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Tina Aunty Bani Meri Personal Raand – Part 2

Story Hindi 3 pages 15 years ago

Tina Aunty Bani Meri Personal Raand – Part 2
Desi Chudai
नमस्कार दोस्तों। मैं देव कुमार जयपुर से आपके लिए टीना भाभी बनी मेरी रांड का आगे का भाग लेकर आया हूँ। पिछले पार्ट को पढ़कर बहुत लण्ड धारी और चुत की देवियो के मेल आये। मैं सभी का खड़े लण्ड से आभार व्यक्त करता हूँ आपके इस प्यार के लिए। आगे का भाग भी आप लोग पढ़िए और मुझे मेल के जरिये अपना मत राय दे। जिन लोगो ने इस कहानी का पिछला पार्ट नहीं पढ़ा पहले वो पढ़े और कहानी को पढ़कर लण्ड हिलाये चुत चोदे और चुत वाली चुत चुदाई करवाए और चुत चोदने वाला नहीं है तो मुझे मेल कर मुझे बुलाये। थोड़ी देर टीना ऑन्टी के होठो का रसपान करने के बाद मैंने ऑन्टी का गाउन उतार दिया और ऑन्टी की लाल ब्रा को खोल कर साइड में डाल दिया।साली के क्या मखमली मोटे मोटे बोबे थे, देखते ही मुँह में पानी आ गया। मैंने अपने दोनो हाथ टीना ऑन्टी के बूब्स पर रखे और उनके दबाने, मसलने लगा। ऑन्टी-आह आह ऊह,,सी सी, साले भड़वे, मादर चोद, कुत्ते इनको उखाड़ेगा क्या, मुझ रंडी पर नहीं तो इन दूध पर तो रहम कर थोड़ा प्यार से दबा इनको, चूस इनका दूध। मैं- साली छिनाल, कुतिया,तुझे मैं अपनी पर्सनल रांड बनाऊंगा, बोल बनेगी न मेरी कुतिया। और ऑन्टी के मखमली दूध पर मुँह रख कर स्तन चूसने लगा, साथ में स्तन काट भी लेता तो ऑन्टी जोर से सीत्कार मारती। ऑन्टी- आह आह, हरामखोर इतने दिन हो गए तुझे अकेली ऑन्टी का बिलकुल भी ख्याल नहीं आया, मेरे देव राजा, बना ने मुझे अपनी रांड, कुतिया, पर और ज्यादा ना तड़पा, मेरी चूत पानी पानी हो रही है, इसको इसका औजार दे दे। मेरी भोसड़ी में तेरा लण्ड गुस्सा दे। मेरी ऐसी चुदाई कर, ऐसी चुदाई कर की मुझे आगे पीछे तू ही तू दिखे। कभी मुझे मेरे पति की याद ना आये। दोस्तों माहौल पूरा का पूरा सेक्स और कामुकता में गमगीन हो रहा था। ऑन्टी इतनी गालिया दे रही थी की मैं खुद अफ़सोस कर रहा था की क्या कोई औरत ऐसे भी गालिया दे सकती है,चुदाई की आग इतनी जोशीली, होती है। मैं भी ऑन्टी को जैसे मुँह में आये गालिया दे रहा था। हाँ, दोस्तों ये सच है, और मेरा अनुभव है की अगर आपको चुदाई, सेक्स का पूरा एन्जॉय लेना है तो गालियों का अधिक से अधिक प्रयोग करे, और महिला पार्टनर अगर गालिया अच्छे तरीके से निकाले तो चुदाई का जोश, मजा ओर बढ़ जाता है। ऐसा लगता है की बस मैं और तुम और चुदाई। इस दुनिया से दूर एक अलौकिक आनंद, जन्नत, 2 जिस्म 1 जान। मैं ऑन्टी के स्थनो को चूसता चूमता निचे उनके पेट पर आ गया, पेट पर भी थोड़े हलके दांतो से जगह जगह काटा और चूमा। ऑन्टी की नाभि क्या मस्त गोल, उसपे जैसे ही मैंने अपना मुँह रखा ऑन्टी की साँसे तेज़ हो गयी, सांसो के साथ ऑन्टी का पेट अंदर बाहर हो रहा था, साथ ही आंटी और उत्तेजित होती जा रही थी।

नाभि से निचे पेट को चूमता हुआ और निचे, ह ह ह झुमरी तलैया लाल रंग की कच्छी, टीना ऑन्टी के चुत रस से पूरी भीगी हुयी, लग रहा था जैसे ऑन्टी ने कच्छी में मूत दिया हो। मै अपने घुटनो पर बैठ कर ऑन्टी की चुत पर पैंटी के ऊपर से ही मुँह रख कर सूंघने लगा, क्या खुशबु थी टीना ऑन्टी के चुत रस की, कच्छी पर मैंने अपना मुँह रगड़ कर चुत रस में पूरागिला कर लिया मानो गर्मी में अपना मुँह धो लिया। एक अजीब सा अहसास, ऑन्टी की चुत को कच्छी के ऊपर से कच्छी सहित चूसने लगा, क्या नमकीन स्वाद था ऑन्टी के चुत रस का।जीभ से चाटा तो क्या नमकीन स्वाद था, आहा। मैंने ऑन्टी की चुत को अपने मुँह में भर कर जोर से दबाने लगा, काटने लगा। आंटी सीत्कार भरने लगी, हवस उबाल लेने लगा। ऑन्टी मेरे बालो को पकड़ कर जोर से मेरा मुँह अपने झुमरी तलैया, भोसड़ी में दबा लिया और जोर जोर से मेरे मुँह पर अपनी चुत को पटकने लगी। ऑन्टी- आह, आह इ इ, खा जा रे भोसड़ी को, खा जा इस भोसड़ी को। काट इसको बड़ा सताती है साली, निगोड़ी, मैं भी पुरे जोश में ऑन्टी की चुत को पैंटी के ऊपर से ही चूमता और काटता गया। 4-5 मिनट में ही चुत का पानी और निकल गया और ऐसा निकला जैसे मूत की धार। मैं पूरा रस चूस, पि गया। ऑन्टी भी हाफ्ते हुए जोर जोर से साँसे लेते हुए वही निचे कारपेट पर लेट गयी। मैं भी ऑन्टी के बाजू मैं लेट गया। 5 मिनिट ऐसे ही पड़े रहने के बाद में उठा अपने सारे कपडे उतारे और ऑन्टी के पैरो के बिच में आ गया। मैंने ऑन्टी की झुमरी तलैया, जन्नत के द्वार के ऊपर की कच्छी को अपने मुँह से पकड़ा और निचे खींचते हुए ऑन्टी को भी पूरा नंगा कर दिया। मैंने ऑन्टी की चुत रस से गीली पैंटी को ऑन्टी के मुँह में दे दिया। ऑन्टी उसे बड़े प्यार से मुँह में लेकर चूसने लगी। मैं ऑन्टी के पैरो की अंगुलियों और अंगूठे को चूमता हुआ, उनके पैरो से घुटने, घुटने से ऑन्टी की मदमस्त जांगे, जांघो से जन्नत के द्वार, ऑन्टी की नंगी, कच्छी के ऊपर से काटने और चूमने से लाल हुयी, लण्ड लेने को तरसती हुयी, आग की भट्टी, गोल्डन रस मूत का द्वार, ऑन्टी की चिकनी चुत पर अपना मुँह रखा और चुत के दोने को चूमने, चूसने लगा साथ ही साथ चुत को अपनी जीभ से चोदने लगा। साथ ही मैंने ऑन्टी के पैर ऊपर उठा कर फैला दिया और ऑन्टी की गांड के छेद पर जीभ रखकर चाटते हुए चुत तक आता और चुत से गांड तक। मरे इस हरकत से ऑन्टी बहुत उत्तेजित हो गयी और सिसकारी लेते हुए हाफने लगी साथ ही कहने लगी। ऑन्टी- आह इ इ इ इ, मुझे और न तड़पा मादर चोद, अपना लोडा अब तो ठोक दे मेरी भोसड़ी में, बना ले इसे अपने लोडे की गुलाम, मुझे ऐसे ही बिना लण्ड दिए शांत करेगा क्या।। मैं- साली छिनाल तेरी इस चुत में बहुत गर्मी है, इसे और तड़पने दे, लोहा जितना गरम होता है ठोकने में उतना ही ज्यादा मजा आता है मेरी रानी।

और मैं जोर से चाटते हुए चुत की फांको को फैला कर बहुत तेजी से चुत के दाने को जीभ से चाटने लगा। ऑन्टी मेरे बल पकड़ कर खींचने लगी, अपने पैर पटकने लगी। और चिल्लाने लगी, बहन चोद अब क्या जानलेकर रहेगा चोद दे, फाड़ दे मेरी चुत, लोडा ठोक इसमें, अपनी कुतिया रांड पर लोडे की दया कर मेरे देव राजा, मेरे मालिक। मैं अब समझ गया की ऑन्टी अब पुरे चुदाई के जोश में है मैंने ऑन्टी की गांड के निचे 1 सोफे पर से तकिया रखा और दोनों पैरो को ऊपर उठाकर अपने कंधे पर रखा। इस अवस्था में ऑन्टी की चुत बिलकुल लोडे के निशाने पर थी। मैंने चुत पर अपना 6 इंची लोडा रखकर थोड़ा चुत पर रगड़ा और एक ही झटके में पूरा का पूरा ऑन्टी की भोसड़ी में ठोक दिया। साली रांड के मुँह से क्या चीख निकली और आंखो से आंसू, पर बहन की लोड़ी, अपनी चुत की चुदाई की आग में सब कुछ सहन करते हुए बोली। ऑन्टी- आ आ आ, मादर चोद, भड़वे, बहन के लोडे ठोक मेरी चुत को, निचोड़ के रख दे इसको, आ आ आ इ इ इ इ, मुझे रंडी बना, मैं आज से तेरी पर्सनल रांड हूँ, तू जो कहे वो मैं करुँगी, इस घर का, इस घर में रहने वाली मैं टीना रांड का आज से तू मालिक है,चोद, चोद, ठोक, इ इ इ इ आ आ आ आ आ आ। टीना ऑन्टी की आ ओ इ इ के साथ इस भाग में इतना ही। आगे की चुदाई का मजा लेने के लिए इन्तजार कीजिये मेरे अगले भाग का। तब तक आप सब भी चुदाई का आनंद लीजिये। आप लोगो के सुझाव, मत,राय के लिए आप मुझे मेल जरूर करे और बताये की मैं आप लोगो के लिए कहानी को ओर रोमांटिक, ओर कामुक कर सकू। अगर कोई ऑन्टी, भाभी, या कोई लड़की मुझसे मिलना चाहती हो तो वो भी मेल अवश्य करे। आपकी सेवा में हमेशा हाजिर आपका अपना देव कुमार। [email protected]

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