All content free · updated every 5 minutes

कमसिन बहन (Completed)

Story Hindi 9 pages 6 months ago

स्कूल से छुट्टी होते ही नेहा और उसकी बचपन की सहेली मंजू लगभग दौड़ते हुए बाहर निकले,
दोनो में हमेशा इसी बात की दौड़ लगती थी की कौन पहले बाहर निकले और विक्की की बाइक पर पहले बैठे...
और इस दौड़ में लगभग हर बार नेहा ही जीतती थी..
आख़िर वो चुस्त दरुस्त थी, एकदम छरहरा सा बदन था उसका, भागने में भी तेज थी और सबसे बड़ी बात विक्की उसका सगा भाई था इसलिए उसके पीछे बैठना वो अपना हक़ समझती थी

वहीं दूसरी और मंजू भी कम नही थी
हालाँकि वो नेहा के मुक़ाबले थोड़ी मोटी थी और शायद इसलिए वो अक्सर पीछे रह जाती थी पर उसने भी कई बार बाजी मारकर विक्की के पीछे बैठने का लुत्फ़ उठाया था..

और ये दोनो 12 वी कक्षा में जाने के बावजूद ऐसी बचकानी हरकतें इसलिए भी किया करती थी क्योंकि उनमें आजकल की लड़कियो वाली चालाकियाँ नही थी
यानी दोनो सूरत और सीरत से एकदम भोली थी.

और दूसरा उन्हे ऐसा करने के लिए विकी ही उकसाता था क्योंकि उन्हे स्कूल से घर ले जाने के बहाने वो उनके गुदाज और उभर रहे मुम्मो का दबाव अपनी पीठ पर महसूस करता था...
और साथ ही साथ उन्हे दूर से भागते हुए देखकर उनके हिलते हुए नन्हे स्तनों में किसके कितने बड़े है इसकी तुलना भी करता था...

भले ही नेहा और विक्की सगे भाई बहन थे पर जब से विक्की के लंड ने हरकत करनी शुरू की थी उसे नेहा के सिवा कोई और दिखाई ही नही देता था...
और ये सिलसिला आज से नही बल्कि पिछले 1-2 सालो से था जब से नेहा के नन्हे नींबुओं ने सेब का आकार लेना शुरू कर दिया था...

अपने पिता और माँ के डर से विक्की घर पर तो कोई हरकत कर नही सकता था इसलिए अपनी बहन को स्कूल से लाने के बहाने वो अपनी इच्छा की थोड़ी बहुत पूर्ति कर लेता था..
बहन के साथ-2 उसे उसकी सहेली मंजू का स्पर्श भी मिल जाया करता था...
कुल मिलाकर अभी के लिए उसका जुगाड़ सही से काम कर रहा था...
पर अब वो इस खेल को और आगे ले जाना चाहता था और इसलिए उसके दिमाग़ में पिछले कई दिनों से खिचड़ी पक रही थी.

आज नेहा को पछाड़ते हुए मंजू आगे निकल आई और उछल कर विक्की की बाइक पर बैठ गयी...
नेहा बेचारी मन मसोस कर रह गयी और बुझे मन से वो भी पीछे बैठ गयी और बाइक चल पड़ी..

कुछ दूर चलकर हमेशा की तरह विक्की ने बाइक एक आइस्क्रीम वाले के पास रोकी और आज की विजेता यानी मंजू को एक चोकोबार लेकर दी और नेहा को मिली आइस कैंडी..
यही लालच था दोनो को जो उन्हे भागने के लिए प्रेरित किया करता था.

और आइस्क्रीम लेकर वो फिर से घर की तरफ चल दिये.

एक हाथ से आइस्क्रीम और दूसरे से विकी की कमर को पकड़कर अपना बेलेंस बनाने की कोशिश में मंजू के मुम्मे ना जाने कितनी बार विक्की की कमर से घिस्से खा गये.

पहले तो उसे कोई फ़र्क नही पड़ा पर जब उसके निप्पल्स ने अकड़ना शुरू कर दिया तो उसे एहसास हुआ की ये हो क्या रहा है...

आज से पहले भी उसने ये बात कई बार नोट की थी पर इसमें जो मज़ा मिलता था उसे सोचकर वो हर बार इसे नजरअंदाज कर दिया करती थी...

ना तो उसे और ना ही नेहा को आज तक इन बातो से कोई फ़र्क पड़ा था...
पर जैसे-2 उनमें शारीरिक बदलाव आ रहा था उनके शरीर ने अपनी तरफ से संकेत देने शुरू कर दिए थे...
और ना चाहते हुए भी हमेशा की तरह आज भी मंजू को उस घर्षद में एक अजीब से आनंद की प्राप्ति हो रही थी....
शरीर में एक अजीब सा कंपन और रह-रहकर स्तनों से लेकर नीचे चूत तक जो एक लहर उठकर जाती थी उसकी वजह से वो अपनी आइस्क्रीम खाना छोड़कर आँखे मूंदे उस आनंद की अनुभूति करने में लगी थी..

और उसके पीछे बैठी हुई नेहा उसे आँखे बंद किए बैठे देखकर बोली : "अररी पागल...तेरी आइस्क्रीम गिर रही है और तुझे नींद आ रही है चलती बाइक पर...''

उसकी बात सुनकर उसने आँखे खोली तो पाया की थोड़ी आइसक्रीम पिघलकर उसके दाँये स्तन पर गिर गयी है...

वो बोली : "ओोहह ...मुझे ध्यान ही नही रहा...प्लीज़ यार, मेरी छाती से आइस्क्रीम सॉफ कर दे...वरना दाग पड़ जाएगा...''

Toggle signature
इंस्पेक्टर की बेटी​

एक तो विक्की की पीठ से घिसाई के बाद उसके निप्पल्स पहले से ही खड़े थे, नेहा की इस हरकत से वो और भी कड़क होने लगे...

उसने बड़ी मुश्किल से , ना चाहते हुए उसके हाथ को अपनी छाती से हटाया और बाकी के रास्ते आराम से बैठकर गयी..नेहा भी खिलखिलाकर हंस दी अपनी सहेली की इस हालत पर..

इन सब बातो को आगे बैठा विक्की बड़ी चालाकी से नोट कर रहा था...
और उसकी कुटिल मुस्कान बता रही थी की उसने अगले कदम की प्लानिंग कर ली है अब.

*********
अब आगे
**********

मंजू का घर पहले आता था , इसलिए उसे रास्ते मे उतारने के बाद दोनो भाई बहन अपने घर की तरफ चल दिए...

अब अपने भाई से चिपकने की बारी नेहा की थी...
और शायद इसी बात का विक्की को भी इन्तजार था.

जैसे ही नेहा ने अपनी बाहे विक्की की कमर से बाँधी, उसने बाइक की स्पीड तेज कर दी और नेहा ने गिरने से बचने के लिए विक्की को और ज़ोर से जकड़ लिया...
और इस प्रक्रिया मे उसके नन्हे चूजे विक्की की कमर में धंसते चले गये...
विक्की को लगा जैसे रुई के दो गोले उसके कमर की मसाज कर रहे है.

विक्की को पकड़े-2 नेहा ने उसके कान के पास अपनी गर्म साँसे छोड़ते हुए कहा : "भैय्या , मैं आपसे बहुत नाराज़ हूँ , आपने आज फिर से मंजू को चोकोबार लेकर दी और मुझे वो सड़ी हुई सी बर्फ वाली आइस्क्रीम...''

विक्की जानता था की वो ऐसा बोलने वाली है, इनफॅक्ट हारने के बाद वो हर बार ऐसे ही अपनी शिकायत किया करती थी..शायद हार बर्दाश्त नही थी उसे...

विक्की : "नेहा, तुझे तो पता है ना, मैने पहले ही बोल रखा है की जो जीतेगा उसे ही चोकोबार मिलेगी...अब तू आज हार गयी तो इसमे मैं क्या कर सकता हूँ ...''

बेचारी अपने भाई की बात सुनकर मायूस सी हो गयी,
उसकी पकड़ भी ढीली पड़ गयी...

ये देखते ही विक्की ने अपना पासा फेंका

वो बोला : "वैसे तुझे चोकोबार खानी है तो वो मैं तुझे अलग से भी खिला सकता हूँ ....''

ये सुनते ही नेहा के शरीर में जैसे एक बार फिर से जान आ गयी...
उसकी पकड़ भी तेज हो गयी और मुम्मो को और ज़ोर से उसकी कमर में धँसाते हुए वो बोली : "ओ वाउ....तो खिलाओ ना...''

विक्की तो पहले से ही प्लानिंग करके बैठा था..
वो बोला : "ऐसे नही...इसके बदले तुझे भी मेरा एक काम करना होगा..''

नेहा : "वो क्या....? ''

विक्की : "आज रात को जब माँ पिताजी सो जाए तो मेरे रूम में आ जाना, आइस्क्रीम भी मिल जाएगी और काम भी वहीं बता दूँगा...''

उसने बड़ी मासूमियत से पूछा : "आ तो जाउंगी ..पर...माँ पिताजी के सोने के बाद ही क्यूँ ..पहले क्यों नही...''

विक्की ने थोड़े कड़क लहजे में कहा : "आइस्क्रीम खानी है ना....फिर ये बेकार के सवाल क्यों पूछ रही है''

वो सकपका सी गयी....
और एकदम से चुप हो गयी...
शायद इस डर से की कहीं उसके भाई का मन ना बदल जाए आइस्क्रीम खिलाने का..

विक्की उसकी हालत देखकर बोला : "अर्रे पगली, डरती क्यों है...वो मैं इसलिए बोल रहा हूँ की माँ पिताजी हमेशा गुस्सा करते है ना रात को आइस्क्रीम खाने के लिए...की दाँत खराब हो जाएगे...ये हो जाएगा...वो हो जाएगा...इसलिए बोल रहा हूँ ...वरना मुझे क्या, उनकी डांट खानी है तो पहले ही आ जाइयो...''

नेहा :"ओह्ह .....इसलिए आप बाद में आने के लिए कह रहे थे....मुझे डांट से बचाने के लिए...थॅंक्स भैय्या ....उम्म्म्मममाआअ''

इतना कहते हुए उसने बाइक पर बैठे-2 ही उसके गालो के पास एक गीला सा चुंबन दे दिया...
उसके नर्म होंठो की किस्स वो कई बार महसूस कर चुका था...
पर आजकल वो थोड़ा और सेनुसुअल फील करवाती थी.

घर पहुँचकर वो सीधा बाथरूम में घुस गयी और विक्की अपने रूम में , जो फर्स्ट फ्लोर पर था....
वहां पहुँचते ही उसने अपने सारे कपड़े निकाल फेंके और अपने 7 इंच के लंड को पकड़कर उपर नीचे करने लगा...
ऐसा करते हुए उसकी आँखे बंद थी और बंद आँखो से वो उन्ही पलों को फिर से याद कर रहा था जो कुछ देर पहले घटे थे...

मंजू के नर्म मुम्मे और उसकी पकड़ को महसूस करके उसने 8-10 घिस्से ज़ोर से मारे...
और फिर जब नेहा के बारे में सोचना शुरू किया तो उसके हाथों की गति बढ़ती चली गयी...
उसके नर्म मुम्मे के स्पर्श से लेकर उसकी किस्स तक और घर पहुँचने के बाद उसका बाथरूम में जाकर कपड़े उतारकर नंगे होने तक को भी उसने इमेजीन कर लिया
और जब उसे बंद आँखो मे अपनी नंगी बहन दिखाई दी तो उसके लंड की पिचकारियां पूरे कमरे में तितर बितर होकर फैल गयी

''आआआआआआआआआआाअगगगगगगगगगगगगघह..... साली हरामजादीया...........''

अपने लॅंड की आख़िरी बूँद तक को अपनी बहन और उसकी सहेली के नाम कुर्बान करने के बाद वो उठा और अपनी टी शर्ट से नीचे के फर्श को सॉफ किया और उसे बास्केट में डाल दिया धोने के लिए...

नेहा तो शुरू से ही मूवीस की फैन थी, अक्सर घर में तेज गाने चलाकर वो नाचती गाती रहती थी, पूरे घर की लाडली थी इसलिए उसे कोई कुछ कहता भी नही था....नेहा के इसी रुझान का फायदा विक्की उठा लेना चाहता था...वो एक तीर से दो शिकार कर रहा था, जिससे उसका काम भी बन जाए और नेहा भी उसे मिल जाए..

नेहा का उत्साह देखकर विक्की समझ गया की उसे बोतल में उतारने में ज़्यादा परेशानी नही आएगी...
पर वो हर काम बड़े प्यार और आराम से करना चाहता था...आख़िर उसकी बहन थी वो, उसकी खिल रही जवानी को वो अपने हिसाब से इस्तेमाल करना चाहता था.अब तो खेल शुरू करने का इंतजार था बस.

***********
अब आगे
***********

विक्की ने नेहा को केमरे के सारे फंक्शन्स समझा दिए ताकि वो उसकी फोटो सही से ले सके...
विक्की ने उसे ये भी बताया की कुछ पिक्चर्स लेने के लिए उन्हे बाहर की लोकेशन्स में भी जाना पड़ेगा, जैसे माल्स, शहर की बौंड्री पर बने खेत और पुराने किले में भी क्योंकि ऐसी जगह का बेकग्रौंड अच्छा आता है पिक्चर्स में..

नेहा केमरे को हाथ में लेकर बड़ी उत्साहित लग रही थी...
उसने एक-2 करके विक्की की फोटो लेनी शुरू कर दी और विक्की भी बड़े स्टाइल के साथ अलग-2 पोज़ में फोटो खिंचवाने लगा..

करीब 10 मिनट बाद नेहा के अंदर की कुलबुली बाहर आ ही गयी और वो बोली : "भैय्या, प्लीज़ मेरी भी फोटो खीँचो ना....''

विक्की : "तेरी फोटो किसलिए...क्या तुझे भी मॉडलींग का शॉंक है...''

नेहा ने शरमाते हुए कहा : "मॉडलींग का तो नही पर हेरोइन बनने का बहुत शॉंक है...''

विक्की (हंसते हुए) : "हा हा....मैं यहाँ हीरो बनने की तैयारी में हूँ और तू हेरोइन बनने की...वाह....पिताजी को बोलकर फिल्म घर पर ही बनवा लेते है....''

नेहा ने भी हंसते हुए उसका साथ दिया और बोली : "हां ..ये सही रहेगा...और माँ से डायरेक्ट करवा लेंगे....पूरा परिवार एक शानदार फिल्म बनाएगा मिलकर....''

उसकी बात सुनकर विक्की हंस दिया और उसके हाथ से कैमरा लेकर उसकी पिक्स लेने लगा...
अब उसके अंदर का कमीनापन जागने लगा था...

वो बोला : "यार....तेरा चेहरा तो काफ़ी सैक्सी है....पर ये कपड़े सूट नही कर रहे...तू चेंज कर ले ना...''

नेहा : "कैसे करू चेंज....मेरी अलमारी तो नीचे है...''

विक्की : "तो इसमें क्या प्रॉब्लम है....मेरी टी शर्ट पहन ले..वो थोड़ी लंबी होगी इसलिए नीचे कुछ पहनने की ज़रूरत भी नही है....फोटो भी एकदम सैक्सी आएगी...''

नेहा बेचारी एकदम भोली थी, उसे क्या पता था की उसका भाई उसकी नंगी टांगे देखने के लिए ये सब बोल रहा है..

वो झट से मान गयी और विक्की की टी शर्ट लेकर बाथरूम में जाने लगी

विक्की : "यही चेंज कर ले ना...मुझसे भला क्या शरमाना...''

वो कुछ देर तक असमंजस में खड़ी रही और धीरे से बोली : "पर भैय्या ....वो माँ कहती है की मैं अब बड़ी हो रही हूँ ...तो मुझे छुप कर ही कपड़े बदलने चाहिए....ख़ास कर तुम्हारे और पिताजी के सामने...

''

विक्की को पता था की उसकी बहन को इन बातो की कुछ ज़्यादा समझ नही है...

पिछले साल तक तो वो घर में छोटी सी निक्कर और बिना ब्रा के टी शर्ट पहने घुमा करती थी, जिसमें से उसकी छाती पर चमक रही बूँदिया सॉफ दिखा करती थी और कई बार तो उसने बड़ी ही बेबाकी से उसे कपड़े बदलते हुए भी देखा था...हालाँकि वो उसे सामने से कभी नही देख पाया पर पीछे से उसकी नंगी पीठ को देखकर उसकी चिकनाहट का अंदाज़ा उसने अच्छे से लगा लिया था...

उन दिनों के बाद से तो अपनी बहन के लिए उसमे और भी ज़्यादा ठरक बढ़ गयी थी...
और आज जो भी हो रहा था ये सब उसी ठरक का परिणाम था.

विक्की : "माँ की बातें तो मेरे भी सिर के उपर से निकल जाती है...भला हम दोनो भाई बहन में कैसी शर्म और वैसे भी तुम्हे या मुझे मॉडलिंग करनी है तो ये शरमाना तो छोड़ना पड़ेगा हमें...कई एड्स में तो नाम मात्र के कपड़े पहनने होते है, उस वक़्त तो पूरी दुनिया देखेगी ना, इसलिए बोल रहा हूँ , मुझसे क्या शरमाना....यहीं चेंज कर लो...''

बेचारी कुछ बोल नही पाई....
उसे इस वक़्त इस बात की चिंता नही थी की वो अपने भाई के सामने कपड़े उतारने जा रही है,
उसे तो बस अपनी माँ का डर था जिन्होने उसे ऐसा करने से मना कर रखा था.

विक्की : "तू माँ की फ़िक्र ना कर, वो नीचे सो रही है...और जो भी हमारे बीच है वो मैं किसी को नही बताऊंगा ..प्रॉमिस.''

विक्की का आश्वासन सुनकर उसे थोड़ी राहत मिली और उसने दूसरी तरफ मुँह करके एक ही झटके में अपनी मैक्सी उतार दी...
विक्की तो अपनी कमसिन बहन का कसावट से भरा बदन देखकर हैरान ही रह गया....
एकदम छरहरा सा बदन था...
जैसे कोई एथलीट का हो, कहीं पर भी एक्स्ट्रा फैट नही था....
उसकी गांड सबसे ज़्यादा दिलकश थी, जैसे तरबूज के दो टुकड़े करके पीछे बाँध दिए हो...
कमर एकदम चिकनी थी और हल्का सा कर्व लिए हुए थी...

वो ब्रा लेने के लिए जब पलटी तो ब्रा में क़ैद उसके नन्हे बूब्स देखकर विक्की के मुँह से आह सी निकल गयी...

नेहा : "क्या हुआ भैय्या ..... ।।।.''

विक्की : "कू...कुछ नही....वो बस तुझे देखकर आज पता चला की तू कितनी बड़ी हो गयी है....''

नेहा ने विक्की की नजर का पीछा करते हुए अपने मुम्मे देखे और हंस दी...

उसने नेहा को अपने पास बिठाया और सारी पिक्स एक-2 करके दिखाई..पिक्स तो अच्छी थी पर वो अपनी बॉडी को सही से उभार नही रही थी...विक्की : "देख नेहा, मॉडेल बनने के लिए तुझे अपनी बॉडी को अच्छे से बेझिझक दिखाना होगा....जैसे ये देख, मेरी पिक्स में था....'' नेहा ने भी नोट किया की उसके भाई मे फोटो खिंचवाते हुए कितना कॉन्फिडेन्स था...

नेहा : "हां भाई....आप सही कह रहे हो....आई थिंक मुझे थोड़ा टाइम लगेगा ये सब सीखने में ...''
इतना कहकर वो मुस्कुरा दी..विक्की ने भी उसकी मोटी जाँघो को निहारते हुए मन ही मन में कहा 'मेरे साथ रहेगी तो ज़्यादा टाइम नही लगेगा....

'
नेहा बेचारी नही जानती थी की विक्की के मन में क्या चल रहा है.

***************
अब आगे
***************

उसके बाद विक्की ने उसकी एक भी पिक नही ली....
शायद वो उसे बताना चाहता था की अगली फोटोस के लिए तो अभी सही से तैयार नही है..

नीचे जाने से पहले नेहा ने एक बार फिर से विक्की की टी शर्ट उसी के सामने उतारी और अपने कपड़े पहन कर नीचे चली गयी...
पर वो ये नही जान पाई की विक्की ने फ्लेश ऑफ करके चुपके से उसके नंगेपन को अपने केमरे में समेट लिया था जिसे वो पूरी रात मुठ मारते हुए एकटक देखता रहा और अपनी आगे की प्लानिंग करता रहा.

अगली दिन उसने एक अच्छा सा प्लान बनाया और कैमरा और नेहा के कुछ कपड़े साथ में लेकर नेहा को स्कूल से लेने के लिए निकल पड़ा..

हमेशा की तरह वो दोनो कमसिन कालियां स्कूल की छुट्टी होते ही भागती हुई बाहर निकली ताकि रोज की तरह चॉकलेट आइस्क्रीम जीतने और खाने को मिले..
और आज नेहा आगे निकली..
शायद कल की हार और रात को अपने भाई से मिली स्पेशल अटेन्शन का असर था की वो उसके पास पहले पहुँची...

भागती हुई नेहा को अपनी बाहो में संभालते हुए विक्की की बाजू उसके बूब्स से टच कर गयी.....
ये नेहा के लिए तो आम सी बात थी पर विक्की अपनी बाजू को उसके मुम्मे पर काफ़ी देर तक रगड़ता रहा...
इस बार नेहा जीती थी इसलिए वो विक्की के पीछे बैठने वाली थी...

मंजू बेचारी का चेहरा बयान कर रहा था की उसके दिल पर क्या बीत रही है आज हारने के बाद...
अब ये आइस्क्रीम खोने का गम था या विक्की के पीछे बैठकर अपने मुम्मे ना रगड़ने की झुंझलाहट,
ये तो वही जाने पर उसका चेहरा देखते ही बनता था.

आइस्क्रीम खाते हुए नेहा बोली : "भैय्या , आज मंजू हमारे घर ही रहेगी शाम तक, खाना भी वहीं खाएगी...इसके मम्मी पापा किसी काम से शहर से बाहर गये है....''

विक्की ने जो प्लान बना रखा था उसमे मंजू तो शामिल थी ही नही...
पर चतुर लोगो की यही तो पहचान होती है, हालात के अनुसार वो अपना प्लान बदल भी देते है...

विक्की ने जल्द से दूसरा प्लान बनाया और बोला : "चलो , ये तो अच्छा है, यानी मंजू भी आज हमारे साथ शूटिंग के लिए चल सकती है....''

शूटिंग वर्ड ही ऐसा था की नेहा के चेहरे का नूर एकदम से बढ़ गया....
मंजू भी हैरानी भारी नज़रों से उन दोनो को देख रही थी की मुझे भी तो बताओ, आख़िर ये चक्कर क्या है शूटिंग का...

मंजू के चेहरे के भाव देखकर नेहा ने जल्दी से उसे कल रात का सारा किस्सा सुना डाला...
ये भी बताया की उसने भी फोटो खिंचवाई थी...और विक्की की फोटो खींची भी थी...

ये सुनकर उसके अंदर की कुलबुलाहट भी सॉफ दिखाई देने लग गयी....
अपनी फोटो खिंचवाना भला किस लड़की को पसंद नही होता और वो भी DSLR कैमरे से...

इसलिए उसने तुरंत साथ चलने के लिए हाँ कर दी....
भला वो ऐसी शूटिंग कैसे मिस कर दे...

विक्की का पहले तो प्लान यही था की मंजू को उसके घर छोड़कर नेहा के साथ दूर किसी खेत या ऐसी जगह पर जाकर पिक्स खींचे जहा फोटो अच्छी आए और उन्हें देखने वाला भी कोई ना हो ताकि वो उसके रसीले जिस्म का आनंद सही से ले पाए, पर मंजू के आ जाने के बाद प्लान में थोड़ा बहुत बदलाव करना पड़ा था, जो विक्की के लिए बहुत आसान सा था, और मंजू के आ जाने के बाद तो प्लान और भी अच्छा बना लिया था उसने...

वो उन दोनो को लेकर अपने शहर की बाउन्ड्री पर बने एक पुराने से किले पर ले आया...
वहाँ अक्सर शाम के समय युगल प्रेमी प्रेमिका आकर चूमा चाटी किया करते थे, पर इस वक़्त दिन का समय था इसलिए वहां तो कुत्ता भी नही भोंक रहा था...
एकदम सुनसान जगह थी वो, उनकी शूटिंग के लिए..
और बाकी सब काम के लिए भी.

दोनो सहेलियां शूटिंग के नाम से इतनी एक्साईटिड थी की उन्होने इतनी दूर आने का और ऐसी जगह पर फोटो खिंचवाने का विरोध भी नही किया...

अंदर जाते ही विक्की ने कैमरा निकालकर नेहा को दिया जो बड़ी शान से उसके फंक्शंस का इस्तेमाल करते हुए अपने भाई की फोटो खींचने लगी..

मंजू : "मैं तैयार हूँ ....''

इतना कहने के साथ ही उसने अपनी शर्ट के बटन खोले और उसे निकालकर ज़मीन पर फेंक दिया...
अब वो टॉपलेस होकर उन भाई बहन के सामने खड़ी थी.

विक्की ने तो सोचा भी नही था की आज के दिन उपर वाला उसपर इतना मेहरबान होने वाला है....

अब तो वो इस पल को एक अच्छे दिन में बदलने के बारे में सोचने लगा..

************
अब आगे
************

दिन तो विक्की का अच्छा हो ही चुका था....
नेहा के बाद अब मंजू के बूब्स को नंगा देख पाना उसके लिए किसी सपने से कम नही था...

मंजू जिस अंदाज से विक्की के सामने अर्धनग्न खड़ी थी उसे देखकर एक बात तो सॉफ थी की वो सिर्फ़ एक फोटो के लिए नही बल्कि विक्की के लिए ये सब कर रही है...
उसकी आँखो में एक अजीब सी चाहत थी, जो वो चाहती थी की विक्की नोट करे...
पर विक्की की नज़रें तो उसकी दोनो आँखों से ज़्यादा उसके नन्हे और तंदुरुस्त मुम्मों पर थी...

एकदम मस्त आकार था उनका...
नेहा से थोड़े बड़े थे उसके बूब्स इसलिए ज़्यादा ही मनमोहक लग रहे थे...
जैसे नारियल के दो टुकड़े करके चिपका दिए हो उसकी छाती से...
एकदम कठोर,
तने हुए...
और उनपर लगे नन्हे लाल रंग के निप्पल्स....
उफफफ्फ़....
मन तो उसका कर रहा था की आगे बढ़कर उन्हे दबोच ले अपने मुँह में और देखे की उनमें से से कितना रस निकलता है बाहर....
ऐसे नारियल पानी को पीकर उसकी आत्मा अंदर तक तृप्त हो जानी थी.

और उधर नेहा भी हैरान परेशान सी अपनी सहेली के इस अवतार को देख रही थी की कितनी बेशर्मी से उसने अपने कपड़े उतार दिए थे उसके भाई के सामने...
आज तक उसके सामने भी कपड़े बदलते हुए वो घूम जाया करती थी, पर आज देखो तो कैसे उसी के भाई के सामने छाती उभार-2 कर दिखा रही है...

माना की उसके मुम्मे थोड़े बड़े है उसके मुक़ाबले पर इसका मतलब ये नही की वो उसके भाई पर डोरे डालेगी...
उसपर तो पहला हक उसका ही बनता है ना...

पता नही क्या-2 सोचने लग गयी वो...
और इसी बीच उसे विक्की की आवाज़ सुनाई दी...

विक्की : "नेहा...ओ नेहा....कहां खो गयी.....अपनी टी शर्ट उतारो, मंजू नंगी ही खड़ी है, उसे पहननी है ताकि वो फोटो खिंचवा सके....उतारो जल्दी से...''

विक्की की बात सुनकर पता नही कैसा ताव सा आया नेहा को की उसने एक ही झटके में अपनी टी शर्ट उतार दी और विक्की की तरफ मुँह करके खड़ी हो गयी....
बाद में उसने अपनी छाती को ढकने की या अपनी स्कूल की शर्ट पहनने की भी जहमत नही उठाई..

कुछ देर तक और फोटो खिंचवाने के बाद वो तीनो वापिस घर की तरफ चल दिए...

आज वो जिस तरफ निकल कर आए थे, वाहा से वापिस जाते हुए पहले विक्की का ही घर आता था, इसलिए नेहा को घर पर छोड़कर वो मंजू को उसके घर छोड़ने के लिए निकल पड़ा..

और आज उसके घर पर उसके मा बाप तो थे नही, इसलिए इस गोलडेन पल को वो अपने हाथो से जाने नही दे सकता था...आज के दिन मंजू ने जो उसके लॅंड का बुरा हाल किया था, उसे शांत करना तो बनता ही था

**************
अब आगे
*************

नेहा के बाइक से उतरते ही मंजू ने विक्की को अपनी बाहों में जकड़ लिया और अपना सिर उसके कंधे पर रखकर सामने देखने लगी...

दोनो के गाल आपस में रगड़ खा रहे थे..

बात करते हुए विक्की जान बूझकर उसकी तरफ घूम रहा था ताकि उसके नर्म गालों पर अपने होंठ लगा सके..
मंजू भी मंद-2 मुस्कुरा कर उसका साथ दे रही थी...

एक दो बार तो उसने भी उसके चेहरे की तरफ देखते हुए कुछ बोला और अपने होंठो से उसके गालो को छू लिया...
विक्की का लंड किसी दोनाली बंदूक की तरह उसकी पेंट में खड़ा था, कोई सामने से देख ले तो सॉफ पता चल जाए की तमंचा पूरी तरह से लोडेड था उसका..

कुछ देर आगे जाने के बाद विक्की ने कुछ पूछा मंजू से.....
और जैसे ही उसने विक्की की तरफ मुँह करके कुछ बोलते हुए उसके गालों से अपने होंठ लगाए, विक्की ने भी अपना सिर घुमा कर उसकी तरफ कर लिया....

बिजली सी कड़क गयी जब विक्की के होंठो से मंजू के नर्म होंठ छुए तो...

विक्की ने भी अपनी हरामीपंति दिखाते हुए उसके होंठो को धीरे से चूस लिया, मंजू की आँखों में शर्म के भाव तैर गये और उसने नज़रें झुका ली...पर उसने अपनी किस्स नहीं तोड़ी

बाइक चल रही थी इसलिए उसपर ज़्यादा देर तक ये चुम्मेबाजी वाला करतब हो नही सकता था, वरना विक्की उस नन्ही सी किस्स को एक लंबे स्मूच में बदलने में कोई कसर ना छोड़ता...

कुछ देर में ही उसका घर आ गया...
मंजू नज़रें झुका कर उसकी बाइक से उतरी और अपने बेग से चाबी निकाल कर ताला खोलने लगी...
अंदर जाकर वो धीरे से पलटी और बोली : "अंदर आ जाओ ना विक्की भैय्या ...चाय पीकर चले जाना...''

विक्की तो इसी पल की प्रतीक्षा कर रहा था...

उसने तुरंत बाइक को साइड में खड़ा किया और लगभग उछलता हुआ सा उसके घर के अंदर आ गया, मंजू ने पीछे से दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और अपनी नशीली आँखो से मुस्कुराते हुए वो अंदर की तरफ आ गयी.

विक्की सोफे पर जाकर बैठ गया और मंजू उसके लिए किचन से पानी लेकर आई, जैसे ही वो जाने लगी तो विक्की ने उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच लिया और वो लड़खड़ा कर उसकी गोद में आ गिरी.
विक्की का लंड तो पहले से ही खड़ा था, उसके खड़े लंड पर उसके नर्म कूल्हे जब टकराए तो उसके मुँह से मज़े के साथ-2 एक दर्द भरी आह भी निकल गयी, पीछे से जवानी थोड़ी भारी थी उसकी..

मंजू : "ओह्ह्ह ....सॉरी विक्की भैय्या ....आपको लगी तो नही ना...''

विक्की ने बड़ी मुश्किल से अपने लंड से निकल रही दर्द की लहर पर काबू पाया और बोला : "इतना भार जब एक ही झटके से मेरे उपर गिरेगा तो दर्द तो होगा ही ना...''

मंजू ने नकली गुस्सा दिखाते हुए कहा : "ओोहो ...तो अब मैं मोटी हो गयी हूँ ...अभी कुछ देर पहले तो मुझे बोल रहे थे की अच्छी मॉडेल बन सकती हूँ ...और अब एकदम से मोटी बोल दिया....जाओ मैं आपसे बात नही करती...''

वो झूठमूठ का मुँह फूला कर दूसरी तरफ सिर घुमा कर बैठ गयी...
पर उसकी गोद से उतरने की जहमत नही उठाई उसने.

विक्की ने उसकी कमर को पकड़ कर उसके चूतड़ों को अपने लंड के चारों तरफ एडजुस्ट किया, अब उसका खड़ा हुआ लंड उसके चूतड़ों की दरार में फंसकर आगे की तरफ मुँह निकाल कर मंजू की चूत को टच कर रहा था..

विक्की ने उसकी कमर मे हाथ डालकर उसकी पीठ को अपनी छाती से सटा लिया और उसके गुदाज और नर्म पेट को सहलाते हुए बोला : "अर्रे...मैं तुझे उस तरह से मोटी थोड़े ही बोल रहा हूँ , वो तो बस कुछ-2 जगह ऐसी होती है ना लड़कियों के शरीर की, जहाँ चर्बी थोड़ी ज़्यादा होती है, वो हिस्सा जब हमारे अंग पर तरबूज की तरह से गिरे तो दर्द तो होगा ही ना....''

विक्की की सफाई सुनकर मंजू अपनी हँसी ना रोक पाई और ज़ोर-2 से हँसने लगी...
हंसते हुए उसकी नर्म गांड विक्की के लंड पर किसी वाईब्रेटर की तरह घिसाई कर रही थी जिसकी वजह से उसका लंड और भी ज़्यादा कड़क होने लगा..

पर उस बुद्धू मंजू को शायद अभी तक उस चीज़ का एहसास नही हो पाया था.

कुछ देर बाद जब उसकी मैराथॉन वाली हँसी रुकी तो वो बोली : "अच्छा ...तो आप मुझे बताओ, इस तरबूज के अलावा और कौन सी जगह पर एक्सट्रा चर्बी है मेरे....''

Categories Hindi
More stories See all