठीक तो हो ना..”
उसके आंखों में आंसू थे और मेरे आंखों में भी आंसू आ गए ..
“आई लव यु पूर्वी ..”
‘आई लव यु टू रोहन ..”
“दोस्त वाला लव नही …”
उसने आखिर कह ही दिया …
मुझे समझ ही नही आ रहा था की मैं उसे क्या जवाब दु ,बचपन से लेकर आजतक मैने कभी इसे इस निगाह से नही देखा था,मैं उसकी बातों को समझ रही थी लेकिन उसका जवाब देना मेरे लिए बेहद ही मुश्किल था,मैं उसे चाहती थी प्यार भी करती थी लेकिन वो जो प्यार की बात कर रहा था वो बॉयफ्रेंड गर्लफ्रैंड वाला प्यार था,दोस्त वाला नही ..
मैं बस उसे एकटक देखती रही ..
“मैं तुम्हे अपनी गर्लफ्रैंड बनाना चाहता हु ..
”
वो फिर से मेरे होठो को चूमने लगा,मुझे लगा जैसे मैं बस एक लाश हु ,मेरी आत्मा कही खो गई थी ,मैं एक बेपरवाह सी नकचढ़ी सी लड़की थी लेकिन फिर भी मेरे जीवन में जो प्यार की एक आभा थी वो रोहन से ही तो थी,वही तो था जिसने पूरी जिंदगी मेरा ध्यान रखा था,दिन भर उसके साथ ही रहती ,स्कूल के समय में उसकी कुछ गर्लफ्रैंड बनी ,मेरे बॉयफ्रेंड बने लेकिन उसने ज्यादा समय हम एक दूसरे के साथ बिताते,एक दूसरे से कोई बात आज तक कभी नही छुपाई थी ,पता नही रोहन ने मुझसे ये बात क्यो छिपाई और आज शराब के नशे में एक इमोशनल मूवमेंट में ये बात उसके होठो से निकल गई ,वो मेरे होठो को चूम रहा था,पागलों की तरह लेकिन मेरे होठो में कोई भी हरकत नही हो पाई मैं बस सोच में ही डूबी थी जिसका अहसास उसे हो गया ...ओर वो मुझसे अलग हुआ ..
“पूर्वी तुम्हे दुख हुआ हो तो मुझे माफ कर देना लेकिन ,मैं और नही छिपा सकता की मैं तुम्हारे बारे में क्या सोचता हु “
मैंने एक बार ध्यान से रोहन को देखा उसकी आंखों में वो सच्चाई दिखी जो मैं किसी लड़के की आंखों में खोजती थी,वो प्यार से भरी हुई आंखे,मेरे लिए मानना भी कठिन था की रोहन जैसा लड़का कभी प्यार में पड़ जाएगा वो भी मेरे …
अपनी सबसे अच्छी दोस्त के ..
रोहन पैसे वाला था और दिखाने में बहुत ही हेंडसम,किसी एथलीट सी जैसा शरीर था हमारी उम्र के हिसाब से वो बहुत मजबूत था,स्कूल के समय में ही कई लड़कियों ने उसे प्रपोज किया था,जैसे हमे लड़के करते थे,हम तीनो ही स्कूल के सबसे फेमस विद्यार्थी हुआ करते,हर लड़के को पूर्वी या सपना चाहिए थी तो हर लड़की रोहन की दीवानी थी,आज उसी रोहन ने मुझे प्रपोज किया था...क्या मुझे हा कहना चाहिए,वो किसी भी तरह से कम तो नही था,और इस बात से मेरे पापा भी बेहद खुश हो जाते क्योंकि वो हमेशा से चाहते थे की रोहन ही मेरा बॉयफ्रेंड हो और बाद में मेरा पति …
मैंने उसके सवाल का कोई जवाब नही दिया लेकिन उसके सर को पकड़ कर अब अपनी ओर खिंच लिया ,अब मैं थी जिसने उसके होठो में अपने होठो को रख दिया था,हम दोनों ही धीरे धीरे एक दूसरे के होठो को चूस रहे थे,रोहन का हाथ अब मेरे सर से हटकर पूरे जिस्म में घूम रहा था,मेरे टाइट शार्ट स्कर्ट के नीचे उसका हाथ मेरी जांघो को भी सहलाने लगा था,मेरा शरीर अब उसकी हर हरकत की प्रतिक्रिया दे रहा था,जिस्म में झुरझुरी सी दौड़ाने लगी थी,मैं अब भी उसके गोद में बैठी थी और मेरे कमर के नीचे मुलायम नितंबो में उसके लिंग का स्पर्श का आभास मुझे हो रहा था,जैसे किसी कच्चे केले के ऊपर बैठ गई हु,मैं इसका आभास पाते ही हंसने लगी …
“क्या हुआ “
उसने आश्चर्य से देखा
“कुत्ता है साले तू ,मेरे नीचे क्या चुभो रहा है ..”उसके भी होठो में कुटिल सी मुस्कान आ गई
“तुझे नही पता क्या मेरी कुतिया ..”
मैंने उसके गालों पर हल्की सी चपत लगा दी..
“ये तेरा ढंग है प्रपोज करने का ..”
“हाँ बता इस कुत्ते की कुतिया बनेगी “
उसने इस ढंग से कहा की मैं खिलखिलाकर हंस पड़ी
“सच में कुत्ता है तू ,”मैंने थोड़ी देर उसकी आंखों में देखा और फिर से बोल उठी ..
“और मैं तेरी कुतिया हु ..”वो मुस्कुराने लगा,और मैंने फिर से उसके होठो को अपने होठो में भर लिया ..
हम दोनों एक दूसरे के होठो में डूबे हुए थे जब दरवाजा खुला ,हम दोनों ने जब चौक कर देखा तो सामने सपना खड़ी थी ,आंखों में अंगारे लिए ,सच कहु तो मुझे इससे बड़ा ही सुकून मिला था..
“रोहन ने मुझे प्रपोज किया और ….और मैंने एक्सेप्ट कर लिया..”
मैंने सपना को जलाने के लिए कहा,रोहन की गर्लफ्रैंड कोई भी बने सपना को कोई फर्क नही पड़ता था लेकिन मैं जानती थी की वो मुझे उसके नजदीक देखकर जल जाएगी ..
“सपना मैं तुम्हे बताने ही वाला था .”
रोहन बोल रही रहा था की सपना गुस्से में जोर से दरवाजा बंद करते हुए वंहा से निकल गई ,मैं तो हँस ही पड़ी लेकिन रोहन ने मुझे थोड़ी नाराजगी से देखा ..
वो उसके पीछे जाने लगा
“तुम्हारे लिए वो इम्पार्टेंट है या मैं ..”
मैं चिल्लाई
“पूर्वी प्लीज् यार मेरे लिए तुम दोनों ही इम्पार्टेंट हो ,हम तीनो बचपन के दोस्त है फिर भी तुम दोनों हमेशा लड़ते रहते हो “
“हम तीनो नही तुम दोनों और हम दोनों ,सपना और मैं तो हमेशा से दुश्मन ही है ..”
“हा जानता हु लेकिन तुम दोनों के बीच पिसता तो मैं ही हु ना ,तुम खुश करो वो नाराज ,उसे खुश करो तो वो ..”रोहन झल्ला गया था और मैं उसकी इस कंडीसन पर हंसने लगी क्योंकि मुझे पता था की ये बेचारे के साथ हमेशा ही होता था..
“हा सब जानती हु जाओ जाओ अपनी सपना को मनाओ,”मैंने मुस्कुराते हुए कहा ,और वो तेजी से कमरे से निकल गया ..
मैं जानती थी की रोहन अब सपना को कितना भी मना ले लेकिन अब सपना रोहन की सिर्फ दोस्त रहेगी लेकिन मैं ..मैं रोहन की दोस्त के अलावा भी कुछ हु …
मेरे होठो में फिर से एक मुस्कान तैर गई ………..
अध्याय 8
दिन गुजरते गए और मस्तिया चलती रही,सपना अब भी रोहन से नाराज थी और सच बताऊँ तो इससे दिल को बेहद ही सुकून मिलता था,लेकिन फिर भी हर पार्टी में वो साथ रहती,जंहा भी हम जाते वंहा वो साथ ही रहती,उसके सामने रोहन तो कुछ नही करता लेकिन मैं रोहन के होठो में होठ भरने का कोई मौका नही छोड़ती खासकर जब सपना हमारे साथ हो,ऐसी ही कुछ दोस्ती और दुश्मनी थी हमारी की चाहे कुछ भी हो जाए लेकिन साथ कभी नही छोड़ते थे …
एक अजीब सा लगाव था हमे एक दूसरे से तीनो में कोई एक ना हो तो खाली खाली सा लगता था,चाहे हम कितनी भी दुश्मनी निभा ले लेकिन बचपन का साथ था हमारा,उस दिन रोहन मुझे लेकर सपबना के घर गया,मैं उसके घर नही जाना चाहती थी लेकिन रोहन ने जबरदस्ती की …
हम सपना के कमरे में बैठे थे,कमरा मेरे कमरे जैसा ही था असल में लग यही रहा था की जैसे मेरे कमरे की ही नकल हो ,बड़े से कमरे में एक कोने में सोफा लगा हुआ था,हम वही बैठे थे,सपना कही दिख नही रही थी ,रोहन ने मुझे थोड़ी देर में आने की बात कही और वो बाहर निकल गया ,मैं वंहा अकेली थी समझ नही आ रहा था की आखिर सपना कहा है ,थोड़ी ही देर में सपना और उसके पिता जी वंहा आये ..
मैं खड़ी होई गई ..
“नमस्ते अंकल ..”
वो मुस्कुराए
“नमस्ते बेटा बैठो बैठो..”
सपना मेरे बाजू में बैठ गई वही अंकल दूसरे सोफे में ,
“रोहन कहा चला गया??? “मुझे समझ नही आ रहा था की आखिर रोहन मुझे यंहा अकेले छोड़कर कहा चला गया है..
“वो थोड़ी देर में आएगा,असल में हमने ही तुम्हे बुलाया था रोहन से बोलकर,अब सपना बोलती तो तुम आने से रही ..”
अंकल अब भी मुस्कुरा रहे थे,,अंकल ने मुझे बुलाया ,अब आखिर ऐसी क्या बात हो गयी ,मैं ध्यान से सुनने लगी ..
“देखो बेटा तुम्हे भी पता है की हमारे परिवार के बीच एक अलग ही युद्ध चलता आ रहा है,मेरे पिता और तुम्हारे दादा जी कट्टर प्रतिद्वंदी थे ,लेकिन क्या तुम्हे पता है की वो दोनों और रोहन के दादा ये तीनो एक ही स्कूल में एक ही कालेज में पढ़े थे…”
“जी अंकल मैं जानती हु,”
“बात यही खत्म नही हुई ,हमारी दूसरी पीढ़ी यानी मैं तुम्हरे पिता और रोहन के पिताजी तीनो ने भी वो प्रथा कायम रखी,तुम्हारे पिता जी का अगर कोई सब्सेर बड़ा दुश्मन है तो वो मैं हु और वैसे ही मेरे लिये तुम्हारे पिताजी है,”
वो हसने लगे साथ ही मैं भी मुस्कुराने लगी क्योंकि ये बात बिल्कुल ही सही थी लेकिन सपना उदास थी सर झुकाए बैठी थी ..
अंकल फिर से बोलने लगे ..
“देखो बेटा यंहा ऐसे बुलाने के लिए माफी चाहूंगा लेकिन मैं अपनी बेटी से बहुत ज्यादा प्यार करता हु ,मैं यंहा तुम्हे कुछ समझने के लिए नही बुलाया हु असल में मैं सपना को कुछ समझाना चाहता हु ..
”
उनकी बात सुनकर मैं थोड़ा चौकी,उन्होंने बोलना जारी रखा
“देखो बेटा तुम्हारे दादाजी भले ही मेरे पिता के सबसे बड़े कम्पीटिटर थे लेकिन उन्होंने मुझे हमेशा अपने बेटे की तरह समझा,और तीनो परिवार हमेशा अपनी दूसरी पीढ़ी को अपने बच्चों जैसा प्यार देते आ रहे है,हम कितने भी बड़े दुशमन बन जाए लेकिन हमारे बीच वो दोस्ती कभी नही छूटती जो हममें है दुश्मनी के रूप में,सच कहु तो तुम्हारे पिता जी अगर बीमार भी पड़ जाए ना तो मेरी जान निकल जाती है,क्योंकि साला वो ही नही रहेगा तो मैं लडूंगा किससे ..”
अंकल की बात से मुझे वो घटना याद आयी जब पापा के अपेंडिक्स का ऑपरेशन हुआ था और मिलने वाले में सबसे पहले अंकल ही थे दूसरे रोहन के पापा थे ,और जब सपना के पिता जी को हार्ट अटैक आया था तो पापा कुछ ज्यादा ही चिंता में रहते थे,बार बार फोन कर उनका हाल चाल जानते उनसे मिलने जाते…
इन सब बातों को याद करके मैं मुस्कुराने लगी
“बेटा तेरे दादा और तेरे पापा दोनों ही जिगर वाले थे दुश्मनी को भी पूरी नजाकत से निभाई उन्होंने लेकिन आने वाली पीढ़ी के लिए मुझे चिंता होती है ,हमने कभी अपने बच्चों को इस दुश्मनी में शामिल नही किया,तुम दोनों दुश्मनों की तरह रहो मुझे कोई प्रॉब्लम नही है लेकिन मैं तुमसे कैसे कोई दुश्मनी निकाल सकता हु ,तुम मेरी बेटी जैसी हो ,रोहन मेरा बेटा है ,मैं तुम्हारे बारे में बुरा नही सोच सकता बेटा,ना ही तुम्हारे रिश्ते के बारे में,लेकिन ये चाहती है की मैं तुम्हारे इसके मामले में आऊ और यही मैं इसे समझने की कोशिश कर रहा हु की हमने कभी एक पीढ़ी को दूसरी पीढ़ी से नही मिलाया ,हमने बुजुर्गों की इज्जत की और छोटो को प्यार दिया है,यही तो हमारे दशमी की काबिलियत रही है ,हमे इसपर गर्व है कि हमारा दुसहमन इतना पावर फूल है ,और हमने उसके परिवार को हमेशा ही अपना परिवार माना है …”
अंकल की बात सुनकर कई वाकये याद आ गए जब सच में अंकल ने मुझे और मेरे पिता ने सपना को अपने बच्चों की तरह से प्यार दिया था,वो तो हम बड़े होने के बाद एक दूसरे के घर आना जाना छोड़ चुके थे लेकिन जब हम बच्चे थे तो हमारे पिता या दादा ने हमे कभी भी एक दूसरे के घर जाने से नही रोका था ,
“सॉरी अंकल की आपको मुझे बुलाने के लिए रोहन की मदद लेनी पड़ी “मुझे अचानक ही अपनी गलती का अहसास हो गया …
अंकल खड़े होकर मेरे बालो को सहलाने लगे ,उनके स्पर्श ,के वही प्यार था जो मेरे पापा के स्पर्श में होता है
“बेटा मेरी और तेरे पिता की हमेशा से दो बेटी और एक बेटा है ,हमारी दुश्मनी और दोस्ती दोनों ही खानदानी है,हा मुझे इस बात का दुख जरूर है की रोहन मेरा नही तुम्हारे पिता का दामाद बना लेकिन मुझे सच में तुम्हारे लिए वो खुसी है जो एक बाप को होनी चाहिए,लेकिन मैं नही चाहता बेटी की तुम अपनी दुश्मनी हम तक पहुचाओ अगर तुम दोनों का
प्रॉब्लम है तो तुम दोनों ही इसे अपने लेवल में खत्म करो ,और यही सोच हमारे पिताओं की थी और हमारी भी है,हम तुम्हारे नही तुम्हारे पूर्वजो के दुश्मन है,लड़ाई में जब तक मजा ना हो तो वो लड़ाई नही रहती,तुम्हारे पिता ने हमेशा सपना की माँ से प्यार किया था,वो उसे पा नही पाया लेकिन मैंने उसे पाया फिर भी हम वैसे ही थे जैसे पहले थे,हर एक बात से हमारी दुश्मनी बड़ी लेकिन फिर भी हमने एक दूजे के परिवार को अपना परिवार समझा है क्योंकि हमने अपनी दुश्मनी सिर्फ अपने तक रखी है,लेकिन आज सपना ने मुझे तुम्हारे बारे में कहा की मैं तुम्हारे और रोहन के बीच के प्यार को तोड़ने में उसकी मदद करू..बेटे ये तो मैं नही कर सकता,तुम्हारे पापा भी यही कहते अगर ये तुम्हारी बात होती..मैं बस ये चाहता हु की तुम दोनों अपनी दुश्मनी दिल से निभाओ ताकि उसमें छिपे प्यार को समझ पाओ तुम दोनों अकेले में बात करके फैसला कार्लो की तुम्हे सोहन के बारे में क्या करना है “
अंकल जा रहे थे तभी मैं बोल उठी
“अंकल पापा ने क्या किया था जब आप और आंटी ने एक दूसरे को चुना “
मेरे सवाल से अंकल जोरो से हँस पड़े
“वो साला तो आज भी मेरी बीवी को मुझसे दूर करने की कोशिश करता है लेकन बेटा ये हमारा कंपीटिशन है जो वो कभी नही जीत पायेगा,और रोहन तुम दोनों का ,हमने कभी तुम्हारा और तुम्हरे दादा दादी का इस्तमाल नही किया तुम्हे भी हमारा इस्तमाल नही करना है,अपनी लड़ाई खुद लड़ो और जीतो,तुम दोनों को ही आल द बेस्ट ‘
अंकल ने मुस्कुराते हुए कमरा छोड़ दिया,उनके लिए दिल में एक सम्मान की भावना मेरे दिल में घर कर गई,सच में ये थड़ी अजीब सी लगाई थी …
मैं सपना की ओर मुड़ी
“समझ आ गया जो अंकल ने कहा “
मैंने उसे मुस्कुराते हुए कहा
“साली कुतिया रोहन कभी तेरा नही होगा ,”
वो सुबकते हुए कहा,मैंने सपना को रोते हुए बहुत ही कम ही देखा था,मैं हँस पड़ी
“कुतिया तो मैं हु लेकिन रोहन की ,तू कुछ नही कर पाएगी “
सपना ने मुझे खा जाने वाली नजर से देखा
“वो तो वक्त ही बताएगा ,लेकिन मेरी बात याद रख हम पैदायसी दुशमन है ,तेरे पिता जी आज भी मेरी माँ को पाने में लगे है ,मैं भी कभी तेरा पीछा नही छोडूंगी,जिससे भी तू प्यार करेगी उसे तुझसे छीन कर रहूंगी “
सपना की बातों से मुझे जोरो की हँसी आयी और मैं जोरो से हंसी भी ,
“गेम इस बिगिंग बेटा देखते है , तू मेरे प्यार को कैसे छिनती है”
मैं कमरे से बाहर निकल गई तब तक सपना बस मुझे घूरती रही
अध्याय 9
कालेज के दिन ऐसे ही निकल रहे थे लेकिन वो पार्टी भी मुझे अच्छे से याद है ,वही फॉर्महाउस था जंहा रोहन ने मुझे प्रपोज किया था,वही दिन था,उसका बर्थडे ,वैसे ही हम शराब के नशे में पी कर झूमे थे ,
रात बहुत हो चुकी थी और मैं नाच नाच कर बेहद ही थक गई थी ,मैं आराम करने के लिए रोहित के कमरे की तरफ बड़ी ,ये वही कमरा था
जंहा रोहन ने मुझे प्रपोज किया था,मेरे कदम लड़खड़ा रहे थे,मैं सम्हालती हुई और रोहन को कोसती हुई उस कमरे के तरफ गई ,
“huuuuuuuu ओह रोहन”
कमरे से आने वाली आवाज ने मुझे चौकन्ना कर दिया,मुझे याद आया की रोहन सपना के साथ ही कही गया था,उसके बाद से मैंने उसे देखा ही नही था,मेरे पैरों से जैसे जमीन खिसक गई ..
“रोहन प्लीज् करो ना ..”
ये सपना की आवाज थी,मेरा दिल जोरो से धड़का ,मैंने आराम से दरवाजा खोला,सामने जो दृश्य था वो देखकर मेरे पैरों के नीचे से जमीन ही खिसक गई..
सपना का शर्ट पूरी तरह से खुला हुआ था,वो ऊपर से बिल्कुल ही नंगी थी ,वही नीचे उसने स्कर्ट पहन रखा था ,लेकिन रोहन का हाथ उस स्कर्ट के अंदर था,सपना की पेंटी जमीन में पड़ी थी,रोहन का पेंट भी उसके अंडरवियर के साथ नीचे खिसका हुआ था ,सपना सिसकियां ले रही थी वही रोहन पागलों की तरह उसके स्कर्ट में अपने हाथ को चला रहा था और उसका चहरा सपना के वक्षो पर टिका हुआ था,सपना की आंखे मुझपर गई लेकिन उसके चहरे पर कोई भी डर नही था,बल्कि वो मुस्कुरा उठी,उसने रोहन के सर को और भी जोरो से अपने छाती से रगड़ा,
“ओह रोहन मेरी जान “और सपना की मुस्कान और गहरी हो गई
“रोहन…”मैं अपने पूरे ताकत से चीखी ,जैसे रोहन को होश आया हो ,वो मुड़ा और अवाक मुझे देखने लगा,मेरे आंखों में कब आंसू की बूंदे आ गई मुझे नही पता ,ये भी नई पता की कब मेरा सारा नशा काफूर हो गया था,मैं रोते हुए जमीन में बैठ गई थी और रोहन ने जल्दी से अपने पेंट को ऊपर चढ़ा लिया ,वो भागता हुआ मेरे पास आया मुझे समझने की कोशिश करने लगा लेकिन……..
मुझे कुछ सुध ही नही थी की वो बोल क्या रहा है ,मैं बस रोये जा रही थी ,रोये जा रही थी…….
जब मुझे थोड़ा होश आया तो मैं उठी और बिना कुछ बोले ही बाहर चली गई ,मुझे नही पता था की सपना कहा गई या रोहन कहा है ,मैं फॉर्महाउस से बाहर जाने लगी ,रोहन मेरे सामने आकर खड़ा हो गया था,उसकी आवाजे मेरे कानो तक तो जा रही थी लेकिन मेरा दिमाग कुछ सुनने को तैयार ही नही था,मैंने पास रखी एक शराब की बोतल उठाई और रोहन को एक तरफ धकेल कर आगे जाने लगी ,मैं फॉर्महाउस के बाहर थी ,रोहन शायद अब भी मेरे पीछे था या नही था मुझे नही पता,लेकिन मैं उस बोतल से शराब पी रही थी ,मेरे सामने सारी दुनिया घूम रही थी ,और अचानक...सब कुछ जैसे खत्म हो गया…
मेरे सर में बेहद ही तेज दर्द उठा,मैं जागी तो हैरान हो गई ,सूरज की तेज धूप मेरे चहरे पर पड़ रही थी,मेरा चहरा पसीने से भीगा हुआ था,मैं जब थोड़ा उठी तो मैं और भी जोरो से चौकी,ये मेरा कमरा तो नही था,मैं हड़बड़ाकर उठी,रात में आखिर हुआ क्या और मैं कहा हु,..
मैंने खुद को देखा,मैंने वही कपड़े पहन रखे थे जो मैंने पार्टी में पहने थे,मैं बिस्तर से उठ कर उस कमरे को देखने लगी,छोटा सा कमरा था और खुली हुई खिड़की से तेज धूप अंदर आ रही थी,मैं जैसे ही खड़े होने को हुई फिर से मेरे सर में तेज दर्द हुआ,लगा जैसे मैंने रात ज्यादा ही पी ली थी,मैं मुश्किल से दरवाजे तक पहुची,उस कमरे से लगा एक हाल था जिसमे सभी चीजे सलीके से जमी हुई थी,हाल से लगा हुआ ही दरवाजा था जो शायद घर से बाहर निकलने का रास्ता था,मैं उस दरवाजे तक पहुँची,देखा बाहर छोटा सा गार्डन है,और एक शख्स खड़ा हुआ पौधों को पानी दे रहा है …
“एक्सक्यूज़ मि ..मैं ..मैं यंहा कैसे आयी..”
वो शख्स पलटा उसके होठो में एक मुस्कान थी ,
“ओह तो उठ गई तुम “
“सर आप ..”
मैं उसे पहचानती थी ,वो मेरे कालेज के केमेस्ट्री के प्रोफेसर थे,डॉ गौरव….
“मैं यंहा ..कैसे “
मैं अचरज से भरी हुई थी ,मैं कुछ बोल पाती उससे पहले ही सर बोल उठे..
“बताता हु ,पहले शांत हो जाओ ,काफी पियोगी..”
मैं सहमति में सर हिलाया
वो अंदर गए और किचन से दो काफी बना लाये,
“कल रात मैं कुछ काम से गया था ,जब वापस आ रहा था देखा की तुम शराब के नशें में धुत्त सड़क पर चल रही हो ,मैंने तुम्हे पहचान लिया,तुम्हारे साथ वो तुम्हारा दोस्त भी था,मुझे लगा की वो तुम्हे जबरदस्ती शराब पिलाकर तुम्हे छेद रहा है ,क्योंकि तुम उसे गालियां दे रही थी और अपने से दूर रहने के लिए कह रही थी ,इसलिए तुम्हे अपने साथ ले आया,वो लड़का भी मुझे पहचानता था,तो उसे अपना पता दे दिया ये बोलकर ही सुबह जब होश में रहे तो आकर तुम्हे ले जाए ,”
है भगवान ये मैंने क्या कर दिया,अब ये बात सभी जगह फैल जाएगी की मैंने रात में क्या तमाशा किया था,शायद पार्टी में भी कोई तमाशा किया होगा..
“सॉरी सर वो ..और थैंक्स फ़ॉर ..”
“कोई बात नही तुम्हारा फोन और पर्स वही बिस्तर में रखे हुए है तुम किसी को काल करके बुला लो ,या मैं तुम्हे तुम्हारे घर छोड़ दु ..?”
सर ने बड़े ही सभ्य तरीके से कहा ..
“नही सर मैं बुला लेती हु .”
“ओके ऐसे क्या नाम है तुम्हारा “
“जी..पूर्वी ..”
मैं सर से नजर भी नही मिला पा रही थी,थोड़ी देर बाद रोहन अपनी गाड़ी लेकर सर के घर पहुच गया..
“तुम ठीक तो हो ..”उसका पहला सवाल था,जिसका जवाब देना मैंने मुनाशिब नही समझा मैंने अपना पर्स उठाया और उसकी गाड़ी की ओर बढ़ गई …
“थैक्स सर फ़ॉर हेल्प ..
”रोहन से सर का धन्यवाद दिया और वो भागता हुआ मेरे पीछे आया …
गाड़ी तेजी से मेरे घर की तरफ चल रही थी ,रोहन भी कुछ बोलने की हिम्मत नही कर रहा था ना ही मैं उससे बात करने के मूड में थी ,घर पहुचकर मैं सीधे ही अपने कमरे में घुस गई,साथ ही रोहन भी आ गया लेकिन फिर भी उसने मुझसे कुछ नही कहा,मैं अपना पर्स बिस्तर में फेंककर सीधे बाथरूम में घुस गई…
लगभग एक घंटे बाद मैं निकली,मेरे जिस्म में बस एक टॉवेल था,रोहन अब भी मेरे बिस्तर में बैठा हुआ था..
उसने मुझे देखा,उसकी आंखों में शर्म थी ..
“मैं कैसे तुमसे माफी मांगू ,”
वो फिर से गिड़गिड़ाया
“सपना को काल करो “
“क्या??”मेरी बात से वो चौक गया था
“देखो पूर्वी ये बस एक गलती थी ,मैं नशे में था यार बहक गया था..”
“मैंने बोला सपना को काल करो और यंहा बुलाओ “
उसने एक पल मुझे देखा और फिर अपना मोबाइल उठाकर सपना को मेरे घर बुला लिया..”
मैं उसे थोड़ी देर तक देखती रही ,और फिर बिस्तर में जाकर लेट गई,अभी भी मैंने वही टॉवेल पहना था,रोहन मेरे बाजू में ही बैठा था लेकिन उसने मेरे जिस्म को देखने की कोई जहमत नही उठाई..
“मैं बहुत थक गई हु रोहन मेरे पैर दर्द दे रहे है ,जरा मालिस कर दो “
मैंने आंखों को बंद करते हुए कहा ,
रोहन फिर से खामोश निगाहों से मुझे देखने लगा लेकिन थोड़ी ही देर बाद मरे एड़ी को पकड़कर मालिस करने लगा,
“ह्म्म्म थोड़ा ऊपर जांघो के पास “
मैंने थोड़ी देर बाद ही उससे कहा ,रोहन अब मेरे जांघो को सहला रहा था,मैंने अपने टॉवेल की गठान खोल दी ,लेकिन उन्हें अपने वक्षो से अलग नही किया ,
“थोड़ा और ऊपर रोहन “
अब रोहन के हाथ मेरे जांघो के सिरे तक पहुच रहे थे,अब उसकी आंखों में वो लालच आने लगा था जो किसी मर्द की आंखों में एक जवान खूबसूरत लड़की के जिस्म को देखने पर आता है,वो टॉवेल की दरार से मेरे जांघो के बीच झांकने की कोशिश कर रहा था ,उसकी इस हरकत से मैं मुस्कुराने लगी,ये पहली बार था जब कोई मर्द मेरे अंतः अंगों के इतने करीब तथा लेकिन सच बताऊँ तो मेरे अंदर कोई भी उत्तेजना नही उठ रही थी बल्कि बस एक सुकून था,रोहन की उंगलियां मेरे योनि को छूने लगी थी,मैंने दरवाजे में एक आहट सुनी और अपने टॉवेल को निकाल कर फेक दिया,मेरा जिस्म अब पूरी तरह से नंगा बिस्तर में पड़ा था,रोहन के आंखे जैसे मेरे जिस्म में जम ही गई लेकिन तभी दरवाजा खुला ,सपना हमारे सामने थी ,उसने जो दृश्य देखा उसका मुह भी खुला का खुला रह गया,मैंने उसे बड़े ही प्यार से देखा,
“ओह सपना तुम आ गई ,वंहा बैठो,मैंने सामने पड़े सोफे की तरफ इशारा किया “
रोहन अवाक सा कभी मुझे तो कभी सपना को देख रहा था,उसकी आंखे शर्मिंदगी से झुक रही थी ,वही सपना भी अवाक थी,उसे मेरे ऐसे किसी एक्शन का कोई भी अंदाज ही नही था..
“रोहन बेबी,यंहा बड़ी गर्मी हो रही है थोड़ा चाट कर ठंडा कर दो ना”
मैंने अपनी उंगली से अपनी योनि की ओर इशारा किया..रोहन की आंखे फैल गई ,जैसे बोल रही हो की तुम मुझसे क्या करवाना चाहती हो ,उसके पेंट से उसके लिंग का तनाव मुझे साफ दिखाई दे रहा था,लेकिन फिर भी वो अजीब स्तिथि में फंसा हुआ था,उसने एक बार सपना की ओर देखा..
“अरे उधर क्या देख रहे हो ,इसे चाटना है ,सपना तुम कुछ पियोगी..”
सपना अवाक थी,उसकी आंखे लाल हो रही थी,थोड़ा पानी आ रहा था लेकिन अभी और आना बाकी था,मैंने रोहन को आंखों से ही निर्देश दिया की मैं मजाक के मूड में नही हु शुरू हो जा,और रोहन झुका,उसकी सांस इतनी तेज थी की मेरे योनि से उसकी गर्म सांस टकरा रही थी,वो थोड़ी देर तक मेरे योनि के पास ही रहा ,जैसे उस काम को करने की हिम्मत जुटा रहा है और एक गहरी सांस लेकर उसने जीभ से मरे योनि को चाट ही लिया ..
“आह गुड बेबी,लाइक अ डॉग ,यु आर गुड ..हम्म्म्म “
मैंने जानबूझकर अपने होठो को अपने दांतो से काटा ,और सिसकियां लेने लगी,मेरी आंखे सपना पर जा टिकी,मेरे होठो में कमीनी मुस्कान खिल गई और उसके आंखों का लालपन बढ़ने लगा था वही उसके आंखों का पानी भी,लेकिन वो संयम से बैठी हुई अब भी ये सब बर्दास्त कर रही थी,रोहन भी अब जोश में आकर चाटने लगा था,मेरी योनि पनिया गई,किसी मर्द का इस तरह का पहला स्पर्श था और मैंने ज्यादा समय नही लिया मैं तेजी से झड़ी…
“ओह रोहन यु आर माय डॉग बेबी चूस इसे चूस सारा पानी पी जा,तू मेरा पालतू कुत्ता है ..ओह रोहन...”
मैंने अपने टांगो से रोहन के सर को अपने योनि में कस लिया ,रोहन छटपटा रहा था,लेकिन मैं तब तक उसे ऐसे ही दबाए रखी जब तक की मैं पूरी तरह से नही झर गई ,रोहन छूटते ही हांफने लगा,मैं हंसती हुई उठी और उसके सर को सहलाया..
“ओ माय बेबी ,चलो अब जल्दी से कपड़े उतारो “
रोहन अब भी मुझे आश्चर्य से देख रहा था,मैंने इतने दिनों में कभी उसे अपने जिस्म को ठीक से छूने भी नही दिया था,वो उठा और जल्दी जल्दी खुद को नंगा कर लिया,सच में उसका लिंग बेहद ही मोटा और तना हुआ था,ऐसा लग रहा था जैसे उसकी नशे अब फटने ही वाली हो ,मैं फिर से लेट गई और इशारे से उसे अपने पास बुलाया,रोहन मेरे ऊपर जैसे कूद ही गया,मैं हंसने लगी ,मैंने उसके लिंग को अपने हाथो में थामा वो गर्म था,रोहन मेरे ऊपर झुका हुआ था ,तभी सपना उठी और रोते हुए बाहर जाने लगी..मैंने रोहन को जोरो से धक्का दिया,वो भी उठकर खड़ा हो गया था,
“रुको कहा जा रही हो ,तुम्हे तो खेलना पसंद है ना..तट फिर पूरा खेल देख कर ही जाओ “
मेरी बात में एक व्यंग था..
‘तुम ..
तुम आखिर साबित क्या करना चाहती हो “
मैंने उसे एक कमीनी मुस्कान के साथ देखा,
“यही की एक मर्द को बहकाने के लिए सबसे आसान रास्ता औरत का जिस्म होता है,तुमने कपड़े उतारे तुम्हारी चाटने लगे,मैंने उतारी तो मेरी ,कुत्तों की जात ऐसी ही होती है “
कुत्तों की जात बोलते समय मेरी निगाह सीधे रोहन के निगाहों से मिली,उसके आंखों से एक ही पल में सारी उत्तेजना गायब हो गई,उसकी आंखे फिर से शर्म से भरकर नीची हो गई थी...सपना ने एक बार मुझे देखा एक बार रोहन को और तेजी से वंहा से निकल गई ..
मैं फिर से धड़ाम से बिस्तर में गिरी ..रोहन सर झुकाए बिस्तर के किनारे खड़ा हुआ था..
“अब देख क्या रहे हो कपड़े पहनो और निकल जाओ यंहा से ,मेरे जिस्म का मालिक वो होगा जो तुम्हारी तरह कुत्ता ना हो, की कही भी मांस देखा तो उसे चाटने लगे ..”
मेरी बात सुनकर रोहन ने एक पल की देर नही लगाई ,वो तेजी से कपड़े पहन कर कमरे से निकला,मैंने अपनी आंखे बंद ली ,अब जाकर मुझे सुकून मिला था,की अचानक मेरे आंखों में एक चहरा घुमा ………..
गौरव सर का चहरा,और ना चाहते हुए भी मेरे होठो में एक शर्म भरी मुस्कान तैर गई...
अध्याय 10
यूनिवर्सिटी की लायब्रेरी में मैं सबसे दूर एक पुस्तक लेकर बैठी थी,कौन सी बुक थी वो तो मुझे भी नही पता था,लेकिन यंहा वो शांति थी जो मुझे चाहिए थी,मैं सपना और रोहन दोनों को ही अपने सामने नही देखना चाहती थी,इसलिए एक ऐसी जगह चुनी जंहा वो कभी नही आते हो,यूनिवर्सिटी की लायब्रेरी…….
“वाओ तुम्हे केमेस्ट्री में इतना इंटरेस्ट है मुझे पता नही था”
एक आवाज मेरे पीछे से आयी ,वो गौरव सर थे,मैं उन्हें अचानक से देख कर खड़ी होने लगी ..
“अरे बैठो बैठो..”
वो मेरे सामने वाली चेयर मे बैठ गए और मेरे सामने रखी पुस्तक को उठा लिया ..
“ह्म्म्म तो तुम ये पड़ रही हो,ऐसे बीएससी के छात्रों को ये पड़ते मैंने बहुत कम ही देखा है ,ये तो पीएचडी वाले लोग ही पड़ते है,कुछ समझ भी आ रहा है या हु ही ..”
मेरा ध्यान उस पुस्तक पर गया जिसे मैं पिछले आधे घंटे से लिए बैठी थी लेकिन उसका नाम भी मुझे पता नही था…
मुझे कोई जवाब ही नही सुझा,क्योंकि जब दिमाग में हजारों सवाल चल रहे हो तो आदमी खोया खोया सा ही रहता है ,शायद मेरी मनोस्थिति को गौरव सर समझ चुके थे..
“क्या हुआ कोई प्रॉब्लम है क्या “
उन्होंने धीरे से कहा ,और मेरे आंखों से आंसू छलक गए,मैं भरी पड़ी थी ,मुझे एक कंधा चाहिए था जिसपर मैं सर रखकर रो सकू लेकिन अपना दुखड़ा मैं किसे सुनाती...मेरे सबसे अच्छे दोस्त ही तो मुझसे दूर थे ..
“अरे क्या हुआ तुम्हे “उन्हेंने एक बार इधर उधर देखा फिर अचानक से खड़े होकर मेरा हाथ पकड़कर उसे उठा लिए और एक ऐसे कोने में ले गए जंहा कोई भी नही था,मुझे आज ही पता चला की हमारी लाइब्रेरी इतनी बड़ी है की प्रेमी जोड़े अपने प्रेम लीला भी कर ले तो कोई पकड़ने वाला नही है ..
उन्होंने एक शांत जगह पर मुझे बिठाया और मेरे सामने बैठ गए ,
“अब बताओ क्या प्रॉब्लम है “
अब तो पता नही मुझे क्या हुआ मैं फुट फुट कर रोई,और मेरे मुह से सच ऐसे निकला जैसे ऑटोमेटिक मशीन गन वाली गोली हो एक बार चला दो तो पूरी गोली खत्म करके ही बंद होती है ..
मैंने उन्हें हर चीज बता दी की कैसे रोहन ने मुझे प्रपोज किया,फिर कैसे धोखा दिया,और फिर कैसे मैं उनके पास पहुची और साथ साथ ही कैसे मैंने रोहन और सपना से बदला लिया, एक एक सच मैं कह गई जैसे वो मेरे पुराने दोस्त हो,ऐसे सच भी जो कोई लड़की किसी अनजान तो क्या ,जानपहचान वाले इंसान को भी ना बताए.
लेकिन पता नही सर में वो क्या आकर्षण था,या शायद मैं बहुत ही ज्यादा दुखी थी और मुझे एक ऐसे इंसान की जरूरत थी जिससे मैं अपने सारे दर्द शेयर कर सकू…
वो भी चुपचाप मेरी बातों को सुनते रहे,और अंत में मुझे दिलासा देने लगे,वो बहुत ही सुलझे हुए इंसान लगे जो दुसरो की तकलीफों को समझता है ,और रात वाली घटना से ये भी समझ आ गया था की वो जरूरतमंदों की मदद को भी तैयार रहते है,उनकी आंखों में मैंने अभी तक कोई ऐसे भाव नही देखे जो मुझे उनपर किसी भी तरह का शक करने को मजबूर करे,वो अभी भी मुझसे ऐसे ही पेश आ रहे थे जैसा एक टीचर अपने स्टूडेंट से आता है,बिल्कुल ही सभ्य तरीका था उनका,उन्होंने मुझे समझाया थोड़ा पानी पिलाया ,और इधर उधर की बातों से मेरे मन को शान्त किया..
उस दिन के बाद अक्सर हमारी मुलाकातें होती रही ,अधिकतर लाइब्रेरी में ही ,जंहा पहले मैं बिल्कुल ही नही आती थी लेकिन अब सिर्फ उनसे मिलने ही आने लगी,वो मुझे सब्जेक्ट से रिलेटेड कई बाते बताया करते जिनमे मुझे बिल्कुल भी इंटरेस्ट नही था,मुझे धीरे धीरे पता चला की वो यूनिवर्सिटी के गोल्ड मेडलिस्ट है,इतने कम उम्र में ही उन्होंने कई शोध पत्र रिलीज करवा चुके है,और आने वाले दिन में इस यूनिवर्सिटी के केमेस्ट्री डिपार्टमेंट का भविष्य कहे जाते है,कई होनहार विद्यार्थियों के लिए वो प्रेरणा के स्रोत थे लेकिन मेरे लिए …???
मुझे पढ़ाई में कभी भी कोई भी इंटरेस्ट नही था और केमेस्टि में तो तो बिल्कुल भी नही ,मुझे ग्रेजुएशन के बाद MBA करना था और पाप का बिजिनेस सम्हालना था,मैं अभी से उनके बिजिनेस में उनका हाथ बटाने लगी थी ,असल में हम तीनो दोस्तो का एक ही प्लान था की अपने बाप के बिजिनेस को और बड़ा करना,यंहा तो हम बस डिग्री लेने आये थे ,लेकिन सर से मिलने का एक ही तरीका था और वो था लाइब्रेरी में उनके साथ वो सब बाते सुनना ,वो ही मैं कर रही थी,वो कोई पुस्तक खोले या किसी रिसर्च पेपर पर चर्चा करते थे जो मेरे दिमाग के बिल्कुल ही ऊपर से जाता था,और उनके कुछ सलेक्टेड विद्यार्थी उनकी बात पर बहस भी करते ,उनसे सवाल पूछते वो जवाब देते,सब चलता रहता ,मैं बस उनके साथ बैठकर उनके चहरे को निहारती रहती,पता नही उस चहरे में क्या था..
एक सामान्य सा चहरा तो था ,एक सामान्य से डीलडौल का व्यक्ति,मैं तो उन्हें एक साल से देख रही थी लेकिन वो इतने आकर्षक कभी भी नही लगे थे,अगर पहले मुझे कोई कहता की ये व्यक्ति आकर्षक है तो शायद मैं हंस पड़ती,लेकिन अब मुझे ये क्या हो रहा था,उनकी मुस्कान,उनका वो बोलने का शालीन अंदाज,उनकी वो सादगी,उनका वो अपने विषय में गहरा ज्ञान ये सभी वो चीजे थी जिससे पहले मेरा कोई भी वास्ता नही था लेकिन अब वही चीजे मुझे आकर्षित करती थी,मैं उन्हें देखते रहती ,फिर खुद ही कुछ सोच कर शर्मा जाती,और खुद ही मुस्कुराती ,क्या हो रहा था मुझे??
लेकिन मेरी इन हरकतों की भनक उन्हें भी लगने लगी थी,एक दिन सब लोगो के जाने के बाद उन्होंने मुझे रोक लिया ..
“पूर्वी यु आर आ गुड गर्ल ,और तुम रोज लाइब्रेरी में आती भी हो ,सब्जेक्ट की हर बातों को इतने ध्यान से सुनती हो…”
वो थोड़े देर चुप हो गए और मुझे निहारने लगे,
“लेकिन फिर भी मुझे नही लगता की तुम्हारा ध्यान कभी पढ़ाई में रहता है ,तुम तो कही और ही खोई हुई लगती हो “
उनकी बात से मैं बुरी तरह से झेंप गई ,मुझे समझ नही आ रहा था की मैं क्या करू,ऐसा लगा जैसे मेरी चोरी किसी ने पकड़ ली हो..
मैं कुछ भी नही बोल पाई लेकिन वो बोल पड़े..
“देखो पूर्वी मैं समझता हु की तुम्हारे साथ क्या हो रहा है लेकिन तुम्हे भी समझने की जरूरत है की ये सब तुम्हारे उम्र के कारण हो रहा है ,तुम्हारी उम्र ही ऐसी है की किसी के प्रति आकर्षण जाग जाए,अभी तुम्हे सही गलत की ज्यादा समझ नही है …”
मैं दंग थी ,ये आदमी मुझे सीधे सीधे रिजेक्ट कर रहा है ,मैं आज तक कभी रिजेक्ट नही हुई थी ,असल में मैंने कई लोगो को रिजेक्ट किया था..
“लेकिन सर मैं ..”
“कोई बात नही ,मैं जानता हु की तुम अभी दुखी हो,मेरा मानना है की तुम्हे फिर से अपने दोस्त के साथ रहना चाहिए,पढ़ाई में तुम्हारा इंटरेस्ट नही है ,तुम यंहा अपना समय ही बर्बाद कर रही हो ,अपने दोस्तो को माफ करो और फिर से उनके साथ दोस्तो की ही तरह रहो,मुझे लगता है की तुम्हे दर्द देकर वो भी खुश नही है,मैं रोहन और उस लड़की क्या नाम था हा सपना को आजकल बहुत ही अपसेट और दुखी देखता हु ,पहले तुम लोग कितने खुश दिखाई देते थे….”
उनकी बात से मेरा ध्यान एक बार फिर से रोहन और सपना की ओर गया,कई दिन हो गए थे उनलोगों से बात किये ,मैं तो उनका चहरा भी देखना पसंद नही कर रही थी ..
“सर मुझे लगता है की मैं आपसे प्यार करने लगी हु “
मैंने बहुत ही सीरियस हो कर कहा ,लेकिन सर हँसे जोरो से हँसे ..
“होता है होता है,जब मैं तुम्हारी उम्र में था तो मुझे भी अपनी टीचर से प्यार हो गया था,मैंने भी उन्हें प्रपोज कर दिया था,तुम उन्हें जानती होगी ,हमारे विभाग की HOD ...मेडम ने मुझे यही चीज समझाई जो मैं तुम्हे समझा रहा हु ,और प्यार तो आज भी उनके लिए है लेकिन अब उस प्यार का स्वरूप बदल गया है,अब मैं मेडम की बेहद ही इज्जत करता हु,समझ लो की अब वो मेरे लिए मेरी माँ की तरह है ,और उन्होंने भी हमेशा ही मुझे अपने बेटे की तरह प्यार दिया है ..”
मैं अजीब से पशोपेश में पड़ गई थी ,इसका मतलब है की गौरव सर मुझे अपनी बेटी मानते है???
“लेकिन सर ..”
“पूर्वी ...घर जाओ और मेरी बात को समझो ,अपने दोस्तो से मिलो और कुछ दिन में ही तुम्हे समझ आ जाएगा की ये महज एक आकर्षण है ना की प्यार ..”
वो वंहा से निकल गए मुझे फिर से सोचता हुआ छोड़कर ……..
अध्याय 11
सर की बात सुनकर मैंने एक चीज का फैसला किया,की मैं पता करूंगी क्या वो सही कह रहे है,क्या सच में ये महज एक आकर्षण ही है ,या मैं उनसे प्यार करने लगी हु..
मैं लाइब्रेरी से बाहर आकर कैंटीन की तरफ बड़ी एक ग्राउंड में लड़के क्रिकेट खेल रहे थे और साथ ही लडकिया उन्हें चेयर कर रही थी ,वही मैंने रोहन को देखा,वो अपने लफंगे दोस्तो के सब हाथ में बियर की बोतल लिए हुए बाइक में बैठा हुआ था,और उसके चमचे आस पास खड़े थे,सभी मैच देखकर गली गलौच कर रहे थे,उसे देख कर फिर से मेरे होठो में मुस्कान आई,शायद सर ने सच ही कहा था,लाइब्रेरी मेरे काम की जगह कभी नही थी…
मैने पीछे से रोहन के कंधे पर हाथ मारा..
“कौन है बे..
”
वो पलटा और मुझे देख कर हड़बड़ा गया,वो बाइक से उठकर खड़ा हो गया ,और उसकी इस हड़बड़ी को देखकर मुझे हँसी आ गई ..वो बस आंखे फाडे मुझे देख रहा था,मैंने उसके हाथ से वो बियर की बोतल छीन ली और अपने होठो से लगा लिया,वाह ठंडी ठंडी बियर ,कितने दिनों के बाद पी रही थी …
“सपना कहा है ??”
मैंने दो घुट पीने के बाद बोला
“क्या पता कैंटीन में होगी शायद “
“हम्म चल तुमसे बात करनी है “
वो थोड़ा डरा हुआ लगा..मुझे हंसी आ गई
“तुझे खा नही जाऊंगी ,कुछ जरूरी बात है इन लफंगों के सामने नही कर सकती “
मैंने उसके दोस्तो को देखा ,वो सभी मुझे अजीब निगाहों से देखने लगे,लेकिन उन्हें भी हमारी दोस्ती का पता था,इसलिए उनमें से कई मेरी बात सुनकर मुस्कुराने लगे ..
“भाई जंहा भी जाओ बियर छोड़कर जाना”
उनमें से एक ने मुस्कुराते हुए कहा ,मैंने देखा नीचे बियर की पूरी पेटी पड़ी थी,मैंने वंहा से दो बियर उठा लिए
“लो सालों पियो फोकट की बियर “
मैंने उसके दोस्तो को लताड़ा वो भी हंस पड़े ,और रोहन के साथ मैं बाइक में बैठकर एक गार्डन में आ गई ,हम दोनों के हाथो में बियर थी,और हम एक पेड़ के नीचे सुकून से बैठे हुए थे…
“इन सब लफंगों के साथ घूमता है इसलिए तेरे दिमाग में भूसा भर रहा है..”
मेरी बात सुनकर रोहन पहली बार थोड़ा हँसा ..
“वो सभी दिल के बहुत अच्छे है यार ,बस बेचारे गरीब है तो मैं उनपर थोड़ा खर्च कर देता हु,बाप ने इतना पैसा कमा के दिया है तो इनका भी थोड़ा भला हो जाए “
“हम्म्म्म जानती हु ...रोहन हमारे बीच जो भी हुआ उससे सबसे ज्यादा इफेक्ट हमारी दोस्ती को ही पड़ा..”
इस बार रोहन का चहरा उतरा हुआ था
“मैंने तुझे प्रपोज करने में शायद बहुत जल्दी कर दी ,मुझे समझ लेना था की ये प्यार था या महज आकर्षण ..”
रोहन गंभीर था और उसने जो कहा था वो मुझे सर के बात की याद दिला रहा था,शायद मैंने भी सर को प्रपोज करने में जल्दबाजी कर दी ,रोहन के मुह से इतने मैच्योरिटी भरी बात सुनकर मुझे अच्छा लगा…
“यार रोहन सॉरी मुझे तुम्हे ऐसे जलील नही करना था..”
मैंने रोहन की ओर देखा वो भी मुझे ही देख रहा था,उसकी आंखों में मेरे लिए वही प्यार दिखा जो मैं बचपन से देखते आ रही थी,
“तूने मुझे जलील किया ,गालियां दी ,मुझे थोड़ा भी दुख नही लगा,लेकिन इन सबमे हमारी दोस्ती टूट गई ,और मेरे तो हमेशा से दो ही दोस्त रहे है, “
रोहन ने सर नीचे कर लिया उसके आंखों में आंसू थे ,मैंने खुद को उसके पास खिसकाया और उसके चहरे को अपने सीने से लगा लिया,मैं उसके बालो को सहलाने लगी वो अब भी सिसक रहा था,सच में हम तीनो बचपन से साथ थे कितने बार लड़ाई किये लेकिन फिर भी बिना बोले इतने दिनों तक कभी नही रहे ..
“तू क्या दूर हुई सपना भी मुझसे दूर हो गई ,ऐसे नही रहा जाता यार ,तू मुझे जलील कर या मार पीट कुछ भी कर लेकिन कम से कम बात तो किया कर ,गाली दे दिया कर लेकिन बात तो कर .तू तो मुझसे कट ही गई,तुझे सपना से बात नही करनी है मत कर लेकिन मुझसे तो कर …”
अब रोहन सच में रोने लगा था,और अचानक ही लगा जैसे मेरा पुराना रोहन मुझे वापस मिल गया हो,मुझे उसपर बेहद ही प्यार आया और मैंने उसके सर को जोर से चूमा ,वो मुझे और भी जोर से जकड़ लिया ….
बहुत ही देर तक हम ऐसे ही बैठे रहे ...अब रोहन भी नार्मल हो गया था लेकिन अब भी मुझसे लिपटा हुआ था..
“रोहन तुझे एक बात बतानी है ..”
“ह्म्म्म बोल ना “
“वो सर याद है गौरव सर ..”
“हा उन्हें कैसे भूल सकता हु “
“आई थिंक आई लव हिम यार “
रोहन अचानक से मुझसे अलग हुआ और मेरे चहरे को देखने लगा ,उसके चहरे में आश्चर्य के भाव खेल रहे थे ,वो आंखे फाडे मुझे देख रहा था और मैं मंद मंद मुस्कुरा रही थी,असल में थोड़ा शर्मा रही थी ..
“तू पागल हो गई है क्या ...वो ..वो कम से कम तुझसे 10 साल बड़ा होगा “
“तो क्या हुआ ..”
“तू सच में पागल हो गई है ,उसका घर तो देखी है ना ,जितना बड़ा उसका घर है उतना बड़ा तो तेरा बेडरुम है,और तूने उसका चहरा देखा है .खुद को देख और उसे देख यार कहा से मेच खाता है ..”
वो अब भी आश्चर्य में डूबा हुआ था
“यार प्यार ये सब नही देखता “
“तेरा दिमाग सठिया गया है ,लगता है हमारे ब्रेकअप के कारण तू सदमे में चली गई है ,तेरे दिमाग में भी असर हुआ है,तू आज रात चल मेरे साथ पार्टी करते है शायद दारू पी के तेरा दिमाग ठीक हो जाए ,या फिर किसी साइकोलोजिस्ट के पास ले जाना पड़ेगा “
वो झल्ला कर बोल रहा था और उसकी बात सुनकर मैं हँस रही थी..
“मेरा दिमाग बिल्कुल ठीक है समझ गया “मैंने उसके बालो में हाथ फेरा
“तो ऐसे बहकी बहकी बात क्यो कर रही है,सपना सुनेगी तो हँस हँस कर पागल हो जाएगी “
“उसके हंसने से क्या फर्क पड़ता है,मेरा फैसला नही बदलेगा “
रोहन अब सिरियस हो गया था
“देख रोहन मैंने उन्हें प्रपोज भी किया लेकिन उन्होंने मना कर दिया “
अब तो रोहन का चहरा और भी देखने के लायक था ..
“उसने तुझे मना कर दिया “
“हा यार ..”मेरा चहरा उतर गया लेकिन रोहन जोरो से हँसने लगा था ..मैं समझ सकती थी को क्यो हँस रहा था ,वो पेट पकड़े हँस रहा था,मैं गुस्से में उसे मार रही थी लेकिन वो साला चुप ही नही हो रहा था..
“अगर तुझे इतनी हंसी आ रही है तो मैं जा रही हु ..”
“अरे रुक तो ..
”उसने मेरा हाथ पकड़कर मुझे जाने से रोक लिया
“चल ठीक है बता उसने क्या कहा और मैं तेरी क्या मदद कर सकती हु “
मैंने उसे देखा ,मैं अब खुश थी की मेरा पुराना दोस्त आखिर अब मेरे साथ है …
मैंने उसे बताना शुरू किया उस दिन से जब मैं लाइब्रेरी में उनसे मिली थी…
“ह्म्म्म सही तो कहा उसने ,तुझे भी क्या सच में पता है की प्यार है या महज एक आकर्षण ..”
“यही तो पता करना है ..”
“ठीक है कर लेना लेकिन आज तो पार्टी होगी ,मैं सपना को काल करके बुला लेता हु ,फिर से हम तीनो यार ,विथ झगड़ा और प्यार ,इन बियर बार ..”
रोहन बेहद खुश था और मैं भी …
“लेकिन अभी सपना को इसके बारे में कुछ बताना मत “मैंने जाते जाते रोहन से कहा ,उसने भी सहमति में सर हिलाया
*********
पार्टी पूरे शबाब में चल रही थी डीजे बज रहा था ,लोग नाच रहे थे ,सभी शराब के नशे में मदहोश थे मैं और रोहन दोनों ही पूरे मस्ती में नाच रहे थे लेकिन ,सपना कुछ बुझी बुझी सी दिख रही थी ,आखिर रोहन ने उसका हाथ पकड़ कर खिंचा ..
“कम आन यार चलो ना डांस करते है “
“मूड नही है यार तुम लोग जाओ “
“क्या हुआ ??”
“बस चलो कही शांत जगह पर चलते है “
सपना की बात सुनकर रोहन मुझे देखने लगा ,मैंने ही सहमति में सर हिला दिया …
हम होटल के गार्डन में चले गए थे,सपना बुझी बुझी दिख रही थी ..
“अब तो बता तेरा मूड क्यो उतरा हुआ है ,आज इतने दिनों बाद हम तीनो मिले है और तू अब भी मुह फुलाये बैठी है “
रोहन ने सपना के गालों को खिंच लिया
“आउच “
हम दोनों हँसे..
“यार सपना जो हुआ उसको लेकर अगर दुखी है तो मुझे माफ कर दे ,और अगर तू चाहे तो अब रोहन के साथ कुछ भी कर सकती है ,हमारा ब्रेकअप हो चुका है और हम अब पहले के तरह ही फ्रेंड है ..”
सपना ने मुझे देखा और एक हल्की मुस्कान दी ,
“बात वो नही है ,हमारे बीच तो ये सब चलता ही रहता है लेकिन आज कुछ अजीब हुआ मेरे साथ ...वही सोचकर उदास हु “
उसकी बात सुनकर हम दोनों ही चौके
“आखिर बात क्या है “रोहन बोल उठा
“आज किसी ने पहली बार मेरे हुस्न की ऐसी तौहीन की है,पहली बार किसी ने मेरे प्रपोसल को ठुकरा दिया “
सपना की बात सुनकर मैं और रोहन एक दूसरे के चहरे को घूरने लगे
“कौन ..??”
आखिर मैंने पूछा
“शायद तुम लोग हँसोगे,इसलिए नही बताना चाहती “
सपना ने सीधे ही कहा
“अरे बता दे दोस्त है तेरे थोड़ा हँस भी लेंगे तो क्या हो गया “
“ह्म्म्म अरे यार वही हमारे कालेज का प्रोफेसर डॉ गौरव,साला कहता है की ये प्यार नही बल्कि आकर्षण है ,माय सीट आकर्षण,बट यार सच कहु तो मुझे लगता है आई लव हिम ..”
उसकी बात सुनकर जैसे मेरे दिलो दिमाग ने काम ही करना बंद कर दिया था,मैं और रोहन एक दूसरे को आंखे फाडे देख रहे थे,पता नही की भगवान ने हमारी किस्मत कैसे लिखी थी ,जंहा मैं जाती थी सपना भी वही चली आती थी,मैं अपना सर पकड़कर बैठ गई ..
“इसे क्या हुआ “सपना ने मुझे देखकर कहा
अचानक ही रोहन कुछ सोचकर हँसने लगा
“तुझे क्या हुआ तू क्यो हँस रहा है “सपना और भी आश्चर्य में पड़ गई ,रोहन कुछ बोलने के हालत में नही था वो हँसे जा रहा था,वही मैं भी कुछ बोलने के हालत में नही थी ,मैं बस सर पकड़कर बैठी थी और सपना…
सपना मानो इस पहेली को समझने की कोशिश कर रही थी की आखिर हम दोनों ऐसी हरकते क्यो कर रहे है ……..
अध्याय 12
एक साल बीत गए मैंने अपनी कोशिश की और सपना ने अपनी ,रोहन दोनों के साइड रहता इस तरह वो किसी के भी साइड नही रहता ,आखिरकार मेरी जीत हुई और सर ने मेरा प्रपोजल एक्सेप्ट कर लिया ,सपना इससे जल चुकी थी और एक दिन उसने वो कदम उठा लिया …
उसने गौरव सर के सामने अपने कपड़े उतार दिए ,और वो उसे छोड़ कर मेरे पास आ गए,मुझे हर हकीकत बताई ,
क्या बताऊँ की उस दिन मेरे दिल में क्या बीती थी,प्यार या आकर्षण दोनों ही अलग की बात है लेकिन इस घटना से मेरे दिमाग में गौरव सर के लिए सम्मान भर गया था,और एक डर भी,अब मैं उनसे और दूर नही रहना चाहती थी,मैं उन्हें अपना बना कर रख लेना चाहती थी,मैं उनसे शादी कर लेना चाहती थी,
लेकिन मेरे सामने सबसे बड़ी रुकावट मेरे पिता जी ही थे,वो तो नही माने यंहा तक की उन्होंने गौरव सर को जान से मारने की भी धमकी दी,लेकिन अगर लड़का लड़की राजी हो तो कोई क्या कर सकता है,हमने कोर्ट मैरिज की और साथ रहने लगे…
एक दिन पापा मेरे घर आये ,उन्हें देख कर मुझे बेहद खुसी हुई..
मैं उनके सीने से लग गई,उनके साथ रोहन भी था,
“तुम इस झोपड़े में रहती हो “
पापा की आंखे गीली थी,वो अंदर आते ही घर के चारो ओर देख रहे थे..
“पापा जैसा भी है अब यही मेरा घर है “
उन्होंने मुझे स्नेह से देखा ..
“बेटा तुम और गौरव हमारे घर में क्यो नही रह सकते ,मैं उसे अपने दामाद के रूप में स्वीकार करूंगा,तुम्हारी शादी फिर से धूमधाम से करूंगा ,सारा शहर देखेगा ,.इतनी जायजाद का क्या मतलब हुआ जब मेरी इकलौती बेटी ऐसे रह रही है ..”
उनके आंखों में पानी उतर आया था..
मैं उनके बाजू में जा कर बैठ गई उनके सीने से खुद को सटा लिया ,
“पापा मैं खुश हु,बहुत खुश हु ,और मैं चाहती हु की आप भी मेरे लिए खुश रहे ,मुझे गौरव पसंद है,उनका लाइफ स्टाइल पसंद है,मुझे और कुछ नही चाहिए इतना हमारे लिए काफी है..
और प्यार को दौलत से कैसे तौल सकते है,”
“बेटा लेकिन जो मेरा है वो सब भी तो तेरा ही है ना”
पापा मेरे सर पर हाथ फेर रहे थे,
“ह्म्म्म मैं मानती हु की वो सब भी मेरा ही है ,लेकिन अभी नही पापा,मैं आपको वचन देती हु की जब आपको मेरी जरूरत होगी आपकी बेटी आपके पास होगी,आपके साथ होगी ,आपकी सेवा करने में मैं कोई कमी नही रखूंगी,लेकिन अभी नही…”
“बेटा लेकिन अगर तुम और गौरव ही मेरा बिजनेस सम्हाल लो तो आखिर इसमें प्रॉब्लम क्या है”
“पापा उन्हें अपने काम से प्यार है उन्हें बिजनेस की कोई समझ है ही नही ,और रही मेरी बात तो अभी तो मेरी पढ़ाई ही चल रही है ,अभी मेरा MBA कंपलीट हो जाए तो फिर मैं कही जॉब कर लुंगी ..”
“तू जॉब करेगी ,मेरी बेटी जॉब करेगी “
पापा का गला रुआसु होई गया था ,मैं मुस्कुराते हुए उन्हें देखने लगी ..
“पापा आप खानदानी रहीस परिवार से हो,मिडिल क्लास के लोगो का कुछ वसुल होता है,पैसे से ज्यादा प्यार अपने आत्मसम्मान होता है,और मैं कभी भी गौरव जी के आत्मसम्मान से समझौता नही कर सकती “
“अब इसमें ये आत्मसम्मान कहा से बीच में आ गया “
पापा झुंझला गए
“कम ऑन पापा छोड़ो ना ये सब ,रुको आपके लिए चाय बना कर लाती हु “
मैं उठी और किचन से दो चाय बना कर रोहन और पापा को दिया
“हम्म यार तू चाय तो बहुत ही अच्छा बना लेती है “रोहन मुस्कुराने लगा
“खाना और भी अच्छा बना लेती हु ,आये हो तो खा कर ही जाना रुको मैं बनाना शुरु करती हु “
“नही बेटा”पापा ने मुझे रोका
“मेरे पास बैठ ,तुझे देखे इतना समय हो गया ,थोड़ा बात कर ले ,क्या मैं गौरव से बात करू ,अगर वो बोले तब तो तुमलोग हमारे घर में रह सकते हो ना “
पापा फिर से घूम फिर कर वही आ गए थे,वो मेरी बात को नही समझ सकते थे,मैंने एक गहरी सांस ली
“पापा प्लीज...आप गौरव से कोई बात नही करोगे,और मेरे पास टैलेंट है हम दोनों मिलकर इतना तो कमा लेंगे की अच्छी जिंदगी बिता सके,आपको अपनी बेटी अपने घर में आपके दौलत के साथ चाहिए या खुश चाहिए ...मैं खुश हु पापा “
“लेकिन बेटा वंहा रहेगी तो मेरे पास रहेगी “
“मैं यंहा रहूंगी तो भी आपके पास ही रहूंगी ,कम से कम आप मुझसे इतने देर बात तो करोगे,बचपन से आज तक आपको याद है की कब आप और मैं इस तरह इतने देर बैठकर बात किये हो ,खासकर माँ के गुजर जाने के बाद से …”
पापा अचानक से ही चुप हो गए थे,वो इतने बिजी होते थे की मेरे लिए उनके पास समय ही नही होता था,हम एक ही घर में रहते लेकिन कभी कभी ही मिल पाते थे ,
“पापा मैं आपकी बेटी हु और हमेशा रहूंगी ,मेरे पुरखो की जायजाद पर मेरा हक है और उसे मैं सम्हालुंगी भी लेकिन आपके बाद जब जरूरत पड़ेगी,एक घर में रहकर भी हमने कभी इत्मीनान से बात नही कर पाते थे तो क्या मतलब है हमारे साथ रहने का,मैं एक अच्छी बेटी बनूंगी पापा लेकिन अभी एक अच्छी बीवी बनने दीजिए ..
”
पापा की आंखे झलक रही थी ,रोहन भी मुझे बड़े ही गर्व से देख रहा था ,
“बेटा तू इतनी बड़ी कब से हो गई ..’
वो फफक पड़े साथ में मेरे होठो में भी एक मुस्कान और आंखों में थोड़ा पानी आ गया था..
***************
जीवन अच्छे से चल रहा था ,मैंने अपना MBA भी कंप्लीट कर लिया था और मुझे एक जॉब चाहिए था,मैं घर में बैठ कर तो नही रह सकती थी ,पापा ने एक ऑफर दिया लेकिन उसे लेना मैंने सही नही समझा ,आखिर में रोहन ने मुझे एक ऑफ़र दिया ,वो अब अपने पिता का बिजनेस धीरे धीरे सम्हाल रहा था उसे भी किसी भरोसेमंद सहायक की जरूरत थी,और कुछ काम में मैं पहले से ही एक्सपर्ट थी,रोहन मेरा अच्छा दोस्त भी था,अच्छी सेलरी भी दे रहा था जो मेरी काबिलियत से मेच खाती तो मैंने जॉब एक्सेप्ट करने की सोच ली ,लेकिन गौरव इससे थोड़े परेशान थे ,खैर मैंने उन्हें भी मना लिया ,सब अच्छा चल रहा था लेकिन फिर एक खबर ने मेरा दिमाग हिला दिया …
जब मालती मेडम का फोन आया ,उन्होंने मुझसे सपना को गौरव की असिस्टेंट बनाने के बारे में पूछा ,मालती मेडम गौरव के लिए माँ के समान थी ,और मुझे भी बेहद ही प्यार करती थी ,उनकी बात तो मैं टाल भी नही सकती थी,मैंने हा तो कह दिया लेकिन दिल में एक घबराहट सी भर गई थी…
सपना के साथ जो हुआ था वो बहुत ही बुरा था,और उसका कारण मैं और गौरव ही थे,जब उसने सपने कपड़े गौरव के सामने उतारे थे और गौरव भाग कर मेरे पास आ गए थे उसके बाद ये खबर जंगल में आग की तरह फैल गई ,सभी की नजरो में सपना गिर गई ,वो तो रोहन था जिसने उसे सहारा दिया,उसे नार्मल किया,मैंने तो गौरव से शादी कर लिया लेकिन सपना में अचानक ही बहुत बदलाव आया,वो अब ज्यादा समय पढ़ने में लगाने लगी ,
हम तीनो दोस्तो के जीवन के रास्ते इस एक घटना ने बदल दिया था,मौज मस्ती सब अचानक ही खत्म हो गई थी …
सपना ने अपने को सीमित कर लिया,वो अब दिन भर लाइब्रेरी में ही बैठी रहती,पढ़ने में ही लगी रहती,वही गौरव पूरा ध्यान अपने बिजिनेस में लगा रहा था और मैं ...
मैं तो अब किसी की बीबी थी…
कही ना कही मुझे सपना के लिए एक हमदर्दी थी ,वही अब ये डर भी था की सपना फिर से गौरव को फसाने की कोशिश तो नही करेगी …
मैं इसी उधेड़बुन में अपने कॅबिन में बैठी थी तभी रोहन वंहा आया …
“लगता है तुम्हे खुशखबरी मिल ही गई “
“किस चीज की “
“यही की सपना अब गौरव के साथ काम करने वाली है “
“ह्म्म्म तुम्हे किसने बताया “
“यार तुम सपना से बात नही करती मैं तो करता हु ना “
“तुम्हे क्या लगता है ,वो फिर से कोई गड़बड़ करेगी “
“बिल्कुल करेगी उसका हक बनता है “
रोहन हँस पड़ा
“चुप कर इडियट कही के ,उसने अब कुछ मेरे पति के साथ किया ना तो …”
मैं खड़ी हुई और उसे मारने लगी ,उसने मेरा हाथ पकड़कर खिंचा और मैं उसके सीने से जा लगी,उसने मुझे जकड़ लिया था ,
“छोड़ ना “
मैं कसमसाई ,लेकिन उसने अब भी अपने बांहों को ढीला नही किया ,मैं उसके आंखों में देखने लगी ..
“पूर्वी सपना आज भी गौरव से प्यार करती है,जैसे मैं तुझसे करता हु ,उसे और मुझे हम दोनो को ही पता है की हमे कुछ भी नही मिलने वाला लेकिन ट्राई करने में क्या जाता है “
उसके होठो में एक शैतानी मुस्कान आ गई
“अच्छा तो ट्राई करने के लिए मुझे नॉकरी में रखा है “
मैंने तो मजाक में ही कहा था लेकिन वो सीरियस हो गया ,उसने तुरंत ही मुझे छोड़ दिया
“तुझे ऐसा लगता है ,तू ये सोचती है मेरे बारे में ..”
वो जब गुस्सा होता था तो किसी बच्चे की तरह मुह फुला लेता था ,वो मुझसे दूर जाकर एक चेयर में बैठ गया …
मैं उसके पास गई और उसके सर को अपने कमर से लगा लिया
“बात बात में क्यो मुह फुला लेता है ,मैंने तो मजाक किया था..”
“तू मुझपर शक करती है ..”
“तू काम ही ऐसा करता है”
“यार प्यार करता हु तो करता हु ,बात खत्म ,मैं कभी तेरे और गौरव के रिश्ते के बीच आया क्या “
“तुझे लगता है की तू आ सकता है “
रोहन अपना सर उठाकर मुझे देखने लगा
‘क्या मेरी इतनी भी औकात नही है “
उसके इस प्रश्न में अजीब सा दर्द था ...मैं गौरव जी से बेहद प्यार करती थी मैं उनकी पत्नी थी लेकिन रोहन..वो आज भी मेरा सबसे अच्छा दोस्त था,उसे दुखी देख कर मुझे भी दुख होने लगता …
“तू ऐसा क्यो सोचता है “
मैं उसके पास रखे चेयर को खिंचकर उसके सामने बैठ गई..
“तू आज भी मेरा सबसे अच्छा दोस्त है ,और वो मेरे पति है,तुम दोनों ही मेरे लिए बहुत ही इम्पोर्टेन्ट हो ,अब ऐसे मुह फुला लेगा तो कैसे बनेगा “
मैंने हाथो से उसके गालों को दबा दिया ,रोहन एक लंबा चौड़ा मर्द ,पूरे डोले शोले वाला ,जंहा जाता छा जाता था,लडकिया उसपर और उसकी पर्सनाल्टी पर मरती थी लेकिन मेरे सामने वो एक बच्चे जैसा हो जाता था,एकदम क्यूट सा भोला भाला …
वो मुस्कुराने लगा ..
“यार लेकिन मैं क्या करू मुझे तेरी दोस्ती अपने जान से भी ज्यादा प्यारी है लेकिन …”
उसने सर झुका लिया
“कभी मैं उन दिनों को नही भूल पाता ,जब हमने किस किया था ,या उस दिन जब तूने मुझसे बदला लिया था,सचमे तेरा जिस्म आज भी कभी कभी मेरे नजरो के सामने घूमता रहता है “
मैं बिल्कुल ही शांत हो गई ,मैंने रोहन की आंखों में देखा वो शरारत से भरी थी,मैंने जोरदार एक मुक्का उसके कंधे पर मारा ..
“कमीने “
वो हँसने लगा और फिर से मुझे अपने बांहों में भर लिया
“आई लव यु माय बेबी “
“भग जा कमीने “
मेरे होठो में मुस्कान फैल गई थी,
“बेटा तू मुझे कितना भी कमीना कह ले और अपने पति का प्यार दिखा ले लेकिन तेरा पति वंहा अपने लेब में सपना के साथ ..अकेले ..”
मैं उससे अलग हुई
“मुझे जला रहा है “
“जलाने वाली क्या बात है जो सच है वो सच है ,देखते है तेरे देवता जैसे पति कितने देर तक खुद को सम्हालते है ..”
“मुझे उनपर पूरा भरोसा है ..”
“ओह ठीक है ,और अगर वो बहक जाए तो “
“हो ही नही सकता “
“अगर हुआ तो ..”
“तो तू जो बोले वो ..”
रोहन के होठो में शैतानियां नाचने लगी थी
“सच में ..”
“हा बिल्कुल “
रोहन कुछ देर सोचता रहा फिर बोला
“रहने दे तू बुरा मान जाएगी और मैं तेरी दोस्ती को खोना नही चाहता ..”
रोहन कुछ बोलता हुआ रुक गया था ,मुझे पता था की वो मुझसे क्या कहना चाहता था ,आज भी उसके दिल में मेरे लिए फीलिंग्स थी ,
“अब बोल भी दे नही मानूँगी बुरा “
“तू गलत समझेगी “
“अच्छा तो गलत क्यो बोलेगा “
“क्योंकि मैं ये चाहता हु “
“तो बोल दे ना “
“लेकिन तू गलत समझेगी तो “
“तो मत बोल “
“लेकिन मुझे बोलना है “
मैंने उसे घुरा
“बोलना है तो बोल दिमाग ना खा ,और मेरा वादा यही की मैं बुरा नही मानूँगी ,हा अगर कुछ उल्टा सीधा बोला तो एक दो झापड़ जरूर खायेगा तू “
मैं हल्के से हंसी
“ओके...ओके..अगर तेरे पति तुझे धोखा दे तो ...तो मैं चाहता हु की तू भी उसे धोखा दे ,और मेरे साथ ..”
वो चुप हो गया लेकिन उसके होठो में शरारती सी मुस्कान आ गई
साला सच में कभी कभी बच्चे जैसे मासूम हो जाता तो कभी पूरा कमीना लेकिन जैसा भी था मेरा बेस्ट फ्रेंड था ..
“हा बोल बोल ..”
“तू मेरे साथ अफेयर करेगी ..”
उसने जल्दी से बोल दिया ..
“जानती थी ऐसा ही कुछ बेहूदा सा बोलेगा ,”
“देख तू वादा करके मुकर रही है ..”
मैं हँस पड़ी
“ठीक है लेकिन वो कभी मुझे धोखा नही देंगे,मैं उन्हें जानती हु,और अगर देंगे तो मैं तेरे साथ वो सब करूंगी जो वो सपना के साथ करेंगे ..ठीक है खुश “
“यस यस “रोहन ऐसे खुश हो रहा था जैसे कोई मैच जीत गया हो ,लेकिन मुझे गौरव पर पूरा भरोसा था ……..
अध्याय 13
कुछ ही दिन निकले थे की रोहन ने मुझे जिम का आफर दिया,मना करने का कोई सवाल ही सामने नही था ,मैं भी जिम को मिस करती थी ,और रोहन ने मुझे कहा वंहा सपना भी होगी ,और अगर गौरव और सपना के बीच कुछ हो रहा हो तो उसे मॉनिटर करने का सबसे अच्छा तरीका यही है ,मुझे पता था की वंहा सपना भी होगी ,लेकिन जब मैं गौरव के साथ वंहा पहुची तो मैंने ऐसे दिखाया की मुझे इसकी उम्मीद नही थी ,
वंहा सपना अपने जलवे बिखेर रही थी ,मैंने देखा की मेरे पति देव भी नजर बचा कर उसे देख रहे थे,साली थी भी इतनी टाइट,अब मुझे भी अपने जलवे दिखाने थे ताकि गौरव का ध्यान मुझपर भी थोड़ा जाए …
****************
यंहा से फिर से हम स्टोरी में जाते है लेकिन पहले रोहन और सपना का viwe भी देख लेते है ताकि स्टोरी सही तरीके से समझने में आसानी हो …
तो पहले सपना का viwe…
रोहन मैं और पूर्वी दुनिया के नजरो में बचपन के दोस्त थे ,ये सच भी था लेकिन कुछ चीजे ऐसी थी जो सिर्फ हमे ही पता थी..
पूर्वी और मैं दोस्त के साथ साथ सबसे बड़े कम्पीटिटर भी थे और रोहन..
रोहन के साथ तक बचपन तक तो दोस्ती का रिश्ता ही रहा लेकिन जवान होने के साथ साथ हम दोनों फ्रेंड विथ बेनिफिट वाले रिश्ते में आ चुके थे ,समझ लीजिए की हम दोनों फक बडिस थे ,
रोहन ही वो शख्स था जिसने मुझे कली से फूल बनाया था,हम दोनों को जब भी जिस्म की आग मिटाने की जरूरत पड़ती तो एक दूसरे के काम आते,हमारी दोस्ती अपने जगह थी और जिस्म का रिश्ता अपनी जगह इसका ये मतलब बिल्कुल भी नही था की हम एक दूसरे से प्यार करते थे,हमारा प्यार दोस्तो वाला ही था लेकिन हम ऐसे दोस्त थे जो आपस में सेक्स भी किया करते है,जिस्म का रिश्ता केवल जिस्मानी ही था,और इस बात की जानकारी किसी को भी नही थी ,यंहा तक की पूर्वी को भी नही ये हम दोनों का सीक्रेट था…
मेरे कई बॉयफ्रेंड हुए और रोहन को तो सेक्स की भूख थी ही,उसने कई लड़कियों को अपने नीचे किया,और कई के लिए मैंने उसकी मदद भी की ,लेकिन वो भी एक इंसान था और उसे एक लड़की को लेकर कुछ फीलिंग्स आनी शुरू हो गई ,ये हम सभी के लिए थोड़ा खतरनाक था,क्योंकि वो लड़की मेरी सबसे बड़ी दुश्मन और दोस्त थी,पूर्वी…
पूर्वी का रोहन के जीवन में आने का मतलब था रोहन की ऐयाशियों का खत्म हो जाना ,मैंने रोहन को ये बात समझाई भी लेकिन साला प्यार तो अंधा होता है ,उस चूतिये ने आखिर पूर्वी को प्रपोज कर ही दिया …
हुआ वही जो लगा था,एक अच्छा खासा प्ले बॉय किसी लड़की के प्यार में पड़ गया,रोहन उस दिन बेहद खुश था लेकिन मुझे उसपर बहुत गुस्सा आ रहा था,वो दोनों किस कर रहे थे ..मैं वंहा से निकल गई और रोहन मेरे पीछे मुझे मनाने आया …
“यार तुम जानती हो ना की मैं उसे प्यार करता हु ..
”
“साले जानती हु तेरा प्यार ,दो बार चोदेगा तो तेरा प्यार उससे भी खत्म हो जाएगा ,लेकिन फिर क्या ?? फिर उसे छोड़ पायेगा जैसे बाकी लड़कियों को छोड़ देता है “
“मैं उससे सच में प्यार करता हु यार मैं उसे नही छोड़ने वाला”
“अच्छा और फिर मेरा क्या “
मैंने गुस्से से उसे देखा ,वो कमीना मुस्कुरा रहा था,उसने अपने हाथो को मेरे बूब्स पर टिका दिया और हल्के हल्के मसलने लगा
“तू तो मेरी जान है “
वो मुझे किस करने के लिए झुका ,मैंने अपना सर हटा लिया
“तेरी जान पूर्वी है मैं तो बस तेरी रांड हु,जब जी चाहे मेरे ऊपर चढ़ जाता है,मुझसे तो तू सिर्फ सेक्स करता है प्यार तो तू उससे करता है ..”
रोहन अब अवाक सा मुझे देख रहा था..
“सपना इस बारे में हम बात कर चुके है ना,हमारा रिश्ता बस जिस्मानी होगा,और तू भी तो इतने लड़को के साथ ...आज तक मैंने तुझे रोका क्या “
“बाकियों की बात अलग थी रोहन ,ये पूर्वी है ..हमारी सबसे अच्छी दोस्त है ,हम इससे कैसे धोखा कर पाएंगे “
रोहन अब थोड़ा सीरियस था,ये सच था की हमारे जीवन में कई लोग आये थे लेकिन हमे किसी से भी कोई फर्क नही पड़ा था,हम मजे करते थे ,लेकिन पूर्वी चाहे मेरी दुशमन ही क्यो ना हो वो बचपन की दोस्त भी तो थी,और रोहन भी उसे उतना ही प्यार करता था जितना मुझे…
दोस्ती वाला प्यार ,प्यार वाला प्यार और जिस्म वाला प्यार ...ये तीनो तरह के प्यार ने हमे फंसा दिया था..
हम तीनो में दोस्ती वाला प्यार भरपूर था,प्यार वाला प्यार अब रोहन और पूर्वी के बीच था और जिस्म वाला प्यार मेरे और रोहन के बीच ,इसे मैनेज कर पाना थोड़ा मुश्किल होने वाला था…
“सपना मैं पूर्वी को उस नजर से नही देखता यार तुझे भी पता है ,मैं उसे दुख नही दूंगा ..”
“और मुझे चोदता भी रहेगा “
मैं भभक गई थी
,रोहन ने मुझे पास ही रखे बिस्तर पर बिठाया
“तू क्या चाहती है ,अगर तू चाहे तो हम कभी सेक्स नही करेंगे,मैं पूर्वी के अलावा किसी के बारे में सोचूंगा भी नही ,”
रोहन का पूर्वी के लिए प्यार देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा लेकिन अगर मैं पूर्वी को ऐसे ही रोहन के साथ जाने देती तो शायद उसे कुछ शक हो जाता..
“ठीक है लेकिन मेरी दो शर्त है ..
”
“क्या??”
“पहला की जब भी मुझे तेरी जरूरत पड़ेगी तू मेरे साथ सेक्स करेगा,ऐसे भी तेरे जैसा कोई कर भी तो नही पाता”
रोहन खुश हो गया था,साला कमीना
“और दूसरा “
“दूसरा की मैं ऐसे ही तुझे पूर्वी के साथ जाने नही दे सकती ,थोड़ा तमाशा तो करना ही पड़ेगा ना,बचपन का कंपीटिशन है उससे ऐसे ही जाने दी तो उसे भी शक हो जाएगा “
रोहन खुसी से मेरे ऊपर खुद गया
“आई लव यु मेरी जान ,थैक्स फ़ॉर सपोर्ट “
“कमीने हट यंहा से ,अगर कभी पूर्वी को हमारे रिलेशन के बारे में पता लग गया ना तो समझो सब खत्म हो जाएगा “
“यार आज तक लगा क्या जो अब लगेगा “
रोहन खुसी से मेरे होठो को चूमने लगा लेकिन मुझे कोई मुड़ नही था मैंने उसे धक्का दे कर हटा दिया …
“अब पूर्वी के होठो को चूमना ,जा अपनी गिरलफ्रेंड के साथ ऐश कर तब तक मैं कोई प्लान सोचती हु “
मैंने पूर्वी को चेलेंज दे दिया और साथ ही अपने पापा को भी मेरा साथ देने को कहा,मुझे पता था की इसके लिए मुझे डांटेंगे लेकिन ये भी मेरे प्लान का एक हिस्सा था,उन्होंने पूर्वी और मुझे पास बिठाकर समझाया ,
सब सही था पूर्वी और रोहन एक दूसरे के प्यार में खो रहे थे लेकिन मुझसे एक गलती हो गई …
उस पार्टी में मैंने थोड़ी ज्यादा पी ली थी ,रोहन और पूर्वी भी नशे में झूम रहे थे,मैंने ध्यान से रोहन को देखा,अभी तक जितने भी लड़को के साथ मेरे संबंध रहे है उनमें से रोहन सबसे हेंडसम था,और सबसे ताकतवर,उसके नीचे आने में जो मजा था वो मुझे कोई भी लड़का नही दे पाया था,सच में वो साला एक प्ले बॉय ही था,मेरे अंदर नशा बोलने लगा था,और जांघो को नीचे रोहन को देखकर खुजली भी बढ़ रही थी ,मैंने रोहन का हाथ पकड़ कर उसे अपने पास खिंच लिया ,पूर्वी नशे में झूम रही थी उसने हमारी हरकत पर ध्यान नही दिया …
“ऊपर चल ना ,खुजली हो रही है “मैंने उसके कान में कहा और उसके होठो में मुस्कान फैल गई..
हम दोनों एक कमरे में गए और पहुचते ही रोहन मेरे ऊपर टूट गया..
“इतने दिन हो गए जबसे पूर्वी को प्रपोज किया है साला किसी से सेक्स नही किया हु “
वो उत्तेजना में मेरे गले को चूम रहा था,
“आह मैं भी तुझे अपने अंदर लेने को तड़फ रही हु ,साले ,जल्दी कर”
उसने मुझे खड़े खड़े ही चूमना शुरू कर दिया था ,
“सपना मेरी जान “उसने मेरे वक्षो को अपने हाथो में भर लिया ,वो उसे मसले जा रहा था और मैं बस सिसकियां ले रही थी ..
हमारे होठ मिल गए थे,उसने मुझे दीवाल से टिका दिया था ,उसके लिंग का आभास मुझे मेरे जांघो के बीच हो रहा था,वो कभी कभी उसे रगड़ देता,आजतक जितने भी लिंग मेरे अंदर गए उनमें सबसे कड़ा और बड़ा रोहन का ही था,वो पूरी ताकत लगा देता था ,मैं बीते दिनों में मिले सुख के याद से और भी मदहोश हो रही थी ,आज भी मुझे वैसा ही सुख मिलने वाला था,इतने दिनों तक मैं भी किसी के नीचे नही आयी थी ,
रोहन ने अपना पेंट नीचे कर लिया था और कपड़ो के ऊपर से ही मेरे जांघो के बीच उसका मर्दाना लिंग रगड़ खा रहा था मैं बेताब थी ,उसे अपने अंदर लेने को बेहद ही मचली हुई थी मेरे मुह से सिसकियां फुट रही थी ,
मेरा शर्ट पूरी तरह से खुला हुआ था,मैं ऊपर से बिल्कुल ही नंगी थी ,वही नीचे मैंने स्कर्ट पहन रखा था ,लेकिन रोहन का हाथ उस स्कर्ट के अंदर था,रोहन ने मेरी पेंटी उतार कर जमीन में फेक दिया था ,रोहन ने अपना अंडरवियर भी खिसका दिया था ,मैं सिसकियां ले रही थी वही रोहन पागलों की तरह मेरे स्कर्ट में अपने हाथ को चला रहा था,तभी मुझे सामने पूर्वी दिखाई दी ,पता नही मेरे अंदर क्या हुआ की मैंने रोहन को अपने से अलग नही किया बल्कि उसे और भी जोरो से अपने छतियो से जकड़ लिया ,
मेरे होठो में एक मुस्कान तैर गई थी
“ओह रोहन मेरी जान “और मेरी मुस्कान और गहरी हो गई
“रोहन…”पूर्वी की एक चीख सुनाई दी ,जैसे रोहन को होश आया हो ,वो मुड़ा और अवाक पूर्वी को देखने लगा,
पूर्वी रो रही थी बिल्कुल ही पागलों की तरह रो रही थी ,मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ की मैंने ये क्या कर दिया था लेकिन अब देर हो चुकी थी ,रोहन उसे समझने के लिए भागा लेकिन अब वो उसे समझता भी तो क्या …
पूर्वी कमरे से निकल चुकी थी….
थोड़ी ही देर बाद रोहन फिर से कमरे में आया
“ये हमने क्या कर दिया सपना ,”
वो रो रहा था,मैंने उसे अपने सीने से लगा लिया,सच में ये हमारे जीवन की सबसे बड़ी भूल साबित होने वाली थी…
रोहन और पूर्वी का परिवार तो दोनों की शादी तक की सोच चुका था,मुझे भी पूर्वी का दिल दुखाकर कोई खुसी नही हुई लेकिन पता नही उस समय मेरे होठो पर वो मुस्कान क्यो आयी थी,शायद ये उस बचपन की आदत के कारण आयी थी जो हमारे परिवार से हमे मिली थी,एक दूसरे को नीचा दिखाना…
मुझे रोहन के लिए दुख था लेकिन अब क्या….
अध्याय 14
पार्टी वाली घटना के दूसरे ही दिन वो हुआ जो मैंने जीवन में कभी नही सोचा था..
मेरे पास रोहन का काल आया और उसने मुझे पूर्वी के घर बुलाया,मैं बुरी तरह से डर गई थी की आखिर वो करना क्या चाहती थी ….जब मैं वंहा पहुची तो वंहा का दृश्य देखकर ही कांप गई..
पूर्वी बिस्तर में नंगी पड़ी थी और रोहन उसका पैर दबा रहा था,
जब उसने मुझे देखा तो रोहन की आंखों में शर्मिदगी तैर गई ..
रोहन की ये हालत मुझसे देखी नही जा रही थी,आखिर ये कैसा बदला था पूर्वी का ...
वो उसे एक नॉकर की तरह ट्रीट कर रही थी..
पूर्वी ने मुझे एक सोफे में बैठने को कहा ,मेरे पास उसकी बात मानने के अलावा कोई चारा भी नही था...मैं बस अवाक थी
“रोहन बेबी,यंहा बड़ी गर्मी हो रही है थोड़ा चाट कर ठंडा कर दो ना”
पूर्वी ने अपनी उंगली से अपनी योनि की ओर इशारा किया..रोहन की आंखे फैल गई ,और उसने मुझे देखा,मैंने आंखों से ही उसे करने का इशारा किया
“अरे उधर क्या देख रहे हो ,इसे चाटना है ,सपना तुम कुछ पियोगी..”
पूर्वी की बाते मेरे दिल में दर्द का सबब बन रही थी मेरी आंखे लाल हो रही थी,थोड़ा पानी आ रहा था लेकिन शायद अभी और आना बाकी था,
रोहन उसकी योनि के पास झुक गया,मैं साफ साफ उसकी उत्तेजना को भांप सकती थी..उसने आखिर योनि को चाटना शुरू कर दिया
“आह गुड बेबी,लाइक अ डॉग ,यु आर गुड ..हम्म्म्म “
पूर्वी ये क्या कह रही थी ,मेरे ही सामने रोहन को इतना जलील कर रही थी,उसे कुत्ता बता रही थी,सच में मेरे दिल में एक जोरदार पीड़ा हुई ,मैं रोने लगी थी लेकिन इसका कोई मलतब नही रह गया था..
“ओह रोहन यु आर माय डॉग बेबी चूस इसे चूस सारा पानी पी जा,तू मेरा पालतू कुत्ता है ..ओह रोहन...”
पूर्वी अपने टांगो से रोहन के सर को अपने योनि में कस लिया ,रोहन छटपटा रहा था,लेकिन पूर्वी ने तब तक उसे ऐसे ही दबाए रखा जब तक की वो पूरी तरह से नही झर गई ,रोहन छूटते ही हांफने लगा,पूर्वी हंसती हुई उठी और उसके सर को सहलाया..
“ओ माय बेबी ,चलो अब जल्दी से कपड़े उतारो “
क्या ???
क्या अब वो मेरे सामने ही रोहन से सेक्स करने वाली है ,और रोहन भी उसके गुलाम की तरह अपने कपड़े निकलने लगा था,उसका लिंग पूरी तरह से तना हुआ था,साले को तो जन्नत मिलने वाली थी,लेकिन अब मुझसे और बर्दास्त नही हुआ मैं उठकर जाने लगी
“रुको कहा जा रही हो ,तुम्हे तो खेलना पसंद है ना.. फिर पूरा खेल देख कर ही जाओ “
उसके बात में एक व्यंग था..
‘तुम ..तुम आखिर साबित क्या करना चाहती हो “
मैं चिल्लाई
उसने एक कमीनी मुस्कान के साथ मुझे देखा,
“यही की एक मर्द को बहकाने के लिए सबसे आसान रास्ता औरत का जिस्म होता है,तुमने कपड़े उतारे तुम्हारी चाटने लगे,मैंने उतारी तो मेरी ,कुत्तों की जात ऐसी ही होती है “
कुत्तों की जात बोलते समय उसकी निगाह सीधे रोहन के निगाहों से मिली,उसके आंखों से एक ही पल में सारी उत्तेजना गायब हो गई,उसकी आंखे फिर से शर्म से भरकर नीची हो गई थी…
मैं अब और रोहन को इस हालत में नही देख सकती थी,ना ही पूर्वी को मैं तेजी से वंहा से निकली …
मुझे पूर्वी के लिए भी दुख हो रहा था,इतनी शरीफ लड़की को आखिर मैंने अपने जैसी ही बना दिया ...मैं रोते हुए जा रही थी,आज मुझे पता चला था की प्यार में धोखा खाया आदमी क्या कुछ कर सकता था लेकिन उसे धोखा किसने दिया था..
मैंने या रोहन ने..
या हम दोनों ने ..
क्या सच में रोहन उससे प्यार करता था या वो बस धोखा था…
**************
सब कुछ मानो शांत ही हो गया हो ,पूर्वी ने हमसे दूरी बना ली …
कुछ दिन बीते ही थे की मुझे पता चला की पूर्वी आजकल लाइब्रेरी में ज्यादा बैठा करती है ,
मैं भी उस दिन लाइब्रेरी पहुची ,हमारे यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी इतनी बड़ी थी जैसे लगता था की कोई पूरा शहर ही बसाया गया हो ,किताबो का शहर,वंहा मैंने हमारे साइंस ग्रुप के छात्र बैठ कर बाते कर रहे थे ,मैं उसपर बिल्कुल भी ध्यान नही देती अगर मुझे पूर्वी का नाम नही सुनाई देता,मैं लाइन से रखे ख़िताबो की दीवार के पीछे पहुची ,ये फुसफुसाहट सी आवाजे थी ,
“वो तो हर समय बस गौरव सर को ही देखती रहती है,”
“हा यार सर कितने लक्की है ना जो इतनी अच्छी माल उन्हें लाइन देती है “
एक लड़के की बात से सभी मुह दबाकर हँसने लगे,तभी एक लड़की बोल उठी
“अरे कहे की माल,इन अमीर बाप की औलादों को तुम नही जानते,पहले रोहन उसका बॉयफ्रेंड था,उससे ब्रेकअप हो गया तो सर पर डोले डाल रही है कमीनी”
उसकी आवाज में नफरत थी ..
“लगता है तुझे जलन हो रही है “
एक लड़के के मजाक से वो लड़की और भी भभक गई
“मुझे क्यो जलन होगी ,लेकिन मैं ऐसे लड़कियों को अच्छे से जानती हु ,और सर कभी भी उसे भाव नही देंगे”
आखिर ये गौरव सर है कौन,अचानक मुझे याद आय की ये तो वही है जिन्होंने उस दिन पूर्वी को अपने साथ अपने घर ले गए थे,हमारे केमेस्ट्री के प्रोफेसर..
मुझे भी केमेस्ट्री अच्छी लगती थी,मैंने सोचा इसी बहाने थोड़ी जासूसी भी हो जाएगी ,मैं उनका हर क्लास अटेंड करने लगी ,उनके हर क्लास में पूर्वी मौजूद रहती ,साथ ही उनके साथ लाइब्रेरी में लगने वाले प्राइवेट क्लास में भी …
मैं कभी उनके सामने नही आयी,और लाइब्रेरी में ज्यादा समय बिताने लगी,एक दिन वो हुआ जो मैंने सोचा नही था,
सर की प्राइवेट क्लास खत्म हुई ,सभी स्टूडेंट चले गए थे,सर भी उठे और ऊपर की तरफ जाने लगे,सबसे ऊपर की फ्लोर में सिर्फ टीचर्स ही जाया करते थे,वंहा अधिकतर रिसर्च पेपर रखे होते थे,जिन्हें स्टूडेंट्स के पहुच से दूर रखा जाना होता था,जब मैं भी वंहा पहुची तो एक गार्ड ने मुझे रोक दिया ..
“यंहा सिर्फ टीचर्स को ही अनुमति है मेडम “
मैंने गार्ड को ध्यान से देखा और अपने पर्स से 500 के दो नोट निकाल कर हिलाया..
“मेडम नॉकरी चली जाएगी..
”
उसकी लालची आंखे उन नोटो पर टिकी थी,
“मुझे ज्यादा देर का कोई काम नही है ,बस कुछ पेपर देखने थे”
उसने इधर उधर देखा
“ठीक है लेकिन मोबाइल,पर्स यही छोड़ना होगा,बस एक कॉपी और पेन ही अंदर ले जा सकती हो आप “
मैंने कन्डीशन को स्वीकार कर लिया,और मोबाइल पर्स छोड़कर अंदर चली गई ,
वंहा कोई भी नही जाता था ,रजिस्टर में मुझे एंट्री नही करनी पड़ी ,
वो पूरा फ्लोर भी काफी बड़ा था,और चारो तरफ कबाड़ जैसे पेपर्स मैगजीन्स और ना जाने क्या क्या डॉक्यूमेंट पड़े हुए थे,अधिकतर जगहों में घोर अंधकार था,सिर्फ थोड़े ही जगहों में प्रकाश था जंहा स्टडी के लिए टेबल रखे हुए थे,मेरे दिमाग में बस एक ही बात कौंध रही थी की आखिर गौरव सर यंहा कर क्या रहे होंगे,और वो है कहा,
मैं बड़े ही आराम से आगे बढ़ रही थी ,तभी मुझे कुछ फुसफुसाहट सी आवाजे सुनाई दी ..
मेरे कान खड़े हो गए …
मैं थोड़ा और पास गई ..
“वो तो दिन भर मुझे ही देखते रहती है “
ये आवाज गौरव सर की थी,मैंने बहुत ही एहितियाद बरती ,मैं उनके सामने नही जाना चाहती थी ..
“अच्छा ही है जो मुर्गी खुद ही जाल में फंस रही है “ये आवाज एक महिला की थी ,साथ ही एक खनखनाती हुई हंसी भी ..मैं आवाज को नही पहचान पाई लेकिन आवाज जानी पहचानी सी थी ,
“क्या उसने तुम्हे प्रपोज कर दिया “
“अभी तो नही लेकिन लगता है कुछ ही दिनों में करने वाली है “
“तेरी तो चांदी ही चांदी है ,जानता है ना की वो कौन है “
“जानता हु लेकिन प्यारी लड़की है पूर्वी “
वो महिला फिर से हँसी
“और मैं “
“अरे तुम तो मेरी जान हो जानेमन “
दोनों की हंसी एक साथ आयी और फिर चूड़ियों की थोड़ी खनखनाहट ..
साफ पता चल रहा था की वो एक दूसरे से लिपटे हुए है और गौरव सर उसे चूम चाट रहे है ,
“आह गौरव ,धीरे “
“तुम्हारे बूब्स पागल बना देते है मेरी जान “
“आह …”
गौरव उसके बूब्स पर टूट पड़ा था,मैंने एक बुक की ओट से उन्हें देखने की कोशिश की लेकिन अंधेरा इतना था की कुछ साफ साफ नही दिखाई दे रहा था,बस इतना दिख रहा की गौरव का सर उस औरत की छाती में दबा हुआ है ...
और उसका हाथ उसके साड़ी को ऊपर किये हुए उसके जांघो के बीच में चल रहा है…
“अब सब यही कर डालोगे क्या ,चलो यंहा से “
“अरे रुको ना यंहा कोई नही आता “
“लेकिन गार्ड तो है ना जिसने हमे अंदर आते देखा है,रात को मेरे घर पर मिलो “
“ह्म्म्म ठीक है “
“अगर पूर्वी तुम्हे प्रपोज कर दे तो तुम क्या करोगे “
औरत ने अपने कपड़े ठीक करते हुए कहा
“उसे ना करने का तो सवाल ही नही उठता ,लेकिन इतनी जल्दी हा कह दिया तो उसे भी शक हो जाएगा ,थोड़ा घूमने दो फिर हा कर देंगे “
“ह्म्म्म जब वो तुम्हारे जीवन में आ जाएगी तो मेरा क्या होगा “
गौरव हँस पड़ा …
“अरे मेरी जान तुम्हे कैसे अपने से अलग कर सकता हु “
वो दोनों फिर से एक दूसरे के होठो में अपने होठो को घुसा कर चूसने लगे ,
थोड़ी ही देर में वो वंहा से चले गए थे ,मेरी सांस जैसे रुक ही गई थी ,गौरव और ये औरत मिलकर पूर्वी को फंसा रहे थे,क्योंकि वो एक अमीर लड़की है ,मेरा दिल पूर्वी के लिए दुखने लगा था ,मैं कैसे उसे इन सबसे बचा सकती थी..
अभी मेरे पास सोचने का समय नही था,मैं भी बाहर निकली और गार्ड से अपना मोबाइल और पर्स लिया,पास रखे हुए रजिस्टर पर मेरी निगाह पड़ी ..
मैंने उसे उठा लिया ..
“अरे मेडम ये क्या कर रही हो”
“कुछ नही बस देख रही हु की आज कौन कौन आया “
“नही हम नही देखने दे सकते “
वो गार्ड मेरे हाथो से वो रजिस्टर छिनने लगा ,मैंने स्माइल दे कर फिर से अपना पर्स खोला और 500 का एक नोट लहराया ,
“सच में हमारी नॉकरी चले जाएगी हम नही देखने दे सकते “
मैंने एक गहरी सांस ली
“ठीक है फिर “
मैं वो नोट अपने पर्स में रखने लगी ,उसने झट से मेरा हाथ पकड़ लिया और नोट अपने पास रख लिया
“आप तो बुरा ही मान गई “
मैंने उसके हाथ से रजिस्टर लिया और आज की इंट्री देखने लगी ,आज दो ही इंट्री थी एक तो गौरव सर की थी और एक थी…
मिस मालती की ...हमारे केमेस्ट्री डिपार्टमेंट की HOD …
मेरे होठो में मुस्कान और दिल में नफरत एक साथ जाग गई ….
अध्याय 15
मेरे दिमाग में कई सवाल एक साथ मचलने लगे थे,आखिर गौरव का उद्देश्य क्या है,ऐसे उद्देश्य हो भी क्या सकता था,पूर्वी अमीर थी,और बेहद ही सुंदर थी,ऐसी लड़की किसी को भी मिले वो क्यो मना करेगा,और वो भी कमसीन सी ,गौरव की age से इतनी छोटी भी …
सच में गौरव को तो अब भी अपने नसीब में यकीन नही हो रहा होगा की ऐसी लड़की उसे चाहती है,लेकिन साला दुनिया की नजरो में शरीफ बनने वाला गौरव इतना कमीना होगा ये भी कौन सोच सकता होगा,और कौन सोच सकता है की अपने से इतने साल बड़ी मालती से उस्का अफेयर चल रहा होगा…
अब मेरे सामने एक बड़ी दुविधा ये थी की पूर्वी को गौरव से कैसे बचाया जाए,क्या बचाया जाए या नही ,क्योंकि पूर्वी तो खुश थी और उसे शायद कभी गौरव के इरादों का पता भी नही चलेगा,अगर मैं उसे बता भी दु तो क्या वो मानेगी ..
सवाल ही नही उठता,उसे तो यही लगेगा की मैं अब भी उससे दुश्मनी निकाल रही हु ,तो क्या किया जाए??
क्या रोहन को बता दिया जाए..?/
मैं इसी उधेड़बुन में थी,लेकिन मैंने रोहन को भी नही बताने का फैसला किया,क्योंकि वो अभी दुखी था और पूर्वी उससे भी कहा बात कर रही थी..
मुझे एक तीसरा तरीका सुझा क्योना गौरव को उकसाया जाए,ऐसे भी मर्द है ,अपने से इतने साल बड़ी लड़की के साथ अफेयर कर सकता है तो मैं तो जवान थी,और मुझे लड़को को उकसाने में महारत भी हासिल थी,इसी बहाने कुछ ऐसे सुबूत भी इकठ्ठे कर लुंगी जिससे उसकी सच्चाई का दुनिया को पता चले …
मैं कोशिश करने लगी लेकिन साला गौरव ना जाने किस मिट्ठी आ बना था वो पिघलने का नाम ही नही ले रहा था..
क्या उसे सच में पूर्वी से प्यार हो गया था..??
दिमाग तो कहता था की नही ,लेकिन कोई भरोसा भी नही,क्योंकि वो जिस तरह से मुझे इग्नोर कर रहा था ऐसा किसी लड़के ने नही किया था..
आखिर वो दिन आया जब पूर्वी ने गौरव को प्रपोज कर दिया ,मैंने भी अखिरी पत्ता खेल दिया और उसे प्रपोज कर दिया ,उस साले ने हम दोनों को ही ठुकरा दिया…
लेकिन इससे पूर्वी के मन में उसके लिए सम्मान और ही बढ़ गया था ,सच में गौरव पहुचा हुआ खिलाड़ी था,अब तो मैंने रोहन की मदद लेना ही उचित समझा..
“क्या बोल रही हो ,लेकिन यार गौरव तो ऐसा नही लगता “
रोहन मेरी बात सुनकर चौक गया था..
“मेरी आंखे धोखा नही खाती,”
“तुम झूट बोल रही हो ,यार पूर्वी से तुम्हारा कम्पीटिसन है ये समझ आता है लेकिन इसके लिए गौरव को बदनाम करना ठीक नही है “
रोहन की बात सुनकर मैं झुंझला गई
“साले तुझसे झूठ बोलकर मुझे क्या मिलेगा..”
वो भी सोच में पड़ गया..
“हम्म अगर ये सही है तो हम क्या कर सकते है ,यार पूर्वी तो उसके लिए पागल ही है ,और उसे समझना तो पत्थर में सर फोड़ना है ..”
रोहन भी गंभीर था,
“अगर हम उसे सबूत दिखाए तो ..”
“कहा से लाएंगे सबूत ,हम जासूस है क्या,और दुनिया के सामने तो वो कुछ करते नही है ,घर के अंदर घुस कर सबूत लाये क्या “
रोहन की बात से मेरे दिमाग में एक आईडिया आ गया
“सच कहा घर में घुस कर तो सबूत मिल सकता है ना..”
रोहन थोड़ा घबराया
“नही नही यार ये सब मुझसे नही होगा..”
“अबे चूतिये वो तेरी बचपन की दोस्त है उसके लिए इतना नही करेगा ..ऐसे भी अगर उनका ब्रेकअप हुआ तो फायदा तेरा भी है ना,पूर्वी फिर रोने किसके पास आएगी “
मैं जानती थी की रोहन कितना भी बकचोदी कर ले लेकिन प्यार तो उसे भी पूर्वी से है ,वही एक ऐसी लड़की थी जो चाहते हुए भी उसे नही मिली,तो प्यार कहे या कुछ और जो था बहुत ही स्ट्रांग था..
“हम्म क्या करे,कैमरा लगा दे दोनों के घर में ,”
“कैमरा ...
हा ये सही आईडिया है,ऐसे मालती मेडम भी गजब की माल है ,उसकी चुदाई देखने में मजा आएगा “
रोहन फिर से कमीनेपन में उतर आया था,जो मेरे लिए सही था,
“चल फिर जुगाड़ करते है …”
*******
वो दोपहर का समय था,गौरव और मालती दोनों ही कालेज में थे,भरे दोपहर में किसी के घर में,सब की नजर से बचकर घुसना आसान काम तो नही था,लेकिन हमे करना ही था…
रोहन ने अपना जुगाड़ लगाया और एक प्रोफेसनल जासूस की मदद ली,अब हम तीन लोग थे जो पहले मालती के घर पहुचे ..
जासूस के लिए ये रोज का काम था,उसने बड़े ही आराम से दरवाजा खोल लिया,और बाथरूम से लेकर बेडरूम में सीक्रेट कैमरा फिट कर दिया,तब तक मैं मालती के घर की घूमने लगी और चीजो को देखने लगी,उसके बेडरूम में उसके कम्प्यूटर के पास मुझे कुछ कागज रखे दिखाई दिए ,उसे पढ़ते ही मैं थोड़ी चौकी ..
मैंने उनके दराजो को खोलना शुरू किया मुझे कुछ फाइल्स मिली ,मेरी आंखे फ़टी की फ़टी रह गई ,मैं धड़ाम से वही बैठ गई थी..
“क्या हुआ ..”रोहन मेरी स्तिथि देखकर चौका गया था,
मैंने फाइल उसकी ओर बढ़ाया ,वो बहुत ही कन्फ्यूज लग रहा था ..
“ये सब ..”मैंने उसे तुरंत ही चुप रहने का इशारा किया और जासूस की तरफ इशारा किया ..
“तुम जल्दी से इन सबकी फ़ोटो खिंच लो ,भगवान ना करे की ये वैसा ही हो जैसा मुझे लग रहा है,इसे आराम से और स्टूडि करने की जरूरत है ,तभी सही तस्वीर सामने आएगी “
हम दोनों ने मिलकर मालती के घर में रखे हर फाइल की फ़ोटो उतार ली ,
“क्या इस कम्प्यूटर का बेकउप मिल सकता है “
मैंने रोहन से कहा
“यार मुझे क्या पता था की ये सब भी करना पड़ेगा वरना किसी कम्प्यूटर एक्सपर्ट को भी साथ लाते,ये तो अभी प्रोटेक्टेड होगा..”
“हम्म चलो कभी बाद में आ जाएंगे”
“तुम्हे लगता है की हमारे आने की खबर उसे नही होगी “
रोहन की बात सुनकर चुप हो गई
“उसे बहकाना जरूरी है ,ताकि उसे ये पता नही चले की हमे उसके असली इरादों के बारे में कुछ भी पता चल चुका है..”
मैंने बहुत ही सोच कर कहा
“तो कैमरा ..”उसे लगे रहने दो ,साथ ही जासूस जी का कार्ड भी यंहा छोड़ दो ,जैसे गलती से गिर गया है,और ये मेरा नाम लेंगे की मैंने ये सब करवाया है …
“लेकिन ..”
गौरव कुछ सोच कर कुछ बोलने वाला था लेकिन मैंने उसे वही चुप करवा दिया
“जो बोल रही हु वो कर अपना खाली दिमाग यंहा ज्यादा मत लगा “
मैं उसे घूर कर देखते हुए बोली ,उसने अपना कंधा उचकया…
*************
जैसा मुझे शक था मुझे दो ही दिन बाद मालती मेडम ने अपने केबिन में बुलाया ..
उनका चहरा गुस्से से लाल लग रहा था लेकिन मैं भी कम गुस्से में उनके पास नही गई थी,भले ही मेरा गुस्सा लाया हुआ था..
“तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे घर में कैमरा लगवाने की ,अगर तुम मेरी स्टूडेंट नही होती तो अभी तक तुम्हे जेल भिजवा देती ..
”
मैं भी भड़क गई
“ओह तो तुम्हे पता चल ही गया,जानती हो मैंने कैमरा क्यो लगवाया था ,तुम्हारे और गौरव के नाजायज रिस्तो को दुनिया के सामने लाने के लिए,तुम यंहा सती सावित्री बनकर घूम रही हो और वो साला पूर्वी की नजरो में देवता बना फिर रहा है लेकिन मैं जानती हु तुम दोनों की असलियत,मैंने लाइब्रेरी में सब कुछ देखा और सुना था ..”
मालती का चहरा देखते ही देखते लाल पड़ गया था ..
“ओह तो ये बात है ,इस लिए तुम हमारी जासूसी करवा रही थी “
“गौरव ने मुझे ठुकराया है ,मैं उसे बर्बाद कर दूंगी “
मैं चिल्लाई ,वही मालती ने अपने सामने रखा हुआ पानी पी लिया
“तुम कितना भी चीखों लेकिन तुम्हारी बात पर कोई भी भरोसा नही करने वाला “
उसके होठो में कमीनी सी मुस्कान फैल गई ..
“लेकिन सच को कितने दिनों तक छिपा के रखोगी “
“सच..??”
वो जोरो से हँसी
“सच क्या है सपना,जो तुमने उस दिन देखा वो सच है ?? कोई भी सच बिना प्रूफ के सच नही होता,और तुम मानो या ना मानो मैं और गौरव अब अलग हो चके है वो पूर्वी से बहुत ही प्यार करता है ,क्या तुमने उस दिन के बात हमे कभी मिलते हुए देखा..??
नही देखा होगा क्योंकि फिर हम कभी नही मिले,गौरव अब सच में पूर्वी से प्यार करता है ,यही सच है ,और ये भी सच है की मैं अब उनके जीवन से निकल चुकी हु ...तुम कितनी भी जासूसी करवा लो तुम्हे कुछ नही मिलने वाला क्योकि अब वो दोनों एक है …”
मालती ने एक गहरी सांस लेते हुए कहा..
मैंने अपने चहरे पर उतना गुस्सा लाया जितना मैं ला सकती थी..
“पूर्वी और गौरव कभी एक नही हो सकते ….पूर्वी को कभी प्यार नही मिलेगा,वो जिससे भी प्यार करेगी मैं उसे छीन लुंगी “
मैं सच में कांपने लगी थी...ये बोलते हुए मेरे दिल में इतनी तकलीफ़ हुई की मेरे आंखों में आंसू आ गए ..
लेकिन मालती के चहरे में आयी हल्की मुस्कान मुझसे छिप नही सकी ..
“तो तुम्हे गौरव से कोई लेना देना नही है “
उन्होंने अपने चहरे में आश्चर्य का भाव लाते हुए कहा
“गौरव ...वो साला बुढ्ढा ,मेरे पास लड़को की कोई कमी है क्या जो मैं उसे लाइन दूंगी ,लेकिन पूर्वी उससे प्यार करती है और मैं उसे कैसे खुश देख सकती हु ..”
मालती मेडम और ही खुश दिखाई दे रही थी ..
“ओह तो ये बात है ,तुम दोनों के बीच दूरियां पैदा करना चाहती हो ,अच्छी बात है तुम्हे मदद करूंगी “
अब मैं चौकी
“तुम ..”
“गौरव ही तो मेरा एक सहारा था ,वो भी अब किसी और से प्यार करने लगा है ,अगर गौरव पूर्वी के साथ रहेगा तो मेरा भी तो नुकसान है ना ,लेकिन तुम ये सब करोगी कैसे “
मेरे होठो में मुस्कान फैल गई
“औरत का जिस्म किसी भी मर्द को बहकाने के लिए काफी है “
उसने मुझे ध्यान से देखा
“तुम पागल हो जो ऐसा सोचती हो ,गौरव को बहकाना इतना भी आसान नही है ..”
“देखते है ..
”
मैं इतना ही बोलकर वंहा से निकल गई ………
*******
गौरव को बहकाने का हर प्रयास नाकाम हो रहा था,और आखिर में मैंने वो कदम उठा दिया जिसने चाल को उल्टा ही कर दिया ,
मैंने सोचा था की कोई भी मर्द मुझ जैसी लड़की को अकेले में नंगी देखकर मचलेगा ही,और अगर वो थोड़ा भी मचलता तो मेरा काम हो जाता क्योकि मैंने लेब में पहले ही कई कैमरे लगवा दिए थे ,मैंने गौरव के सामने अपने कपडे खोल दिए और उसे खुला सेक्स का आफर भी दे दिया,लेकिन साला वंहा से भागता हुआ सीधे पूर्वी के पास पहुच गया..
अब तो गौरव पूर्वी के नजरो में भगवान बन चुका था ,और उसने उससे शादी करके अपना बनाना ही सही समझा ,
पूर्वी को रोकना अब नामुमकिन ही था,अब चाहे रोहन हो या गौरव उसके नसीब में ही धोखेबाज लिखे थे तो कोई क्या कर सकता है..
रोहन की मोहोब्बत जिस्मानी ज्यादा थी(ऐसा मुझे लगता है ) और गौरव तो दौलत से …??क्या सच में गौरव पूर्वी की दौलत से प्यार करता था,ये तो वक्त ही बताने वाला था क्योकि पूर्वी ने गौरव को पाने के लिए जो कीमत चुकाई थी वो थी अपने पिता के दौलत से बेदखल होना…
और गौरव को इससे कोई भी फर्क पड़ता मालूम नही हुआ,
या वो बस मालती का मोहरा ही था,लेकिन मैं बराबर उसपर भी नजर रखे थी और किसी भी एंगल से ये नही लगा की वो अब गौरव से किसी भी तरह के किसी नाजायज संबंध में है…
सब कुछ बदल चुका था,पूर्वी ने शादी कर ली ,रोहन और मेरे रिश्ते भी इससे प्रभावित हुए,हम दोनों ही बुझे बुझे रहने लगे थे,कारण था मेरी बदनामी ,कालेज जाना भी मुश्किल हो गया था,रोहन ने मुझे बहुत सहारा दिया लेकिन वो भो लोगो को चुप तो नही करवा सकता था,लेकिन इन सब में एक और चीज हुई …
मैं मालती मेडम से घुलने मिलने लगी,और मेरा इंटरेस्ट अब मैंने अपने केमेस्ट्री के इंटरेस्ट को सीरियसली लेना शुरू किया,उसमें कुछ हाथ मालती के घर से मिले हुए उन कागजात का भी था,जिसे समझने में मेरा दिमाग खप रहा था,
मेरा इंटरेस्ट इतना बड़ा की मैंने MBA की जगह एमएससी करने को प्राथमिकता दी और उसके बाद पीएचडी करने लगी …
मालती ने फिर से मुझे अपने साथ रखा …
मालती की एक बात तो थी,की वो कभी भी गौरव को उकसाने के खिलाफ नही थी,वो मुझे गौरव को उकसाने में मदद करती थी,और इसलिए मैंने गौरव के साथ काम करने की बात उससे की और वो झट से मान भी गई,ये प्रोजेक्ट गौरव के लिए बेहद ही इम्पोर्टेन्ट था और मेरे लिए भी क्योकि इसका आईडिया मालती ने ही गौरव को दिया था,अब मैं गौरव को असिस्ट कर रही थी,कई ऑपरट्यूनिटी एक साथ मेरा दरवाजा खटखटा रही थी ,देखना ये था की मैं कितनो को अपना बना पाती हु …………..
अध्याय 16
“जानती हो मैंने पूर्वी से वही कहा जो तुमने कहने को कहा था ,और सरप्राइज की वो मान भी गई “
रोहन खुश था,क्योकि उसने पूर्वी को इस बात के लिए मना लिया था की अगर गौरव धोखा करे तो वो भी रोहन के साथ अफेयर स्टार्ट कर देगी ..
रोहन की बात से मैं मुस्कुराई
“उसे गौरव पर पूरा भरोसा है .”
मैंने अपने विस्की का एक सिप लिया..
“और मुझे तुमपर पूरा भरोसा है “
रोहन का चहरा खिला हुआ था,
“ह्म्म्म लेकिन यार वो साला टूटने का नाम ही नही लेता,सब कुछ तो दिखा दिया उसे अब और क्या करू”
मैंने एक गहरी सांस ली
रोहन ने मुझे अपने बांहों में भर लिया ,हम एक बार के काउंटर में बैठे थे और सामने लोग डांस फ्लोर में डांस कर रहे थे...रोहन ने अपनी उंगली सामने डांस फ्लोर में डांस करती हुई एक लड़की पर टिकाई ..
“उसे देख रही हो,उसका नाम शबाना है ,वो कभी कालेज की मासूम सी पढ़ने वाली लड़की हुआ करती थी,और आज …”
मेरी आंखे बड़ी हो गई पता नही रोहन क्या कहने वाला था..
“आज क्या “
“आज वो कई अमीर लड़को की रांड है “
मैंने फिर से उस लड़की को देखा ,चहरे में मासूमियत आज भी थी लेकिन कपड़े उसने उत्तेजक पहने हुए थे,और लड़को के बीच बहुत ही सेक्सी अंदाज में कूल्हों को मटकाकर डांस कर रही थी..
“और उसे देखो उसे तो पहचानती ही होगी ,हमारे स्कूल में थी,पापा IAS और माँ डॉक्टर ,याद आया पहले चश्मा लगाती थी “
मैं उस लड़की को देखकर दंग रह गई
“ओ माय गॉड ये तो आभा है ना,सच में यकीन नही होता कितनी अलग लग रही है,”
“कभी सोचा था की ये लड़की जो स्कूल में चश्मा पहन कर हमेशा फास्ट आने की कोशिश करती थी,और मेडिकल का एग्जाम दिला कर इसने स्टेट टॉप किया था आज यंहा ऐसे कपड़े पहन कर घूम रही है ,इसे पैसे की कोई कमी नही है लेकिन अब इसे रोज हुकअप्स चाहिए,रोज नया मर्द या फिर मेरे जैसा कोई सॉलिड बंदा जो इसकी आग बुझा सके ..”
रोहन की बात सुनकर मैं सोच में पड़ गई की वो आखिर मुझे दिखाना और समझाना क्या चाहता था..
“आखिर तुम कहना क्या चाहते हो “
“यही की कोई भी शरीफ नही होता,अगर कोई शरीफ दिखे तो ये समझना की उसे बस अभी तक गलत काम। करने का मौका नही मिला,या उसमें वो ताकत और हिम्मत नही है,गौरव क्यो तुमसे बच जाता है ,क्योकि वो तुमसे डरता है की कही तुम उसके रिश्ते को खराब ना कर दो ,उसे बस बदनामी का डर है ,और पूर्वी क्यो खुलकर नही जी पा रही है ,क्योकि उसे अपने रिश्ते के टूटने का डर है,हर डर बाहरी नही होता कुछ बहुत ही भीतरी होते है,धोखा खाने का डर भी होता है तो धोखा देने का डर भी होता है,पूर्वी को यही डर है की वो कही गौरव से धोखा ना कर बैठे...अगर उन दोनों का डर टूट गया तो भी हमारे जैसे हो जायेगें,बेख़ौफ़ ..
”
रोहन ने एक ही सांस में अपनी ड्रिंक खत्म कर दी ,उसकी आंखों में अजीब से भाव थे जो मेरे समझ के बाहर थे,लग रहा था जैसे कोई चीज उसे अंदर ही अंदर खा रही है ..
“तू ठीक तो है ना,क्या हो गया तुझे “
“मुझे दुख होता है शबाना और आभा जैसी लड़कियों के लिए”
रोहन की बात से मैं और भी चौक गई ,अब इसे उनके लिए क्यो दुख होने लगा,लेकिन सच में उसके आवाज में एक दर्द था ..
“मुझे दुख होता है क्योकि वो ये सब तो कर रही है लेकिन उन्हें भी अंदर कही से ये पता है की ये सब गलत है ,और वो एक गिल्टी फिलिंग में जी रही है ,इन्होंने अपना बेहतरीन केरियर खत्म कर दिया ,सिर्फ मजे के चक्कर में ,और वो गिल्ट उन्हें इस मजे को अच्छे से लेने भी नही देता,जिस्म और मन की जरूरतें उकसाती है वही समाज के बिछाए हुए मर्यादाओं का जाल के कारण निकला हुआ गिल्ट उन्हें फंसा देता है,वो दोहरी जिंदगी जीने पर मजबूर है,आखिर क्या गलती यही इन लड़कियों की ,क्या इन्हें अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जीने का कोई हक नही है …”
रोहन की आंखों में आंसू देखकर मैं डर गई थी,वो कभी इतना सीरियस नही होता था,मैं उसके गालों पर अपने हाथो को फिराया
“क्या हो गया है तुझे ये कैसी बात कर रहा है “
रोहन ने एक पल के लिए मुझे गौर से देखा
“क्या तुझे कभी गिल्ट होता है की तू अपने सबसे अच्छे दोस्त के साथ सेक्स करती है ,या इतने लड़को के साथ सेक्स करने में तुझे ऐसी फिलिंग आयी “
मैंने थोड़ा सोचा लेकिन मेरा दिमाग क्लियर था
“नही तो कभी नही “
“लेकिन आभा और शबाना क्यो रोती है अपने इस हालत पर ,वो तो बस अपने जीवन को इंजॉय कर रही है ना ,फिर उन्हें ऐसी फिलिंग क्यो होती है “
मैंने गहरी सांस ली
“क्योकि उनकी परवरिश अलग तरह से हुई है,उन्हें लगता है की वो गलत कर रही है,”
मैंने सिंपल लेकिन सही जवाब दिया
“यही तो दुख होता है यार ,वो तुम्हारे जैसी क्यो नही हो सकती ,पूर्वी तुम्हारे जैसे क्यो नही हो सकती ,”
अब मुझे उसकी पूरी बातों का मतलब समझ आया,रोहन का ये रूप मैं पहली बार देख रही थी,और आज मुझे अहसास हुआ की वो किसी की कितनी फिक्र कर सकता है…
“तो ये बात है “
“हा यार यही बात है ,मुझे वो चाहिए लेकिन ..लेकिन मैं ये नही चाहता की वो मेरे साथ रिश्ते के कारण गिल्ट महसूस करे,उसे इसमें खुसी मिलनी चाहिए ,मैं सेक्स के बाद उसके चहरे में मुस्कान देखना चाहता हु ना की दुख और चिंता ..
”
उसकी भोली बातों से मेरे होठो में मुस्कान खिल गई
“ओह तो जनाब सेक्स तक सोच चुके है “
इतने देर में पहली बार उसके होठो में एक मुस्कान खिली
“क्यो नही हो सकता क्या,अगर तुम साथ हो …”
वो गाना गाने लगा
‘तो तुम मुझे बकरा बना कर उसे हलाल करने की सोच रहे हो “
हम दोनों ही हँस पड़े
“यार तुझे भी गौरव के साथ मजा आएगा,साले ने इतना तो तदफ़ाय है तुझे “
“ह्म्म्म वो तो मुझे नही पता लेकिन मुझे तेरे ऊपर जरूर शक हो रहा है की मौका मिलने पर तू कुछ कर भी पायेगा की नही ,कही सेंटी हो गया तो “
“यार मुझे मेरी पूर्वी हंसती हुई चाहिए,कोई ऐसा प्लान बना ना की उसे ये सब गलत ना लगे ,वो भी इसमें इन्वॉल्व हो जाए “
मेरा शैतानी दिमाग चलने लगा था ..
“एक चीज हो सकती है ,अगर ऐसा हो जाए की गौरव को पूर्वी के साथ तुझे देखकर या किसी और को देखकर जलन के अलावा भी कुछ हो ,यानी उसे भी मजा आये तो “
रोहन मुझे घूरने लगा
“यानी वो स्टोरी टाइप ,हॉट वाईफ वाला,वो क्या बोलते है cuckold ,तुझे लगता है ऐसा होगा,या पूर्वी ऐसा होने देगी “
मेरे होठो में एक कमीनी सी मुस्कान फैल गई
“cuckold कहना तो गलत होगा लेकिन हॉट वाईफ वाली कहानी यंहा चल सकती है ,गौरव क्या हर मर्द ये चाहता है की उसकी बीवी सीधी साधी हो लेकिन होई सेक्सी ,हॉट…”
“क्या फिजूल की बात है सीधी साधी लड़की सेक्सी कैसे हो सकती है वो तो क्यूट होती है ना”
“हम्म लेकिन शबाना और आभा भी तो सीधी साधी लडकिया है ,चाहे वो जो भी कर ले है तो वो अब भी सीधी साधी इसीलिए तो उन्हें गिल्ट होता है “
“हा लेकिन अगर ऐसा हो भी गया तो पूर्वी तो दुखी ही रहेगी ना”
“क्या हो अगर पूर्वी को समझ ही नही आये की वो गलत कर रही है तो ..”
“ऐसा तो नामुमकिन है यार क्यो सपने दिखा रही है “
“कुछ भी हो सकता है तूने अभी तो कहा था ना,हर आदमी कमीना है बस कमिनियत को निकलने का अवसर मिलना चाहिए “
रोहन सोच में पड़ गया,फिर अचानक से बोला
“अगर ऐसा हो गया ना जान तो तू जो बोले वो करूंगा “
मैं जोरो से हँस पड़ी
“इतना उतावला होगा ना तो कुछ भी नही मिलने वाला,सब बहुत ही प्लान के साथ करना होगा,पहला काम कर की पूर्वी को जिम की फ्री मेम्बरशिप दे दे और साथ और उसे बोल की साथ में गौरव को भी लाये ,टेस्ट करते है की गौरव सच में अपनी बीवी का हॉट रूप देखकर कैसे विहेब करता है “
“अगर वो गुस्सा हो गया तो प्लान खराब ..”
“तू पागल ही है ,अगर वो गुस्सा किया मतलब दोनों के रिश्ते में दरार,पूर्वी हमेशा से स्वकछन्द जीने वाली लड़की है ,उसे थोड़ा तो बुरा लगेगा अगर गौरव उसे बांधने की कोशिश करेगा,और इसी से उनके रिश्ते में थोड़ी खटास आएगी उससे पूर्वी का वो रिबेलियस स्वरूप फिर से लौटेगा...
और अगर गौरव को कोई प्रॉब्लम नही हुई तो हम इसे दूसरे लेवल तक ले जायेगे,क्योकि जितना आगे मैं जाऊंगी पूर्वी भी उतना आगे जाने की कोशिश करेगी ..”
रोहन मेरा प्लान सुनकर दंग रह गया..
“तू तो सच में कमीनी है ,और ये सब तू सिर्फ मेरे लिए कर रही है “
उसने बड़े ही प्यार से पूछा ..
“हा इसमें तुझे भी फायदा होगा ..”
“मतलब और किसे फायदा होगा ..”
मैं हँसी
“वक्त आने पर वो भी पता चल जाएगा “
अध्याय 17
मैं जिम में पूरी तैयारी के साथ आयी थी,मेरे टाइट कपड़े मेरे हुस्न को पूरी तरह से दिखा रहे थे,मुझे देखकर गौरव का तो गाला ही सुख रहा था और यही तो मुझे चाहिए था,क्योकि गौरव को देखकर पूर्वी जल भून गई थी,वो भी अपने जलवे दिखाने के लिए अपने जैकेट को उतार कर मैदान में आ गई थी…
लेकिन सारे मर्दों की तो जैसी चांदी ही हो गई थी ,सभी या तो मुझे देख रहे थे या पूर्वी को ,आज सभी घर जाने के बाद हमे इमेजिन करके हिलाने वाले थे..
लेकिन ये सब देखकर गौरव के चहरे में एक बदलाव आया,उसकी आंखों का गुस्सा मैं साफ देख सकती थी ,मलतब साफ था की गौरव हॉट वाईफ नही चाहता,या ये की वाईफ तो हॉट हो लेकिन सिर्फ उसके लिए,यंही घर जाकर दोनों की लड़ाई पक्की थी..
मैं मन ही मन सोच रही थी …
‘अब आएगा मजा .’
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यंहा सपना का पॉइंट ऑफ विव्यू खत्म होता है ,स्टोरी अब जिम में आ जाती है ,एक और शख्स है जो कहानी में बेहद इम्पोर्टेन्ट है रोहन...थोड़ा उसका भी विव्यू देख लेते है …
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रोहन ओबराय,इस राज्य के तीन सबसे बड़े बिजनेस मेन परिवार में से एक का वारिस...बाकी दो के इकलौते वारिस भी मेरे बचपन के दोस्त ही है ,पूर्वी और सपना ..
मेरे पापा ने मुझे बचपन से एक ही बात सिखाई की मेरे पास एक मौका है जो कभी किसी के पास नही था,वो था तीनो बिजनेस हाउस को एक करने का मौका,इसके लिए जो भी करना पड़े उसके लिए वो तैयार थे,और मुझे भी तैयार कर रहे थे…
सपना को तो मैंने बहुत ही जल्दी अपने सांचे में ढाल लिया था लेकिन पूर्वी …
पूर्वी अलग ही किस्म की लड़की थी,मौज मस्ती तो करती थी लेकिन फिर भी ना जाने कहा से उस लड़की के अंदर संस्कार नाम का एक कीड़ा था,जो उसे कुछ ज्यादा नही करने देता था..
मेरे जीवन का एक ही मकसद रहा की कैसे पूर्वी और सपना को अपने साथ लेकर तीनो बिजनेस हाउस को एक कर दु ,सभी कम्पीटिटर खत्म …
इसका एक सिंपल सा रास्ता था शादी का ,लेकिन साला शादी तो एक ही लड़की से हो सकती थी,सपना से या पूर्वी से मैं हमेशा से ही कंफ्यूज रहा था,क्योकि दोनों ही सुंदर थी ,दोनों ही अमीर थी,
दोनों में से एक मेरी बीवी बनेगी ये मुझे बचपन में ही बता दिया गया था,उनके घर वाले भी यही चाहते थे की मैं उनके घर का दामाद बनू,लेकिन बस एक दिक्कत थी वही शादी किसी एक से ही हो सकती थी,और मुझे दोनों ही चाहिए था…
आपके मकसद में एक बड़ी दिक्कत आपके इमोशंस लाते है ,और मैं भी तो आदमी ही था,मेरे भी इमोशन थे,मेरी दोनों दोस्तो ने मुझे इतना प्यार दिया की मैं उनका बुरा नही सोच पाता था,मेरे मकसद को हमेशा उनके प्यार का सामना करना पड़ता,ना चाहते हुए भी मैं उन दोनों के प्यार में गिर ही गया,एक दोस्त की तरह मैं उन्हें बेहद प्यार करने लगा,लेकिन जब जवानी आयी तो साथ में सेक्स नाम की एक चीज भी ले आयी,जांघो के बीच कुछ ऐसे मचलने लगा की उसे सम्हालना बहुत मुश्किल हो जाता था,
अब जवानी सिर्फ मुझे तो आयी नही थी साथ में पूर्वी और सपना भी जवान हुए,और साले क्या जवान हुए,सारे मर्दों की फेंटेसी बन गए थे दोनों ,साथ ही मेरे भी ,लेकिन कहा ना की जंहा प्यार आ जाता है ना वंहा साला सभी इमोशन को बर्बाद कर देता है,मैं भी उनके बारे में कुछ ऐसा नही सोच पाता था जिससे उन्हें दुख हो ..
लेकिन सपना के साथ मेरा जिस्मानी रिश्ता बन ही गया,लेकिन वो सिर्फ जिस्मानी ही रहा,हमारी दोस्ती अपनी जगह रही जिस्म की प्यास अपनी जगह रही …
बाप से मुझे सिर्फ दौलत नही मिली थी साथ ही मिला था एक अच्छा खासा चेहरा और अच्छी हाइट ,मैंने थोड़ी मेहनत करके अपने जिस्म को ऐसा तो बना ही लिया था की लडकिया एक बार मुड़ कर जरूर देखे ,और इस हुनर को और भी निखारने में मेरी मदद की सपना ने,उसकी मदद से मैंने कई लड़कियों को अपने नीचे किया वही उसे भी कई मर्दों के नीचे लाने में मैंने उसकी मदद की …
कहा ना मैं मकसद से भटक गया था…
अपनी होने वाली बीवी(शायद ) को ही दुसरो से चुदवाने में हेल्प कर रहा था..
लेकिन अभी कन्फर्म भी तो नही था की कौन मेरी बीवी बनेगी ,
इधर दूसरी होने वाली बीवी (शायद)के साथ कोई जिस्मानी रिश्ता नही बन पा रहा था,कभी कभी पूर्वी पर मुझे गुस्सा भी आता क्योकि वो मुझे इतना ज्यादा प्यार करती की मैं उसके बारे में दोस्ती के अलावा कुछ सोचने में भी असमर्थ रहता..
हम लोग बड़े हो रहे थे,कई कारनामे कर रहे थे(जो उस समय कारनामे लगते थे बाद में वही चुतियापा लगने लगे )
कुल मिलाकर खुश थे ,लेकिन साला फिर से वही बकचोदी ..
इमोशन ...और इस बार किसी और के लिए पूर्वी के लिए इमोशन..
खुद को बहुत समझाया की लौड़े अपने लौड़े मत लगा,दोस्ती तक ही सीमित रह उससे प्यार मत कर ,बीवी तो सपना भी बन जाएगी थोड़ी कामिनी है तो क्या हुआ लेकिन अपने जैसी है,लेकिन साला दिल कहा माने,सपना ने भी मना किया था की प्यार के चक्कर में मत पड़ तेरे लौड़े लग जाएंगे,लेकिन दिल..दिल ..क्या करे इस साले दिल का..
फिर दिमाग ने भी सोचा,एक से तो शादी करनी ही है पूर्वी से ही कर लिया जाए,कम से कम दुसरो से तो नही चूदवायेगी ...लेकिन ये भी सही था की फिर मैं भी किसी को अपने नीचे नही ला पाऊंगा..
मैंने वो सेक्रिफाइस कर दिया,फिर से वही दिल दिल दिल..
अपने जांघो के बीच झूलते हुए मांस के टुकड़े को भी समझा दिया की तू अबसे बस एक ही गुफा में जाएगा,ज्यादा की चाह मत कर और अगर कोई दूसरी गुफा होगी तो वो सपना की होगी ,जो उसके कहने पर ही मिल पाएगी ,यानी साले अब तेरी औकात बस इतनी है की तू इन दोनों लड़कियों की गुलामी करेगा,वो खुश हो जाए तो तुझे गुफा मिल जायेग नही तो ...बस खड़ा रहना..
अब वो भी बेचारा क्या करता,दिल के सामने मैं मजबूर था और मेरे सामने वो …
मैंने पूर्वी को प्रपोज कर दिया ,वो भी मान गई ,साला यकीन ही नही हुआ की सब कुछ ठीक से हो गया,लेकिन सपना के रहते सब कैसे ठीक से हो सकता था,लेकिन मैंने सपना को भी माना लिया,फिर लगा की सब ठीक हो गया,लेकिन दोस्तो जैसे लड़को के जांघो के बीच एक मांस का टुकड़ा होता है जो साला आदमी का दिमाग खराब करके रखता है ,उसी तरह औरतों के जांघो के बीच भी एक मांस से बनी छेद होती है जिसकी खुजली और निकलता पानी उसका दिमाग खराब कर देती है ..
वही हाल सपना का हुआ ,उस पार्टी में जायद पीकर उसने मेरा लौड़ा लेना चाहा,अब मेरा भी दिमाग खराब था जो मैं उसकी बात में आ गया ,ये जानते हुए भी की पूर्वी भी वही है ,लेकिन उसके लौड़े लेने के चक्कर में मेरे लौड़े लग गए,सपना तो पार्ट टाइम थी लेकिन जो फूल टाइम बनने वाली थी वो भी हाथ से निकल गई ..
सब ठीक हो सकता था लेकिन हाथ से निकल कर वो किसी दूसरे के हाथ में चली गई ,क्या झंड जिंदगी हो गई थी मेरी ,एक साला बुड्ढा अधेड़ आदमी कालेज की सबसे हॉट अमीर और सुंदर लड़की जो कभी मेरी थी ,अब वो उसके नीचे आने वाली थी,दोस्तो गांड का जलना क्या होता है तब मुझे समझ में आया था..
लेकिन मेरी प्यारी प्यारी दोस्त सपना ने मुझे सहारा दिया,उम्मीद जगाई ये कह के की वो गौरव धोखेबाज है ,दौलत का लालची..मैं भी था लेकिन था...प्यार और दोस्ती के चक्कर में मैं लालच से बाहर आ गया था और अपनी ही मरा ली थी ..
लेकिन मैंने सपना का साथ देने में ही अपनी भलाई समझी,सपना का साथ दिया,उसे बेनकाब करने में लेकिन जब किस्मत में लिखे हो लौड़े तब कहा से मिलेंगे पकौड़े…
गए थे गौरव को बेनकाब करने और मालती के घर से कुछ ऐसे फाइल मिल गए की सपना का मुड़ ही बदल गया..
ना जाने साला उनमें क्या था,मुझे तो बस वो फ़ोटो ही दिखा था जिसे देखकर मेरे गोटे मुह में आ गए थे,लेकिन वंहा कुछ ऐसा भी था जिसे देखकर सपना बहुत कुछ समझ गई थी,कुछ अजीब से ड्राइंगस ..
जैसे केमेस्ट्री में पढ़ते है ना केमिकल बॉन्डिंग वाले फार्मूले वैसे ही कुछ ,अब हमे कौन सा झांट केमेस्ट्री की समझ थी जो हम समझ सकते ,लेकिन सपना को कुछ समझ आ गया,उसका दिमाग कम्प्यूटर से भी तेज जो चलता है(मजाक कर रहा हु )
लेकिन इतना तो मानता हु की हम सबमे सबसे ज्यादा दिमाग वाली सपना ही है ..
और उसकी बात को टालने की हिम्मत मुझमें तो नही है ..
हा आप सब सोचेंगे की जब पूर्वी ने अपने कपड़े मेरे सामने निकालकर मुझे जलील किया था तो मुझे कैसा लगा था,यार जो आदमी उस लड़की को सालों से पाना चाह रहा हो और वो अपना चुद चटवाये,उसे कैसा लगेगा,कसम से बहुत मजा आया,हा अपने किये पर शर्म तो आया था लेकिन ...लौड़ा भी कोई चीज होती है दोस्तो जो खड़ी हो जाए ना ,तो शर्म अपनी माँ चुदाने चली जाती है,
हा पूर्वी ने मुझे जलील किया लेकिन यार जलील होना या ना होना तो मेरे ऊपर था ना,ऐसे चुद को फिर से चाटने मिल जाए तो मैं रोज ही जलील हो जाऊ,ऐसे भी मुझे तो लग रहा था की मैं सच में उसका कुत्ता बन गया हु और अब उसे कुतिया बना के उसकी लूंगा,लेकिन पूर्वी ...साली ने खड़े लंड में जो धोखा किया सबसे ज्यादा उसका ही दुख था मुझे…
और सामने पूर्वी थी ,कोई और रहती तो उसकी माँ बहन कर देता लेकिन ना जाने उससे क्यो डर लगता था,या ये कहु की उसकी इज्जत थी दिल में ,एक प्यार था उसके लिए,उसे दुखी देखकर दुख होता है,उसके हंसता देखकर दिल खिल जाता है ,उसके लिए गलत सही का फर्क करने का जी नही चाहता जो वो बोले बस करदो ऐसा लगता है ,उसके प्यारे से चहरे को बस देखते रहने का दिल करता है,उसके होठो में बस मुस्कान हो और उस होठो को मैं प्यार करू बस यही लगता है,उसके जिस्म के हर कटाव पर अपनी जान लुटा दु कुछ ऐसा लगता है,उसके मासूम से चहरे में बस खो जाऊ थोड़ा ऐसा भी लगता है,पाने की चाह से ज्यादा कुछ देने का मन करता है ...अरे ये क्या हो गया ,मैं तो अपनी कहानी बता रहा था ना..
ओह फिर से ये साला दिल दिल दिल …
ओके कहानी में आते है…
तो मालती के घर से कुछ नही मिला ,लेकिन सपना को जैसे बहुत कुछ मिल गया हो ,सारे फाइल्स की फ़ोटो खिंचकर उसने अपने पास रख लिए,मैं भी उसे रख सकता था लेकिन साला इतना टेंसन था और कोन नया टेंसन पाले …
कुछ दिन बाद ही एक और जबरदस्त न्यूज़ मिली की सपना ने गौरव के सामने अपने कपड़े निकाल दिए लेकिन उसने कोई भाव नही दिया..
साला सच में चूतिया था गौरव ,लेकिन कहते है की चूतिया लोग ही सारे मजे लूट ले जाते है,सपना उसके लिए अपने कपड़े खोल रही थी ,पूर्वी खोलने वाली थी और हम साला बस सपने में ही जी रहे थे..
इसके बाद से सब कुछ बदलने लगा,पूर्वी जैसे बौखला गई और सीधे मेरी बीवी बनने की बजाय उस फटीचर प्रोफेसर की बीवी बन गई ,सपना गंभीर हो गई और पता नही उसे क्या चस्का चढ़ा जो बिजनेस ना सीखकर केमेस्ट्री सीखने लगी ,और मेरा बाप मुझपर फुलटू गुस्सा हुआ,उसके हमेशा का सपना मैंने एक ही पल में तोड़ दिया,ना तो सपना मेरी रही ना ही पूर्वी …
अब मुझे बिजनेस सम्हालने की जिम्मेदारी मिल गई ,जैसे तैसे सब सम्हाल रहा था ,सपना और पूर्वी के पिता जी के कहने पर मैंने पूर्वी को अपने पास जॉब दिया,सच कहु तो मुझे अपनी जिंदगी और बिजनेस दोनों में ही उसकी जरूरत थी,फिलिग्स तो अब भी उसके लिए थी लेकिन दूसरे की बीवी को कितना ही लाइन मरोगे यार ,खासकर जब वो आपकी सबसे अच्छी दोस्त हो,
लेकिन सपना अब भी हार मानने वाली नही थी ,पता नही उसके दिमाग में कहा कहा से एक से एक आईडिया आते रहते थे,वो अब गौरव के साथ काम करने लगी,मुझे फिर से पूर्वी को दिलाने का वादा भी किया,और फिर गौरव को cukold बनाने की बात करने लगी,मुझे लगा की इसका दिमाग ही फिर गया है लेकिन वो सपना थी,कुछ तो सोचा होगा उसने..
उसने अपना आईडिया बताया ,अगर ऐसा हो सकता था तो मैं इसके लिये कुछ भी करने को तैयार था,अब लगा की फिर से शिलाजीत और अशवगंधा खाने का वक्त आ गया है …
मैंने अपने बावर्ची से रोज शिलाजीत और केसर मिलाकर दूध देने को कह दिया था,वो भी साला समझ गया की रोहन इस बेक into फॉर्म…
अब दो किलो की जगह 5 किलो दूध पीने का वक्त आ गया था…
क्योकि अब जिम में ही धमाल मचने वाला था……
अध्याय 18
नोट-अब स्टोरी कोई कैरेक्टर नही सीधे राइटर कहेगा
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अपने केट फाइट का नाम तो सुना होगा,दो बिल्लियों की लड़ाई,सबसे ज्यादा मजा देखने वाले को ही आता है,वही हाल अब जिम का था,कभी पूर्वी ज्यादा एक्सपोज़ करती तो कभी सपना,और दोनों में वंहा बैठे मर्दों की चांदी हो रही थी…
सबसे ज्यादा मजा आ था रोहन को ..
“लगता है शादी के बाद तुम थोड़ी सी भर गई हो “
रोहन ने पूर्वी को जलाने के लिए कहा,पूर्वी दर्पण में अपने कर्व को देखने लगी
“क्या सचमे ,कहा से “
रोहन ने आंखों से ही उसके कूल्हों को देखा,पूर्वी ने उसे घुरा लेकिन अगले ही पल उसके होठो में मुस्कान आ गई ..
गौरव थोड़ी दूर ही खड़ा हुआ उनकी बात सुन रहा था,और वो बेखबर थे..
“देखा लैला मजनू की क्या जोड़ी है ,है ना..”
सपना की आवाज से गौरव का ध्यान उसकी ओर गया..
“सच बताओ गौरव तुम्हे जलन नही होती “
सपना के सवाल का उसके पास कोई भी जवाब नही था,और अगर होता भी तो वह उसे जवाब देना मुनासिब नही समझता …
वो फिर से अपने वर्क में लग गया,ये जानबूझ कर किया गया था या अनजाने में ये तो उसे नही पता लेकिन हा गौरव और पूर्वी का वर्कआउट प्लान अलग अलग था,जैसे जिस दिन गौरव को चेस्ट में काम करना था उस दिन पूर्वी को बाइसेप्स ट्राइसेप्स और फोरआर्म पर ,इस बात से गौरव थोड़ा तो झुंझला गया था..
जिस मशीन को गौरव यूज़ कर रहा था सपना भी उसे यूज़ कर रही थी …
“हमारा वर्कआउट प्लान एक ही है ,तुम मेरे साथ ही वर्कआउट करोगे,और रोहन पूर्वी के साथ “
सपना मुस्कुरा रही थी..
“ये क्या बेहूदगी है ..”
गौरव प्लान चेंज करवाने के लिए काउंटर की तरफ बढ़ा ,लेकिन सपना ने उसका हाथ पकड़कर रोक दिया ,
“अब ये मत कहना की तुम्हे अपनी बीवी पर भरोसा नही है …”
उसने एक व्यंग मारा..
“शायद पूर्वी को तो यही लगेगा की तुम्हे उसपर भरोसा नही है इसलिए तुम प्लान चेंज करवा रहे हो ..”
आख़िर वो उसके सवाल का क्या जवाब देता..
“ऐसी कोई बात नही है बस मैं पूर्वी के साथ वर्कआउट करना चाहता हु “
सपना खिलखिलाकर हँस पड़ी
“अब मैं इतनी भी बुरी तो नही,अरे थोड़ा मजा उन्हें भी करने दो और थोडा तुम भी करो”
गौरव सच में झुंझला गया था
“मैं यंहा मजे करने नही आया हु “
वो गुस्से में पूर्वी और रोहन की तरह बढ़ा..
इधर
“इसे ऐसे नही मेरी जान थोड़ा स्ट्रेट पकड़ो “
रोहन पूर्वी के कमर को पकड़े हुए उसे एक वर्कआउट करवा रहा था,गौरव उसे देखकर थोड़े ही दूर में रुक गया,उसे ये सब देखकर गुस्सा तो बेहद आ रहा था लेकिन यंहा भीड़ में कर भी क्या सकता था..
“यार रोहन ये कैसा प्लान तैयार किया है ,गौरव जी कहा है “
“वो सपना के साथ वर्कआउट कर रहे है “
पूर्वी अचानक से खड़ी हो गई
“वाट,तुम पागल हो क्या “
तभी उसकी नजर गौरव पर पड़ी उसने खुद को सम्हाल और उसकी ओर मुस्कुरा कर देखने लगी ,गौरव को इतना तो समझ आ चुका था की जो भी हो रहा है उसमें सपना का कोई हाथ नही है …
रोहन भी अब गौरव को देख चुका था
“कम आन यार तुम लोग भी इससे हमारे बीच थोड़ी अंडरस्टैंडिंग बनेगी ,ऐसे भी दिन भर तो हम साथ रहते ही है “
रोहन ने एक सफाई दी
“इसलिए तो मैं कह रही हु की मेरा और गौरव का प्लान एक साथ रखो,हम दोनों तो दिन भर साथ रहते ही है अब यंहा भी तुम्हे साथ मस्ती करनी है “
साथ मस्ती करनी है ...ये बात गौरव के दिमाग में घूम गई इसका मतलब क्या हुआ,एक साफ सा मलतब तो ये था की वो काम के दौरान भी मस्ती करते है ,क्या वैसी ही मस्ती जो ये यंहा कर रहे है ,यू कमर को झुना और यू पूर्वी के कूल्हे को सरेआम देखना ..
गौरव का गाला थोडा सुख गया वो थोडा नर्वस हो चुका था..
“तुम कुछ क्यो नही बोल रहे हो गौरव “
पूर्वी ने अब बात गौरव के ऊपर पटक दिया ..
गौरव थोड़ा हड़बड़ाया वो अब भी अपनी दुनिया में खोया हुआ था..
“क्या ..क्या बोलूं मैं जैसा इन्हें ठीक लगे,ऐसे भी इंस्ट्रक्टर तो यंही है “
गौरव जैसे अनजाने में ही बोल गया था
“देखा एक तुम्हारे पति देव है और एक तुम हो जो इनपर ही शक करती हो “
रोहन ने पूर्वी पर एक जोक मार दिया
“मैंने कब शक किया “
वो भी चौकी
“और नही तो क्या,तुम ये नही चाहती की गौरव सपना के साथ वर्कआउट करे इसलिए ऐसा बोल रही हो है ना,सपना से इतना डर या फिर गौरव पर भरोसा नही है”
उसकी बात सुनकर पूर्वी ने एक बार गौरव की ओर देखा,गौरव भी दंग था क्योकि ऐसी ही कुछ बात अभी अभी सपना ने उससे कही थी ..साले दोनों का सुर एक ही है ..गौरव ने अपने ही मन में सोचा..
“ऐसी कोई भी बात नही है समझे,ना ही मैं सपना से डरती हु ना ही मुझे गौरव पर कोई शक है ,मुझे इनपर अपनी जान से भी ज्यादा भरोसा है “
पूर्वी ने ऐसे कहा जैसे वो जवाब नही क्यो सफाई दे रही हो ..
और रोहन हँस पड़ा
“झूठी कही की अगर ऐसा है तो यही प्लान चलने दो क्या प्रॉब्लम है “
अब पूर्वी भी चुप थी वो अब गौरव को देख रही थी इस उम्मीद से की गौरव कुछ बोलेगा ,लेकिन गौरव बोलता भी क्या की उसे पूर्वी पर शक है ,और वो नही चाहता की वो रोहन के साथ वर्कआउट करे...नही ये तो नही बोल सकता था
“यार वो सब ठीक है लेकिन सच कहु तो मैं सपना के साथ थोड़ा अनकम्फेर्टेबल हु “
गौरव ने अपनी बात रखी
“अरे यही तो मौका है अपनी दूरियों को कम करने का,वरना उसके साथ काम कैसे कर पाओगे ..”
रोहन झट से बोल गया ,गौरव का तो नही पता लेकिन पूर्वी उसके आंखों में नाचते हुए शैतान को जरूर देख पा रही थी , पूर्वी को लगा की रोहन असल में उसके ऊपर चांस मारने के लिए ये सब कर रहा है…
“ठीक है ओके एक सप्ताह देखते है,लेकिन अगर अगले सप्ताह सही नही लगा तो ..”गौरव ठंडे स्वर ने कह गया
“बिल्कुल कोई प्रॉब्लम नही तुम लोग जब बोलो प्लान चेंज कर देंगे ..”
रोहन की बात से गौरव को थोड़ी शांति मिली,समझने वाली बात ये थी की सपना की किसी को कोई भी परवाह ही नही थी ,पूर्वी सोच रही थी की इस प्लान के चलते कही रोहन उसपर ट्राय ना मारे और गौरव सोच रहा था की इस प्लान के चलते कही रोहन पूर्वी पर ट्राय ना मारे,मलतब दोनों ही एक ही बात को सोच रहे थे,सपना क्या करेगी इसकी किसी को फिक्र ही नही थी ….
क्यो...…??
क्योकि पूर्वी को गौरव पर पूरा भरोसा था ..
यही बात आखिर रोहन ने पूर्वी से पूछ ली
“तुम सोच रही हो की इस प्लान के चलते मैं तुम्हारे करीब आने की सोच रहा हु...है ना ,ऐसे तुम सही सोच रही हो .
”
रोहन मुस्कुरा रहा था,पूर्वी ने एक मुक्का उसके पेट में दे मारा
“जानती हु तेरी नियत को ,बेचारे गौरव जी को उस चुड़ैल के साथ फंसा दिया “
रोहन थोड़ा जोरो से हंसा लेकिन फिर गंभीर भी हो गया,पूर्वी उसके चहरे के बदलते हुए रंग को देख रही थी
“मुझे लगता है की गौरव को भी इसी चीज से प्रॉब्लम है की कही मैं तुम्हारे करीब ना आ जाऊ”
उसने कांच से गौरव की ओर देखा वो सच में नजर बचा बचा कर उन्हें ही देख रहा था..
पूर्वी कुछ भी नही बोली
“ये सच है ना की तू तो गौरव पर पूरा भरोसा करती है,उस लड़की के साथ रहने पर भी कंफर्टेबल है जिसे तू बिल्कुल उसके पास नही देखना चाहती लेकिन गौरव...गौरव तुझपर शक करता है ..”
रोहन की बात से पूर्वी ने उसे गुस्से से घुरा तो जरूर लेकिन कही ना कही उसे ये सही लग रहा था…
“उसे ये परवाह नही है की उसके साथ सपना है उसे ये परवाह है की तेरे साथ मैं हु “
रोहन ने ठंडे स्वर में कहा
“रोहन तू ज्यादा बोल रहा है ..”पूर्वी ने अपना गुस्सा दिखा ही दिया
“ह्म्म्म मेरी बात पर क्यो यकीन करने लगी,घर जाकर देखना जब वो तुझसे यही सब सवाल पूछेगा ...चल आज तेरा पहला दिन है तो इतना काफी है वरना जकड़ आ जाएगा “
वो पसीना पोछते हुए वंहा से निकल गया था ,वही पूर्वी अभी भी उस सोच में डूबी हुई थी क्या सच में गौरव उसे कुछ कहेगा …??
*************
इधर
“क्यो सर अपनी बीवी को उसके बॉयफ्रेंड के साथ देखकर मजा आ रहा है “
सपना की इस बात से गौरव गुस्से में लाल हो गया था,वो कांच के जरिये रोहन और पूर्वी को बाते करता हुआ देख रहा था..
“तुम अपनी बकवास बंद करो वरना यही उठाकर मारूंगा ..”
उसने अपने हाथो में पकड़ा हुआ डंबल सपना को दिखाया
सपना उसकी हरकत से जोरो से हँस पड़ी क्योकि उसने गौरव को ऐसी बात करते कभी नही सुना था ,वो तो अभी तक एक सीधे साधे आदमी की छबि लेकर बैठा था..
“इसे कहते है हॉट वाइफ का बेचारा पति..”
सपना आगे को जाने लगी लेकिन फिर अचानक से पीछे मुड़ी
“ऐसे सर एक सलाह देना चाह रही हु,घर जाकर ये गुस्सा पूर्वी पर मत दिखना उसे पसंद नही आएगा की कोई उसके बॉयफ्रेंड के बारे में गलत कहे ..”
“पूर्वी मेरी बातों को समझती है ..”
गौरव ने उसे घृणा की दृष्टि से देखा
“ओह तो आजमा कर देख लेना की आखिर पूर्वी क्या उत्तर देती है ..”
सपना के होठो में कमीनी सी मुस्कान खिली और वो आगे निकल गई ...
अध्याय 19
घर जाते वक्त पूर्वी और गौरव दोनों ही चुप चाप थे ,दोनों ही अपने किसी काल्पनिक दुनिया में खोए से लग रहे थे..
घर जाते ही पूर्वी बेडरूम में घुसने लगी लेकिन तभी उसे गौरव की आवाज आयी ..
“तुम्हे ऐसे शो ऑफ नही करना चाहिए ,आखिर अब तुम मेरी बीवी हो ..”
गौरव की बात सुनकर पूर्वी आश्चर्य से उसे देखने लगी..
“शो ऑफ ..
??? कहना क्या चाह रहे हो आप “
पूर्वी बेडरूम में ना जाकर फिर से ड्राइंगरूम कम हाल में आ गई
“यही की तुम मेरी बीवी हो और मुझे ये सब पसंद नही की तुम उन लोगो के सामने ऐसे कपड़े पहनो “
गौरव बोल तो रहा था लेकिन फिर भी वो पूर्वी से नजर नही मिला रहा था वही पूर्वी की निगाह आश्चर्य से उसके ऊपर ही टिकी हुई थी ..
“कैसे कपड़े गौरव...क्या वंहा साड़ी पहन कर जाऊंगी “
पूर्वी का ऐसा जवाब आएगा ये तो गौरव ने भी नही सोचा था,उसने अपना सर उठाकर पूर्वी को देखने लगा
“मैं ये तो नही कह रहा की साड़ी पहनो लेकिन जिस्म की नुमाइश करना कहा तक सही है …”
पूर्वी को ना जाने क्या हुआ वो आश्चर्य से हँस पड़ी
“जिस्म की नुमाइश..? आप ये क्या बोल रहे है आपको पता भी है ..??आपको लगता है की मैं वंहा अपने जिस्म की नुमाइश कर रही थी,”
गौरव उसकी बात सुनकर चुप ही था लेकिन वो अब भी पूर्वी से नजर नही मिला था जैसे वो उससे बहुत गुस्सा हो ..
“गौरव जी मेरे शरीर में अगर कटाव है तो वो तो दिखेंगे ही ना,और शादी से पहले भी तो मैं ऐसे ही कपड़े पहनकर जिम जाया करती थी “
“शादी से पहले की बात और थी पूर्वी लेकिन अब ..तुम मेरी बीवी हो और कोई दूसरा मर्द तुम्हे ..”
गौरव कुछ बोले उससे पहले ही पूर्वी बोल उठी
“एक मिनट एक मिनट क्या मतलब है दूसरे मर्द से ..आप रोहन की बात तो नही कर रहे है ना …”
पूर्वी को रोहन की बात याद आ गई वही गौरव को सपना की …
दोनों की बाते सही होती हुई दिखाई दे रही थी …
“मैं रोहन की बात नही कर रहा हु पूर्वी ...लेकिन फिर भी हा वो भी तो दूसरा मर्द है ना “
इस बार गौरव का सर उठा हुआ था और वो सीधे पूर्वी की आंखों में झांक रहा था..
“वो मेरा सबसे अच्छा दोस्त है ,ये आपको भी पता है ,और साथ ही वो मेरा बॉयफ्रेंड भी रह चुका है ये भी आपको पता है ,और वो क्या मेरे कर्व देखेगा,मैं खुद उसके सामने नंगी हो चुकी हु और ये भी आपको पता है …”
पूर्वी को गौरव पर पहली बार इतना गुस्सा आया था ,वो क्या बोल रही थी ये उसे भी नही पता था..लेकिन उसकी बात से गौरव और भी भड़क उठा था ..
“नंगी देख चुका है इसका मतलब ये तो नही की अब भी उसके सामने नंगी हो जाओगी “
गौरव पहली बार पूर्वी से इतने जोरो से बात की थी ,इस बार पूर्वी फफक कर रो पड़ी …
“आप मेरे बारे में ये सोचते हो मैंने सोचा भी नही था,आपको लगता है की मैं अपने जिस्म की नुमाइश करती हु क्योकि मुझे मर्दों को आकर्षित करना है,खासकर रोहन को ..और आप ये सोचते हो की मैं उसके सामने अब भी नंगी हो जाऊंगी ...शेम ऑन यु गौरव..”
वो रोती हुई बेडरूम में भागी और दरवाजा बंद कर लिया ..
गौरव अब भी कन्फ्यूज था की बात कहा से कहा चली गई थी ,उसके बोलने का ये मतलब तो नही था…
पूर्वी सीधे ऑफिस के लिए निकल गई उसने गौरव से कोई बात नही की वही गौरव ने भी कुछ बोलना सही नही समझा ,उसने अपनी घड़ी देखी और सीधे कालेज चला गया …
***************
“तो अपने पूर्वी से सवाल कर ही दिया,आपकी शादी का पहला झगड़ा “
गौरव के लेब में घुसते ही पहला सवाल किया उसके होठो में हल्की सी मुस्कान थी ,जिसका जवाब देना गौरव ने सही नही समझा ..
वो जाकर अपना काम करने लगा ..
“रोहन ने बताया की पूर्वी आज उदास है ,मुझे समझ आ गया की क्या हुआ होगा “
गौरव को कोई जवाब देता नही देखकर सपना बोली
“इट्स नाट योर मेटर..इससे दूर ही रहो…”
गौरव ने सीधा सा जवाब दिया ..
सपना मुस्कुराने लगी ..
“शाम को जब वो आये तो उससे माफी मांग लेना”
इस बार गौरव ने सपना को देखा वो अब भी मुस्कुरा रही थी
“मैं किस गलती की माफी मांगूंगा उससे “
सपना गौरव के पास गई और अपना हाथ उसकी छाती पर रख दिया
“गलती किसी की भी ,लेकिन लड़कियों को ये अच्छा लगता है की उनका पति उससे माफी मांगे,अगर आप उससे मांफी मांगेंगे तो यकीन मानिए ,वो भी आपसे माफी मांगेगी ...और उसके बाद जो होगा उसके लिए आप कल मुझे धन्यवाद बोल सकते है ..”
सपना की बात से गौरव उसे आश्चर्य से देखने लगा
“क्या होगा ..और तुम्हे हमारे रिश्ते की कब से इतनी चिंता हो गई ??”
सपना थोड़ी हंसी
“मैं कभी नही चाहती की आपका रिश्ता पूर्वी से टूटे….”
वो गौरव के और भी पास आ चुकी थी ,गौरव को उसकी सांस अपने चहरे में महसूस हो रही थी,सपना के बोलना जारी रखा
“मैं बस ये चाहती हु की हम भी थोडा मजे ले ले “
उसकी इस हरकत से गौरव बुरी तरह से घबरा गया और तुरंत ही उससे दूर हो गया ..
उसकी इस हरकत और घबराहट को देखकर सपना जोरो से हँस पड़ी ..
“यकीन मानिए सर ,आज माफी मांग लेना ,चलिए अब काम करते है ..”
सपना मुस्कुराते हुए पास रखी फाइल उठा लेती है ..
***********
इधर
“ह्म्म्म तो मेरी बात सच हो गई क्यो ?”
पूर्वी को उदास देखकर रोहन उसके केबिन में आ जाता है
उसे देखते ही पूर्वी अपने आंसू पोछने लगी
“उस कमीने ने तो मेरी जान को रुला दिया “
रोहन,पूर्वी के चेयर के पास आकर डेस्क में बैठ जाता है और पूर्वी के आंखों से गिरते हुए आंसू को अपने हाथो से साफ करता है …
“मैंने सोचा नही था की गौरव मेरे बारे में ये सब सोचते है “
पूर्वी फिर से सुबकने लगी थी ,रोहन उसके पास जाकर उसके सर को अपने गोद में रख लेता है और उसके बालो को सहलाता है ..
“साले सारे मर्द होते ही ऐसे है ,अपनी बीवी को खुश नही देख सकते ,और वो साला बुड्ढा इतनी हॉट वाइफ मिली है कुछ तो इज्जत करनी चाहिए “
इस बार पूर्वी ने रोहन को गुस्से से देखा लेकिन उसके होठो में मुस्कान थी
“वो मेरे पति है कोई बुड्ढे नही “
हल्के गुस्से के बावजूद रोहन की बात से पूर्वी के होठो में हल्की सी मुस्कान बिखर गई थी ..
“बुड्ढा है इसलिए तो अपनी जवान बीवी पर शक करता है ,यार पूर्वी सच बताना बिस्तर में तो खत्म ही हो जाता होगा ना,इस उम्र में वो भी इतनी हॉट बीवी के साथ ..”
रोहन बोल कर हँसने लगा वही पूर्वी उसे मारने लगी
“यु…...कुछ भी बोलता रहता है ..”
थोड़ी देर में ही दोनों चुप हो गए
“यार पहली बार हमारी ऐसी लड़ाई हुई है,उन्होंने कभी मुझसे ऐसे बात नही की बहुत गुस्से में लग रहे थे..”
पूर्वी फिर से उदास सी हो गई
रोहन ने एक गहरी सांस ली
“यार तुम्हे सॉरी बोल देना चाहिए “
पूर्वी ने एक बार आश्चर्य से रोहन को देखा
“बिना गलती के सॉरी कैसे बोल दु ..”
पूर्वी बोल तो रही थी लेकिन धीमे आवाज में
“अरे यार ये पति होते ही ऐसे है ,लेकिन यकीन मानो अगर तुम उसे पहले सॉरी बोलीगी तो वो भी तुम्हे सॉरी बोलेगा,और उसके बाद जो होगा की काल तुम तुझे थैंक्स बोलोगी “
गौरव की बात सुनकर पूर्वी के होठो में फिर से मुस्कान आ गई ...रोहन उसके चहरे को घूर रहा था
“ऐसे क्या देख रहा है “
“तू सच में कितनी प्यारी लगती है मुस्कुराते हुए ,साला लकी बास्टर्ड “
पूर्वी ने अपने निचले होठो को अपने दांतो में दबाते हुए रोहन के बाजुओं में एक मुक्का मार दिया ..
“जैसे भी है मेरे पति है”वो मुस्कुराते हुए बोली
“साला यही तो दुख है ..”
दोनों ही मुस्कुरा उठे ……..
*****************
शाम का समय था,गौरव पूर्वी की बेसब्री से राह देख रहा था,दरवाजा खुला और सामने पूर्वी उसे मुस्कुराते हुए दिखी,और अंदर आते ही ..
“आज जो भी हुआ उसके लिए सॉरी “
गौरव की बात सुनकर पूर्वी के होठो की मुस्कुराहट और भी बढ़ गई थी ,वो उसके पास जाकर अपना बेग सोफे में फेक दिया और उसके गले से लग गई
“सॉरी बेबी मैंने भी ना जाने क्या क्या कह दिया ..”
पूर्वी उसके सीने से लग गई,और गौरव ने उसे और भी जोरो से जकड़ लिया,
“आई लव यु पूर्वी ..सबसे ज्यादा किसी भी चीज से ज्यादा ,बस यही डर लगता है की तुम मुझसे बिछड़ ना जाओ”
गौरव ने पूर्वी को ऐसे कस लिया था की वो हिल भी नही सकती थी,जैसे वो उसे किसी भी हाल में खोना नही चाहता ..
“मैं तो हमेशा से आपकी ही हु आप ही शक करते रहते हो..”
पूर्वी सुबक रही थी और उसके आंखों के पानी को गौरव अपने सीने में महसूस कर पा रहा था,उसने पूर्वी का चहरा पर उठाया पूर्वी के होठो में एक मुस्कान खिल गई लेकिन उसके आंखों में पानी अब भी बरकरार था,गौरव ने बेहद ही प्यार से उसके होठो का पानी अपने मुह में भर लिया..
पूर्वी ने अपनी आंखे बंद कर ली थी..
“एक बात कहु बुरा तो नही मानोगी “
गौरव उसके गालों में एक किस करने के बाद बोला
“हम्म्म्म”
“आज तुम उन कपड़ो में बहुत ही सेक्सी लग रही थी “
गौरव की बात सुनकर पूर्वी की मुस्कान और भी बढ़ गई लेकिन उसने उसका कोई भी जवाब नही दिया बल्कि गौरव को और भी जोरो से कस लिया ..
“बेबी तुम रोज वैसा ही कपड़ा पहना करो लेकिन …”
पूर्वी ने अपना चहरा गौरव के सीने से उठाकर फिर से उसकी आंखों में देखा
“लेकिन मुझे बहुत जलन सी होती है जब कोई दूसरा तुम्हे घूरता है “
पूर्वी तो इस बार लगभग हँस ही पड़ी ,लेकिन उसने कुछ भी नही कहा और अपने हाथो से गौरव के गालों को मलती रही ..
“ऐसे जान थोड़ा जलना सेहत के लिए अच्छा होता है “पूर्वी की इस बात से गौरव भी मुस्कुरा उठा..
“मतलब तुम ऐसे ही जिम जाओगी “गौरव ने मुस्कुराते हुए कहा ,लेकिन पूर्वी ने फिर से उसे जकड़ लिया
“नही जैसा आप कहे वो पहनूँगी “
पूर्वी और भी जोरो से अपने चहरे को गौरव के सीने में गाड़ने लगी थी …
“ह्म्म्म तो कल से साड़ी में जाना “
गौरव की बात सुनकर पूर्वी ने अपना चहरा उठाया और आश्चर्य से गौरव को देखने लगी गौरव जोरो से हँस पड़ा …
पूर्वी उसे झूठे गुस्से से देख रही थी और देखते ही देखते उसने गौरव का चहरा पकड़कर अपने पास खिंच लिया और उसके होठो में अपने होठो को भर दिया …
“umuuuuuu”
दोनों होठ अब लार से भीग रहे थे,उस गीले अहसास में दोनों ही खोने लगे थे,सांस एक दूसरे से टकराती और गर्म मालूम हो रही थी और कोई भी पीछे हटने को तैयार नही था,गौरव ने भी पूर्वी को पूरी ताकत से जकड़ लिया,उसका हाथ पूर्वी के पीठ पर था लेकिन अब वो कमर के पास पहुच चुका था,दोनों ही एक दूसरे की मदहोशी में खोने को तैयार थी,
जंहा पूर्वी अपने दोनों हाथो से गौरव के सर को पकड़े हुए उसे अपनी ओर खिंच रही थी वही गौरव का हाथ पूर्वी के सलवार सूट के ऊपर से ही उसके नितंबो को सहलाने लगा था,वो नाजुक गद्देदार नितंबो का अहसास उसे और भी उत्तेजित कर रहा था,
“आई लव यु जा...न…”पूर्वी एक सेकंड लिए ही उससे अलग रह पाई और फिर से गौरव के होठो पर टूट पड़ी …
गौरव ने उन मुलायम कूल्हों को और भी जोर से अपनी ओर खिंच लिया था,पूर्वी अपने पैरों को और खोलने की कोशिश कर रही थी लेकिन अभी भी दोनों खड़े ही थे,पूर्वी अपने कमर को हिलाकर गौरव के कमर पर रगड़ने लगी थी,पूर्वी के जांघो के बीच का हिस्सा गौरव के एक जांघ से रगड़ कहा रहा था और उसका कोमल अहसास गौरव को दीवाना बना रहा था,उसने अब देर करना उचित नही समझा और पूर्वी को सोफे पर ही पटक दिया ,पूर्वी अब सोफे पर लेटी हुई थी वही गौरव उसके ऊपर छा गया था…
दोनों के होठ फिर से मिल चुके थे वो एक दूसरे के बदन को भरपूर सहला रहे थे,अपने और भी करीब लाने की कोशिश कर रहे थे..
अब जाकर गौरव ने पूर्वी की चुनरी हटा दी और उसके गले को चूमने लगा,पूर्वी अब उसके सर को पकड़े हुए उस अहसास में डूबने लगी …
“आह ..आउच ..”गौरव पूर्वी के वक्षो को अपने दांतो से काटने लगा था,पूवी उतेजना में सिसकियां लेने लगी थी,गौरव का हाथ अब पूर्वी के सलवार के नाड़े पर जा टिका था,एक ही झटके में वो नाडा खुल गया और देखते ही देखते सलवार पूर्वी के जिस्म से अलग हो चुका था,गौरव ने नीचे हाथ फेरा तो पाया की पूर्वी के जांघो के बीच बहुत सा पानी भ चुका है ,वो पूरी तरह से गीली थी और तैयार थी,वो अपनी उंगलियों की सहायता से पूर्वी की पतली पेंटी को नीचे करने लगा,पूर्वी भी कमर उठकर उसका साथ देने लगी ,इस बार गौरव का सर नीचे जाने लगा था,वो पूर्वी के जांघो के बीच साफ सुधरी सी जगह पर पहुच चुका था जंहा से पूर्वी का काम रस निकल रहा था,उसने देर ना करते हुए उस खारे पानी के झरने पर अपनी जीभ फेर दी ,
“ओओओओओओओओओओओओ गौरव...प्लीज नही “
पूर्वी के मुह से निकले हुए सिसकी ने गौरव को समझा दिया की पूर्वी के ना में ही उसकी हा है ,वो और भी जोश से अपनी जीभ को पूर्वी के योनि में फेरने लगा ,
“आह बेबी मैं मर जाऊंगी ,ओह गौरव मेरी जान ...माय बेबी..”
पूर्वी ने पूरी ताकत से गौरव का सर पकड़ रखा था वो उसे और भी ज्यादा दबा रही थी..
“बेबी प्लीज् कम इनसाइड मि “आखिर पूर्वी ने कह ही दिया
गौरव कैसे अपनी प्यारी पत्नी की इस इच्छा को ठुकरा सकता था उसने जल्दी से अपनी पेंट उतारकर फेक दी और अपने लिंग को सीधे ही पूर्वी की गीली चिपचिपी योनि में डाल दिया
“आह बेबी आई लव यु..”इस बार दोनों ही एक साथ बोल उठे थे,कमर चलने लगी थी और सिसकियों से कमरा गूंजने लगा था,गौरव पूर्वी के सूट में हाथ डालकर उसके सुडौल वक्षो से खेलने लगा था ,कमरे में फच फच की आवाज गूंज रही थी और गौरव किसी पिस्टन की तरह अपने कमर को हिला रहा था,आज तो पूर्वी भी आश्चर्य में थी की आखिर गौरव को हुआ क्या है वो आज झड़ने का नाम ही नही ले रहा था और पूर्वी भी किसी स्वर्ग में चली गई थी,वो आंखे बंद किये अपने प्यार को अपने अंदर बाहर होता हुआ महसूस कर रही थी,चमड़ी के घिसन से मिलने वाले सुख से भी ज्यादा प्यार में खो जाने का सुख दोनों के भीतर भर गया था……
“आई एम कमिंग बेबी”
गौरव जैसे दहाड़ा और थोड़ी ही देर में दोनों ही शांत होकर ऐसे ही एक दूसरे से लिपटे पड़े रहे ……
इस तूफान में गौरव और पूर्वी दोनों ही भूल गए थे की उन्होंने दरवाजा बंद ही नही किया है और कोई दरवाजे में खड़ा हुआ उन्हें देख रहा है…………...
अध्याय 20
जब वासना का तूफान थम जाए तब ही आसपास की कुछ सुध आती है, गौरव और पूर्वी को भी अभी अभी सुध आया था ,पूर्वी बिजली की फुर्ती से खड़ी हुई और पास पड़े कपड़ो को उठाते हुए सीधे अपने कमरे में भागी,गौरव की भी नजर उसपर थी,वो भी अपने अंगों को छुपाने की असफल प्रयास करता रहा और जल्दी से नीचे पड़े कपड़ो को उठता हुआ अंदर भागा,उसके अंदर जाते तक पूर्वी जैसे तैसे अपने कपड़ो को पहन कर तुरंत ही बाहर आयी थी,
वो दौड़ते हुए दरवाजे के पास पहुची ..
“अरे मेडम रुकिए ना”
मालती में गेट तक जा चुकी थी,वो मुस्कुराते हुए पलटी
“मुझे माफ करना शायद मैं गलत समय में आ गई “
“नही नही ,हम ही बेरखबर हो गए थे,माफी तो हमे मांगनी चाहिए,आइए ना अंदर “
पूर्वी के आग्रह पर मालती फिर से पलट कर उसके ओर आने लगी तब तक गौरव भी अपने कपड़े पहन कर बाहर आ चुका था,असल में जब मालती आयी थी तो ये दोनों अपने प्रेम लीला में व्यस्त थे,और मालती की आंखे इन दोनों पर ही जम गई लेकिन जैसे ही उनका तूफान शांत हुआ और पूर्वी और मालती की नजर मिली पूर्वी के साथ साथ मालती भी हड़बड़ा गई ,वो तुरंत वंहा से जाने लगी लेकिन पूवी ने वापस आकर उस फिर से रोक लिया …
“कम से कम गेट तो बंद कर लिया करो “
मालती ने पूवी को छेड़ा जिसका जवाब पूर्वी ने केवल मुस्कुराते हुए शर्मा कर रह गई ..
मालती कमरे में आ चुकी थी और सोफे में बैठ गई थी ,पूर्वी उसके लिए पानी लेने गई थी तभी गौरव भी प्रगट हुए…
ना ही गौरव ने कुछ कहा ना ही मालती ने..बस मालती की आंखों में गौरव ने अपने लिए एक गुस्सा देखा
पूर्वी पानी लेकर आ चुकी थी और सभी शांत थे ,
“असल में गौरव तुम्हे ये फाइल देनी थी ,आज नही दे पाई सोचा की कल ऑफिस में दूंगी लेकिन फिर सोचा की घर ही चलु पूर्वी से मिले भी बहुत दिन हो चुके है …
मालती की बात से पूर्वी बहुत ही खुश हो गई लेकिन गौरव के चहरे में कोई भी एक्सप्रेसन नही आया
“अच्छा किया मेडम आप आ गई इसी बहाने हमारी मुलाकात तो हो गई …”पूर्वी ने आभार भरे शब्दो में कहा
“हा लेकिन समय गलत हो गया अगले बार काल करके आऊंगी “
मालती की बात से पूर्वी का चहरा लाल हो गया था वो अपना सर झुककर बैठ गई ,वही मालती ने फिर से गौरव को देखा,अभी अभी कुछ देर पहले आया हुआ मुस्कान अचानक से मालती के चहरे से हट चुका था और उसकी आंखों में एक नाराजगी और गुस्सा देखकर गौरव सहम गया ……….
*********
उसी रात
पूर्वी के पिता के घर रोहन ,पूर्वी के पिता कपूर साहब और सपना बैठे हुए ड्रिंक कर रहे थे,कपूर साहब अब नशे में थे…
“उस मादरचोद को मैं नही छोडूंगा …”
कपूर साहब ने कहा ,फिर अचानक से उसे सपना का ख्याल आया
“ओह सॉरी बेटा वो मुह से निकल गया “
“कोई बात नही अंकल ,लेकिन आखिर गौरव पर इतना गुस्सा क्यो ,माना की वो गरीब है लेकिन टैलेंटेड है ,पूर्वी को खुश रखेगा और आपकी इतनी प्रोपर्टी है उसे सम्हालने बोलिये …”
कपूर साहब का चहरा और भी उतर गया
“बेटा सोचा था की पूर्वी की शादी धूमधाम से करवाऊंगा,रोहन से उसकी शादी करवाऊंगा,तेरे बाप को जलाऊंगा ,लेकिन ...लेकिन तेरा बाप अब मुझपर हंसता होगा की मेरा दामाद फटीचर है “
उन्होंने एक और घुट जल्दी से पी लिया
“नही अंकल असल में उन्हें भी बेहद दुख है इस बात का की पूर्वी इस हालत में है ,जैसे अपने कभी मुझमें और पूर्वी में कोई भेद नही किया वैसे ही मेरे पिता भी उसे मेरे जैसा ही प्यार करते है,शायद मुझसे भी ज्यादा,आखिर वो उनके सबसे बड़े दुशमन की बेटी जो है “
सपना की बात पर कपूर साहब खिलखिलाकर हँस पड़े,
“सही कहा बेटी ये तो मैं भी मानता हु की लखानी भी पूर्वी को बहुत प्यार करता है ..”
लेकिन थोड़े देर बाद उनका चहरा फिर से दुख से घिर गया,और उनका रुख रोहन की ओर गया
“इस साले के कारण आज मेरी बेटी उस फटीचर से बंधी हुई है ,तूने ओबराय का नाम डूबा दिया ,एक तेरा बाप था जिस लड़की पर हाथ रख देता वो उसकी जिंदगी भर गुलाम बन जाती और एक तू है साले ..एक लड़की को सम्हाल नही पाया “
कपूर की बात सुनकर रोहन हल्के से मुस्कुराया
“अब छोड़िए भी अंकल जो हो गया वो हो गया लेकिन गौरव को अब आपका बिजनेस सम्हालने के लिए बोलिये ,कब तक उस फटीचर से जॉब में सड़ता रहेगा ,हमारी पूर्वी बेचारी को उस घर में इस हालत में देखा नही जाता ..”
कपूर भी उसकी बात में सर हिलाता है
“ये पता नही क्या आत्मसम्मान की बात करती है पूर्वी मुझे तो कुछ भी समझ नही आता ,उस साले को अपनी वो जॉब प्यारी है पता नही क्या कर लेगा इतने पैसों में ..”
कपूर साहब का मूड फिर से बिगड़ गया ,सपना उठकर उसके पास गई और उसके कंधे में अपना हाथ रखा
“अंकल फिक्र मत कीजिये मैं और रोहन पूर्वी को फिर से आपके पास लाएंगे इस घर में लाएंगे ,हम उसी काम में लगे हुए है “
सपना की बात सुनकर कपूर खुसी से मानो झूम गया..
“तुम दोनों पूर्वी के सच्चे दोस्त हो ,तुम्हे जो अच्छा लगता है वो करो बेटा,और अगर किसी चीज की जरूरत पड़े तो मुझसे बोलने में कोई भी हिचक नही रखना “
कपूर की आंखों में जैसे अभी अभी आशा के कुछ दिए जले थे
“हम्म अंकल एक बात पूछनी थी “
“हा बोलो “
“आप मालती को जानते हो ,वो जो केमेस्ट्री डिपार्टमेंट की HOD है ..
”
सपना की बात सुनकर कपूर बहुत देर तक सोच में डूब गया …
“नही बेटा शायद एक बार मिला था उससे तुम लोगो ने जो फंक्सन किया था ना कालेज में वंहा तुमने उससे मिलवाया था,लेकिन क्यो??”
“कुछ नही बस ऐसे ही ,मुझे लगा की आप उसे जानते होंगे “
कपूर की आंखे थोड़ी बड़ी हो गई लेकिन रोहन को पता था की सपना ऐसा क्यो बोल रही है
“नही तो बेटा क्या बात है ..”
“असल में मैंने पापा और ओबेरॉय अंकल(रोहन के पापा) को भी पूछा लेकिन उन्हें कोई नही जानता सभी बस उसी दिन मालती से मिले थे लेकिन ….”
लेकिन क्या बेटा
“हमे उसके घर से ये तस्वीर मिली है “
सपना ने वो तस्वीर कपूर को दिखाई जो उसने उस दिन मालती के घर से खिंची थी …
कपूर की भी आंखे चौड़ी हो गई
“ये तो हमारी फैमली फ़ोटो है ,इसमें सभी है मैं लखानी और ओबेरॉय और तुम लोग और तुम्हारी मम्मी लोग भी है ...ये तो बहुत पुरानी फ़ोटो है बेटा जब ओबेरॉय ने गोवा में नया फॉर्महाउस खरीदा था,याद है हम सब वंहा गए थे ,”
“हा अंकल याद है इतनी पुरानी फ़ोटो मालती के पास क्या कर रही है वही मेरा पहला प्रश्न है जबकि कोई उसे पहले से नही जानता..”
“और वो फार्मूला”
अचानक से रोहन बोल उठा,जिससे कपूर चौक कर सपना को देखने लगा
“कौन सा फार्मूला बेटी “
“कुछ नही अंकल वो बस गौरव के रिसर्च की कुछ कॉपी थी ,वो मेरे टेंशन की वजह नही है लेकिन ये फोटो...मुझे समझ नही आ रहा है”
“मुझे भी कुछ समझ नही आ रहा है बेटी फिर भी मैं लखानी और ओबराय से एक बार इस बारे में बात जरूर करूंगा ,लेकिन तुम लोग ऐसा वैसा कुछ मत कर जाना जिससे कोई लफड़ा हो जाए,तुम इस लफड़े में मत पड़ो,तुम गौरव और पूर्वी पर ध्यान दो ओके “
“ओके अंकल अब हम चलते है “
सपना ने मुस्कुराते हुए कहा……..
****
कपूर के घर से निकल कर सपना और रोहन कार में बैठे ही थे की सपना बोल पड़ी
“जब तुझसे कहा गया था की अपना मुह मत खोलना तो फार्मूले की बात अंकल के सामने करने की क्या जरूरत थी”
रोहन को अपनी गलती का अहसास हुआ
“बस यार मुह से निकल गया ऐसे है क्या उनमें “
“वो जो भी है वो तेरे दिमाग के बाहर है ,अब तू अपना दिमाग मत लगाया कर,बस अब इन तीनो दोस्तो के ऊपर नजर रखना है उसका कुछ इंतजाम कर,पता नही मुझे ये जरूर लगता है की तीनो कुछ तो जानते है जो वो हमसे छुपा रहे है ,पहले तो कोई भी मालती को नही जानता लेकिन जैसे ही उनके सामने ये फ़ोटो आता है वो ऐसे चौक जाते है जैसे कोई बड़ी बात हो गई हो ,और फिर हमसे कहते है की कोई लफड़े में मत पड़ो पूर्वी और गौरव पर ध्यान दो ...आखिर क्यो..
”
सपना सब कुछ एक ही सांस में बोल गई जैसे खुद से बात कर रही हो
“इसमें क्यो वाली क्या बात है यार “रोहन ने बेफिक्री से कहा
“अबे साले तीनो ने एक ही चीज कही …”
रोहन आश्चर्य से सपना को देखने लगा
“क्या ऐसा कह दिया की तू पैनिक हो रही है “
“तीनो ने कहा की इस लफड़े में मत पड़ो और ये भी कहा की वो एक दूसरे से बात करेंगे “
“तो इसमें क्या “रोहन को कुछ भी समझ नही आ रहा था..
सपना ने गुस्से से रोहन को घुरा
“अबे चूतिये यही की ये फ़ोटो एक लफड़ा है ...और ये तीनो को पता है ,हमारी फैमली फ़ोटो किसी के पास से मिलती है और तीनो हमे ये बोलते है की इसमें मत पड़ो ये एक लफड़ा है मतलब ये की कुछ तो लफड़ा है ,इस फ़ोटो से जुड़ा हुआ जो ये लोग नही बता रहे है..”
इस बार रोहन को कुछ समझ आया
“क्या करना चाहिए”
“ये फोन में तो बात नही करेंगे शायद कही मिलेंगे,एक आदमी इनके पीछे लगा पता कर की तीनो कहा मिलने वाले है ,और जंहा ये मिलने वाले है वंहा कोई रिकॉर्डर जैसी चीज लगवा ताकि हमे भी पता चले की आखिर इन तीनो दोस्तो ने जवानी में क्या ऐसा गुल खिला दिया की अब भी उससे डरे हुए है “
रोहन बस सहमति में सर हिलाता है ……….
अध्याय 21
सुबह जिम में
“तो कैसी रही कल की रात “
रोहन पूर्वी को मुस्कुराते हुए देख रहा था,
पूर्वी के चहरे में हल्की सी शर्म और होठो में हल्की सी मुस्कान खिल गई .
“थैंक्स यार सच में उन्होंने भी मुझे सॉरी कहा”
“मैंने कहा था ना मेरा बात मानेगी तो फायदे में रहेगी “
रोहन की बात से दोनों ही मुस्कुरा उठे…
****
“तो कैसी रही कल रात “
सपना ने गौरव को मुस्कुराते हुए कहा ..
सपना की बात सुनकर गौरव के होठो में मुस्कान आ गई,
“ओहो आप मुझे देखकर मुस्कुरा रहे हो ,मतलब मेरी बात सच हो गई “
सपना ने चहकते हुए कहा ,गौरव की मुस्कान और भी बड़ी हो गई थी ..
“हा उसने भी मुझे सॉरी कहा,शायद मेरी ही गलती थी,anyway थैंक्स ...तुम्हारे सलाह के लिए “
गौरव आज सपना से इतने प्यार से बात कर रहा था की सपना को जैसे यकीन ही नही हुआ ,उसने ऐसे ही मुह बनाया..
“वाओ अचानक से आपकी जुबान कितनी मीठी कैसे हो गई मेरे लिए ,क्या चूस लिया था कल रात …”
सपना खिलखिला कर हँस पड़ी,वही गौरव को जैसे ही उसकी बात का मतलब समझ आया उसकी मुस्कान फिर से गायब हो गई …
“तुम नही सुधार सकती ..आज क्या करना है “
वो इधर उधर देखने लगा …..
***********
“सारा जोर यही लगा दोगे तो पूर्वी के ऊपर क्या लगाओगे”
गौरव को बेंचप्रेस करते देखकर सपना ने एक कुटिल मुस्कान के साथ कहा ...
गौरव ज्यादा वजन के साथ बेंचप्रेस करने की कोशिश कर रहा था…
“तुम कभी सीधी बात क्यो नही कर सकती “
गौरव उसपर झल्लाया
“अरे सीधी बात करने के लिए तो बीवी है ना,गर्लफ्रैंड से तो ऐसी ही बाते करते है “
सपना हँसने लगी
“तुम मेरी gf नही हो “
गौरव लेटा हुआ बेंचप्रेस कर रहा था और अब भी लेट हुआ था,सपना सीधे उसके जांघो में बैठ गई ..
“तो बना लो ना “
गौरव को सपना के कूल्हों का अहसास अपने जांघो पर हो रहा था,वो उसके ऊपर झुक गई थी जिससे उसके स्पोर्ट इनर से उसके मम्मे साफ साफ बाहर झलकने लगे थे,गौरव की आंखे एक बार के लिए उसके उरोजों पर ही टिक गई ,फिर उसे आभास हुआ की वो कैसी स्तिथि में है ,उसने तुरंत ही आसपास देखा,पूर्वी दूर थी और नजरो से बाहर थी और बाकियों को उनके बर्ताव से कोई फर्क नही पड़ रहा था,
“ये क्या कर रही हो हटो यंहा से “
गौरव उठने को हुआ लेकिन सपना अभी भी उसके जांघो पर ही बैठी थी,उसके उठने का नतीजा ये था की दोनों के चहरे एक दूसरे के करीब आ चुके थे,गौरव का सीना सपना के उरोजों से सट गया था,उसके पसीने में भीगी हुई परफ्यूम की खुशबू से गौरव के नथुने भर गए..
अब सपना गौरव की गोदी में था और इस मादक माहौल से उत्तेजित हुआ उसका लिंग सपना के जांघो के बीच टकरा गया,गौरव के अंदर दहसत की एक लहर दौड़ गई ,क्योकि वो नही चाहता था की सपना को उसकी उत्तेजना की कोई भी भनक लगे,और दूसरा डर उसे पूर्वी का था अगर वो उसे इस हालत में देख लेती तो क्या होता…
“हटो यंहा से “
गौरव ने जोरो से कहने की कोशिश तो की थी लेकिन लोक लाज के कारण उसकी आवाज धीरे ही आयी,उसकी आवाज आदेशात्मक कम और प्रार्थनात्मक ज्यादा थी…
“मैं नही हटने वाली कर लो जो करना है “
सपना के इठलाते हुए कहा,उसकी सांस तक गौरव के चहरे से टकरा रही थी वही आसपास के लोगो का ध्यान भी अनायास ही उनकी तरफ जाने लगा था..
“प्लीज् “गौरव ने कांपते हुए स्वर में कहा
सपना खिलखिलाते हुए उसके ऊपर से उठ गई और गौरव ने चैन की सांस ली ,ना जाने उसे इतना डर क्यो लग रहा था जबकि गलती तो सपना की थी……..
क्या सच में ,उसने खुद से पूछा..
तेरे जांघो के बीच जो खड़ा हुआ था क्या वो भी सपना की गलती थी…
बस इसका जवाब गौरव के पास नही था और वही उसके डर का कारण भी था,उसे वो दिन याद आया जब वो सपना से सबसे ज्यादा डरा था,जब सपना ने अपने कपड़े उसके सामने खोल दिए थे….क्या सच में वो सपना से डरा था..??
नही ये डर था उसके अंदर उबलते हुए उत्तेजना का और वो डर था की कही वो सामने ना आ जाए,कही वो अपना आपा आ खो दे ..
गौरव की मनोदशा को मानो सपना समझ चुकी थी क्योकि उसे देखकर वो मुस्कुरा रही थी ,जिससे गौरव के शरीर में एक कंपन सी हो गई….
“इसीलिए मैं तुमसे नफरत करता हु,मैंने तो सोचा था की तुम मेरे और पूर्वी के रिश्ते के मजबूत करने में मेरी मदद कर रही हो लेकिन …..
लेकिन नही तुम आज भी वही सपना हो जो मुझे मेरी पूर्वी से दूर करना चाहती हो …”
गौरव ने नफरत से उसे देखा लेकिन सपना पर मानो इसका कोई प्रभाव नही पड़ा हो…
“सर आप ना तो कल मुझे समझे थे ना ही आज समझ पाए हो,मैं आपको पूर्वी से अलग नही करना चाहती मैं तो बस आपको अपने पास लाना चाहती हु ...कैसे मर्द हो घरवाली प्यार करने वाली मिल चुकी है ,बाहर वाली भी सबकुछ करने को तैयार है लेकिन फिर भी डरते हो …”
वो फिर से हँसी लेकिन उसकी हंसी से गौरव के चहरे में बस नफरत का भाव आकर रह गया और वो उठाकर दूसरी ओर जाने लगा….
**********
इधर
“बला की खूबसूरत है यार,यार रोहन हमे भी तो मिला इस बला से “
पूर्वी का ध्यान अनायास ही उस ओर खिंच गया जिस ओर से ये आवाज आयी थी,रोहन के साथ खड़ा एक शख्स पूर्वी को ही घूरे जा रहा था,पूर्वी की नजर अचानक ही उससे मिल गई,वो कोई
6 फुट 5 इंच की हाइट वाला बिल्कुल बॉडी बिल्डर जैसा शख्स था, रोहन से भी लंबा था, रोहन उसके सामने बच्चा लग रहा था,वो जैसे कोई दानव हो पूर्वी तो उसे देखकर ही सहम सी गई ,फिर अचानक उसकी नजर उसके बाजू में बैठे शख्स पर गई जिसकी ओर रोहन देख रहा था,एक 6 फुट का लेकिन सामान्य शरीर का बेहद ही हेंडसम सा लड़का ,उम्र लगभग रोहन के उम्र जितनी थी थी,और ऐसा लग रहा था जैसे रोहन का अच्छा दोस्त है …
दिखने में जैसे रणवीर कपूर,चहरे से ही मासूमियत टपक रही थी,लेकिन एक शरारत भी ...पूर्वी अब कन्फ्यूज थी की आखिर ये आवाज थी किसी उस दनाव जैसे इंसान की या इस स्मार्ट छोकरे की …
तभी रोहन ने मुस्कुराते हुए उस स्मार्ट लड़के से कहा
“ये कोई बला नही है रफीक ये मेरी पुरानी दोस्त है पूर्वी “
“रफीक नही रफीक भाई “
एक गरजती हुई आवाज आयी और रोहन उस दानव को देखने लगा..
तभी रफीक बोल उठा
“अबे ये मेरे दोस्त है बे बल्ला तुझे कितनी बार समझाया है की दोस्तो के लिए मैं सिर्फ रफीक हु ,कम ऑन रोहन इसकी बातों का बुरा मत मानना”
रोहन भी रफीक की बात सुनकर मुस्करा उठा,
“इस मांस के टुकड़े में दिमाग होता तो शायद बुरा मानता..”रोहन की बात से दोनों ही हँस पड़े लेकिन बल्ला गुस्से से रोहन को देखा फिर भी चुप रहा ..
रोहन ,रफीक के साथ पूर्वी के पास पहुचा जो की उन्हें ही देख रही थी
“रफीक ये पूर्वी है मेरी बचपन की दोस्त और ये है …”
रोहन आगे कहता उससे पहले ही पूर्वी बोल पड़ी
“रफीक भाई ,अभी अभी सुना,क्यो अब तो ठीक है ना”
पूर्वी ने बल्ला को देखा जो की हल्क की तरह गुस्से से उनलोगों को देख रहा था..
रोहन और पूर्वी इस बात पे हँस पड़े
“अरे आप तो भाई मत बोलिये…”
“क्यो आखिर ??”पूर्वी ने इतराते हुए कहा
“फकत यू रिश्तों के बोझ में न उलझा दो हमे,रिश्ता नही हम दोस्ती करने आये है “
रफीक बड़े ही शायराना अंदाज में कहा
“ओह लेकिन दोस्ती भी तो एक रिश्ता ही है ,ऐसे आप शायर भी है “
“मुझे लगता है की दोस्ती में रिश्तों वाली कोई बंदिश नही होती,ऐसे ये शायरी हमारे अब्बू के एक बिजनेस पार्टनर ने अम्मी के लिए कही थी जब अम्मी ने उन्हें भाई कहा था”
पूर्वी और रोहन ने आश्चर्य से उसे देखा
“तो आपके अब्बू ने क्या जवाब दिया “पूर्वी ने उत्सुक होकर उससे पूछा…
“जवाब क्या देना बल्ला ने उसका गला काट दिया और क्या “
इस बार पूर्वी और रोहन दोनों के ही चाहे में अपार आश्चर्य था...दोनों कभी रफीक को देखते तो कभी बल्ला को तो कभी एक दूसरे को ..
“कोई शेख साहब के सामने अम्मी से बतमीजी करे तो अंजाम तो यही होना था..”
बल्ला बोल उठा
“शेख साहब ??”
पूर्वी ने फिर आश्चर्य से कहा
“जी हा हमारे अब्बू दुबई के शेख है ,और बल्ला हमारे परिवार का पुराना वफादार है …”
“लेकिन आप तो इतनी अच्छी हिंदी बोलते है “
रफीक का खिला हुआ चहरा थोड़ा मुरझा गया
“असल में मेरी अम्मी का परिवार मुम्बई से ताल्लुक रखता है ,मैं तब 18 साल का था जब मेरे अब्बू की मौत हुई,अम्मी ने अब्बा के पुराने दोस्त शेख साहब से निकाह कर लिया और मेरे और बल्ला के साथ दुबई में जा बसी,मेरी अम्मी शेख साहब की तीसरी बीवी है लेकिन उन्होंने हमे बहुत प्यार दिया,अब मैं भारत फिर से आया हु अपने बिजनेस को सम्हालने और शेख साहब के बिजनेस को यंहा फैलाने के लिए और ये मेरा बचपन का दोस्त कम बॉडीगार्ड कम भाई बल्ला है …”
पूर्वी को रफीक की आंखों में बल्ला के लिए अपार स्नेह दिखा,वही बल्ला की आंखे ही बता रही थी की वो रफीक के लिए जान दे भी सकता है और जान ले भी सकता है ……..
“अब छोड़िए इन बातों को मैं यंहा नया हु तो आपलोगो की जिम्मेदारी है मुझे शहर दिखाने की “
रफीक की आवज में एक गजब का अपनत्व था ,लेकिन उसकी इस बात पर पूर्वी ने एक बार रोहन को देखा..जैसे कह रही हो ये कहा फंसा दिया ..
रोहन बस मुस्करा रहा था
“बिल्कुल रफीक ...भाई”
उसने बल्ला को देखते हुए कहा और तीनो फिर से हँस पड़े …
**************
“अरे ये कौन था ???”
रफीक को जाता हुआ देखकर गौरव ने पूर्वी से पूछा,वो अभी अभी सपना से चिढ़कर पूर्वी और रोहन की तरफ़ ही आया था..
“अभी अभी आया है दुबई से किसी बिजनेस के सिलसिले में ,रफीक नाम है इसका “
रोहन की बात से गौरव के चहरे में थोड़ी हैरानी आ गई
“क्या हुआ आप इतने हैरान क्यो लग रहे हो”पूर्वी गौरव के आये हुए भाव को समझ नही पा रही थी..
“कुछ नही ये आदमी मुझे कल केमेस्ट्री डिपार्टमेंट में दिखा था,सपना से बात करते हुए ..
”
गौरव की बात सुनकर अब पूर्वी और रोहित दोनों ही चौके …
“सपना से ???”
पूर्वी के मुह से अनायास ही निकल गया
“क्या पता हो सकता है शेख साहब लखानी अंकल के दोस्त हो “
रोहन ने अपनी ओर से कहा
“शेख साहब ??अब ये कौन है “गौरव फिर से कन्फ्यूज था
“रफीक के अब्बू …”
रोहन की बात सुनकर अचानक ही गौरव का चहरा कुछ गंभीर हो गया..
“क्या हुआ आपको “पूर्वी भी उसकी ऐसी हालत देखकर थोड़ी सहम गई
“कुछ नही कुछ नही चलो घर चलते है “
गौरव जल्दी से वंहा से निकला,पूर्वी रोहन की तरफ घूमी और रोहन ने बस कंधा उचकया जैसे कह रहा हो की मुझे क्या पता…
लेकिन रोहन के दिमाग में अब भी कई सवाल चल रहे थे,आखिर रफीक को सपना कैसे जानती है और शेख का नाम सुनकर अचानक गौरव को क्या हो गया…??
**********
अध्याय 22
“तुम रफीक को कैसे जानती हो ?? गौरव बोल रहा था की उसने कालेज में तुम्हे उससे बात करते देखा “
पूर्वी और गौरव के जाने के बाद रोहन सीधे सपना के पास पहुचा था जो अब भी एक्सरसाइज कर रही थी..
“रफीक ...तुम उसे कैसे जानते हो “
सपना ने सवाल के बदले सवाल किया
“अरे यार वो यही वर्कआउट करने आता है ..”
“ओह तो वो भी यंहा आता है “
“तुमने जवाब नही दिया सपना की तुम उसे कैसे जानती हो “
“यार वो एक केमिकल फेक्ट्री डाल रहा है ,और इसी सिलसिले में मैं उससे मिली थी,उसने मुझे जॉब आफर किया है “
सपना के चहरे पर मुस्कान थी और रोहन को उसकी बात पर यकीन नही हो रहा था ..
“सपना तुम मुझसे कुछ छिपा रही हो है ना,तुमने अभी तक मुझे उन फार्मूला के बारे में कुछ सही सही नही बताया,हर बार बात को घुमा देती हो ,और गौरव को जब पता चला की वो दुबई के किसी शेख का बेटा है तो उसका चहरा भी थोड़ा गंभीर हो गया था,आखिर साला चल क्या रहा है “
रोहन झुंझला गया,लेकिन सपना अब भी मुस्कुरा रही थी,वो रोहन के पास आयी और उसके गालों को अपने हाथो से खिंचने लगी
“ओ मेरा बच्चा..कितना क्यूट लगता है तू गुस्से में “
सपना की बात सुनकर रोहन और भी गुस्से में आ गया और पैर पटकता हुआ वंहा से निकल गया ,उसे देखकर सपना के होठो की मुस्कान और भी गहरा गई थी ………..
**************
“दुबई वाले शेख का बेटा हमारे डिपार्टमेंट में क्या कर रहा था वो भी सपना के साथ “
गौरव गुस्से में था और मालती के सामने खड़ा था..
“अरे मुझे क्या पता ??”
मालती ने बेतकलुफी के साथ जवाब दिया
“वो आपकी स्कोलर है ना,तो आपको नही पता होगा तो किसे पता होगा…”
“वो काम तुम्हारे साथ करती है गौरव ,और तुम इतनी छोटी सी बात पर इतना भड़क क्यो रहे हो...क्या हो गया अगर सपना किसी से बात कर रही थी,और यंहा कई लोग आते जाते रहते है “
मालती की नजर अब गौरव के ऊपर टिक गई थी..
“कही यह वही शेख तो नही जिसने कविता को …”
मालती की नजर अचानक ही गौरव के ऊपर टिक गई
“तुम पागल हो गए क्या गौरव कुछ भी बोले जा रहे हो,अरे होगा कोई पूछ लो सपना से ,इतना सोचने की क्या जरूरत है …”
“लेकिन…..”
“लेकिन वेकिंन कुछ नही जाओ यंहा से मुझे और भी काम है,ज्यादा सोचकर अपना टेंसन मत बढ़ाओ वरना अपनी बीवी के साथ रंगरलियां कैसे मनाओगे…”
मालती की बातों में एक व्यंग था ,गौरव बिना कुछ बोले और मालती को देखे बिना ही वंहा से निकल गया…..
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गौरव सपना के पास पहुच कर इस बारे में बात करता है और सपना उसे वही स्टोरी सुना देती है जो उसने रोहन को सुनाई थी और रोहन की तरह उसे भी सपना की बात पर भरोसा नही होता…
लेकिन मानने के अलावा गौरव के पास कोई रास्ता भी तो नही था……..
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“क्या हुआ जी इतने टेंशन में क्यो लग रहे हो…”
गौरव जब से कालेज से आया था वो थोड़े टेंसन में लग रहा था,सुबह जिम से आने के बाद वो ना जाने किन ख्याबो में खोया हुआ था,यही बात पूवी को सताए जा रही थी की आखिर उसे हो क्या गया है …..
“कुछ नही बस तबियत ठीक नही लग रही ,मैं आराम करना चाहता हु पूर्वी “
पूर्वी गौरव के चहरे को ध्यान से देखने लगी ..
“ऐसे क्या देख रही हो …”
“आप मुझसे कुछ छिपा रहे है..??”
“नही तो ..”
“मुझे क्या समझ कर रखा है आपने,इतनी बड़ी टेंशन से गुजर रहे हो कम से कम अब तो बता दो “
गौरव चौका ,उसके चौकाने की वजह थी पूर्वी द्वारा बोले गए शब्द ‘अब तो बता दो ‘
गौरव कोई समझ नही आया की आखिर पूर्वी ने ऐसा क्यो कहा था..
“मतलब क्या है तुम्हारा “
“क्या जो टेंशन हो वो मुझे बता सकते हो ना,मैं आपकी पत्नी हु ..”
“ये नही जो तुमने कहा ..तुमने कहा की अब तो बता दो ,इसका मतलब क्या है ??”
गौरव के चहरे में कन्फ्यूजन था,वही पूर्वी मुस्कुराने लगी थी..
“मतलब ये की आप कभी मुझे अपनी टेंशन नही बताते ,”
“तुमने कब मुझे टेंशन में देख लिया..”
पूर्वी मुस्कुराते हुए उसके गले से लग जाती है
“जानते हो आप मुझसे झूठ नही बोल सकते ,लेकिन आप कोशिश जरूर अच्छी कर लेते हो ,मैं जानती हु की कब आप मुझसे झूठ बोल रहे हो और कब सच लेकिन फिर भी मैं चुप रहती हु क्योकि मुझे आपपर भरोसा है …”
गौरव को समझ ही नही आ रहा था की कब उसने पूर्वी से कोई झूठ बोला था …
“क्या बोल रही हो पूर्वी मैंने कब तुमसे झूठ बोला “
जवाब में पूर्वी खिलखिला उठी….
“अरे कुछ तो बोलो ,मैंने सच में आज तक तुमसे कुछ भी छुपाया “
गौरव की बात सुनकर अचानक ही पूर्वी के चहरे में आयी हुई हंसी गायब हो गई वो थोड़ी सीरियस हो गई ..
“पहला झूठ ये था की आप और मालती मेडम के बीच में कोई जिस्मानी रिश्ता नही था,अपने मुझसे कहा था की आप एक वर्जिन है,ये जानते हुए भी की आप दोनों के बीच रिश्ता है मैंने आपसे शादी की क्योकि मुझे भरोसा था की आप मुझसे प्यार करने लगे हो,दूसरा झूठ की अपने मुझसे कहा था की आप सपना से दूर ही रहना चाहते हो लेकिन आप ने जानबूझकर सपना को अपना पार्टनर बनाया,मालती के दिमाग में ये डाला की आप सपना से कितनी नफरत करते हो और सपना को मालती के और पास जाने में मदद की ताकि वो सपना को आपकी प्रोजेक्ट पार्टनर बनाने में मदद करे ...क्यो…”
“पागल हो गई हो क्या पूर्वी ये क्या बके जा रही हो ..”
गौरव झल्लाया लेकिन पूर्वी मुस्कुरा रही थी ..
“मैं जानती हु क्यो ,क्योकि वो फार्मूले जो कभी कविता ने लिखे थे वो मालती के पास थे जो मालती आपको नही दे रही थी लेकिन सपना दे सकती थी ,आप जानते थे की सपना के पास उसकी एक कापी है ..है ना…”
पूर्वी की बात सुनकर गौरव का चहरा पीला पड़ गया था,उसकी जैसे सांस ही रुक गई ..
“और आज ये तीसरा झूठ आप मुझसे बोल रहे हो की आपकी तबियत खराब है ...रफीक को देखकर जैसे आपकी सांस ही रुक गई थी ,आखिर क्यो ???वो शेख कौन था जिसने कविता को गायब कर दिया और क्यो ?? आखिर उस फार्मूले में ऐसा है क्या जिसने इतना बखेड़ा खड़ा कर दिया ??? और सबसे इम्पोर्टेन्ट बात इन सबसे रोहन ,सपना और मेरे परिवार का क्या रिश्ता है ???”
पूर्वी की बात सुनकर गौरव पास ही पड़े सोफे में धड़ाम से गिर पड़ा
“तुम्हे ये सब कैसे पता??? आखिर कैसे ?”
पूर्वी की मुस्कान एक हंसी में तब्दील हो गई थी ,वो हल्के से हंसी
“आप भूल गए की मैं किसकी शागिर्द हु ..”
गौरव ने पूर्वी के ध्यान से देखा ,और अचानक उसके दिमाग में एक नाम गुंजा जो धीरे से उसके होठो तक आ ही गया
“ओह डॉ चूतिया…तो उसने जासूसी की है हमारी “
गौरव पूर्वी के चहरे को ध्यान से देखने लगा ..पूर्वी उसे देखकर मुस्कुरा रही थी ..
“जब इतना कुछ पता है तो बाकी चीजे भी पता लगा लो,तुम्हारे साथ तुम्हारे गुरुदेव जो है “
इसबार वो खिलखिलाकर हँस पड़ी
“आप डॉ से इतना चिढ़ते क्यो है ?”
“उसने तुम्हे कभी नही बताया की मैं उससे क्यो चिढ़ता हु “
“बताया था लेकिन अब पुरानी बातों का कोई मलतब नही रह जाता ,वो आज भी आपको अपना सबसे अच्छा दोस्त मानते है “
पूर्वी की बात सुनकर अचानक से ही गौरव के चहरे का भाव बदलने लगा था,उसका सर झुक गया था ,वो अपने आंखों में आये हुए आंसुओ को छिपाने की कोशिश कर रहा था,पूर्वी उसके पास उसके बाजू में जाकर बैठ गई और उसका सर सहलाने लगी ..
उसने गौरव के सर को अपने सीने से लगा लिया …
“अब समय आ गया है गौरव डॉ को आपकी जरूरत है ,आखिर कविता आपका पहला प्यार थी,कविता के लिए उनका साथ दो कब तक वो इस लड़ाई को अकेले लड़ेंगे ..”
गौरव पूर्वी के सीने में सुबकने लगा था..
“उसने मुझसे मेरा पहला प्यार छीना था,मेरी कविता को मुझसे छीना था,और आज मेरी पत्नी को भी अपनी ओर कर लिया ...साला चूतिया ..”
गौरव की बात से पूर्वी खिलखिलाकर हँस पड़ी,गौरव भी उसके सीने से अलग हुआ उसके चहरे में अब थोड़ी सी मुस्कान थी…
“मैंने कभी नही सोचा था की डॉ तुम्हे इन सब के बारे में बताएगा..अगर पता होता तो कभी तुम्हे उसकी क्लास अटेंड करने नही देता “
पूर्वी के चहरे में एक मुस्कान आ गई
“उन्होंने बताया क्योकि वो आज भी आपसे बहुत प्यार करते है ,और वो जानते है की कविता के गायब होने से आपको भी उतना ही दुख हुआ जितना की उन्हें और अब वो नही चाहते की पुरानी बातों के कारण अब आपपर या मुझपर फिर से कोई मुसीबत आ जाए .”
गौरव ने बड़े ही प्यार से पूर्वी के गालों को सहलाया
“तुम्हे ये सब कबसे पता है “
“कुछ चीजे शादी के पहले से और कुछ अभी अभी कुछ दिनों से “
“ओह तो मालती मेडम के बारे में आप शादी से पहले से ही जानती थी ??”
“हा बिल्कुल डॉ ने साफ साफ बता दिया था “
गौरव आश्चर्य से पूर्वी को देखता रहा
“तो फिर तुमने कुछ कहा क्यो “
पूर्वी हँसने लगी फिर सीरियस होकर कहा
“क्योकि डॉ ने मुझसे कहा था की कुछ भी डिसीजन लेने से पहले पता तो कर लो की आखिर वो तुमसे सच में प्यार करता है की वैसे ही धोखा दे रहा है जैसे मालती को इतने दिनों से दे रहा है,मैं जानती हु की अपने मालती से प्यार का नाटक क्यो किया था,अपने अपनी सालों की इच्छा को सिर्फ मेरे कारण कुर्बान कर दिया ,सालों की मेहनत को सिर्फ मेरे प्यार के लिए बर्बाद कर दिया,मुझसे शादी कर ली ,अपना पहला प्यार भूलकर मुझसे प्यार किया “
पूर्वी की आंखों में भी आंसू आ चुके थे ,गौरव ने पूरी ताकत से उसे अपने सीने से लगा लिया …
“तो क्या पता लगा तुम्हे ये प्यार था की धोखा ..”
गौरव ने हल्के से उसके कानो में कहा ,और पूर्वी ने कोई जवाब ना देते हुए अब उसके होठो में अपने होठो को डाल दिया …………...
अध्याय 23
“तो डॉ तूने फिर से मेरे प्यार को फंसा लिया “
गौरव और पूर्वी अभी डॉ चूतिया के केबिन में बैठे हुए थे,गौरव की बात सुनकर डॉ जोर से हँस पड़ा..
“भाई अब तो ये तेरा प्यार ही नही बल्कि तुम्हारी बीबी भी है ...मैं इसे क्या फ़साउंगा ..”
गौरव और पूर्वी के चहरे में एक मुस्कान आ गई ,लेकिन फिर गौरव गंभीर हो चुका था..
“देख यार सालों से हम दोनों ने एक दूसरे से अच्छे से बात नही की है ,हम दोनों ही एक दूसरे को कविता का गुनहगार मानते आ रहे है ,लेकिन तू भी जानता है और मैं भी उसका असली गुनहगार कोई और नही बल्कि वो शेख है ,और अब हमारे पास ये मौका है की हम उस शेख से बदला ले …”
गौरव की बात सुनकर डॉ के चहरे में मुस्कान आ गई ..
“शेख से बदला ???..
वो मेरे ऊपर छोड़ दे ,और रफीक को पूर्वी और सपना के ऊपर ,बाकी उस फार्मूले का क्या हुआ ,उसपर कोई काम हुआ की नही “
गौरव ने एक बार डॉ को ऐसे देखा जैसे की डॉ उसका पुराना दुशमन हो …
“क्या मतलब है की रफीक को पूर्वी और सपना के ऊपर छोड़ दु,और सपना ,सपना भी तेरी शागिर्द है क्या..??”
गौरव लाल हो गया था जैसे उसे किसी बुरे का अंदेशा हो ,वो डॉ को सालों से जानता था और ये भी की वो कितना कमीना है ..
जवाब में डॉ ने मुस्कुराते हुए पूर्वी की ओर देखा
“तुमने बताया नही क्या की सपना भी मेरी शागिर्द है जैसे तुम हो ,भई क्लास तो मैंने दोनों की ही ली है ना..”
गौरव पूर्वी को देखने लगा..
“अरे आप गलत समझ रहे है,हा सपना भी इनकी शागिर्द है लेकिन सपना को नही पता की मैं भी डॉ से इस बारे में बात करती हु,या कोई सलाह लेती हु…आप उसकी फिक्र मत करो हम मिलकर कुछ कर लेंगे,आप तो उस फार्मूले पर ध्यान दो ..”
“क्या फार्मूला फार्मूला कर रहे हो तुम दोनों,साला अगर वो मेरे पास होता तो क्या मैं ऐसे …”
अचानक गौरव चुप हो गया और उसका चहरा गंभीर से भी गंभीर हो गया..
“डॉ तू क्या करना चाहता है मुझे नही पता लेकिन एक बात बता देता हु की वो फार्मूला सपना के पास है लेकिन आधा.. उतना ही पार्ट जितना की मालती के पास था,आधा फार्मूला अब भी शेख के पास ही है और हो ना हो रफीक को उसने इसी लिए भेजा है ,वो अब भी उस फार्मूले के खोज में है जिससे असीम पवार मिल सकती है ,शाररिक और मानसिक पावर जिससे दुनिया जीती जा सकती है ,जो दिमाग को 100% तक एक्टिव कर सकती है ,सोचो अगर किसी को वो फार्मूला मिल गया और वो दवाई बना ली गई तो फिर क्या होगा,हम अपने दिमाग का बस 5% ही यूज़ कर पाते है वो भी जो लोग जीनियस होते है ,अगर कोई दिमाग का 100% यूज़ करने लगे तो ???”
“वो वो फ़िल्म है ना लिमिटलेस वैसे ही हो जाएगा,या फिर लूसिया मूवी की तरह पावरफुल हो जाएगा,तो क्या ऐसा हो सकता है की कोई NZT जैसी दवाई बनाई जा सके..?? “अचानक से ही पूर्वी बोल पड़ी..
“बिल्कुल ..”डॉ ने बोलना शुरू किया
“बना सकता नही बना चुकी है ,कविता ने ऐसी दवाई बनाई थी ,जिसके गवाह हम दोनों है ,”डॉ ने बोलते हुए गौरव को देखा
“याद है गौरव उसकी दवाई का क्या असर हुआ था हमारे ऊपर “
डॉ जोरो से हँसने लगा,और पूर्वी आश्चर्य से डॉ और गौरव को देखने लगी..
“आखिर क्या हुआ था उसे खाकर ..”
पूर्वी की उत्सुकता बढ़ रही थी
“छोड़ ना यार क्यो याद दिला रहा है “गौरव थोड़ा नर्वस हो गया
“अरे बताओ ना क्या हुआ था “पूर्वी ने जोर डाला और गौरव बोलने लगा..
“ये बात तब की है जब हम एक स्कोलरशिप के लिए एग्जाम दिला रहे थे,डॉ मैं और कविता...कविता तो पढ़ने में ऑलरेडी इतनी तेज थी की उसे कोई फर्क नही पड़ता था की एग्जाम कितना टफ होने वाला है ,लेकिन मेरी और डॉ की हालत खराब थी ,तो हमने कविता से मदद मांगी और उसने हमे वो टेबलेट दिया...
असल में उसने हमारे ऊपर ही उसका पहला एक्सपेरिमेंट किया था.कविता ने पहली बात इसे तैयार किया था और इसमें कई सारी कमियां थी ,लेकिन हमने फिर भी उसे खा लिया ..”
गौरव इतना ही बोलकर चुप हो गया ,लेकिन पूर्वी की उत्सुकता और ही बढ़ गई थी ..
“फिर ,फिर क्या हुआ “
“फिर क्या उस एग्जाम में इंडिया लेवल के तीन टॉपर थे,पहला कविता दूसरा मैं और तीसरा डॉ .”
गौरव इतना ही बोलकर चुप हो गया..
“अरे यार पूरी बात तो बताई ही नही तूने,हमने इंडिया में टॉप किया और तगड़ी स्कोलरशिप भी हासिल की लेकिन सिर्फ 3 दिन की पढ़ाई करके …”डॉ ने आगे बात जोड़ी
“वाओ वो मेडिसिन इतनी पावरफुल है ??”पूर्वी का मुह आश्चर्य से खुल गया था…
“नही पूर्वी उससे भी कही ज्यादा,क्योकि उस समय कविता ने बस एक सेम्पल तैयार किया था जिसमे कई कमियां थी ,उसने बाद में उन कमियों को भी दूर किया और एक नया फार्मूला बनाया कई साल उसने इसपर काम किया था और वही ……..और वही फार्मूला उसका सबसे बड़ा दुशनम साबित हुआ...इस फार्मूले के बारे में कुछ बड़े ही पावरफुल लोगो को पता चल गया और कविता अचानक से ही गायब हो गई,लेकिन फार्मूला के दो हिस्से हो गए थे जिसमे से एक मालती मेडम के हाथो में लगा और दूसरा ..”
“दूसरा कहा गया डॉ”पूर्वी ने पूछा
“दूसरा शेख के पास अभी तो बताया ना गौरव ने “डॉ ने चहरे में एक अजीब सी मुस्कान आ गई जिसे देखकर पूर्वी भी मुस्कुराने लगी..लेकिन गौरव को इसकी कोई भी खबर नही थी ..
“डॉ सपना से बोल की वो फार्मूला मुझे दे दे ,शायद मैं कुछ कर सकता हु …”
“सपना मेरे किसी बात को टालेगी नही लेकिन ..जंहा फार्मूले की बात आएगी वो मुकर जाएगी ,मैं उसे जानता हु लेकिन तू उससे निकलवा सकता है ..”
“मैं कैसे ??”
गौरव चौका ,डॉ ने पूर्वी की ओर देखा
“डॉ मेरे पति को बिगाड़ो मत,”पूर्वी ने लगभग डांटते हुए कहा और जवाब में डॉ हँस पड़ा
“अरे बिगड़ नही रहा हु बस थोड़ा मोड़ा ..तुम बाहर घूम कर क्यो नही आती इससे मुझे अकेले में कुछ बात करनी है ..”
डॉ की बात सुनकर पूर्वी ने गुस्सा वाला मुह बनाया
“अरे रहने दो मैं जानता हु ये क्या कहने वाला है ,तुम यंही बैठो,साले मेरी शादी तुड़वायेगा क्या “
गौरव बोल उठा...लेकिन फिर डॉ ने पूर्वी को बाहर जाने का इशारा किया
“कोई बात नही मुझे डॉ पर भरोसा है ये जो भी करेंगे हमारे भले के लिए ही करेंगे .आप आराम से इनसे बात करिए मैं बाहर घूमकर आती हु…”
पूर्वी ने गौरव के कंधे पर अपना हाथ रखा और बाहर चली गई ..
“तुम्हारी इस हरकत से अब पूर्वी हमेशा मुझपर शक करेगी”
गौरव डॉ के ऊपर भड़क गया ..
“नही करेगी ,और तू भी जानता है की मुझे तुम्हे कुछ भी
समझना नही है ,तू वो कर ही लेगा जो मैं तुझे बोलने वाला हु ,”
“तो पूर्वी को बाहर क्यो भेजा”
“ताकि वो तुझपर यकीन करे,तू समझ नही सकता,अगर मैं उसे बाहर नही भेजता तो शायद वो तुझपर शक करती लेकिन अब हम उसे अपने हिसाब से एक स्टोरी सुना देंगे”
“कैसी स्टोरी “
“बोल देना की तू मुझपर बहुत गुस्सा हुआ की मैंने तुझे सपना को पटाने के लिए कहा और उससे शाररिक संबंध बनाने के लिए कहा ,और तू ऐसा कुछ भी नही करने वाला,और इधर मैं तेरी तारीफ कर दूंगा की तेरा पति तो पत्नीव्रता है उसने मेरी बात को साफ मना कर दिया,वो खुश हो जाएगी और क्या ..”
डॉ ने मुस्कुराकर गौरव से कहा
“लेकिन मैं ऐसा कुछ भी नही करने वाला,मैं सपना से ..”
गौरव आगे और भी कुछ बोलता उससे पहले ही डॉ ने उसे चुप करवा दिया
“बेटा तेरे रग रग से मैं वाकिफ हु ,भूल मत की तेरा बचपन का दोस्त हु मैं ,और ये तो तुझे भी पता है की वो फार्मूला कितना जरूरी है ,गलत हाथो में लगा तो तबाही ही तबाही निश्चित है..”
गौरव सोच में पड़ गया
“लेकिन ..”
गौरव फिर से कुछ बोलने वाला था की डॉ ने उसे चुप करवा दिया
“मैंने पिछले साल तेरा एक आर्टिकल पढा था,जो नेचर मैगजीन में पब्लिश हुआ था”
“तो ..”
“तो तुझे उसी आर्टिकल की वजह से ये फंड मिला जिससे तू अभी रिसर्च कर रहा है ..”
“हा तो क्या ..”
गौरव आशंकित होकर डॉ को देख रहा था..
“तो ये की मैं जानता हु की तू कितना दिमाग वाला है ,तू ऐसा आर्टिकल कभी नही लिख सकता,”
डॉ की बात सुनकर गौरव हड़बड़ा गया
“क्या बक रहा है “
“मैं जानता हु गौरव की कविता की बनाई पहली 50 गोलियों में कुछ तेरे पास अभी भी है ,याद है जो उसने मुझे दिए थे,और जिसे तूने चुराया था “
डॉ की बात सुनकर गौरव बौखला गया
“तुझे क्या लगता है की मैंने वो गोलियां चुराई है ,मेरे पास इतना टेलेंट नही है की मैं ऐसा आर्टिकल लिखूं..”
“मैं तुझपर शक नही करता अगर वो आर्टिकल लिखने के बाद तू 10 दिन के लिए हॉस्पिटल में एडमिट ना हो जाता,तू उल्टियां हो रही थी राइट,दस्त ,उल्टियां और सर में बेहद दर्द ..यही हुआ था जब हम एग्जाम दिलाकर वापस आये थे..”
गौरव का चहरा एकदम पिला पड़ चुका था,
“तूने फिर से वो गोली खाई अपना आर्टिकल खत्म किया और फिर से तुझे वही प्रॉब्लम हो गए जो उसके साइड इफेक्ट थे...मैं तभी समझ गया था की आखिर मेरे पास की गोलियां गई कहा...चल छोड़ मैं इस बारे में पूर्वी को कुछ भी नही बताऊंगा..पूर्वी को क्या किसी को भी नही बताऊंगा,लेकिन …..मुझे वो फार्मूला चाहिए”
डॉ ने बड़े ही दम से कहा
“और आखिर मैं तुझे वो फार्मूला लाकर क्यो दु “
“क्योकि हम तीनो कभी पार्टनर थे..और अब हम दोनों ही बचे है तो हम 50-50 के पार्टनर हुए ना”
गौरव के चहरे में अब शांति थी
“मैं सपना से वो फार्मूला निकलवाऊंगा ओके..
लेकिन तू क्या करेगा जो तू पार्टनरशिप मांग रहा है ??”
डॉ हँसने लगा..
“भूल गया की फार्मूला अभी भी कम्प्लीट नही है ,मालती ने सालों कोशिश की लेकिन उसे भी कुछ नही मिला,जरूर शेख ने भी कोशिश की होगी और उसे भी जब कुछ समझ नही आया होगा तो उसने रफीक को भेज दिया,तो मैं रफीक को सम्हालूँगा वो अभी जवान है और हुस्न का कदरदान है ,पूर्वी और सपना उसे आराम से सम्हाल लेंगी ..”
डॉ की बात सुनकर गौरव बौखला गया
“तुम मेरी बीवी को ..”डॉ ने उसे चुप करवा दिया
“याद रख शेख तक पहुचने का ये ही एक रास्ता है ,और तुझे क्या करना है बे,तू अपने लेब में ध्यान दे ना,ऐसे भी मैं पूर्वी और सपना को मना लूंगा,तुझे जो करना है वो ये की तुझे अपनी आंखे और कान पूर्वी के ऊपर से हटा लेने है,वो क्या कर रही है उसपर ध्यान मत देना बस और क्या ..”
गौरव सोच में पड़ गया था..
“तू उससे क्या करवाने वाला है “
“वो मैं देख लूंगा,फार्मूला तेरे लिए कितना जरूरी है ये तू भी जानता है और मैं भी तो …….तो अपना काम करना शुरू कर मेरे काम में दखल मत दे,और फिक्र मत कर मैं ये याद रखूंगा की पूर्वी मेरे दोस्त की पत्नी है …”
इतना बोलकर डॉ थोड़ी देर चुप रहा और फिर बोल उठा
“ऐसे तू दोस्त तो है ना मेरा??”
दोनों की आंखे मिल गई और गौरव ने अपना हाथ आगे किया,दोनों ने हाथ मिलाया और गौरव बाहर चला गया..
********
“आखिर क्या कहा डॉ ने “
बाहर गौरव को पूर्वी मिल गई थी जैसा उसे यकीन था पूर्वी ने वही सवाल किया जो गौरव को अंदाजा था और गौरव ने भी वही उत्तर दिया जो डॉ ने उससे कहा था...गौरव के उत्तर से पूर्वी खुश दिख रही थी ,उसने उसे सीने से लगा लिया
“ये डॉ ना कभी कभी मुझे सही आदमी नही लगते”
गौरव को लगा जैसे पूर्वी ने उसके दिल की बात बोल दी हो
“ह्म्म्म तुम भी बच कर रहना उससे ,साला हमेशा से कमीना है ,जैसे उसने कविता को मुझसे अलग किया कही तुझे भी मुझसे अलग न कर दे “
गौरव ने पूर्वी को बहुत ही जोर से पकड़ लिया..
“फिक्र मत कीजिये हमे कोई भी अलग नही कर सकता,और जब वो इतना ही कमीना है तो हम उसकी मदद क्यो ले ,क्यो ना हम ये सब छोड़ दे “
पूर्वी की बात से गौरव थोड़े देर सोच में पड़ गया
“पूर्वी आखिर छोड़ कर जायेगे कहा,यही हमारी दुनिया है और इसे हमे फेस करना सीखना ही होगा...ऐसे भी मुझे शेख तक पहुचना है जिसने कविता को मुझसे छीना था..”
“ह्म्म्म मैं आपके साथ हु गौरव ..”
गौरव के चहरे में मुस्कान आ गई
“पूर्वी इस चूतिया डॉ से सम्हाल कर रहना ये बस नाम का चूतिया है”
पूर्वी खिलखिला उठी
“आप फिक्र मत करो मेरा नाम पूर्वी है ,पूर्वी कपूर ,कपूर साहब की बेटी हु मैं ऐसे चुतियो को चूतिया बनाना मैंने बचपन में ही सिख लिया था…अब मैं जरा उससे अकेले मिलकर आती हु देखु तो आखिर कैसे मेरे कान भरता है ..
”
पूर्वी की बात सुनकर गौरव ने चैन की सांस ली और उसे गले लगा कर अपने ऑफिस की ओर चल पड़ा और पूर्वी डॉ की केबिन की ओर…
********
“तो डॉ गौरव तो अपना काम करेंगे लेकिन अब हमे क्या करना है “
“अब हमारा टारगेट है रफीक ,जाकर मिलो उससे ,बाकी तुम समझदार हो की तुम्हे क्या करना है …”
डॉ की बात सुनकर पूर्वी बस मुस्कुराती रह गई …..
अध्याय 24
“डॉ गौरव को मेरे और रफीक के ऊपर शक हो रहा है “
सपना थोड़ी टेंशन में दिखी ,वो अभी अभी डॉ चूतिया के केबिन में आयी थी ,
“उसकी फिक्र छोड़ो उसे फार्मूला चाहिए जो तुम्हारे पास है ,तुम तो बस रफीक की फिक्र करो ,और मालती की भी “
“रफीक तो मुझसे ज्यादा पूर्वी में इनरेस्टेड लग रहा है ,और मालती को सम्हालने के लिए तो रोहन को लगा दिया है,लेकिन गौरव ..”
“तुम्हे कुछ समझ आ रहा है की आखिर वो क्या करना चाहता है ,”
“मुझे लगता है की मुझे उसे वो फार्मूले दे देने चाहिए जो की मुझे मालती के पास से मिले थे”
सपना की बात सुनकर डॉ हंसा
“और फिर क्या ??”
“फिर क्या उन्हें जो बनाना है वो बना लेंगे..”
“ह्म्म्म वो तो है लेकिन ..”
“लेकिन क्या “
“तुम्हारे पास जो है वो अधूरा ही है “
“जानती हु की मेरे पास कुछ ही फार्मूले है शायद आधे तो अब भी मालती के पास ही पड़े है इसलिए तो रोहन को मालती के पीछे लगाया है लेकिन पता नही वो उसे पटा भी पायेगा की नही ,मालती बेहद ही होशियार है “
सपना के साथ डॉ ने भी एक गहरी सांस ली..
“रोहन मालती को नही मालती रोहन को पटायेगी ,मैं उसे जानता हु जैसे उसे हमेशा ही लगता था की उसने गौरव को अपने झांसे में लिया है वैसे ही अब उसे लगेगा की उसने रोहन को अपने झांसे में ले लिया है .बस समय दो और रोहन को उसके आस पास ही रखो ..ऐसे तुम्हारे पिता की मीटिंग कब है,कपूर साहब के साथ “
सपना के चहरे में अब थोड़ी शांति थी
“2 दिन बाद”
“ओके ,और एक बात अभी जल्दबाजी करने की कोई जरूरत नही है ,अभी गौरव को थोड़ी मेहनत करने दो,वो रफीक को देखकर पैनिक में है क्योकि उसे लगता है की रफीक को उसी किसी शेख ने भेजा है फार्मूला हासिल करने के लिए,तो वो अब तुमसे फार्मूला हासिल करने की कोशिश करेगा,लेकिन उसे ये नही पता की तुम्हारे पास भी पूरे फार्मूला नही है,उसके मजे लो ,उसे बहका के रखो वरना वो बाकी के कामो में टांग अड़ायेगा,उसे लगने दो की वो अपने मकसद के बेहद करीब है ,और उसे करीब ही रहने दो कभी पहुचने मत देना..”
डॉ की बात सुनकर सपना के चहरे में मुस्कान खिल गई..
“मतलब मुझे उससे सेक्स नही करना है “
डॉ इस बात पर हँस पड़ा ..
“सेक्स...
तुम्हे लगता है की तुमसे सेक्स करना उसका मकसद है ??”
“नही मेरा मतलब है की पहले वो मुझे फसाने के लिए यही करने की कोशिश करेगा “
सपना की बात सुनकर डॉ ने एक गहरी सांस ली
“सपना तुम्हारे पास सच में बहुत तेज दिमाग है लेकिन फिर ही तुम्हारे अंदर एक बचपना अभी भी है,गौरव मेच्योर आदमी है उसके लिए सेक्स के कुछ खास मायने नही है,उसका तरीका कुछ भी हो सकता है शायद वो कुछ भी ना करे,और यही उसका तरीका हो ,तो तम्हे बस कुल रहना है ,समझना है और जो समझ आये वो मुझे बताना”
“तो सेक्स ...क्या मुझे उसके साथ सेक्स करना होगा, अगर वो चाहे तो ..???”
डॉ फिर से खिलखिला उठा
“वो तुम्हारी मर्जी है..बस कुछ भी हो वो उलझा रहे तो हमारे लिए बेहतर है “
सपना ने सहमति में अपना सर हिला दिया..
***********
सपना के जाने के कुछ ही देर बाद रोहन डॉ से मिलने पहुचा …
“तो कैसे चल रही है मालती के साथ “
डॉ के बात से रोहन के चहरे में मुस्कान खिल गई थी
“कुछ खास नही ,वो तो मुझे अभी घास भी नही डाल रही है ..”
“कोई बात नही,बस उसे कुछ ऐसे पटाओ की उसे पता भी नही चले की तुम उसे पटा रहे हो,या ये तरीका अच्छा रहेगा की तुम उसे पटाओ ही मत कुछ ऐसा करो की वो ही तुम्हे पटा ले”
रोहन कुछ आश्चर्य से डॉ को देख रहा था…
“टाइम लगेगा ,फिक्र मत करो ,तुम रफीक के ऊपर ध्यान दो लेकिन किसी न किसी बहाने से मालती से भी मिलते रहो,बाकी उस तक न्यूज़ तो सपना पहुचा ही देगी ,और तुम रफीक के इतने करीबी बन जाओ की मालती को उसतक पहुचने के लिए तुम्हारे करीब आना पड़े..”
“लेकिन वो क्यो रफीक के करीब जाना चाहेगी “
डॉ उसकी बात सुनकर मुस्कुराने लगा
“रोहन तुम जो गेम खेल रहे हो वो खेल का आखरी पड़ाव है ,खेल तो सालों पहले से शुरू हो गया है ….लेकिन अब फैसले की घड़ी है की कौन जीतेगा और कौन हारेगा..”
डॉ ने ये बात ऐसे कही थी जैसे वो खुद ही बात कर रहा हो ..
रोहन को उसकी बात कुछ खास तो समझ नही आई लेकिन उसने हा में सर हिला दिया..
**********
“यार ये डॉ बड़ी अजीब अजीब बाते कर रहा था मेरे तो समझ के बाहर था,खेल का आखरी पड़ाव ,फैसला etc ..”
रोहन और सपना रोहन के एक फ्लेट में बने छोटे से बार में बैठे हुए थे..
सपना गंभीर थी और वोदका को बड़े ही गंभीर ढंग से चुस्कियां ले कर पी रही थी …
“रोहन मुझे कुछ सही नही लग रहा है,पूर्वी डॉ से अकेले में मिलती है,फिर गौरव के साथ मिलती है ,डॉ हमे अलग अलग अपने पास बुलाता है और कहता है की समय लो,जल्दबाजी में कुछ मत करो ,एक आदमी अचानक से हमारी लाइफ में आता है(रफीक) और सबके लिए इतना इम्पोर्टेन्ट हो जाता है,हमारे घर वाले भी कही न कही इन सबमे इन्वॉल्व है ,यार रोहन हम क्या करने निकले थे और ये क्या कर रहे है,पूर्वी को गौरव से ज्यादा डॉ की बात सुन रही है ,हम लोग क्यो उसका कहा मान रहे है,हमे क्या लेना देना की उस फार्मूले में क्या है हम क्यो अपनी ऐयाशियों वाली जिंदगी को छोड़कर इस झमेले में पड़ गए है …”
सपना को इतना गंभीर देख कर रोहन भी थोड़ा गंभीर हो गया उसने तो ये सब सोचा भी नही था..
“हा यार सही कहा,साला ये तो हमारा पैसे उड़ाने और मौज करने की दिन है,बाप ने इतना पैसा हमारे लिए ही तो कमाया है और साला हम इन सब चूतियापे में पड़ गए है ..”
उसने अपने ग्लास में रखे विस्की को एक ही सांस में अंदर धकेल कर फिर से नया पैक बना लिया..
“मुझे तो डॉ पर ही शक होता है ,गौरव तो सीधा साधा ही लगता है लेकिन ये डॉ बड़ा ही टेढ़ा आदमी है,देखा ना उसने पूर्वी को भी मना लिया की वो रफीक के आस पास रहे ,”
सपना फिर गंभीरता से बोली
“हा यार मुझे भी डॉ कुछ समझ नही आता “
रोहन ने फिर से अपना पैक एक ही सांस में खाली कर दिया ,इस बार सपना उसे घूरने लगी
“क्या क्या देख रही है “
सपना के चहरे में गुस्सा था
“साले तुझे समझ क्या आता है,जब देखो हा में हा मिलता रहता है..”
सपना को गुस्से में देखकर रोहन मुस्कुराने लगा..
“ये कहावत सुनी है ...येड़ा बनकर पेड़ा खाना..”रोहन के चहरे की मुस्कान और भी गहरी हो गई
सपना ने सहमति में सर हिलाया
“बस यंहा वही करना होगा,ये सब क्या चल रहा है ये सब तो साला हमारे दिमाग के ऊपर से ही निकल रहा है तो क्यो ना येड़ा बन जाय जाए,जब मौका आएगा तब पेड़ा हम खा के निकल जाएंगे..”
सपना ने पहली बार रोहन के मुह से कुछ ऐसी बात सुनी जिसमे उसे कुछ चालाकी का आभास हुआ ..
“मतलब ..”
“मतलब ये की सब खेल के सेंटर में वो फार्मूला है जिसके बारे में हमे घण्टा कुछ नही पता ,जो पता भी है वो महज एक अनुमान ही है ,तो अभी हम वो करते है जो ये लोग कह रहे है,सबको लगने दो की हम उनके ही साथ है चाहे वो डॉ हो ,गौरव हो ,मालती हो या रफीक, जब फार्मूला मिल जाए तो ले के निकल लेंगे…”
रोहन की बात सुनकर सपना के आंखों में आश्चर्य खिल गया उसने कभी सोचा भी नही था की रोहन कुछ ऐसा सोचेगा ..
“तो तुम्हारा प्लान क्या है ??”
उसने जल्दी से कहा
“कोई प्लान नही यही प्लान है ,प्लान उन्हें बनाने दो न जो इस खेल को खेल रहे है ,हमे तो बस ट्रॉफी से मतलब है ,चाहे कोई भी जीते..
”रोहन हँस पड़ा था,सपना जैसे उसकी बातों को समझ गई थी ..
“लेकिन ...कोई भी जीते तो हमे कैसे फायदा होगा..”
“अरे यार हम तो सबके साथ है ना,हम गौरव के साथ भी है,और मालती और रफीक के साथ भी ,और डॉ के साथ भी,हमे क्या करना है की कौन जीतेगा और कौन हारेगा...तू खुद सोच कर देख क्या हम सबके वफादार नही बन सकते...क्या तू गौरव के प्यार में नही पड़ सकती,और डॉ और मालती को ये लगेगा की तू उनके कहने पर नाटक ही कर रही है ,लेकिन गौरव को तो ये लगेगा की उसने तुझे फंसा लिया है ,क्या मैं रफीक का सबसे अच्छा दोस्त नई बन सकता,फिर से डॉ को यही लगेगा की मैं उसके कहने पर ये कर रहा हु,..”
सपना के चहरे में इस बार मुस्कुराहट आ गई
“तू तो बड़ा दिमाग वाला निकल गया बे,यानी हमे डबल क्रॉस करना है “
रोहन हँस पड़ा
“डबल ट्रिपल जितना भी क्रॉस करना पड़े कर देते है ,साला हमारा क्या जायेगा,हो सकता है उस फार्मूले में ही कुछ ऐसा मिल जाए की हमारा फायदा हो और इसके साथ मुझे पूर्वी भी मिल जाए ..”
रोहन का चहरा खिल गया और उसकी बात सुनकर सपना भी जोरो से हँस पड़ी और उसके गालों को खिंचने लगी,
“साले आखिर में तू आ गया ना अपनी औकात में ..”
रोहन को यही सही मौका लगा और वो खड़े होकर सपना के पैरों में बैठ गया,रोहन सपना के मिनी स्कर्ट के नीचे हाथ घुसकर उसके जांघो को सहलाने लगा,सपना उसके इरादों को समझ चुकी थी..उसके होठो में भी मुस्कान आ गई
“यार ...बहुत दिन हो गए ..”
रोहन जैसे मिन्नत कर रहा था..
सपना ने उसके बालो को अपने हाथो में पकड़ कर उसे अपने जांघो के बीच सरका दिया ..
“मुझे भी ………”
**************
“बल्ला गजब की माल है साली इसे ही तेरी भउजाई बनाऊंगा ..”
सपना ने अचानक से उस ओर देखा जिस ओर से ये आवाज आ रही थी और उसकी आंखे फ़टी की फ़टी रह गया क्योकी ये रफीक था…
“कसम से भइया जी क्या गांड है साली के “सपना ने बल्ला की निगाहों का पीछा किया वो दोनों पूर्वी को वर्कआउट करते देख रहे थे,पूर्वी भी बीच बीच में उन्हें देखकर मुस्कुरा रही थी ..
“हमको तो लगता है भैया की ये मछली हमारे जाल में फंस ही जाएगी ..क्या बोलते हो “
बल्ला फिर से बोल उठा और रफीक बस मुस्कुरा दिया,सपना ने अपने को चेंजिंग रूम में छिपा लिया,जंहा वो पहले से मौजूद थी जिससे ये दोनों ही बेखबर थे और रूम के बाहर खड़े हुए बाते कर रहे थे ..
“कसम से एक बार मिल जाए ,साला खटिया ही तोड़ देंगे,पूरा U.P. हिला देंगे ..”
बल्ला के साथ साथ रफीक भी हंसा..
वही सपना का चहरा पिला पड़ गया
“ये साली तो सोचती है तुम कोई शेख हो ,तुम्हारे सामने तो खेल के दे देगी ,भैया जी ये तो मोनालिसा से भी जबर माल है,”
दोनों फिर से हँसे
“बस बल्ला नाटक चलने दे ,फिर देख कमरिया लापालाप है,जौनपुर से आजमगढ़ तक नंगी दौड़ाकर चोदूंगा साली को ,शेख बनकर क्या पता ये खजूर ही खाने को मिल जाए “
दोनों फिर से खिलखिलाकर हँसे और पूर्वी की ओर बढ़ गए ..
सपना चेंजिंग रूम में उनकी बात सुनकर पसीने से पूरी तरह से भीग गई थी ,उसे अपने कानो पर यकीन नही हो रहा था लेकिन उसने खुद ये सब सुना था,ये लोग शेख बनकर खजूर खाने के फिराक में थे और खजूर और कोई नही उसकी बचपन की दोस्त पूर्वी थी…...तो केमिकल फेक्ट्री की बात,क्या ये सब झूठ था???
भाड़ में जाए केमिकल फेक्ट्री इन सालों की तो ...वो यही सोचकर बाहर निकली लेकिन फिर उसके दिमाग में कुछ बाते कौंध गई और वो उसके पैर बस वही रुक गए ………..
अध्याय 25
“हमने सुना था की जन्नत में हूर होती है लेकिन इस जहां में भी हमे कोई हूर मिल जाएगी ये तो सोचा न था”
रफीक की बात सुनकर पूर्वी खिलखिला उठी ,उसी समय सपना भी उनके पास पहुच चुकी थी ,पूर्वी किसी समान को पकड़ने के लिए नीचे झुकी और उसके टाइट लोवर के कारण उसके चूतड़ पूरी तरह से उभर कर बाहर को झांकने लगे,उसकी पेंटी की आकृति भी साफ साफ दिखने लगी थी,रफीक जैसे उस दृश्य को देखकर बस उसमें भी खो गया था,सपना की नजर उसकी नजरो का पीछा करते हुए उस दृश्य पर चली गई ,उसने तुरंत आसपास देखा ,ऐसे तो पूर्वी के इस कुछ सेकंड के बर्ताव को देखने वाले कुछ ही लोग थे लेकिन जिसने भी इसे देखा उसकी आंखे बस वही जमी रह गई ,इसमें बल्ला और रोहन भी शामिल थे,जबकि रफीक को देखकर तो ऐसा लग रहा था जैसे उसकी सांस ही रुक गई हो…
पूर्वी के वापस उठने पर सभी की सांस फिर से चलनी शुरू हो गई थी,रफीक ने बल्ला की ओर देखा और एक मुस्कान बिखेर दी जैसे कह रहा हो ‘क्या माल है यार ये ‘
वही बल्ला भी आंखों ही आंखों से मुस्कुराने लगा,लेकिन दोनों की ये हरकते सपना से नही छिप पाई,वो कुछ कहना चाहती ही शायद पूर्वी को रफीक का सच बताना चाहती थी लेकिन वो चुप रही उसके दिमाग में और भी कई सवाल घूम रहे थे जिसका जवाब जानना उसके लिए और भी ज्यादा जरूरी था…
जिम में गौरव किसी से कोई बात किये बिना अपना काम कर रहा था ,उसे देखकर ऐसा लगता जैसे वो किसी सपने में खोया हुआ है ,वो पूरी तरह से दुनिया से बेखबर था,रफीक और रोहन के प्यासी नजरो की उसे कोई भी फिक्र नही थी ना ही वो उधर देख ही रहा था,ये तो सिर्फ सपना ही समझ सकती थी की आखिर उसके दिमाग में क्या चल रहा है ,गौरव इसी पशोपेश में था की आखिर वो सपना से कैसे उस फार्मूले को निकलवाये..वो ज्यादा देर तक वंहा रुका भी नही और पूर्वी को वही छोड़कर घर चला गया..
इधर
रोहन पूर्वी और रफीक को सपना ने भी जॉइन कर लिया था..
“तो सपना जी अपने हमारे आफर के बारे में क्या सोचा “
रफीक सपना की ओर मुड़ता है
“मैंने आपको साफ साफ कहा था की मैं दूसरे प्रोजेक्ट में व्यस्त हु और मुझे समय नही मिल पायेगा”
सपना ने दो टूक जवाब दिया
“चलिए कोई बात नही ,लेकिन जब कभी आप फ्री हो हमारा आफर आपके लिए वही रहेगा”
रफीक बेहद ही नम्रता के साथ बोल रहा था
“बिल्कुल बिल्कुल “सपना ने भी हामी भरी
“तो यार रोहन तुम तो हमे शहर घूमने ले जाने वाले थे,और आप भी अपने वादे से खिलाफत कर रही है पूर्वी जी “
रफीक के शराफत भरे लहजे को सुनकर सपना मन ही मन मुस्कराने लगी ,उसे यकीन हो गया था की जो वो रफीक के बारे में सोच रही थी वो कही ना कही सही हो सकता था,वो तैयारी के साथ आया था..
“बिल्कुल शेख साहब ,क्यो ना आज ही कही बाहर चले क्या कहते हो “
पूर्वी ने रोहन को देखा और रोहन ने भी हा में सर हिला दिया
“अरे पूर्वी जी हमे शेख कहकर क्यो हमे शर्मिंदा कर रही हो ,हम शेख के बेटे है ना की शेख है”
“अरे यार शेख का बेटा भी तो शेख ही हुआ ना,तुम हम गरीबो के साथ टाइम बिता रहे हो यही बहुत है”
रोहन लपक कर बोल उठा,बदले मे रफीक ने थोड़ी नम्रता दिखाई और फिर बल्ला की ओर देखा जो की अब भी आंखों से ही मुस्करा रहा था जैसे कह रहा हो की साले बुरी तरह से फंस गए है ..
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बल्ला के हाथो में एक पिस्तौल थी और उसकी आंखे बिल्कुल लक्ष्य पर टिकी हुई थी ,एक दो तीन ...उसने गोली चला दी और धाय….
“वाओ बल्ला तुम तो गजब के निशानेबाज हो “सपना ने चहक कर कहा,बल्ला के चहरे में मुस्कान खिल गई,वो सपना के साथ उस जंगल के एक हिस्से में अकेला था,पास में बहती हुई नदी का कलरव वातावरण में फैल रहा था,बल्ला का मजबूत शरीर ऊपर से नँगा ही था,उसकी मजबूत भुजाई फड़फड़ा रही थी,वो पसीने से भीगा हुआ था और हांफने के कारण उसकी उभरी हुई मांसल छतिया भी और भी भारी भरकम लग रही थी ,एक बार सपना की नजर उसके जिस्म पर ठहर गई ,वो सच में किसी दानव से कम नही लग रहा था लेकिन फिर भी उसका ये शरीर सपना के यौवन से भरे हुए मन में तरंगे उठाने के लिए काफी था,वो दोनों ही सबसे बहुत दूर आ गए थे,बल्ला का शर्ट नदी के किनारे पड़ा हुए था और एक चिड़िया को मारने के लिए वो बहुत दूर तक भागता रहा था,आखिर वो चिड़िया फड़फड़ाते हुए नीचे गिर गई,सपना भी उसके साथ भाग रही थी और वो भी हांफ रही थी,उसकी स्कर्ट एक कांटे से फंसने के कारण फट चुकी थी,जिससे उसके जांघो का बहुत सा हिस्सा दिखने लगा था,वही पसीने से भीगने के कारण उसकी टीशर्ट भी उसके जिस्म में चिपक गई थी,आदतन या जानबूझकर सपना ने अंदर कोई भी अंतःवस्त्र नही पहने थे और इसी कारण टीशर्ट से उसके बड़े बड़े वक्ष साफ साफ दिख रहे थे,उसके निप्पल उसके काले कलर के टीशर्ट से दिख तो नही रहे थे लेकिन शरीर का हर कटाव ऐसे कपड़ो से चिपक चुका था जैसे दोनों में कोई भेद ही नही रह गया था,बल्ला अपनी तारीफ इस हसीना से सुनकर खुश होने ही वाला था की उसकी नजर सपना पर पड़ गई और जैसे उसकी सांस ही रुक गई हो ,उसने सपना को अपने जिस्म को देखता हुआ पाया,उसने सपना की आंखों में एक लालच देखा जिसे महसूस करके ही उसके जिस्म में एक करेंट सी दौड़ गई थी,वही सपना के जिस्म को देखकर वो खुद को सम्हालने ही वाला था की उसकी नजर नीचे गई जंहा सपना की स्कर्ट फ़टी हुई थी और उसके उजाले जांघो के दर्शन करके बल्ला का बल्ला खड़ा होने लगा था,बल्ला के बल्ले के अकड़न से उसका शार्ट भी थोड़ा उठने लगा था ,सपना का आश्चर्य उस समय और भी बढ़ने लगा जब उसके बल्ला के बल्ले क्यो उठाते हुए देखा,उसे लगा जैसे उसकी ही बल्ले बल्ले हो गई हो ,उसने उस दैत्य शरीर वाले इंसान के लिंग को उठता हुआ देखा,वो कपड़ो की पाबंदी को तोड़ने को आतुर दिख रहा था,ऐसे लगा जैसे बल्ला के जांघो के बीच कोई लोहे का सरिया धीरे धीरे बड़ा हो रहा है,अब वो शायद अपने पूरे आकर में था एक टेंट बन चुका था जो इतना बड़ा था की सपना का मुह खुला का खुला ही रह गया,उसे आभास हुआ की इस दैत्य के पास एक दैत्याकार लिंग भी है जो किसी मूसल से कम कठोर नही लग रहा था,सपना के जांघो के बीच एक अजीब सी हलचल होने लगी ,उसने खुद को सम्हाल और सर उठाकर बल्ला को देखा वो भी उसे ही देख रहा था,ऐसे देख रहा था मानो कोई छोटा और भूखा बच्चा किसी चॉकलेट से बने हुए गुम्बद को देखे ,ऐसे जैसे कोई भूखा कुत्ता
किसी मांस के लोथड़े को देखे,लार मानो टपकने के ही कगार में थी,सपना को ये देखकर खुसी हुई की उसने बल्ला का बल्ला खड़ा कर दिया है,अब उसे निचोड़ने की देर थी लेकिन वो अभी सब्र से काम लेना चाहती थी…
“बल्ला चले सब हमारी राह देख रहे होंगे..”
सपना की बात जैसे उसने सुनी ही नही ,सपना ने फिर से दोहराया तो बल्ला हड़बड़ाते हुए इधर उधर देखने लगा..
“अरे सपना जी वो तो खुद में मस्त होंगे हमारी राह कौन देखेगा..”
बात तो सही थी,रोहन और रफीक तो पूर्वी के पीछे हाथ धोकर पड़े थे वंहा सपना और बल्ला को कौन याद करने वाला था,सपना ने भी इसका जवाब मुस्कुरा कर दिया और बिना कुछ बोले नदी की तरफ चल पड़ी,वो निकले तो शहर घूमने थे लेकिन पिकनिक मनाने शहर से बहुत दूर जंगलों में आ गये थे,सपना को बहुत दिनों बाद ऐसी शांति मिल रही थी ,बल्ला भी उसके पीछे पीछे आया ,अब उसके हाथो में तो चिड़िया थी ,उसने पास के घास को जलाकर उसके ऊपर उसे भुनने लगा,सपना नदी के किनारे एक पत्थर में बैठी हुई नदी के सौंदर्य को निहारे जा रही थी.बल्ला भी वही पहुच गया और ना जाने उसे क्या हुआ उसने अपनी अंजली में पानी भरकर सपना की ओर उछाल दिया,सपना की तंद्रा जैसे टूट गई और वो एक बार के लिए ही हड़बड़ा सी गई ,फिर उसे बल्ला की शरारत समझ आयी ,वो हंसती हुई उसे मना करने लगी लेकिन वो नही माना ,सपना भी नदी में उतर गई थी और उसने भी बल्ला की ओर पानी फेकना शुरू कर दिया दोनों खिलखिला रहे थे,सपना सोच भी नही सकती थी की बल्ला जैसा आदमी कभी हँस भी सकता है वो भी इतनी मासूमियत के साथ ,दोनों ही भीग चुके थे सपना के पूरे कपड़े पूरी तरह से भीग चुके थे लेकिन दोनों को ही इसकी फिक्र भी नही थी ,
बल्ला सपना के करीब आ चुका था और उसने उसे किसी बच्चे की तरह उठा लिया और हवा में लहरा दिया,सपना को तो ये यकीन ही नही आ रहा था की कोई इतना ताकतवर कैसे हो सकता है,वो बल्ला के सामने कोई छोटी सी गुड़िया लग रही थी,जिसे बल्ला जैसे चाहता वैसे ही घुमा देता लेकिन सपना को इससे बहुत ही खुसी भी मिल रही थी,उसने कभी किसी के साथ ऐसी मस्ती नही की थी,इतने ताकतवर इंसान के हाथो में वो किसी कठपुतली की तरह थी लेकिन ऐसा बनना भी उसे बहुत ही सुकून दे रहा था ,वो बल्ला की कायल हुए जा रही थी,कहा सपना उसे फसाना चाहती थी और कहा वो खुद ही बल्ला की दीवानी हुए जा रही थी,लेकिन उसने डिसाइड किया था की वो इस पल को पूरे जस्बे के साथ जियेगी ,उसने अपने दिमाग में चल रहे सभी जदोजहद को थोड़ी देर के लिए भूल जाना ही मुनासिब समझा था…
वो खिलखिलाती हुई बल्ला के सीने में आ समाई,बल्ला अब भी उसे हवा में उठाये हुए था,दोनों के बीच कोई बातचीत भी नही हो रही थी ,और उसकी कोई जरूरत भी नही थी ,बल्ला अचानक उसकी आंखों में देखने लगा,उसने सपना को थोड़ा नीचे किया,अब सपना की बांहे बल्ला के गले में फसी हुई थी वही
उसकी छतिया बल्ला के सीने से चिपकी हुई थी,दोनों की आंखे मिल चुकी थी लेकिन कोई भी एक शब्द बोलने को राजी नही था,दोनों ही एक दूसरे को देख रहे थे और ये क्या ….सपना ने शर्माकर अपना सर बल्ला के कंधे पर टिका दिया,सपना शरमाई ये तो सपना को भी यकीन नही हो रहा था,लेकिन ये सच था,वही बल्ला ने उसके सर को चूमा ,शायद ये बल्ला को भी यकीन नही हो रहा था की इतनी हसीन लड़की उसके इतने करीब है ,वो कही भी चूम सकता था लेकिन उसके उसके बालो को चूमा ,उसके हाथ कही भी जा सकते थे लेकिन वो उसके कमर से नीचे नही गए,उसके जांघो के बीच अकड़न होनी चाहिए थे लेकिन उसके दिल में एक अजीब सी कसीस उठ रही थी ,बल्ला के लिए और सपना के लिए दोनों के लिए ये बेहद ही नई बात थी,वो कुछ समझ ही नही पाए और सपना जल्दी से नीचे उतर कर जाने लगी ,वही बल्ला बस उसे खड़ा हुआ देख रहा था,उसे अब भी यकीन नही हो रहा था की आखिर उसके साथ ये क्या हो रहा है ……….
अध्याय 26
इधर
पूर्वी को पटाने की कोशिश रफीक और रोहन में जोरो शोरो से चल रही थी ,लेकिन अभी तक कोई भी कन्फर्म नही था की कौन सक्सेसफुल हुआ है,जंगल में सपना और बल्ला गायब हो गए थे जिसकी अभी तो किसी कोई भी फिक्र नही थी ,सभी एक झील के किनारे बैठे बाते कर रहे थे,
पूर्वी ने एक स्कर्ट ,शर्ट और उसके ऊपर एक जैकेट डाली थी,वो बहुत ही प्यारी लग रही थी,
“कुदरत ने आपको बड़े ही प्यार से बनाया है पूर्वी जी “
रफीक मानो उसके शरीर का स्कैन करते हुए बोला,पूर्वी को भी पता था की रफीक आखिर उसके किन अंगों को घूर रहा है लेकिन उसके होठो में एक मुस्कान आई जिससे रफीक की हिम्मत थोड़ी और बढ़ गई ..
वो उसके और भी करीब सरका..
“यारो क्यो न यंहा मछलियां पकड़ी जाए सुना है यंहा की मछलियां बेहद ही स्वादिस्ट होती है”
रोहन अपने बेग एक स्टिक निकलते हुए बोला..
“मुझे तो गोश्त पसंद है ,मछलियां तुम ही पकड़ो “
रफीक ने सीधे शब्दो में कहा वही पूर्वी ने भी न में सर हिला दिया,रोहन बुझे मन से ही सही लेकिन मछलियां पकड़ने थोड़ी दूर झील में बने एक पत्थर में जा बैठा..
रफीक और पूर्वी बैठे हुए उसे ही देख रहे थे..
“पूर्वी जी आपका हुस्न..”
रफीक कुछ बोलने ही वाला था की पूर्वी ने उसे रोक दिया
“यार रफीक तुम मुझे बोर कर रहे हो ,जब से क्या हुस्न हुस्न लगा कर रखा है,जनाब के पास इसके अलावा बात करने का कोई दूसरा टॉपिक नही है क्या??”
पूर्वी ये कहते हुए थोड़ा हंसी ..
“साहिबा जब से आपको देखा है तब से सपनो में आप ही दिखती है और जब आप सचमुच में मेरे सामने है तो कैसे आपकी तारीफ ना करे..”
पूर्वी उसकी बात सुनकर खिलखिला कर हँस पड़ी और प्यार से उसके गालों पर एक चपत मार दी ..
“मुझे लाइन मरना छोड़ो और बताओ की आखिर यंहा किस काम के लिए आये हो..
”
रफीक ने एक गहरी सांस भरी
“हमारे अब्बू की तमन्ना थी की हम यंहा एक केमिकल फेक्ट्री डाले,बस उसी सिलसिले में हम यंहा पर आये है “
“हम्म्म्म क्या काम शुरू हो गया??”
“अभी तक तो नही लेकिन हो जाएगा”
“अब आप ऐसे हमारे साथ छुट्टियां मानते रहे तो काम कैसे शुरू होगा शेख साहब ..”
रफीक ने एक बार पूर्वी को घुरा ..
“हमने कितनी बार कहा की हम कोई शेख नही है हम तो शेख के बेटे है,ऐसे भी मुझे वंहा की जिंदगी पसंद ही नही आती,ये इंडिया मेरा घर है,मैं यंही जन्म लिया,और यंही बसना चाहता हु,”
रफीक आसपास ऐसे देख रहा था जैसे वो सचमे बहुत ही सेंटी हो गया हो ..
पूर्वी ने इस बार अपनी आवाज धीरे कर ली
“तो यंहा बसने के लिए फेक्ट्री के अलावा और भी कुछ ढूंढ रहे है रफीक साहब “
पूर्वी ने इतने मदहोश लहजे में बात कही थी की रफीक एक बार उसके चहरे को ही देखता रह गया था,उसकी मासूम सी आंखे और उसके नाजुक जुबानों का हिलना,बालो की वो लट जो ठंडी हवा में लहराते हुए उसके मुखड़े तक आ जाती थी,वो जैसे मंत्रमुग्ध हुआ बस उसके चहरे को देख रहा था..
“कहा खो गए साहब..”
“उजाला...तेरे चहरे का उजाला...कुछ ऐसा है जानम, की दिन भी यही हो और सपने इसी के …”वो बोलता हुआ थोड़ा पास आया
“किस्मत….किस्मत तू मेरी ,मेरी कहानी,हम है इसी के…”
वो थोड़ा और पास आया और अपने हाथो से पूर्वी के बालो की लट को हल्के से उसके चहरे से हटाने लगा..
“जल्फे...जल्फे ये तेरे ,जैसे बादल हो काली,ये होठो की लाली,मर जाए इसमें..”
पूर्वी की आंखे उसकी आंखों से मिली थी,उसके होठ फड़फड़ाने लगे थे रफीक और भी पास आ चुका था,और दोनों की ही सांस एक दूसरे से टकरा रही थी
“जन्नत...जन्नत ये सांस है तेरी... जो मेरी... सांसों से टकरा के छूती मुझीको..”
उसके होठ और भी पास आ चुके थे,पूर्वी उसके मर्दाने शरीर को महसूस कर सकती थी उसके हाथ पूर्वी के जंहा पर थे..
“दौलत...दौलत है मेरी ,तेरा जिस्म है ये,जन्नत हमारी ..”
उसका हाथ जांघो को सहलाता हुआ थोड़ा आगे को बढ़ा और उसके होठो लगभग पूर्वी के होठो से टकराने वाले थे,
“शोहबत..शोहबत में तेरी..”
पूर्वी ने जोरो से उसके होठो को अपने जांघो में आगे बढ़ने से रोक लिया,और अपने होठो को थोड़ा दूर किया,और बोल पड़ी
“शोहबत में तेरी है दोस्ती की खशबू..ना बिगाड़ो इसे तुम ..है मिन्नत हमारी..”
पूर्वी की बात सुनकर रफीक तुरंत ही उससे अलग हो गया...पूर्वी के होठो में मुस्कान थी और रफीक पूरी तरह से लाल हो चुका था,उसने एक गहरी सांस ली
“मोहोब्बत है तुमसे यू लगता है मुझको,तुम जो मिली तो हो किस्मत हमारी ..
”
वो झेंपता हुआ ही सही लेकिन बोल गया था,उसने एक बार पूर्वी की तरफ देखा जैसे पूछ रहा हो की वो क्या जवाब देना चाहती है,पूर्वी ने कुछ भी नही कहा बस रोहन को देखने लगी जो की अभी मछली पकड़ने में व्यस्त था,और धीरे से उसने रफीक के हाथो को अपने हाथो में ले लिया ..
“यू हादसों से मोहोब्बत नही होती ये दोस्त,उम्र गुजर जाती है इकरार करते करते..”
पूर्वी ने फिर से रफीक को देखा जिसके होठो में एक मुस्कान आ चुकी थी,वो अब भी पूर्वी को समझ नही पा रहा था,वो उसका हाथ पकड़े हुए थी उसकी हरकत का भी उसने कोई बुरा नही माना था लेकिन फिर भी वो बड़े ही प्यार से उसे ना भी कह रही थी,इतने प्यार से की कही ना कही रफीक के दिल में पूर्वी के लिए सच में एक प्यार या यू कहे की सम्मान वाली भावना का जन्म हो गया था...उसने जवाब में सहमति में सर हिलाया..
“हर सितम सहूंगा,उफ तक ना कहूंगा,एक बार कह तो दो अपना ,मर कर भी तेरा ही रहूंगा..”
पूर्वी उसकी शायरी सुनकर जोरो से हँस पड़ी..
“ये क्या फटे हुए शायरों वाली शायरी बोल रहे हो ,और प्यार जानते हो ना क्या है,ग़ालिब ने कहा है कि...एक आग का दरिया है और डूब के जाना है..”
दोनों ही एक दूसरे को मुस्कुराते हुए देख रहे थे.रफीक ने अपना हाथ पूर्वी के उस हाथ पर रख दिया जिससे उसने उसके हाथो को पकड़ रखा था..
“हर आग में डूबने को तैयार हु पूर्वी तुम एक बार बोलो तो सही ..”
पूर्वी ने सीधे रफीक की आंखों में देखा,ये अजीब सी प्यार वाली फिलिंग थी जिसे आजतक उसने कभी किसी की आंखों में नही देखी थी,ना ही गौरव ना ही रोहन ये अलग ही तरह का आशिक था,एक अलग ही दर्द था रफीक की आंखों में जैसे बहुत कुछ कहना चाहता हो इतनी बोलती हुई थी उसकी आंखे ..पूर्वी तो एक बार डर ही गई और उसने तुरंत ही अपने हाथो को उसके हाथो से हटा लिया ..
“मैं तुम्हे किसी आग में नही झोंकना चाहती रफीक,तुम मुझे अच्छे इंसान लगे ,हम अच्छे दोस्त बन सकते है इससे ज्यादा कुछ भी नही ,शायद तुम्हे नही मालूम की मैं शादीशुदा हु ..”
पूर्वी की बात सुनकर इस बार रफीक ने एक अंगड़ाई ली …
“शायद तुम्हे इंसान की परख नही है पूर्वी ,मैं कोई अच्छा इंसान नही हु जिसे तुम आग में ना झोको,मैं ना जाने कितने ही आग से खेलकर यंहा तक पहुचा हु ,दूसरी बात तुम्हारे शादीशुदा होने की बात तो मुझे इससे कोई फर्क नही पड़ता ...मैं फिर भी तुम्हे उतना ही प्यार करूंगा ..”
पूर्वी ने आश्चर्य से उसे देखा
“मतलब ..”
“मतलब जब शादी में प्यार ना रह जाए तो वो शादी नही होती,बस एक बंधन होता है और उसे तोड़ देना ही मुनासिब होता है,”
एक बार पूर्वी रफीक के आंखों में देखने लगी उसे ऐसा लगा जैसे वो भी उसकी आंखों की गहराई में उसके सच को खोज रहा है…
वो हड़बड़ाई..
“तुम पागल हो गए है क्या,मैं अपने पति से बहुत खुश हु ..”
उसने हड़बड़ाते हुए कहा ..
“मैं तुम्हारी आंखे और उसमें से छलकते हुए जज़बातों को समझ सकता हु पूर्वी ,और मैं जानता हु की तुम झूठ बोल रही हो..”
पूर्वी को जैसे एक झटका लगा और वो उठकर खड़ी हो गई
“तुम कुछ भी बोल रहे हो..”वो रोहन की ओर बढ़ने लगी
“याद रखना पूर्वी आदमी झूठ बोलता है लेकिन उसकी आंखे नही ..”
रफीक अभी रेत में लेट गया था उसकी बातों में एक कांफिडेंस था ,पूर्वी आश्चर्य से एक बार फिर से उसे देखा,वो अंदर तक हिल चुकी थी जैसे उसे लगा की कोई सच उसके सामने रख दिया गया हो..लेकिन उसने अपना सर हिलाया और रोहन की ओर जाने लगी ………
**********
पूर्वी रोहन के पास जाकर बैठ चुकी थी और अपने ही ख्यालों में खोई हुई पानी में उठते हुए लहरों को निहारे जा रही थी..
“क्या हुआ ऐसा क्या बोल दिया उसने जो ऐसे गुमसुम होई गई हो “
रोहन बहुत देर से चुपचाप ही पूर्वी को ऐसे बैठे हुए देख रहा था,
“ऐसे लगा जैसे सच बोल गया हो ….”
पूर्वी ने बहुत धीरे से कहा और रोहन उसका मतलब समझने की कोशिश करने लगा ,लेकिन कुछ समझ ही नही पाया.
“क्या ??”
“कुछ नही कितनी मछलियां पकड़ी तुमने “
पूर्वी अपना मुड़ ठीक करने के लिए बोली..
“एक ही मछली के पीछे तो पड़ा हु लेकिन जाल में फसती ही नही “
रोहन का इशारा पूर्वी समझ चुकी थी,उसके होठो में मुस्कान आ गई ..
“फसाने की कोशिश करोगे तो कैसे फसेंगी ,उसे तो तुम प्यार से भी पा सकते हो “
पूर्वी ने मुस्कुराते हुए कहा और रोहन ने अचानक ही उसे देखा
“मेरे प्यार में क्या कमी है पूर्वी जो वो मुझे नही मिल रही ..”
रोहन की आवाज में एक गंभीरता थी
“समय रोहन समय ..जब मिली थी तो तुमने कद्र नही किया ,अब वो समय निकल चुका है “
रोहन को बीती हुई सारी बात जैसे एक ही बार में याद आ गई
“अब कोई चांस..???”
रोहन ने फिर से अपना बच्चों वाला लुक दिखाया ..और पूर्वी खिलखिला उठी
“तुम बच्चे ही हो रोहन ,चांस तुम्हे मिल चुका था जिसे तुमने गवा दिया ,अब चांस मिलेगा नही खुद ही बनाना पड़ेगा ..”
पूर्वी मुस्कुराते हुए उसे देखने लगी,सपना और बल्ला को आता हुआ देख कर वो उठकर उनके ओर जाने लगी ……..
और रोहन …
मानो मन में लड्डू फुट गए,लगा जैसे अब भी इस अंधेरे में उजाले का आसरा बाकी है …...
अध्याय 27
रोहन और सपना एक बड़े बिस्तर में लेते हुए सिगरेट पी रहे थे,दोनों के सर आसपास ही थे और एक ही सिगरेट को वो पास करके पी रहे थे…
“आज कुछ अजीब हुआ यार रोहन ..”
“हा मेरे साथ भी ..”
“क्या ..”
“पहले तुम बताओ की क्या अजीब हुआ..”
“अरे पहले तुम बताओ मेरी बात ज्यादा इम्पोर्टेन्ट नही है..”सपना की बात सुनकर रोहन उसकी ओर मुड़ा सपना भी उसके ओर मुड़ चुकी थी..
उसने सिगरेट रोहन को पास की रोहन ने आखरी कस लगा कर उसे फेक दिया,और पूरा धुंआ सपना के ऊपर छोड़ दिया ..
“छि यार ..”
रोहन थोड़ा हंसा..
“आज फिर से पूर्वी से प्यार हो गया यार “
रोहन एकटक सपना को देख रहा था,सपना ने अपना माथा पिट लिया
“कोई नई बात बता ये क्या अजीब बात हुई तुझे तो साले ऐसा बुखार चढ़ा है की उतरता ही नही ..”
“नई बात हुई यार..आज पूर्वी ने मुझे हिंट दिया की अब भी देर नई हुई है ,मैं अब भी उसे पटा सकता हु ..”सपना के आंखों में अब थोड़ा आश्चर्य था..
“क्या बोली वो ..”
रोहन ने पूरी बात बताई ..
“ओह तो शेख साहब पूर्वी के दिमाग से भी खेल रहे है,”
“मतलब ??”
“मतलब साफ है ,पूर्वी ने कभी ऐसी बात तुझसे नही कही थी ,शादी के बाद शायद ये पहली बार था जब उसने कुछ क्लियर हिंट दिया ओके..”
“हा ..”
“तो साफ है ना की ये रफीक के आने के बाद हुआ,वो उसके साथ अकेले बैठी थी तो कुछ तो उसने कहा होगा जो पूर्वी ऐसी बाते कर रही थी…”
रोहन ने बस सर हिलाया और उसे देखने लगा..
“क्या??”
“तू भी कुछ बोलने वाली थी “
“हा यार वो बल्ला है ना ,साला पता नही उसके लिए कुछ अट्रेक्सन सा आया दिल में “
सपना तो गंभीर थी लेकिन रोहन के होठो में मुस्कान आ गई
“दिल में या यंहा ..”
उसने अपना हाथ सपना के जांघो के बीच रख दिया ,सपना ने उसे एक मुक्का मारा..
“साले तुझे इसके सिवा कुछ सूझता है क्या ,ये सच है यार सचमे ,अगर सेक्स का मन करता तो बात अलग थी लेकिन...लेकिन ये कुछ और था,कुछ अजीब सा..”
रोहन सपन के चहरे को ही देख रहा था सपना थोड़ी गंभीर लग रही थी..
“ये साले वो दोनों आखिर मेरी दोनों जान के साथ कर क्या रहे है,एक आज इतनी गंभीर दिख रही थी और एक तू है तुझे उससे प्यार हो गया..”
सपना अपने विचारों से बाहर आयी
“अरे नही रे ,प्यार व्यार नही लेकिन ..लेकिन कुछ अजीब सा लगा,”
“उसे ही तो प्यार कहते है ना”
“यार उस बल्ला से प्यार..मय गॉड ये क्या हो रहा है मुझे..”सपना सरक कर रोहन के पास आ गई और रोहन ने उसे कसकर अपनी बांहों में जकड़ लिया..
“ऐसा ही रहेगा तो लफड़ा हो जाएगा सपना,हम तो उन लोगो को फसाने की सोच रहे थे वो साले तो हमे ही फंसा रहे है “
“ऐसा नही है यार ,ऐसे नही फसाया जाता किसी को ,वो इतना जेन्युन था की लगा नही की वो मुझे इम्प्रेस कर रहा यही मैं तो खुद ही उसे देखकर इम्प्रेस हो गई ,जानता है साले का बहुत बड़ा है,तुझसे भी बड़ा…”सपना थोड़ी अलग हुई रोहन के होठो में मुस्कान था ..
“साली इसे प्यार नही हवस कहते है,तू उसके साइज से इम्प्रेस हो गई ,या फिर उसके बॉडी से “
रोहन के बात से सपना भी मुस्कुराने लगी
“अरे नही साले सच में कुछ हुआ यंहा,क्या मुझे समझ नही आएगा की प्यार और हवस में क्या अंतर है..”
“हा मेरी जान तू इतनी खेली खाई हो है ,चल एक गेम खेले क्या आज “
सपना उसे ही देख रही थी
“क्या ??”
“आज तू पूर्वी बन जा और मैं बल्ला”
सपना जोरो से हँस पड़ी
“तू बेचारी मासूम सी पूर्वी को उस बल्ला से चुदवायेगा “सपना और भी जोरो से हँसने लगी
“कमीनी नही ..
मेरी पूर्वी उस दैत्य के साथ नही मेरा मतलब था की तू मेरे लिए पूर्वी बन जा और मैं तेरे लिए बल्ला..”
सपना अब भी हँस रही थी
“लेकिन बल्ला जैसा बल्ला कहा से लाएगा “
सपना और भी जोरो से हँसने लगी ,रोहन ने थोड़े गुस्से से उसे देखा और उसके ऊपर झपट पड़ा..
अब रोहन सपना ने ऊपर था और उसने सपना का मुह दबा दिया,वो उसके होठो को चूसने लगा..
“बहुत बोल रही है तू अब दिखाता हु तुझे की मेरे बल्ले में कितना दम है,तेरी गीली पिच में ऐसी बैटिंग करूंगा ना की आज तो कई सेंचुरी बना के दिखाऊंगा”
सपना के हाथ भी अब उसके गले को घेर चुके थे,
“आँख बंद कर मेरी जान और अपने बल्ला को याद कर ..”
रोहन ने अपना हाथ उसके टीशर्ट में डाल दिया और उसके मम्मो को दबाने लगा,सपना ने आंखे बंद की उसे लगा जैसे बल्ला का मजबूत हाथ उसके उजोरो को सहला रहा है,उसने मुह से सिसकियां निकलने लगी,रोहन का हाथ उसके जांघो के बीच पहुचा वो पेंट से हाथ अंदर घुसाया,थोड़ी ही देर में ही सपना की योनि से फुहार छूटने लगी थी,रोहन ने पिच तो गीली कर दी थी अब उसे बल्ला चलाना था,उसने सपना के चहरे को ध्यान से देखा और फिर पूर्वी को याद करने लगा,उसने भी अपनी आंखे बंद की ,उसके कानो में सुबह पूर्वी द्वारा बोले गए शब्द गूंज रहे थे,अब भी उसके पास मौका था पूर्वी को पाने का,उसने उस दिन को याद किया जब पूर्वी उसके सामने नंगी थी,उसे उसकी वो योनि याद आयी,रोहन ने सपना की योनि में फिर से उंगली डाल दी,उसके गीलेपन का आभास करने लगा,उसे लगा जैसे यही पूर्वी की योनि हो,वो मस्त होकर सपना पर टूट पड़ा था,वो उसे चूमे जा रहा था,
“पूर्वी आई लव यू..”
“आह बल्ला आगे बड़ो ना …’सपना ने रोहन को और भी जोरो से कस लिया
“पूर्वी मेरी जान आई लव यू...मेरी जान आह”
रोहन के हाथ सपना की योनि में जोरो से चल रहे थे,उसे जैसे खयाल ही नही रहा की उसके नीचे आखिर है कौन ,वही हाल सपना का भी था...वो बल्ला के शरीर को महसूस कर रही थी,उसकी ही उंगलियां उसके योनि की दीवारों पर घिस रहे थे,वो पनिया गई थी और ज्यादा और ज्यादा पनिया रही थी,उसने जोरो से रोहन को पकड़ रखा था और वो उसे आने और भी पास खींचना चाहती थी,अपनी अंदर उसे महसूस करना चाहती थी..
“रोहन ने जल्दी से सपना के कपड़े निकाल दिए और खुद ही बिना आंखे खोले ही नंगा हो गया,सपना ने भी अपने टांगो को फैलाने में कोई भी देरी नही की और दोनों पैरों को रोहन के कमर से जकड़ लिया ,और रोहन के लिंग को अपने हाथो में पकड़ कर उसे अपने योनि में घिसने लगी ,उसे याद आया की बल्ला का लिंग कितना बड़ा था,उसने रोहन के बाद सबसे बड़ा लिंग उसका ही देखा था,आज रोहन का लिंग भी उसे बिल्कुल ही नया लग रहा था,वो उसे बेताबी से सहला रही थी और अपने योनि में घुसाने की कोसिस भी कर रही थी ..
“बल्ला डाल दो ना अंदर ..”
“पूर्वी मेरी जान ,कितनी प्यारी और नाजुक है तू ..
”
रोहन ने सपना के सर को जोरो से पकड़ा और उसके गीली योनि में अपना लिंग सरकते चला गया,,दोनों के मुह से ही कहारे निकलने लगी थी,सेक्स के सुख से भी ज्यादा अपने साथी से मिलने का सुख होता है जिसका आनंद दोनों ही ले रहे थे,दोनों ही अपने अपने सपनो में खोए हुए एक दूसरे के जिस्म का आनंद ले रहे थे,दोनों ही गहराई में डूबे हुए थे और इस मजे को और भी ज्यादा समय तक महसूस करने में लगे थे,दोनों ही खुद को पूरी तरह से छोड़ चुके थे अपने फेंटेसी में डूबने के लिए…
और बिस्तर में तूफान मचा...कमर हिल रहे थे,आवाजे और सिसकियों से कमरा गूंज रहा था,आज तूफान कुछ ज्यादा ही देर तक चलने वाला था…………
*********
वही दूसरी तरफ भी कुछ ऐसा ही तूफान मचा हुआ था…
“पूर्वी मेरी जान आई लव यू..”
गौरव का कमर तेजी से चल रहा था,दोनों ही नग्न अवस्था में एक दूसरे से लिपटे हुए लेटे हुए थे,गौरव अपने पूरे जोश से पूर्वी के योनि में अपने लिंग को घुसाने में लगा हुआ था ,तूफान यंहा भी मचा था एक गौरव के लिए बिस्तर में और दूसरी ओर पूर्वी के लिए उसके मन में..
गौरव के धक्कों से वो मजा नही ले पा रही थी,जब भी वो आंखे बंद करती तो कभी रफीक तो कभी रोहन का चहरा उसके सामने आ जाता था,बहुत देर तक वो ऐसे ही बस पत्नी धर्म निभाने के लिए लेटी रही वो आंखे बंद करने से डर रही थी,आख्रिर उसने फैसला किया की वो आंखे बंद करेगी ,
“आह पूर्वी ..”
रफीक तेजी से धक्के लगा रहा था,उसका मजबूत जिस्म पूर्वी के नाजुक जिस्म को पूरी तरह से ढक चुका था,वो उसके जिस्म की मजबूती अपने जिस्म में महसूस कर पा रही थी,
“आई लव यु बेबी..”
धक्के तेज हो रहे थे और पूर्वी ने रोहन के सर को अपने मुह के पास खिंचा और उसके होठो में अपने होठो को घुसा दिया,रोहन पूर्वी के नाजुक होठो को जोरो से चूसें जा रहा था,पूर्वी को ऐसा सुख मिल रहा था जिसकी कल्पना भी वो नही कर पाई थी,रोहन उसके होठो को और भी जोरो से चूस रहा था,
“आह आई एम कमिंग बेबी “
रफीक की आवाज पूर्वी के कानो में पड़ी वो भी चाहती थी की रफीक उसकी योनि को पूरी तरह से भिगो दे..और रोहन छूटा,अपने पूरे वेग में उसने पूर्वी के योनि में अपना लावा भर दिया पूर्वी थक कर चूर हो चुकी थी उसने रफीक और रोहन का लावा अपने गर्भ में जाते हुए महसूस किया और इसी आभास से उसका झरना भी छूट पड़ा…
उसने गौरव को जोरो से कस लिया था,जो अपनी हांफती सांस सम्हाल रहा था,पूर्वी को लगा जैसे उसने रोहन के मजबूत जिस्म को अपने बांहों में भरा है और रफीक का मुस्कुराता हुआ चहरा उसके आंखों में घूम गया,वो अपनी उखड़ी हुई सांसों को सम्हालने लगी लेकिन उसके चहरे में तृप्ति का एक भाव था वही होठो में एक मुस्कान………...
अध्याय 28
उसी रात
रफीक और बल्ला बैठे शराब पी रहे थे,
“रफीक भाई ये डॉ के चक्कर में हम यंहा आ तो गए लेकिन लेकिन लगता है साला सच में इन लड़कियों से प्यार हो जाएगा …”
बल्ला की बात सुनकर रफीक थोड़े देर तक तो चुप था लेकिन फिर खूब हंसा ..
“सही कहा भाई,क्या लड़की है पूर्वी ,कितनी शरीफ,मासूम और प्यारी दिल करता है की चुम लू”
“हा भाई मेरी सपना भी कितनी सेक्सी है दिल करता है की …”
वो इतना ही बोल कर रुक गया ,रफीक उसे देखकर हँसने लगा
“क्या दिल करता है ??की ..”
बल्ला थोड़ा झेंपा
“भाई सच बोलूं उसके बारे में गंदा बोलने का भी मन नही कर रहा”
रफीक फिर से हंसा लेकिन फिर उसके होठो में एक संजीदगी आ गई..
“लगता है ये साली हम जैसे कमीनो को भी शरीफ बना देंगी,”
उसने अपने ग्लास में रखा पेग एक ही झटके में अंदर कर लिया…
“भाई अगर ऐसा हुआ तो हमे तो इनसे बच के रहना चाहिए,हम तो लड़कियों को चोद कर फेकने वाले लोग है,हमारा काम कैसे चलेगा अगर हम ही शरीफ हो गए तो काम कैसे चलेगा हमारा”
“हम्म बात तो सच है तेरी ,अब बच तो सकते नही हमे बुलाया ही इसीलिए गया है की हम इनके साथ समय बिताए और इन्हें यकीन दिलाये की हम शेख है लेकिन ...लेकिन हमे सम्हाल कर रहना होगा कही हमे इन लड़कियों से प्यार ना हो जाए वरना साला पता चला अपना राज खुद ही खोल देंगे “
इस बार रफीक और बल्ला दोनों ही संजीदा थे ………..
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रोहन और सपना, रोहन के ऑफिस में बैठे हुए उस शख्स का इंतजार कर रहे थे जो उनके पिता की मीटिंग की ऑडियो टेप लाने वाला था..
वो बेचैन लग रहे थे..
आखिरकार उन्हें टेप मिल ही गई ,
उस शख्स के जाने के बाद तुरंत ही रोहन ने उसे अपने कम्प्यूटर में लोड किया और दोनों कान गड़ाए सुनने लगे..
कुछ देर यू ही फॉर्मल बातचीत होती रही ...फिर ओबराय(रोहन के पिता) की आवाज सुनाई दी
“यार ये तस्वीर का क्या चक्कर है कुछ समझ आया …”
“समझ तो मुझे भी नही आ रहा है की आखिर ये तस्वीर उस औरत के पास कैसे आयी,ये तो हमारे गोवा वाले फॉर्महाउस में हमने खिंचाई थी,लेकिन एक प्रॉब्लम ये भी है की एक शेख का बेटा भी आ गया है,मुझे पता लगा की वो यंहा कोई केमिकल फेक्ट्री खोलने के लिए आया है,शायद ये भी उसी फार्मूले का ही चक्कर है,क्योकि वो शायद उसी शेख का बीटा है जिसने उस लड़की को गायब किया था ..”लखानी(सपना के पिता) ने कहा
“huuummm खबर तो मुझे भी यही लगी है ,लेकिन वो अभी तक जमीन देख रहा है,अभी प्रोसेस लंबा होगा,बिजनेस का कोई चांस नही है उसके साथ “कपूर सोचते हुए बोला जिससे लखानी गुस्सा हो गया..
“इसीलिए मैं इस साले से इतनी नफरत करता हु ,हम यंहा अपने बच्चों की परेशानी को लेकर बैठे यही और ये साला बिजनेस की सोच रहा है “लखानी ने मुह सिकोड़ा लेकिन फिर कपूर बोल उठा
“अरे नही बिजनेस की बात इसलिए लाया क्योकि वो आजकल हमारे बच्चों के साथ ही घूम रहा है ,और ये तस्वीर भी सपना के hod के पास ही उसे मिली थी,और जंहा तक मुझे पता चला है की पूर्वी का पति गौरव भी उस लड़की के साथ ही पढ़ता था जब उस लड़की ने फार्मूला बनाया था,तो यार मैं क्यो ना सोचु की कही ये हमारे पैसे को लेकर कोई गेम तो नही है ,हर चीज हमारे बच्चों के इर्दगिर्द ही घुम रही है ,हमने वो फार्मूला उस लड़की से हासिल करने की कोशिस की थी याद है ना आज फिर से उसी फार्मूले के चक्कर में कोई कांड होने वाला है,रोहन के मुह से फार्मूले की बात सुनकर मैं थोड़ा चौका जरूर था लेकिन जब अब पूरी बात हमारे सामने है तो मुझे तो लगता है की ये सब उसी के इर्दगिर्द की ही चीजे है ,हो ना हो वो वही फार्मूला है जो वो मालती ने छुपा के रखा है जो रोहन मुझे बताने की कोशिस कर रहा था लेकिन सपना ने उसे चुप करवा दिया और बात पलट दिया,मैंने पता लगवाया है की मालती भी उस समय उस लड़की की प्रोफेसर थी ,साले मुझे बिजनेस की फिक्र नही है मुझे तो अपनी बेटी की सबसे ज्यादा फिक्र है ,ना जाने वो फार्मूला सही है भी की नही लेकिन जिस लड़की ने वो फार्मूला बनाया था और जिसे हमने उसे लालच दिखाकर और अपनी ताकत दिखाकर उसे छिनने की कोशिस की थी आज उसी लड़की का एक करीबी दोस्त मेरी बेटी का पति है ,तो चिंता वाली बात तो मेरे लिए भी ज्यादा है “कपूर की आवाज में सच में चिंता थी ..
“अच्छा और मेरी बेटी भी तो उसके साथ ही काम कर रही है ,तुझे लगता है की मुझे उसकी चिंता नही है “लखानी बोल पड़ा ..
“अबे चुप करो यार तुम दोनों,हम सभी जानते है की हम एक दूसरे के बच्चों को भी अपने बच्चों जैसा ही मानते है ,सपना और पूर्वी दोनों ही अभी गौरव के संपर्क में है और किसी ना किसी तरह से उस फार्मूले से संबंधित भी है और हमे उनकी चिता करनी ही चाहिए,लेकिन बात इतने साल पुरानी हो गई है ,अगर ऐसा कोई फार्मूला अब भी किसी के पास है तो बात समझ भी आती है लेकिन ...ये फ़ोटो ..?? याद करो सालों कही हमने कुछ ऐसा तो नही किया था जो आज हमारे बच्चों के जिंदगी की आफत बन जाए “
ओबराय की बात सुनकर दोनों चुप हो गए और सोचने लगे किसी को भी कुछ ऐसा समझ नही आ रहा था …
“अच्छा एक काम करते है शुरू से सोचते है जब से हमे इस फार्मूले के बारे में पता चला “
ओबराय ने सुझाव दिया सभी ने सहमति में सर भी हिलाया ...
अब ओबराय ने बोलना शुरू किया
“जंहा मैं गलत हो जाऊ तो मुझे सुधार देना ओके,तो शुरुवात हुई थी प्रोफेसर मित्तल से ,जब वो हमारे पास एक प्रपोजल लेकर आये थे,हम तीनो अपने बिजनेस में बिजी थे और मित्तल जो की केमेस्ट्री का प्रोफेसर था हमारे पास अपने एक फार्मूले को लेकर आया था याद है ,ये बात वही से तो शुरू होती है ना,(सभी ने सर हिलाया ) तो प्रोफेसर हमारे पास आया और अपना फार्मूला दिखाया जिससे हम एक ऐसी दवाई बना सकते थे जिससे कई रोग आसानी से ठीक हो सके ,वो हमसे और रिसर्च करने की सुविधा और पैसे चाहता था बदले में हमे उससे दवाई बनाकर बेचने की अथारटी मिलती ,यंहा तक ठीक है (सभी ने फिर से सर हिलाया )..तो हम फार्मा के क्षेत्र में जाना चाहते थे और वो फार्मूला हमे अच्छा भी लगा तो हमने उसे हा कह दिया ,लेकिन तुम दोनों चूतिये अपनी हिस्सेदारी को लेकर फिर से लड़ने लगे ,और डील कैंसल हो गई ,लेकिन कपूर ने मित्तल से सीक्रेट डील की जिसका हमे पता नही था ,ठीक है कपूर (कपूर ने सर हिलाया) ..तो कपूर ने मित्तल को पैसे दिए और मित्तल ने अपना रिसर्च बढ़ाया..लगभग 5 साल बाद हमे पता चला की मित्तल जो प्रयोग कर रहा है उसमें कपूर उसकी मदद कर रहा है,हमने तुझे कुछ नही बोला लेकिन लखानी को ये बाद पसंद नही आयी और उसने मित्तल को खरीदने की कोशिस की ,मित्तल ने उससे भी पैसे ले लिए ..यंहा तक ठीक…”सब ने फिर से हा में सर हिलाया
“तो बात आगे बड़ी और लगभग 2 सालों के बाद मित्तल के प्रयोगशाला में आग लगी और सबकुछ के साथ मित्तल भी खत्म हो गया..और तुम दोनों दारू पीकर मेरे पास रोने आ गए ठीक”
ये कहते हुए ओबराय के होठो में एक स्वाभाविक मुस्कान खिल गई थी..दोनों भी मुस्कुराते हुए हा में सर हिला गए ..
“तुम दोनों को पता लगा की तुम्हारा पैसा तो डूब गया,लेकिन कुछ सालों के बाद तुम्हे पता लगा की मित्तल की एक बेटी भी थी जो की बेहद ही इंटेलिजेंट है और उसने हमारे ही शहर के कालेज में दाखिला लिया है,तुम दोनों को ये आस लगी की हो ना हो मित्तल की रिसर्च का पता उसकी बेटी को भी होगा क्योकि वो अक्सर मित्तल के साथ ही प्रयोगशाला में तुम्हे दिख जाती थी,लेकिन इस बार तुम दोनों ने साथ काम करने का फैसला लिया और हम तीनो उस लड़की के पास पहुचे,और उसने हमे बताया की सच में मित्तल का फार्मूला उसके पास है लेकिन उसमें कई कमियां है और वो उसे दूर करके एक ऐसा फार्मूला बनाना चाहती है जो की एक साधारण से इंसान को सुपर ह्यूमन बना दे ,हम तीनो चौके और हम उसके प्रोजेक्ट में पैसा पानी की तरह बहाने को भी राजी होई गए लेकिन उसने साफ माना कर दिया ,यही हमारे ईगो को ठेस पहुची और हमने उसे धमकाना शुरू कर दिया,अब ये सोचो की क्या हमने कुछ ऐसा किया था उस समय जो बेहद बुरा हो ,बिजनेस के लिए इतना तो हर बिजनेस मेन करता है ,यानी हमने गुंडों से उसे डराया था,उसे मारने की धमकी, पुलिस से उसे डराने की कोशिस ..बस इतना ही तो किया था हमने,..या तुम सालों ने कोई होशियारी दिखाई थी…”
“नही यार बस जो किया था हम तीनो ने साथ मिलकर ही तो किया था,वो लड़की फिर भी डर ही नही रही थी ना ही पैसे ही ही मान रही थी,मैंने तो और कुछ भी नही किया था इस साले लखानी का मुझे नही पता …”
कपूर ने लखानी की ओर देखा
“नही नही मैंने भी कुछ ऐसा नही किया था फिर हमे गोवा जाना हो गया जंहा की ये फ़ोटो है और फिर आकर पता चला की यंहा उस लड़की के साथ कुछ बुरा हो गया है और उसे कोई शेख उठाकर ले गया ,या शायद वो खुद चली गई अभी तक कुछ क्लियर नही हुआ “
“ह्म्म्म तो इस केस में हमारा तो कोई हाथ नही था फिर ये साला तस्वीर का क्या चक्कर है “
ओबराय ने अपनी बात रखी ..
“ह्म्म्म यार मुझे पूर्वी के लिए डर है क्योकि गौरव भी तो उस लड़की का दोस्त था ना,और फिर मालती उस समय उनलोगों की प्रोफेसर थी अगर मालती के पास वो फ़ोटो था तो कही ऐसा तो नही की गौरव ने जानबूझकर पूर्वी को फसाया हो ,हो सकता है की वो लोग हमारे ऊपर नजर रखे हो ,या उन्हें लगता हो की उस लड़की के गायब होने में हमारा कोई हाथ है और फ़ोटो इसलिए क्योकि इसमें हम तीनो का पूरा परिवार एक साथ है,ना जाने वो किसको टारगेट कर रहे थे,शायद सबको जो उनके हाथ में आ जाए “
कपूर की बात सुनकर सभी गंभीर हो गए
“लेकिन ...
इससे उन्हें क्या मिलेगा,मतलब बेचारी पूर्वी को आखिर उस फार्मूले के बारे में क्या पता “
लखानी ने शक व्यक्त किया
“लेकिन बात फार्मूले की हो ही ना बात बदले की हो,कही गौरव पूर्वी के जरिये हमसे बदला तो नही लेना चाहता “कपूर की आवाज में चिंता और भी बढ़ गई थी…
“नही यार वैसा लड़का तो लगता नही मुझे वो ,जिस तरह से सपना और गौरव उसके बारे में बताते है मुझे तो नही लगता की ऐसा कुछ होगा …”ओबराय ने कपूर को दिलासा देने वाले स्वर में कहा ..
“अब फ़ोटो मालती के पास क्यो थी ये वो ही बता सकती है ,क्या किया जाए की उससे उगलवाया जाए,केडनेप करवा ले साली को ,हमारे बच्चों का सवाल है …”इस बार लखानी थोड़े गुस्से में था ,लेकिन उसकी बात सुनकर इधर रिकार्डिंग सुन रखे सपना और गौरव भी चौक गए ..
“नही नही यार क्यो लफड़ा बढ़ाने की बात कर रहा है हमारे बच्चों को कुछ नही होगा ,और कपूर तू फिक्र मत कर पूर्वी को भी कुछ नही होगा,रोहन और सपना उसके साथ है,और अगर उस गौरव के बच्चे ने ऐसा कुछ करने की सोची भी तो साले को अपने हाथो से मौत के घाट उतारूंगा,लेकिन मुझे लगता है की मालती को किडनैप करना सही प्लान नही होगा,क्योना इस बारे में हम रोहन और सपना से सलाह ले ले..”ओबराय की बात सुनकर शायद दोनों ही चौक गए
“मतलब क्या है तेरा वो शेख फिर से इंडिया में आने की कोशिस कर रहा है जिसने पहले ही एक लड़की को गायब कर दिया जिसका आजतक कोई पता नही चल पाया है,और साले तू इसे बच्चों का खेल समझ रहा है”कपूर भड़क गया था
“तुझे क्या लगता है की हमारे बच्चे अभी भी बच्चे ही है ,साले वो हमारा खून है,और जब हम उनकी उम्र में थे तो कितने करामाती है भूल गया,इनके उम्र में हमने अपने बाप का बिजेस खुद ही सम्हालना शुरू कर दिया था,वो बड़े हो गए है और अगर हम उन्हें सच्चाई बता दे तो शायद वो इसे ठीक से समझ सके ,तुम लोग बोलो तो मैं रोहन से अकेले में इसके बारे में बात करू,हा मुझे भी समझ आ रहा है की अगर हमारे सामने सच्चाई नही आयी तो खतरा हो सकता है लेकिन अब उस खतरे के बारे में हमे अपने बच्चों को भी बता ही देना चाहिए,पूर्वी को नही तो कम से कम रोहन और सपना को तो बता ही देना चाहिए ताकि वो दोनों ही सम्हल कर रहे और पूर्वी को भी बचाये और साथ ही सपना मालती की खास बन चुकी है क्या पता उसे किडनैप करवाने की जरूरत ही ना पड़े बात ऐसे ही पता लग जाए,और अगर कुछ ना हुआ तो हमारे पास अपना तरीका तो है ही ,किडनैप करवा लेंगे साली को फिर तो उसका बाप भी बताएगा की ये फोटो उसके पास क्यों है ..”
ओबराय की बात से वंहा थोड़े देर के लिए शांति छा गई
“हम्म ठीक है लेकिन रोहन नही सपना को भी इस बारे में बता,क्योकि मुझे रोहन के दिमाग पर भरोसा नही है ,”
कपूर की बात सुनकर वंहा बैठ हर व्यक्ति हँसने लगा साथ ही उनकी बात सुन रही सपना भी जबकि रोहन ने अपना मुह बनाया ..
…………………..
“तो रोहन बात अब हमतक आने वाली है ,मालती को अगर इन लोगो ने किडनैप किया तो मुश्किल हो जाएगी जबरदस्ती में प्रॉब्लम्स खड़ी होंगी ,उन्हें हमे अपनी बातों से रोकना है और उन्हें यकीन भी दिलाना है की हम उसे अपने तरीके से हैंडल कर लेंगे,और यार मालती के ऊपर कुछ कर उसे तुझे भी सम्हालना है,प्लान पता है ना की तुझे क्या करना है और कैसे फोटो का राज उसके मुह से निकलवाना है…”
सपना ने बड़ी उम्मीद से रोहन को देखा ,रोहन ने बस मुस्कुराते हुए अपना सर हिलाया ………….
अध्याय 29
हल्की हल्की बारिश की फुहारों में भीगा हुआ गौरव अभी घर के पोर्च में खड़ा था,पास ही खिड़की से फैलती हुई रोशनी से वंहा थोड़ी रोशनी थी,वो बेचैनी से खुद की भावनाओ पर काबू पाकर वंहा चहलकदमी कर रहा था,कमरे की खिड़की ना पूरी बंद थी ना ही पूरी खुली,लेकिन जितनी भी खुली थी उससे पता चल रहा था की अंदर तेज लाइट जल रही है वही वंहा से आती हुई आवाजे भी उसे साफ सुनाई दे रही थी ,वो बेचैन और भी बेचैन हो रहा था ,उसने खिड़की से झांकने की भी कोशिस की लेकिन उसे कुछ दिखाई नही दिया,हा परछाईया जरूर दिखाई पड़ी जिससे प्रतीत होता था की एक लड़की अपने कपड़े उतार कर फेक रही है वही एक मर्द भी अपने कपड़े उतार कर नंग हो रहा है,उसने दो नंगे जिस्म की परछाइयों को आपसे में लपटते देखा था और फिर दोनों ही बिस्तर में गिर गए ..
सिसकियां तेज हो रही थी जिससे गौरव की बेचैनी और भी बढ़ रही थी ,गौरव की भी सांस तेज होने लगी थी..
“अअअअअअअ हहहह ...रोहन ..”
एक चीख से ऐसा लगा जैसे लड़की की योनि में लड़के का लिंग प्रवेश कर चुका है,कहने की बात नही थी की लिंग रोहन का था..
रोहन का नाम सुनकर गौरव को तेज झटका सा लगा लेकिन वो खुद को सम्हालने की कोशिस कर रहा था,वो चाहता था की वो दरवाजा पिट कर दोनों को उस प्रेममिलाप से बाहर निकाले लेकिन फिर वो मोबाइल पर आये उस मेसेज को देखकर चुप रह जाता था,उसे इंतजार करने को कहा गया था जबतक की ये खेल खत्म नही हो जाता,शायद उसे ये जानबूझ कर दिखाया या सुनाया जा रहा था ताकि उसे अपनी गलती का अहसास हो सके…..
“तुम बड़ी करारी हो जान कब से तुम्हारे साथ ये करना चाह रहा था..”
रोहन जैसे उस नंगे जिस्म पर टूट ही पड़ा था,सिसकियां और भी तेज हो रही थी और आउच आह जैसी आवाज जोरो से आने लगी थी..
“तुम तो उस कमीनी सपना के साथ ही चिपके रहते हो ,मेरे ऊपर तो तुम्हारा ख्याल भी नही गया”
“ऐसी बात नही है मेरी जान तुम तो मेरी जान हो ,तुम्हारे हुस्न का तो मैं हमेशा से ही कायल रहा हु”
रोहन का ये बोलना था की गु गु की आवाज आने लगी थी,जैसे रोहन ने अपने होठो को उसके होठो से लगा दिया हो ,चूमने और चूसने में भी इतनी शिद्दत थी की आवाजे बाहर तक सुनाई दे जाती थी..
इधर गौरव के सब्र का बांध टूटने को हो रहा था,वो गुस्से में आ चुका था लेकिन कुछ कर नही सकता था,आवाजे तेज हो रही थी और वैसे ही गौरव की सांस भी …
“आह रोहन ...फक मि डार्लिंग ,तुम्हारे जैसा आज तक नही लिया मैंने ,आह रोहन फक मि ..”
आवाजे तेज हो रही थी ,अंत समीप ही था…
“ओह बेबी यू यार टू गुड ,आह आह आई एम कमिंग बेबी ..”
“या फक मि हार्ड ,मेरे अंदर ही गिरा दो..यस “
गौरव ने सिचुएशन को समझकर अपने चहरे में आये हुए पसीने को पोछा थोड़ी देर में ही कमरे से आवाजे आनी बंद हो गई थी ...और थोड़े ही देर में घर का दरवाजा खुला ..
“ओह गौरव हाय..”
रोहन के होठो में एक कमीनी सी मुस्कान थी वो अपनी पेंट की चैन लगा रहा था,
गौरव ने उसका कोई भी जवाब नही दिया वो अंदर जाने के लिए हुआ लेकिन रोहन ने उसे रोक दिया ..
“रिलेक्स मेन ,मैं बियर लेने जा रहा हु जो भी काम हो थोड़ा जल्दी निपटान क्या है तुम्हारे कारण बस एक ही राउंड हो पाया है ,आज पहली बार है तो रात भर करने का मुड़ है..होप मेरे आने तक तुम अपना काम निपटा लोगे…”
गौरव ने फिर से कोई जवाब नही दिया लेकिन रोहन के होठो में वही कमीनी सी मुस्कान थी उसने गौरव को बिना कुछ कहे ही अपना बाइक स्टार्ट किया और वंहा से निकल गया….
गौरव अंदर आ चुका था…
“व्हाट द फक ...ये सब हो क्या रहा है यंहा पर तुम मुझे इम्पोर्टेन्ट काम बोलकर यंहा बुलाती हो और फिर ये सब ..क्या दिखाना चाहती हो तुम मुझे ..”
उधर से बस एक कातिल सी मुस्कान आयी
“यही की तुम अकेले नही हो ,मेरे कई दीवाने है जो मेरे एक इशारे पर कुछ भी कर सकते है..”
“तुमने ये दिखाने के लिए मुझे यंहा बुलाया था”
गौरव बुरी तरह से झल्ला गया
“क्या ये जानना भी तुम्हारे लिए इम्पोर्टेन्ट काम नही है “
“रोहन तुम्हारा यूज़ कर रहा है मालती ..”
गौरव झल्ला कर बोला,वही मालती हँसने लगी
“तुमने मुझे यूज़ किया गौरव,जब से पूर्वी तुम्हारे जीवन में आयी तुमने मुझे चाय में गिरी मख्खी की तरह निकाल कर फेक दिया,तुम्हे क्या लगा की तुम्हारे बिना मैं अकेली हो जाऊंगी नही गौरव नही ,चूत गुड़ की तरह होती है अगर खुल जाए तो मख्खियां खुद ब खुद आसपास झूमने लगती है ...वैसे रोहन बता रहा था की पूर्वी का गुड़ भी काफी मीठा है..”
मालती जोरो से हंसी वही गौरव का पारा चढ़ गया
“इनफ इस इनफ मालती पूर्वी को बीच में मत लाओ ..”
गौरव लगभग चीखा लेकिन उसके चीख में वो आवाज नही थी ..
“अच्छा सारा गुड़ तुम खाओ और हम रहे भूखे...भूलना मत गौरव की अगर हमारे संबंधों का पता पूर्वी को चल गया ना तो वो तुम्हारे पास एक पल भी नही रुकेगी ..”
इस बार मालती की बात सुनकर गौरव जोरो से हँसने लगा था ..
“उसे हमारे बारे में सब पता है,उसे शादी से पहले ही पता था चूतिया ने बताया था”
मालती बुरी तरह से चौकी
“किस चूतिया ने “
“अरे डॉ चुटिया..चुन्नीलाल “
“ओह तो वो कमीना भी …...
उसने कविता को तुमसे अलग कर दिया और अब पूर्वी को भी अलग करना चाहता है..आखिर ऐसी क्या बात हो गई जो उसने पूर्वी को ये सब बताया था “
मालती के चहरे में आ रहे चिंता के भाव से गौरव के चहरे पर भी चिंता के भाव आने लगे थे,वो नही चाहता था की मालती को उसके बारे में कोई भी शक हो ..
“वो सब छोड़ो तुमने मुझे क्यो बुलाया था और के कमीना रोहन यंहा क्यो आया है ,मालती मेरी बात मानो ये साला बहुत कमीना है तुम्हे पटा कर तुम्हारा यूज़ करेगा..,”
मालती जोरो से हंसी
“तुम्हे मेरी बहुत फिक्र हो रही है गौरव बाबू,मेरी फिक्र मत करो और मैंने तुम्हे यही दिखाने के लिए बुलाया था लेकिन तुम्हारी बात सुनकर मेरा दिमाग खटकने लगा है,
“तुम अपना दिमाग मत खटकाओ और आइंदा ऐसे मेरा समय बर्बाद करने की कोशिस भी मत करना,तुम्हारा जीवन है जिससे चाहो चुड़वाओ ..”
गौरव गुस्से से निकल रहा था तभी उसे मालती की आवाज सुनाई दी
“यही बात अपनी बीबी को भी बोल देना,क्योकि मुझे लगता है की कुछ दिनों बाद तुम्हे मेरी जगह तुम्हरी बीबी मिलेगी ..”
गौरव को मालती की जोरो की हंसी सुनाई दी उसे गुस्सा तो बहुत आया था लेकिन वो कुछ करना नही चाहता था…….
अध्याय 30
सुबह सुबह का समय था और पूर्वी और गौरव जिम में गए हुए थे,गौरव के दिमाग में अब भी मालती के कहे शब्द गूंज रहे थे,वो दूर से ही रफीक और रोहन को पूर्वी से हँस हँस कर बाते करता हुआ देख रहा था..
“क्या हुआ गौरव जी दिल में जलन हो रही है क्या ..”
सपना ने इठलाते हुए कहा जिससे गौरव का पारा और भी बढ़ गया था..
“कल लेब क्यो नही आयी थी ..??”
“क्यो मेरे बिना मन नही लगता क्या ?”सपना ने उसे चिढ़ाया,लेकिन गौरव मजाक के मूड में बिल्कुल भी नही था
“अगर तुम अपना काम सही तरीके से नही करोगी तो मैं तुम्हे प्रोजेक्ट से निकाल दूंगा,और हमे टेस्टिंग के लिए लोग चाहिए जो तुम्हारा जिम्मा है ..”
गौरव की बात सुनकर सपना थोड़ी चौकी
“टेस्टिंग अभी से ??”
“हा तुम्हारा ध्यान तो ना जाने कहा रहता है,मैंने कुछ सेम्पल तैयार कर लिए है और उसकी टेस्टिंग भी करवानी पड़ेगी तभी रिजल्ट समझ आएगा ,आज मेरे सर में बहुत ही दर्द है किसी अच्छे और भरोसेमंद डॉ को जानती हो ..”
सपना का दिमाग खटकने लगा था
“भरोसेमंद मतलब..”
“हमे टेस्टिंग के समय एक डॉ की भी जरूरत पड़ने वाली है ,कोई ऐसा जो भरोसेमंद हो ,तुम्हारे तो बहुत कनेक्सन है इस सिटी में तुम ही कोई डॉ ढूंढ कर लाओ “
सपना सोच में पड़ गई
“डॉ पांडे न्यूरोलॉजिस्ट है उनकी मेरे पिता जी से बहुत बनती यही वो चलेंगे..”
गौरव कुछ देर सोचा..
“लेकिन वो तो बहुत ही बड़े डॉ है फीस जायद लेंगे,और क्या वो भरोसेमंद होंगे”
“फीस की आप चिंता मत कीजिये वो मैं देख लुंगी ,और रही भरोसे की बात तो वो मुझे अच्छे से जानते है “
“लेकिन लेब की कोई बात लीक नही होनी चाहिए हम दोनों की जान पर आफत आ सकती है यही नही पुलिस केस भी बन सकता है ..”
सपना ने हामी भरी लेकिन उसके दिमाग में अब भी कई सवाल मचल रहे थे..
“ठीक तो आज उसे लेकर आ जाओ लेब...कुछ सवाल जवाब करना होगा उनसे “
“हमको खुद ही जाना होगा वंहा ,”
“ओके,तो एक घंटे में मिलो मेरे घर के सामने,आज मेरा जिम में मूड नही लग रहा है,अब तो काम खत्म करके ही आऊंगा “
गौरव पूर्वी की तरफ देख कर बोला और जल्दी से ही निकल गया…
*********
कुछ ही देर के बाद वो डॉ पांडे के हॉस्पिटल में थे…
“तो तुम कह रहे हो की तुम इसका प्रयोग इंसानों पार कर के दिखना चाहते हो “
“जी डॉ”
“लेकिन इसके लिए तो हमे स्पेसल परमिशन लेनी पड़ेगी “
“बिना परमिशन के ये नही हो सकता??? क्योकि मैं इसे राज ही रहने देना चाहता हु “
“ऐसा कैसे हो सकता है अगर किसी की जान चली गई या कोई गंभीर बीमारी हो गई तो “
पांडे के चहरे में गंभीर भाव उमड़ रहे थे
“डॉ किसी और पर नही अगर ये मैं अपने ही ऊपर टेस्ट करू तो,आपको बस मेरा निरक्षण करना होगा और अगर कोई प्रॉब्लम हुई तो उसे हल करना होगा”
गौरव की बात सुनकर दोनों ही अचंभित हो गए थे…
“लेकिन गौरव इसमें बहुत ही खतरा है,अभी हम आधे में ही पहुचे है “
सपना बोल पड़ी
“जितना हमने इसे बना लिया है उतना ही काफी है और दो दिन से मैं इसपर पर्सनली काम कर रहा हु ,समय आ गया है की अब इसे टेस्ट किया जाए “
गौरव ने इतने कांफिडेंस के साथ कहा था की सपना और डॉ दोनों ही सोच में पड़ गए थे…….
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वो लेब से निकल कर अपना समान लेकर हॉस्पिटल के एक कमरे में पहुच चुके थे,सपना उन कागजो को बड़े ही ध्यान से देख रही थी उसे यकिन नही हो रहा था की गौरव ने इतना काम एक ही दिन में कर डाला है,वो नए केमिकल फार्मूलों को देख कर दंग थी ,उसे बहुत कुछ समझ ही नही आ रहा था,सबसे ज्यादा जरूरी चीज ये थी की आखिर गौरव की बनाई ये दवाई इंसानों पर कैसे असर करेगी ,वो खुद ही इसे अपने ऊपर टेस्ट करना चाहती थी लेकिन डॉ चुतिया ने उसे पहले ही से ही समझा रखा था की गौरव की बनाई किसी भी दवाई पर वो कभी भरोसा मत करे…
गौरव ने इसे एक इंजेक्सन के रूप में बनाया था,डॉ पांडे और सपना की मौजूदगी में आखिर उसने वो इंगजेक्सन अपने अंदर डाल लिया..
गौरव अभी बिस्तर में लेटा हुआ था और मशीनों द्वारा उसकी सांसे ,उसकी धड़कन ,और उसके मस्तिष्क से निकलने वाले तरंगों की जांच की जा रही थी,इंगजेक्शन लिए हुए आधे घंटे हो चुके थे लेकिन अभी तक गौरव को कुछ भी महसूस नही हो रहा था,सब कुछ बिल्कुल ही नार्मल था,कभी कभी उसकी हार्टबीट बढ़ जाती लेकिन फिर वो नार्मल हो जाता था,कभी कभी उसके मानसिक तरंगे अत्यंत ही विचलित हो जाते लेकिन कुछ ही सेकंड में फिर से नार्मल हो जाते,डॉ पांडे भी कोई भी परिणाम निकालने में असमर्थ थे,गौरव आँखे बंद कीये लेटा हुआ था अचानक उसने अपनी आंखे खोली…
“कुछ पता चला डॉ…”
“नही सब कुछ सामान्य ही लग रहा है “
“हम्म ओके मुझे लगता है की अब हमे चलना चाहिए..”
गौरव बेड से उठा और बाहर निकल गया..उसके पीछे सपना भी दौड़ती हुई पहुची ..
“गौरव तुम्हे कुछ भी फील नही हो रहा..”
“अभी तक तो नही ..खैर छोड़ो सब समान लेब में पहुचा दो ,मेरे ख्याल से हमे थोडा और काम करने की जरूरत है “
इतना कहकर गौरव मायूसी के साथ वंहा से निकल गया था..
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गौरव अपने घर में बैठा हुआ शराब पी रहा था तभी दरवाजा खुला और पूर्वी अंदर आयी,शाम हो चुकी थी और पूर्वी अपने काम से बिल्कुल ही थक चुकी थी वो भी आकर सोफे में धड़ाम से बैठ गई ,उसने गौरव के चहरे को ध्यान से देखा ,उसकी आंखे लाल थी,उसका शरीर भी ऐसा लग रहा था जैसे किसी को बेहद जोरो से बुखार आ गया हो ,वो उसके पास पहुची और उसके माथे को छुआ वो सच में तप रहा था..
“गौरव तुम्हे तो बुखार है “
“आ गई मादरचोद अपने यारो से चुदवाकर “
गौरव ई बात सुनकर मानो पूर्वी को सांप सूंघ गया हो ,वो बेहद ही डर गई थी उसे लगा जैसे गौरव के शरीर से कोई और ही शख्स उससे बात कर रहा है ,गौरव ने कभी उससे इस तरीके से बात नही की थी ….
“गौरव तुम पागल हो गए हो क्या ये क्या बक रहे हो “
“मैं बक रहा हु ,तू साली रांड उस कमीने की बीवी है ना तो खून तो असर दिखायेगा ही ,तेरा बाप कभी कविता को धमकाया करता था ,साली तू भी उसी का खून है “
गौरव के आंखों में ना जाने कितना नशा था ,पूर्वी बेहद ही डर गई थी उसकी भुजाये फड़कने लगी थी
“मार डालूंगा तुझे भी और तेरे बाप के तीनो दोस्तो को भी,क्या बोला था तेरे बाप ने मुझे भिखारी की औलाद अब बताता हु की ये भिखारी अब क्या कर सकता है”
गौरव ने पास ही रखी हुई बोतल तोड़ी और पूर्वी की ओर झपटा,पूर्वी को कुछ भी समझ नही आया,उसका ये रूप दानवों जैसा था,वो गुस्से से लाल हुआ जा रहा था,पूर्वी दरवाजे की ओर भागने को हुई लेकिन पास ही रखे सोफे से टकराकर गिर गई ,गौरव अब पूर्वी के पैरों के ही पास था,कमरे में लगे बड़े से दर्पण में उसका शरीर पूरी तरह से दिख रहा था,गौरव की नजर उस दर्पण पर पड़ी और अचानक ही उसकी आंखों में कई और भाव आने लगे..
“कविता...
तूने ये क्या कर दिया ,देख मैं कैसा हो गया हु ,मैं दैत्य बन गया हु,काश तूने मुझे वो पूरा फार्मूला बताया होता तो ये नही होता..”
गौरव अजीब तरह से रो रहा था,तभी पूर्वी को अहसास हुआ की दरवाजा खुला हुआ है,उसकी ये पुरानी आदत थी की वो दरवाजे को बंद करना भूल जाती थी,और शायद ये गंदी आदत आज उसके लिए किसी वरदान सी लग रही थी,सामने रफीक खड़ा गौरव को ही देख रहा था,उसके साथ बल्ला और रोहन भी थे..
गौरव की नजर कांच से जाकर सीधे ही उन तीनो पर पड़ी..
“ओह तो इस रंडी को बचाने उसके यार आये है “
“गौरव ये सब क्या है “रफीक की आवाज भी कांप रही थी उसे कुछ समझ नही आ रहा था की आखिर ये क्या हो रहा है ,
“वो सब बाद में समझूंगा पहले तुम पूर्वी को बचाओ और इसे सम्हालो “सपना की बात सुनते ही तीनो मर्द गौरव पर टूट पड़े सपना ने पीछे से सामने आते हुए पूरी को तुरंत ही बाहर निकाला और सीधे गाड़ी में बिठा दिया ..
“ये सब क्या है सपना “
“पता नही शायद दवा का साइड इफेक्ट ,आज ही गौरव ने इसे इंजेक्ट किया था लेकिन दोपहर में उसे कुछ भी नही हुआ था,जब मैंने डॉ चूतिया को ये बताया तो उसने गौरव पर नजर रखने के लिए कहा,दोपहर से शाम हो गए लेकिन गौरव घर से बाहर ही नही आया था,मैं अपने कुछ आदमियों के साथ आसपास ही थी ,तभी तुम रफीक रोहन और बल्ला के साथ यंहा आ गई ,तुम्हे छोड़कर वो बात कर रहे थे लेकिन आवाज सुनकर वो भी दरवाजे की तरफ भागे,”
पूर्वी कुछ पूछती उससे पहले ही घर के अंदर से चीखे आनी शुरू हो गई थी,रोहन बुरी तरह से जख्मी हो कर बाहर निकला,वंहा घमासान मचा हुआ था,सपना ने तुरंत अपने आदमियों को अंदर भेजा जो की 5 थे..
अंदर बल्ला और रफीक की भी हालत गौरव ने मार मार कर खराब कर रखी थी ..
“मादरचोद इस साले चूतिये को क्या हो गया जो ये इतना ताकतवर हो गया साला बउरा गया है क्या “बल्ला बुरी तरह से झुंझला गया था,दोनों ही अव्वल दर्जे के गुंडे थे लेकिन गौरव ने उनकी भी फाड़ कर रख दी थी ..
तभी 5 लोग और भी अंदर आये गौरव कमरे के एक कोने में खड़ा था वही बाकी उसकी ओर देखते हुए खड़े थे,नए आये पाँचो लोगो ने बन्दूखे तान ली थी जिसे देखकर गौरव बस मुस्कुरा रहा था..
“नही नही इसे गोली मत मारना “रफीक ने उनसे कहा
“नही मरेंगे तो साला हमे मार देगा”उसमें से एक ने कहा लेकिन अगले ही पल गौरव ने पास रखी आलमारी को उनके ऊपर ऐसे फेका जैसे कोई खिलौना हो ..सभी उससे बचने के लिए भागे और गोलियां चलाने लगे लेकिन गौरव दौड़ता हुआ आया और रफीक को पकड़ कर खिड़की से बाहर कूद चुका था, वो रफीक को किसी बच्चे की तरह उठा कर भाग रहा था ,बाकी लोग बस गोलियां ही बरसाते रहे और वो गायब हो गया………...
अध्याय 31
सभी लोग पूर्वी के घर में थे उसका घर डॉ चूतिया के कहने पर किसी किले की तरह सजा हुआ था,पूर्वी सपना और रोहन तीनो के घरों में सिक्युरिटी बड़ा दी गई थी ,पूर्वी के घर डॉ चूतिया,पूर्वी ,रोहन ,सपना,बल्ला,और पूर्वी के पिता कपूर साहब मौजूद थे…
बल्ला रोये जा रहा था..
“आखिर हमार भइया के कसूर रहे की उन्होको उठा के ले गया”
बल्ला की बात से सभी चकित थे केवल डॉ और सपना के अलावा ..
“ये ये कैसी भाषा में बात कर रहा है”पूर्वी चौकी
“ये लोग कोई शेख वेख नही है ना ही दुबई से आये है इन्हें मैंने बुलवाया था,”
डॉ ने हल्के स्वर में कहा
“व्हाट ..और आपने मुझे भी नही बताया “
“बता देता तो किसी तरफ से गौरव को भी ये बात पता लग जाती ,मैंने इसे किसी और के लिए नही गौरव के लिए ही इन्हें यंहा बुलाया है ,ताकि उसे लगे की यही लोग शेख है “
“लेकिन क्यो ..”
पूर्वी बुरी तरह से झल्ला गई थी वही सभी के चहरे पर एक आश्चर्य था..
“ताकि गौरव को लगे की रफीक उसी शेख का बेटा है जो कविता से फार्मूला पाने की कोशिस कर रहा था ,उसे अब भी लगता है के शेख के पास कुछ तो है और वो इसीलिए यंहा आया है ,शायद इसी लिए गौरव ने रफीक को वंहा से उठा लिया ..”
“लेकिन गौरव ऐसा क्यो कर रहा है डॉ ,उसकी ताकत तो तब तक ही है जब तक की उस दवाई का असर रहेगा उसके बाद क्या फिर उसे हराना कोई बड़ी बात नही रह जाएगी ,और ऐसे भी अब उसके फार्मूले के नोट्स भी मेरे पास है “सपना ने सुबह ही सारे नोट्स अपने पास ही रख लिए थे…
सपना की बात पर डॉ थोड़ा हंसा
“तुम्हे लगता है की गौरव ने कुछ नया बनाया है..नही उसने वही पुराना फार्मूला अपने अंदर इंजेक्ट किया लेकिन शायद थोड़े बदलाव के साथ ,कविता ने ये फाइनल फार्मूला बनाया था जो की गौरव के हाथो लगा था,ये पहली बार नही है जब गौरव ने इसे लिया हो वो इसका उपयोग और भी कभी कर चुका है ..”
सभी ने फिर से डॉ को आश्चर्य के साथ देखा
“कब “पूर्वी की आवाज आयी
“वो सब बताने का अभी समय नही है बस इतना समझ लो की गौरव ने ऐसे इंजेक्शन की खान बना कर रखी होगी ,वो आज डॉ पांडे से सिर्फ ये चेक करवाने गया था की इससे उसके शरीर में कोई बेड इफ़ेक्ट तो नही पड़ रहा,और उसे कुछ भी नही हुआ मतलब है की वो अब और भी ज्यादा खतरनाक है ,अभी तक उसे कुछ हो जाने का डर था इसलिए उसने इसे एक बार के अलावा कभी नही लिया था लेकिन ...अब उसे रोकना मुश्किल होगा..वो दानव बन गया है,कुछ भी कर सकता है,कविता फार्मूले की उन्ही कमियों को दूर करने की कोशिस कर रही थी ,वो कितनी सक्सेस हुई ये कोई नही जानता,शायद यही ना जानना ही उसके गायब होने का कारण बना “
डॉ की आंखों में भी थोड़े आंसू आ चुके थे..
और उसकी बात सुनकर पूर्वी रो पड़ी
“लेकिन मैंने कौन सा पाप किया था या मेरे घर वालो ने ऐसा कौन सा पाप किया था की उसने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी,”
पूर्वी जोरो से रोने लगी वही सपना ने उसके कंधे पर अपना हाथ रखा ..
“तुम्हे गौरव ने क्यो चुना ये तो वही जानेगा ……..तुम लोगे के परिवार की गलती ये थी की अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए इन्होंने कविता को सताया,सब कुछ टिक ही चलता लेकिन इसी लिए कविता ने प्रोजेक्ट बंद करके यंहा से जाने का फैसला कर लिया था,तुम्हारे पिता ने तब हम तीनो की ही बेहद बेइज्जती की थी,शायद उन्हें याद भी ना हो क्योकि उस समय हम कुछ भी नही थे,कविता का यू काम अधूरा छोड़ कर जाना गौरव को पसंद नही था,लेकिन कविता ने उससे कहा था की वो फार्मूले को फर्केक्ट बनाने के बहुत ही नजदीक है और उसे कैसे फरफेक्ट बनाया जाए वो उसके दिमाग में है ,लेकिन उसके ऊपर कई तरह के दबाव थे,एक तरफ तुम्हारे पिता और उनके दोस्त तो दूसरी तरफ दुबई का शेख ,शेख ने भी कविता को मिलने बुलाया था पता नही उनके बीच क्या बातचीत ही थी लेकिन …...मेरी कविता तो मुझसे छीन गई ...खैर अभी हमारे पास सबसे बड़ा काम है गौरव को ढूंढना और रफीक को बचाना….”
************
रफीक रस्सी से एक कुर्सी पर बंधा था और कमरे की धीमी रोशनी में वो अपनी आंख को खोलने की कोशिस कर रहा था उसे अंतिम बात यही याद थी की गौरव ने उसे दबोचा था और खिड़की से बाहर छलांग लगा दी थी ,किसी भारी चीज से सर टकराने के कारण वो अपना होश भी खो चुका था..
जैसे ही उसके शरीर में जान आयी उसके ऊपर पूरा बाल्टी पानी उड़ेल दिया गया..
वो चौक कर सचेत हो चुका था,पास ही खड़े गौरव को ऐसे देख रहा था जैसे वो उसकी मौत हो ..
“मुझे यंहा क्यो लाये हो “उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर कहा,बदले में गौरव बस पास रखे एक कुर्सी को सरकाते हुए उसके पास पहुच गया..
और उसके सामने ही बैठ गया…
“कविता के बारे में क्या जानता है तू,और तेरे बाप ने तुझे यंहा क्यो भेजा है “
रफीक को मामला समझ आ चुका था गौरव रफीक को शेख का बेटा समझ रहा था..
“तुम्हे गलतफहमी हुई है गौरव मैं कोई शेख का बेटा नही हु “
चटाक
एक जोर का थप्पड़ उसके गालों में पड़ा…
“मैं जानता हु की तू सीधे तरीके से नही बताएगा तुझे टॉर्चर करने के मेरे पास बहुत सारे तरीके है “
गौरव की शैतानी मुस्कान को देखकर रफीक जैसे सख्त जान इंसान भी कांप गया..
“मैं मैं सही कह रहा हु गौरव मैं शेख का बेटा नही हु मैं तो ...मुझे तो डॉ चूतिया ने पैसे देखकर यंहा बुलाया है..
”
इस बार गौरव गुस्सा नही हुआ बल्कि कुछ सोच में पड़ गया
“चूतिया ने ??,आखिर क्यो??”
“वो तो मुझे नही पता लेकिन उसने बस जो कहा हमने बस उतना ही किया “
गौरव बहुत देर तक सोचता ही रहा
“ओह तो ये उस साले चूतिया का किया धरा है ,कोई बात नही सब मरेंगे जो भी मेरे रास्ते में आएगा वो सब मरेंगे “
गौरव की बात में एक जुनून था ………
“और पूर्वी ...पूर्वी का क्या “रफीक की आवाज में फिक्र थी ..
“ह्म्म्म पूर्वी मेरी है और वो मेरी ही रहेगी ,चाहे वो डॉ चूतिया कितनी भी कोशिस कर ले वो मेरी पूर्वी को मुझसे नही छीन सकता ,जैसे वो मुझसे मेरी कविता को छिनने की कोशिस की ,लेकिन कविता ….कविता आज भी मेरी है …”
गौरव ने अपनी उंगली एक तरफ उठाई ,रफीक ने उस उंगली का पीछा किया और उसका मुह खुला का खुला रह गया...
अध्याय 32
पुलिस से लेकर इंटेलिजेंस के लोग भी गौरव को ढूंढने की कोशिस में लगे हुए थे,लेकिन उसका निशान कही भी नही मिल रहा था ,सभी बेहद ही परेशान थे ,2 दिन बीत चुके थे…
“गौरव शरीर से ही नही बल्कि दिमाग से भी बेहद ही ताकतवर हो चुका है,वो ऐसी जगह पर छिपा होगा जो हमारी सोच के भी बाहर होगा …”
सपना बहुत ही चिंतित थी
“ह्म्म्म लेकिन वही तो हमे सोचना है की कहा ,मालती कहा है उसे यंहा लेकर लाओ “अचानक ही डॉ बोल उठा …
थोड़ी ही देर में मालती को उन सबके सामने लेकर खड़ा कर दिया गया था..
“मालती मेडम आपसे मुझे बस एक ही सवाल करना है ,ये फ़ोटो आपके पास कहा से आया “
डॉ ने सपना के मोबाइल पर वो फोटो दिखाया जिसे सपना और रोहन ने मालती के घर से खिंचा था…
“ये...ये तो गौरव ने मुझे अपने पास रखने के लिए दिया था ,जब कविता गुम हुई और मेरे और गौरव के बीच रिश्ते बनने लगे तभी ..”
“और वो फार्मूला आपके पास कहा से आये थे..”
डॉ ने फिर से पूछा..
“वो ..वो तो मैंने कविता के नोट्स से चुराए थे,लेकिन वो इतने अजीब थे की मैं उनमे आगे कोई भी काम नही कर पाई …”
“ह्म्म्म लेकिन आपको पता है की ये फोटो आखिर गौरव के पास कहा से आयी “
“आई डोंट नो...बस मुझे उसने इतना बताया था की इन्ही लोगो के कारण ही कविता ने अपनी रिसर्च बन्द कर दी ,और वो इनसे बदला लेना चाहता है ,शायद जिस फोटोग्राफर ने ये फोटो निकाली थी गौरव ने उससे ही ये फोटो ली थी ,”
“हा ये हो सकता है क्योकी ये फोटो गोवा के ही एक फोटोग्राफर ने निकाली थी ,शायद उसके पास और भी कॉपी रही हो “कपूर साहब बोल पड़े …
सभी अपने अपने तरीके से चीजो को सोचने की कोशिस कर रहे थे..तभी पूर्वी बोल उठी
“मालती मेडम सच सच बताइए की आखिर गौरव ने मुझसे शादी क्यो की “
मालती चुप रही फिर कुछ सोचकर बोली
“मुझे नई पता लेकिन वो तुमसे प्यार करता था ,मुझे तो बस यही लगा ..”
मालती की बात सुनकर पूर्वी ने डॉ की तरफ देखा ,वो भी खमोश था...फिर डॉ कपूर साहब की ओर मुड़ा
“कपूर साहब आजकल उस बंगले में कौन रहता है ..
”
“वो तो सालों से बंद है …”
“क्यो??”
“कुछ लोग कहते है की यंहा कोई भूत है,और वंहा से किसी चुड़ैल की हँसने और रोने की आवाज आती है ,मैं इन सब चीजो में नही मानता लेकिन वंहा रहना कोई पसंद नही करता,देख रेख करने वाले भी शाम होने से पहले ही वंहा से चले जाते है “
“क्या वंहा कोई तलघर है ??”
डॉ के सवाल से सभी चौके
“नही क्यो???”कपूर साहब ने जल्दी से जवाब दिया और सभी डॉ को देखने लगे
“हमे जल्द से जल्द गोवा के लिए निकलना होगा,गोवा पुलिस को भी इन्फॉर्म कर दीजिए की उस बंगले के आसपास की सभी गतिविधियों पर नजर रखे,हो ना हो गौरव वही छिपा होगा”
“लेकिन तुम इतने विस्वास से कैसे कह सकते हो ??”कपूर साहब फिर से बोले..
“क्योकि गौरव और कविता दोनों ही एक ही सब्जेक्ट के स्टूडेंटस थे और कविता की हर रिसर्च में गौरव उसकी मदद करता था,एक बार जब आपलोग कविता को धमकाने के बाद वंहा से गए तो कविता ने मुझसे कहा था की इन सालों के पैरों के नीचे अपना काम करूंगी और इन्हें पता भी नही चलेगा ,इस बात पर दोनों ही एक दूसरे को देखकर हँस पड़े थे,मुझे कुछ समझ नही आया तो कविता ने मुझसे कहा था की वो एक प्लान में काम कर रहे है वक्त आने पर तुम्हे बताऊंगी ...वो वक्त तो कभी नही आया लेकिन हो ना हो वो उसी फार्महाउस के तलघर की बात कर रहे थे जिसका पता उसके मालिक को भी नही है ,आखिर उससे सेफ जगह क्या हो सकती है,और फिर कोई भूत या चुड़ैल का वंहा होना मेरे शक को और भी गहरा देता है …”
“मतलब कविता भी वही हो सकती है..”सपना ने अचानक से कहा जिससे डॉ की सांस ही रुक गई
“नही ..अगर वो अभी वंहा होती तो मुझसे जरूर संपर्क करती ,मेरी कविता मुझे यू अकेला नही छोड़ सकती ….”
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रफीक आंखे फाड़े सामने के नजारे को देख रहा था,एक आदमजात नंगी औरत अपने बालो को बिखराये हुए उसकी ओर ऐसे बढ़ रही थी जैसे कोई जानवर हो ,उसके बाल ऐसे लग रहे थे जैसे किसी ने उसे बुरी तरह से नोचा हो ,उसके पैरों में बस एक पायल थी और गले में एक काला पट्टा ,रंग दूध सा गोरा था लेकिन पूरे शरीर पर धूल लगे हुए थे,आंखों में काजल फैला हुआ था या उसके आंखों में काले घेरे पड़े थे ये मालूम नही पड़ता था,वो किसी जानवर की तरह अपने दोनों हाथो और घुटनो से चल रही थी ,आकर वो गौरव के पैरों के पास रुक गई और उसके पैरों को जीभ निकाल कर ऐसे चाटने लगी जैसे कोई कुत्ता अपने मालिक के पैरों को चाटता है,गौरव ने उसके बालो पर अपने हाथ फिराये ..
“देख देख मेरी कविता को मुझसे कितना प्यार करती है ,कैसे मेरे लिए इतने सालों से यू ही इन अंधेरे कमरे में जानवरो की तरह रह रही है “
कविता की ये हालत देख कर रफीक कांप ही गया,कविता के जिस्म में बस हड्डियां ही दिख रही थी,यंहा वहां बस चोटों के निशान थे वो कुछ भी नही बोल रही थी बस गौरव के पैरों को चाटे जा रही थी …
गौरव ने उसके गले में लगे हुए पट्टे को अपने हाथो से पकड़ा और उसे अपनी ओर खिंच लिया,अब गौरव का हाथ कविता के पिछवाड़े को सहला रहा था,कविता अब भी गौरव के पैरों को चाट रही थी …
“देख देख इसे….. पूर्वी को भी इसीतरह मैं अपनी बनाकर रखूंगा …”
गौरव के चहरे का भाव अचानक से ही दानवों जैसा हो गया और वो कविता के पीठ पर अपने जीभ को चलाने लगा,उसने कविता को उठाकर अपने गोद में उसे झुका लिया था,अब कविता के घुटने जमीन पर थे और उसके पेट गौरव की गोद में वही उसका सर दूसरी तरफ झुका हुआ था,गौरव उसपर झुककर उसे चाट रहा था कभी कभी उसका मुह कविता के कूल्हों तक भी पहुच जाता,उसने कविता के कूल्हों पर अपने दांत गड़ा दिए..
इधर रफीक पूर्वी की बात सुनकर गुस्से से भर चुका था
“कमीने क्या किया है तूने इसके साथ ….”
रफीक चिल्लाया ,और गौरव के चहरे का भाव भी बदलने लगा
“जिसे मैं प्यार करता हु उसे मैं हर हाल में पा के रहता हु…...हा हा हा…”
गौरव की दैत्याकार हंसी से पूरा कमरा गूंज गया वही कविता की ये हालत देख और पूर्वी के बारे में सोचकर बेरहम और धूर्त रफीक के आंखों से भी आंसू छलक गए ………..
अध्याय 33
सभी लोग गोवा पहुच चुके थे लेकिन फार्महाउस वाले बंगले में जाने की इजाजत डॉ ने किसी को नही दी वो नही चाहता की सपना या पूर्वी किसी मुसीबत में फंस जाए ,उन्हें डॉ ने कपूर साहब के साथ ही होटल में रुकने की सहल दी ,जबकि डॉ रोहन और बल्ला पुलिस के साथ फार्महाउस जाने की तैयारी करने लगे…
पुलिस को वायरलेस में मेसेज मिला था की गौरव यही है और अभी अभी बाहर निकला है ,डॉ को यही समय लगा रफीक को बचाने का ..किसी को नही पता था की रफीक जिंदा भी है या मर गया है ,लेकिन सभी को ये आश तो थी की वो जिंदा होगा..
रेस्क्यू टीम में चुने हुए कमांडो तथा एक एक्सपर्ट केमिस्ट को शामिल किया गया था,चाहे लोग गौरव को कितना भी कम समझ रहे हो लेकिन डॉ समझता था की अभी उसके पास कैसी ताकत है,पहले एक ड्रोन छोड़कर पूरे इलाके का मुआयना किया गया लेकिन तलघर का कही निशान समझ नही आया,टीम अंदर गई लगभग 50 लोग थे जो पूरे फार्महाउस को घेरे हुए थे ,अभी उनकी प्राथमिकता गौरव के ठिकाने को तलाश करके उसे तहस नहस करना था ना की गौरव को पकड़ना..
कई लोग अलग अलग यंत्रों से जमीन का निरक्षण कर रहे थे,ये काम जितना जल्दी को जाए उतना अच्छा था क्योकि गौरव के आने के बाद वो क्या कर बैठता इसका किसी को अंदाजा नही था,आखिर जमीन के नीचे खाली जगह होने के सुराग मिलने लगे ,अभी इन्हें आये 5 मिनट ही हुए थे,उन्होंने तलघर का दरवाजा तलाशना शुरू कर दिया ,एक पेड़ के नीचे घास की चादर में उन्हें वो दरवाजा मिला ,उसे इतनी खूबसूरती से छिपाया गया था की बिना यंत्रों के इसे ढूंढ पाना आम इंसान के लिए बेहद ही मुश्किल काम था …
कुछ लोग बाहर नही रुके और बाकी अंदर गए,एक लंबी सीढ़ी नीचे को जाती थी ,अंदर बेहद ही अंधेरा था जैसे ही वो नीचे पहुचे अजीब सी बदबू आनी शुरू हो गई ,उनके साथ आये हुए केमिस्ट ने तुरंत ही सबको मास्क लगाने की हिदायत दे दी ,सभी मास्क लगा कर टार्च की रोशनी के सहारे आगे बढ़ने लगे थे तभी ..
रोहन के सर पर किसी ने कांच का एक जार मार दिया था ,कांच के टूटने के कारण हुई आवाज से वो शांत स्थान गूंज उठा,सभी टार्च एक साथ मारने वाले के ऊपर जा टिकी ..
सामने जो दृश्य था वो बेहद ही भयावक था ..
एक पूर्ण नग्न औरत सामने खड़ी थी ,बाल बिखरे हुए थे ,पूरा शरीर बेहद ही गंदा था,किसी चुड़ैल से कम नही लग रही थी ,हाथो में कांच टूटने से फैला हुआ खून था,उसने अभी अभी अपने हाथो में एक लोहे की रॉड पकड़ लि थी ,वो बेहद ही गुस्से से उनकी ओर देख रही थी लेकिन कुछ भी नही बोल रही थी …
“कोई गोली मत चलाना ..कोई गोली मत चलाना..”
डर की आवाज कांप रही थी सभी को पीछे छोड़ते हुए वो आगे आया ..
“कविता???”उसकी आवाज भर्राई हुई थी ,उसने कभी नही सोचा था की अपने प्यार को वो इतने सालों के बाद इस हालत में देखेगा..उसे लगा जैसे वो बेहोश हो जाएगा माथा चकरा रहा था,भावनाओ के आवेग से पूरा शरीर कांप रहा था ...आखिर डॉ की आंखे छलक उठी ..
“कविता तुम तुम जिंदा हो ..तुम मेरे इतने पास हो और मुझे ..”
“हूं हु हु”कविता जानवरो जैसे चिल्लाई और रॉड को घुमाकर डॉ के ऊपर चला दिया ,लोहे का रॉड डॉ के चहरे में पड़ चुका था पूरा जबड़ा भी फट गया था लेकिन जरा भी विचलित नही हुआ ..
‘कोई आगे नही आएगा “डॉ ने बड़ी ही मुश्किल से अपनी हालत को सम्हालते हुए कहा
‘कविता देखो मैं हु मैं तुम्हारा चुन्नी ..पहचानो मुझे “
कविता ने फिर से जानवरो जैसे हुंकार भरी और फिर से रॉड घुमा दिया लेकिन इस बार डॉ चौकन्ना था वो बच गया..कवित अब भी उसे बड़े ही नफरत और गुस्से से देख रही थी ,डॉ का दिल भर चुका था लेकिन वो कुछ भी नही कर सकता था,
आखिर पीछे से आवाज आयी
“डॉ साहब सम्हालिये खुद को ये समय नही है,इसे काबू में करना पड़ेगा इसे बेहोशी का इंगजेक्शन लगा कर बेहोश कर दीजिए बाद में देखते है ..
”
डॉ ने बुझे मन से हामी भरी और एक पिस्तौल नुमा इंजेक्शन कविता के सामने तान दिया,उसे देखकर कविता बेहद ही बौखला गई और पूरे जोर से चिल्लाते हुए डॉ के ऊपर झपट पड़ी लेकिन समय पर डॉ ने ट्रिगर दबा दिया और कविता डॉ तक पहुचते पहुचते ही बेहोश हो गई ,डॉ ने उसे अपने बांहों में सम्हाल लिया और उससे लिपटकर रोने लगा,वही बाकी लोग आगे बढ़ गए और रफीक को ढूंढने लगे ,किसी ने बिजली का बटन ढूंढ कर उसे चालू कर दिया कमरे में प्रकाश फैला तो सभी की सांस ही अटक गई ,रफीक के कोने में अपनी जिंदगी और मौत से लड़ता हुआ पड़ा था,वो एक कुर्सी में बंधा हुआ था ,उसे बेरहमी से मारा गया था.. और उसके कुछ दांतो को चिमटे से निकाला गया था,साथ ही उसके कुछ नाखून भी खिंचकर निकाले गए थे..मंजर ऐसा था की बल्ला वही खड़े खड़े बस बुत बनकर अपने दोस्त की ये हालत देखता रह गया,केमिस्ट जो की साथ ही आया था वो तुरंत ही सभी केमिकलस को इकठ्ठा करने लगा ,
“उस गौरव को मैं जान से मार दूंगा रफीक भाई,तू बस एक बार ठीक हो जा “बल्ला रफीक के पैरों के पास ही बैठ गया था,उसे भी समझाया गया और सभी को तुरत बाहर निकाला गया ,जाते जाते ना जाने डॉ को क्या सूझी ..
सभी के बाहर आने के बाद वो मुड़ा और केमिस्ट के हाथो से थैला उठा आकर तलघर के अंदर फेक दिया ..
“ये क्या पागलपन है डॉ”
केमिस्ट चिल्लाता ही रह गया लेकिन बिखरे हुए केमिकल में डॉ ने अपने लाइटर को फेक दिया...जिससे पूरा केमिकल आग के चपेट में आ चुका था..
“भागो यंहा से “केमिस्ट कुछ समझ कर चिल्लाया और सभी भागने लगे ,डॉ भी तुरंत ही तलघर का दरवाजा बंद कर भागा ...और एक जोर का विस्फोट हुआ ,तलघर के अंदर केमिकल फैल चुका था और आग लगने के कारण और वंह पहले से मौजूद गैस के कारण एक प्रेसर क्रिएट हो गया था,तलघर का दरवाजा बंद होने के साथ ही प्रेशर को बाहर निकलने का कोई रास्ता नही था नतीजा था एक बड़ा धमाका और चारो ओर बस आग की लपटे,खुद डॉ बुरी तरह से झुलस चुका था लेकिन उसके होठो में अब एक मुस्कान थी ….
“रेस्क्यू कंपलीटेड ..टारगेट को जिंदा पकड़ने की कोशिस करो ,ना पकड़ में आये तो वही मार दो लेकिन बच कर जाना नही चाहिए “
एक कमांडो अपने वाकी टोकि से किसी से बात कर रहा था ,वो डॉ के साथ ही बैठा हुआ था ,डॉ को समझते देर नही लगी की टारगेट गौरव है ……………..
अध्याय 34
रात के अंधियारे में जुगनुओं की टिमटिमाहट थी और एक घना सन्नाटा पसरा हुआ था,हॉस्पिटल का गार्ड बाहर एक दूसरे से बतियाते हुआ तम्बाकू मल रहे थे,पूरे हॉस्पिटल में पुलिस वालो का भी घना पहरा था,वाकी टोकि पर कई संदेश प्रसारित हो रहे थे,टारगेट पुलिस के जाल से भाग निकला था….
टारगेट यानी की गौरव,दोपहर से रात हो चुके थे पुलिस की कई टुकड़ियां मिलकर भी उसे नही ढूंढ पा रही थी,लोगो को अंदेशा था की वो हॉस्पिटल में जरूर आएगा क्योकि वंहा अबही डॉ चूतिया,रफीक और कविता एडमिट थे…….
बस यही उसे फसाने के लिए जाल तैयार रखा गया था वही शहर के बड़े फाइव स्टार होटल में भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गए थे क्योकि वंहा कपूर अपनी बेटी पूर्वी के साथ मौजूद था…..
जगह जगह पर कैमरे और 24 घंटो की चौकन्नी निगरानी के बावजूद गौरव के वजूद का कोई भी पता किसी को नही लग रहा था और ये कई लोगो के माथे में आये पसीने का सबब थी ..
“कविता अभी कैसी है डॉ”डॉ चूतिया ने पास खड़े डॉ से कहा
“अभी तो आई सी यु में है अभी ट्रीटमेंट चल रहै है होश में आ जाए तभी कुछ कह सकते है,हमने कई अच्छे साइकोलोजिस्ट को बुलाया है कुछ न्यूरोलॉजिस्ट और सैकेट्री भी पहुच चुके है सभी मिलकर इस केस को स्टडी कर रहे है जरूर कोई इलाज मिल जाएगा …..
डॉ चूतिया ने काफी भरे हुए दिल से अपना सर हिलाया
“और गौरव का कुछ पता चला उसे पकड़ना बेहद ही जरूरी है डॉ..”
“अभी तक तो नही लेकिन तलाश जारी है जाएगा कहा ,आपलोगो को ढूंढते हुए खुद ही जाल में फंस जाएगा..”
“अगर वो ऐसे ही जाल में फंस जाता तो कब का फंस चुका होता…”डॉ चूतिया ने एक गहरी सांस छोड़ी
********
दो दिन बीत चुके थे और अभी तक गौरव का कोई भी सबूत किसी को नही मिला था ,ये लोग भी गोवा से अपने शहर आ चुके थे ,गौरव ने किसी से मिलने की कोशिस नही की ये सभी के लिए आश्चर्यजनक था,लेकिन खतरे की घंटी भी थी ,
कविता की हालत में सुधार हो रहा था वो अब डॉ चूतिया के निगरानी में थी लेकिन अभी भी उन्हें नही पहचान पा रही थी लेकिन उसका व्यवहार थोड़ा नार्मल जरूर हो रहा था,डॉक्टर्स ने बताया की उसे गौरव ने कई दिनों तक शाररिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और साथ ही हेवी ड्रग्स भी दिया जिससे धीरे धीरे वो उसकी गुलाम बन गई ,कितनी अजीब बात थी की गौरव ने उसे वही ड्रग्स दिया था जो की खुद कविता ने ईजाद किया था,लेकिन पूरी सच्चाई अभी भी आनी बाकी थी ,गौरव की खोज प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जारी थी,रफीक भी बहुत हद तक ठीक हो चुका था,सब कुछ इतना शांत था मानो तूफान के पहले की शांति हो
…..
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मन का प्यार में धोखे का दर्द पूर्वी के जेहन को तोड़ रहा था,वो जिंदा होते हुए भी कही खोई खोई सी थी ,क्या उसने गौरव से प्यार किया था हा किया था अपने जीवन में सबसे ज्यादा अगर किसी। से प्यार किया था तो वो गौरव ही था...
तो गलती कहा हो गई थी ?
क्या उसने जो गौरव की आंखों में अपने लिए प्यार देखा था वो गलत था ,नही पूर्वी गलत थी उसने जो प्यार गौरव की आंखों में देखा था वो सही था तो आखिर ऐसा क्या हो गया की गौरव ने उसे इस तरह से धोखा दिया था…
इन्ही सवालों में गुम पूर्वी अपने जीवन की अकांछाओ से कही गुम हो गई थी ,वो थकी और लगभग हारी सी जिंदगी जी रही थी ,उसी अवस्था में वो अपने कमरे में गई …
कमरे का लाइट जलाते ही उसकी नजर सामने पड़ी …
वो चौकी,ना जाने कितने भावनाओ के उन्माद में डूब सी गई ,सामने बिस्तर के बाजू में सिकुड़कर बैठे हुए शख्स को देखकर उसके रोम रोम में गुस्सा और दर्द भर गया था ,लाइट जलने से वो उसे ही देख रहा था,पूर्वी ने तुरंत ही अपने पर्स में रखे हुए रिवाल्वर को निकाल कर उसके सामने तान दिया..
“तुम ..??तुम यंहा कैसे आ गए “पूर्वी की आवाज में थोड़ा डर भी था लेकिन उसने जो धोखा इस शख्स से खाया था उसके सामने मौत का दर्द भी फीका पड़ रहा था ..
गौरव कांप रहा था,वो अपने को सिकोड़ कर बैठा था जैसे उसे किसी डर ने घेर लिया हो ,उसकी आंखे लाल थी और शरीर बहुत ही दुर्बल लग रहा था ,आंखों से आंसुओ की बूंदे गिर रही थी वो कुछ बोलना चाहता था लेकिन जुबान बस लड़खड़ा कर रह जाते बड़ी ही मुश्किल से उसके होठो से आवाज निकली
“पूर्वी ..पूर्वी मैं मर रहा ह पूर्वी ..मुझे बचा लो मैं शैतान बन गया हु पूर्वी ..”
उसके हर शब्द में लड़खड़ाहट थी ,वो अच्छे से बोल भी नही पा रहा था,उसने अपने हाथो से अपने अपने कानो को बंद करने की कोशिस कर रहा था वो सीधे पूर्वी की ओर ज्यादा समय तक नही देख पा रहा था ..
“क्या तुम ..क्या तुम लाइट को थोड़ा धीमा कर दोगी ,मैं तुम्हे देख नही पा रहा हु “
गौरव की ये दशा देख कर पूर्वी के सीने का दर्द और भी बढ़ गया ,ये इसे क्या हो गया था???
जिसने पूरे पुलिस डिपार्टमेंट के नाक में दम कर दिया था वो शख्स अभी उसके सामने किसी मेमने सा लग रहा था,पूर्वी ने लाइट को धीमा किया अब कमरे में बहुत कम रोशनी थी लेकिन पूर्वी उसे अच्छे से देख पा रही थी ..
“वो लोग मुझे मार देंगे पूर्वी मुझे बचा लो …”
उसकी बात सुनकर पूर्वी जोरो से हँस पड़ी
“वो लोग क्या गौरव मैं तुम्हे अपने हाथो से मरूँगी ,तुमने जो किया है उसकी सजा मौत से कम नही हो सकती ,तुमने कविता के साथ जो किया वो अमानवीय था इसके लिए तो तुम्हे तड़फा तड़फा कर मारना चाहिए “
पूर्वी गुस्से से भर गई थी
“नही पूर्वी मेरी बात सुनो मैं तुम्हारे पास आया क्योकि तुम ही मुझे समझ सकती हो ,मैं तुम्हारा गौरव हु क्या तुम्हे मेरी आंखों में तुम्हारे लिए प्यार दिखाई नही देता ,क्या तुम्हे लगता है की मेरा प्यार झूठा था नही पूर्वी ,एक बार मुझे बोलने दो मुझे फसाया गया है ,जो हुआ उसमें मेरी कोई गलती नही थी पूर्वी ,मेरी गलती बस इतनी थी की मैं सही समय में बहादुरी नही दिखा पाया मैं अपने मोह और के जाल में फंस गया ….”
पूर्वी उसकी बात सुनकर बुरी तरह से असमंजस में पड़ गई थी
“नही गौरव अब और नही बहुत हो गया तुम अब मुझे धोखा नही दे सकते “
इस बार गौरव थोड़ा हँसा लेकिन उसकी हंसी में उदासी थी वो अब भी वैसे ही बैठा हुआ था वो बार बार अपने हाथ पैरों को खुजलाता था ,ऐसे लग रहा था जैसे वो बेहद ही बेचैन हो बार बार करवट बदलता और इधर उधर को खुजलाता रहता ..
“पूर्वी मुझे पता है मैंने अपना भरोसा तो पहले ही खो दिया है ,याद है जब मैं परेशान था और तुमने मुझे बताया की डॉ चूतिया ने तुम्हे मेरे बारे में बहुत कुछ बताया है,मैंने तब तुमसे सवाल किया था की तुम्हे क्या लगता है की ये प्यार था या धोखा ….तुम चुप रही थी पूर्वी तुमने कुछ नही कहा था ,मुझे तभी समझ आ गया था की मैंने अपना भरोसा खो दिया है ,डॉ चूतिया ने तुमसे ना जाने क्या कहा होगा लेकिन सच मानो उसने तुमसे जो भी कहा वो उसके नजर से ही सच था,असली बात तो उसे भी नही पता...लेकिन यकीन मानो तुम्हारा मेरे जीवन में आना महज एक इत्तफाक था मुझे नही पता था की कपूर की बेटी से मैं मोहोब्बत कर बैठूंगा ,हा पूर्वी मुझे जीवन में दूसरी बात प्यार हुआ और मैं आज भी तुमसे बहुत ही प्यार करता हु ..”
गौरव की बात से पूर्वी कांप गई थी उसके मन में दबा हुआ गौरव के लिए प्यार मानो उफान मारकर बाहर निकलने को बेताब था लेकिन वो कैसे भूल सकती थी की गौरव एक इंसान नही बल्कि जानवर बन चुका है …
“अपनी बकवास बंद करो और मरने को तैयार हो जाओ “
पूर्वी ने अपने हाथो को अपने रिवाल्वर में कसा लेकिन गौरव फिर से बोल पड़ा
“तुम जब चाहो मुझे मार दो ऐसे भी मैं दवाइयों के बिना मर ही रहा हु लेकिन मेरा यकीन करो मुझे फसाया गया है ,मैं गलत नही हु “
वो सर झुकाए रोने लगा ,पूर्वी को लगा जैसे उसका दिल अभी पीसीज जाएगा
“किसने ?? किसने फसाया है तुम्हे ..”पूर्वी ने आराम से पूछा
“कविता ..
कविता ने मुझे फसाया है पूर्वी “
कविता??????पूर्वी के आंखों में फिर से अंगारे नाच उठे थे ,उसे यकीन हो गया था की गौरव फिर से उसे धोखा देने की कोशिस कर रहा है
“अपनी बकवास बन्द करो गौरव ,बहुत हो गया जिसे खुद तुमने इतने दुख दिए वो तुम्हे फसएगी ,तुम इतने बड़े कमाने हो सकते हो मैंने ये सोचा भी नही था ..
पूर्वी की आंखों से गुस्से के अलावा आंसू भी टपकने लगे थे ..
“यकीन मानो पूर्वी ,मुझे बचा लो ,वो कविता ही थी जिसने मुझे इन झमेलो में डाल दिया,मैं डॉ चूतिया के पास जाकर उसे सब कुछ बताना चाहता था लेकिन कविता की हालत को देखकर वो मुझे ही इसका जिम्मेदार मानने लगा है और अगर मैं उसके सामने भी गया तो वो मुझे जिंदा नही छोड़ेगा ,इस दवाई ने मुझे बहुत पवार दे दी है लेकिन इतनी पवार को झेलने की मुझमें शक्ति नही है पूर्वी ,मैं इस बंगले से 500 मीटर में गुजर रहे गाड़ी की आवाज भी सुन सकता हु ,मैं परेशान हो गया हु इस शोर से ,मैं परेशान हो गया हु इस रोशनी से जो मैं बंद आंखों से भी देख सकता हु ,मैं उन सभी गंधो से परेशान हु जो मेरे नाक में अनायास ही आ रही है ,1 किलोमीटर की दूरी पर बने नाले की गंध से मेरा नाक भर रहा है वही तुम्हारे किचन में रखे हुए केक की गंध भी मेरे नाक में पड़ रही है ,मैं छोटी छोटी संवेदनाओं से परेशान हु पूर्वी मैं पागल हो रहा हु ,मेरे पास इन सबसे मुक्त होने की दवाई भी नही है ,डॉ चूतिया ने सब कुछ जला दिया है ,मुझे बचा लो पूर्वी मुझे जमीन के नीचे किसी तलघर में रखो जंहा कोई आवाज ना हो कोई रोशनी ना हो वरना मैं मर जाऊंगा मैं पागल हो जाऊंगा इन सबसे …”
पूर्वी की हालत बेहद ही खराब हो गई थी ,उसके सामने सभी वो बाते घूम रही थी जो उसने उस तलघर के बारे में सुन रखा था क्या इसका मतलब था की कविता इसलिए वंहा रह रही थी लेकिन …??
क्या गौरव सही कह रहा है या वो अभी भी उसे धोखा दे रहा है .जैसा डॉ चूतिया ने बताया था की उसका दिमाग बेहद ही तेज चल रहा है,वो इतनी सिक्युरिटी के बाद भी उसके कमरे में बैठा था ,पूर्वी को उसकी बातों में सच्चाई तो दिख रही थी लेकिन कही ना कही वो उसे मानने को भी तैयार नही थी ..
“मैं डॉ चूतिया को फोन करती हु “
उसने आखिर में फैसला किया
“नही पूर्वी वो मुझे मार देगा ,नही नही मुझे बचा लो मुझे नींद का कोई इंगजेक्शन दे दो उसके बाद चाहे जिसे बुलाना है बुला लेना ,मुझे बेहोश करके किसी हॉस्पिटल में ले चलो मैंने जो भी कहा वो डॉ चूतिया को बताना की मैंने नही कविता ने मुझे फसाया है …”
पूर्वी बेहद ही असमंजस की स्तिथि में थी ,उसने अपना मोबाइल निकाला
“किसे फोन कर रही हो “
गौरव बोल उठा
“रोहन को ..”
“नही नही ..उसे नही “
पूर्वी ने उसे परखने वाली निगाहों से देखा
“सपना को फोन करो ,रोहन को देखकर मुझे गुस्सा आ सकता है ,उसने तुमने मुझसे छिनने की कोशिस की थी ,नही ..
”
पूर्वी के होठो में पता नही क्यो लेकिन एक मुस्कान आ गई उसे गौरव फिर से कुछ प्यारा सा लगा ,लेकिन फिर तुरंत ही उसने अपने सर को झटका दिया और सपना को फोन लगा दिया …..
अध्याय 35
अजीब सी हालात थी,कविता और गौरव एक ही हॉस्पिटल में थे ,दोनों ही बेहोश थे ,गौरव की कही बातों ने शक की सुई कविता की ओर भी घुमा दी थी ,ऐसे कोई इस बात पर विस्वास नही कर पा रहा था की कविता ने गौरव को फसाया होगा क्योकि वो खुद इस हालत में पाई गई थी की वो खुद गौरव के रहमोकरम में पल रही थी,डॉ चूतिया अपने आप को सम्हाले हुए थे वो कविता का बदला लेना चाहते थे लेकिन ये भी जानते थे की कोई भी बात पूरी तरह से गलत या सही नही हो सकती ,गौरव की बात में भी कोई दम हो सकता है ,
क्या सही था और क्या गलत ये पहेली तो तब ही सुलझने वाली थी जब दोनों में किसी को होश आये और वो बात करने की हालत में रहे ,कविता को होश तो आता था लेकिन उसकी कंडीशन में सुधार नही हो पा रहा था ,कई मनोचिकित्सक उसकी हालत को सुधारने की कोशिस कर रहे थे ,लेकिन उसकी हालत ऐसी थी की उसे बेड़ियों में बांध कर रखना पड़ रहा था,यही हाल गौरव का भी था ..
लोगो के पास एक ही ऑप्शन बचा हुआ था वो था इंतजार ….
डॉ चूतिया अभी गौरव के कमरे में थे जब उसे होश आया साथ ही पूर्वी और सपना भी थे,
गौरव कुछ देर तक उसे देखता रहा फिर बारी बारी से उसने पूर्वी और सपना को देखा ,अभी उसकी हालत तो ठीक थी लेकिन उसके हाथो और पैरों में अब भी बेड़िया थी ….
उसे खुद पर या ना जाने किस चीज पर लेकिन रोना आया वो रोते हुए डॉ चूतिया को देख रहा था ……
“मुझे माफ कर दो मेरे दोस्त की मैंने तुम्हे असलियत नही बताई,लेकिन मैं कविता के प्यार और उसे लेकर अपने हवस के हाथो मजबूर था,इससे अच्छा मेरे लिए क्या हो सकता था की वो तुम्हारा प्यार ठुकरा कर मेरे साथ आ जाए लेकिन उसने भी जो किया वो उसकी मजबूरी थी ,वो तो उस तलघर में टेस्ट करने के लिए गई थी,हम दोनों ही इस चीज के लिए सालों से प्लान कर रहे थे तभी वो फ़ोटो भी हमारे हाथ लगी थी,कविता तीनो बिजनेसमैन से नफरत करती थी क्योकि उसका मानना था की उन लोगो के कारण ही उसके पिता की जान गई है ,गोवा में वो पहले भी रह चुकी थी यंहा से हर एक चीज से वाकिफ थी उसे पता था की जो बंगाल वो खरीद रहे है वंहा एक तलघर भी है क्योकि पहले वो बंगला उसके किसी परिचित का ही था ,उसने सबसे छुपकर मेरे साथ उस तलघर को एक लेब में बदल किया और फिर तुमसे झूठ बोलकर हम दोनों अक्सर वहां आकर अपना प्रयोग करने लगे ,कविता ने कभी मेहनत को नही दिखाना चाहती थी वो तुम्हे इसका रिजल्ट दिखाना चाहती थी लेकिन ...
लेकिन यंही उसने बड़ी गलती कर दी उसने अपने टेस्ट से निकले हुए नए दवाओं को खुद पर ही प्रयोग कर लिया और उसकी हालत बेहद ही खराब हो गई उसने वो शक्ति तो पा ली जिसके कारण वो दवाई बना रही थी लेकिन उसे सहने की क्षमता विकसित नही कर पाई ,वो लगभग पागल सी हो गई,वो बाहर नही आ पाती थी उसे बेहद ही शांत और अंधेरे से भरा कमरा ही चाहिए था,उसके सुनने और देखने और विचारों करने की शक्ति इतनी बढ़ गई की सामान्य मनुष्य की दृष्टि में तो वो कोई देवता की तरह ताकतवर हो गई लेकिन थी तो वो एक सामान्य सी इंसान ही जो उस शक्ति के लिए नही बनी थी ,उसने दिन रात एक कर दिया ताकि उस दवाई को परफेक्ट बना सके और उसकी शक्तियों को इंसान के काबू में लाने और उसके मनमुताबिक उसे बढ़ाने घटाने की क्षमता विकसित हो सके लेकिन बार बार के प्रयोगों से उसका मानसिक संतुलन बिगड़ने लगा था,उसने मुझे मना किया था की मैं तुम्हे कभी उसके बारे में नही बताऊँ तो मैंने वो शेख वाली कहानी गढ़ दी ताकि किसी को भी ये शक ना हो की कविता आखिर कहा है ,दवाओं के बुरे असर से कविता मेरे ऊपर ही डिपेंड होने लगी थी ,उसकी हालत जानवरो जैसी हो रही थी और पागलों की तरह विहेब करने लगी थी ,पहले पहल तो उसने खुद को सम्हाल लिया था लेकिन धीरे धीरे वो उस ऊर्जा को बाहर निकालने के लिए सेक्स का सहारा लेने लगी ,पहले तो मेरे लिए ये कोई वरदान सा था लेकिन बाद में मेरे लिए उसे सम्हालना भी मुश्किल हो गया,वो जानवर थी और जानवर ही बन गई थी ,वो मेरी दासी जैसे रहे लगी क्योकि हर चीज में उसे मेरी जरूरत थी,वक्त बीत रहा था ,उसने मुझे बताया था की उसके नोट्स की कुछ कापियां मालती के पास भी है ,हमे लगा की शायद वही वो चीजे है जो इस फार्मूले को फरफेक्ट बना पाएंगे ,लेकिन नही मैं गलत था,फिर पूर्वी मेरे जीवन में आयी पहली नजर में ही उससे प्यार हो गया,मैं वासना का शिकार था मैं दो लड़कियों से संबंध में था लेकिन पहली बार मुझे लगा की सच्चे प्यार की बात ही कुछ अलग होती है ,लेकिन पूर्वी को पाने में सबसे बड़ी बाधा तो मालती खुद थी और साथ ही कविता,तब तक कविता अपने अतीत को भी भूल चुकी थी मेरे लिए वो बस एक बोझ थी जिसे मैं ढो रहा था,लेकिन कही ना कही मैंने उससे प्यार किया था और मैं किसी भी हालत में जिंदा रखना चाहता था,मुझे उमीद थी की एक दिन मैं ऐसा कुछ बना ही लूंगा जिससे मैं कविता को फिर से ठीक कर सकू लेकिन मैं जानता था की मैं उसके जैसा बुद्धिमान नही हु जब वो ये नही कर पाई तो मैं कैसे कर पाऊंगा,लेकिन मैंने कोशिस जारी रखी मेरे साथ सपना थी ,मालती थी जो दोनों ही टैलेंटेड थी ,मैं इसी उम्मीद में जुटा रहा की एक दिन मैं कुछ कर पाऊंगा ,मैंने पूर्वी से प्यार किया उससे शादी की सब कुछ ठीक था लेकिन फिर पूर्वी तुमसे मिली ….
और उसके विचारों में परिवर्तन आने शुरू हो गए ,वो मुझे शक के निगाहों से देखने लगी ,मुझे तो इन चीजो पर पहले भी शक हो रहा था लेकिन मैं चुप रहा,क्योकि मुझे लगता था की पूर्वी और मेरे बीच जो प्यार है वो थोड़ी मोड़ी बातों से नही टूटेगा लेकिन शायद मैं गलत था ,तुमने अपना दिमाग और ज्यादा लगाया और रफीक को यंहा शेख का बेटा बना कर ला दिया,मुझे पता था की शेख का इन सबसे कोई संबंध नही था,क्योकि शेख तो कब का जा चुका था लेकिन मैं बोल भी तो कुछ नही पा रहा था,मेरे पीछे कविता का वचन था और सामने पूर्वी का प्यार ,मैं तो खुद में ही फंसा हुआ इंसान था,कविता को मैं दुनिया के सामने नही ला सकता था तुम्हे नही बता सकता था और तुम थे जो मुझे ही कविता का कातिल माने बैठे थे,मैं जानता था की तुमने रफीक को यंहा क्यो लाया है क्योकि तुम्हे लगता है की मैं ही कविता का कातिल हु जिसने कविता को मार कर कही गायब कर दिया होगा और फिर शेख का नाम लगा दिया,मैं ये भी जानता था की मेरी इस थ्योरी पर दुनिया भले ही यकीन कर ले लेकिन तुम नही करोगे ,तुमने मुझसे दोस्ती तोड़ दी और फिर मेरी बीवी को अपने जाल में फसाने लगे ,तुनमे पूर्वी को बताया की तुम और कविता कैसे एक दूसरे को प्यार करते थे और फिर मेरे कारण तुम अगल हुए,पूर्वी भी शायद तुम्हारी बातों में आ गई लेकिन वो खुद को कन्फर्म करना चाहती थी ,वो भी इस खेल में शामिल हो गई ,सभी बस तुम्हारे बिछाए मोहरे बन कर रह गए थे लेकिन मैं अपने काम में ही लगा हुआ था,तुम लोगो ने तो मुझे जलाने में भी कोई कसर नही छोड़ी पूर्वी की केमेस्ट्री रोहन और रफीक के साथ ऐसे बिठाने की कोशिस की कि मैं जलकर कुछ ऐसा कर जाऊ की मेरे गुनाह तुम्हारे सामने आ जाए ,तुम सही भी थे मैंने कुछ ऐसा किया भी,मैंने अपने प्रयोगों को तेजी दे दी लेकिन जो रिजल्ट मेरे सामने आया वो खतरनाक था,
मैंने पहले खुद के सेफ्टी की सोची और सपना को किसी डॉ का इंतजाम करने को कहा,और फिर डॉ के सामने ही उस दवाई की डोस ली जो मैंने कविता के पुराने फार्मूले में जरूरी बदलाव करके बनाया था,मुझे कुछ भी नही हुआ लेकिन मैं उसकी शक्ति को महसूस करने लगा मुझे लगा की मैंने इसे फरफेक्ट बना लिया है लेकिन मैं गलत था,घर आकर मुझे वो सब होने लगा जो मुझे नही होना था ,अत्यधिक गुस्सा,जो कविता के बनाये फार्मूले में नही होता था लेकिन मैं एक अजीब सा जानवर बनने लगा,मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं इस पूरे दुनिया को ही नष्ट कर दु,मेरे सामने वो सब चीजे चलने लगी जो पूर्वी और तुमने मुझे जलाने के लिए किया था मैं पूर्वी के लिए गुस्से से भरने लगा था,उसी पूर्वी के लिए जिसे मैंने जीवन में सबसे ज्यादा चाहा था,मेरी शक्तियां तो मेरे कंट्रोल में थी लेकिन मैं खुद के कंट्रोल में नही था….
बाकी जो भी हुआ तुम जानते हो ,मैंने सोचा था की ये दवाई बेड इफेक्ट नही दिखाएगी लेकिन जैसे जैसे मैं अपने को शांत करने के लिए शराब पीता गया मेरे अंदर वो इफेक्ट आने शुरू हो गए जो मैंने कविता के अंदर देखे थे,मैं बुरी तरह से डरा हुआ था साथ ही मैं बेहद ही गुस्से में भी था,मुझे तो तुरंत ही गोवा निकल जाना था लेकिन मैं पूर्वी से मिले बिना नही जाना चाहता था,पहले तो मैंने सोचा था की मैं वो गलती नही करूंगा जो कविता ने की थी ,तुम्हे बिना बताए ही गायब हो गई थी लेकिन शाम होते होते मैं खुद ही एक शैतान में तब्दील हो चुका था...मुझे फिर से दवाई की डोस लेनी पड़ी ,सब ठीक हो गया लेकिन गुस्सा और भी बढ़ गया ,कही ना कही मेरा दिमाग ये समझ रहा था की ये गलत है इतना गुस्सा गलत है मैं शैतान बन रहा हु लेकिन मेरा खुद पर से काबू हट रहा था ,और फिर जो हुआ वो तुम जानते ही हो ,तुमने तो उस तलघर में रखे पूरे फार्मूले और दवाइया जला दिया और मैं इस हालत में पहुच गया जिसमे कभी कविता जीती थी,उसके पास थो वो तलघर था जंहा वो दुनिया से छिपकर रह सकती थी लेकिन मेरे पास तो कुछ भी नही बचा था,मुझे आशा की एक ही उम्मीद दिख रही थी वो थी पूर्वी ...ना जाने मुझे अब भी यकीन था की इतना सब कुछ होते हुए भी पूर्वी के दिल में मेरे लिए प्यार है और मैं सीधे उसके पास चला आया,मेरा दिमाग इतना तेज काम कर रहा था की कोई भी बाधा कही भी मुझे रोक नही पाई लेकिन शरीर काम करना बंद करने लगा था,मुझे नींद चाहिए थी एक बेहोशी चाहिए थी जिसके बाद मेरा इलाज शायद संभव हो सके ….ह्म्म्म अब ठीक लग रहा है …….”
गौरव की बात सुनकर सभी चुप थे ,गौरव की आंखों में पानी था वही पानी डॉ चूतिया और पूर्वी के आंखों में था ,दोनों ने ही गौरव को कितना गलत समझा था,हा वो गलत तो था लेकिन कितना ये तो कविता के जगाने के बाद ही पता चलता…
इतना तो साफ था की उन्होंने जितना बुरा उसे माना था वो उतना बुरा नही था ,उससे गलती तो हुई थी और सबसे बड़ी गलती थी की उसने कविता का राज डॉ से छिपाया था भले ही कविता के ही कहने पर लेकिन कही ना कही उसके खुद का भी तो स्वार्थ था ,उसने पूरी ताकत कविता को ठीक करने के लिए लगाई थी लेकिन खुद ही फंस गया था ,सब कुछ पता होने के बाद भी वो उस खेल में सबको जितने दे रहा था ,चाहे रफीक का आना हो या सपना का उसे लुभाना या पूर्वी का रोहन और रफीक की ओर आकर्षण हर खेल उसे ही बहकाने के लिए खेला जा रहा था और वो सबको चुपचाप देखता हुआ बस अपने काम में लगा हुआ था,कमरे में घनी शांति थी किसी को कुछ भी समझ नही आ रहा था की उससे क्या कहे ,वो दोषी था भी की नही और था तो किस चीज का ये कोई भी तय नही कर पा रहा था ……….
“मेरी कविता अब भी बेहोश है गौरव …और तुमने जो किया वो माफी की काबिल नही है,तुमने मेरे प्यार को मुझसे छीन लिया अरे मैं भी तो तेरा दोस्त था,इतना तो मुझपर भी भरोसा करना था की मैं कविता की हिफाजत तुझसे ज्यादा कर पाता,लेकिन तू तो उसे अपनी गुलाम बना कर रखना चाहता था “
डॉ ने हल्के से कहा
“तेरी बात सही है डॉ लेकिन पूरी तरह से नही ,मैं शुरवात में ही ऐसा सोचता था लेकिन बाद में कविता को ठीक करना और उसको दिए वचन की रक्षा करना ही मेरे लिए महत्वपूर्ण रह गया था,वो मेरा भी प्यार थी ,हा मैं मानता हु की उसके लिए मेरे दिल में प्यार कम और हवस ज्यादा था लेकिन एक समय के बाद वो मेरे लिए मेरी जिम्मेदारी बन गई थी ,मैं उससे सिर्फ शाररिक सुख नही चाहता था ,असल में मैं उसके हालात बिगड़ने के बाद से मैंने कभी उससे संबंध नही बनाये लेकिन वो ऐसा व्यवहार करने लगी थी और उसे सम्हालने के लिए मुझे उसके साथ ऐसा व्यवहार करना पड़ता था,वरना वो आक्रामक हो जाती ,हा मैं गलत तो हु डॉ और जो सजा तूम और कविता मुझे देना चाहो मुझे मंजूर है…”
डॉ चूतिया कुछ भी नही बोल पाया …
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दो महीने हो चुके थे ,गौरव की हालत बहुत ही अच्छी हो चुकी थी वो अब हॉस्पिटल से भी बाहर आ चुका था और अपने काम में लग चुका था लेकिन कविता के हालत में कोई सुधार नही हुआ था,गौरव को अभी तक कोई भी सजा नही दी गई थी उसके ऊपर लगे सभी चार्जेस भी हटा दिए गए थे ,पूर्वी अब अपने पिता के साथ ही रह रही थी और गौरव अपने पुराने घर में ,दोनों मिलते थे सामान्य रूप से बाते भी करते थे लेकिन अभी भी पूर्वी अभी भी गौरव को लेकर कोई मजबूत फैसला नही ले पाई थी और गौरव भी इस चीज को समझता था,अब उसे बस कविता के सही स्तिथि में आने का इंतजार था ,क्योकि शायद उसके ठीक होने पर ही चीजे सामान्य हो सके ,उसने और सपना ने फैसला किया था की वो कविता को ठीक करने के लिए जी जान लगा देंगे ,उन्होंने कविता के ब्लड का सेम्पल लेकर उसपर रिसर्च करना शुरू किया,इस बार उन्होंने एक मजबूत टीम बनाई और कुछ पाने के लिए नही बल्कि उन साइड इफेक्ट्स को हटाने के लिए मेहनत करनी शुरू कर दी,उसके टीम में कई क्षेत्र के लोग थे जिनमे अधिकतर डॉ और वैज्ञानिक थे,इसके साथ ही विहेवियर साइस से जुड़े हुए लोग भी शामिल थे .
ठीक होने के बाद से ही गौरव इस प्रोजेक्ट में भिड़ा हुआ था,पूरी फंडिंग कपूर साहब कर रहे थे शायद उन्हें भी अपने अतीत की गलतियों का अहसास था और ये उसे सुधारने की ही एक कोशिस थी …
2 महीनों के अथक प्रयास और कई टेस्ट के बाद कविता के स्तिथि में सुधार आनी शुरू हो गई ,यंहा सभी अपना पाप ही तो धो रहे थे ,कविता का अच्छा होना कई लोगो के पापों से मुक्ति का पर्याय थी,हर बार कविता की स्तिथि थोड़ी ठीक होती और खुशी और उम्मीद की लहर दौड़ जाती थी ,
हॉस्पिटल में डॉ चूतिया कविता के पास ही बैठा था वो अभी बेहोश थी अधिकतर समय वो सोते ही रहती थी क्योकि ये उसके लिए सबसे जरूरी था,अचानक उसे थोड़ी हलचल महसूस हुई कविता उठाने वाली थी ,महीनों से यही चल रहा था ,हर बार कविता होश में आती और डॉ चूतिया इसी उम्मीद से उसे देखता की इस बार उसकी कविता उसका नाम लेकर पुकारेगी लेकिन हर बार मायूसी ही हाथ लगती थी ,वो ज्यादा शांत तो हो रही थी लेकिन अभी भी किसी को नही पहचान पा रही थी ,लेकिन डॉ चूतिया फिर से उम्मीद लेकर वंहा पहुच जाता चाहे उम्मीद टूटे या पूरा हो उम्मीद बाकी थी ये भी क्या कम था…
“तुम ..”
कविता की आंखे डॉ चूतिया पर ही टिकी थी ,डॉ की आंखों में आंसू था उसे लगा जैसे कविता की आंखे उसे पहचानने की कोशिस कर रही है ..
“मैं तुम्हारा चुन्नी हु कविता ,क्या तुम्हे याद है “
“चुन्नी ..???”
कविता की आवाज बेहद ही कमजोर थी लेकिन उसकी आंखों में एक आश्चर्य था ,वही आश्चर्य डॉ चूतिया के लिए आशा की एक किरण थी ..
“तुम्हारा चुन्नी ..तुम्हारा चूतिया ..याद है तुमने ही तो मुझे ये नाम दिया था तुम ही तो हो जिसने मुझे चुन्नीलाल से चूतिया बनाया था ..याद है तुम्हे कविता ..”
डॉ का गाला भर चुका था,उसके आंखों से आंसू झर रहे थे…
“ह्म्म्म याद है शायद ,तुम्हे देखा है कही “
डॉ के रोम रोम में जैसे करेंट सा दौड़ गया ,उम्मीद और उमंग का करेंट उसकी कविता को वो याद आ रहा था ..
“मेरी जान ..”वो फफक पड़ा था..उसने अपना सर कविता के पेट में रख दिया था
“तुम रो क्यो रहे हो चुन्नी ..”कविता का हाथ डॉ के सर में आ गया वो उसे सहला रही थी ,कविता को एक महीने पहले ही बेड़ियों से आजाद कर दिया गया था अब वो आक्रामक नही थी लेकिन उसे कुछ याद भी नही था,वो अब चल फिर रही थी लेकिन अजीब सी दुनिया में खोई रहती थी …
कविता के मुह से अपना नाम सुनकर डॉ को ऐसा लगा जैसे उसकी दुनिया फिर से गुलजार हो गई हो ..
“मैं तुम्हारा चुन्नी हु कविता “
उसने सिसकते हुए कहा
“पहचाने से तो लगते हो “
कविता के होठो में इतने दिनों में पहली बार मुस्कान खिली थी ,वो दोनों वंहा से उठे और कविता के साथ वो हॉस्पिटल के गार्डन में पहुच गया..
जिसने भी उन्हें देखा उनके होठो में मुस्कान खिल गई ,वंहा काम करने वाले सही कविता के करुण कहानी से वाकिफ थे साथ ही डॉ के प्यार को भी महसूस कर पाते थे जो की महीनों से दिन रात बस उसके साथ ही रहता था..
आज कविता के होठो में मुस्कान थी उसे लग रहा था जैसे वो किसी नींद से जगी हो और किसी अपने का साथ उसे मिल गया हो वही डॉ तो बस कविता के सुधारते हालात से ही खुश था,वो गौरव और सपना के अथक मेहनत की भी तारीफ करता नही थकता,उसके दिल में अब गौरव के लिए कोई भी द्वेष नही था उसे तो बस अपनी कविता वापस चाहिए थी ………
शाम का वक्त था और सूर्य खुद को छिपा रहा था उसकी लालिमा कही दूर बदलो से छनकर आ रही थी ,दोनों उसे ही देख रहे थे…
“क्या तुमने ऐसा नजारा कही देखा है …..”
डॉ की बात सुनकर कविता के आंखों में आंसू आ गए
“समुंदर का किनारा था,मैं रेत में बैठी थी सामने विशाल समुद्र में सूर्य ऐसे ही ढल रहा था,कुछ याद आ रहा है की किसी ने मेरा हाथ ऐसे ही पकड़ा था जैसे अभी तुमने पकड़ा है ,मैं उस प्यार भरे स्पर्श को कैसे भूल सकती हु ,”
कहते कहते कविता की आंखे भीग गई ,उसने मुड़कर देखा ये वही शख्स था जो उसके साथ बैठा था उसके होठो में वही प्रेम से भरी हुई मुस्कान खिली हुई थी ,कविता को याद तो अभी भी कुछ नही था लेकिन उसके नैनो से आंसुओ के झरने बहते गए दोनों ही एक दूसरे को देख रहे थे ,कविता उस समय उस शख्स के हाथो के स्पर्श में भरे हुए प्यार की तुलना अभी इस शख्स के हाथो के हाथो में भरे हुए प्रेम से कर रही थी वो दोनों की समानता को अनुभव कर पा रही थी ,ना जाने क्यो वो रो रही थी,उसे देखकर डॉ की भी हालत वैसे ही थी,कुछ अनजान सा कविता के अंदर से टूट रहा था और कुछ अपना सा उसके अंदर जाग रहा था…
ना जाने कितनी देर तक वो दोनों ही यू रो रहे थे,कविता उसके सीने से खुद को लगाकर घण्टो तक आंसू बहती रही ,वहां मौजूद हर शख्स की निगाह उनपर ही टिक गई थी,फोन की घंटियां बजने लगी थी जिसे भी ये सूचना मिल रही थी वो अपना सारा काम धाम छोड़कर भागा हुआ हॉस्पिटल पहुच रहा था,1 ही घण्टे में सभी लोग वंहा मौजूद थे,गौरव कुछ आगे बढ़ा लेकिन किसी ने उसका हाथ पकड़ कर रोक दिया ..
“रोने दो उसे जो दुनिया की कोई दवाई नही तोड़ पाई शायद वो दीवार प्रेम के वार से टूट जाए,शायद रोकर वो सब कुछ बहा ले जाए जो कविता के अवचेतन को बांधे हुए है “
एक मनोचिकित्सक ने कहा और गौरव वही रुक गया सभी कविता का रोना खत्म होने के इंतजार में थे और उन्हें अकेला छोड़ दूर बैठे देख रहे थे,,,डॉ के सीने में छिपी हुई कविता अलग हुई लेकिन डॉ उसे छोड़ने को तैयार नही था ,आखिर वो अलग हुए दोनों ने एक दूसरे को देखा ,जंहा डॉ के होठो में मुस्कान थी वही कविता के चहरे में एक आश्चर्य था…
“चुन्नी क्या हुआ था मुझे ,ऐसा लग रहा है जैसे किसी गहरी नींद से जागी हु ...
कहा है हम और तुम ???मैं तो गौरव के साथ थी ना..?? क्या उसने उस फार्मूले को सुधार लिया ,क्या गौरव ने वो काम पूरा कर लिया जो मैंने उसे दिया था ..”
कविता आसपास को देख रही थी वही डॉ ने उसे और भी जोरो से जकड़ लिया वो फफक कर रो पड़ा…
“तुम लौट आयी कविता तुम लौट आयी……”
सब कुछ कविता के समझ के पर था लेकिन उसे अहसास था की कुछ अनहोनी हुई है ,उसे आखिरी बार की जो याद थी वो गौरव के साथ तलघर में बिताए हुए कुछ समय थे ,उसके आंखों में कुछ दृश्य नाच गए और वो कांप सी गई ,उसे महसूस हुआ की कोई बुरा सपना जैसे अचानक से खत्म हो गया हो ………..
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कविता ठीक हो चुकी थी उसके साथ जो भी हुआ उसे बताया गया,वो ही उस दवाई की जननी थी और शायद यही कारण था की उसने गौरव को माफ कर दिया था,बल्कि उसने गौरव का शुक्रिया अदा किया की उसने कविता को इतने दिनों तक बचा कर रखा ,उसकी हिफाजत की और उसे ठीक करने के लिए हर संभव प्रयत्न किया,कविता के माफ कर देने के बाद डॉ के लिए गौरव को कहने के लिए कुछ बचा ही नही था,बस उसने गौरव से माफी मांगी क्योकि उसने गौरव को गलत समझा था,पूर्वी और गौरव अब साथ हो चुके थे वही रफीक और बल्ला अपने घरों को निकल गए लेकिन इस बार गुंडे बनकर नही बल्कि रोहन ने उन्हें अपनी कंपनी में जॉब दे दिया था और उन्हें उनके ही शहर का मार्केटिंग हेड बना दिया था…
सभी खुश थे सिवाय सपना और रोहन के ..
वो दोनों अभी अभी अपने जिस्म की आग को शांत कर सिगरेट पी रहे थे…
“यार रोहन सब ठीक हो गया लेकिन हमारी जिंदगी ही खत्म हो गई “
“क्यो???”
“अब मैं पूर्वी से कभी नफरत नही कर पाऊंगी ,किससे कंपीटिशन करूंगी अब ??”
“हा यार साला मैं भी अब किसे लाइन मारूंगा...एक उम्मीद थी वो भी गई “
“अब क्या करे यार ??”
रोहन बहुत देर तक सोचा
“क्यो ना हम दोनों शादी कर ले ??”
सपना ने रोहन की ओर बड़े ध्यान से देखा और जोरो से हँस पड़ी
“चुप साले ,माजक की भी कोई हद होती है “
“मैं मजाक नही कर रहा हु ,सोच ना हम दोनों एक ही जैसे है ,सालों हो गए एक दूसरे के सिवा किसी के साथ सोए भी नही है ,और अगर सो भी जाते तो कोई प्रॉब्लम नही होगी ..हमारी आदतें भी एक सी है ,और मैं तुझसे प्यार भी तो करता हु …”
“कब से “
“हमेशा से तू मेरी सबसे अच्छी दोस्त है “
सपना सोच में पड़ गई थी
“देख सपना हम दोनों एक दूसरे के जैसे है ,और एक दूसरे को समझते भी है ...आज तक हम कभी लड़े क्या??..हम एक दूसरे के लिए फरफेक्ट है बे “
सपना के होठ में मुस्कान आ गई
“क्या हुआ …???”
“इसी बात पर हो जाए एक बार और “
सपना ने मुस्कुराते हुए कहा ……..
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समाप्त